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भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 19: भारत संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 19: भारत संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन

भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख में संविधान के अंतर्गत दी गई नगरपालिकायें और पंचायतों के संबंध में चर्चा की गई थी, इस आलेख के अंतर्गत भारत के संविधान के परिसंघ ढांचे को बरकरार रखने के उद्देश्य से संघ और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन पर किए गए उपबंधों पर चर्चा की जा रही है।संघ और राज्यों के बीच शक्ति का विभाजनभारत का संविधान एक परिसंघ संविधान है जिसके अंतर्गत संघ और राज्यों के लिए अलग-अलग व्यवस्था दी गई है। परिसंघ संविधान के लिए सबसे आवश्यक बात यह है कि संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 18: भारत के संविधान के अंतर्गत पंचायतें और नगरपालिकाएं
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 18: भारत के संविधान के अंतर्गत पंचायतें और नगरपालिकाएं

भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख में संविधान में उल्लेखित राज्य न्यायपालिका के संबंध में राज्यों के उच्च न्यायालय पर कुछ विशेष जानकारियों को लेकर चर्चा की गई थी, इस आलेख में भारत के संविधान के भाग 9 से संबंधित ग्राम पंचायतें और नगरपालिका पर विमर्श किया जा रहा है।पंचायतेंभारत के संविधान ने समाज की अंतिम पंक्ति तक लोकतंत्र को भेजने के प्रयास किए हैं। संविधान के भाग 9 संविधान के 73वें संशोधन और भाग 9(ए) संविधान के 74 वें संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा संविधान में जोड़े गए हैं। संविधान के 73वें...

एक्सप्लेनर: ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल क्या है? ट्रांजिट बेल कब दी जा सकती है?
एक्सप्लेनर: ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल 'क्या है? 'ट्रांजिट बेल' कब दी जा सकती है?

'टूलकिट' मामले के मद्देनजर हाल ही में "ट्रांजिट बेल" और "ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल" जैसे शब्दों ने ध्यान आकर्षित किया है।बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते शांतनु मुलुक को 10 दिन के ‌लिए एंटीसिपेटरी बेल दी थी, जिनकी गिरफ्तारी की मांग दिल्ली पुलिस ने टूलकिट मामले में की थी। इसके बाद, मुंबई स्थित वकील निकिता जैकब को भी इस मामले में तीन सप्ताह की एंटीसिपेटरी बेल दी गई।इस आलेख में "ट्राजिंट एंटीसिपेटरी बेल" या "ट्राजिंट बेल" की वैचारिक समझ प्रदान करने का प्रयास किया गया है, जिनका अर्थ एक ही है या एक...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 17: राज्य की न्यायपालिका, उच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिकता
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 17: राज्य की न्यायपालिका, उच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिकता

भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख में राज्य के विधान मंडल (विधानसभा) के संबंध में अध्ययन किया गया था इस आलेख में राज्य के महत्वपूर्ण अंग राज्य की न्यायपालिका के संबंध में उल्लेख किया जा रहा है।राज्य की न्यायपालिकाभारत के संघ को उसे अपनी न्यायपालिका दी गई है जिसे भारत का उच्चतम न्यायालय कहा जाता है और भारत के राज्यों को अलग न्यायपालिका दी गई है जो अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालय होते हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 214 से लेकर 237 तक राज्य न्यायपालिका के संबंध में उल्लेख किया गया है।...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 14: संघ की न्यायपालिका और भारत का उच्चतम न्यायालय
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 14: संघ की न्यायपालिका और भारत का उच्चतम न्यायालय

पिछले आलेख में केंद्रीय विधान मंडल के अंतर्गत भारत की संसद के संदर्भ में संवैधानिक उपबंधों पर चर्चा की गई थी, इस आलेख में संघ की न्यायपालिका भारत के उच्चतम न्यायालय के संबंध में चर्चा की जा रही है।भारत का संविधान एक संघीय यह संविधान है। भारत को राज्यों का संघ कहा गया है और इस राज्यों के संघ के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। सरकारों की शक्तियों का विभाजन एक लिखित संविधान के द्वारा किया गया है ताकि भविष्य में सरकारों के बीच किसी प्रकार का शक्तियों को लेकर कोई विवाद न हो। इस प्रकार का कोई...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 13: भारत की संसद, लोकसभा और राज्यसभा की संरचना
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 13: भारत की संसद, लोकसभा और राज्यसभा की संरचना

