हाईकोर्ट

POCSO मामले में वचनानंद स्वामी की अग्रिम जमानत रद्द, कर्नाटक हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश पर जताई गंभीर आपत्ति
POCSO मामले में वचनानंद स्वामी की अग्रिम जमानत रद्द, कर्नाटक हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश पर जताई गंभीर आपत्ति

कर्नाटक हाईकोर्ट ने POCSO के तहत दर्ज मामले में वचनानंद स्वामी को सेशन कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत रद्द की। अदालत ने कहा कि जिस तरीके से अग्रिम जमानत दी गई, वह गंभीर चिंता का विषय है।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने शिकायतकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए 2 मई को सेशन कोर्ट द्वारा पारित अग्रिम जमानत का आदेश निरस्त किया। वचनानंद स्वामी के खिलाफ POCSO Act की विभिन्न धाराओं के तहत अप्राकृतिक यौन शोषण सहित गंभीर आरोप दर्ज हैं।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल आरोपपत्र दाखिल हो जाने के कारण अग्रिम...

अस्पताल पर लापरवाही के आरोपों की रिपोर्टिंग जारी रख सकता है गली न्यूज़, लेकिन अपमानजनक टिप्पणियों पर रोक: बॉम्बे हाईकोर्ट
अस्पताल पर लापरवाही के आरोपों की रिपोर्टिंग जारी रख सकता है 'गली न्यूज़', लेकिन अपमानजनक टिप्पणियों पर रोक: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में लोकप्रिय स्थानीय डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'गली न्यूज़' को कथित चिकित्सीय लापरवाही से जुड़े मामले की रिपोर्टिंग जारी रखने की अनुमति दी। हालांकि अदालत ने चैनल को अस्पताल के खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक शब्दों या आरोपों के इस्तेमाल से रोक दिया।जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया समाचार प्रसारण के कुछ हिस्से मानहानिकारक प्रतीत होते हैं। इसलिए चैनल को मामले की रिपोर्टिंग से नहीं रोका जाएगा, लेकिन वह अस्पताल के खिलाफ ऐसे आरोप, संकेत या टिप्पणियां...

समाहित कर्मचारियों के सेवा अधिकारों की रक्षा के लिए अलग पदोन्नति नियम वैध: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
समाहित कर्मचारियों के सेवा अधिकारों की रक्षा के लिए अलग पदोन्नति नियम वैध: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) में समाहित कर्मचारियों के लिए अलग पदोन्नति मानदंड तय करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं है। अदालत ने कहा कि इन कर्मचारियों की पहले से मौजूद सेवा शर्तों की रक्षा के उद्देश्य से किया गया वर्गीकरण उचित और वैध है।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने यह फैसला उन कर्मचारियों की याचिका पर सुनाया, जिन्होंने वर्ष 2018 के सेवा उपविधियों की वैधता को...

धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए किसी खास सड़क का इस्तेमाल करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुहर्रम जुलूस के लिए रास्ते की मांग वाली याचिका खारिज की
धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए किसी खास सड़क का इस्तेमाल करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुहर्रम जुलूस के लिए रास्ते की मांग वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है, लेकिन यह किसी समुदाय को धार्मिक रीति-रिवाजों के पालन के लिए किसी खास सड़क का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं देता। [2026 LiveLaw (AB) 333]जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों वाले जुलूसों के लिए रास्ते तय करने की ज़िम्मेदारी सिविल और पुलिस प्रशासन की होती है।कोर्ट ने यह बात संभल ज़िले के कुछ निवासियों की जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए कही।...

प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) के आधार पर निजी जमीन पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता राज्य: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) के आधार पर निजी जमीन पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता राज्य: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) होने के नाते सरकार निजी भूमि पर प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) का दावा कर मालिकाना हक हासिल नहीं कर सकती। अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि सिंचाई नहर (डिस्ट्रिब्यूटरी) के लिए इस्तेमाल की गई निजी जमीन का उचित मुआवजा तीन महीने के भीतर भूमि मालिकों को दिया जाए।2026 LiveLaw (PH) 209 में जस्टिस रमेश कुमारी ने कहा कि राज्य का दायित्व नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा करना है। सरकार नागरिकों की जमीन पर...

नाबालिग से शादी और शारीरिक संबंध के आरोपी को कर्नाटक हाईकोर्ट से मिली जमानत, अदालत ने कहा— लड़की को थी सांसारिक समझ
नाबालिग से शादी और शारीरिक संबंध के आरोपी को कर्नाटक हाईकोर्ट से मिली जमानत, अदालत ने कहा— 'लड़की को थी सांसारिक समझ'

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से शादी करने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी 28 वर्षीय युवक को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से टिप्पणी की कि लड़की को अपने कार्यों के परिणामों के बारे में 'सांसारिक समझ' (Worldly Knowledge) थी।हाईकोर्ट की एकल पीठ के जस्टिस एस. विश्वजीत शेट्टी ने मामले की सुनवाई करते हुए नोट किया कि आरोपी और पीड़िता एक-दूसरे से प्यार करते थे, उन्होंने मंदिर में शादी की और काफी समय तक साथ रहे थे।कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?जस्टिस एस....

