हाईकोर्ट
स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह केवल इसलिए अवैध नहीं कि पति-पत्नी में से कोई भी उस जिले में 30 दिनों तक नहीं रहा, जहां विवाह रजिस्टर था: बॉम्बे हाईकोर्ट
स्पेशल मैरिज 1954 के तहत विधिवत प्रमाणित विवाह को केवल इसलिए अवैध या शून्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि पति-पत्नी में से किसी ने अधिनियम की धारा 5 का पालन नहीं किया। जिसके अनुसार उनमें से किसी एक को 30 दिनों तक उस जिले में रहना अनिवार्य है, जहाँ उन्होंने अपना विवाह रजिस्टर कराया।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने कहा कि विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह रजिस्ट्रार द्वारा एक बार विवाह प्रमाणपत्र जारी किए जाने के बाद यह विवाह की वैधता का निर्णायक सबूत होता है जब तक कि इसे कानून...
हाईकोर्ट ने अंबेडकर और दलितों का अपमान करने के आरोप वाले प्ले पर दर्ज FIR खारिज की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में जैन सेंटर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के स्टूडेंट और फैकल्टी मेंबर्स के खिलाफ दर्ज मामला खारिज कर दिया, जिन पर एक नाटक का मंचन करने के लिए मामला दर्ज किया गया था, जिसमें कथित तौर पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर और दलितों को अपमानजनक तरीके से संदर्भित किया गया था।जस्टिस एस.आर. कृष्ण कुमार ने दिनेश नीलकांत बोरकर और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार किया और उनके खिलाफ शुरू किए गए अभियोजन को खारिज कर दिया।इसमें कहा गया,"याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत नाटक/लघु नाटक...
Clearing The Slate: डिजिटल युग में बरी होने के बाद भूल जाने का अधिकार
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और इंटरनेट की सर्वव्यापी उपस्थिति के युग में, 'भूल जाने के अधिकार' की अवधारणा एक महत्वपूर्ण कानूनी और नैतिक बहस के रूप में उभरी है। यह अधिकार, जिसे व्यापक रूप से व्यक्तियों की ऑनलाइन अपने बारे में व्यक्तिगत जानकारी के प्रसार को नियंत्रित करने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया गया है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के सूचना के अधिकार के साथ निजता के संरक्षण को संतुलित करने का प्रयास करता है। भारत में, 'भूल जाने के अधिकार' के इर्द-गिर्द न्यायशास्त्र अभी भी अपने प्रारंभिक चरण...
अग्रिम जमानत याचिका तभी स्वीकार्य, जब आरोपपत्र में आरोपी को घोषित भगोड़ा दिखाया गया हो: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने एकल जज द्वारा दिए गए संदर्भ का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत याचिका तब भी स्वीकार्य है, जब दाखिल आरोपपत्र में आरोपी को घोषित भगोड़ा दिखाया गया हो।अदालत ने आगे कहा कि अग्रिम जमानत याचिका तब भी स्वीकार्य है, जब आरोपी के खिलाफ CrPC की धारा 82 और 83 या धारा 299 के तहत कार्यवाही शुरू की गई हो या जब आरोपी को भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया हो।चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने कहा,“इस प्रश्न के कानूनी पहलुओं और माननीय सुप्रीम...
