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Order 41 Rule 27 CPC: अपील लंबित रहने पर अतिरिक्त साक्ष्य की अर्जी पर फैसला अंतिम सुनवाई में ही होगा : राजस्थान हाईकोर्ट
Order 41 Rule 27 CPC: अपील लंबित रहने पर अतिरिक्त साक्ष्य की अर्जी पर फैसला अंतिम सुनवाई में ही होगा : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की Order 41 Rule 27 के तहत अपील के दौरान दाखिल की गई अतिरिक्त साक्ष्य लेने की अर्जी पर फैसला अपील की अंतिम सुनवाई के समय ही किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अर्जी को अपील की सुनवाई से पहले तय करना न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं होगा।मामला उस समय उठा, जब याचिकाकर्ता के खिलाफ किराया न्यायाधिकरण ने बेदखली का आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई, जो विचाराधीन थी। अपील लंबित रहते हुए याचिकाकर्ता ने...

सुप्रीम कोर्ट ने दृष्टिबाधित CLAT-PG उम्मीदवारों को कंप्यूटर पर उत्तर देने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने दृष्टिबाधित CLAT-PG उम्मीदवारों को कंप्यूटर पर उत्तर देने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि CLAT के भविष्य के संस्करणों में उपस्थित होने वाले दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को जेएडब्ल्यूएस (जॉब एक्सेस विद स्पीच) स्क्रीन रीडर के उपयोग सहित सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए, और कंप्यूटर पर वर्ड डॉक्यूमेंट पर सवालों के जवाब देने के लिए अनुकूलित कीबोर्ड और माउस का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि अखिल भारतीय बार परीक्षा के लिए दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए सुविधाओं के संबंध में 5 दिसंबर,...

लंबित जांच के दरमियान किसी कर्मचारी को बिना उचित प्रक्रिया के समय से पहले सेवानिवृत्त करना कदाचार के बराबर: झारखंड हाईकोर्ट
लंबित जांच के दरमियान किसी कर्मचारी को बिना उचित प्रक्रिया के समय से पहले सेवानिवृत्त करना कदाचार के बराबर: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने कहा कि विवादित अभिलेखों पर विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान, उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना, किसी कर्मचारी को समय से पहले सेवानिवृत्त करना, अधिकारियों द्वारा कदाचार माना जाता है क्योंकि इससे नियोक्ता के हितों को नुकसान पहुंचता है। मामले में न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की सिफारिश करके और लंबित विभागीय जांच को रद्द करके, कंपनी के हितों के प्रतिकूल कार्य किया है। न्यायालय ने माना कि सीसीएल के प्रमाणित स्थायी आदेशों की...

मास्टर प्लान में गांव को शहरी क्षेत्र घोषित किए जाने पर राज्य ऐसे क्षेत्र के विकास के लिए भूमि परिवर्तन की अनुमति दे सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट
मास्टर प्लान में गांव को 'शहरी क्षेत्र' घोषित किए जाने पर राज्य ऐसे क्षेत्र के विकास के लिए भूमि परिवर्तन की अनुमति दे सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने सुजानगढ़ मास्टर प्लान 2036 में असोटा गांव को शामिल करने को चुनौती देने वाली याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि यह ग्राम पंचायत की आपत्तियों के बावजूद किया गया था और यह पंचायत की स्वायत्तता के लिए हानिकारक था। जस्टिस कुलदीप माथुर ने कहा कि इस तरह के समावेशन से पहले संबंधित ग्राम पंचायत के साथ किया गया परामर्श पर्याप्त था और नीतिगत निर्णय लेने के लिए सहमति अनिवार्य नहीं थी।कोर्ट ने कहा,"यहां यह ध्यान देने योग्य है कि 'सुजानगढ़ मास्टर प्लान 2036' में असोटा गांव को...

कश्मीर में सड़े, अस्वास्थ्यकर मांस की बिक्री का आरोप, हाईकोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को नोटिस जारी किया
कश्मीर में सड़े, अस्वास्थ्यकर मांस की बिक्री का आरोप, हाईकोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को नोटिस जारी किया

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को वकील मीर उमर द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में सड़े, अस्वास्थ्यकर और असुरक्षित मांस और पोल्ट्री उत्पादों की अनियंत्रित बिक्री पर प्रकाश डाला गया। साथ ही खाद्य सुरक्षा एवं नगरपालिका कानूनों को लागू करने में अधिकारियों की घोर लापरवाही का आरोप लगाया गया।विभिन्न विभागों के खिलाफ शीर्षक वाली यह जनहित याचिका स्थानीय समाचार पत्र के कॉलम, "मीट द मीट माफिया" की ओर ध्यान आकर्षित करती है, जिसमें कश्मीर में...

