हाईकोर्ट

PMLA में देरी का अंत: साधन (Wherewithal) परीक्षण किस प्रकार संवैधानिक स्वतंत्रता को पुनर्स्थापित करता है?
PMLA में देरी का अंत: 'साधन' (Wherewithal) परीक्षण किस प्रकार संवैधानिक स्वतंत्रता को पुनर्स्थापित करता है?

लगभग एक दशक से, धन शोधन रोकथाम अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 45 भारत में एक संवैधानिक संघर्ष का प्राथमिक स्थल रही है। यह एक ऐसा स्थान है जहां स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार अक्सर प्रणालीगत वित्तीय अपराध से निपटने में राज्य के हित के साथ संघर्ष करता है। धारा 45 की "जुड़वां शर्तें", जिसके लिए प्रभावी रूप से एक अदालत को एक मुकदमा शुरू होने से पहले ही एक आरोपी की बेगुनाही से संतुष्ट होने की आवश्यकता होती है, ने एक कानूनी परिदृश्य बनाया है जहां जमानत को अक्सर पूर्व-ट्रायल अधिकार के बजाय सजा के बाद के...

S. 482 CrPC | पहले से उपलब्ध, लेकिन छोड़े गए आधारों पर लगातार रद्द करने वाली याचिकाएं स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
S. 482 CrPC | पहले से उपलब्ध, लेकिन छोड़े गए आधारों पर लगातार रद्द करने वाली याचिकाएं स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक आरोपी द्वारा उसी आपराधिक कार्यवाही के संबंध में दायर 'तीसरी' रद्द करने वाली याचिका खारिज की। इस याचिका में ऐसा आधार उठाया गया, जो पहले से उपलब्ध था, लेकिन उस समय नहीं उठाया गया।जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने स्पष्ट रूप से फैसला दिया कि CrPC की धारा 482 के तहत लगातार दायर की गई ऐसी रद्द करने वाली याचिकाएं स्वीकार्य नहीं हैं, जिनमें उन आधारों पर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई हो जो पहले से उपलब्ध थे।सिंगल जज ने टिप्पणी करते हुए कहा,"आवेदक द्वारा पिछली दो...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेमेंट ऑफ़ बोनस (संशोधन) अधिनियम, 2015 के पूर्वव्यापी (retrospective) लागू होने को सही ठहराया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेमेंट ऑफ़ बोनस (संशोधन) अधिनियम, 2015 के पूर्वव्यापी (retrospective) लागू होने को सही ठहराया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेमेंट ऑफ़ बोनस (संशोधन) अधिनियम, 2015 के पूर्वव्यापी रूप से लागू होने की वैधता को इस आधार पर सही ठहराया कि इस संशोधन से कर्मचारियों के लिए कोई नया अधिकार नहीं बनाया जा रहा था और न ही यह नियोक्ताओं के किसी मौजूदा अधिकार को कम कर रहा था।यह संशोधन अधिनियम, अधिनियम के तहत 'कर्मचारी' की पात्रता सीमा को उन लोगों से, जो अधिकतम 10,000 रुपये प्रति माह कमाते थे, बढ़ाकर उन लोगों तक कर देता है, जो 21,000 रुपये प्रति माह कमाते हैं। इसने पेमेंट ऑफ़ बोनस अधिनियम, 1965 की धारा 12 में भी...