राजस्थान हाईकोर्ट ने मौजूदा निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 49 नगर पालिकाओं के लिए प्रशासक की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने मौजूदा निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद इन नगर पालिकाओं के दैनिक कार्यों की देखरेख के लिए 49 नगर पालिकाओं के प्रशासक/प्राधिकरण की नियुक्ति के लिए राज्य की अधिसूचना को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की।ऐसा करते हुए न्यायालय ने फैसला सुनाया कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 320 (नगर पालिका की स्थापना तक उसकी शक्तियों का प्रयोग) राज्य को मौजूदा नगर पालिका के कार्यकाल की समाप्ति के बाद नई नगर पालिका की स्थापना होने तक किसी अधिकारी...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पति के तलाक के फैसले को बरकरार रखा; पत्नी पर आरोप था कि उसने पति को अपने माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को पत्नी के विरुद्ध क्रूरता करने के लिए दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा है। इस आदेश के अनुसार पत्नी ने अपने पति को अपमानित किया तथा उस पर परिवार से अलग होने के लिए दबाव डाला। पारिवारिक न्यायालय ने इस आधार पर तलाक दिया था कि पत्नी ने पति पर परिवार से अलग होने के लिए दबाव डालकर क्रूरता की तथा इस संबंध में उसका अपमान किया तथा उसके साथ दुर्व्यवहार किया। हालांकि पत्नी तथा उसके पिता को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 तथा धारा 34 के अंतर्गत दंडनीय अपराधों से संबंधित...
जमानत आवेदन के चरण में न्यायालय द्वारा प्रथम दृष्टया दी गई राय जांच या सुनवाई पर बाध्यकारी नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जमानत आवेदन के चरण में प्रथम दृष्टया दी गई राय जांच और सुनवाई को प्रभावित नहीं करेगी। कोर्ट ने आगे कहा कि ट्रायल कोर्ट केवल इस आधार पर अभियुक्तों की कानूनी दलीलों को खारिज नहीं कर सकता कि वे प्रथम दृष्टया निष्कर्ष के बराबर हैं, क्योंकि ऐसा निर्धारण केवल जमानत आवेदन के चरण में ही प्रासंगिक है।जस्टिस पी.वी.कुन्हीकृष्णन ने स्पष्ट किया कि मुख्य मामले पर निर्णय लेते समय जमानत अदालत द्वारा दी गई प्रथम दृष्टया राय पर ट्रायल कोर्ट द्वारा भरोसा नहीं किया जा...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मोबाइल फोन पर अदालती कार्यवाही की ऑडियो रिकॉर्डिंग करने वाले व्यक्ति पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक आदेश में एक वादी पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जो अपने मोबाइल फोन पर अदालती कार्यवाही की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खता की खंडपीठ ने आदेश में दर्ज किया कि वादी - साजिद अब्दुल जब्बार पटेल जो एक मामले में प्रतिवादी का रिश्तेदार है, ने अपने कदाचार के लिए 1 लाख रुपए का जुर्माना देने की पेशकश की।आदेश में कहा गया कि जब पीठ दो भाइयों के बीच संपत्ति विवाद से संबंधित रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी तो एक निजी प्रतिवादी के रिश्तेदारों में से एक पटेल को...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर एक ही FIR से उत्पन्न मामलों की सूची बनाने के नियमों में बदलाव किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक प्रशासनिक आदेश प्रकाशित किया, जिसमें एक ही केस अपराध संख्या से उत्पन्न मामलों की सूची बनाने के नियमों में बदलाव किया गया। ये बदलाव शेखर प्रसाद महतो @ शेखर कुशवाह बनाम रजिस्ट्रार जनरल झारखंड हाईकोर्ट एवं अन्य 2025 लाइव लॉ (SC) 188 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार किए गए।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया एक ही FIR से जमानत याचिकाओं को एक ही बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का नियम लागू नहीं होगा, यदि न्यायाधीश का रोस्टर बदलता है।दिनांक 25.02.2025 के आदेश द्वारा इलाहाबाद...
दिल्ली हाईकोर्ट के जजों ने वेतन आयोग के लाभों पर याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग किया; वकील ने आरोप लगाया था कि वे सूची से मामले चुन-चुन कर ले रहे हैं
दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों ने वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लाभ प्रदान करने से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, क्योंकि एक वकील ने दावा किया था कि खंडपीठ सुनवाई के लिए “चुन-चुनकर मामले” उठा रही है। जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस अजय दिगपॉल की खंडपीठ ने स्थिति को “बेहद परेशान करने वाला” बताया और कहा कि मुख्य न्यायाधीश के आदेश के अधीन मामलों को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।कोर्ट ने कहा,“स्पष्ट रूप से, सुश्री एबीसी को इस पीठ पर कोई भरोसा नहीं है, और उन्हें लगता है कि...