भारत के संविधान से संबंधित लिखे जा रहे हैं आलेखों में पिछले आलेख के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका और राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया के संदर्भ में सारगर्भित उल्लेख किया गया था, इस आलेख में केंद्र की विधायी शक्ति अर्थात लोकतंत्र के दूसरे स्तंभ विधायिका का उल्लेख किया जा रहा है जिसमें भारत की संसद लोकसभा और राज्यसभा की संरचना पर आवश्यक जानकारियों को लेखबद्ध किया जा रहा है।संसदीय लोकतंत्र को तीन हिस्सों में बांटा गया है जिसमें कार्यपालिका के बाद विधायिका का महत्वपूर्ण स्थान है। भारत के संविधान में...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 12: संघ की कार्यपालिका और राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 12: संघ की कार्यपालिका और राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया

पिछले आलेख में भारत के संविधान के अंतर्गत राज्य की नीति के निदेशक तत्व के संबंध में चर्चा की गई थी, इस आलेख में भारत के संविधान के भाग 5 संघ की कार्यपालिका जिसमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का उल्लेख सर्वाधिक महत्वपूर्ण है पर चर्चा की जा रही है।संघ की कार्यपालिकाजैसा कि पूर्व के आलेख में यह उल्लेख किया गया है भारत के संविधान के अंतर्गत संघ का अर्थ केंद्र है और राज्य का अर्थ प्रांत है। भारत राज्यों का एक संघ है। राज्यों के पास अपनी पृथक शक्तियां हैं और संघ के पास अपनी पृथक शक्तियां हैं परंतु फिर...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 11: भारत के संविधान में राज्य की नीति के निदेशक तत्व ( Directive Principles of State Policy)
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 11: भारत के संविधान में राज्य की नीति के निदेशक तत्व ( Directive Principles of State Policy)

पिछले आलेख में भारत के संविधान से संबंधित अनुच्छेद 32 के अंतर्गत मूल अधिकारों के उपचार के संबंध में चर्चा की गई थी, इस आलेख में भारत के संविधान के भाग 4 राज्य की नीति के निदेशक तत्व का अध्ययन किया जा रहा है।राज्य की नीति के निदेशक तत्वभारत के संविधान के भाग 3 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है, इसके ठीक बाद भाग 4 में राज्य की नीति के निदेशक तत्व का उल्लेख किया गया है। भाग 4 के अनुच्छेद 36 से लेकर अनुच्छेद 51 तक राज्य की नीति के निदेशक तत्व समाविष्ट किये गए हैं। राज्य की नीति के...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 10: भारत के संविधान के अंतर्गत सांविधानिक उपचारों का अधिकार
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 10: भारत के संविधान के अंतर्गत सांविधानिक उपचारों का अधिकार

पिछले आलेख में भारत के संविधान के अंतर्गत अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का अध्ययन किया गया था, इस आलेख में संविधान की मूल आत्मा कहे जाने वाले अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सांविधानिक उपचारों के अधिकार के संबंध में अध्ययन किया जा रहा है।संवैधानिक उपचारभारत के संविधान में केवल संविधान में मौलिक अधिकारों की ही घोषणा नहीं की है अपितु न्यायालय द्वारा इन मौलिक अधिकारों को प्रवर्तन कराने का रास्ता भी बताया है। संविधान निर्माताओं का ऐसा मानना था कि यदि संविधान के मौलिक अधिकारों को प्रवर्तनीय...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 9: भारत के संविधान के अंतर्गत धर्म की स्वतंत्रता
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 9: भारत के संविधान के अंतर्गत धर्म की स्वतंत्रता

पिछले आलेख में भारत के संविधान से संबंधित बन्दीकरण विरोध से संबंधित संवैधानिक संरक्षण के संदर्भ में अनुच्छेद 22 का उल्लेख किया गया था, इस आलेख में भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्राप्त धर्म की स्वतंत्रता के संबंध में उल्लेख किया जा रहा है।धर्म की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकारभारत के संविधान के अनुच्छेद 25 से लेकर 28 तक धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के संबंध में उल्लेख किया गया है। संविधान में पंथनिरपेक्ष राज्य शब्द को अभिव्यक्त रूप से उल्लेखित नहीं किया गया है परंतु इस बात का कोई...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 8: भारत के संविधान के अंतर्गत व्यक्ति को बंदी बनाए जाने के विरुद्ध मूल अधिकार
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 8: भारत के संविधान के अंतर्गत व्यक्ति को बंदी बनाए जाने के विरुद्ध मूल अधिकार

