हाईकोर्ट
सांसद अमृतपाल की याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्वाचित सांसद अमृतपाल सिंह की याचिका पर केंद्र और पंजाब सरकार से जवाब मांगा है, जिन्हें सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया है।अमृतपाल, अप्रैल 2023 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। उन्होंने पंजाब के श्री खडूर साहिब संसदीय क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में 2024 का लोकसभा चुनाव जीता। वह कथित 'खालिस्तानी समर्थक' संगठन वारिस पंजाब डे का प्रमुख है और अजनाला पुलिस थाने पर हमले का आरोपी भी है। ...
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवासी भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता को लेकर दायर याचिका पर विचार करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवासी भारतीयों को दोहरी नागरिकता देने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया।कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने कहा कि यह मुद्दा संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है और इस पर फैसला करना या निर्देश देना अदालत का काम नहीं है। प्रवासी लीगल सेल द्वारा दायर जनहित याचिका में दलील दी गई है कि मौजूदा भारतीय कानून के तहत किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता स्वत: जब्त हो जाएगी, जब वह किसी अन्य देश का पासपोर्ट प्राप्त कर...
बांध सुरक्षा समिति KRS बांध के 20 किलोमीटर के भीतर उत्खनन के लिए व्यक्तिगत दलीलों पर निर्णय लेगी, अंतिम निर्णय न्यायालय की मंजूरी के अधीन: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि कृष्णराज सागर बांध की सुरक्षा के संबंध में वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए गठित राज्य स्तरीय बांध सुरक्षा समिति इसके 20 किलोमीटर के परिधि में किए गए उत्खनन/खनन गतिविधियों के मद्देनजर खदान के संचालन के लिए व्यक्तिगत अभ्यावेदन पर विचार करेगी और न्यायालय की मंजूरी के अधीन अंतिम निर्णय लेगी।चीफ़ जस्टिस एन वी अंजारिया और जस्टिस के वी अरविंद की खंडपीठ ने कहा,“यदि कोई व्यक्तिगत मामला या आवेदन समिति के समक्ष रखा जाता है, तो समिति ऐसे मामले के तथ्यों पर विचार...
निजी संस्थान अनुकंपा नियुक्ति दे सकते हैं, लेकिन वित्तीय बोझ राज्य पर नहीं पड़ेगा: एमपी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने जस्टिस विवेक जैन की अध्यक्षता में एक मामले में अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। याचिकाकर्ता कौशल कुमार कछवाहा ने जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश के बाद अदालत से हस्तक्षेप करने की मांग की, जिसमें निजी संस्थान को अनुकंपा के आधार पर उन्हें नियुक्त करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन राज्य द्वारा वित्तपोषित वेतन सहायता के बिना।याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश राज्य और अन्य के खिलाफ रिट याचिका नंबर 25164/2019 दायर की, जिसमें 23 सितंबर, 2017 के आदेश...
महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम की धारा 91 के तहत संपत्ति वसूली विवादों में सहकारी न्यायालय को अधिकार क्षेत्र प्राप्त: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि सहकारी न्यायालय को महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960 (एमसीएस अधिनियम) की धारा 91 के तहत सहकारी समितियों द्वारा संपत्ति और मध्यवर्ती लाभ की वसूली की मांग करने वाले विवादों का निपटारा करने का अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे विवाद 'सोसायटी के प्रबंधन' की श्रेणी में आते हैं और इसलिए धारा 91 के दायरे में आते हैं। एमसीएस अधिनियम की धारा 91 में उन विवादों के प्रकारों का प्रावधान है जिनका निपटारा सहकारी न्यायालय द्वारा किया जा सकता है। धारा 91 के प्रावधान के अनुसार...
Delhi Coaching Centre Deaths: हाईकोर्ट ने सरकार की मुफ्तखोरी संस्कृति की निंदा की; कहा- नगर निकायों के पास बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए पैसे नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार की मुफ्तखोरी नीतियों की आलोचना की शहर के राजेंद्र नगर इलाके में हाल ही में बेसमेंट में बाढ़ आने के बाद, जिसमें तीन सिविल सेवा उम्मीदवारों की जान चली गई।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि मुफ्तखोरी संस्कृति के कारण सरकार के पास शहर की बढ़ती आबादी के मद्देनजर बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से शहर की जल निकासी प्रणाली को उन्नत करने के लिए पैसे नहीं हैं।एसीजे ने मौखिक रूप से टिप्पणी की,"आप बहुमंजिला इमारतों को अनुमति दे रहे हैं लेकिन...
मानहानि के मामलों में समन जारी करना यांत्रिक अभ्यास नहीं हो सकता, इसके लिए उचित सोच-विचार की आवश्यकता होती है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में आपराधिक शिकायतों, विशेष रूप से मानहानि से संबंधित मामलों में प्रक्रिया जारी करने से पहले विवेकपूर्ण तरीके से अपने दिमाग का उपयोग करने में मजिस्ट्रेट की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।जस्टिस संजय धर ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी को केवल यांत्रिक अभ्यास तक सीमित नहीं किया जा सकता।ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए अदालत ने टिप्पणी की,"यह आकस्मिक या यांत्रिक अभ्यास नहीं हो सकता, विशेष रूप...
'अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में बुरी तरह विफल रहा': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 39 साल पुराने मामले में डकैती के 3 आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को अभियोजन पक्ष के मामले में कई खामियां पाए जाने के बाद 1985 के डकैती मामले में तीन आरोपियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। जस्टिस राजीव गुप्ता और जस्टिस सुरेन्द्र सिंह-1 की पीठ ने 44 पृष्ठ के फैसले में कहा, "जब हम मुकदमे के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों का समग्र दृष्टिकोण लेते हैं और गवाहों द्वारा बताई गई अभियोजन पक्ष की कहानी की सत्यता का परीक्षण करते हैं, तो हम पाते हैं कि अभियोजन पक्ष आरोपी-प्रतिवादियों के खिलाफ सभी उचित संदेह से परे अपने मामले को साबित करने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने जॉन डो आदेश पारित कर बरी हुए व्यवसायी के खिलाफ आपराधिक मामले से संबंधित लेख और पोस्ट हटाने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में जॉन डो आदेश पारित करते हुए एक व्यवसायी के खिलाफ सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर मौजूदा समाचार आलेख और पोस्ट हटाने का आदेश दिया है, जिन्हें 2018 में उसके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले के बाद लिखा और पोस्ट किया गया था। हालांकि उसके अगले वर्ष उसे सम्मानजनक तरीके से बरी कर दिया गया था। जस्टिस विकास महाजन ने कहा, "न्यायालय का प्रथम दृष्टया विचार यह है कि वर्तमान मामले में प्रेस की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को वादी के निजता के अधिकार के लिए रास्ता देना चाहिए, खासकर...
समान नागरिक संहिता अभी तक लागू नहीं हुई: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल के लिए संबंध रजिस्टर्ड करने का निर्देश हटाया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने समान नागरिक संहिता, 2024 (Uniform Civil Code) के तहत लिव-इन जोड़ों के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के बारे में अपनी पिछली टिप्पणियों को हटा दिया, क्योंकि राज्य के वकील ने प्रस्तुत किया कि अधिनियम अभी तक अलग अधिसूचना द्वारा लागू नहीं हुआ है।इससे पहले, 18.07.2024 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले अंतर-धार्मिक जोड़े को संरक्षण दिया था, जिसमें कहा गया कि उन्हें 48 घंटे के भीतर समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड, 2024 के तहत अपने रिश्ते को रजिस्टर्ड करना होगा।जस्टिस...
व्यभिचारी तलाक याचिका के लिए आवश्यक पक्ष नहीं, उसकी अनुपस्थिति में भी डिक्री पारित की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि कथित व्यभिचारी (अडल्ट्रर) जो तीसरा पक्ष है और जिसका पति या पत्नी के साथ संबंध होने का संदेह है, तलाक याचिका के लिए आवश्यक पक्ष नहीं है।जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस अमित बंसल की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे व्यक्ति की अनुपस्थिति में भी डिक्री पारित की जा सकती है।अदालत ने कहा,“इसी तरह व्यभिचारी उचित पक्ष नहीं है, क्योंकि अडल्ट्री से संबंधित मुद्दे पर व्यभिचारी को पक्ष बनाए बिना भी निर्णय लिया जा सकता है। व्यभिचार के सबूत को इस बात से जोड़ने की जरूरत नहीं है कि...
अवैध तलाक-ए-सुन्नत को तीन तलाक के रूप में दंडनीय नहीं माना जाएगा: केरल हाइकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में दिए गए अपने फैसले में कहा कि यदि इरादा तत्काल और अपरिवर्तनीय तलाक देने का नहीं है तो इसे तलाक-उल-बिद्दत नहीं माना जा सकता।याचिकाकर्ता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के समक्ष अपने खिलाफ कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।प्रतिवादी ने उस पर तत्काल और अपरिवर्तनीय तलाक देकर मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत अपराध करने का आरोप लगाया।हालांकि याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यह तत्काल तलाक या अपरिवर्तनीय प्रकृति के तलाक-ए-बिद्दत का मामला नहीं था। उसने 3...
कानून वयस्क हो चुके बालक को पिता से भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार नहीं देता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि वयस्क हो चुके बालक घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम, सीआरपीसी की धारा 125 और हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम की धारा 20 (3) के प्रावधानों के अनुसार अपने पिता से भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकते।जस्टिस पी.जी. अजितकुमार ने कहा,"इस प्रकार, उक्त प्रावधानों में से कोई भी प्रावधान वयस्क हो चुके बालक को अपने पिता से भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार नहीं देता।"पुनर्विचार याचिकाकर्ता पति और पत्नी हैं तथा दो बेटे प्रतिवादी हैं। वर्ष 2014 में ट्रायल कोर्ट ने डीवी एक्ट...
