हाईकोर्ट
पेड़ों की छंटाई पर बिना अनुमति वाली SOP पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार की उस मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अमल पर रोक लगाई, जिसमें 15.7 सेंटीमीटर से कम घेराव वाली शाखाओं की सामान्य देखभाल और हल्की छंटाई” बिना ट्री अधिकारी की पूर्व अनुमति के करने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि यह SOP अदालत के पहले दिए गए बाध्यकारी फैसले के विपरीत है।अदालत ने कहा कि 2 मई 2025 को दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 33 के तहत जारी अधिसूचना के जरिए सरकार वर्ष 2023 में दिए गए अदालत के फैसले को निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है। उस...
नागरिकता साबित करने के लिए NRC अंश स्वीकार्य साक्ष्य नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के अंशों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस शमीमा जहां की खंडपीठ ने कहा कि हाल ही में दिए गए एक फैसले में भी अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि नागरिकता तय करने के मामलों में NRC दस्तावेजों का कानूनी महत्व नहीं है।अदालत ने कहा,“याचिकाकर्ता ने NRC विवरण पर भरोसा किया जिसमें उसे अबुल हाकी का पुत्र बताया गया था। लेकिन यह दस्तावेज साक्ष्य के रूप में...
सिद्धार्थ वरदराजन को OCI कार्ड देने से इनकार करने का केंद्र का फैसला रद्द, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा कारणयुक्त आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को OCI कार्ड देने से इनकार करने संबंधी केंद्र सरकार का फैसला रद्द किया।अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से जारी संचार में कोई कारण नहीं बताया गया, इसलिए उसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने वरदराजन की OCI कार्ड संबंधी अर्जी को बहाल करते हुए केंद्र सरकार को नया और कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया।वरदराजन की ओर से सीनियर एडवोकेट नित्या रामकृष्णन और एडवोकेट अर्चित कृष्ण ने पक्ष रखा।उन्होंने अदालत को बताया कि...
छोटी कार और कम सोना लाने पर ताने देना क्रूरता की श्रेणी में आता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज में छोटी कार लाने और अपेक्षा से कम सोना देने को लेकर पत्नी को बार-बार ताने देना प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत क्रूरता माना जा सकता है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी मृत महिला के पिता और राज्य सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की।याचिकाओं में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें महिला के पति को दहेज मृत्यु और क्रूरता के आरोपों से मुक्त किया गया था।हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ धारा 498ए के तहत...
एक विवादित वोट से सरकार का भविष्य तय हो सकता है तो संवैधानिक अदालतें चुप नहीं रह सकतीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपत्तूर विधानसभा सीट से एक वोट से चुनाव जीतने वाले TVK विधायक सीनिवासा सेतुपति को फिलहाल फ्लोर टेस्ट में हिस्सा लेने से रोक दिया।अदालत ने कहा कि जब किसी विवादित वोट से सरकार का भविष्य तय होने की स्थिति बन जाए तब संवैधानिक अदालतें मूकदर्शक नहीं रह सकतीं।जस्टिस विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की अवकाशकालीन पीठ ने यह अंतरिम आदेश DMK उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।याचिका में आरोप लगाया गया कि उनके पक्ष में पड़ा एक डाक मतपत्र गलती से...
केवल व्यभिचार के आरोप लगाकर पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल पत्नी पर व्यभिचार (Adultery) के आरोप लगाकर उसे दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत अंतरिम भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता, जब तक कि ऐसे आरोपों के समर्थन में ठोस और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य मौजूद न हों।जस्टिस नीरजा के. कालसन ने कहा कि वैवाहिक मुकदमेबाजी को “चरित्र हनन” का मंच नहीं बनने दिया जा सकता, ताकि लंबित कार्यवाही के दौरान किसी जीवनसाथी को आर्थिक रूप से परेशान किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप, बिना मजबूत...
स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाने वाले मुस्लिम व्यक्ति का धर्मांतरण आवेदन खारिज करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ADM को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिषेध कानून के तहत एक मुस्लिम व्यक्ति के हिंदू धर्म अपनाने के मामले में ADM की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने कहा कि ADM ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बार-बार पुलिस जांच करवाई और आपराधिक मामले को आधार बनाकर धर्मांतरण प्रमाणन आवेदन खारिज कर दिया।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने फिलहाल प्रयागराज के ADM (प्रशासन) द्वारा पारित उस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता के 'सनातन धर्म'...