पहले से मौजूद सर्विस की शर्तों की सुरक्षा, एब्जॉर्ब किए गए कर्मचारियों के लिए अलग प्रमोशन क्राइटेरिया को सही ठहराती है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
पहले से मौजूद सर्विस की शर्तों की सुरक्षा, एब्जॉर्ब किए गए कर्मचारियों के लिए अलग प्रमोशन क्राइटेरिया को सही ठहराती है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट की जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की डिवीज़न बेंच ने माना कि 2018 के सर्विस बाय-लॉज़ के तहत बनाया गया वर्गीकरण आर्टिकल 14 के तहत उचित और वैध है। यह वर्गीकरण एक बाध्यकारी वादे के आधार पर एब्जॉर्ब किए गए UPPCL कर्मचारियों की पहले से मौजूद सर्विस की शर्तों की सुरक्षा करता है और उन्हें उन याचिकाकर्ताओं से अलग करता है, जिन्हें सीधे UPCL में नियुक्त किया गया और जिन्हें प्रमोशन के लिए 10 साल की क्वालिफाइंग सर्विस की आवश्यकता होती है।बैकग्राउंड फैक्ट्सयाचिकाकर्ताओं को...

CrPC की धारा 311 का मकसद सच सामने लाना, न कि किसी एक पक्ष का साथ देना: POCSO केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने पीड़िता के स्कूल रिकॉर्ड को मंगाने की इजाज़त दी
CrPC की धारा 311 का मकसद सच सामने लाना, न कि किसी एक पक्ष का साथ देना: POCSO केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने पीड़िता के स्कूल रिकॉर्ड को मंगाने की इजाज़त दी

POCSO केस की सुनवाई के आखिरी दौर में CrPC की धारा 311 के तहत अर्ज़ी को मंज़ूरी देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान का मकसद अभियोजन पक्ष या आरोपी का पक्ष लेना या उनके खिलाफ़ होना नहीं है, बल्कि मामले में सही फ़ैसला लेने के लिए सच को स्वाभाविक रूप से सामने लाना है। [2026 LiveLaw (Raj) 263]CrPC की धारा 311 अदालतों को यह अधिकार देती है कि वे जांच या सुनवाई के किसी भी चरण में किसी भी गवाह या किसी भी सबूत को बुला सकें, दोबारा बुला सकें या दोबारा जांच सकें।याचिकाकर्ता पर POCSO का एक केस चल...

क्या राज्य के माइनिंग नियम मुख्य MMDR Act से ज़्यादा जुर्माना तय कर सकते हैं? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट करेगा जांच
क्या राज्य के माइनिंग नियम मुख्य MMDR Act से ज़्यादा जुर्माना तय कर सकते हैं? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट करेगा जांच

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका एमपी मिनरल (अवैध माइनिंग, ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज की रोकथाम) नियम, 2022 के नियम 18 को चुनौती देती है। यह नियम मुख्य कानून - माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट की धारा 21(2) में तय जुर्माने से ज़्यादा जुर्माना लगाने की इजाज़त देता है।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने कहा:"...नियम 2022 के नियम 18 को चुनौती देने के लिए प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनता है"।इस चुनौती पर ध्यान देते...

इस्लाम अपनाने से व्यक्ति BC (मुस्लिम) आरक्षण का हकदार नहीं बनता: ​​मद्रास हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित किया
इस्लाम अपनाने से व्यक्ति BC (मुस्लिम) आरक्षण का हकदार नहीं बनता: ​​मद्रास हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित किया

मद्रास हाईकोर्ट ने एक सरकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित किया। इस आदेश के तहत पिछड़ी जातियों, अति पिछड़ी जातियों, डी-नोटिफाइड समुदायों या अनुसूचित जातियों से इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति को BC (मुस्लिम) माना जा सकता था और आरक्षण का लाभ उठाने के लिए 7 अधिसूचित समुदायों में से किसी एक का समुदाय प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता था। [2026 LiveLaw (Mad) 279]'तमिलनाडु पिछड़ी जातियां, अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां (शैक्षिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के तहत सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का...

मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत: खेद जताने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामला बंद किया
मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत: खेद जताने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामला बंद किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि का मामला बंद किया। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि गांधी ने 2018 में एक चुनावी रैली के दौरान सिंह के खिलाफ झूठे और मानहानिपूर्ण बयान दिए। [2026 LiveLaw (MP) 235]गांधी ने ट्रायल कोर्ट के 2024 के उस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया, जिसमें मानहानि के मामले का संज्ञान लिया गया और उन्हें समन जारी किया गया।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्टर सनी देओल के खिलाफ प्रोड्यूसर की अपील को फिर से शुरू किया, ₹15,000 का जुर्माना लगाया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्टर सनी देओल के खिलाफ प्रोड्यूसर की अपील को फिर से शुरू किया, ₹15,000 का जुर्माना लगाया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (25 जून) को प्रोड्यूसर सुनील दर्शन पर ₹15,000 का जुर्माना लगाते हुए उनकी अपील को फिर से शुरू करने की इजाज़त दी। यह अपील 2015 में सिंगल-जज के फैसले के खिलाफ दायर की गई, जिसमें फिल्ममेकर और बॉलीवुड एक्टर सनी देओल द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ दायर दो आर्बिट्रेशन याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।मामले की पृष्ठभूमि यह है कि दोनों सेलिब्रिटी एक दशक से भी ज़्यादा समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह विवाद 'गुड मॉर्निंग इंडिया' नाम की फिल्म से देओल के अलग होने को लेकर था, जिसे 2008...

कथित लापरवाही के कारण कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत किसी तीसरे पक्ष को मुआवजा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
कथित लापरवाही के कारण 'कर्मचारी मुआवजा अधिनियम' के तहत किसी तीसरे पक्ष को मुआवजा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि 'कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923' के तहत मुआवजा केवल मृतक कर्मचारी के नियोक्ता (employer) को ही देना होगा, न कि कथित लापरवाही के आधार पर किसी तीसरे पक्ष को। कोर्ट ने कहा कि यह अधिनियम नियोक्ताओं द्वारा अपने कर्मचारियों को मुआवजा देने का प्रावधान करता है। इसका 'टॉर्टियस लायबिलिटी' (गलती या लापरवाही के लिए कानूनी जिम्मेदारी) से कोई लेना-देना नहीं है।जस्टिस रवींद्र मैठाणी 'कर्मचारी मुआवजा आयुक्त, रुद्रप्रयाग' द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ 'उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन...

CPC के ऑर्डर 33 नियम 9 के तहत निधन व्यक्ति के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति वापस नहीं ली जाती, तब तक वादी को कोर्ट फीस देने की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
CPC के ऑर्डर 33 नियम 9 के तहत 'निधन व्यक्ति' के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति वापस नहीं ली जाती, तब तक वादी को कोर्ट फीस देने की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक 'निधन व्यक्ति' (indigent person) के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति, जो वादी को दी गई, उसे पहले सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर 33 नियम 9 के अनुसार वापस नहीं लिया जाता, तब तक केवल कोर्ट फीस जमा करने की मांग वाली अर्ज़ी के आधार पर वादी को कोर्ट फीस जमा करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।कोर्ट ने पाया कि प्रतिवादियों ने वादी को 'निधन व्यक्ति' के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति वापस लेने की मांग नहीं की, बल्कि बाकी सबूत दर्ज करने से पहले कोर्ट फीस जमा करने का...

हरेन पांड्या मर्डर केस में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर 6 महीने के अंदर फ़ैसला करे राज्य: गुजरात हाईकोर्ट
हरेन पांड्या मर्डर केस में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर 6 महीने के अंदर फ़ैसला करे राज्य: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह मोहम्मद असगर अली की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर छह महीने के अंदर फ़ैसला ले। असगर अली को राज्य के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।जस्टिस एमआर मेंगडे ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में पेश की गई जेल की रिपोर्ट से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की सज़ा कम करने के मामले पर विचार करने की प्रक्रिया चल रही है। सलाहकार समिति की राय मिल गई है और इसे जल्द ही संबंधित अधिकारी के सामने पेश किया जाएगा।कोर्ट ने...

फोरम कन्वेनियंस का सिद्धांत CAT के उन नियमों को नहीं बदल सकता, जो अधिकार क्षेत्र तय करने के लिए आवेदक की जगह को प्राथमिकता देते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
'फोरम कन्वेनियंस' का सिद्धांत CAT के उन नियमों को नहीं बदल सकता, जो अधिकार क्षेत्र तय करने के लिए आवेदक की जगह को प्राथमिकता देते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें सर्विस से जुड़े विवाद को एर्नाकुलम बेंच से दिल्ली की प्रिंसिपल बेंच में ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि 'फोरम कन्वेनियंस' का सिद्धांत CAT (प्रक्रिया) नियमों के तहत बनी कानूनी व्यवस्था को नहीं बदल सकता, जो आवेदक की पोस्टिंग की जगह को प्राथमिकता देती है।जस्टिस सी. हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (प्रक्रिया) नियम, 1987 के नियम...