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वयस्क महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ शेल्टर होम में रखना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मजिस्ट्रेट को महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शेल्टर होम भेजने का अधिकार तो है लेकिन वयस्क महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध अनिश्चितकाल तक वहीं रखना असंवैधानिक है। कोर्ट ने कहा कि जब महिला स्वयं रिहाई की मांग करती है तो मजिस्ट्रेट को उसे तत्काल मुक्त करना अनिवार्य है।मामले में शिकायतकर्ता ने बलात्कार का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। महिला ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा कि उसके पास परिवार नहीं है और वह माता-पिता के घर नहीं जाना चाहती। इसी आधार पर 30...
वकील पर न्यायपालिका को 'भ्रष्ट' कहने का आरोप, हाईकोर्ट ने शुरू की आपराधिक अवमानना कार्यवाही
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की, जिसने न्यायपालिका और जजों को भ्रष्ट बताया और संस्था पर अपमानजनक आरोप लगाए।जस्टिस अमित शर्मा ने कहा कि प्रथम दृष्टया, वकील ने न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(सी) में परिभाषित "आपराधिक अवमानना" की है।अदालत ने आदेश दिया कि वकील के खिलाफ आगे की कार्यवाही के लिए मामले को 19 नवंबर को खंडपीठ या रोस्टर पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। साथ ही उसे उक्त तिथि पर उपस्थित होने का भी निर्देश दिया।वकील के खिलाफ अदालत...
गुजरात हाईकोर्ट में सीनियर डेजिग्नेशन पाने के लिए न्यूनतम आयु 45 वर्ष और 20 वर्ष की प्रैक्टिस अनिवार्य
गुजरात हाईकोर्ट ने अपने नव-अधिसूचित गुजरात हाईकोर्ट (सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन) नियम, 2025 में यह अनिवार्य किया कि सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए आवेदन करने वाले वकीलों की पात्रता का दावा करने के लिए न्यूनतम आयु 45 वर्ष होनी चाहिए।17 सितंबर को प्रकाशित और अधिसूचित नियमों में कहा गया:"3. वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम के लिए पात्रता की शर्तें:(1) एक एडवोकेट सीनियर एडवोकेट के रूप में डेजिग्नेट होने के लिए पात्र होगा, यदि वह:(i) सीनियर एडवोकेट के रूप में डेजिग्नेट होने के लिए उसके मामले पर विचार किए जाने...
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल के बच्चे की हत्या के मामले में दोषियों की मृत्युदंड की सजा कम की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 2014 के युग गुप्ता हत्याकांड में चंदर शर्मा (26) और विक्रांत बख्शी (22) को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा कम करते हुए निर्देश दिया कि वे "अपनी अंतिम सांस तक" आजीवन कारावास की सजा काटेंगे।अदालत ने कहा,"...हमारे लिए इस धारणा पर आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है कि दोषी ने युग के साथ क्रूरता से व्यवहार किया, जिससे मृत्युदंड की कठोर सजा देना उचित हो... यह दलील कि आरोपी ने बच्चे को जिंदा टैंक में फेंक दिया था, रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों से समर्थित नहीं है।"अदालत ने सह-अभियुक्त तेजिंदर...
POCSO Act पर बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला: शादी और बच्चा होने से FIR रद्द नहीं होगी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल इसलिए कि नाबालिग लड़की ने शादी कर ली है और उसका एक बच्चा भी है पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत दर्ज FIR रद्द नहीं की जा सकती।जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस नंदेश देशपांडे की खंडपीठ ने 29 वर्षीय एक व्यक्ति और उसके माता-पिता के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। उन पर POCSO Act और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए।अदालत ने पाया कि नाबालिग लड़की और आरोपी के बीच प्रेम संबंध था, जिसे उनके परिवारों ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद दोनों...
