ताज़ा खबरे
हरियाणा में 6 महीने से ज़्यादा समय से गिरफ़्तार न हुए NDPS Act के आरोपियों की सूची हाईकोर्ट ने मांगी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट 1985 (NDPS Act) के तहत उन आरोपियों के नामों की सूची दाखिल करने का निर्देश दिया, जिन्हें पिछले छह महीने से ज़्यादा समय से गिरफ़्तार नहीं किया गया।जस्टिस एन.एस. शेखावत ने ऐसे आरोपियों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी पूछा। साथ ही पूछा कि क्या ऐसे मामलों में जांच अधिकारी (IO) की ओर से कोई लापरवाही पाए जाने पर उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की गई।DGP द्वारा दायर...
गुजरात हाईकोर्ट ने सभी जिलों में शुरू किए फॉर्मल विटनेस डिपोजिशन सेंटर, चीफ जस्टिस ने किया वर्चुअल उद्घाटन
गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने गुरुवार को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर फॉर्मल विटनेस डिपोजिशन सेंटर (FWDCs) का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह पहल न्यायपालिका में आधुनिकीकरण और सुधार की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।उद्घाटन समारोह में बोलते हुए चीफ जस्टिस अग्रवाल ने कहा,"हमने न्यायिक आधुनिकीकरण और सुधार के अपने संकल्प में एक अहम मील का पत्थर हासिल किया है। यह केवल परियोजना की शुरुआत नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक के लिए तेज़ और न्यायपूर्ण न्याय देने की हमारी प्रतिबद्धता को मज़बूत...
BREAKING| BNS की धारा 152 के तहत दर्ज FIR में 'The Wire' के संपादक और करण थापर को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल द वायर (The Wire) के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और सलाहकार संपादक करण थापर को असम पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत दर्ज की गई FIR में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट नित्या रामकृष्णन द्वारा उल्लेख किए जाने के बाद मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। उन्होंने दलील दी कि असम पुलिस की FIR में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने के बाद...
6 माह में निष्पादन नहीं किया तो अवमानना मानी जाएगी: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि यदि न्यायिक अधिकारी और संबंधित प्राधिकारी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय सीमा के भीतर निष्पादन (Execution) की कार्यवाही पूरी नहीं करते, तो यह आदेश की अवमानना मानी जाएगी।जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राहुल एस. शाह बनाम जिनेंद्र कुमार गांधी (2021) मामले में स्पष्ट निर्देश दिए कि निष्पादन याचिका दायर होने की तिथि से छह माह के भीतर निष्पादन कार्यवाही पूरी होनी चाहिए। इस अवधि को केवल ठोस कारणों को लिखित रूप में दर्ज करने...
BREAKING| सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाना गैरकानूनी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों को केवल उन्हीं जगहों पर खाना खिलाया जाए, जो प्रत्येक नगरपालिका वार्ड में अधिकारियों द्वारा बनाए जाने वाले समर्पित भोजन स्थलों पर ही हों।यदि कोई इस निर्देश का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने आवारा कुत्तों को अनियमित रूप से खाना खिलाने से होने वाली अप्रिय घटनाओं की रिपोर्टों के आधार पर यह निर्देश दिया। कोर्ट ने...
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में किया संशोधन, कहा- Delhi-NCR में टीकाकरण के बाद ही छोड़े जाएंगे उठाए गए आवारा कुत्तें
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को दो जजों की बेंच द्वारा दिए गए उस निर्देश पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से उठाए गए आवारा कुत्तों को नहीं छोड़ा जाना चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन जजों की बेंच ने स्पष्ट किया कि उठाए गए आवारा कुत्तों को नसबंदी, कृमिनाशक और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा जाना चाहिए, जहां से उन्हें उठाया गया था, सिवाय उन कुत्तों के जो रेबीज से संक्रमित हैं, जिनके रेबीज से संक्रमित होने का संदेह...
भारतीय संविधान के अंतर्गत नीति निर्देशक सिद्धांतों में 'करेगा' और 'प्रयास करेगा' को समझिए
संविधान के भाग IV में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत (डीपीएसपी) निहित हैं जो संविधान के संस्थापक सदस्यों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। निर्माताओं ने महसूस किया कि संविधान में सामाजिक-आर्थिक अधिकारों का अभाव नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की पूर्ण प्राप्ति में बाधक है। इसके परिणामस्वरूप संविधान में सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को शामिल किया गया (अनुच्छेद 36 के प्रारूप से अनुच्छेद 46 के प्रारूप तक) और न्यायोचितता और गैर-न्यायोचितता के आधार पर भेद किया गया। बी.एन. राव ने संविधान सभा को लिखे अपने...
