हाईकोर्ट

जले शव का 'बॉक्सर जैसा' मुड़ना अकेले यह साबित नहीं करता कि मौत से पहले जलाया गया: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी जले हुए शव का हाथ-पैर मुड़कर बॉक्सर जैसी स्थिति में आ जाना अकेले यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति को जिंदा रहते जलाया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तेज गर्मी के कारण शव में इस तरह की स्थिति बन सकती है, चाहे आग लगने के समय व्यक्ति जिंदा हो या उसकी पहले ही मौत हो चुकी हो।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने यह टिप्पणी एक आपराधिक अपील खारिज करते हुए की।अपीलकर्ता को वर्ष 1990 में अपनी पत्नी की मौत के मामले में दोषी ठहराया गया। पत्नी की वर्ष 1986 में...

बच्चे का खर्च न देने भर से पिता पर JJ Act के तहत क्रूरता का केस नहीं बनता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ बच्चे का भरण-पोषण खर्च नहीं देने के आधार पर पिता के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के तहत बच्चे के साथ क्रूरता का मामला नहीं चलाया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि उस व्यक्ति के पास बच्चे की वास्तविक देखभाल या नियंत्रण था।कोर्ट ने विदेश में काम कर रहे एक पिता के खिलाफ इसी आधार पर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने कहा कि केवल बच्चे का पिता होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत बच्चे की...

ट्रेन से गिरकर यात्री की मौत, शव के टुकड़ों में मिलने से मुआवजे का दावा खारिज नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ट्रेन से गिरने के बाद यात्री का शव कई टुकड़ों में मिला हो, तो केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मौत रेलवे एक्ट की धारा 124-A में दिए गए अपवादों के अंतर्गत हुई थी। रेलवे को आत्महत्या, स्वयं को चोट पहुंचाने या यात्री के अपने आपराधिक कृत्य जैसी परिस्थितियों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करना होगा।जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल, लखनऊ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिव नारायण सिंह की विधवा के मुआवजे के दावे को खारिज...

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री योगेंद्र साव को किया बरी, 2010 के NTPC प्रदर्शन मामले में मिली राहत
झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस मंत्री और विधायक योगेंद्र साव को 2010 में NTPC परियोजना कार्यालय के उद्घाटन के दौरान हुए प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस और विशिष्ट साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि योगेंद्र साव ने किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की या भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत के फैसलों को रद्द करते हुए योगेंद्र साव को IPC की धारा 323, 341, 504 और 353, सहपठित...

नाबालिग की सहमति POCSO मामले में राहत का आधार नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट की पोर्ट ब्लेयर सर्किट बेंच ने 24 वर्षीय आरोपी को POCSO मामले में सुनाई गई 10 साल की कठोर कारावास की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि नाबालिग की सहमति से बने शारीरिक संबंध को अपराध में राहत या सजा कम करने का आधार नहीं माना जा सकता।जस्टिस राजर्षि भारद्वाज और जस्टिस रीतोब्रोतो कुमार मित्रा की डिवीजन बेंच आरोपी रूपेश बेक की अपील पर सुनवाई कर रही थी। विशेष POCSO कोर्ट ने अप्रैल 2024 में उसे दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी।मामले में पीड़िता घटना के समय करीब 17 वर्ष 10 महीने की थी,...

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट से तय जगह पर दुकान लगाने का अधिकार नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया कि प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट के आधार पर स्ट्रीट वेंडर किसी तय या स्थायी जगह पर दुकान लगाने का दावा नहीं कर सकते।कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि वह पहले यह जांच करे कि अदालत पहुंचे सभी 42 वेंडरों के पास वैध प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट हैं या नहीं। सर्टिफिकेट की पुष्टि होने के बाद ही उन्हें मोबाइल वेंडर के रूप में कारोबार करने की अनुमति दी जाएगी।मामला 42 वेंडरों की याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उनके पास प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट हैं और उन्होंने...

आज की दुनिया में बायोलॉजिकल पिता का नाम रखना ज़रूरी नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बर्थ सर्टिफिकेट में सौतेले पिता का नाम जोड़ने की इजाज़त दी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने म्युनिसिपल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नाबालिग बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट में उसके सौतेले पिता का नाम जोड़ें और बच्चे का सरनेम बदलें। कोर्ट ने कहा कि "नाबालिग बच्चे के भले के लिए" ऐसा बदलाव ज़रूरी है।जस्टिस राजा बसु चौधरी ने एक माँ की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। माँ ने अपने नाबालिग बेटे का सरनेम और बर्थ रिकॉर्ड में उसके बायोलॉजिकल पिता का नाम बदलने की मांग की।कोर्ट ने कहा कि समाज आगे बढ़ चुका है और "आज की दुनिया में रजिस्टर में बायोलॉजिकल पिता का नाम बनाए रखना"...