नाबालिग बेटी को चुप कराने और आरोपी को यौन उत्पीड़न की अनुमति देने वाली माँ का कृत्य, POCSO Act के तहत 'उकसाने' के समान: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि माँ द्वारा अपनी नाबालिग बेटी को चुप कराने और आरोपी को उसका यौन शोषण और उत्पीड़न करने की अनुमति देने का कृत्य POCSO Act की धारा 17 के तहत "उकसाने" के समान है।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने POCSO Act की धारा 6 (पठित 17 और 21) के तहत अपराधों के लिए अपनी 11 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार के लिए उकसाने वाली एक माँ की दोषसिद्धि बरकरार रखी।अदालत ने उसे दी गई 25 साल के कठोर कारावास की सजा भी बरकरार रखी।अदालत ने कहा,"पीड़िता को चुप कराने, उसे समर्पण करने का निर्देश देने और...
Motor Accident Compensation - न्यूनतम मज़दूरी केवल शैक्षिक योग्यता के आधार पर तय नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यूनतम मज़दूरी किसी व्यक्ति की शैक्षिक योग्यता के आधार पर उसके द्वारा किए जा रहे कार्य की प्रकृति के संदर्भ के बिना निर्धारित नहीं की जा सकती।अदालत मोटर दुर्घटना मुआवज़े के मामले पर निर्णय दे रहा था, जहां आय की मात्रा पर विवाद था।यह मामला एक 20 वर्षीय बी.कॉम फाइनल इयर स्टूडेंट से संबंधित था, जिसने भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान में भी दाखिला लिया था। हालांकि, 2001 में एक मोटर दुर्घटना के बाद वह लकवाग्रस्त हो गया और अपनी मृत्यु तक दो दशकों तक बिस्तर पर पड़ा रहा।...
सुप्रीम कोर्ट ने डीएम गेमिंग लिमिटेड के खिलाफ FIR रद्द करने का फैसला बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें मेसर्स डीएम गेमिंग लिमिटेड के स्वामित्व वाले बेंगलुरु के एक मनोरंजन क्लब के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी गई थी, जहां पोकर खेला जाता है और इसमें अवैध गेमिंग का आरोप लगाया गया।हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले रोहित तिवारी बनाम कर्नाटक राज्य में अपने फैसले का हवाला देते हुए FIR रद्द दी थी, जिसमें कहा गया था कि पोकर और रम्मी कौशल के खेल हैं।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रद्द करने के आदेश के खिलाफ राज्य की विशेष अनुमति याचिका खारिज...
केंद्र के 'सहयोग' पोर्टल को बरकरार रखने वाले फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा X कॉर्प
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) ने घोषणा की कि वह कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए सहयोग पोर्टल को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया गया। इस पोर्टल का इस्तेमाल बिचौलियों को गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री हटाने के लिए स्वचालित नोटिस भेजने के लिए किया जाता है।सोमवार को एक पोस्ट में ग्लोबल अफेयर्स X ने कहा कि कंपनी हाईकोर्ट के फैसले से सम्मानपूर्वक असहमत है। इसने कहा कि प्लेटफॉर्म अपीलीय उपायों का सहारा लेने का इरादा रखता है।पिछले...
'बिहार शराब पर प्रतिबंध अधिनियम गैर-मादक पेय पदार्थों पर लागू नहीं होता': पटना हाईकोर्ट ने एनर्जी ड्रिंक निर्माता के खिलाफ FIR रद्द की
पटना हाईकोर्ट ने मेसर्स सिद्धि एंटरप्राइजेज और उसके कर्मचारियों के खिलाफ एनर्जी ड्रिंक के रूप में बीयर बेचने के आरोप में दर्ज FIR रद्द की। अदालत ने कहा कि संबंधित पेय पदार्थ भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित गैर-मादक पेय पदार्थों के स्वीकार्य मानकों के अंतर्गत आते हैं।जस्टिस आलोक कुमार पांडे ने सिद्धि एंटरप्राइजेज की मालिक कुमारी पूनम और दो अन्य लोगों द्वारा दायर रिट याचिका स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि FIR में बिहार मद्य निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 के तहत किसी संज्ञेय अपराध...