"वोट-चोरी" अभियान के लिए कांग्रेस की मान्यता रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) का राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन रद्द करने और पार्टी नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा भारत के चुनाव आयोग के विरुद्ध "वोट-चोरी" अभियान की जांच के लिए एक विशेष जाँच दल गठित करने की मांग की गई।एक अस्थायी उपाय के रूप में याचिकाकर्ता ने कांग्रेस, गांधी, खड़गे, उनके प्रतिनिधियों को मामले के लंबित रहने के दौरान कोई भी सार्वजनिक बयान, भाषण, अभियान या चुनाव आयोग के अधिकार, निष्पक्षता और विश्वसनीयता...
राष्ट्रपति के संदर्भ में राज्यों द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करने के प्रश्न का उत्तर देने से सुप्रीम कोर्ट बचेगा
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि वह राष्ट्रपति के संदर्भ के 14वें प्रश्न पर विचार नहीं करेगा कि क्या संविधान अनुच्छेद 131 के तहत मुकदमे के अलावा, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच विवादों का निपटारा करने के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाता है, और क्या कोई राज्य संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर कर सकता है।यह बात जस्टिस पीएस नरसिम्हा द्वारा मंगलवार को पूछे गए उस सवाल के बाद आई, जिसमें उन्होंने पूछा था कि जब मुद्दे ज़्यादातर विधेयकों पर राष्ट्रपति और राज्यपाल की...
जनहित याचिका का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धी अधिकारियों के बीच बदला लेने के तंत्र के रूप में नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि जनहित याचिका के तंत्र का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धी सरकारी अधिकारियों के बीच बदला लेने के लिए नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच उन अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें झारखंड सरकार द्वारा पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति करते समय प्रकाश सिंह एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य (2006) 8 एससीसी 1 में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया।ये अवमानना याचिकाएं झारखंड विधानसभा...
सुप्रीम कोर्ट ने लोन स्वीकृत करने के लिए रिश्वत लेने के आरोप में SBI अधिकारी को हटाने का आदेश बहाल किया
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 अगस्त) को दोहराया कि रिट अदालतें केवल प्रक्रियागत अनियमितताओं या प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन के मामलों में ही अनुशासनात्मक जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अपील स्वीकार करते हुए भ्रष्टाचार के आरोपी बैंक कर्मचारी को हटाने के अनुशासनात्मक प्राधिकारी के फैसले को बहाल कर दिया। न्यायालय ने पटना हाईकोर्ट का आदेश यह कहते हुए रद्द कर दिया कि उसने प्रक्रियागत अनियमितता या प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन के...
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लापता बच्चों के आंकड़े प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
बाल तस्करी और खोया/पाया पोर्टल पर दर्ज लापता बच्चों के अनसुलझे मामलों पर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र को उन कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े शब्दों में याद दिलाने का निर्देश दिया, जिन्होंने लापता बच्चों के मामलों से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए।यह याचिका उन बच्चों की दुर्दशा को उजागर करती है, जो कई राज्यों में सक्रिय संगठित तस्करी नेटवर्क के शिकार हैं।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह निर्देश तब दिया, जब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल...
सुप्रीम कोर्ट का MP/MLAs, जजों, पत्रकारों, IAS अधिकारियों को हैदराबाद में भूमि आवंटन रद्द करने वाले फैसले पर पुनर्विचार से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2024 के अपने फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें हैदराबाद नगर निगम सीमा के भीतर सांसदों, विधायकों, नौकरशाहों, न्यायाधीशों, रक्षा कर्मियों, पत्रकारों आदि की आवासीय समितियों को भूमि के अधिमान्य आवंटन रद्द कर दिया गया था।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट सीएस वैद्यनाथन, अनीता शेनॉय, मुकुल रोहतगी, सिद्धार्थ लूथरा, आत्माराम नाडकर्णी, विकासरंजन भट्टाचार्य, जयदीप गुप्ता और दामा शेषाद्रि नायडू सहित कई एडवोकेट/सीनियर...
