हाईकोर्ट
मामले की जानकारी होने पर पावर ऑफ अटॉर्नी धारक निष्पादन याचिका पर हस्ताक्षर कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर कोई पावर ऑफ अटॉर्नी धारक (Power of Attorney Holder) मामले की पूरी जानकारी रखता है और अदालत को यह भरोसा हो जाए कि वह तथ्य जानता है, तो वह डिक्री-होल्डर (जिसके पक्ष में कोर्ट का फैसला हुआ है) की जगह निष्पादन याचिका (Execution Application) पर हस्ताक्षर और सत्यापन कर सकता है।मामला क्या था सहारनपुर के फ़ज़लगंज इलाके में एक दुकान के किराए को लेकर 1978 में मुकदमा शुरू हुआ था। दुकान के मालिक केवाल किशोर ने किराएदार आत्मा राम के खिलाफ किराया न देने और दुकान खाली कराने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी को कॉर्पोरेट संपत्ति की सुरक्षा पर हुए परिसमापक के खर्च की भरपाई करने का जिम्मेदार ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने एक कंपनी की यह जिम्मेदारी बरकरार रखी है कि वह आधिकारिक परिसमापक (Official Liquidator) द्वारा कंपनी की संपत्तियों की सुरक्षा हेतु किए गए सुरक्षा व्यय की भरपाई (reimbursement) करे।मामले की पृष्ठभूमि:अपीलकर्ता कंपनी एम/एस कॉन्नोइस्सर बिल्डटेक प्रा. लि. (M/s Connoisseur Buildtech Pvt. Ltd.) के परिसमापन (winding-up) की प्रक्रिया वर्ष 2016 में चल रही थी। कंपनी की एक विवादित जमीन ग्रेटर नोएडा में थी, जिसकी सुरक्षा के...
हाईकोर्ट का मानवीय फैसला - सास-ससुर के भरण-पोषण के लिए बहू के वेतन से कटेगी राशि
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने एक संवेदनशील आदेश में कहा कि अनुकम्पा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के पूरे परिवार का भरण-पोषण करना है, न कि किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाना।जस्टिस फरजन्द अली की एकल पीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति अनुकम्पा नियुक्ति पाता है, तो उस पर यह नैतिक और कानूनी दायित्व होता है कि वह मृत कर्मचारी के सभी आश्रितों का ध्यान रखे।मामले के अनुसार अलवर निवासी भगवान सिंह सैनी के पुत्र राजेश कुमार सैनी की 2015 में नौकरी के दौरान मृत्यु हो गई थी। विभाग ने भगवान सिंह को...
अलग हुए दंपत्ति के बीच समझौता न होने पर वैवाहिक FIR रद्द नहीं की जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अलग हुए दंपत्ति के बीच समझौता न हो तो वैवाहिक FIR रद्द नहीं की जा सकती।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 2005 में दुबई में रहने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें उस पर पत्नी द्वारा दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया गया।यह फैसला तब सुनाया गया, जब कोर्ट ने पाया कि दंपत्ति के बीच हुए समझौता समझौते पर कभी अमल नहीं किया गया।इस प्रकार, कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 498ए और 406 के तहत दर्ज FIR रद्द करने की मांग करने वाले व्यक्ति की...
वेटलिस्ट पैनल को अलग-अलग तरीके से संचालित नहीं किया जा सकता, रिक्तियों को वैध प्रतीक्षा सूची से भरा जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि वेटलिस्ट पैनल अलग-अलग तरीके से संचालित नहीं हो सकता, खासकर जब भर्ती की चयन प्रक्रिया में अनंतिम परिणाम शामिल हो।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने कहा,"... वेटलिस्ट पैनल को अलग-अलग तरीके से संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जहां चयन प्रक्रिया में अनंतिम परिणाम के बाद पूरक या अतिरिक्त परिणाम शामिल हों, वहां वेटलिस्ट पैनल को बाद में घोषित परिणामों के अनुरूप टुकड़ों में संचालित नहीं माना जा सकता।"खंडपीठ ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB)...
