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RTI Act के तहत जानकारी देने में जानबूझकर देरी या बाधा हो तभी लगेगा जुर्माना: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
RTI Act के तहत जानकारी देने में जानबूझकर देरी या बाधा हो तभी लगेगा जुर्माना: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार कानून (RTI Act) को लेकर एक अहम फैसला देते हुए कहा कि केवल देरी या कमी के आधार पर दंड नहीं लगाया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो कि सूचना देने में जानबूझकर बाधा डाली गई या दुर्भावना से देरी की गई तब तक दंड नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि RTI Act, 2005 की धारा 20 के तहत दंड लगाने से पहले आयोग को यह संतोष करना जरूरी है कि संबंधित अधिकारी ने बिना उचित कारण के सूचना देने से इनकार किया, गलत...

आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर दिशानिर्देश की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने निपटाई
आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर दिशानिर्देश की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने निपटाई

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार को पुलिस द्वारा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर आरोपियों की तस्वीरें पोस्ट करने को लेकर दिशानिर्देश बनाने की मांग वाली याचिका का निस्तारण कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाल ही में पीयूसीएल से जुड़े एक मामले में राज्यों को पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग के लिए दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया गया है, जिनमें सोशल मीडिया पोस्टिंग भी शामिल हो सकती है।कोर्ट ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता उन दिशानिर्देशों के तैयार होने का इंतजार करें।...

विकास के लिए मंज़ूर ज़मीन पर बाद में उगने वाले पेड़ उसे डीम्ड फ़ॉरेस्ट नहीं बना देंगे: सुप्रीम कोर्ट
विकास के लिए मंज़ूर ज़मीन पर बाद में उगने वाले पेड़ उसे 'डीम्ड फ़ॉरेस्ट' नहीं बना देंगे: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी नोटिफ़ाइड मास्टर प्लान के तहत विकास के लिए तय की गई ज़मीन को सिर्फ़ बाद में पेड़-पौधे या पेड़ उग जाने की वजह से "डीम्ड फ़ॉरेस्ट" (माना गया जंगल) नहीं माना जा सकता। इसलिए ऐसे बाद में उगे पेड़ों को काटने के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत केंद्र सरकार की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दिल्ली के बिजवासन रेलवे स्टेशन पर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देने वाले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल...

रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार कोर्ट नहीं, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार 'कोर्ट' नहीं, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार 'कोर्ट' नहीं हैं। इसलिए रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाहियों पर लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं होगी।जस्टिस इरशाद अली ने फैसला सुनाया:“रजिस्ट्रार, एडिशनल रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय को 'कोर्ट' नहीं माना जा सकता। तदनुसार, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 में निहित प्रावधान लागू नहीं होगा। लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 स्पष्ट रूप से समय सीमा (Limitation...

सुप्रीम कोर्ट करेगा छत्तीसगढ़ कोर्ट के कर्मचारी की LL.B रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर करने की याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट करेगा छत्तीसगढ़ कोर्ट के कर्मचारी की LL.B रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर करने की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई। उक्त आदेश में कहा गया कि प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशन कोर्ट के एक प्रोबेशनरी कर्मचारी (रेस्पोंडेंट-1) को LL.B कोर्स के तीसरे साल में रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर शामिल होने की इजाज़त देना सर्विस रूल्स के तहत मंज़ूर नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 27 जनवरी के उस आदेश को चुनौती देने वाली स्पेशल लीव पिटीशन पर नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि ऐसी इजाज़त का...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के हत्या के प्रयास के मामले में व्यक्ति की सज़ा बरकरार रखने के लिए पीड़ित पत्नी की गवाही पर भरोसा किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के हत्या के प्रयास के मामले में व्यक्ति की सज़ा बरकरार रखने के लिए पीड़ित पत्नी की गवाही पर भरोसा किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक व्यक्ति की सज़ा और 7 साल की कठोर कारावास बरकरार रखी। इस व्यक्ति ने फ़रवरी 1983 में अपने वैवाहिक घर के अंदर अपनी पत्नी को गोली मार दी थी, क्योंकि मोटरसाइकिल की दहेज की मांग पूरी नहीं हुई।1985 में पति द्वारा दायर की गई आपराधिक अपील खारिज करते हुए कोर्ट ने घायल पत्नी की गवाही पर बहुत ज़्यादा भरोसा किया और उसे एक "बेहतरीन गवाह" बताया, जिसकी गवाही पूरी तरह से भरोसेमंद थी।पति की सज़ा बरकरार रखने वाले अपने 16-पृष्ठ के आदेश में जस्टिस अब्दुल शाहिद की बेंच ने पत्नी की...