UAPA के तहत बिना पुष्टि वाले गवाह की गवाही और फ़ोन कॉल के आधार पर ज़मानत से इनकार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
UAPA के तहत बिना पुष्टि वाले गवाह की गवाही और फ़ोन कॉल के आधार पर ज़मानत से इनकार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ज़मानत से तब इनकार नहीं किया जा सकता, जब अभियोजन पक्ष मुख्य रूप से गवाहों के बयानों और बिना पुष्टि वाले फ़ोन कॉल पर निर्भर हो। उसके पास ऐसा कोई सामान या सबूत न हो जिससे पहली नज़र में आरोपी की संलिप्तता साबित होती हो।कोर्ट NIA Act की धारा 21 के तहत दायर एक अपील पर सुनवाई कर रहा था। इस अपील में NIA के स्पेशल जज, जम्मू के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें IPC की धारा 120-B, NDPS Act की धारा 8/21,...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1999 के चारहरे हत्याकांड में माँ और उसके प्रेमी के खिलाफ नाबालिग बेटों की गवाही के आधार पर सज़ा बरकरार रखी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1999 के चारहरे हत्याकांड में माँ और उसके 'प्रेमी' के खिलाफ नाबालिग बेटों की गवाही के आधार पर सज़ा बरकरार रखी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को व्यक्ति की सज़ा और आजीवन कारावास बरकरार रखी। इस व्यक्ति ने 1999 में अपनी कथित प्रेमिका (सह-आरोपी, अब मृत) के साथ मिलकर एक क्रूर चारहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस ज़फीर अहमद की बेंच ने 2 नाबालिग बच्चों की 'स्वाभाविक' और 'लगातार' गवाही पर काफी भरोसा किया। इन बच्चों ने अपराध को अपनी आँखों से देखा था और अपनी माँ (सह-आरोपी, अब मृत) और उसके कथित प्रेमी (अपीलकर्ता) के खिलाफ गवाही दी थी।अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, 18 और 19 मई, 1999 की...

पासपोर्ट विवाद में असम सीएम की पत्नी द्वारा FIR में अग्रिम ज़मानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंचे पवन खेड़ा
पासपोर्ट विवाद में असम सीएम की पत्नी द्वारा FIR में अग्रिम ज़मानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंचे पवन खेड़ा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दायर FIR में अग्रिम ज़मानत की मांग करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट में अर्ज़ी दी। यह FIR उन आरोपों के बीच दायर की गई, जिनमें उन पर एक से ज़्यादा पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया गया।इस मामले की सुनवाई गुरुवार (9 अप्रैल) को जस्टिस के. सुजाना की बेंच के सामने होगी।यह FIR गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में BNS की धाराओं 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), 35, 36, 318 (धोखाधड़ी), 338 (कीमती वसीयत, सिक्योरिटी आदि की जालसाज़ी), 337...

धुरंधर की स्क्रिप्ट को लेकर संतोष कुमार और आदित्य धर आमने-सामने: हाईकोर्ट ने मानहानिकारक टिप्पणी करने पर लगाई रोक
'धुरंधर' की स्क्रिप्ट को लेकर संतोष कुमार और आदित्य धर आमने-सामने: हाईकोर्ट ने मानहानिकारक टिप्पणी करने पर लगाई रोक

हाल ही में रिलीज़ हुई बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर' के डायरेक्टर आदित्य धर को थोड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को फिल्ममेकर संतोष कुमार को फिल्म के बारे में कोई भी ऐसी टिप्पणी करने से रोक दिया, जो मानहानिकारक हो सकती है।सिंगल-जज जस्टिस आरिफ डॉक्टर ने सीनियर वकील डॉ. बीरेंद्र सराफ की संक्षिप्त दलीलें सुनीं, जो धर की तरफ से पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से गुज़ारिश की कि कम-से-कम अंतरिम आदेश जारी किया जाए, क्योंकि कुमार मीडिया में फिल्म और अपने क्लाइंट (धर) के खिलाफ लगातार मानहानिकारक बयान दे रहे...

पहले विवाह के बेबुनियाद आरोप से नहीं रुकेगा हक, पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार: हिमाचल हाईकोर्ट
पहले विवाह के बेबुनियाद आरोप से नहीं रुकेगा हक, पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि पत्नी के पहले से विवाह होने के केवल आरोप, बिना किसी ठोस और वैध प्रमाण के उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत राहत पाने से वंचित नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में पत्नी भरण-पोषण की हकदार रहेगी।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा,“जब पति-पत्नी के बीच विवाह स्वीकार किया गया और पहले विवाह के अस्तित्व का कोई कानूनी प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है तो शिकायत को खारिज करना उचित नहीं था।” मामले में पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराते हुए...

