हाईकोर्ट

भूमि पर अतिक्रमण का खतरा और सार्वजनिक उद्देश्य के लिए प्रस्तावित उपयोग, भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 17 के तहत तात्कालिकता खंड लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भूमि पर अतिक्रमण का खतरा और सार्वजनिक उद्देश्य के लिए प्रस्तावित उपयोग, भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 17 के तहत तात्कालिकता खंड लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया है कि केवल अतिक्रमण का खतरा और यह कहना कि भूमि का उपयोग सार्वजनिक उद्देश्य के लिए नियोजित विकास हेतु किया जाना है, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 17 के तहत तात्कालिकता खंड लागू करने और भूस्वामियों की आपत्तियाँ मांगने, उनकी सुनवाई करने और उन पर निर्णय लेने की वैधानिक आवश्यकता से छूट देने को उचित नहीं ठहराएगा।गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई 2004 की अधिग्रहण कार्यवाही पर विचार करते हुए और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए जस्टिस मनोज...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन मेडिकल देखभाल की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन मेडिकल देखभाल की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) पर भारत संघ, पंजाब और हरियाणा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से जवाब मांगा, जिसमें दुर्घटना पीड़ितों को प्रारंभिक और आपातकालीन मेडिकल देखभाल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई।यह याचिका लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल द्वारा प्रसिद्ध पंजाबी गायक राजवीर सिंह जवंदा की दुखद मृत्यु के मद्देनजर दायर की गई, जिनकी 8 अक्टूबर, 2025 को एक सड़क दुर्घटना में लगी चोटों के कारण मृत्यु हो गई।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव...

महर की वापसी केवल खुला नामा से ही नहीं, पक्षकारों के बयान से भी सुनिश्चित की जा सकती है: केरल हाईकोर्ट
'महर' की वापसी केवल 'खुला नामा' से ही नहीं, पक्षकारों के बयान से भी सुनिश्चित की जा सकती है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि 'महर' (विवाह में पति द्वारा पत्नी को दिया जाने वाला प्रतिफल) की वापसी केवल 'खुला नामा' से ही नहीं, बल्कि 'खुला' द्वारा तलाक की घोषणा के लिए मुस्लिम पत्नी की याचिका पर विचार करते समय पक्षकारों के बयान से भी सुनिश्चित की जा सकती है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ, फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक को चुनौती देने वाली पति द्वारा दायर अपील पर विचार कर रही थी।अपीलकर्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए उन्होंने तर्क दिया कि फैमिली कोर्ट का...

अगर वह वाकई वकील है तो यह चिंताजनक है: केरल हाईकोर्ट ने महिला वकील के दुर्व्यवहार और जजों पर संदेह के लिए आलोचना की
'अगर वह वाकई वकील है तो यह चिंताजनक है': केरल हाईकोर्ट ने महिला वकील के दुर्व्यवहार और जजों पर संदेह के लिए आलोचना की

केरल हाईकोर्ट ने खुद को वादी बताकर अपने तलाक के आदेश को चुनौती देने के लिए स्वयं अदालत में पेश होने वाली महिला वकील को उसके (दुर्व्यवहार) के लिए फटकार लगाई।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ, एर्नाकुलम फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश और फैसले को अमान्य करने की याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।इस मामले की सुनवाई इस बात पर विचार करने के लिए की जा रही थी कि क्या रिट याचिका को क्रमांकित करने की आवश्यकता है, क्योंकि रजिस्ट्री ने मामले में कई खामियां चिह्नित की हैं।...

पुलिस अधिकारी महिलाओं के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें और अनुचित भाषा का प्रयोग न करें: दिल्ली हाईकोर्ट
पुलिस अधिकारी महिलाओं के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें और अनुचित भाषा का प्रयोग न करें: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को महिलाओं के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए और उनके साथ अनुचित भाषा का प्रयोग करने से बचना चाहिए।जस्टिस संजीव नरूला की पीठ थोप्पनी संजीव राव नामक महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा दर्ज की गई उनकी शिकायत की जांच की मांग की गई।उनका कहना था कि NHRC द्वारा पुलिस को चार हफ़्तों के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश के बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं की गई।अपनी याचिका में, महिला ने यह भी मांग की कि...

