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'होस्टाइल गवाह की गवाही का इस्तेमाल बरी करने के लिए भी किया जा सकता है, सिर्फ़ दोषी ठहराने के लिए नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की सज़ा रद्द की
यह देखते हुए कि होस्टाइल गवाहों के सबूतों का इस्तेमाल न सिर्फ़ दोषी ठहराने के लिए, बल्कि अभियोजन पक्ष के मामले को कमज़ोर करने और बरी करने में मदद के लिए भी किया जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मई) को SC/ST श्रेणी के एक व्यक्ति की हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को बरी किया।कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के मामले की नींव ही अभियोजन पक्ष के गवाहों ने कमज़ोर कर दी थी, क्योंकि उन्होंने अपराध की जगह के बारे में अभियोजन पक्ष के रुख का समर्थन नहीं किया।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी...
नियमित पद के विज्ञापन के बदले संविदा पर नियुक्ति 'स्पष्ट रूप से अवैध': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मई) को फैसला सुनाया कि नियमित रिक्तियों के लिए जारी विज्ञापन के बदले किसी उम्मीदवार को संविदा के आधार पर नियुक्त करना "स्पष्ट रूप से अवैध और असंवैधानिक" है, खासकर तब जब इस तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए कोई कारण दर्ज न किया गया हो।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने असिस्टेंट प्रोफेसर द्वारा दायर अपील स्वीकार की। इस प्रोफेसर को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद में शिक्षण पदों के लिए नियमित नौकरी के विज्ञापन के बदले संविदा पर...
दिल्ली हाईकोर्ट ने ससुराल वालों के शांतिपूर्ण रहने के अधिकार की रक्षा के लिए बहू को घर से निकालने का फैसला सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत एक बहू और उसके बेटे को ससुराल वालों के घर से निकालने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के तथ्यों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों के शांतिपूर्ण ढंग से रहने के अधिकार को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने एक विधवा और उसके बेटे की तरफ से दायर रिट याचिका खारिज की। इस याचिका में उन्होंने डिविजनल कमिश्नर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें ससुराल वालों की संपत्ति खाली...
'प्रक्रियात्मक कानून के दुरुपयोग का क्लासिक मामला': दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 से ट्रायल में देरी करने पर आरोपी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आरोपी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया, क्योंकि वह 2016 से चल रहे एक आपराधिक ट्रायल को बार-बार रोकने की कोशिश कर रहा था। कोर्ट ने इस मामले को "प्रक्रियात्मक कानून के दुरुपयोग का एक क्लासिक मामला" बताया।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने आरोपी द्वारा दायर याचिका खारिज की। इस याचिका में आरोपी ने ट्रायल कोर्ट और सेशंस कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें जुलाई 2016 में शुरू हुए आपराधिक शिकायत मामले में शिकायतकर्ता से क्रॉस एग्जामिनेशन करने का उसका मौका खत्म कर दिया गया।कोर्ट ने पाया...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में 'लापरवाह जांच' के लिए पुलिस को फटकारा, सबूतों की कमी के कारण ड्राइवर को दी ज़मानत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी, जिस पर एक गाड़ी चलाने का आरोप था, जिससे एक कंस्ट्रक्शन साइट पर 5 मज़दूरों की जान चली गई और 11 घायल हो गए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच "लापरवाह तरीके से" की गई और पहली नज़र में ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला जो उस व्यक्ति को दोषी ठहराता हो।जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर की बेंच ने यह टिप्पणी की:"यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी भयानक घटना में इतनी लापरवाही से जांच की गई। पहली नज़र में केस डायरी में मौजूदा आवेदक के खिलाफ कोई सीधा दोषी ठहराने वाला सबूत नहीं...
पुलिस का काम सिर्फ़ लोगों को 'गिरफ़्तार करके जेल में डाल देना' नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने मुकदमों के दौरान सहयोग की अपील की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को NDPS Act के तहत बुक किए गए एक आरोपी को ज़मानत दी। साथ ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को संभालने के दिल्ली पुलिस के रवैये की कड़ी आलोचना की।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने टिप्पणी की कि बार-बार न्यायिक निर्देश दिए जाने के बावजूद, ज़मानत के मामलों में पुलिस के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ।कोर्ट ने कहा कि पुलिस की भूमिका "सिर्फ़ किसी व्यक्ति को गिरफ़्तार करके जेल में डाल देना नहीं है, बल्कि बिना किसी परवाह के मुकदमा चलाना भी है।"जस्टिस कथपालिया, भलस्वा डेयरी पुलिस...
