हाईकोर्ट

गिरफ्तारी के आधार नहीं बताने पर पहली गिरफ्तारी गलत ठहरी तो मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना दोबारा गिरफ्तारी अवैध: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी आरोपी को संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के आधार बताए बिना हिरासत में रखने के कारण रिहा किया गया तो जांच एजेंसी अपनी मर्जी से उसे दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती। दोबारा गिरफ्तारी के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना जरूरी है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई दोबारा गिरफ्तारी अवैध होगी और आरोपी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जाएगी।अदालत यह आदेश मनोज चौधरी की बंदी...

घरेलू संबंध के बिना PWDV Act के तहत कार्यवाही नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (PWDV Act) के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही के लिए उसके और पीड़िता के बीच घरेलू संबंध (Domestic Relationship) का होना जरूरी है।जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने यह टिप्पणी PWDV Act की कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली याचिका पर की। कोर्ट ने पति के भाई और बहन (देवर-ननद) के खिलाफ लंबित कार्यवाही रद्द कर दी।याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि वे महिला के साथ कभी साझा घर में नहीं रहे और उनके खिलाफ केवल सामान्य एवं अस्पष्ट आरोप लगाए गए...

शरजील इमाम को Ph.D पूरी करने के लिए रिसर्च कंटेंट देखने की अनुमति मांगने पर तिहाड़ जेल से जवाब तलब
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को शरजील इमाम की उस याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा, जिसमें उसने जेल के भीतर बिना इंटरनेट वाले कंप्यूटर पर पेन ड्राइव में मौजूद शोध सामग्री देखने की अनुमति मांगी। इमाम वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आरोपी है।जस्टिस संजीव नरूला ने जेल प्रशासन को मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।इमाम की ओर से पेश वकील अहमद इब्राहिम ने अदालत को बताया कि वह जनवरी 2020 से हिरासत में है और...

स्थिति काबू में आने के बाद कैदियों की अनावश्यक पिटाई नहीं कर सकता जेल वार्डन: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में कैदियों के साथ अनावश्यक हिंसा और मारपीट को लेकर जेल वार्डन को कड़ी चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि एक बार स्थिति काबू में आने और कैदियों के अपनी-अपनी कोठरियों में लौट जाने के बाद उन्हें डंडे से पीटना पूरी तरह अनावश्यक और अस्वीकार्य है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने जेल परिसर की घटना का सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद यह टिप्पणी की। 26 जून को जेल के खुले हिस्से में करीब 10-12 कैदियों के बीच झगड़ा हुआ था।अदालत ने देखा कि वार्डन ने शुरुआत में डंडे से...

महाराष्ट्र में SIR के दौरान मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाने के खिलाफ याचिका, 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगा हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की। याचिका में पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित खामियों को दूर करने और पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई।चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को दो कारोबारियों की ओर से दायर याचिका का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि मामला नागरिकों के...

ECI के 14 आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार, 22 अक्टूबर को सुनवाई की संभावना
बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने सोमवार, 28 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर जारी 14 आदेशों और कार्रवाइयों को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि इन फैसलों पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति दर्ज कराई थी।जस्टिस शर्मिला देशमुख और जस्टिस नीरज धोटे की खंडपीठ के समक्ष एडवोकेट असीम सरोदे ने याचिका का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। हालांकि, पीठ ने अपने रोस्टर में लंबित...

गुरुग्राम में जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त, बारिश के पानी का उपयोग न होने पर उपाय बताने के निर्देश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम में लगातार गहराते जल संकट पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से इसके समाधान के लिए ठोस उपाय सुझाने को कहा। हाईकोर्ट ने कहा कि दशकों से बोरवेल के अंधाधुंध इस्तेमाल के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, जबकि बारिश के दौरान जमा होने वाले पानी का भूजल पुनर्भरण के लिए प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ गुरुग्राम में जल संकट से जुड़े कई मामलों की सुनवाई कर रही थी। इनमें सबसे पुरानी याचिका वर्ष 2007...

तीन तलाक के लिए पति को उकसाने के आरोप में पांच रिश्तेदारों को गुजरात हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत
गुजरात हाईकोर्ट ने पत्नी को तीन तलाक देने के लिए पति को कथित तौर पर उकसाने के मामले में आरोपी बनाए गए पांच रिश्तेदारों को अग्रिम जमानत दी।जस्टिस संजीव जे. ठक्कर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ मुख्य आरोप पति का समर्थन करने और उसे शिकायतकर्ता पत्नी को तलाक देने के लिए उकसाने का है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपियों के खिलाफ दर्ज अपराधों में उम्रकैद या मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है और उनके खिलाफ पहले का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने नहीं आया है।पांचों आरोपियों के खिलाफ...