दिल्ली आर्ट गैलरी में लगेगी हिंदू देवी-देवताओं पर एम.एफ. हुसैन की 'आपत्तिजनक' पेंटिंग्स की प्रदर्शनी, कोर्ट ने FIR की मांग वाली याचिका खारिज की
कोर्ट ने देहली आर्ट गैलरी में भारतीय चित्रकार एम.एफ. हुसैन की हिंदू देवी-देवताओं पर कथित रूप से आपत्तिजनक दो पेंटिंग्स की प्रदर्शनी पर FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।यह शिकायत वकील अमिता सचदेवा ने दर्ज कराई थी।पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने इस साल की शुरुआत में जेएमएफसी कोर्ट द्वारा पारित आदेश बरकरार रखा और कहा कि यह वैधानिक प्रावधानों और न्यायिक मिसालों के अनुरूप, सोच-समझकर लिया गया तर्कसंगत निर्णय है।अदालत ने कहा,"इस समय पुलिस जांच की...
गवाहों को पेश करने के लिए समन व कार्रवाई लागू न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई चिंता
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिये समन जारी करने और दंडात्मक उपायों को लागू करने में पुलिस की नाकामी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।IPC की धारा 363, 366, 376, 384 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 और आईटी अधिनियम की धारा 67ए के तहत अपराधों के लिए 2022 से जेल में बंद आरोपियों की दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस अजय भनोट ने कहा,"वैधानिक जनादेश के बावजूद मुकदमे में गवाहों की उपस्थिति को मजबूर करने के लिए पुलिस...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 'लुटेरे' फिल्म प्रोड्यूसर्स की निषेधाज्ञा याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि निर्माता संघ के साथ फिल्म टाइटल का रजिस्ट्रेशन अपने आप में किसी तीसरे पक्ष के विरुद्ध कोई प्रवर्तनीय विशेष अधिकार नहीं बनाता। इसलिए यह निषेधाज्ञा का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे रजिस्ट्रेशन केवल संघ के सदस्यों के बीच आंतरिक विनियमन के लिए हैं और ट्रेडमार्क एक्ट या कॉपीराइट एक्ट के तहत इनका कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।जस्टिस संदीप वी. मार्ने सुनील द्वारा दायर वाणिज्यिक बौद्धिक संपदा मुकदमे में अंतरिम आवेदन पर सुनवाई कर रहे थे। सुनील ने फिल्म निर्माता...
कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी की मांग वाली PIL पर राज्य से जवाब तलब: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शहर भर में आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी की मांग करने वाली याचिका पर राज्य से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में सामूहिक टीकाकरण और नसबंदी कार्यक्रमों के माध्यम से आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए तत्काल उपाय करने की मांग की गई है।जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस स्मिता दास डे की खंडपीठ ने संबंधित नगर निगमों से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। याचिका में कुत्ते के काटने के मामलों और रेबीज से संबंधित मौतों में खतरनाक वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है, जैसा कि केंद्र सरकार की...
जल अधिनियम 1974 की धारा 5 से 8 में बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति, अयोग्यता, पदत्याग और बैठकों की प्रक्रिया
भारत में प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाए गए सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक है जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 (Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974)। इस कानून का मुख्य उद्देश्य है कि हमारे देश की नदियाँ, तालाब, झीलें और भूमिगत जल (Ground Water) प्रदूषण से सुरक्षित रहें और लोगों को शुद्ध व सुरक्षित जल (Clean Water) उपलब्ध हो सके।इस अधिनियम का अध्याय II (Chapter II) "केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (Central and State Pollution Control Boards)" की स्थापना...
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 48 और धारा 49 : कंपनियों द्वारा उल्लंघन और प्रतिस्पर्धा वकालत
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम (Indian Competition Act) के तहत, किसी भी उल्लंघन के लिए न केवल कंपनियों बल्कि उसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को भी जवाबदेह ठहराया जाता है। इसके साथ ही, यह अधिनियम केवल एक नियामक निकाय के रूप में ही कार्य नहीं करता, बल्कि भारत में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाले एक वकील (advocate) के रूप में भी कार्य करता है।धारा 48 यह निर्धारित करती है कि कंपनियों द्वारा किए गए उल्लंघनों के लिए कौन जिम्मेदार होगा, जबकि धारा 49 CCI की प्रतिस्पर्धा वकालत (Competition Advocacy) की भूमिका...
क्या न्यायिक अनुक्रम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूर्ण पालन अनिवार्य बनाता है?
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने M/s Ireo Grace Realtech Pvt. Ltd. v. Sanjay Gopinath मामले में यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि क्या न्यायिक अनुक्रम (Judicial Hierarchy) की पवित्रता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन हर स्थिति में अनिवार्य है। यह विवाद मूल रूप से उपभोक्ता विवाद (Consumer Dispute) से जुड़ा था, लेकिन अदालत ने इससे कहीं अधिक व्यापक संवैधानिक (Constitutional) और विधिक (Legal) सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश केवल पक्षकारों...




















