ताज़ा खबरे
अवैध बर्खास्तगी पर सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये मुआवजा बरकरार, लेकिन पुनर्बहाली से इनकार: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने उत्तर दिल्ली नगर निगम (MCD) और एक सफाई कर्मी द्वारा दायर क्रॉस याचिकाओं को खारिज करते हुए औद्योगिक न्यायाधिकरण का आदेश बरकरार रखा है, जिसमें अवैध रूप से सेवा समाप्त करने के लिए सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।हालांकि, हाइकोर्ट ने कर्मचारी की पुनर्बहाली और पिछला वेतन देने की मांग को स्वीकार नहीं किया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने अपने फैसले में कहा कि सफाई कर्मी की सेवाएं औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25एफ के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना...
अवैध बर्खास्तगी पर सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये मुआवजा बरकरार, लेकिन पुनर्बहाली से इनकार: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने उत्तर दिल्ली नगर निगम (MCD) और एक सफाई कर्मी द्वारा दायर क्रॉस याचिकाओं को खारिज करते हुए औद्योगिक न्यायाधिकरण का आदेश बरकरार रखा है, जिसमें अवैध रूप से सेवा समाप्त करने के लिए सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।हालांकि, हाइकोर्ट ने कर्मचारी की पुनर्बहाली और पिछला वेतन देने की मांग को स्वीकार नहीं किया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने अपने फैसले में कहा कि सफाई कर्मी की सेवाएं औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25एफ के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना...
2000 लाल किला हमला: लश्कर आतंकी की क्यूरेटिव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वर्ष 2000 के लाल किला आतंकी हमले के मामले में मौत की सजा पाए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मोहम्मद आरिफ द्वारा दायर क्यूरेटिव याचिका पर नोटिस जारी किया।यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें उसकी मौत की सजा बरकरार रखते हुए पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई थी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जे.के. महेश्वरी की पीठ ने क्यूरेटिव याचिका पर नोटिस जारी किया।नवंबर, 2022 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो आतंकी...
BCCI को भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधि बताने के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- न्यायिक समय की बर्बादी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को भारत की आधिकारिक राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के प्रतिनिधि के रूप में पेश किए जाने पर रोक लगाने की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने एडवोकेट रीपक कंसल द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए दिल्ली हाइकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पीआईएल पर सुनवाई से इनकार किया गया था।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाया कि क्या...
पुजारी का मंदिर की जमीन पर कोई मालिकाना हक नहीं, प्रतिकूल कब्जे का दावा नहीं कर सकता: गुजरात हाइकोर्ट
गुजरात हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि मंदिर का पुजारी केवल देवता का सेवक होता है। उसे मंदिर या उससे जुड़ी भूमि पर कोई मालिकाना अधिकार प्राप्त नहीं होता।इसी आधार पर हाइकोर्ट ने सार्वजनिक रास्ते पर बने एक गणेश मंदिर को लेकर पुजारी द्वारा किया गया प्रतिकूल कब्जे (एडवर्स पजेशन) का दावा खारिज कर दिया।जस्टिस जे.सी. दोषी इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। विवाद एक सिविल वाद से जुड़ा था, जिसमें वादी महिला ने अपनी संपत्ति से सटे सार्वजनिक रास्ते पर बने गणेश मंदिर को हटाने की मांग की थी।वादी...
भर्ती विज्ञापन में हुई गलती से नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता, जब पद ही उपलब्ध न हो: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक अभ्यर्थी को गलत भर्ती विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था, जबकि संबंधित आरक्षित श्रेणी में कोई वास्तविक रिक्ति ही मौजूद नहीं थी।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने कहा कि भर्ती अधिसूचना में हुई अनजानी गलती से किसी उम्मीदवार को नियुक्ति का स्थायी या वैधानिक अधिकार नहीं मिल सकता, जब वास्तव में कोई स्वीकृत पद उपलब्ध ही न हो।हाइकोर्ट राष्ट्रीय क्षयरोग एवं श्वसन रोग...
POCSO Case : बेटी से रेप करने वाले पिता को कोई नरमी नहीं, दिल्ली हाइकोर्ट ने सजा बरकरार रखी
दिल्ली हाइकोर्ट ने अत्यंत गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अपनी ही बेटी का यौन शोषण करने वाले पिता को POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार की रियायत या नरमी नहीं दी जा सकती।हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा पिता को सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज की।मामलायह फैसला जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने सुनाया। मामला जुलाई 2021 का है, जब छठी कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग बच्ची ने अपने पिता पर सोते समय जबरन शारीरिक...