वकील को केस वापस लेने की धमकी पर हाईकोर्ट सख्त, FIR और SIT जांच के आदेश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को मुकदमा वापस लेने की धमकी दिए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए FIR दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील को न्यायिक कार्यवाही से पीछे हटने के लिए धमकाना न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।जस्टिस एन.एस. शेखावत ने चंडीगढ़ के सीनियर पुलिस अधीक्षक को वकील की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। साथ ही चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक को पुलिस...

क्या है फॉर्म 6? जिसके बारे में ECI ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस नए फ़ॉर्म डिक्लेरेशन को मंज़ूरी दी
स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रोसेस के दौरान फ़ॉर्म 6 [जिसका इस्तेमाल नए वोटर्स को शामिल करने के लिए किया जाता है] में किए गए बदलावों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने कल एक प्रेस बयान जारी करके नए वोटर्स के लिए डिक्लेरेशन फ़ॉर्म शामिल करने के अपने फ़ैसले को सही ठहराने की कोशिश की, जो फ़ॉर्म 6 के ज़रिए एनरोलमेंट चाहते हैं।ECI ने कहा कि SIR के लिए फ़ॉर्म 6 के साथ जोड़े गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR से जुड़े अपने मई के...

रिविज़न में असफलता के बाद BNSS की धारा 528 के तहत निहित शक्तियों का इस्तेमाल 'पिछले दरवाज़े से एंट्री' के तौर पर नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई पक्ष रिविज़न (पुनरीक्षण) का उपाय आज़माने के बाद भी असफल रहने पर किसी आदेश को चुनौती देने के लिए आमतौर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत निहित शक्तियों का इस्तेमाल 'पिछले दरवाज़े से एंट्री' के तौर पर नहीं कर सकता, जब तक कि मामले में घोर अन्याय न हुआ हो।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि हालांकि हाईकोर्ट की निहित शक्तियां व्यापक हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल नियमित रूप से इस तरह नहीं किया जा सकता कि BNSS की धारा 438(3) के तहत कानूनी रोक ही बेकार हो...

फोरेंसिक सबूतों ने पीड़िता के बयान को पूरी तरह गलत साबित किया: दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 साल बाद रेप की सज़ा रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यक्ति को रेप के मामले में 2013 में सुनाई गई सज़ा रद्द की। कोर्ट ने पीड़िता के बयान में अहम विसंगतियां और उसके बयान तथा मेडिकल, फोरेंसिक और दस्तावेज़ी सबूतों के बीच विरोधाभास पाया।जस्टिस विमल कुमार यादव उस अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें एक व्यक्ति को IPC की धारा 363, 368 (अपहरण) के साथ धारा 366, 376 (रेप) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया और सात साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई गई।अभियोजन पक्ष का आरोप था कि व्यक्ति पीड़िता को दिल्ली के एक बाज़ार से ज़बरदस्ती उत्तर...

पत्नी के पहले पति से हुए बच्चे को अपनाने के बाद पति उसके भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के पहले पति से हुए बच्चे को 'जान-बूझकर' अपने परिवार का हिस्सा मानने के बाद, बाद में उसके भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से "मुकर" नहीं सकता।जस्टिस आलोक महरा ने कहा,"मौजूदा हालात की पूरी जानकारी के साथ वैवाहिक रिश्ते को होशपूर्वक स्वीकार करने के बाद" वह व्यक्ति अब बच्चे के "भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।" इस फैसले के आधार पर कोर्ट ने हरिद्वार फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ क्रिमिनल रिविज़न याचिका को मंज़ूरी दी। फैमिली कोर्ट ने पत्नी और...

वकील की दलीलों के आधार पर पास हुए आदेशों से मुकर नहीं सकता पक्षकार, इससे 'अराजक स्थिति' पैदा होगी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई पक्षकार अपने वकील की दलीलों के आधार पर पास किए गए आदेश से पीछे नहीं हट सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने की इजाज़त देने से "अराजक स्थिति" पैदा होगी।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह टिप्पणी इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड नाम की कंपनी की याचिका खारिज करते हुए की। कंपनी ने लोक अदालत के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें कथित समझौते के आधार पर चेक बाउंस की शिकायत का निपटारा (कंपाउंडिंग) किया गया।बैंक ने प्राइवेट प्रतिवादियों को 14.5 लाख रुपये का लोन दिया। जब उधार लेने वाले बकाया...

