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सोशल मीडिया पर सिर्फ़ बुली या गैर-पेशेवर शब्द इस्तेमाल करना मानहानि नहीं: दिल्ली कोर्ट
सोशल मीडिया पर सिर्फ़ 'बुली' या 'गैर-पेशेवर' शब्द इस्तेमाल करना मानहानि नहीं: दिल्ली कोर्ट

दिल्ली कोर्ट ने हाल ही में कहा कि सोशल मीडिया पर सिर्फ़ "बुली" या "गैर-पेशेवर" जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना मानहानि नहीं है, और न ही इनमें मानहानि करने की कोई संभावना है।तीस हज़ारी कोर्ट के ज़िला जज अरविंद बंसल ने कहा,"कोर्ट मानहानि कानून की आड़ में सोशल मीडिया पर की गई आलोचना की उचित बातों को खारिज नहीं कर सकती।" जज ने ये बातें तब कहीं जब वे एक कारोबारी विदुर कनोडिया द्वारा सोशल मीडिया प्रोफेशनल लक्षिता जैन के खिलाफ दायर सिविल मानहानि के मुकदमे को खारिज कर रहे थे। जैन ने इंस्टाग्राम पर...

आत्महत्या सभ्य दुनिया की समस्या, जो तनाव और सामाजिक दबाव से पैदा होती है: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में व्यक्ति को दोषी ठहराया
आत्महत्या सभ्य दुनिया की समस्या, जो तनाव और सामाजिक दबाव से पैदा होती है: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में व्यक्ति को दोषी ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आत्महत्या तेज़ी से "सभ्य दुनिया की एक समस्या" बनती जा रही है, जो अक्सर तनाव, सामाजिक दबाव और सहयोग प्रणालियों के टूटने के कारण होती है। कोर्ट ने यह टिप्पणी अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए की।जस्टिस विमल कुमार यादव ने ये टिप्पणियां पति द्वारा दायर अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कीं। उन्होंने पति की सज़ा को IPC की धारा 304B (दहेज मृत्यु) से बदलकर IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत कर दिया, जबकि IPC...

ID Act के तहत उद्योग की परिभाषा से दान और पेशे को बाहर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा जयसिंह की दलील
ID Act के तहत 'उद्योग' की परिभाषा से दान और पेशे को बाहर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा जयसिंह की दलील

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा (1978) में तत्कालीन जस्टिस वी. के. कृष्णा अय्यर द्वारा दी गई "उद्योग" की विस्तृत परिभाषा के संबंध में एक संदर्भ पर सुनवाई जारी रखी।सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह (1978 के फैसले का समर्थन करते हुए) ने प्रस्तुत किया कि अब निरस्त औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 रोजगार की सुरक्षा के लिए एक लाभकारी कानून था। उन्होंने कहा कि यह एक पूर्व-संवैधानिक कानून था जिसे इंग्लैंड में हो रहे औद्योगिक विकास की पृष्ठभूमि में तैयार...

ED को राज्य सरकार के खिलाफ रिट याचिका दायर करने की अनुमति देना संघवाद के लिए खतरनाक: पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
ED को राज्य सरकार के खिलाफ रिट याचिका दायर करने की अनुमति देना संघवाद के लिए खतरनाक: पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

पश्चिम बंगाल राज्य ने बुधवार को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका की स्वीकार्यता का विरोध किया। राज्य ने तर्क दिया कि एजेंसी के पास किसी राज्य के खिलाफ मौलिक अधिकारों के क्षेत्राधिकार का उपयोग करने के लिए आवश्यक कानूनी व्यक्तित्व का अभाव है।राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने तर्क दिया कि ED के पास कोई कानूनी व्यक्तित्व नहीं है, क्योंकि यह केवल एक सरकारी विभाग है। साथ ही किसी केंद्र सरकार के विभाग को राज्य सरकार के खिलाफ रिट...

2 उम्मीदवारों वाला चुनाव रद्द हो जाए तो नए चुनाव की ज़रूरत नहीं, दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाए: सुप्रीम कोर्ट
2 उम्मीदवारों वाला चुनाव रद्द हो जाए तो नए चुनाव की ज़रूरत नहीं, दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां किसी चुनाव में सिर्फ़ दो उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया हो, वहां जीतने वाले उम्मीदवार का चुनाव रद्द होने पर नए चुनाव की ज़रूरत नहीं होती; इसके बजाय, दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को ही विजेता घोषित किया जाना चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने ओडिशा हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया, जिसमें जीतने वाले उम्मीदवार का पंचायत समिति अध्यक्ष के तौर पर चुनाव रद्द होने के बाद नए चुनाव का आदेश दिया गया था।यह विवाद ओडिशा की डेलंग पंचायत समिति के अध्यक्ष पद के लिए 2022...

