अधिक आयु की अभ्यर्थी लंबी पार्ट-टाइम सेवा के आधार पर नियमित नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

17 Feb 2026 3:58 PM IST

  • अधिक आयु की अभ्यर्थी लंबी पार्ट-टाइम सेवा के आधार पर नियमित नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाइकोर्ट ने निर्णय दिया कि जो अभ्यर्थी निर्धारित कट-ऑफ तिथि पर अधिक आयु (ओवरएज) की हो, वह केवल इस आधार पर नियमित पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती कि उसने लंबे समय तक पार्ट-टाइम लाइब्रेरियन के रूप में सेवा दी।

    जस्टिस संजीव नरूला ने दिल्ली सरकार से सहायता प्राप्त एक विद्यालय में लाइब्रेरियन पद की चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।

    याचिकाकर्ता वर्ष 2002 से पार्ट-टाइम लाइब्रेरियन के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने वर्ष 2018 में शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित एक अन्य अभ्यर्थी की नियुक्ति को चुनौती दी।

    उनका तर्क था कि संस्थान से उनका लंबा जुड़ाव उन्हें चयन प्रक्रिया में वरीयता या अतिरिक्त अंक (वेटेज) दिलाने का आधार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चयनित अभ्यर्थी, जो दिव्यांग (PwD) श्रेणी से संबंधित है, को अनारक्षित (UR) पद पर गलत तरीके से नियुक्त किया गया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों में निर्धारित पात्रता शर्तें अनिवार्य होती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता संबंधित कट-ऑफ तिथि पर निर्धारित आयु सीमा से अधिक थीं जो निर्विवाद तथ्य है।

    कोर्ट ने कहा,

    “जब चयन रिकॉर्ड से स्पष्ट रूप से अपात्रता सिद्ध हो जाती है तो अदालत नियोक्ता को अभ्यर्थी को पात्र मानने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष कार्यवाही के कारण साक्षात्कार में भाग लेने की अनुमति मिलना, वैधानिक अपात्रता को दूर नहीं करता। प्रशासनिक स्तर पर दी गई अनुमति भर्ती नियमों में छूट के समान नहीं मानी जा सकती। अतः याचिकाकर्ता की अपात्रता प्रारंभिक स्तर पर ही घातक है।”

    अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति पूरी तरह से पार्ट-टाइम और अस्थायी थी। ऐसी सेवा से नियमित नियुक्ति का कोई निहित अधिकार उत्पन्न नहीं होता।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा निदेशालय की योजना के तहत अनुभव अंक केवल नियमित वेतनमान में की गई सेवा के लिए मान्य हैं।

    कोर्ट ने आगे कहा,

    “न्यायिक समीक्षा के तहत अदालत योजना को पुनर्लेखित नहीं कर सकती और पार्ट-टाइम संविदात्मक सेवा को नियमित सेवा के बराबर नहीं मान सकती।”

    दिव्यांग (PwD) श्रेणी के अभ्यर्थी को अनारक्षित (UR) पद पर नियुक्त करने के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) सभी श्रेणियों पर लागू होता है।

    यदि कोई PwD अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर चयनित होता है तो उसे अनारक्षित पद पर भी नियुक्त किया जा सकता है।

    कोर्ट ने कहा,

    “क्षैतिज आरक्षण ऊर्ध्वाधर श्रेणियों के पार लागू होता है। विज्ञापन में रिक्ति को 'UR' बताने मात्र से यह PwD श्रेणी के लिए क्षैतिज आरक्षित सीट के रूप में कार्य करने से वंचित नहीं होती।”

    इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और रिट याचिका खारिज की।

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