2018 पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव बाद हिंसा: आत्महत्या द्वारा फांसी का क्लासिक मामला- सुप्रीम कोर्ट
Amir Ahmad
17 Feb 2026 4:59 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के पश्चिम बंगाल पंचायत चुनावों के बाद कथित राजनीतिक हत्याओं से जुड़ी एक रिट याचिका पर सुनवाई की।
यह याचिका सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर की गई, जिसमें राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों पर राजनीतिक हत्याओं के आरोप लगाए गए।
याचिकाकर्ता ने मामले की स्वतंत्र जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने की मांग की। न्यायालय ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी।
याचिका में लगाए गए आरोप
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि 2018 पंचायत चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में तीन जघन्य राजनीतिक हत्याएं हुईं। इनमें शक्तिपद सरदार त्रिलोचन महतो और दुलाल कुमार के मामले शामिल थे। पहले दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जबकि दुलाल कुमार का मामला अभी विचाराधीन है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष दलील दी गई कि 32 वर्षीय दुलाल कुमार को कथित रूप से कुछ लोगों ने अगवा किया था। उनके भाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई। अगले दिन उनका शव हाई-टेंशन तार से लटका हुआ पाया गया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी फैसले के अनुसार FIR दर्ज करना अनिवार्य था किंतु राज्य पुलिस ने ऐसा नहीं किया।
बाद में न्यायालय द्वारा नोटिस जारी होने के पश्चात मामले को राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (CID) को सौंपा गया और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि ऐसे कुल 19 राजनीतिक हत्याओं के मामले सामने आए, जिनमें से पांच में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है।
उन्होंने इन मामलों की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी और कहा कि पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए, क्योंकि उन्हें प्रभावशाली व्यक्तियों से धमकियां मिल रही हैं।
हालांकि न्यायालय ने संकेत दिया कि प्रत्येक हत्या या हिंसा की घटना की निगरानी सुप्रीम कोर्ट नहीं कर सकता।
जस्टिस विक्रम नाथ ने मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ता को राहत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अवलोकन किया।
रिपोर्ट देखने के बाद जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि यह आत्महत्या द्वारा फांसी का क्लासिक मामला प्रतीत होता है और यह गला घोंटकर हत्या का मामला नहीं दिखता।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध मेडिकल साक्ष्य को इस चरण में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को अन्य लंबित आवेदनों के साथ की जाएगी।

