सभी हाईकोर्ट समान, मामलों को एक ही हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की प्रथा को प्रोत्साहन नहीं दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
17 Feb 2026 3:53 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौखिक रूप से कहा कि वह विभिन्न हाईकोर्टों में लंबित याचिकाओं को एक ही हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की प्रथा को प्रोत्साहित नहीं कर सकता।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ टर्फ क्लबों द्वारा दायर ट्रांसफर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें घुड़दौड़ पर लगाए गए जीएसटी के खिलाफ विभिन्न हाईकोर्टों में लंबित याचिकाओं को किसी एक हाईकोर्ट में समेकित करने का अनुरोध किया गया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अरविंद पी. दातार ने दलील दी कि जीएसटी कानून में संशोधन कर घुड़दौड़ और 'एक्शनएबल क्लेम' की आपूर्ति करने वालों को कर के दायरे में लाया गया है, जिसके चलते विभिन्न हाईकोर्टों में इस कर की वैधता को चुनौती दी गई है। उन्होंने अनुरोध किया कि सभी मामलों को एक ही हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाए ताकि एकरूपता बनी रहे।
हालांकि, खंडपीठ ने इस अनुरोध पर असहमति जताई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसा करने से “फोरम शॉपिंग” जैसी कुप्रथाओं को बढ़ावा मिल सकता है और वकीलों की सुविधा स्थानांतरण का आधार नहीं हो सकती, खासकर जब वर्चुअल सुनवाई की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विभिन्न हाईकोर्ट अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं तो इसमें कोई समस्या नहीं है, क्योंकि अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही किया जाएगा।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी हाईकोर्ट समान हैं और किसी एक को विशेष महत्व देना उचित नहीं होगा। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि कुछ हाईकोर्ट “मिनी सुप्रीम कोर्ट” नहीं बन सकते, जबकि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि हाईकोर्टों में ऐसे मामलों का निर्णय करने के लिए पर्याप्त क्षमता है। पीठ के रुख को देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने अपनी ट्रांसफर याचिका वापस ले ली और स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य फोरम शॉपिंग नहीं था।