काले हिरणों की मौत का मामला | ज़मानत खारिज होने के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार्य नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका खारिज की। इस व्यक्ति ने दो काले हिरणों की मौत से जुड़े मामले में अपनी अवैध हिरासत का आरोप लगाया था। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ऐसी याचिका तब स्वीकार्य नहीं है, जब याचिकाकर्ता की ज़मानत अर्जी पहले ही इस कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी हो।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"मौजूदा मामले में भी, जैसा कि ऊपर बताया गया, याचिकाकर्ता की ज़मानत अर्जी (यानी M.Cr.C. No.5598 of...
पत्नी और बेटी पर हथौड़े से हमला करने के बाद पुलिस को फ़ोन करने वाले आदमी की उम्रकैद बरकरार
दिल्ली हाईकोर्ट ने उस आदमी को अपनी पत्नी और टीनएज बेटी की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उसकी उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी। कोर्ट ने इस फ़ैसले के लिए उसकी 'एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल कन्फ़ेशन' (अदालत के बाहर किया गया इक़बालिया बयान), PCR कॉल और अपराध में इस्तेमाल हुए खून से सने हथौड़े की बरामदगी को आधार बनाया।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने विमल सिंह की अपील खारिज की, जो उसने IPC की धारा 302 के तहत 2002 में मिली अपनी सज़ा के खिलाफ दायर की थी।अभियोजन पक्ष के अनुसार, 10-11...
भर्ती के नतीजे घोषित होने के बाद उम्मीदवार आरक्षित उप-श्रेणी नहीं बदल सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्मीदवार की वह याचिका खारिज की, जिसमें उसने भर्ती प्रक्रिया के नतीजे घोषित होने के बाद अपनी जाति की उप-श्रेणी में सुधार की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार आवेदन के समय चुनी गई श्रेणी से बंधे होते हैं और बाद के चरण में इसमें बदलाव की मांग नहीं कर सकते।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"सहानुभूति या निष्पक्षता भर्ती की निर्धारित शर्तों से ऊपर नहीं हो सकती। अगर स्पष्ट रोक वाले नियमों के बावजूद ऐसी मांगों पर विचार किया जाता है तो इससे मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी,...
मजिस्ट्रेट की अनुमति बिना जुआ अधिनियम की धारा 13 में जांच नहीं कर सकती पुलिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने से जुड़ा सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 की धारा 13 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पुलिस मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकती और न ही बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।जस्टिस संजय कुमार पचौरी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मिर्जापुर में दर्ज आपराधिक मामले और उससे जुड़े संज्ञान व समन आदेश रद्द किया।मामला उस FIR से जुड़ा था जिसमें पुलिस ने चार लोगों को ताश के पत्तों और...
पुलिस थानों में CCTV निगरानी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सख्त, कहा- केवल कागजी रिपोर्ट से नहीं चलेगा काम
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV कैमरों की निगरानी और उनके कामकाज को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि निगरानी समितियां यांत्रिक तरीके से काम कर रही हैं जिससे पूरी व्यवस्था का उद्देश्य ही विफल हो रहा है।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने पूछा कि पिछले पांच वर्षों में जिला स्तरीय निगरानी समितियों से मिली रिपोर्टों की वास्तव में कितनी जांच हुई और उनमें कौन-कौन सी कमियां पाई गईं।अदालत ने कहा कि केवल बड़े पैमाने पर...
गिरफ्तारी के सामान्य कारण बताना पर्याप्त नहीं, आरोपी को लिखित गिरफ्तारी के आधार देना जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS Act के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि गिरफ्तारी मेमो में केवल गिरफ्तारी के कारण लिख देना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को उसके खिलाफ व्यक्तिगत और विशिष्ट गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लिखित आधार उपलब्ध न कराना गिरफ्तारी और बाद की रिमांड प्रक्रिया को अवैध बना देता है।अदालत ने कहा,“गिरफ्तारी के आधार बताना कोई तकनीकी औपचारिकता नहीं बल्कि व्यक्तिगत...