AI पर आँख मूंदकर भरोसा न करें: बॉम्बे हाईकोर्ट ने असत्यापित AI-जनित केस कानूनों पर पारित आयकर निर्धारण रद्द किया
'AI पर आँख मूंदकर भरोसा न करें': बॉम्बे हाईकोर्ट ने असत्यापित AI-जनित केस कानूनों पर पारित आयकर निर्धारण रद्द किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह देखते हुए आयकर निर्धारण रद्द किया कि निर्धारण अधिकारी ने मूल्यांकन आदेश पारित करते समय गैर-मौजूद, AI-जनित केस कानूनों पर भरोसा किया था।अदालत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में कर अधिकारी ऐसे AI-जनित परिणामों पर आँख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकते। अर्ध-न्यायिक कार्यों में AI-जनित केस कानूनों का उपयोग करने से पहले उनका क्रॉस-सत्यापन किया जाना चाहिए।जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस अमित एस. जामसांडेकर की खंडपीठ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस युग में...

पत्नी द्वारा शराब की लत के झूठे आरोप लगाने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को तलाक की मंज़ूरी दी
पत्नी द्वारा शराब की लत के झूठे आरोप लगाने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को तलाक की मंज़ूरी दी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह देखते हुए एक व्यक्ति को क्रूरता के आधार पर तलाक की मंज़ूरी दी कि पत्नी ने उस पर शराब की लत के झूठे आरोप लगाए।ऐसा करते हुए कोर्ट ने मंडला के फैमिली कोर्ट का फैसला और डिक्री रद्द कर दिया, जिसमें पति की तलाक की याचिका को परित्याग और क्रूरता के आधार पर खारिज कर दिया गया।जस्टिस विशाल धगत और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने कहा,"हम इस अपील को इस आधार पर स्वीकार करते हैं कि नशे की लत का झूठा आरोप लगाकर क्रूरता की गई। साथ रहने को फिर से शुरू न करने के दृढ़ संकल्प के बावजूद...

मद्रास हाईकोर्ट ने Cryptocurrency को संपत्ति के रूप में मान्यता दी, कहा- इसे ट्रस्ट में रखा जा सकता है
मद्रास हाईकोर्ट ने Cryptocurrency को संपत्ति के रूप में मान्यता दी, कहा- इसे "ट्रस्ट में रखा जा सकता है"

मद्रास हाईकोर्ट ने शनिवार को क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को एक प्रकार की संपत्ति के रूप में मान्यता दी, जिसका स्वामित्व, आनंद और ट्रस्ट में रखा जा सकता है। साथ ही न्यायालय ने निवेशक को सुरक्षा प्रदान की, जिसकी डिजिटल संपत्तियां एक बड़े साइबर हमले के बाद वज़ीरएक्स एक्सचेंज पर ज़ब्त कर ली गई थीं।जस्टिस एन आनंद वेंकटेश द्वारा अंतरिम राहत की मांग करने वाली मध्यस्थता याचिका पर पारित आदेश में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों अहमद जी.एच. आरिफ बनाम संपत्ति कर आयुक्त और जिलुभाई नानभाई खाचर बनाम गुजरात...

पत्रकार की शिकायत के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारी के खिलाफ जालसाजी की FIR रद्द करने से किया इनकार
पत्रकार की शिकायत के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारी के खिलाफ जालसाजी की FIR रद्द करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारी की याचिका खारिज की, जिसने अपने और अपने ड्राइवर के खिलाफ जालसाजी का आरोप लगाते हुए दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। यह याचिका पत्रकार द्वारा दायर की गई शिकायत के बाद दायर की गई, जिसमें कहा गया कि उनके नाम से फर्जी शिकायतें परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को भेजी गईं।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने कहा,"FIR और उससे जुड़ी सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच करने पर यह न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि आरोपों को उनके मूल स्वरूप में देखने पर प्रथम दृष्टया...

अनुशासनात्मक प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना आरोपपत्र शुरू से ही अमान्य, बाद में इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
अनुशासनात्मक प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना आरोपपत्र शुरू से ही अमान्य, बाद में इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि केंद्रीय सिविल सेवा (CCA) नियम, 1965 के नियम 14(3) के तहत सक्षम अनुशासनात्मक प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना जारी किया गया आरोपपत्र शुरू से ही अमान्य है, कानून में अस्तित्वहीन है। इसके अलावा, इसे बाद में पुष्टि द्वारा मान्य नहीं किया जा सकता।पृष्ठभूमि तथ्यरक्षा मंत्रालय में संयुक्त निदेशक के विरुद्ध कदाचार के आरोपों पर केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 3(1)(iii) का उल्लंघन करने के आरोप में आरोपपत्र जारी...

