केरल हाईकोर्ट
S. 144 BNSS/S.125 CrPC| अविवाहित बालिग ईसाई बेटी पिता से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 के अंतर्गत प्रावधान की योजना, बालिग बेटी द्वारा भरण-पोषण के दावे पर विचार नहीं करती, जब तक कि वह शारीरिक या मानसिक असामान्यता या चोट के कारण अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ न हो।जस्टिस डॉ. कौसर एडप्पागथ ने यह भी कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम [HAMA] और मुस्लिम पर्सनल लॉ के विपरीत, ईसाइयों पर लागू पर्सनल लॉ में बालिग हो चुकी अविवाहित बेटी के भरण-पोषण...
BCI ने केरल के सभी लॉ कॉलेजों में 'ट्रांसजेंडर' वर्ग के लिए दो अतिरिक्त सीटों को मंजूरी दी, हाईकोर्ट को दी गई जानकारी
केरल हाईकोर्ट को गुरुवार (6 नवंबर) को यह जानकारी दी गई कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए केरल के सभी लॉ कॉलेजों में ट्रांसजेंडर वर्ग के लिए दो अतिरिक्त सीटें (supernumerary seats) जोड़ने की अंतरिम स्वीकृति (interim approval) दे दी है।जस्टिस वी.जी. अरुण एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें सरकारी लॉ कॉलेजों में पांच वर्षीय एकीकृत एलएलबी पाठ्यक्रम (Integrated Five-Year LL.B Course) में ट्रांसजेंडर वर्ग के लिए आरक्षण की मांग की गई थी। अदालत ने कहा,“यह...
'केवल अधिनियमन पर्याप्त नहीं': केरल हाईकोर्ट ने JJ Actऔर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु निर्देश जारी किए
केरल हाईकोर्ट ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 और सम्पूर्णा बेहुरा बनाम भारत संघ [2018 (4) SCC 433] में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक निर्देश जारी किए हैं।चीफ जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस बसंत बालाजी की खंडपीठ ने दो संबंधित मामलों में निर्णय सुनाते हुए ये निर्देश जारी किए, एक स्वत: संज्ञान याचिका और दूसरी नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी और उसके कार्यक्रम निदेशक सम्पूर्णा बेहुरा द्वारा स्थापित...
केरल में गुम हुआ कुवैती व्यक्ति, हाईकोर्ट ने कहा- 'हर जीवन अमूल्य'; SIT को दिया खोजने का निर्देश
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार (5 नवंबर) को सूरज लामा के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) से कहा कि वह उनके बेटे संतन लामा द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करे। सूरज लामा कुवैत से कोच्चि पहुंचने के बाद 5 अक्टूबर से लापता बताए जा रहे हैं।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ ने संतन लामा द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में अपने पिता की तस्वीर को अतिरिक्त दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करने के लिए एक अंतरिम आवेदन स्वीकार कर लिया।आवेदन के साथ दायर हलफनामे में उनके लापता पिता...
मुस्लिम पुरुष की दूसरी शादी के रजिस्ट्रेशन से पहले पहली पत्नी की बात ज़रूर सुनी जाए, अगर वह आपत्ति करे तो पक्षकारों को अदालत भेजा जाए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यवस्था दी कि केरल विवाह पंजीकरण (सामान्य) नियम 2008 के अनुसार, मुस्लिम पुरुष की दूसरी शादी का रजिस्ट्रेशन करते समय वैधानिक प्राधिकारियों द्वारा पहली पत्नी को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने कहा कि यद्यपि मुस्लिम व्यक्ति कुछ परिस्थितियों में किसी पुरुष को दूसरी शादी की अनुमति देता है। फिर भी यदि विवाह का पंजीकरण किया जाता है तो देश का कानून लागू होगा। तब धर्म संवैधानिक अधिकारों के आगे गौण हो जाता है।यह टिप्पणी एक मुस्लिम पुरुष और उसकी...
