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बैंक अकाउंट फ्रीज़ करने से पहले सतर्क रहें: DGP ने जारी की गाइडलाइन, राजस्थान हाईकोर्ट को राज्य सरकार ने दी जानकारी
राजस्थान हाईकोर्ट में यह सवाल उठने पर कि क्या केवल पुलिस (जांच एजेंसी) के पत्र के आधार पर बिना CrPC की धारा 102 की प्रक्रिया अपनाए किसी का बैंक खाता फ्रीज़ किया जा सकता है राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अब इस संबंध में दिशानिर्देश तैयार कर दिए गए।राज्य ने जानकारी दी कि DGP (साइबर क्राइम) ने 09 मई, 2025 को छह बिंदुओं वाली गाइडलाइन जारी की, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सभी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस और एसीपी को आदेश दिया गया कि वे जांच एजेंसियों को बैंक...
रिटायर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से 'Acquiescence' या 'Delay' जैसे कानूनी शब्दों की समझ की अपेक्षा नहीं की जा सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पेंशन न देने का आदेश किया रद्द
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी बेलदार कर्मचारी की पेंशन अस्वीकृति खारिज करते हुए कहा कि केवल देरी के आधार पर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी तकनीकी कानूनी अवधारणाओं जैसे “Acquiescence” या “Laches” को नहीं समझ सकता और पेंशन सतत अधिकार है, जिसे देरी के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप शर्मा ने राज्य सरकार की आपत्ति अस्वीकार करते हुए टिप्पणी की,“याचिकाकर्ता जैसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह...
UPSC अधिकारी लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में नहीं: लोकपाल
लोकपाल ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अधिकारी, जिसमें सचिव और अतिरिक्त सचिव भी शामिल हैं, लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। लोकपाल ने यह फैसला UPSC के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत पर सुनवाई करते हुए सुनाया।लोकपाल ने पहले शिकायतकर्ता से पूछा कि UPSC के अधिकारी लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की धारा 14 के तहत कैसे आते हैं, क्योंकि UPSC एक संवैधानिक निकाय है, न कि संसद के किसी अधिनियम द्वारा स्थापित।शिकायतकर्ता ने इसके जवाब में हलफनामा दायर कर कहा कि...
सैलरी स्लिप पेश न करने पर पत्नी को गुजारा भत्ता से किया जा सकता है इनकार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि कोई पत्नी अपनी आय की अपर्याप्तता या वित्तीय कठिनाई को साबित करने के लिए अपनी नवीनतम वेतन पर्ची पेश करने में विफल रहती है तो अदालत उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है और उसे पति से गुजारा भत्ता देने से इनकार कर सकती है।जस्टिस डॉ. स्वर्ण कांता शर्मा ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। यह याचिका पत्नी द्वारा दायर की गई, जिसे फैमिली कोर्ट ने गुजारा भत्ता देने से इनकार कर दिया।फैमिली कोर्ट ने पति को उनकी बेटी का भरण-पोषण...
स्वस्थ पति पत्नी के भरण-पोषण से नहीं बच सकता: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने भरण-पोषण के मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सक्षम और स्वस्थ पति से यह उम्मीद की जाती है कि वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त कमाई कर सकता है। कोई पति यह दलील नहीं दे सकता कि वह अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है।यह टिप्पणी जस्टिस संजय कुमार व्यास ने भरण-पोषण की राशि बढ़ाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। फैमिली कोर्ट ने याचिकाकर्ता पत्नी को प्रतिमाह 4,000 रुपये का भरण-पोषण देने का आदेश दिया, जिसे बढ़ाने के लिए उसने हाई कोर्ट में...
S.5 Limitation Act | परिसीमा अवधि शुरू होने से लेकर वास्तविक दाखिल तिथि तक की पूरी अवधि के विलंब का स्पष्टीकरण देना होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अनुसार विलंब की क्षमा के लिए परिसीमा अवधि शुरू होने से लेकर वास्तविक दाखिल तिथि तक की पूरी अवधि के लिए "पर्याप्त कारण" के अस्तित्व को स्थापित करके विलंब का स्पष्टीकरण देना होगा। यदि परिसीमा अवधि 90 दिन है और अपील 100वें दिन विलंब से दायर की जाती है तो पूरे 100 दिनों के लिए स्पष्टीकरण देना होगा।न्यायालय ने नोट किया कि परिसीमा अधिनियम की धारा 5 में "ऐसी अवधि के भीतर" पद के अर्थ के संबंध में व्यक्त की गई राय में भिन्नता है, जहां इस पद का...
सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के लिए प्रारंभिक कदम उठाने के निर्देश जारी: ECI ने सुप्रीम कोर्ट में बताया
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने बिहार को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए प्रारंभिक कदम उठाने के लिए पत्र जारी किया है। राष्ट्रव्यापी SIR के लिए 1 जून, 2026 को अर्हक तिथि निर्धारित की गई।ECI ने कहा कि उसने विभिन्न राज्यों में SIR आयोजित करने का निर्णय लिया है और सभी राज्यों (बिहार को छोड़कर) और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को "मतदाता सूचियों के विशेष गहन...
गुजरात हाईकोर्ट का Jolly LLB 3 के टीज़र को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता से सवाल, पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश पढ़ें
गुजरात हाईकोर्ट ने आगामी फिल्म Jolly LLB 3 के टीज़र को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता से गुरुवार (11 सितंबर) को कहा कि वह पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को पढ़ें, जिसमें इसी तरह की याचिका खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही अपनी याचिका के संबंध में कोई निर्णय लें।फिल्म में अक्षय कुमार और अरशद वारसी मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म 19 सितंबर को रिलीज़ होने वाली है।याचिकाकर्ता स्वयं उपस्थित हुए थे। उन्होंने जस्टिस निराल आर...
इतने संवेदनशील क्यों हो रहे हैं?: शिवलिंग की तस्वीर हटाने की याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज किया, जिसमें आयुर्वेदिक कंपनी के लोगो से शिवलिंग की तस्वीर हटाने की मांग की गई थी।मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा,"आप इन चीजों को लेकर इतने संवेदनशील क्यों हो रहे हैं? धार्मिक भावनाओं में यह अचानक वृद्धि क्यों?"चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्राइवेट लिमिटेड नामक 108 साल पुरानी कंपनी के उत्पादों की पैकेजिंग पर शिवलिंग की तस्वीर के इस्तेमाल के खिलाफ दायर याचिका पर...
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट संवैधानिक कोर्ट को FIR दर्ज करने का निर्देश देने से नहीं रोक सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा की गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट किसी संवैधानिक न्यायालय को यह निष्कर्ष निकालने से नहीं रोक सकती कि आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा करते हैं और FIR दर्ज करने का निर्देश देते हैं।अदालत ने प्रदीप निरंकारनाथ शर्मा बनाम गुजरात राज्य मामले में अपने हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि जब प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा हो तो FIR दर्ज करने से पहले शिकायतों की सत्यता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है।अदालत ने ललिता कुमारी बनाम...
सहमति से रिश्ता, भले एक विवाहित हो, मान्य: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दो वयस्कों के बीच का संबंध यदि उनमें से एक विवाहित हो—को अदालतें पुराने नजरिए से नहीं देख सकतीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायाधीश अपनी व्यक्तिगत नैतिकता ऐसे व्यक्तियों पर थोप नहीं सकते।जस्टिस स्वरना कांत शर्मा ने कहा,“यदि दो वयस्क, भले ही उनमें से एक विवाहित हो, साथ रहने या शारीरिक संबंध बनाने का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें अपने निर्णय के परिणामों की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। न्यायाधीश अपनी व्यक्तिगत नैतिकता उन पर नहीं थोप सकते। साथ ही, अदालतें यह भी अनदेखा...
स्वीकृत लोन का भुगतान न करना आत्महत्या के लिए उकसाने के समान नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
औरंगाबाद स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हाल ही में यह निर्णय दिया कि केवल इसलिए कि वित्तीय कंपनी ने प्रक्रियागत आवश्यकताओं के अभाव में स्वीकृत लोन राशि का भुगतान नहीं किया और/या प्रसंस्करण शुल्क की मांग की या एक किस्त अग्रिम ले ली। लोन आवेदक आत्महत्या कर लेता है तो उक्त फर्म या उसके कर्मचारियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने या मानहानि का मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस हितेन वेनेगावकर की खंडपीठ ने कहा कि वित्तीय कंपनी के कर्मचारियों का कृत्य 'उकसाने' के समान नहीं हो...
सहमति से वयस्क रिश्ते में रह सकते हैं, भले ही उनमें से कोई एक विवाहित हो: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दो सहमति से वयस्कों के बीच के रिश्ते को, भले ही उनमें से एक विवाहित हो, अदालतें पुराने नज़रिए से नहीं देख सकतीं। साथ ही जज ऐसे व्यक्तियों पर अपनी व्यक्तिगत नैतिकता नहीं थोप सकते।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा,"यदि दो वयस्क, भले ही उनमें से एक विवाहित हो, साथ रहने या यौन संबंध बनाने का फैसला करते हैं तो उन्हें ऐसे फैसले के परिणामों की ज़िम्मेदारी भी लेनी चाहिए। जज अपने सामने आने वाले पक्षों पर अपनी व्यक्तिगत नैतिकता नहीं थोप सकते। साथ ही अदालतें इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं...