हाईकोर्ट ने सहमति से तलाक के बाद शिकायत दर्ज करके अलग हुए पति को परेशान करने वाली महिला पर 50 हजार का जुर्माना लगाया
यह देखते हुए कि इस गुप्त प्रयास को कड़ी मेहनत से रोकने की जरूरत है, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया, जिसने आपसी सहमति से तलाक को धोखाधड़ी से प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत प्रतिशोध लेने के लिए शिकायत दर्ज करके अपने पूर्व पति को परेशान किया था।जस्टिस सुमित गोयल ने कहा,"यह अपरिहार्य निष्कर्ष निकलता है कि आरोपित आपराधिक शिकायत का उद्देश्य याचिकाकर्ता को परेशान करना और उस पर प्रतिशोध लेना है। इसलिए आरोपित आपराधिक शिकायत के आधार पर कार्यवाही जारी रखना याचिकाकर्ता...
BNSS की धारा 35 के तहत जारी समन में अपराध नंबर और विवरण नहीं होने पर पक्षकार को पुलिस के समक्ष उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि यदि BNSS की धारा 35 के तहत किसी नागरिक को समन जारी करने वाले पुलिस द्वारा जारी नोटिस में अपराध नंबर, कथित अपराध या एफआईआर संलग्न करने का विवरण नहीं है तो उचित अपवादों के अधीन, नोटिस प्राप्तकर्ता उस अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए बाध्य नहीं है, जिसने उसे उपस्थित होने का निर्देश दिया। उसके खिलाफ कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जा सकती है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"पुलिस स्टेशन में समन करना किसी व्यक्ति को खुश जगह पर बुलाना नहीं है। नागरिक को...
Encroachment Of Toll Plazas| प्रदर्शनकारियों को कानून का पालन करना चाहिए, अपनी बात साबित करने की चिंता में दूसरों के अधिकारों का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने की चिंता में अपने अधिकारों का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। यह याचिका भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा पंजाब में टोल प्लाजा के सुचारू संचालन के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक सहायता की मांग करते हुए दायर की गई। इसमें प्रदर्शनकारियों द्वारा टोल प्लाजा को जबरन बंद करने और अवैध संचालन के खिलाफ़ आरोप लगाया गया।किसान यूनियन के कार्यकर्ता जून से ही टोल शुल्क में लगातार बढ़ोतरी के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा पुलिस आयुक्त को BNS पर जांच अधिकारियों के लिए रिफ्रेशर कोर्स पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा संभाग के पुलिस आयुक्त को नव अधिनियमित भारतीय न्याय संहित 2023 (BNS) के संबंध में आयुक्तालय के भीतर जांच अधिकारियों को प्रदान किए गए रिफ्रेशर कोर्स का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान और जस्टिस मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने दहेज-क्रूरता और बलात्कार के मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए 7 आरोपियों द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर विचार करते हुए यह हलफनामा मांगा।मामला जब पीठ के समक्ष आया तो आरोपी के वकील...
मेडिकल जांच से इनकार करना बलात्कार के आरोप को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिग बलात्कार पीड़िता द्वारा मेडिकल जांच से इनकार करना ही उसके द्वारा लगाए गए आरोपों पर अविश्वास करने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस राजेंद्र प्रकाश सोनी की पीठ ने झूठे आरोप के कथित आधार पर POCSO आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया।पीठ ने कहा,“रिकॉर्ड के अवलोकन और प्रस्तुतियों पर विचार करने पर यह स्पष्ट होगा कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज बयान में पीड़िता ने याचिकाकर्ता के खिलाफ बलात्कार का विशेष रूप से आरोप लगाया। इस मामले को देखते हुए यदि पीड़िता...
याचिकाओं या वादों में मानहानिकारक बयान IPC की धारा 499 के तहत प्रकाशन के बराबर: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अदालती वादों में दिए गए मानहानिकारक बयान प्रकाशन के बराबर हैं और धारा 499 के तहत अपराध के लिए ऐसे मुवक्किल के खिलाफ मुकदमा चलाने का आधार बन सकते हैं।जस्टिस संजय धर ने मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा,"कानून में यह अच्छी तरह से स्थापित है कि जब किसी अदालत के समक्ष मानहानिकारक सामग्री वाली दलीलों पर भरोसा किया जाता है तो वह आरपीसी की धारा 499 के अर्थ में प्रकाशन के बराबर होती है। न्यायिक कार्यवाही में पक्षकारों की दलीलों, याचिकाओं, हलफनामों आदि में...
पिता के साथ नाबालिग का रहना अवैध कारावास नहीं कहा जा सकता, यह मानना उचित नहीं कि बच्चे के लिए केवल मां ही महत्वपूर्ण है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
बच्चे के जीवन में माता-पिता दोनों के सर्वोपरि महत्व को रेखांकित करते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 97 के तहत नाबालिग बच्चे की कस्टडी अवैध रूप से मां को देने के लिए मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाई।जस्टिस मोक्ष खजूरिया काज़मी की पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पिता के साथ बच्चे की कस्टडी को गलत कारावास नहीं माना जा सकता।पीठ ने रेखांकित किया,"वास्तविकता यह है कि बच्चे के जीवन में पिता का प्यार, देखभाल, स्नेह और समर्थन बच्चे के विकास को बढ़ावा देने में समान रूप से महत्वपूर्ण...



