पिछले आलेख में भारत के संविधान से संबंधित अनुच्छेद-21 के अंतर्गत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार के संबंध में चर्चा की गई थी, इस आलेख में भारत के संविधान के अंतर्गत अनुच्छेद-22 में प्राप्त 'बन्दीकरण के विरुद्ध अधिकार' के संबंध में चर्चा की जा रही है।बन्दीकरण के विरुद्ध संवैधानिक संरक्षण-भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का उल्लेख किया गया है। मेनका गांधी के प्रकरण में प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संबंध में विस्तृत विवेचना की गई और अनुच्छेद 21 के अंतर्गत...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 7: भारत के संविधान के अंतर्गत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 7: भारत के संविधान के अंतर्गत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता

पिछले आलेख में भारत के संविधान से संबंधित स्वतंत्रता के अधिकार पर दिए गए अनुच्छेद 19 का अध्ययन किया गया था, इस आलेख में भारत के संविधान अनुच्छेद-21 के अंतर्गत दिए गए प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया जा रहा है।प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद-21भारत के संविधान के भाग 3 मूल अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद 21 सर्वाधिक महत्वपूर्ण अनुच्छेद है। यदि महत्ता के दृष्टिकोण से इस अनुच्छेद को देखा जाए तो समस्त मूल अधिकारों का निचोड़ हमें इस अनुच्छेद के अंतर्गत प्राप्त होता है। शब्दों...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 6: भारत के संविधान के अंतर्गत स्वतंत्रता का अधिकार
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 6: भारत के संविधान के अंतर्गत स्वतंत्रता का अधिकार

भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख में लोक सेवाओं में समानता के संदर्भ में उल्लेख किया गया था, इस आलेख में भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 से लेकर 22 तक दिए गए स्वतंत्रता के अधिकार के संदर्भ में चर्चा की जा रही है।स्वतंत्रता का अधिकारभारतीय स्वतंत्रता संग्राम लड़ने का एक मूल लक्ष्य यह भी था कि भारत के नागरिकों को स्वतंत्रता के अधिकार मिले जो अधिकार उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य के होते हुए नहीं मिल पा रहे थे। स्वतंत्रता व्यक्ति का नैसर्गिक अधिकार है और इस प्रकार के नैसर्गिक अधिकार को किसी भी शासन...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 5: भारत के संविधान के अंतर्गत लोक सेवाओं में अवसर की समानता
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 5: भारत के संविधान के अंतर्गत लोक सेवाओं में अवसर की समानता

पिछले आलेख में भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत विधि के समक्ष समान संरक्षण के संदर्भ में चर्चा की गई थी, इस आलेख में लोक सेवाओं में अवसर की समानता के अधिकार के संबंध में चर्चा की जा रही है जिसका उल्लेख भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 के अंतर्गत किया गया है।लोक सेवाओं में अवसर की समानता (अनुच्छेद 16)लोक सेवाएं अर्थात सरकारी नौकरी। भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 के अंतर्गत भारत क्षेत्र के अंतर्गत किसी भी नागरिक के बीच कोई भी सरकारी नौकरी अर्थात लोक सेवाओं में किसी प्रकार का ऐसा भेदभाव नहीं...

भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 3: भारत के संविधान में मूल अधिकार क्या होतें हैं
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 3: भारत के संविधान में मूल अधिकार क्या होतें हैं

पिछले आलेख में भारत का राज्य क्षेत्र तथा भारत की नागरिकता के संबंध में सारगर्भित उल्लेख किया गया था, इस आलेख में भारत के संविधान के भाग-3 में दिए गए मूल अधिकारों पर एक संक्षिप्त चर्चा के माध्यम से जानकारी प्रेषित की जा रही है। मूल अधिकारभारत के संविधान के भाग-3 के अंतर्गत अनुच्छेद 12 से लेकर अनुच्छेद 35 तक मूल अधिकारों का उल्लेख किया गया है। इन मूल अधिकारों को मनुष्य के नैसर्गिक अधिकार भी कहे जाते हैं। ऐसे अधिकार जो किसी मनुष्य को जन्मजात प्राप्त होते हैं, कोई भी स्वतंत्रता किसी भी मनुष्य को दी...