PMLA का सख्ती से पालन किए बिना ज़ब्त संपत्ति को अपने पास रखने की अनुमति देना प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के उद्देश्य को कमज़ोर करता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि PMLA के प्रावधानों का सख्ती से पालन किए बिना ज़ब्त संपत्ति को अपने पास रखने की अनुमति देना इस अधिनियम के विधायी अधिदेश का उल्लंघन होगा। इसमें प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को शामिल करने के मूल उद्देश्य को ही कमज़ोर करेगा।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा कि PMLA के तहत तलाशी, ज़ब्ती, ज़ब्ती, कुर्की और रखने की प्रक्रियाएं प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों से जुड़ी हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य की कार्रवाई...
जीवित जन्म लेने पर व्यवहार्य भ्रूण के अधिकारों के लिए कोई कानून नहीं, कानून निर्माताओं को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कानून को व्यवहार्यता के स्तर पर मातृ स्वायत्तता और भ्रूण के अधिकारों के बीच संतुलन को स्पष्ट रूप से रेखांकित करना चाहिए।जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि वैधानिक सीमा से परे टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी करने के मामलों की बढ़ती संख्या के साथ भ्रूण की व्यवहार्यता का प्रश्न गर्भपात न्यायशास्त्र में काफी महत्वपूर्ण हो गया।अदालत ने कहा,"कानून को व्यवहार्यता के स्तर पर मातृ स्वायत्तता और भ्रूण के अधिकारों के बीच संतुलन को स्पष्ट रूप से रेखांकित करना चाहिए। निस्संदेह, जब तक...
छोटी नोकझोंक क्रूरता नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
तलाक की अर्जी खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि साधारण वैवाहिक मतभेद, छोटी-मोटी नोकझोंक या रोज़मर्रा की तकरारें हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत "क्रूरता (Cruelty)" नहीं मानी जा सकतीं।जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा ने कहा, “धारा 13 के तहत क्रूरता वही मानी जाएगी, जो पीड़ित जीवनसाथी के मन में यह उचित आशंका पैदा करे कि साथ रहना उसके लिए हानिकारक या खतरनाक है। सामान्य झगड़े या छोटी-छोटी बातें क्रूरता के दायरे में नहीं आतीं। इस मामले में पति की ओर से...
वंतारा वन्यजीव केंद्र के खिलाफ SIT ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की सीलबंद रिपोर्ट
रिलायंस फाउंडेशन द्वारा जामनगर, गुजरात में संचालित वंतारा (ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर) के मामलों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में पेश की।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने कहा,"इस न्यायालय द्वारा गठित SIT ने सीलबंद लिफाफे में पेन ड्राइव के साथ रिपोर्ट पेश की, जिसमें रिपोर्ट के साथ-साथ उसके अनुलग्नक भी शामिल हैं। इसे स्वीकार किया जाता है> इसे रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया जाता...
सुप्रीम कोर्ट ने कुलपति के खिलाफ NUJS फैकल्टी की यौन उत्पीड़न की शिकायत को समय-सीमा समाप्त माना, कुलपति को दिया यह आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय विधि विज्ञान विश्वविद्यालय (WNSU) की फैकल्टी मेंबर द्वारा यूनिवर्सिटी के कुलपति के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, क्योंकि कथित घटना अप्रैल 2023 में हुई। हालांकि, शिकायत दिसंबर 2023 में दर्ज की गई, जो कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के तहत निर्धारित अधिकतम छह महीने की वैधानिक सीमा के बाद है।यह तर्क दिया गया कि यद्यपि अंतिम कथित यौन उत्पीड़न अप्रैल 2023...
सिर्फ MLA होने पर अलग ट्रायल नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 सितम्बर) को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें हरियाणा कांग्रेस विधायक मम्मन खान के लिए केवल विधायक होने के आधार पर अलग ट्रायल चलाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि Ashwini Kumar Upadhyay बनाम Union of India (2023) मामले में सार्वजनिक प्रतिनिधियों से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटारे पर जोर दिया गया है, लेकिन ऐसा करना कानून से हटकर किसी जनप्रतिनिधि को संयुक्त ट्रायल का अधिकार न देना उचित नहीं है।कोर्ट ने कहा,“विधायकों से जुड़े मामलों का...
CPS द्वारा संचालित PG Course की मान्यता रद्द करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से हस्तक्षेप की मांग की
बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स, मुंबई (CPS) द्वारा संचालित सभी पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स (PG Course) की मान्यता रद्द करने का फैसला बरकरार रखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से स्टूडेंट के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने हेतु हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट विकास सिंह और संजय आर. हेगड़े ने दलील दी कि CPS द्वारा संचालित कोर्स में एडमिशन...




















