हाईकोर्ट

अगर कोई उड़ान नहीं तो ₹500 करोड़ क्यों खर्च किए? हाईकोर्ट ने जबलपुर हवाई अड्डे की उपेक्षा के लिए राज्य सरकार से सवाल किया
अगर कोई उड़ान नहीं तो ₹500 करोड़ क्यों खर्च किए? हाईकोर्ट ने जबलपुर हवाई अड्डे की उपेक्षा के लिए राज्य सरकार से सवाल किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अन्य प्रमुख शहरों से जबलपुर की उड़ान कनेक्टिविटी के संबंध में 'दूसरों के साथ किए गए व्यवहार' के लिए फटकार लगाई।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि जबलपुर हवाई अड्डे के उन्नयन पर लगभग ₹500 करोड़ खर्च करने के बावजूद, शहर से कई उड़ानें बंद कर दी गईं।जजों ने राज्य सरकार से मौखिक रूप से पूछा,"आपने इतना पैसा क्यों खर्च किया? रीवा से कम...

सर्विस के दौरान दिव्यांगता होती है तो कर्मचारी को सेवामुक्त करने के बजाय उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सर्विस के दौरान दिव्यांगता होती है तो कर्मचारी को सेवामुक्त करने के बजाय उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जहां दिव्यांगता सेवा के दौरान प्राप्त होती है, वहां कर्मचारी की सेवाएं समाप्त करने के बजाय उसे उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए।दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 20 [रोज़गार में भेदभाव न करना] का हवाला देते हुए जस्टिस अब्दुल मोइन ने कहा,“अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि जहां कोई कर्मचारी अपनी सेवा के दौरान दिव्यांगता प्राप्त करता है, उसकी सेवाएं समाप्त नहीं की जानी चाहिए, बल्कि नियोक्ता द्वारा उसे उपयुक्त पद पर ट्रांसफर करने और उसके...

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के आदेश के बावजूद निपटाए गए मामले को फिर से उठाने पर जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के आदेश के बावजूद निपटाए गए मामले को फिर से उठाने पर जुर्माना लगाया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो प्रतिवादियों को दिया जाना है। 2013 में पहले ही निपटाए जा चुके एक मामले को अदालत के फैसले को लागू करने के बजाय बार-बार चुनौती देने पर प्रतिवादियों को यह जुर्माना देना होगा।जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ, 2013 के पूर्व निपटाए गए आदेश के आधार पर 2023 में पारित सिंगल जज के आदेश के विरुद्ध दायर अंतर-न्यायालयीय अपील पर सुनवाई कर रही थी।प्रतिवादी 1985 में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुआ था,...

मिसिंग व्यक्तियों के मामलों में जांच से असंतुष्ट होने पर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका सामान्य तौर पर नहीं दायर की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
मिसिंग व्यक्तियों के मामलों में जांच से असंतुष्ट होने पर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका सामान्य तौर पर नहीं दायर की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि किसी लापता व्यक्ति के मामले में यह याचिका सिर्फ इसलिए नहीं दी जा सकती कि जांच की स्थिति जाननी हो या जांच के तरीके से संतुष्ट न हों।न्यायालय ने बताया कि बन्दी प्रत्यक्षीकरण की शक्ति बढ़ी है, लेकिन इसके लिए कोई सख्त नियम नहीं है। यदि किसी को जांच की निगरानी या प्रभावी जांच के निर्देश चाहिए, तो इसके लिए आपराधिक प्रक्रिया कानून में वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, और ऐसे मामलों को सक्षम अदालत देखेगी। यह याचिका...

