युवाओं की मानसिक स्थिति चिंताजनक, माता-पिता निगरानी रखें: केरल हाईकोर्ट

Praveen Mishra

8 March 2025 5:22 PM IST

  • युवाओं की मानसिक स्थिति चिंताजनक, माता-पिता निगरानी रखें: केरल हाईकोर्ट

    केरल हाईकोर्ट ने कहा कि इस देश की युवा पीढ़ी की मानसिक स्थिति चौंकाने वाली और चिंताजनक है।

    कोर्ट ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें एक 25 वर्षीय बेटे ने नए साल की पूर्व संध्या का जश्न मनाने के लिए पैसे न देने पर अपनी मां पर गंभीर हमला कर दिया था।

    युवा पीढ़ी के इस व्यवहार पर चिंता व्यक्त करते हुए जस्टिस पी.वी. कुन्हिकृष्णन ने कहा,

    "हमारे देश के युवाओं की मानसिक स्थिति चौंकाने वाली और चिंताजनक है। नए साल का जश्न मनाने के लिए पैसे न देने पर याचिकाकर्ता ने अपनी ही मां पर हमला कर गंभीर चोटें पहुंचाईं।

    कोर्ट ने कहा कि युवा पीढ़ी को दोष देने से कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि समाज और माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाएं।

    कोर्ट ने कहा, "युवा पीढ़ी को दोष देने से कोई लाभ नहीं है। समाज और माता-पिता को उन पर करीबी नजर रखनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि उनके संबंध अच्छे लोगों के साथ हों।"

    कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका तभी स्वीकार की जब मां ने एक हलफनामा दायर कर यह कहा कि उसे अपने बेटे की रिहाई पर कोई आपत्ति नहीं है। हलफनामे में मां ने व्यक्त किया कि कोई भी मां अपने बेटे को जेल में नहीं देख सकती।

    कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता को हिरासत में रखने से उसकी मां का आघात और बढ़ेगा और अदालत मजबूरी में बेटे को जमानत देने के लिए बाध्य है।

    कोर्ट ने कहा, "मुझे यकीन है कि उसकी मां के शरीर के घाव अभी तक ठीक नहीं हुए होंगे, लेकिन बेटे के प्रति उसका प्रेम इन घावों से बढ़कर है। मां को होने वाले आघात और उसकी पीड़ा को देखते हुए, मैं मजबूर होकर याचिकाकर्ता को जमानत दे रहा हूं। एक मां का अपने बेटे के प्रति प्रेम गुलाब की तरह होता है – जो हमेशा खिला रहता है, इस युवक को हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा, जिससे उसकी मां की पीड़ा और बढ़े। उसे कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जा सकती है।"

    कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमानत देते समय कड़ी शर्तें लगाई। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता का बेटा किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त होता है, तो उसकी मां संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकती है।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस को यदि ऐसी कोई शिकायत मिलती है, तो वे संबंधित न्यायालय में याचिकाकर्ता की जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।


    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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