रुटीन FIR में शामिल होना ही हथियार का लाइसेंस न देने का आधार नहीं हो सकता, जब तक कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा साबित न हो: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आवेदक के खिलाफ़ सिर्फ़ आम FIR दर्ज होने या उसमें शामिल होने के आधार पर ही हथियार का लाइसेंस देने से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इसके लिए हथियार के गलत इस्तेमाल, हिंसा या सार्वजनिक सुरक्षा को सीधे खतरे का ठोस सबूत होना ज़रूरी है।जस्टिस आलोक कुमार की सिंगल जज बेंच बिल्डर और 'बिग्रहपुरम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड' के डायरेक्टर की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने नॉन-प्रोहिबिटेड बोर रिवॉल्वर/पिस्टल के लिए हथियार का लाइसेंस न दिए जाने के फैसले को चुनौती...

शादी जैसी पवित्र संस्था को हल्के में नहीं लेना चाहिए: तलाक के बाद दोबारा शादी करने वाले दंपती को इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुरक्षा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलाक के बाद दोबारा शादी करने वाले दो बच्चों के माता-पिता दंपती के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन की सुरक्षा का आदेश दिया। अदालत ने साथ ही कहा कि “विवाह जैसी पवित्र संस्था को हल्के में नहीं लेना चाहिए।”जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने दंपती की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने अपने शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन की सुरक्षा और विवाह के पंजीकरण में सहायता की मांग की थी।याचिकाकर्ता पहले भी पति-पत्नी रह चुके थे और उनके दो बच्चे...

जालसाजी के आरोप पर गिफ्ट डीड रद्द नहीं कर सकता सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल, सिविल कोर्ट में जाना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सीनियर सिटीजन का आरोप हो कि उसकी संपत्ति का गिफ्ट डीड जाली है और उसने ऐसा दस्तावेज बनाया ही नहीं, तो सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत गठित न्यायाधिकरण उसे जाली घोषित कर रद्द नहीं कर सकता। ऐसे मामले में सीनियर सिटीजन को सक्षम सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 23(1) तभी लागू होती है, जब संपत्ति का वैध हस्तांतरण इस शर्त पर किया गया हो...

NEET-UG उत्तर कुंजी पर अकेले उम्मीदवार की आपत्ति से विशेषज्ञ राय जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा के विवादित प्रश्नों और उनके उत्तर विकल्पों को विशेषज्ञ के पास तभी भेजा जा सकता है, जब अदालत के सामने ऐसी ठोस सामग्री हो जो विशेषज्ञ राय लेने की जरूरत दिखाती हो। केवल एक उम्मीदवार की ओर से उत्तर कुंजी पर आपत्ति किए जाने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उसे जांचकर खारिज कर दिए जाने पर विशेषज्ञ से राय लेना जरूरी नहीं है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने NEET-UG 2026 के एक उम्मीदवार की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उम्मीदवार ने...

सिर्फ यह मान लेना कि आरोपी को जमानत मिल जाएगी, निवारक हिरासत का आधार नहीं हो सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर निवारक हिरासत का आदेश कायम नहीं रखा जा सकता कि आरोपी को जमानत मिल सकती है क्योंकि संबंधित अपराध में अनिवार्य रूप से मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसी संतुष्टि जांच से जुड़े ठोस तथ्यों और सामग्री पर आधारित होनी चाहिए।जस्टिस रणजीतसिंहा राजा भोंसले और जस्टिस सारंग वी. कोतवाल की खंडपीठ पुणे के पुलिस आयुक्त की ओर से महाराष्ट्र खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1981 के तहत जारी हिरासत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही...

विदेश यात्रा रोकने से गर्भवती अफगान महिला के इलाज में बाधा न आए, दिल्ली हाईकोर्ट का पुलिस को निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने जुड़वा बच्चों से गर्भवती अफगान नागरिक की ब्रिटेन यात्रा की अनुमति देने से इनकार करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि यात्रा पर रोक उसके और गर्भस्थ बच्चों के जरूरी चिकित्सकीय उपचार में बाधा न बने। महिला गर्भावस्था के दौरान मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से भी जूझ रही है।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि महिला के जुड़वा गर्भ और मेडिकल जटिलताओं को देखते हुए यात्रा की अनुमति न देने का फैसला उसके और गर्भस्थ बच्चों के जरूरी इलाज में रुकावट नहीं बनना चाहिए। अदालत ने संबंधित थाना...