पुलिस गवाह के बयानों की सच्चाई नहीं परख सकती: MP हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को लगाई फटकार, SP को तलब किया
पुलिस गवाह के बयानों की सच्चाई नहीं परख सकती': MP हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को लगाई फटकार, SP को तलब किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस मामले में पुलिस की निंदा की, जिसमें 3 वर्षीय बच्चे की मौत होने वाले हादसे की जांच करने के बजाय जांच अधिकारी (IO) ने शिकायतकर्ता और गवाहों से इस तरह सवाल किए कि उनकी बातों को खारिज करने की कोशिश की जा रही थी।हाईकोर्ट ने SP को अगले सुनवाई के दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया और सुनवाई को 14 नवंबर तक स्थगित कर दिया। चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेव और जस्टिस विनय सारफ की खंडपीठ ने कहा: "हमारे सामने प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता, उनकी पत्नी और...

व्यवसाय सीमित हो सकता है लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं होना चाहिए: ग्रीन पटाखों की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी
व्यवसाय सीमित हो सकता है लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं होना चाहिए: ग्रीन पटाखों की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी

ग्रीन पटाखों की बिक्री और खरीद पर लगे प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि व्यवसाय को सीमित किया जा सकता है लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं होना चाहिए।कोर्ट 2017 में हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए हाईकोर्ट ने 2017 में निर्देश दिया था कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा राज्य पिछले वर्ष यानी 2016 में जारी किए गए अस्थायी लाइसेंसों की कुल...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दंगा मामले में पुलिस की याचिका खारिज की, ताहिर हुसैन से जुड़े आगजनी केस में गवाह को दोबारा बुलाने की मांग ठुकराई
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दंगा मामले में पुलिस की याचिका खारिज की, ताहिर हुसैन से जुड़े आगजनी केस में गवाह को दोबारा बुलाने की मांग ठुकराई

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े आगजनी मामले के ट्रायल में अभियोजन गवाह को फिर से बुलाने की मांग करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस मामले के आरोपियों में से एक पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता ताहिर हुसैन भी हैं।मामले को कुछ देर सुनने के बाद जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने आदेश में कहा,"दलीलें सुनी गईं, रिकॉर्ड का अवलोकन किया गया। याचिका खारिज की जाती है। कोई मेरिट नहीं है।"पुलिस के वकील ने तर्क...

राजस्थान सरकार ने ट्रांसजेंडर को OBC श्रेणी में रखने के फैसले का हाईकोर्ट में किया बचाव, कहा - आरक्षण नीति कार्यपालिका का विषय
राजस्थान सरकार ने ट्रांसजेंडर को OBC श्रेणी में रखने के फैसले का हाईकोर्ट में किया बचाव, कहा - आरक्षण नीति कार्यपालिका का विषय

राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने हाई कोर्ट में अपने उस सर्कुलर का बचाव किया, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में वर्गीकृत किया गया, बजाय इसके कि उन्हें क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) दिया जाए।जनवरी, 2023 के इस सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में सरकार ने कहा कि नीति-निर्माण का क्षेत्र, जिसमें आरक्षण नीति भी शामिल है। इसकी सीमा तथा संरचना कार्यपालिका और विधायी क्षमता का विषय है।सरकार ने तर्क दिया कि वैधानिक ढांचे का उल्लंघन...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी रोज़गार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आरक्षण न देने पर अधिकारियों को फटकारा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी रोज़गार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आरक्षण न देने पर अधिकारियों को फटकारा

दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायालय स्थापना में विभिन्न पदों पर भर्ती से संबंधित सार्वजनिक रोज़गार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 5 साल की आयु छूट और 5% अर्हक अंकों में छूट प्रदान करने के लिए अधिकारियों को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 के NALSA मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बावजूद अधिकारियों द्वारा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। इसमें सार्वजनिक...