ड्यूटी पर तैनात लोक सेवक को चोट पहुंचाना गंभीरता से लिया जाना चाहिए, 6 महीने की सज़ा ज़्यादा नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी ड्यूटी के दौरान किसी लोक सेवक को लगी चोट को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में छह महीने की सज़ा ज़्यादा नहीं है।जस्टिस राकेश कैंथला ने टिप्पणी की:"छह महीने की सज़ा ज़्यादा नहीं कही जा सकती, क्योंकि एक लोक सेवक अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए घायल हुआ और ऐसे कृत्यों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।"कोर्ट ने कहा:"अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय लोक सेवक को दी जाने वाली धमकी को रोकने के लिए एक निवारक सज़ा दी जानी चाहिए।"2012 में...
RTE Act के तहत विद्यालय प्रबंधन समिति वैधानिक निकाय, वित्तीय अनियमितताओं की वसूली किसी शिक्षक से नहीं की जा सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 21 के तहत विद्यालय प्रबंधन समिति वैधानिक निकाय है और वित्तीय अनियमितताओं की वसूली किसी एक शिक्षक पर नहीं थोपी जा सकती।कोर्ट ने आगे टिप्पणी की कि प्रबंधन समिति ही सामूहिक रूप से सरकारी अनुदानों की निगरानी करती है, इसलिए अन्य सदस्यों को शामिल किए बिना केवल सदस्य पर वसूली का दायित्व डालना, प्राकृतिक न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस रंजन शर्मा ने टिप्पणी की:"शिक्षा का...
RSS पथसंचलन विवाद: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कलबुर्गी संयोजक व जिला अधिकारियों की दूसरी बैठक 5 नवंबर को बुलाने का आदेश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार (30 अक्टूबर) को आरएसएस कलबुर्गी के संयोजक अशोक पाटिल को 5 नवंबर को एडवोकेट जनरल (AG) के कार्यालय में जिला अधिकारियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया है, जो चित्तापुर कस्बे में प्रस्तावित पथसंचलन से संबंधित होगी।अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट अरुणा श्याम और राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल शशिकिरण शेट्टी को भी बैठक में शामिल होकर प्रक्रिया तय करने को कहा। यह दूसरी बैठक है, क्योंकि पहले 24 अक्टूबर को अदालत ने 28 अक्टूबर को शांति समिति की बैठक कराने का आदेश...
भोपाल के पास 488 पेड़ों की बिना अनुमति कटाई पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (29 अक्टूबर) को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया, जिसमें यह बताया गया था कि लोक निर्माण विभाग (PWD) ने भोपाल के पास 488 पेड़ बिना आवश्यक अनुमति लिए काट दिए थे।अदालत ने इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आगे की पेड़ों की कटाई या छंटाई पर रोक लगाई है, जब तक कि राज्य द्वारा नियुक्त समिति और वृक्ष अधिकारी की अनुमति न मिल जाए। न्यायालय ने समाचार रिपोर्ट पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जिसमें बताया गया था कि PWD ने...
S.263 Succession Act | प्रोबेट रद्द करने के आधार उदाहरणात्मक, संपूर्ण नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (Indian Succession Act) की धारा 263 में प्रोबेट रद्द करने के लिए दिए गए स्पष्टीकरण (क) से (ङ) उदाहरणात्मक हैं, संपूर्ण नहीं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इन स्पष्टीकरणों में स्पष्ट रूप से उल्लिखित न की गई परिस्थितियां भी प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर प्रोबेट या प्रशासन पत्र के अनुदान को रद्द करने या रद्द करने के लिए "उचित कारण" बन सकती हैं।जस्टिस एम.एस. कार्णिक और जस्टिस एन.आर. बोरकर की खंडपीठ ने जस्टिस मनीष पिटाले द्वारा दिए गए...