समय सीमा के बाद संज्ञान लेना गलत; 'सद्भावनापूर्ण चूक' और 'सामान्य चलन' मजिस्ट्रेट के लिए कोई बहाना नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को चोरी के एक मामले में आपराधिक कार्यवाही रद्द की, जिसमें मजिस्ट्रेट ने CrPC की धारा 468 [समय सीमा समाप्त होने के बाद संज्ञान लेने पर रोक] के तहत तय अनिवार्य अवधि के बाद संज्ञान लिया था।कोर्ट ने फिरोजाबाद के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई सफाई पर कड़ी आपत्ति जताई, जिन्होंने कहा कि सभी मजिस्ट्रेट अदालतों में प्रचलित सामान्य चलन के अनुसार, संज्ञान लेने से पहले पुलिस रिपोर्ट पर कोई गहन जांच नहीं की जाती है।यह मामला मोटरसाइकिल चोरी की घटना से संबंधित था और...
सुप्रीम कोर्ट ने IOCL को लगाई कड़ी फटकार, 30 साल बाद ज़मीन मालिकों को कब्ज़ा लौटाने का दिया आदेश
बुधवार को Supreme Court of India ने एक अहम फैसले में Indian Oil Corporation Limited (IOCL) को भूमि सुधार कानून के तहत दी गई सुरक्षा पर तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इस मामले में ज़मीन मालिक को तीन दशकों से अधिक समय तक अपनी ही ज़मीन के कब्ज़े से वंचित रखा गया, जो न्यायसंगत नहीं है।जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने IOCL को निर्देश दिया कि वह एर्नाकुलम (केरल) स्थित लीज़ पर ली गई भूमि का खाली और शांतिपूर्ण कब्ज़ा मूल ज़मीन मालिक के उत्तराधिकारियों को सौंपे। अदालत ने स्पष्ट...
शादी से पहले महिला को मिली स्कॉलरशिप शादी के बाद उसके पति के दावे को खत्म नहीं करती: राजस्थान हाईकोर्ट
स्वामी विवेकानंद एकेडमिक एक्सीलेंस स्कॉलरशिप से वंचित किए गए एक व्यक्ति को राहत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर स्कॉलरशिप खारिज करना कि आवेदक की पत्नी को भी शादी से पहले स्कॉलरशिप का फायदा मिला था, कानूनी रूप से सही नहीं था और यह स्कॉलरशिप योजनाओं के मूल मकसद के खिलाफ है।स्कॉलरशिप को सिर्फ एक परिवार के सदस्य तक सीमित रखने की शर्त के संदर्भ में स्थिति का विश्लेषण करते हुए जस्टिस अनूप सिंघी की बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि एक महिला उम्मीदवार को स्कॉलरशिप मिलने से उस महिला की...
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) का सख्त आदेश: समीर वानखेड़े के खिलाफ चार्ज मेमो रद्द
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने सोमवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़े शब्दों वाले आदेश में आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede के खिलाफ जारी चार्ज मेमोरेंडम को रद्द (quash) कर दिया। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट रूप से कहा कि विभागीय कार्रवाई गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटियों, कानून में दुर्भावना (malice in law) और प्रक्रिया के दुरुपयोग से ग्रस्त है।न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई शक्ति का ईमानदार प्रयोग नहीं, बल्कि “प्रतिशोध” और “निजी दुश्मनी” से प्रेरित है। पीठ ने...
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से एमिक्स क्यूरी के सुझावों के आधार पर पुलिस मीडिया ब्रीफिंग पर पॉलिसी बनाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सभी राज्यों को पुलिस मीडिया ब्रीफिंग के लिए पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया, जिसमें एमिक्स क्यूरी द्वारा कोर्ट के सामने पेश किए गए "मीडिया ब्रीफिंग के लिए पुलिस मैनुअल" को ध्यान में रखा जाएगा।कोर्ट ने राज्यों को ज़रूरी काम करने के लिए 3 महीने का समय दिया।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने कहा,"हमारा मानना है कि राज्यों को एमिक्स क्यूरी द्वारा दिए गए मीडिया ब्रीफिंग के लिए पुलिस मैनुअल को ध्यान में रखते हुए मीडिया ब्रीफिंग के लिए उचित पॉलिसी बनाने का...
सिर्फ़ हाइपरटेंशन को 'लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर' कहना एयर फ़ोर्स कर्मियों को डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करने के लिए काफ़ी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हाइपरटेंशन जैसी बीमारी को सिर्फ़ "लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर" बताकर एयर फ़ोर्स कर्मी को डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करना काफ़ी नहीं है, खासकर तब जब क्लेम को खारिज करने वाली मेडिकल राय के पीछे कोई ठोस कारण न हो।जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने कहा,"लाइफ़स्टाइल हर व्यक्ति की अलग-अलग होती है। इसलिए सिर्फ़ यह कहना कि बीमारी एक लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर है, डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता, जब तक कि मेडिकल...