पत्नी-बच्चों का भरण-पोषण करना पति का कानूनी और नैतिक कर्तव्य: गुजरात हाईकोर्ट, 660 दिन की सजा बरकरार
पत्नी-बच्चों का भरण-पोषण करना पति का कानूनी और नैतिक कर्तव्य: गुजरात हाईकोर्ट, 660 दिन की सजा बरकरार

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण राशि न देने वाले पति की 660 दिन की सजा बरकरार रखी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पत्नी और बच्चों का पालन-पोषण करना पति का कानूनी ही नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है, जिससे वह बच नहीं सकता।जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने फैमिली कोर्ट का आदेश सही ठहराते हुए पति की याचिका खारिज की। पति ने उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे भरण-पोषण की राशि न चुकाने पर 660 दिन की साधारण कारावास की सजा दी गई थी।मामले के अनुसार, पति को अपनी पत्नी और दो बच्चों...

महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत अधिकारियों को किसी ट्रस्ट के नाम में बदलाव करने का अधिकार नहीं: बॉम्बे हाइकोर्ट का अहम फैसला
महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत अधिकारियों को किसी ट्रस्ट के नाम में बदलाव करने का अधिकार नहीं: बॉम्बे हाइकोर्ट का अहम फैसला

बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम के तहत अधिकारियों को किसी ट्रस्ट के नाम में बदलाव करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि कानून की व्यवस्था में ट्रस्ट के नाम की उपयुक्तता की जांच का कोई प्रावधान ही नहीं है।जस्टिस शर्मिला यू. देशमुख ने यह फैसला नेशनल एग को-ऑर्डिनेशन कमेटी की याचिका पर सुनाया, जिसमें संयुक्त धर्मादाय आयुक्त के उस आदेश को चुनौती दी गई। इसमें ट्रस्ट के नाम से नेशनल शब्द हटाने का निर्देश दिया गया था।यह आदेश 14 सितंबर, 2023 को...

बच्चे का हित सर्वोपरि, विदेशी अदालत का आदेश बाध्यकारी नहीं: ब्रिटिश कोर्ट का आदेश लागू करने की मांग आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने की खारिज
बच्चे का हित सर्वोपरि, विदेशी अदालत का आदेश बाध्यकारी नहीं: ब्रिटिश कोर्ट का आदेश लागू करने की मांग आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने की खारिज

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी भी नाबालिग बच्चे के मामले में उसका कल्याण सर्वोपरि होता है और विदेशी अदालतों के आदेश इस सिद्धांत से ऊपर नहीं हो सकते। अदालत ने ब्रिटेन की अदालत के आदेश को लागू कराने की मांग वाली पिता की याचिका खारिज की।जस्टिस चीकाटी मानवेंद्रनाथ रॉय और जस्टिस तुहिन कुमार गेडेला की खंडपीठ ने पिता द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार की याचिका का उपयोग विदेशी अदालत के आदेश लागू कराने के लिए नहीं किया जा सकता।मामला एक...

ट्रांसजेंडर संशोधन कानून 2026 पर सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
ट्रांसजेंडर संशोधन कानून 2026 पर सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े संशोधन कानून 2026 को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय की।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई करते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया। याचिका चंद्रेश जैन द्वारा दायर की गई, जिसमें कहा गया कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक नालसा फैसले द्वारा स्थापित सिद्धांतों को कमजोर करता है।याचिका में आरोप लगाया गया कि नया कानून...

900 रुपये की रिश्वत: 35 साल पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियरों को किया बरी, सजा की रद्द
'900' रुपये की रिश्वत: 35 साल पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियरों को किया बरी, सजा की रद्द

दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 1991 के एक पुराने रिश्वत मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग के दो पूर्व इंजीनियरों को बरी कर दिया। इन पर 900-900 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था। इस फैसले के साथ ही दोनों का 35 साल लंबा कानूनी संघर्ष समाप्त हो गया।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने आरोपियों की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा वर्ष 2002 में सुनाई गई सजा रद्द की। हाइकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष “अवैध धन की मांग” को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।अदालत ने स्पष्ट किया,“भ्रष्टाचार निवारण...