अगर आरोप अलग हों तो दूसरी FIR पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'दूसरी FIR' (Second FIR) पर लगी रोक को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि बाद में दर्ज की गई FIR नए और अलग अपराधों पर आधारित हो तथा नए तथ्य उजागर करती हो, तो उसे दर्ज करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है।जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के T.T. Antony बनाम स्टेट ऑफ केरल (2001) फैसले में एक ही घटना या लेनदेन पर दूसरी FIR दर्ज करने पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन जब नई FIR किसी भिन्न घटना, नई साजिश या नए तथ्यों से जुड़ी हो, तो यह रोक...
इंटरव्यू समिति की गलत नियुक्ति से पूरी भर्ती रद्द: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी भर्ती की पूरी चयन प्रक्रिया दोषपूर्ण (tainted) पाई जाती है, तो कुछ उम्मीदवारों को चुनकर बाकी को बाहर करने की “पिक एंड चूज़” नीति नहीं अपनाई जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरव्यू समिति द्वारा अपने अधिकारों को अधीनस्थ अधिकारियों को सौंपना कानूनन अस्वीकार्य है और इससे पूरी चयन प्रक्रिया अवैध हो जाती है।जस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस रजनीश आर. व्यास की खंडपीठ ने यह फैसला दो याचिकाओं पर सुनाते हुए दिया, जिन्हें भंडारा जिले में पुलिस पटिल पद पर चयनित...
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान जैसे मदरसे भी राज्य के शैक्षणिक नियमों से मुक्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत अल्पसंख्यकों को प्रदत्त अधिकार—अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका संचालन करने का—राज्य सरकार द्वारा बनाए गए तार्किक नियमों और शैक्षणिक मानकों के ढांचे के भीतर ही प्रयोग किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और उत्कृष्टता बनी रहे।जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने गोरखपुर स्थित मदरसा अरबिया शम्सुल उलूम सिकरीगंज (एहाता नवाब) के नाज़िम/प्रबंधक द्वारा बिना किसी सरकारी दिशा-निर्देश के जारी की गई सहायक अध्यापक और...
दिल्ली हाईकोर्ट ने परेश रावल की 'द ताज स्टोरी' पर रोक लगाने से किया इनकार, पूछा- क्या हम सुपर सेंसर बोर्ड हैं?
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (30 अक्टूबर) को 31 अक्टूबर को रिलीज़ होने वाली फिल्म "द ताज स्टोरी" को दिए गए प्रमाणन को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर विचार करने से इनकार किया।याचिकाकर्ताओं द्वारा याचिकाएं वापस लेने की मांग के बाद कोर्ट ने उन्हें सिनेमैटोग्राफ एक्ट की धारा 6 के तहत केंद्र सरकार के पुनर्विचार अधिकार क्षेत्र का उपयोग करते हुए उनसे संपर्क करने की स्वतंत्रता प्रदान की।ये याचिकाएं चेतना गौतम और शकील अब्बास ने दायर की थीं। दोनों व्यक्ति पेशे से वकील हैं। उनका कहना है कि फिल्म में तथ्यों...
संसद में बिना पर्याप्त चर्चा बने कानून को क्या चुनौती दी जा सकती है? मद्रास हाईकोर्ट का सवाल
मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को यह सवाल उठाया कि क्या संसद में किसी कानून के पारित होने के समय पर्याप्त विचार-विमर्श या चर्चा न होने के आधार पर किसी केंद्रीय कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जा सकती है?चीफ़ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की खंडपीठ भारत न्याय संहिता, भारत नागरिक सुरक्षा संहिता और भारत साक्ष्य अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा — “आप यह कहकर किसी कानून को कैसे चुनौती दे सकते हैं कि...