सरकारी नौकरी का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से ठगी गंभीर अपराध, समझौते से आरोप कम नहीं होते: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी के मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह के अपराध समाज पर गंभीर प्रभाव डालते हैं और संस्थागत प्रक्रियाओं में लोगों का भरोसा कमजोर करते हैं।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि,“फर्जी नियुक्ति पत्रों और सरकारी नौकरी के झूठे आश्वासनों के जरिए बेरोजगार युवाओं का शोषण करना गंभीर अपराध है। केवल पक्षों के बीच समझौता हो जाने या कुछ रकम लौटाने का दावा करने से आरोपों की गंभीरता कम नहीं हो जाती।” अदालत ने कहा कि...
रेलवे अधिकारी की गिरफ्तारी पर खबर छापने के मामले में 'हिंदुस्तान' के प्रधान संपादक को हाईकोर्ट से राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दैनिक समाचार पत्र हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि कार्यवाही पर रोक लगाई।जस्टिस बृज राज सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश शशि शेखर की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामला गोंडा कोर्ट में दायर मानहानि शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता दिलीप कुमार वर्मा रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक के पद पर तैनात थे। उन पर शीशम के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में रेलवे संपत्ति अधिनियम, 1966 की धारा 3 के तहत FIR दर्ज की गई थी। इस मामले में उनकी...
S. 138 NI Act | बाउंस हुए चेक पर साइन न करने वाले जॉइंट अकाउंट होल्डर पर केस नहीं चल सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
चेक बाउंस होने से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फिर से दोहराया कि जॉइंट अकाउंट होल्डर, जिसने विवादित चेक पर साइन नहीं किए, उस पर Negotiable Instruments Act, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत केस नहीं चलाया जा सकता।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने यह भी साफ किया कि NI Act की धारा 141, जो परोक्ष दायित्व (vicarious liability) से जुड़ी है, सिर्फ़ कंपनियों और पार्टनरशिप फर्मों पर लागू होती है, व्यक्तियों पर नहीं।इस तरह सिंगल जज ने आवेदक (मधु सिंह) के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के 'सामूहिक बलात्कार' मामले में 3 लोगों को बरी किया, कहा- कोई मेडिकल सबूत नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1983 के एक कथित सामूहिक बलात्कार मामले में 3 लोगों को बरी किया। इस मामले में पीड़िता घटनाक्रम के समय 7 महीने की गर्भवती थी।जस्टिस अवनीश सक्सेना की बेंच ने आरोपियों को 'संदेह का लाभ' दिया। बेंच ने पाया कि FIR दर्ज करने में बिना किसी वजह के देरी हुई और मामले की पुष्टि करने वाले मेडिकल सबूतों की पूरी तरह कमी है।कोर्ट ने FIR को 'अस्पष्ट' भी बताया, क्योंकि कथित तौर पर पीड़िता के साथ चार लोगों ने बलात्कार किया था, लेकिन FIR में सिर्फ तीन लोगों के नाम थे।बेंच ने टिप्पणी...
उत्तराखंड ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम: गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किसी सोसाइटी को ज़मीन हस्तांतरित करने हेतु पूर्व अनुमति अनिवार्य - हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि उत्तराखंड में लागू 'उत्तर प्रदेश ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950' की धारा 154 के तहत, गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किसी सोसाइटी के पक्ष में ज़मीन का हस्तांतरण करने हेतु राज्य सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है; भले ही यह हस्तांतरण 'उपहार विलेख' (Gift Deed) के माध्यम से किया गया हो। कोर्ट ने टिप्पणी की कि धारा 154 के तहत वैधानिक प्रतिबंध केवल 'बिक्री' के माध्यम से होने वाले हस्तांतरण तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि हस्तांतरण के सभी मान्यता प्राप्त...
हथौड़ा और कोर्ट: स्पीकर के निर्णयों में न्यायिक समीक्षा का विश्लेषण
राघव चड्ढा और आप के दो-तिहाई राज्यसभा सदस्यों (विधान पार्टी) ने दसवीं अनुसूची के विलय अपवाद (चौथे पैराग्राफ) और बॉम्बे हाईकोर्ट की मिसाल का हवाला देते हुए भाजपा में विलय कर दिया है। 2019 में, गोवा कांग्रेस के 15 में से 10 विधायकों का भाजपा में विलय हो गया। स्पीकर ने बाद की अयोग्यता याचिका को खारिज कर दिया, वो फैसला जिसे 2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था।बॉम्बे हाईकोर्टने पुष्टि की कि दसवीं अनुसूची के तहत वैध विलय के लिए विधायक दल का दो-तिहाई बहुमत पर्याप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे...