अगर अटेंडेंस ज़रूरी नहीं हुई तो लॉ कॉलेज के हॉस्टल सिर्फ़ रहने-खाने की जगह बनकर रह जाएंगे: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले पर अपनी चिंता ज़ाहिर की। उस फ़ैसले में कहा गया था कि लॉ स्टूडेंट्स को सिर्फ़ अटेंडेंस कम होने की वजह से परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो लॉ कॉलेज के हॉस्टल सिर्फ़ रहने-खाने की जगह बनकर रह जाएंगे।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देने वाली, नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ (NMIMS) की एक याचिका पर नोटिस जारी...
Land Acquisition | आवासीय प्लॉट की सेल डीड का उपयोग औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राजमार्ग विस्तार के लिए अधिग्रहित औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए पास के किसी गांव के आवासीय बिक्री विलेख का उपयोग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' की धारा 26(1)(b) के तहत 'समान प्रकार की भूमि' की शर्त अनिवार्य है और भूमि अधिग्रहण मुआवजे को निर्धारित करने के लिए इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की...
6 सेकंड की स्पीड का दावा निकला गलत, Jaguar Land Rover को ग्राहक को लौटाने होंगे ₹1.65 करोड़
उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने Jaguar Land Rover India Ltd. को खराब लग्जरी कार बेचने और भ्रामक विज्ञापन देने का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को ग्राहक को ₹1.65 करोड़ से ज्यादा रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।मामला “Defender 110 X P400” कार से जुड़ा है, जिसे Eapro Global Limited ने 2022 में खरीदा था। शिकायत में कहा गया कि कंपनी ने दावा किया था कि कार 6.1 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेगी, लेकिन असल में कार को 7 सेकंड से ज्यादा समय लगा।इसके अलावा कार में कई तकनीकी खराबियां थीं...
सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक पर रोक की मांग वाली याचिका वापस, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सर रतन टाटा ट्रस्ट की 16 मई को प्रस्तावित महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए निस्तारित किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के आचरण पर कड़ी नाराज़गी जताई और कहा कि मामला चौंकाने वाली स्थिति दर्शाता है।जस्टिस अद्वैत सेठना और जस्टिस संदेश पाटिल की अवकाशकालीन खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता सुरेश पाटिलखेड़े ने अदालत से मांग की थी कि सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक पर रोक लगाई जाए। उनका दावा था कि ट्रस्ट...
उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश: ओन मेरिट सिद्धांत पर AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग पदोन्नति समीक्षा पर लगाई रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग अधिकारियों की वर्ष 2022 और 2023 की पदोन्नति समीक्षा प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई। यह रोक विशेष रूप से ओन मेरिट सिद्धांत के आधार पर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित पदों पर पदोन्नति देने से जुड़े मामले में लगाई गई।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश नर्सिंग अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के 7 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अंतरिम राहत...
यूपी में 'स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन' की ज़मीनों की बिक्री जांच करे SIT: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की देखरेख में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। यह SIT 'स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया' से जुड़ी ज़मीनों की कथित धोखाधड़ी वाली बिक्री की जांच करेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस अंतरिम निर्देश को भी रद्द किया, जिसमें पुलिस को इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने से रोका गया।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने यह माना कि हालांकि कोई भी कोर्ट कार्यवाही के दौरान आरोपी को दंडात्मक कदमों से...
ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन के बिना पब्लिक सर्विस गाड़ियों को कोई फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि किसी भी पब्लिक सर्विस गाड़ी को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं दिया जाएगा, जब तक उसमें व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTDs) और इमरजेंसी पैनिक बटन लगे न हों, उनकी जांच न हो गई हो, और वे 'वाहन' डेटाबेस में दर्ज न हों।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 'एस राजशेखरन बनाम भारत संघ' मामले की सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। यह मामला पूरे देश में सड़क दुर्घटनाओं में...
पेट दर्द की दवा से मां को शराबी नहीं कहा जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पेट दर्द के इलाज से जुड़ी मेडिकल पर्चियों के आधार पर किसी महिला को शराब की आदी या मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे आधार पर मां को उसके बच्चे की अभिरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी करते हुए नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंप दी। अदालत ने कहा कि पांच वर्ष तक की आयु के बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक मां होती है।मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें मां ने आरोप लगाया था कि बच्चे के पिता ने जबरन बच्चे को उससे अलग कर...




