कानून में वकील का कर्तव्य है कि वह चल रहे मुकदमे के दौरान वादी की मृत्यु की सूचना दे: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि वह मुकदमे के उपशमन को रद्द करने के लिए सीमा अवधि की गणना करने के उद्देश्य से उस तारीख को ध्यान में रखेगा जिस दिन वादी की मृत्यु को अदालत के रिकॉर्ड में लाया गया था। अदालत ने कहा कि पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील का यह कर्तव्य है कि वह मुकदमे के लंबित रहने के दौरान वादी की मृत्यु के बारे में अदालत को सूचित करे।अदालत ने कहा कि छह महीने की अवधि उस दिन से शुरू होगी जिस दिन मृतक पक्ष की मृत्यु का तथ्य अदालत के रिकॉर्ड में लाया गया था। अदालत ने माना कि मुकदमे...
“क्या स्थापित कॉलिंग सिस्टम कैदियों की संख्या से मेल खाते हैं, क्या जेलों में अवैध मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम हुआ है?” हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से हलफनामा मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से हलफनामे में यह बताने को कहा है कि राज्य भर की जेलों में कितने कैदी कॉलिंग सिस्टम मशीनें लगाई गई हैं और क्या पिछले तीन महीनों में कैदियों द्वारा मोबाइल फोन के अनधिकृत इस्तेमाल में कोई कमी आई है। जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि हलफनामे में राज्य (पंजाब) की जेलों में जेलवार स्थापित कैदी कॉलिंग सिस्टम मशीनों की संख्या बताई जाए। हलफनामे में यह भी बताया जाए कि कैदियों द्वारा मोबाइल फोन के...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मां को दिए गए पांच हजार रुपये भरण-पोषण भत्ते के आदेश के खिलाफ याचिका पर बेटे को फटकार लगाई, 50 हजार का जुर्माना लगाया; कहा- “कलयुग का क्लासिक उदाहरण”
यह कहते हुए कि यह कलयुग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोर दिया है, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बेटे पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसने अपनी मां को भरण-पोषण राशि के रूप में 5000 रुपये देने के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने कहा,"यह वास्तव में न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है, क्योंकि बेटे ने अपनी मां के खिलाफ 5000 रुपये के भरण-पोषण के निर्धारण को चुनौती देते हुए वर्तमान याचिका दायर करने का विकल्प चुना है, जबकि वह अपने पिता...
एएसआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से कहा- संभल मस्जिद अच्छी हालत में है, दोबारा रंगाई-पुताई की कोई ज़रूरत नहीं; मरम्मत कार्य ने ऐतिहासिक संरचना को बदल दिया है
इलाहाबाद हाईकोर्ट के गुरुवार के निर्देशों के बाद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आज एक निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया है कि संभल में शाही जामा मस्जिद पूरी तरह से अच्छी स्थिति में है, और इसे फिर से रंगने की कोई आवश्यकता नहीं है। एएसआई की रिपोर्ट में हालांकि कहा गया है कि मस्जिद समिति ने मस्जिद में मरम्मत और नवीनीकरण के कई कार्य किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐतिहासिक संरचना में वृद्धि और परिवर्तन हुआ है।तीन सदस्यीय समिति द्वारा दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि "स्मारक के फर्श को...
डायग्नोस्टिक्स में अनियमित रसायन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य को मध्य प्रदेश में एनएबीएल मान्यता प्राप्त पैथ लैब की सूची प्रस्तुत करने का आदेश दिया
देशभर में पैथोलॉजिकल लैब में मेडिकल डायग्नोस्टिक्स के लिए अनियमित रसायनों, री-एजेंट्स, साल्ट के इस्तेमाल से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य के अधिकारियों को राज्य में राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त पैथोलॉजिकल लैब की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे एक रोडमैप प्रस्तुत करें कि वे कैसे सुनिश्चित करेंगे कि मध्य प्रदेश में चल रही हर पैथोलॉजिकल लैब एनएबीएल...