दिवंगत कर्मचारी के परिवार को मिलने वाले मुआवज़े के लिए टर्मिनल लाभ पर 'काल्पनिक ब्याज' भी गिना जाएगा : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि दिवंगत सरकारी कर्मचारी के परिवार को एक्स-ग्रेशिया मुआवज़ा देने के मामले में परिवार को मिले रिटायरमेंट लाभ (टर्मिनल बेनिफिट्स) पर मिलने वाले काल्पनिक ब्याज को भी आय का हिस्सा माना जाएगा।जस्टिस प्रतीक जालान ने टिप्पणी की कि इस योजना का उद्देश्य परिवार को कर्मचारी की मृत्यु के बाद तुरंत आर्थिक राहत पहुंचाना है। यह किसी तरह का अधिकार या हक़ नहीं है बल्कि परिवार की तत्काल ज़रूरत को देखते हुए बनाई गई योजना है।मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक कर्मचारी से जुड़ा...
दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल्स से दिवंगत वकीलों के परिवारों को आर्थिक सहायता की नीति बनाने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) को निर्देश दिया कि वे ऐसी नीति या योजना तैयार करें जिससे दिवंगत वकीलों के परिवारों को आर्थिक मदद मिल सके।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि वकीलों की आमदनी पूरी तरह उनके पेशेवर कामकाज पर निर्भर करती है। उनके निधन के बाद परिवार के पास कोई वित्तीय सहारा नहीं रहता।अदालत ने टिप्पणी की, “BCI और BCD से अनुरोध है कि वे कोई ऐसी नीति या योजना बनाएं, जिससे वकीलों के परिवार उनके...
दिल्ली हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में तीन आरोपियों को जमानत दी, ED के रवैये को बताया मनमाना
दिल्ली हाईकोर्ट ने 641 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन आरोपियों विपिन यादव, अजय और राकेश करवा को ज़मानत दी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्य आरोपी रोहित अग्रवाल जिसका रोल अधिक गंभीर बताया गया, उसको गिरफ्तार न करना और अन्य आरोपियों को जेल में रखना स्पष्ट रूप से मनमाना है।जस्टिस अमित महाजन ने कहा,“जब ऐसे आरोपी को गिरफ्तार ही नहीं किया गया, जिसका रोल आवेदकों से अधिक गंभीर बताया गया। एक ऐसे व्यक्ति को भी शामिल नहीं किया गया, जिस पर म्यूल...
राज्य अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से नहीं बच सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने ठेकेदार को बकाया भुगतान के साथ ब्याज देने का आदेश दिया
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि राज्य अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से नहीं बच सकता और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ठेकेदार को वर्ष 2017 से लंबित 97.87 लाख की राशि 6% ब्याज सहित अदा करें।जस्टिस वसीम सादिक नरगल ने यह आदेश मेसर्स सेंट सोल्जर इंजीनियर एंड कॉन्ट्रैक्टर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रशासनिक देरी या धन की कमी का बहाना बनाकर स्वीकृत भुगतान को रोकना मनमाना और असंवैधानिक है।मामला उस समय शुरू हुआ, जब...
दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी से बार-बार बलात्कार के दोषी पिता की 20 साल की जेल की सजा बरकरार रखी
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में अपनी 17 वर्षीय नाबालिग बेटी से बार-बार बलात्कार के दोषी पिता को दी गई 20 साल के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि यह सजा न्यायोचित और आनुपातिक है, जो अपराध की गंभीरता और पॉक्सो अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों को दर्शाती है।अदालत ने कहा, "पीड़िता की गवाही हालांकि दोषरहित नहीं है। मूल आरोप पर विश्वसनीय है और DNA रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि होती है। झूठे आरोप लगाने का कोई कारण साबित नहीं हुआ है। उसके जननांगों के नमूनों में अपीलकर्ता के वीर्य...