पति-पत्नी के बीच 'सिविल विवाद' का परिवार के खिलाफ आपराधिक मामले में बदलना, सख्त न्यायिक जांच की मांग करता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद कभी-कभी उस "नाजुक सीमा को पार कर सकते हैं, जो सिविल विवाद को परेशान करने वाले आपराधिक मुकदमों से अलग करती है"। एक जीवनसाथी द्वारा सिविल कानूनी उपाय अपनाने के बाद पूरे विस्तारित परिवार के खिलाफ गंभीर सजा वाले आपराधिक मामले शुरू करने के लिए "सख्त न्यायिक जांच" की आवश्यकता होती है।जस्टिस उदय कुमार ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने पति और उसके विस्तारित परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ बलात्कार, क्रूरता, मारपीट, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक धमकी और दहेज से जुड़े...

संवैधानिक लोकतंत्र में औपनिवेशिक पुलिस व्यवस्था
पिछले कुछ महीनों में देश में एक अहम बहस फिर से शुरू हो गई। राजधानी और दूसरी जगहों पर जो कुछ हुआ है, उसे देखकर हमें यह सोचना चाहिए कि क्या हमारी पुलिस व्यवस्था के तौर-तरीके उस संवैधानिक लोकतंत्र के अनुकूल हैं, जो हम आज बन चुके हैं। अब समय आ गया कि हम इस बात पर फिर से विचार करें कि क्या हमारी पुलिस व्यवस्था का मकसद मूल रूप से ज़बरदस्ती करना ही होना चाहिए। अगर हम गहराई से देखें तो समझ आता है कि भारतीय पुलिस व्यवस्था को मिली औपनिवेशिक विरासत की वजह से ही असहमति के प्रति संस्थागत प्रतिक्रिया में बल...

क्या BNS की धारा 67 वैवाहिक बलात्कार को मान्यता देने का कानूनी रास्ता है?
भारतीय आपराधिक कानून में सबसे ज़्यादा बहस वाले मुद्दों में से एक यह रहा है कि क्या शादी के अंदर बिना सहमति के यौन संबंध बनाना कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है या नहीं। कई संवैधानिक बदलावों के बावजूद, जिनमें अब गरिमा, निजता, शारीरिक अखंडता और निर्णय लेने की आज़ादी को मान्यता दी गई, भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) में अभी भी वैवाहिक बलात्कार से जुड़ी छूट शामिल है। इसलिए बहस मुख्य रूप से दो विकल्पों पर केंद्रित रही है: कानून बनाने वाली संस्था के तौर पर संसद और संवैधानिक रूप से अमान्य करने वाली...

आबकारी आयुक्त शराब की मंज़ूरशुदा सब-शॉप को दूसरी जगह नहीं भेज सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि आबकारी आयुक्त किसी लाइसेंस-धारक की शराब की सब-शॉप को सिर्फ़ इस आधार पर दूसरी जगह नहीं भेज सकते कि इससे किसी दूसरी शराब की दुकान की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है। कोर्ट ने पाया कि उत्तराखंड आबकारी नीति के नियम 28.4(b) के तहत दुकान को दूसरी जगह भेजने का अधिकार ज़िला मजिस्ट्रेट के पास है, न कि आबकारी आयुक्त के पास।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें प्रतिवादी नंबर 5 की अपील पर आबकारी आयुक्त द्वारा 31 मार्च, 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी...

Lucknow Fire Tragedy | हाईकोर्ट ने बिल्डिंग गिराने के आदेश के खिलाफ बिल्डिंग मालिक की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके की बिल्डिंग मालिक की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया। इस बिल्डिंग में इस साल जून में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई थी। मालिक ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के बिल्डिंग गिराने के आदेश और उसके बाद की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी।हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता और बिल्डिंग के सह-मालिक 62 वर्षीय वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला को कानून के तहत अपील करने का कानूनी विकल्प इस्तेमाल करने की इजाज़त दी।शुक्ला ने LDA के 10 जुलाई, 2026 के बिल्डिंग गिराने के...

देश के लिए लड़ने वालों की तारीफ़ होनी चाहिए: हाईकोर्ट ने कहा- युद्ध में लगी चोट की पेंशन का बकाया सिर्फ़ तीन साल तक सीमित नहीं किया जा सकता
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें युद्ध में लगी चोट की पेंशन के बकाये को ओरिजिनल एप्लीकेशन दाखिल करने से पहले के तीन साल तक सीमित कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि जब पेंशन पाने का अधिकार ही विवाद में नहीं है तो सैनिक या - जैसा कि इस मामले में है - उनकी विधवा उस तारीख से बकाया पाने की हकदार हैं, जब से यह अधिकार शुरू हुआ। [2026 LiveLaw (PH) 297]जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरविंदर सिंह ग्रेवाल की डिवीज़न बेंच ने कहा,"जिस व्यक्ति ने देश के...