अधीनस्थ कानून ऑफिशियल गजट में प्रकाशन की तारीख से ही प्रभावी होता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 जनवरी) को फैसला सुनाया कि अधीनस्थ कानून तब तक बाध्यकारी नहीं होता, जब तक कि उसे ऑफिशियल गजट में प्रकाशित न किया जाए, और यह गजट में प्रकाशन की तारीख होती है, न कि सिर्फ नोटिफिकेशन जारी करने की तारीख, जो इसे बाध्यकारी बनाती है।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने टिप्पणी की,“एक बार जब विधायिका ने प्रचार का निर्धारित तरीका तय कर दिया तो कार्यपालिका कोई वैकल्पिक तरीका पेश नहीं कर सकती और उसे कानूनी परिणाम नहीं दे सकती। एक नोटिफिकेशन टुकड़ों में काम नहीं...
मुकदमा चलाने या बचाव के लिए दलीलों में कही गई बातें मानहानि नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि दलीलों में कही गई बातें, चाहे खुद पर मुकदमा चलाने के लिए हों या बचाव के लिए, मानहानि का अपराध नहीं मानी जाएंगी।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि अगर कोई बयान न्यायिक कार्यवाही में दिया जाता है और उसे झूठा बताया जाता है तो इसका सही उपाय झूठी गवाही के अपराध के लिए है, न कि मानहानि के लिए अलग से शिकायत करके।कोर्ट ने कहा,"एक न्यायिक कार्यवाही में किसी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप, असल में एक ऐसा मामला साबित करने के लिए होते हैं, जिसे वह पक्ष सही और सच्चा मानता है। भले...
गुजरात हाईकोर्ट ने 'गुजराती' में केस की सुनवाई से किया इनकार, कहा- हाईकोर्ट की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी
गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की याचिका खारिज की, जो खुद पार्टी के तौर पर पेश हुआ था। उसने हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज (HCLS) कमेटी द्वारा जारी सर्टिफिकेट को चुनौती दी थी, जिसमें उसे कोर्ट के सामने अंग्रेजी भाषा में अपना केस लड़ने के लिए "अयोग्य" बताया गया।याचिकाकर्ता ने उस सर्टिफिकेट को चुनौती दी थी, जिसके तहत कमेटी ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में खुद पार्टी के तौर पर अपना केस लड़ने की इजाजत देने से इनकार किया। याचिकाकर्ता ने इस आधार पर सर्टिफिकेट को रद्द करने की मांग की कि हाई कोर्ट में अंग्रेजी...
सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन में 30% महिला प्रतिनिधित्व के पालन पर हाईकोर्ट से रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, साथ ही सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे बार एसोसिएशन में पदाधिकारी या कार्यकारी सदस्य के तौर पर महिला वकीलों के 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की अपनी पिछली अनिवार्यता का पालन सुनिश्चित करें और रिपोर्ट दें।यह निर्देश कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले से जुड़ी विशेष अनुमति याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई के दौरान दिया गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने सीनियर वकील की दलीलों पर गौर किया कि...
पत्रकारिता की आज़ादी को इसलिए कम नहीं किया जा सकता, क्योंकि सरकारी अधिकारियों को बुरा लगता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी अधिकारी की निजी भावनाएं राज्य की कार्रवाई की वैधता का आकलन करने का पैमाना नहीं बन सकतीं।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने कहा,“सिर्फ इसलिए कि किसी सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति को बुरा लगता है, यह वह पैमाना नहीं हो सकता जिस पर राज्य की कार्रवाई को मापा जाए। यह राज्य द्वारा दिखाए जाने वाले विचारों से भी प्रभावित नहीं होगा।”कोर्ट ने आगे कहा कि पैमाना हमेशा सामान्य समझदारी और सीधे संबंध का होना चाहिए। किसी प्रतिक्रिया की दूर की संभावना या भावनाओं को जानबूझकर...
हाईकोर्ट ने राजस्थान की जेलों में अपर्याप्त पानी, अस्वच्छ स्थितियों पर चिंता जताई, राज्यव्यापी निरीक्षण का आदेश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में जेल कैदियों के लिए अपर्याप्त और अस्वच्छ स्वच्छता सुविधाओं पर ध्यान दिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जिला मजिस्ट्रेट और जजों, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला समाज कल्याण अधिकारियों, जेल अधीक्षक, राजस्थान के सभी जिलों के DSLA सचिवों की "शिकायत निवारण समिति" का गठन करें ताकि कैदियों की शिकायतों की जांच की जा सके।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने समिति के सदस्यों को निर्देश दिया कि वे तीन सप्ताह के भीतर किसी भी दिन जेलों का अचानक निरीक्षण करें, जितने कैदियों को...
लापता बच्चों की बरामदगी के लिए समान एसओपी बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट
देशभर में लापता बच्चों की बढ़ती समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह लापता बच्चों की बरामदगी के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SoP) तैयार करने की दिशा में कदम उठाएगा।यह टिप्पणी जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें तमिलनाडु में वर्ष 2011 में लापता हुई एक बच्ची (उस समय आयु 1 वर्ष 10 माह) की बरामदगी से जुड़ा प्रश्न था। 16 जनवरी को हुई सुनवाई में अदालत ने यह...




















