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धारा 54 और धारा 54-ए राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950: अवैध गतिविधियों और वाहनों या परिवहन साधनों के मालिकों की जिम्मेदारी
धारा 54 और धारा 54-ए राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950: अवैध गतिविधियों और वाहनों या परिवहन साधनों के मालिकों की जिम्मेदारी

राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950, राज्य में शराब और अन्य excisable articles (शुल्क योग्य वस्तुओं) के विनियमन (Regulation) से संबंधित है। इस अधिनियम के अध्याय IX में विभिन्न अपराधों और उनके लिए निर्धारित दंड का उल्लेख किया गया है।यह अध्याय अवैध गतिविधियों को नियंत्रित करने और कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए कठोर दंड की व्यवस्था करता है। इसमें मुख्य रूप से धारा 54 और धारा 54-ए शामिल हैं, जो अवैध गतिविधियों और वाहनों या परिवहन साधनों (Means of Conveyance) के मालिकों की जिम्मेदारी पर केंद्रित हैं। ...

Know The Law | सासंद/ विधायकों, लोक सेवकों, न्यायाधीशों, पेशेवरों आदि को सार्वजनिक भूमि के अधिमान्य आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नाराज़गी जताई
Know The Law | सासंद/ विधायकों, लोक सेवकों, न्यायाधीशों, पेशेवरों आदि को सार्वजनिक भूमि के अधिमान्य आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नाराज़गी जताई

आंध्र प्रदेश राज्य बनाम डॉ राव वीबीजे चेलिकानी के अपने हालिया फैसले में, सांसदों, विधायकों, लोक सेवकों, न्यायाधीशों, रक्षा कर्मियों, पत्रकारों आदि की आवासीय समितियों को भूमि के अधिमान्य आवंटन को रद्द करते हुए, अनुच्छेद 14 के तहत कानूनी चुनौतियों में मनमानी का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण मापदंडों का विश्लेषण किया।यहां सीजेआई संजीव खन्ना के विश्लेषण का विश्लेषण है (1) उचित वर्गीकरण के दोहरे परीक्षण पर अत्यधिक निर्भरता में दोष; (2) चुनौती दिए गए कानून या नीति के विधायी इरादे की जांच करने का तत्व...

Transfer Of Property Act के अंतर्गत किसी भी ट्रांसफर की जाने वाली प्रॉपर्टी की इनकम को स्टॉक करना
Transfer Of Property Act के अंतर्गत किसी भी ट्रांसफर की जाने वाली प्रॉपर्टी की इनकम को स्टॉक करना

इस एक्ट की धारा 17 में प्रावधान है कि संचयन के लिए निर्देश-"(1) जहाँ कि सम्पत्ति के किसी अन्तरण के निर्बन्धन निर्दिष्ट करते हैं कि उस सम्पत्ति से उद्भूत आय(क) अन्तरक के जीवन से, या(ख) अन्तरण की तारीख से, अठारह वर्ष की कालावधि से अधिक कालावधि तक पूर्णत: या भागतः संचित की जाएगी, वहाँ एतस्मिन्पश्चात् यथा उपबंधित के सिवाय ऐसा निदेश वहाँ तक शून्य होगा, जहाँ तक कि वह कालावधि, जिसके दौरान संचय करना निर्दिष्ट है, पूर्वोक्त कालावधियों में से दीर्घतर कालावधि से अधिक हो और ऐसी अन्तिम वर्णित कालावधि का अन्त...