'लव जिहाद' शब्द का असल मतलब क्या है?: फिल्म 'हाल' पर आपत्तियों की सुनवाई के दौरान केरल हाईकोर्ट का सवाल
सोमवार (3 अक्टूबर) को शेन निगम अभिनीत फिल्म 'हाल' पर दर्ज आपत्तियों की सुनवाई के दौरान केरल हाईकोर्ट ने यह सवाल उठाया कि “लव जिहाद” शब्द का वास्तव में अर्थ क्या है?जस्टिस वी.जी. अरुण ने मौखिक रूप से पूछा, “लव जिहाद' शब्द का असल मतलब क्या है? जब यह एक विशेष धर्म से जुड़ा होता है, तो इसे 'जिहाद' क्यों कहा जाता है?” यह शब्द केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा दायर काउंटर एफिडेविट में इस्तेमाल किया गया था। इसमें कहा गया था कि रीवाइजिंग कमेटी, जिसमें दो विषय विशेषज्ञ शामिल थे, ने यह पाया कि...
शक करने वाला पति वैवाहिक जीवन को नर्क बना सकता है: केरल हाईकोर्ट ने बेवफाई के संदेह में फंसी महिला को तलाक दिया
केरल हाईकोर्ट ने तलाक देते हुए कहा कि पति का बिना कारण पत्नी पर शक करना मानसिक क्रूरता का गंभीर रूप है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब पत्नी ने कोट्टायम फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा,“विवाह आपसी विश्वास, प्रेम और समझ पर टिका होता है। एक शक करने वाला पति पत्नी का मानसिक शांति और आत्मसम्मान छीन लेता है। जब भरोसे की जगह शक ले लेता है, तो रिश्ते का अर्थ खत्म हो जाता है।” पत्नी ने आरोप लगाया कि पति...
'महर' की वापसी केवल 'खुला नामा' से ही नहीं, पक्षकारों के बयान से भी सुनिश्चित की जा सकती है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि 'महर' (विवाह में पति द्वारा पत्नी को दिया जाने वाला प्रतिफल) की वापसी केवल 'खुला नामा' से ही नहीं, बल्कि 'खुला' द्वारा तलाक की घोषणा के लिए मुस्लिम पत्नी की याचिका पर विचार करते समय पक्षकारों के बयान से भी सुनिश्चित की जा सकती है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ, फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक को चुनौती देने वाली पति द्वारा दायर अपील पर विचार कर रही थी।अपीलकर्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए उन्होंने तर्क दिया कि फैमिली कोर्ट का...
'अगर वह वाकई वकील है तो यह चिंताजनक है': केरल हाईकोर्ट ने महिला वकील के दुर्व्यवहार और जजों पर संदेह के लिए आलोचना की
केरल हाईकोर्ट ने खुद को वादी बताकर अपने तलाक के आदेश को चुनौती देने के लिए स्वयं अदालत में पेश होने वाली महिला वकील को उसके (दुर्व्यवहार) के लिए फटकार लगाई।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ, एर्नाकुलम फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश और फैसले को अमान्य करने की याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।इस मामले की सुनवाई इस बात पर विचार करने के लिए की जा रही थी कि क्या रिट याचिका को क्रमांकित करने की आवश्यकता है, क्योंकि रजिस्ट्री ने मामले में कई खामियां चिह्नित की हैं।...
S.27 Evidence Act | एक अभियुक्त द्वारा दी गई जानकारी सभी अभियुक्तों को जोड़ने के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि एक अभियुक्त से प्राप्त जानकारी, जिससे खुलासा हुआ, उसका इस्तेमाल सभी अभियुक्तों को कथित अपराध से जोड़ने के लिए नहीं किया जा सकता।वर्तमान मामले में अभियोजन पक्ष ने प्रदर्श पी7(ए) के स्वीकारोक्ति पर भरोसा किया। हालांकि, न्यायालय ने महसूस किया कि इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रत्येक अभियुक्त द्वारा दी गई सटीक जानकारी अलग-अलग दर्ज या सिद्ध नहीं की गई।जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन ने टिप्पणी की कि यह मानना असंभव है कि ऐसे मामले में सभी अभियुक्तों ने एक...