शादी के ऐसे टूटने (Irretrievable Breakdown) के आधार पर विदेशी तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
'शादी के ऐसे टूटने' (Irretrievable Breakdown) के आधार पर विदेशी तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिका (USA) की किसी अदालत द्वारा शादी के ऐसे टूटने (जिसे ठीक न किया जा सके) के आधार पर दिया गया तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं होगा।ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारतीय क़ानून के तहत शादी के ऐसे टूटने को तलाक़ का आधार नहीं माना जाता है। इस मामले में दोनों पक्षकारों की शादी हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) के तहत हुई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,"...अमेरिकी अदालत ने शादी के ऐसे टूटने के आधार पर तलाक़ का फ़ैसला दिया था। यह आधार HMA के तहत मान्य नहीं है, जो...

BNSS की धारा 173(3) अस्पष्ट और संदिग्ध आरोपों पर FIR के मशीनी रजिस्ट्रेशन के खिलाफ सुरक्षा कवच: सुप्रीम कोर्ट
BNSS की धारा 173(3) अस्पष्ट और संदिग्ध आरोपों पर FIR के मशीनी रजिस्ट्रेशन के खिलाफ सुरक्षा कवच: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 173(3) का उद्देश्य अस्पष्ट, अनुमानित या संदिग्ध आरोपों के आधार पर FIR के मशीनी रजिस्ट्रेशन को रोकना है, भले ही ऐसे आरोपों को संज्ञेय अपराधों के रूप में ही क्यों न पेश किया गया हो।दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) व्यवस्था से हुए विधायी बदलाव को रेखांकित करते हुए कोर्ट ने समझाया कि BNSS की धारा 173(3) अपराधों की कुछ श्रेणियों में FIR के रजिस्ट्रेशन से पहले एक अतिरिक्त प्रक्रियात्मक फिल्टर (छानबीन की प्रक्रिया) लागू करती है।यह...

जालसाजी के मामले में FIR रद्द करना, जब हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय बाकी हो, गलत: सुप्रीम कोर्ट
जालसाजी के मामले में FIR रद्द करना, जब हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय बाकी हो, गलत: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया। इस फैसले में हाईकोर्ट ने एक FIR रद्द की थी, जिसमें जालसाजी, धोखाधड़ी और संपत्ति के गलत इस्तेमाल की बड़ी साज़िश का आरोप लगाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने जल्दबाजी में काम किया, जबकि जांच - जिसमें विवादित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी शामिल थी - अभी भी चल रही थी।शिकायतकर्ता शरला बाज़लील और हिमाचल प्रदेश राज्य द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने FIR को बहाल किया और जांच...

दिल्ली हाईकोर्ट ने आठ हफ़्तों के अंदर सभी ज़िला उपभोक्ता आयोगों में हाइब्रिड सुनवाई की सुविधा शुरू करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने आठ हफ़्तों के अंदर सभी ज़िला उपभोक्ता आयोगों में हाइब्रिड सुनवाई की सुविधा शुरू करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि राष्ट्रीय राजधानी के सभी ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों में हाइब्रिड सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा आठ हफ़्तों के भीतर चालू हो जाए।चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीज़न बेंच ने यह भी आदेश दिया कि सभी दस ज़िला आयोगों द्वारा प्रकाशित दैनिक कॉज़ लिस्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का लिंक दिया जाना चाहिए।कोर्ट वकील एस.बी. त्रिपाठी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर...

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नवोदय विद्यालयों में एडमिशन में EWS कोटे को शामिल न करने की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नवोदय विद्यालयों में एडमिशन में EWS कोटे को शामिल न करने की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। इस याचिका में दावा किया गया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों में एडमिशन की प्रक्रिया से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों के लिए कोटे को बाहर रखा गया।जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने यह टिप्पणी की:"श्री एस. एम. गुरु, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, प्रतिवादियों की ओर से अग्रिम सूचना पर पेश हुए। याचिका की एक प्रति, साथ में संलग्न दस्तावेजों के साथ, उन्हें दी जाए ताकि वे निर्देश प्राप्त कर सकें और याचिका पर अपना जवाब दाखिल...

