हाईकोर्ट

HP Rent Control Act। किरायेदार की मृत्यु पर केवल पत्नी को ही किरायेदारी का अधिकार, आगे उत्तराधिकार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
HP Rent Control Act। किरायेदार की मृत्यु पर केवल पत्नी को ही किरायेदारी का अधिकार, आगे उत्तराधिकार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद किरायेदारी का उत्तराधिकार हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण कानून के तहत निर्धारित वैधानिक क्रम के अनुसार ही होगा। अदालत ने कहा कि यदि किरायेदार की पत्नी उसकी मृत्यु के समय जीवित थी और उसके साथ निवास कर रही थी तो वही अकेली वैध उत्तराधिकारी होगी। उसके बाद किरायेदारी का अधिकार किसी अन्य कानूनी वारिस को हस्तांतरित नहीं हो सकता।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि जवाला देवी अपने पति की मृत्यु तक जीवित थीं और...

जिले से बाहर विवाह करने पर स्थानीय निवासी आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट
जिले से बाहर विवाह करने पर स्थानीय निवासी आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि जो उम्मीदवार विवाह के बाद संबंधित जिले से बाहर निवास करता है, वह सार्वजनिक भर्ती में स्थानीय निवासी के आधार पर वरीयता का दावा नहीं कर सकता, जब तक कि वह ठोस और विश्वसनीय दस्तावेजों के माध्यम से अपने स्थानीय निवास को सिद्ध न करे।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने यह निर्णय एक महिला अभ्यर्थी की याचिका पर सुनाया, जिसमें उसने दावा किया कि विवाह के बावजूद वह अपने मायके के गांव में ही निवास कर रही है। इसलिए उसे स्थानीय निवासी के रूप...

पत्नी के निजी फोटो तक अनधिकृत पहुंच और उन्हें वायरल करने की धमकी क्रूरता: झारखंड हाइकोर्ट
पत्नी के निजी फोटो तक अनधिकृत पहुंच और उन्हें वायरल करने की धमकी क्रूरता: झारखंड हाइकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि पति द्वारा पत्नी के निजी और आपत्तिजनक फोटो तक अनधिकृत रूप से पहुंच बनाना, उन्हें अपने पास सुरक्षित करना और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देना क्रूरता की श्रेणी में आता है।हाइकोर्ट ने इसे पति द्वारा पत्नी की छवि धूमिल करने और चरित्र हनन का गंभीर मामला बताया।यह फैसला जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनाया, जिसमें पत्नी द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद की याचिका...

एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट
एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक अपील को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि अभियुक्त की ओर से वकील उपस्थित नहीं हुआ। हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में अपीलीय न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अभियुक्त के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करे और अपील का निर्णय मामले के गुण-दोष के आधार पर करे, न कि अनुपस्थिति के कारण।जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियुक्त के वकील की गैर-हाजिरी के कारण आपराधिक अपील को डिफॉल्ट में खारिज करना भारतीय नागरिक सुरक्षा...

चौंकाने वाली बात कि नाबालिग लड़कियां 10 से ज़्यादा सालों से लापता हैं, फिर भी पुलिस को कोई सुराग नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
'चौंकाने वाली बात' कि नाबालिग लड़कियां 10 से ज़्यादा सालों से लापता हैं, फिर भी पुलिस को कोई सुराग नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी) को पुलिस अधिकारियों को पिछले दस सालों में लापता हुई नाबालिग लड़कियों की संख्या बताते हुए एक डिटेल में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी बताने का निर्देश दिया कि पुलिस की कोशिशों से कितनी लड़कियों का पता चला और कितनी लड़कियां खुद वापस लौटीं।ये निर्देश इंसानी तस्करी की शिकार महिला द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिए गए, जिसने ऐसी नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के लिए न्यायिक दखल की मांग की थी, जो इसी तरह के शोषण का शिकार हो सकती...

पति द्वारा जबरदस्ती अप्राकृतिक सेक्स करना IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता, मगर वैवाहिक अपवाद के कारण बलात्कार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
पति द्वारा जबरदस्ती अप्राकृतिक सेक्स करना IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता, मगर वैवाहिक अपवाद के कारण बलात्कार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग वाली पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पति द्वारा अपनी बालिग पत्नी के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने को धारा 376 के तहत बलात्कार के रूप में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, लेकिन यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत क्रूरता माना जाएगा।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की बेंच ने कहा,"हालांकि, इस कोर्ट की भी राय है कि पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता है। साथ ही IPC की धारा 376 के तहत...

व्यापक भ्रष्टाचार परेशान करने वाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ DOB में 11 साल की हेरफेर के लिए FIR का आदेश दिया
'व्यापक भ्रष्टाचार परेशान करने वाला': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ DOB में 11 साल की 'हेरफेर' के लिए FIR का आदेश दिया

एक व्यक्ति द्वारा जन्मतिथि में हेरफेर से जुड़े कथित जालसाजी और धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वह उस व्यक्ति और संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करें।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने इस स्थिति को 'चौंकाने वाला' बताया और टिप्पणी की कि दस्तावेजों में हेरफेर की हद "व्यापक भ्रष्टाचार" का सीधा नतीजा है।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (शिव शंकर पाल) ने पासपोर्ट अथॉरिटी को अपने...

अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किया: झारखंड हाईकोर्ट ने ज़मीन घोटाले के मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की
'अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किया': झारखंड हाईकोर्ट ने ज़मीन घोटाले के मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार (6 जनवरी) को हज़ारीबाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DC) और निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की। चौबे पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने कथित ज़मीन घोटाले के मामले में केस दर्ज किया था।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी याचिकाकर्ता की रेगुलर ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 467, 468, 471, 420, और 120B के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(c) और (d) के तहत दर्ज FIR में आरोपी बनाया...

CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की प्रथम दृष्टया अवमानना: हाईकोर्ट
CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की 'प्रथम दृष्टया अवमानना': हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी उस परिपत्र पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें राज्य के सभी थानों में CCTV फुटेज केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने इसे अत्यंत अजीब बताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले Paramvir Singh Saini बनाम बलजीत सिंह (2020) के प्रथमदृष्टया अवमानना जैसा प्रतीत होता है, जिसमें कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस...

तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी की गई तबादला नीति केवल मार्गदर्शन के लिए होती है। इसे अदालत के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण और पदस्थापना पूरी तरह से राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय राज्य को किसी विशेष कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को एक रिट याचिका खारिज करते हुए...

समझौते की शर्तों के उल्लंघन मात्र से जमानत रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट
समझौते की शर्तों के उल्लंघन मात्र से जमानत रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि एक बार जमानत दिए जाने के बाद केवल समझौते की शर्तों का पालन न करना या भुगतान करने के वादे को पूरा न कर पाना, अपने आप में जमानत रद्द करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत रद्द करने के लिए इससे कहीं अधिक ठोस और कानूनी आधार आवश्यक होता है।यह टिप्पणी जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने उस मामले में की, जिसमें याचिकाकर्ता ने न्यायिक आयुक्त, रांची द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। उक्त आदेश के जरिए याचिकाकर्ता को पहले से मिली अग्रिम...

ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने का आधार केवल वही साक्ष्य हो सकता है, जो मुकदमे के दौरान न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड किया गया हो। चार्जशीट या केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इनके आधार पर किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने दहेज मृत्यु के एक मामले में दाखिल आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की। याचिका के माध्यम से...

अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट
अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील किसी ऐसे मामले में निजी पक्ष की ओर से पैरवी कर सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो। इस संबंध में अदालत ने प्रमुख सचिव (विधि) एवं विधिक स्मरणकर्ता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की एकल पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब वर्ष 2018 से लंबित एक आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो रही थी। यह याचिका पत्नी द्वारा फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए...

CrPC | समन मामले में संज्ञान लेने के बाद धारा 251 के स्तर पर आरोपी को बरी नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दिल्ली हाइकोर्ट
CrPC | समन मामले में संज्ञान लेने के बाद धारा 251 के स्तर पर आरोपी को बरी नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन वाद में एक बार जब मजिस्ट्रेट संज्ञान ले लेता है और आरोपी को समन जारी कर देता है तो उसके बाद दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 251 के चरण पर आरोपी को कार्यवाही से मुक्त करने अथवा बरी करने का अधिकार मजिस्ट्रेट को नहीं है।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि CrPC की धारा 251 का उद्देश्य केवल इतना है कि आरोपी को उस अपराध का विवरण बताया जाए, जिसका उस पर आरोप है। उससे यह पूछा जाए कि वह दोष स्वीकार करता है या अपना बचाव प्रस्तुत करना चाहता है। यह प्रावधान मजिस्ट्रेट को न...

मद्रास हाईकोर्ट ने विजय की फिल्म जना नायकन को CBFC को U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश देने वाले आदेश पर लगाई रोक
मद्रास हाईकोर्ट ने विजय की फिल्म 'जना नायकन' को CBFC को U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश देने वाले आदेश पर लगाई रोक

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को पहले दिए गए सिंगल जज के आदेश पर अस्थायी रोक लगाई, जिसमें CBFC को विजय अभिनीत तमिल फिल्म 'जना नायकन' को तुरंत U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था।चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा:"प्रतिवादी यूनियन ऑफ इंडिया को पर्याप्त समय नहीं दिया गया... UoI की एक मुख्य शिकायत यह थी कि उन्हें जवाब देने का समय नहीं दिया गया। दूसरी शिकायत यह है कि 6 जनवरी के पत्र को चुनौती नहीं दी गई, लेकिन कोर्ट (सिंगल...

धारा 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर लागू, वैवाहिक असंगति या अपूर्ण विवाह पर नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
धारा 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर लागू, वैवाहिक असंगति या अपूर्ण विवाह पर नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा पति और ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज धारा 498-A आईपीसी का मामला रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि“कानून असंगति (incompatibility) या अपूर्ण विवाह को अपराध नहीं बनाता। धारा 498-A वैवाहिक समस्याओं का सार्वभौमिक इलाज नहीं है।”जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि धारा 498-A एक विशिष्ट और सीमित प्रावधान है, जो केवल गंभीर और जानलेवा स्तर की क्रूरता या दहेज से जुड़ी प्रताड़ना को दंडित करने के लिए बनाया गया है।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता अबुज़र अहमद और उनकी पत्नी की शादी...

पिता द्वारा बलात्कार साधारण अपराध से परे, पीड़िता बेटी की गवाही ही पर्याप्त: राजस्थान हाईकोर्ट
पिता द्वारा बलात्कार 'साधारण अपराध से परे', पीड़िता बेटी की गवाही ही पर्याप्त: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले में बलात्कार की सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता स्वयं, जो कि अभियुक्त की बेटी है, घटना की सबसे विश्वसनीय और सर्वोत्तम साक्षी है, क्योंकि अपने ही पिता को झूठा फँसाने का उसके पास कोई कारण नहीं हो सकता।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को सामाजिक बदनामी, पारिवारिक परिस्थितियों और आरोपों की गंभीरता के मद्देनज़र संतोषजनक रूप से समझाया गया है और केवल देरी के आधार पर अभियोजन की...