हाईकोर्ट ने की रामपुर CRPF कैंप आतंकी हमले में चार दोषियों की फांसी की सजा रद्द, 'त्रुटिपूर्ण जांच' के लिए पुलिस को ठहराया जिम्मेदार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (29 अक्टूबर) को 2007 के रामपुर सीआरपीएफ कैंप आतंकी हमले के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा चार आरोपियों – मोहम्मद शरीफ, इमरान शहजाद, मोहम्मद फारूक और सबाउद्दीन – को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा रद्द कर दी। साथ ही, आरोपी जंग बहादुर खान उर्फ बाबा की आजीवन कारावास की सजा भी खत्म कर दी गई।कोर्ट ने पाया कि जांच में गंभीर खामियां थीं — न तो पहचान परेड कराई गई, न ही बरामद हथियारों, गोलियों और फिंगरप्रिंट्स को सुरक्षित रखा गया। कोर्ट ने कहा कि “यदि जांच प्रशिक्षित पुलिस द्वारा की...
गजराज फैसले के दायरे से बाहर भूमिधारक 10% आबादी भूमि के हकदार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है कि जिन भूमिधारकों ने Gajraj and Others vs. State of UP and Others (2011) में दाखिल याचिकाओं में पक्षकार के रूप में भाग नहीं लिया था, उन्हें 10% आबादी (अबादी) भूमि के आवंटन का लाभ नहीं मिल सकता, जैसा कि उस फैसले में निर्देशित किया गया था।मामले की पृष्ठभूमि: गजराज मामले में भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत 31 अगस्त 2007 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। पूर्ण पीठ (Full Bench) ने माना था कि सरकार ने “तात्कालिकता प्रावधान” (Urgency Clause) का गलत...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत सरकार टकसाल से ₹260 चुराते पकड़े गए कर्मचारी के खिलाफ एक साथ सुनवाई और विभागीय जांच की अनुमति दी
यह देखते हुए कि दोषी कर्मचारी को बिना किसी परिणाम के सेवा में बने रहने देने से जवाबदेही की कमी की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत सरकार टकसाल से चोरी करते पकड़े गए कर्मचारी के खिलाफ एक साथ आपराधिक सुनवाई और विभागीय जांच की अनुमति दी।जस्टिस अजय भनोट ने कहा,“याचिकाकर्ता पर भारत सरकार टकसाल से सरकारी धन की चोरी के कदाचार का आरोप है। गंभीर कदाचार के आरोपी याचिकाकर्ता को विभागीय प्रक्रियाओं में तेजी लाने के बजाय सामान्य कामकाज की तरह काम करते रहने की अनुमति देना भारत सरकार टकसाल...
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विलंबित वेतन पर ब्याज देने पर विचार करें: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विलंबित वेतन भुगतान पर ब्याज देने पर विचार करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने लगभग 50,000 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को छह महीने से कथित रूप से मानदेय का भुगतान न किए जाने पर स्वतः संज्ञान लिया था।हालांकि, मुख्य सचिव ने दलील दी कि उक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के छह महीने के बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया गया।उत्तर से पता चलता है कि तकनीकी समस्या के कारण देरी हुई। एसएनए बैंक खाते की मैपिंग...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने किसान आंदोलन से नागरिकों को हो रही असुविधा पर संज्ञान लिया, आंदोलन स्थल तुंरत खाली करने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को पूर्व विधायक ओमप्रकाश उर्फ बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (वर्धा रोड) पर जारी विरोध प्रदर्शन के कारण नागरिकों को हुई "पीड़ा और अशांति" का स्वतः संज्ञान लिया।नागपुर पीठ में बैठे सिंगल जज जस्टिस रजनीश व्यास ने अवकाशकालीन अदालत की अध्यक्षता करते हुए बच्चू कडू को तुरंत शांतिपूर्ण तरीके से धरना स्थल खाली करने का आदेश दिया और कहा कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो पुलिस को कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।जज ने राष्ट्रीय...




