Noida Workers' Protest | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'मज़दूर बिगुल दस्ता' के सदस्य को दी ज़मानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 'मज़दूर बिगुल दस्ता' (मज़दूरों का संगठन) के सदस्य हिमांशु ठाकुर को ज़मानत दी। यह ज़मानत नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए औद्योगिक मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी दो FIR के सिलसिले में दी गई।दोनों FIR (केस क्राइम नंबर 164 और 165, साल 2026) गौतम बुद्ध नगर/नोएडा में सार्वजनिक जगहों और कंपनियों में कथित भीड़ द्वारा की गई हिंसा से जुड़ी थीं। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में मज़दूर इकट्ठा हुए और उन्होंने कथित तौर पर पत्थरबाज़ी की थी तथा सार्वजनिक और कंपनी की संपत्ति को...

झारखंड हाईकोर्ट ने ₹300 की रिश्वत वाले मामले में सज़ा कम की, कहा- आरोपी ने तीन दशकों तक 'मुक़दमे की पीड़ा' झेली
झारखंड हाईकोर्ट ने 1993 के भ्रष्टाचार के मामले में एक व्यक्ति की सज़ा कम की। यह मामला शिकायतकर्ता के प्रोविडेंट फंड (PF) के पैसे की प्रोसेसिंग के लिए ₹300 की रिश्वत मांगने से जुड़ा था। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि आरोपी ने तीन दशकों तक "मुक़दमे की पीड़ा" झेली है।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच ने 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत सज़ा की अवधि पर विचार करते हुए कहा कि हालांकि इस प्रावधान में कम से कम छह महीने की सज़ा का नियम है, लेकिन...

ज़मानत की मुश्किल शर्तें 'एक हाथ से ज़मानत देना और दूसरे से वापस ले लेना' जैसा: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि ज़मानत देते समय ऐसी शर्त लगाना जो बहुत मुश्किल हो या जिसे पूरा करना मुमकिन न हो, "एक हाथ से ज़मानत देने और दूसरे से वापस ले लेने" जैसा है।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी याचिका पर विचार करते हुए की। यह याचिका 2014 के अग्रिम ज़मानत (Anticipatory Bail) आदेश में बदलाव की मांग के लिए दायर की गई। इस आदेश में याचिकाकर्ता को ज़मानत बॉन्ड और ज़मानतदार देने के अलावा, तीन लोगों को ₹35,000-₹35,000 और एक अन्य व्यक्ति के नाम ₹23,000 का बैंक ड्राफ्ट देने की...

मकान गिराने पर तीन सरकारी अधिकारियों के विरोधाभासी दावे से हाईकोर्ट हैरान, पूछा- फिर तोड़फोड़ किसने की?
वाराणसी में अदालत के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद मकान गिराए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के विरोधाभासी दावों पर हैरानी जताई। अवमानना की कार्यवाही का सामना कर रहे तीनों अधिकारियों ने शपथपत्र देकर मकान गिराने से इनकार किया। हालांकि, इनमें से एक अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि 11 जून 2026 को पुलिस बल के साथ वह मौके पर मौजूद था, जबकि उसी दौरान मकान गिराने की कार्रवाई हुई।जस्टिस विकास बुधवार ने इस विरोधाभास पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद हैरानी वाली बात है कि...

सात साल तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी-रिमांड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, नाबालिग को जेल भेजने पर पुलिस-न्यायिक अधिकारियों को चेताया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात साल तक की अधिकतम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के मामलों में पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को लापरवाही से बचने की कड़ी चेतावनी दी है। एक नाबालिग को ऐसे मामले में बार-बार न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पुलिस को पूरी तरह पालन करना होगा और रिमांड देते समय न्यायिक अधिकारियों को भी अपने विवेक का इस्तेमाल करना होगा।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने मामले...

सीनियर एडवोकेट पिनाकी मिश्रा के खिलाफ मानहानि का मामला रद्द, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- प्रथमदृष्टया अपराध नहीं बनता
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट पिनाकी मिश्रा के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि का मामला रद्द किया। मामला एक समाचार पोर्टल को दिए कथित साक्षात्कार में शिकायतकर्ता को 'ठग' और 'ब्लैकमेलर' कहने के आरोप से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से प्रथमदृष्टया यह साबित नहीं होता कि कथित टिप्पणी से शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा दूसरों की नजर में कम हुई थी।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि शिकायतकर्ता ने निचली अदालत के समक्ष समन जारी होने से पहले की कार्यवाही में खुद को ही एकमात्र गवाह के रूप में पेश...

12 साल की बच्ची के शोर नहीं मचाने को हाईकोर्ट ने माना अस्वाभाविक, दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी की बरी बरकरार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 12 साल की बच्ची से गलत हरकत करने के प्रयास के मामले में आरोपी की बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करने में सफल नहीं रहा।अदालत ने घटना के दौरान बच्ची के शोर नहीं मचाने, उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं होने और किसी स्वतंत्र गवाह की जांच नहीं किए जाने सहित कई परिस्थितियों को अभियोजन की कहानी के खिलाफ माना।पीठ ने कहा कि यदि किसी बच्ची को जबरन गलत हरकत के लिए खींचा जा रहा हो और वह मदद के लिए...