CrPC की धारा 482 याचिका NIA कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज से इनकार के खिलाफ स्वीकार्य नहीं, भले ही राज्य पुलिस ने शेड्यूल अपराध की जांच की हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
CrPC की धारा 482 याचिका NIA कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज से इनकार के खिलाफ स्वीकार्य नहीं, भले ही राज्य पुलिस ने शेड्यूल अपराध की जांच की हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) एक्ट के तहत एक स्पेशल कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज से इनकार करने वाले आदेश के खिलाफ CrPC की धारा 482 या BNSS की धारा 528 के तहत दायर याचिका स्वीकार्य नहीं है, भले ही राज्य पुलिस ने शेड्यूल अपराध की जांच की हो।कोर्ट ने माना कि ऐसे आदेशों के खिलाफ उपाय NIA Act, 2008 की धारा 21(1) के तहत एक वैधानिक अपील दायर करना है।इस प्रकार, जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने मोहम्मद फैजान और 2 अन्य द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने स्पेशल जज...

पश्चिमी यूपी में गैंग मौत के बिस्तर पर पड़े लोगों का इंश्योरेंस करवा रहा है, पुलिस सहयोग नहीं कर रही: HDFC Life ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया
पश्चिमी यूपी में 'गैंग' मौत के बिस्तर पर पड़े लोगों का इंश्योरेंस करवा रहा है, पुलिस सहयोग नहीं कर रही: HDFC Life ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया

HDFC Life Insurance Company ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक संगठित गैंग काम कर रहा है, जो उन लोगों के लिए जीवन बीमा पॉलिसी हासिल करने में कामयाब हो जाता है, जो पहले से ही मौत के बिस्तर पर पड़े हैं या जिनकी मौत हो चुकी है।कंपनी ने यह भी बताया कि शिकायतें मिलने के बावजूद, इनमें से ज़्यादातर मामलों में पुलिस निष्पक्ष जांच करके दोषियों को सज़ा दिलाने में सहयोग नहीं करती है।यह बात जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच के सामने रखी गई, जिसने हाल ही में बिचौलियों के ज़रिए...

ग्राम पंचायत से नगर निगम में शामिल किए गए कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार: बॉम्बे हाईकोर्ट
ग्राम पंचायत से नगर निगम में शामिल किए गए कर्मचारियों को 'समान काम के लिए समान वेतन' का अधिकार: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि ग्राम पंचायतों से नगर निगम में शामिल किए गए कर्मचारी, यदि नियमित कर्मचारियों के समान ही काम करते हैं, तो वे वेतन में समानता (बराबरी) के हकदार हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी परिस्थितियों में 'समान काम के लिए समान वेतन' से इनकार करना भेदभाव के समान है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है।जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की डिवीज़न बेंच 28 कर्मचारियों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन कर्मचारियों को मूल रूप से ग्राम...

कथित तौर पर 45 साल पहले हुई बिक्री विलेख के आधार पर म्यूटेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कथित तौर पर 45 साल पहले हुई बिक्री विलेख के आधार पर म्यूटेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भले ही राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन (नाम परिवर्तन) के लिए कोई समय सीमा निर्धारित न हो, लेकिन कथित तौर पर 45 साल पहले हुई किसी बिक्री विलेख (Sale Deed) के आधार पर इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस चंद्र कुमार राय ने टिप्पणी की:"यह बताना महत्वपूर्ण है कि निजी प्रतिवादियों ने 45 साल से भी अधिक समय बाद म्यूटेशन के लिए आवेदन दायर किया। यह आवेदन उस सेल डीड के आधार पर किया गया, जिसके बारे में दावा है कि वह उनके पक्ष में निष्पादित किया गया। इसकी अनुमति नहीं दी जानी...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चे के रेप-मर्डर केस में मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदला, 50 साल की जेल और ₹75 लाख का जुर्माना लगाया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चे के रेप-मर्डर केस में मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदला, 50 साल की जेल और ₹75 लाख का जुर्माना लगाया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि हालांकि POCSO Act और IPC के तहत नाबालिग के रेप और मर्डर का आरोप पूरी तरह से साबित हो गया। फिर भी यह मामला "दुर्लभतम से दुर्लभ" (Rarest of Rare) श्रेणी में नहीं आता, जिसके लिए मौत की सज़ा दी जाए। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी छूट के 50 साल की असल जेल की सज़ा अपराध की गंभीरता और सज़ा तय करने के तय सिद्धांतों के बीच सही संतुलन बनाएगी।जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की एक डिवीज़न बेंच मौत की सज़ा की पुष्टि के लिए आए एक मामले (Death Reference) के...