NHAI Act | NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, प्रबंधन और रखरखाव तथा सुविधाओं के निर्माण के लिए बाध्य: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
NHAI Act | NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, प्रबंधन और रखरखाव तथा सुविधाओं के निर्माण के लिए बाध्य: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1988 (NHAI Act) के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वैधानिक कर्तव्यों को दोहराते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि NHAI कानूनी रूप से अपने अधीन राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, प्रबंधन और रखरखाव तथा ऐसे राजमार्गों के निकट सड़क किनारे सुविधाओं के निर्माण के लिए बाध्य है।जस्टिस संजय धर ने राजिंदर सिंह नामक व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका खारिज करते हुए ये महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं, जिसमें जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर...

राज्य ऊर्जा निदेशालय नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्रों के लिए मान्यता को अस्वीकार नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
राज्य ऊर्जा निदेशालय नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्रों के लिए मान्यता को अस्वीकार नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि ऊर्जा निदेशालय को नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र प्रणाली के तहत मान्यता के लिए आवेदन को अस्वीकार करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि ऐसे निर्णय केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा नामित केंद्रीय एजेंसी के विशेष अधिकार क्षेत्र में आते हैं।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की:"नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन में लगी कोई उत्पादन कंपनी पंजीकरण के लिए आवेदन करने के योग्य है या नहीं... इसका निर्णय केंद्रीय एजेंसी द्वारा किया जाना है, न कि राज्य एजेंसी द्वारा।"याचिकाकर्ता...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SAHARA की सहकारी समितियों के खिलाफ ED जांच रद्द करने से किया इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SAHARA की सहकारी समितियों के खिलाफ ED जांच रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने हाल ही में सहारा से जुड़ी चार सहकारी समितियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा शुरू की गई तलाशी और ज़ब्ती की कार्रवाई रद्द करने से इनकार किया।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का मामला बनता है और धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत कार्यवाही में केवल इसलिए हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, क्योंकि संबंधित अपराधों में से एक में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी गई।इस प्रकार, सिंगल जज ने मेसर्स हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी...

बीमारी के कारण अनुपस्थिति के कारण सीमा पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी कठोर और अनुचित: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
बीमारी के कारण अनुपस्थिति के कारण सीमा पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी "कठोर और अनुचित": हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि कथित रूप से भाग जाने के कारण भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कांस्टेबल की बर्खास्तगी मनमाना और अनुचित थी, खासकर तब जब उसकी अनुपस्थिति चिकित्सा कारणों से थी और उसने 18 वर्षों से अधिक समय तक बेदाग सेवा की।जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की:"याचिकाकर्ता ने 18 वर्षों से अधिक समय तक बेदाग सेवा की थी और अधिकारियों को अपनी बीमारी के बारे में बार-बार सूचित किया। इसलिए न्यायालय ने उसकी बर्खास्तगी को कठोर और पूरी तरह से अनुचित पाया।"1998 में याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 साल जेल में रहने के बाद महिला दोषी की सज़ा निलंबित की, उसके तीन नाबालिग बच्चों की भलाई का हवाला दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 साल जेल में रहने के बाद महिला दोषी की सज़ा निलंबित की, उसके तीन नाबालिग बच्चों की भलाई का हवाला दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने कथित प्रेमी की हत्या के लिए दोषी ठहराई गई महिला की आजीवन कारावास की सज़ा निलंबित की, क्योंकि उसके तीन बच्चों की भलाई की चिंता है।दो बच्चे उसके वृद्ध माता-पिता के साथ रहते हैं, जबकि उसका तीसरा दो साल का बच्चा जेल में उसके साथ रहा।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की खंडपीठ ने कहा,"अपीलकर्ता एक महिला है और उसका एक बच्चा, जो मुश्किल से दो साल का है, जेल में उसके साथ है, और उसके वृद्ध माता-पिता उसकी उचित देखभाल करने की स्थिति में नहीं हो सकते हैं।"अभियोजन पक्ष के अनुसार,...