गोवा सरकार पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, शिवाजी महाराज की अवैध मूर्ति हटाने का आदेश
गोवा सरकार पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, 'शिवाजी महाराज' की अवैध मूर्ति हटाने का आदेश

गोवा में स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे तुरंत हटाने का आदेश दिया। हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने कहा कि यह मूर्ति स्थानीय कानूनों का घोर उल्लंघन करते हुए मुरमुगांव पोर्ट प्राधिकरण की जमीन पर अवैध रूप से स्थापित की गई है।जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान गोवा सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि राज्य इस पूरे मामले में मात्र मूक दर्शक बना रहा जो बेहद चिंताजनक है।अदालत...

हिरासत में मौत का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्राइम ब्रांच को सौंपी जांच, ACP स्तर के अधिकारी से जांच के निर्देश
हिरासत में मौत का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्राइम ब्रांच को सौंपी जांच, ACP स्तर के अधिकारी से जांच के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित हिरासत में मौत के एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी। अदालत ने निर्देश दिया कि इस मामले की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी द्वारा की जाए जिसकी निगरानी संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) करेंगे।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 23 फरवरी 2026 को पुलिस हिरासत में याचिकाकर्ता के पिता की पिटाई के कारण मौत हो गई।याचिकाकर्ता के अनुसार एक संपत्ति विवाद के सिलसिले में उसे और उसके पिता को पुल प्रह्लादपुर...

राहुल गांधी की नागरिकता विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने से किया इनकार, FIR की मांग पर सुनवाई जारी
राहुल गांधी की नागरिकता विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने से किया इनकार, FIR की मांग पर सुनवाई जारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि वह आरोपों की सच्चाई की जांच नहीं करेगा और न ही गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड की पड़ताल करेगा।यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें लखनऊ ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार किया गया था।याचिकाकर्ता एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उसने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने ब्रिटिश नागरिकता ली थी और इस संबंध में विभिन्न...

दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य लोगों से शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को दी पुलिस सुरक्षा, अनुच्छेद 21 के अधिकारों का हवाला
दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य लोगों से शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को दी पुलिस सुरक्षा, अनुच्छेद 21 के अधिकारों का हवाला

दिल्ली हाईकोर्ट ने अलग रह रहे माता-पिता द्वारा अपनी अमेरिका में जन्मी बेटी की कस्टडी को लेकर दायर परस्पर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने दोहराया कि बच्चे का सर्वोपरि हित (welfare of the child) ही सबसे महत्वपूर्ण मानदंड है और विदेशी अदालतों के आदेश अंतिम (conclusive) नहीं होते।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि विदेशी अदालतों के आदेशों को उचित महत्व और सम्मान दिया जाता है, लेकिन बच्चे के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कस्टडी...

आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ कार्रवाई के संकेत
आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ कार्रवाई के संकेत

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया मंच 'X' पर कथित तौर पर हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियों को लेकर पत्रकार राना अय्यूब के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल सुनवाई योग्य बताया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इन पोस्ट को हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। अदालत ने केंद्र सरकार सोशल मीडिया कंपनी दिल्ली पुलिस और राना अय्यूब को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।अदालत ने कहा कि इन पोस्ट की प्रकृति...

शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को सुरक्षा, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- जीवन और स्वतंत्रता सर्वोपरि
शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को सुरक्षा, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- जीवन और स्वतंत्रता सर्वोपरि

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि दो वयस्क अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं तो केवल इस आधार पर उन्हें सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता कि वे पहले से किसी और से शादीशुदा हैं। अदालत ने ऐसे ही एक लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया।जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ ने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोपरि है और यह सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त है।अदालत ने कहा,“दोनों याचिकाकर्ता वयस्क हैं और भारतीय नागरिक हैं। इसलिए...