उत्तम नगर होली झड़प: हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ईद से पहले सांप्रदायिक हिंसा रोकने की मांग
उत्तम नगर होली झड़प: हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ईद से पहले सांप्रदायिक हिंसा रोकने की मांग

दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें शहर के उत्तम नगर इलाके में आने वाले ईद त्योहार से पहले सांप्रदायिक हिंसा को रोकने और कथित भड़काऊ भाषणों की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए तत्काल दखल की मांग की गई। यह याचिका होली के दिन हुई एक झड़प में 26 साल के एक युवक की हत्या के बाद दायर की गई।यह याचिका 'एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स' (APCR) ने दायर की। इसमें राज्य और पुलिस अधिकारियों को तत्काल निर्देश देने की मांग की गई, क्योंकि उन पर बढ़ते सांप्रदायिक तनाव के खिलाफ कार्रवाई...

चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को राहत, हाईकोर्ट ने कहा- एक्टर को अभी नहीं भेजा जाएगा जेल
चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को राहत, हाईकोर्ट ने कहा- एक्टर को अभी नहीं भेजा जाएगा जेल

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह बॉलीवुड एक्टर राजपाल नौरंग यादव को अभी जेल नहीं भेजेगा, क्योंकि उन्होंने अपने खिलाफ चेक बाउंस मामलों में शिकायतकर्ता को काफी बड़ी रकम का पेमेंट कर दिया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने एक्टर के वकील से उन याचिकाओं पर अपनी बात रखने को कहा, जो उन्होंने इन मामलों में अपनी सज़ा को चुनौती देते हुए दायर कीं।यह मामला बुधवार को सुनवाई के लिए तब लिस्ट किया गया, जब 16 फरवरी को कोर्ट द्वारा यादव की सज़ा पर दी गई अंतरिम रोक की मियाद खत्म हो गई थी।शुरुआत में यादव की तरफ से...

अनुच्छेद 25 पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, निजी जगहों पर प्रार्थनाओं पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अनुच्छेद 25 पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, निजी जगहों पर प्रार्थनाओं पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 देश में हर धार्मिक संप्रदाय को पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, लेकिन यह प्रार्थना की आड़ में एक धर्म द्वारा दूसरे धर्म को उकसाने को कोई सुरक्षा नहीं देता।साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी व्यक्ति की निजी जगह पर की जाने वाली प्रार्थनाओं या धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर कोई रुकावट या रोक नहीं हो सकती, चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय का हो।ये टिप्पणियां जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच...

हाईकोर्ट का निर्देश- रोड डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई करे इंदौर नगर निगम
हाईकोर्ट का निर्देश- रोड डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई करे इंदौर नगर निगम

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरिम उपाय के तौर पर मंगलवार (17 मार्च) को इंदौर नगर निगम को शहर में रोड डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।कोर्ट होर्डिंग्स के अवैध रूप से लगाए जाने को लेकर चिंता जताने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था।PIL पर नोटिस जारी करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"नोटिस चार हफ़्तों के भीतर जवाब देने योग्य बनाया जाए। एक अंतरिम उपाय के तौर पर यह निर्देश दिया जाता है कि...

फैमिली कोर्ट मुबारत के ज़रिए आपसी तलाक़ की घोषणा के लिए मुस्लिम जोड़े की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए अधिकृत: गुजरात हाईकोर्ट ने फिर की पुष्टि
फैमिली कोर्ट 'मुबारत' के ज़रिए आपसी तलाक़ की घोषणा के लिए मुस्लिम जोड़े की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए अधिकृत: गुजरात हाईकोर्ट ने फिर की पुष्टि

गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि फैमिली कोर्ट आपसी सहमति से तलाक़ के आधार पर शादी को खत्म करने की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए सक्षम और अधिकृत है। इस आपसी सहमति को मुस्लिम जोड़ों के बीच हुए 'मुबारत' समझौते के रूप में भी जाना जाता है।जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस निशा एम. ठाकोर की खंडपीठ ने 'आसिफ़ दाऊदभाई करवा और अन्य बनाम कोई नहीं (2025)' मामले में हाईकोर्ट के फ़ैसले का हवाला दिया और कहा कि कोर्ट ने समझौते के ज़रिए मुस्लिम शादी को खत्म करने के मामले पर विस्तार से विचार किया था।2025 के फ़ैसले का...