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद MP हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कॉलेजों की अवैध संबद्धता संबंधित PIL अनिश्चित काल के लिए स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद MP हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कॉलेजों की अवैध संबद्धता संबंधित PIL अनिश्चित काल के लिए स्थगित की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (20 अगस्त) को लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से दायर एक जनहित याचिका की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। इस जनहित याचिका में पैरामेडिकल कोर्स प्रदान करने वाले संस्थानों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं और अवैधताओं का आरोप लगाया गया था। अदालत ने यह आदेश पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में हाईकोर्ट में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने के आदेश के मद्देनजर पारित किया।इससे पहले, 16 जुलाई के एक आदेश के माध्यम से, हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल...

अगर राज्यपाल विधेयकों पर अड़े रहे तो राजनीतिक समाधान भी हैं, अदालतें समय-सीमा तय नहीं कर सकतीं: सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
अगर राज्यपाल विधेयकों पर अड़े रहे तो राजनीतिक समाधान भी हैं, अदालतें समय-सीमा तय नहीं कर सकतीं: सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

सॉलिसिटर जनरल ने विधेयकों को मंज़ूरी देने से संबंधित राष्ट्रपति के संदर्भ की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर कुछ राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर अड़े रहें तो राज्यों को न्यायिक समाधानों के बजाय राजनीतिक समाधान तलाशने होंगे।देश की हर समस्या का समाधान अदालतें नहीं हैं, यह बात सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की संविधान पीठ के समक्ष कही।यदि राज्यपाल विधेयकों...

S.186 IPC के तहत बाधा शारीरिक बल तक सीमित नहीं, बल्कि लोक सेवक के कर्तव्य निर्वहन में किसी भी प्रकार की बाधा है : सुप्रीम कोर्ट
S.186 IPC के तहत 'बाधा' शारीरिक बल तक सीमित नहीं, बल्कि लोक सेवक के कर्तव्य निर्वहन में किसी भी प्रकार की बाधा है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 अगस्त) को स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 186 के तहत दोषसिद्धि के लिए हिंसा या शारीरिक बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने कहा कि किसी लोक सेवक के वैध कर्तव्य में बाधा, धमकी, भय या जानबूझकर असहयोग के माध्यम से भी डाली जा सकती है, बशर्ते कि इससे कर्तव्य निर्वहन में कठिनाई हो। कोर्ट ने कहा,"हमारा मानना ​​है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 186 में प्रयुक्त 'बाधा' शब्द केवल शारीरिक बाधा डालने तक ही सीमित नहीं है। यह आवश्यक नहीं कि यह आपराधिक बल प्रयोग का कृत्य हो। यह...

दिल्ली हाईकोर्ट ने BCI से विदेशी लॉ फर्मों के नियमों के उल्लंघन को लेकर डेंटन्स लिंक गठजोड़ पर अंतिम निर्णय रोकने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने BCI से विदेशी लॉ फर्मों के नियमों के उल्लंघन को लेकर डेंटन्स लिंक गठजोड़ पर अंतिम निर्णय रोकने को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया कि वह डेंटन्स लिंक लीगल गठजोड़ के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर अंतिम निर्णय न ले, क्योंकि इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स फॉर रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फॉरेन लॉयर्स एंड फॉरेन लॉ फर्म्स इन इंडिया, 2022 का कथित उल्लंघन शामिल है।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने एडवोकेट अतुल शर्मा और उनकी लॉ फर्म लिंक लीगल द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जो 2023 में डेंटन्स समूह में शामिल हो...

जीविका के लायक वेतन पाने की हकदार: गुजरात हाईकोर्ट ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारियों के बराबर मानने के निर्देश को खारिज किया, वेतन बढ़ाने का आदेश दिया
'जीविका के लायक वेतन पाने की हकदार': गुजरात हाईकोर्ट ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारियों के बराबर मानने के निर्देश को खारिज किया, वेतन बढ़ाने का आदेश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार (20 अगस्त) को एकल न्यायाधीश के 2024 के उस आदेश को आंशिक रूप से पलट दिया जिसमें कहा गया था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (AWWs) और आंगनवाड़ी सहायिकाओं (AWHs) को राज्य या केंद्र सरकार में सिविल पदों पर कार्यरत नियमित रूप से चयनित स्थायी कर्मचारियों के समान माना जाएगा। अदालत ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारियों के समान मानने और उनके नियमितीकरण के लिए नीति बनाने के एकल न्यायाधीश के निर्देशों को खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के...

आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति के इच्छुक व्यक्ति से चयन से पहले नौकरी से इस्तीफा देने की उम्मीद नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति के इच्छुक व्यक्ति से चयन से पहले नौकरी से इस्तीफा देने की उम्मीद नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने विदेश में शिक्षा के लिए इच्छुक एक छात्र को राहत प्रदान की। विदेश में अध्ययन के ‌‌लिए उस छात्र की ओर से राज्य सरकार की स्वामी विवेकानंद शैक्षणिक उत्कृष्टता छात्रवृत्ति योजना के तहत किए गए आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि वह अपना कोर्स शुरू होने से एक महीने पहले अपनी नौकरी का इस्तीफा पेश करने में विफल रहा था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता से कोर्स में चयन से पहले अपनी नौकरी से इस्तीफा देने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की भूमिका पर और...

राइट टू बी फॉरगॉटन: पॉन्टी चड्ढा के बेटे ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, बरी होने के बाद भी मीडिया रिपोर्ट हटाने की मांग
राइट टू बी फॉरगॉटन: पॉन्टी चड्ढा के बेटे ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, बरी होने के बाद भी मीडिया रिपोर्ट हटाने की मांग

मशहूर शराब कारोबारी पॉन्टी चड्ढा के बेटे मनीप्रीत सिंह चड्ढा उर्फ मोंटी चड्ढा ने बृहस्पतिवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मीडिया रिपोर्टों को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि 100 करोड़ रुपये की कथित प्रॉपर्टी धोखाधड़ी मामले में बरी होने के बावजूद उनके खिलाफ पुरानी खबरें अब भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंच रही है।मामले की सुनवाई जस्टिस पुरषेन्द्र कुमार कौरव ने संक्षेप में की।चड्ढा की ओर से कहा गया कि 2018 में दर्ज FIR ट्रायल कोर्ट ने नवंबर, 2019 में कंपाउंड...

NEET के लिए दिव्यांगजनों को आरक्षण विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र के आधार पर दिया जाना चाहिए, प्राधिकारी अभ्यर्थी की विकलांगता का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
NEET के लिए दिव्यांगजनों को आरक्षण विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र के आधार पर दिया जाना चाहिए, प्राधिकारी अभ्यर्थी की विकलांगता का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि NEET परीक्षा के लिए आरक्षण का लाभ सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID) के आधार पर दिया जाना चाहिए और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम के तहत प्राधिकारी अभ्यर्थी की दिव्यांगता का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकता।एक NEET अभ्यर्थी को राहत देते हुए जस्टिस पंकज भाटिया ने कहा,"राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार नामित प्राधिकारियों को केवल 'कार्यात्मक दिव्यांगता' का आकलन करने का कार्य सौंपा जा सकता है, जिसके...

31 अगस्त तक सोशल मीडिया से प्रमोशनल रील्स/वीडियो हटाएं वकील, अन्यथा होगी कार्यवाही: राज्य बार काउंसिल का निर्देश
31 अगस्त तक सोशल मीडिया से प्रमोशनल रील्स/वीडियो हटाएं वकील, अन्यथा होगी कार्यवाही: राज्य बार काउंसिल का निर्देश

कर्नाटक राज्य बार काउंसिल ने एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में उन वकीलों को निर्देश दिया गया, जिन्होंने सोशल मीडिया पर अपमानजनक बयान/प्रमोशनल रील्स और वीडियो अपलोड किए हैं। प्रस्ताव में उक्त वकीलों से कहा गया कि वे 31 अगस्त 2025 तक ऐसे आपत्तिजनक रील, वीडियो आदि हटा दें। ऐसा न करने पर एडवोकेट एक्ट, 1961 की धारा 35 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाएगी।न्यायपालिका और विधिक बिरादरी के खिलाफ सोशल मीडिया पर दिए गए अपमानजनक बयानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के मुद्दे पर चर्चा करते हुए बार...

सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों को उठाने संबंधी MCD के सर्कुलर के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों को उठाने संबंधी MCD के सर्कुलर के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा आवारा कुत्तों को उठाने के लिए जारी किए गए सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।यह याचिका जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। हालांकि, खंडपीठ ने तत्काल सुनवाई के अनुरोध को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने आवारा कुत्तों के मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है।आवेदन का उल्लेख करने वाले वकील ने जब स्पष्ट...

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत अपराध की परिसीमा अवधि ड्रग्स एनालिस्ट की रिपोर्ट प्राप्त होने से शुरू होती है: सुप्रीम कोर्ट
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत अपराध की परिसीमा अवधि ड्रग्स एनालिस्ट की रिपोर्ट प्राप्त होने से शुरू होती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत 3 वर्ष के कारावास से दंडनीय अपराधों की परिसीमा अवधि की गणना सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट के प्रकाशन की तिथि से की जानी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 32 के तहत कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी गई थी और शिकायतों को परिसीमा अवधि के भीतर माना गया...