विवाह के बाद क्रूरता महिलाओं की गरिमा छीनती है, घरेलू हिंसा के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक घरों में क्रूरता महिलाओं की गरिमा को छीनती है। साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि दहेज और घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा,"यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कई महिलाओं को अपने वैवाहिक घरों में दहेज की मांग के कारण क्रूरता का सामना करना पड़ता है। ऐसी क्रूरता न केवल महिलाओं की गरिमा को छीनती है, बल्कि कई दुखद मामलों में उनकी जान भी ले लेती है। ये घटनाएं इस बात की कड़ी याद दिलाती हैं कि दहेज और घरेलू...
लोक अभियोजक द्वारा ब्रीफ तैयार करने के लिए समय मांगना 'अपमानजनक' टिप्पणी नहीं, न्यायालय को सहिष्णु होना चाहिए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि अदालतों से अपेक्षा की जाती है कि वे लोक सेवकों की छोटी-मोटी चूकों से निपटने में सहिष्णु और उदार हृदय वाले हों। अदालत ने कहा कि केवल इसलिए कि कोई लोक अभियोजक किसी मामले पर बहस करने में असमर्थ है या ब्रीफ तैयार करने के लिए समय मांगता है, यह आलोचना की मांग नहीं है।जस्टिस संजय धर ने यह टिप्पणी किशोर न्याय बोर्ड (JJB), सांबा द्वारा एक सहायक लोक अभियोजक (APP) के विरुद्ध दर्ज की गई अपमानजनक टिप्पणियों को खारिज करते हुए की।उन्होंने कहा,"अगर मामले की...
झारखंड हाईकोर्ट ने प्लास्टिक प्रतिबंध के क्रियान्वयन में विफलता के लिए भ्रष्टाचार को ज़िम्मेदार ठहराया, सुधारों का सुझाव दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार, बुनियादी ढांचे की कमी और कमज़ोर प्रवर्तन ने राज्य में प्लास्टिक कैरी बैग और एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध को अप्रभावी बना दिया।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ डॉ. शांतनु कुमार बनर्जी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा कानून होने के बावजूद प्लास्टिक प्रतिबंध के गंभीर क्रियान्वयन के अभाव को लेकर चिंता जताई गई।अदालत ने ज़ोर देकर कहा कि प्रवर्तन को प्रणालीगत सुधारों के साथ जोड़ा...
पति से बदला लेने के लिए पत्नी ने POCSO Act के तहत दर्ज कराया मामला, हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी को 'हथियार' के रूप में चुनने के लिए लगाई फटकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक माँ को फटकार लगाई, जिसने अपने अलग हुए पति के खिलाफ POCSO Act के तहत मामला दर्ज कराकर उससे बदला लेने के लिए अपनी नाबालिग बेटी को "हथियार" के रूप में चुना।जस्टिस अरुण मोंगा ने 2 सितंबर को दिए गए अपने फैसले में कहा,"बाल संरक्षण कानूनों की ढाल को प्रतिशोधात्मक मुकदमों के लिए तलवार में नहीं बदला जा सकता।"माँ ने 2020 में FIR दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि पीड़िता के पिता और चचेरे भाइयों ने उसकी नाबालिग बेटी का यौन शोषण किया। गौरतलब है कि महिला का अपने पति से झगड़ा हो गया...
जमानत देने का तरीका सीखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को दिया स्पेशल ट्रेनिंग लेने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया कि दिल्ली न्यायिक सेवा के दो न्यायिक अधिकारियों को बाध्यकारी निर्णयों का उल्लंघन करते हुए दो आरोपियों को ज़मानत देने के अवैध और गलत तरीके के लिए कम से कम सात दिनों की अवधि के लिए विशेष न्यायिक प्रशिक्षण लेना होगा।करोड़ों रुपये के एक घोटाले में आरोपी दंपत्ति को दी गई ज़मानत रद्द करते हुए अदालत ने उन न्यायिक अधिकारियों - अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट जिन्होंने ज़मानत दी और कड़कड़डूमा सेशन जज जिन्होंने इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया - को कम...



