ED ने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में क्रिश्चियन मिशेल की जमानत का विरोध किया; दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला मामले के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज धन शोधन मामले में ब्रिटिश आर्म्स काउंसलर क्रिश्चियन जेम्स मिशेल द्वारा दायर जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने मिशेल और केंद्रीय जांच एजेंसी के वकीलों की सुनवाई के बाद कहा,"सुरक्षित रखा गया।"मिशेल के वकील ने कहा कि मिशेल का पासपोर्ट पहले ही समाप्त हो चुका है और वह पहले ही छह साल से अधिक जेल में बिता चुका है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि PMLA के तहत...
दिल्ली हाईकोर्ट ने डोमेन नामों को बर्गर किंग के ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने और फर्जी फ्रेंचाइजी चलाने से प्रतिबंधित करने वाला जॉन डो आदेश पारित किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने फास्ट फूड चेन बर्गर किंग कॉरपोरेशन के पक्ष में अस्थायी निषेधाज्ञा दी है और उसके बर्गर किंग ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने वाले डोमेन नामों/वेबसाइटों को निलंबित करने का निर्देश दिया।बर्गर किंग कॉरपोरेशन (वादी) ने अपने ट्रेडमार्क का उपयोग करके फर्जी फ्रेंचाइजी/डीलरशिप वेबसाइट चलाने के लिए अज्ञात प्रतिवादियों के खिलाफ निषेधाज्ञा मांगी है।आरोप है कि डोमेन नामों के संचालक मासूम और भोले-भाले उपभोक्ताओं और ग्राहकों से पैसे वसूल रहे हैं। बर्गर किंग ने प्रस्तुत किया कि अज्ञात प्रतिवादियों...
फाइनल रिपोर्ट-I CBI का गोपनीय दस्तावेज, लेकिन असाधारण परिस्थितियों में संज्ञान के चरण में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि यदि असाधारण परिस्थितियाँ बनती हैं तो संज्ञान के चरण में विशेष अदालत के अवलोकन के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत करने से इनकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने CBI अपराध मैनुअल के अध्याय 18 के प्रावधानों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि जांच पूरी होने पर, प्रत्येक जांच अधिकारी को फाइनल रिपोर्ट भाग-I: जिसे FR-I के रूप में भी जाना जाता है प्रस्तुत करना आवश्यक है, जिसमें निर्धारित प्रोफार्मा में जांच के परिणाम और की जाने...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल मस्जिद परिसर की सफाई का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट के गुरुवार के निर्देशों का पालन करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया कि संभल में शाही जामा मस्जिद को रमजान से पहले सफेदी की जरूरत नहीं है, क्योंकि पूरी मस्जिद अच्छी स्थिति में इनेमल पेंट से ढकी हुई है।मस्जिद प्रबंधन समिति के इस आग्रह पर कि सफेदी जरूरी है और ASI की रिपोर्ट गलत है। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने समिति को ASI रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया या आपत्तियां दर्ज कराने के लिए मंगलवार तक का समय दिया।इस बीच न्यायालय ने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार ओलंपिक संघ के मामलों की देखरेख के लिए एड हॉक कमेटी नियुक्त करने के IOA का आदेश खारिज किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष द्वारा बिहार ओलंपिक संघ के मामलों की देखरेख के लिए पांच सदस्यीय एड हॉक कमेटी गठित करने का आदेश खारिज किया।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि 01 जनवरी को लिया गया निर्णय कानून की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।न्यायालय ने आदेश दिया कि बिहार ओलंपिक संघ के संविधान में संशोधन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, जिससे इसे IOA संविधान और भारत की राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 के अनुरूप बनाया जा सके।उन्होंने आगे कहा...




