केरल हाईकोर्ट ने हिजाब मामले में छात्रा के स्कूल छोड़ने के बाद DDE के आदेश के खिलाफ याचिका बंद की
केरला हाईकोर्ट ने शुक्रवार (24 अक्टूबर) को सेंट रीटा स्कूल की याचिका को बंद कर दिया, जिसमें स्कूल ने एर्नाकुलम के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (DDE) के नोटिस को चुनौती दी थी कि एक मुस्लिम छात्रा को हेडस्कार्फ़ पहनकर कक्षा में आने की अनुमति दी जाए। कोर्ट को बताया गया कि छात्रा के माता-पिता ने अब उसका प्रवेश वापस लेने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने नोट किया कि बेहतर समझ बनी और संविधान की नींव का “भाईचारा” मजबूत बना रहा। जस्टिस वी.जी. अरुण ने कहा कि माता-पिता के निर्णय के बाद विवादास्पद मुद्दों पर जाने...
केरल हाई कोर्ट ने BCI को केरल के सभी लॉ कॉलेजों में ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए 2 सीटें मंजूर करने का निर्देश दिया
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (24 अक्टूबर) को अंतरिम आदेश पारित करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया कि राज्य सरकार के अनुरोध के अनुसार केरल के सभी लॉ कॉलेजों में ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए दो अतिरिक्त सीटों की मंज़ूरी दी जाए।जब यह मामला जस्टिस वी.जी. अरुण के समक्ष आया, तो याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि पिछली सुनवाई में BCI को निर्देश दिया गया था कि वह इस मामले में निर्णय लेने के लिए एक सामान्य बैठक आयोजित करने की तारीख फाइनल करे। BCI के स्टैंडिंग काउंसल ने कोर्ट को बताया कि यह...
हिजाब विवाद: केरल हाईकोर्ट ने डीडीई के आदेश पर रोक से किया इनकार, राज्य सरकार से मांगा जवाब
केरल हाईकोर्ट ने राज्य के अटॉर्नी को एर्नाकुलम के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (DDE) द्वारा जारी एक निर्देश पर स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया है, जिसमें सेंट रीटा पब्लिक स्कूल — एक ईसाई प्रबंधन द्वारा संचालित सीबीएसई से संबद्ध विद्यालय — को एक मुस्लिम छात्रा को हिजाब पहनकर कक्षाओं में उपस्थित होने की अनुमति देने के लिए कहा गया था।जस्टिस वी.जी. अरुण ने इस मामले में राज्य सरकार को निर्देश देने को कहा, जबकि उन्होंने अंतरिम स्थगन आदेश देने से इनकार कर दिया। जब स्कूल के वकील ने स्थगन आदेश की मांग...
फैमिली कोर्ट को मौखिक साक्ष्य का मूल्यांकन सामान्य मानवीय व्यवहार की पृष्ठभूमि में बिना सामान्यीकरण या रूढ़िबद्धता के करना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक निर्णय में कहा कि फैमिली कोर्ट को मौखिक साक्ष्य के अलावा अन्य कोई साक्ष्य उपलब्ध न होने पर सामान्यीकरण या रूढ़िबद्धता के बिना, सामान्य मानवीय व्यवहार की पृष्ठभूमि में साक्ष्यों का मूल्यांकन करने से बचना चाहिए।कोर्ट ने आगे कहा कि फैमिली कोर्ट को मौखिक साक्ष्य का भी मूल्यांकन करना चाहिए और प्रायिकताओं की प्रधानता का सहारा लेना चाहिए।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ पत्नी द्वारा प्रतिवादी पति से तलाक की अपनी याचिका खारिज किए जाने के विरुद्ध...
लोकतंत्र को कमजोर करने वाला कदम: केरल हाईकोर्ट में BCI के 2400% रजिस्ट्रेशन फीस वृद्धि के खिलाफ याचिका
केरल हाईकोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा राज्य बार काउंसिल चुनावों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 5,000 से बढ़ाकर 1,25,000 करने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। यह वृद्धि करीब 2400% की बताई गई।यह याचिका एडवोकेट राजेश विजयन द्वारा दायर की गई, जो 1996 में वकील के रूप में नामांकित हुए और 2019 से केरल बार काउंसिल के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला मनमाना, अवैध, असंगत और अनुपातहीन है तथा यह एडवोकेट्स एक्ट 1961 और बार काउंसिल ऑफ केरल इलेक्शन रूल्स 1979 का उल्लंघन करता...