केवल एक ही वारिस हो और कोई प्रतिस्पर्धी दावा न हो, वहां उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए ज़मानत की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
केवल एक ही वारिस हो और कोई प्रतिस्पर्धी दावा न हो, वहां उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए ज़मानत की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 375 के तहत उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने के लिए ज़मानत की शर्त हर मामले में बिना सोचे-समझे नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में केवल एक ही वारिस हो, या किसी एक वारिस को प्रमाण पत्र जारी करने पर कोई आपत्ति न हो, वहां ऐसी शर्तें नहीं लगाई जानी चाहिए।भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 372 उन आवेदनों के बारे में बताती है, जो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ज़िला जज के समक्ष किए जा सकते हैं।...

साथ न रहने और शारीरिक संबंध न बनने के कारण वैवाहिक संबंध कभी बन ही नहीं पाए: दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक़ के लिए 1 साल की इंतज़ार की अवधि माफ़ की
साथ न रहने और शारीरिक संबंध न बनने के कारण वैवाहिक संबंध 'कभी बन ही नहीं पाए': दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक़ के लिए 1 साल की इंतज़ार की अवधि माफ़ की

दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि जिस शादी में न तो शारीरिक संबंध बने हों और न ही पति-पत्नी साथ रहे हों, उसे किसी भी असली मायने में शादी नहीं कहा जा सकता। ऐसे हालात में तलाक़ के लिए क़ानूनी तौर पर तय इंतज़ार की अवधि पर ज़ोर देने का कोई फ़ायदा नहीं होगा।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच ने कहा,"साथ न रहना और शारीरिक संबंध न बनना, साथ ही शादी के तुरंत बाद ही दोनों पक्षों का अलग हो जाना, यह साफ़ दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक संबंध कभी भी किसी असली मायने में बन ही...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील के दफ़्तर में डिजिटल काम को बेहतर बनाने के लिए टेक-सेवी युवा वकीलों को रखने का सुझाव दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील के दफ़्तर में डिजिटल काम को बेहतर बनाने के लिए टेक-सेवी युवा वकीलों को रखने का सुझाव दिया

डिजिटल काम को बेहतर बनाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार को सरकारी वकील के दफ़्तर और हाईकोर्ट में जॉइंट डायरेक्टर, प्रॉसिक्यूशन के दफ़्तर में टेक-सेवी युवा वकीलों और नए लॉ ग्रेजुएट्स को मानद रिसर्च एसोसिएट के तौर पर रखना चाहिए।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने यह सुझाव दिया। बेंच ने कहा कि सरकारी वकील के दफ़्तर में डिजिटलीकरण के प्रयासों को तेज़ करना और कर्मचारियों की भारी कमी को तुरंत दूर करना समय की ज़रूरत है।कोर्ट असल में एक ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहा...

Bihar Special Courts Act | अवैध संपत्ति वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद भी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रह सकती है: सुप्रीम कोर्ट
Bihar Special Courts Act | अवैध संपत्ति वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद भी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रह सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस सरकारी अधिकारी ने अपनी आय से ज़्यादा संपत्ति जमा की हो, उसकी मौत के बाद भी बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी (जो सरकारी कर्मचारी नहीं है) के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रखी जा सकती है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पटना हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कहा गया कि आरोपी अधिकारी की मौत के बाद बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई खत्म हो गई।हाईकोर्ट की टिप्पणी से असहमति जताते हुए बेंच ने...

यूपी गैंगस्टर एक्ट के गंभीर परिणाम होते हैं, इसलिए प्रक्रिया का सख्ती से पालन अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
यूपी गैंगस्टर एक्ट के गंभीर परिणाम होते हैं, इसलिए प्रक्रिया का सख्ती से पालन अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कथित गैंगस्टर गब्बर सिंह के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने यह फैसला गैंग चार्ट तैयार करने की सिफारिश भेजने की प्रक्रिया में हुई प्रक्रियागत अनियमितताओं का हवाला देते हुए दिया, जिसमें गब्बर सिंह का नाम शामिल है।राज्य सरकार का स्पष्टीकरण खारिज करते हुए कोर्ट ने उस स्थापित सिद्धांत को दोहराया कि जब कोई कानून यह निर्धारित करता है कि कोई काम किसी विशेष तरीके से ही किया जाना चाहिए तो उसे उसी तरीके से...