भोजशाला स्थल पर मंदिर होने का कोई 'ठोस सबूत' नहीं, नमाज़ की अनुमति देने वाला 1935 का नोटिफिकेशन वैध: मुस्लिम पक्ष की दलील
भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद पर चल रही सुनवाई में मुस्लिम समुदाय के याचिकाकर्ताओं में से एक, काज़ी ज़कुल्लाह ने दलील दी कि विवादित स्थल पर मंदिर होने का कोई ठोस सबूत नहीं है।याचिकाकर्ता ने आगे दलील दी कि धार के शासक द्वारा अगस्त 1935 में जारी किया गया वह 'ऐलान' (घोषणा), जिसमें इस स्थल पर नमाज़ पढ़ने का अधिकार दिया गया था, एक वैध दस्तावेज़ है; क्योंकि 1904 से 1951 के बीच की अवधि में इस स्मारक को सरकार या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 'संरक्षित स्थल' घोषित नहीं किया गया।यह विवाद...
झुग्गी हटाकर वैकल्पिक आवास देना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन नहीं, यदि DUSIB नियमों का पालन हो : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि झुग्गी बस्तियों से लोगों को हटाकर उन्हें वैकल्पिक आवास देना अपने आप में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा, बशर्ते दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) की नीति और प्रोटोकॉल में तय सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव भाई राम कैंप, DID कैंप और मस्जिद कैंप के निवासियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इन याचिकाओं में निवासियों ने उन्हें हटाकर सवदा घेवर्रा में वैकल्पिक आवास दिए जाने को चुनौती दी थी।अदालत...
लाइसेंस नवीनीकरण में देरी पर सांप रखने वाले व्यक्ति को जमानत, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- केवल तकनीकी चूक पर जेल उचित नहीं
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सांपों के कथित अवैध कब्जे के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि केवल लाइसेंस की अवधि समाप्त हो जाने और समय पर उसका नवीनीकरण न हो पाने के आधार पर किसी को लगातार जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।जस्टिस आशीष नैथानी आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि आरोपी पहले वैध लाइसेंस के तहत कार्य कर रहा था और...
बिना गिरफ्तारी के कारण बताए किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा: यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को दिया आश्वासन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने आश्वासन दिया है कि राज्य में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण और आधार बताए बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि पुलिस गिरफ्तारी की प्रक्रिया को BNSS, 2023 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सख्ती से लागू करेगी।यह आश्वासन राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) विनोद कुमार शाही ने जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष दिया।AAG ने अदालत को बताया कि उन्होंने राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस...
परिवार के एक सदस्य को विदेशी घोषित करने से बाकी सदस्य स्वतः विदेशी नहीं हो जाते: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी परिवार के एक सदस्य को विदेशी घोषित कर देने मात्र से उसके अन्य परिजन स्वतः विदेशी नहीं माने जा सकते। अदालत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ अलग से कार्यवाही और संदर्भ आवश्यक है।जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस शमीमा जहां की खंडपीठ एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने विदेशी न्यायाधिकरण के 2019 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसे और उसके बेटों-बेटियों को विदेशी घोषित कर दिया गया।हाईकोर्ट ने महिला को विदेशी घोषित करने का...
“तारीख पर तारीख” सिर्फ जजों की गलती नहीं, सरकार और पुलिस भी जिम्मेदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में लंबित आपराधिक मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि “तारीख पर तारीख” वाली स्थिति के लिए केवल न्यायिक अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकार और पुलिस तंत्र की कमियां भी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की पीठ ने बॉलीवुड फिल्म दमिनी के मशहूर संवाद “तारीख पर तारीख… मिलती है तो सिर्फ तारीख” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आम लोगों की न्याय व्यवस्था के प्रति धारणा को दर्शाता है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त स्टाफ,...
एक ही शहर में अलग रहना घरेलू निकटता नहीं, ननद और उसके पति पर दर्ज क्रूरता का मामला रद्द: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में विवाहित ननद और उसके पति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए कहा कि एक ही शहर में अलग-अलग रहना घरेलू निकटता नहीं माना जा सकता।जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि वर्षों से अलग रह रहे रिश्तेदारों को सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर मामले में घसीटना आपराधिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत ने यह भी कहा कि वैवाहिक विवादों को उत्पीड़न का हथियार नहीं बनाया जा सकता।अदालत ने टिप्पणी की,“महानगर में भौगोलिक निकटता को घरेलू एकीकरण के बराबर नहीं माना जा...




