समझौते की राशि लेने के बाद आपसी तलाक से पीछे हटने की पत्नी की अपील खारिज
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पत्नी द्वारा दायर वैवाहिक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने आपसी सहमति से तलाक की याचिका से पीछे हटने की मांग की थी, जिसे उसने अपने पति के साथ मिलकर दाखिल किया था।पत्नी ने यह कहते हुए सहमति से तलाक देने से इनकार कर दिया था कि समझौते की शर्तों में उसे धोखे से फंसाया गया। लेकिन डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस देवन् रामचन्द्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता शामिल थे, ने पाया कि पत्नी ने पति द्वारा समझौते के तहत जमा कराई गई राशि निकाल ली थी। ...
SC/ST Act | कोई ठोस अपराध नहीं पाया जाता है तो अग्रिम ज़मानत देने पर कोई रोक नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि उन मामलों में अग्रिम ज़मानत देने पर रोक लागू नहीं होगी, जहां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 3(2)(v) के तहत अपराध का आरोप लगाया गया हो, बशर्ते कि प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष हो कि 10 वर्ष के कारावास से दंडनीय कोई ठोस अपराध नहीं किया गया।जस्टिस गोपीनाथ पी. ने कहा:"दूसरे शब्दों में, ऐसे मामलों में जहां आरोप यह है कि SC/ST Act की धारा 3(2)(v) के तहत कोई अपराध किया गया और जब यह न्यायालय प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष निकालता है कि 10 वर्ष या उससे...
इस्लाम में बहुविवाह तभी मान्य जब पति पत्नियों के बीच न्याय कर सके: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की है कि इस्लाम में बहुविवाह (Polygamy) केवल तभी मान्य है जब पुरुष अपनी पत्नियों के साथ समान न्याय करने में सक्षम हो।जस्टिस पी.वी. कुन्हिकृष्णन ने यह अवलोकन उस समय किया जब उन्होंने एक पुनरीक्षण याचिका का निपटारा करते हुए परिवार न्यायालय (Family Court) के आदेश को बरकरार रखा। परिवार न्यायालय ने पत्नी की उस मांग को खारिज कर दिया था जिसमें उसने अपने पति से ₹10,000 मासिक भरण-पोषण की मांग की थी। पति एक नेत्रहीन व्यक्ति है, जो भीख और पड़ोसियों की कभी-कभी मिलने वाली मदद से...
भिखारी पति से पत्नी को गुज़ारा भत्ता नहीं दिलवाया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि जो व्यक्ति भिक्षा पर निर्भर है, उसे दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत पत्नी को भरण-पोषण (maintenance) देने का आदेश नहीं दिया जा सकता, भले ही पत्नी उससे गुज़ारा भत्ता की मांग करे।जस्टिस पी.वी कुनहीकृष्णन ने पुनरीक्षण याचिका का निपटारा करते हुए फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें याचिकाकर्त्री द्वारा अपने पति से ₹10,000 मासिक गुज़ारा भत्ता मांगने की अर्जी खारिज कर दी गई थी। पति नेत्रहीन है और भिक्षा तथा पड़ोसियों से मिलने वाली कभी-कभार की मदद पर...
Hindu Marriage Act | अपील अवधि के दौरान पूर्व पति/पत्नी द्वारा डाइवोर्स डिक्री को चुनौती नहीं दिए जाने पर दूसरा विवाह वैध: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यवस्था दी कि पूर्व विवाह को भंग करने वाले डाइवोर्स डिक्री के विरुद्ध अपील करने के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया गया विवाह अवैध नहीं माना जाएगा, यदि पूर्व पति/पत्नी द्वारा आदेश को चुनौती नहीं दी जाती।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ ने यह निर्णय फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पत्नी (याचिकाकर्ता) की मूल याचिका पर विचार करते हुए पारित किया।फैमिली कोर्ट ने पति (प्रथम प्रतिवादी) को तलाक के आवेदन में अपनी दलीलों में संशोधन करने की...




