सोसायटी पुनर्विकास के लिए डेवलपर नियुक्ति हेतु टेंडर अनिवार्य नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शासकीय प्रस्ताव को निर्देशात्मक बताया
सोसायटी पुनर्विकास के लिए डेवलपर नियुक्ति हेतु टेंडर अनिवार्य नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शासकीय प्रस्ताव को निर्देशात्मक बताया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि 4 जुलाई, 2019 को जारी शासकीय प्रस्ताव (Government Resolution - GR) जिसमें सोसायटी के पुनर्विकास के लिए डेवलपर को अंतिम रूप देने हेतु टेंडर जारी करना अनिवार्य किया गया, वह अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक प्रकृति का है।जस्टिस श्याम सुमन और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि डेवलपर नियुक्त करने के लिए केवल टेंडर जारी न करना ही यह मतलब नहीं होगा कि किसी कानून के उद्देश्य का उल्लंघन हुआ है।हाईकोर्ट के इस मुद्दे पर दिए गए विभिन्न फैसलों का...

पैरोल न देने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को लताड़ा, कहा- लंबे कारावास से जेल में अराजकता फैल सकती है
पैरोल न देने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को लताड़ा, कहा- लंबे कारावास से जेल में अराजकता फैल सकती है

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली जेल नियम 2018 की अवहेलना करने के लिए राज्य के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों में लंबे समय से जेल में बंद कैदियों के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पैरोल और फरलो के माध्यम से बिना किसी रुकावट के लंबे समय तक कैद से जेल के अंदर अनुशासनहीनता और अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।कोर्ट ने कहा कि अधिकारी यह महसूस नहीं करते कि निर्धारित समय सीमा के भीतर पैरोल या फरलो न देने से केवल अशांति फैलती...

भारत का औपनिवेशिक हैंगओवर: दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अभी भी मानहानि की सज़ा जेल में दे रहा है
भारत का औपनिवेशिक हैंगओवर: दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अभी भी मानहानि की सज़ा जेल में दे रहा है

सितंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य बनाम अमिता सिंह की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जो द वायर के खिलाफ दायर एक आपराधिक मानहानि शिकायत से उत्पन्न हुआ मामला था। समन जारी होने से एक बार फिर यह बहस छिड़ गई: क्या भारत में मानहानि एक अपराध बनी रहनी चाहिए, या इस औपनिवेशिक अवशेष से छुटकारा पाने का समय आ गया है? हालांकि, यह कोई नया सवाल नहीं है। सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2016) में, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860...

दिल्ली हाईकोर्ट का अवलोकन: दृष्टि दोष से पीड़ित अधिकारी का सेना में शामिल होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
दिल्ली हाईकोर्ट का अवलोकन: दृष्टि दोष से पीड़ित अधिकारी का सेना में शामिल होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि भारतीय सेना में दृष्टि दोष से पीड़ित किसी अधिकारी का शामिल होना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने एनडीए और नौसेना अकादमी परीक्षा (II) 2024 में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले उमा महेश्वरा शास्त्री दुर्बका को राहत देने से इनकार किया।दुर्बका ने अपनी सेवा के लिए सेना, वायु सेना, नौसेना अकादमी और नौसेना को वरीयता दी थी। उन्होंने बेंगलुरु के एयर कमोडोर, कमांडेंट...

यूपी राज्य में गोद लेना केवल रजिस्टर्ड डीड द्वारा ही हो सकता है, केवल नोटरीकृत दत्तक ग्रहण विलेख अमान्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपी राज्य में गोद लेना केवल रजिस्टर्ड डीड द्वारा ही हो सकता है, केवल नोटरीकृत दत्तक ग्रहण विलेख अमान्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(3) में राज्य संशोधन के आधार पर केवल पंजीकृत दत्तक ग्रहण विलेख यूपी राज्य में मान्य है। न्यायालय ने कहा कि केवल गोद लेने के दस्तावेज का नोटरीकरण इसे उत्तराधिकार साबित करने के लिए वैध नहीं बनाता है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने की,"यूपी राज्य में लागू अधिनियम, 1956 की संशोधित धारा 16(2) और यूपी राज्य में लागू अधिनियम, 1908 की धारा 17 (1)(एफ) और (3) को संयुक्त रूप से पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि 01.01.1977 के बाद...