हाईकोर्ट

आर्टिकल 21 का उल्लंघन: हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर हरियाणा सरकार का प्रतिबंध रद्द किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें सरकारी कर्मचारियों की सरकारी या निजी विदेश यात्रा पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी व्यक्तिगत परिस्थिति पर विचार किए बिना लगाया गया ऐसा अंधाधुंध प्रतिबंध संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का उल्लंघन करता है।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"नागरिकों के एक पूरे वर्ग पर केवल इसलिए पूरी तरह से रोक लगाना क्योंकि वे सरकारी सेवा में हैं, स्पष्ट रूप से मनमाना है। राज्य उन आदेशों के पीछे के मकसद... यानी ईंधन...

पटना हाईकोर्ट का फैसला: अब 62 की उम्र में रिटायर होंगे बिहार के ज्यूडिशियल अधिकारी

पटना हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने बिहार में ज्यूडिशियल अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का फ़ैसला किया।यह फ़ैसला ऐसे समय में आया, जब सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या पूरे देश में डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी के सदस्यों की रिटायरमेंट की उम्र एक समान रूप से बढ़ाकर 62 साल कर दी जानी चाहिए।बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को 31 अगस्त, 2026 को भेजे गए एक पत्र में पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रूपेश देव ने राज्य सरकार को बताया कि फुल कोर्ट...

सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट एक्सपायर होने पर शादी से इनकार नहीं कर सकता विवाह अधिकारी: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह अधिकारी केवल इस आधार पर विवाह कराने से इनकार नहीं कर सकता कि विदेशी नागरिक द्वारा प्रस्तुत किया गया 'सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट' एक्सपायर हो चुका है।जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने एक नेपाली महिला से विवाह करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए विवाह अधिकारी को नोटिस ऑफ इंटेंडेड मैरिज के आधार पर विवाह संपन्न कराने की अनुमति देने का निर्देश दिया।क्या था मामला?याचिकाकर्ता ने एक नेपाली नागरिक महिला से विवाह करने...

हिंदू विवाह की रस्मों और घटना की क्रूरता को आधार बनाकर मौत की सजा देना पर्याप्त नहीं: हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले को 'दुर्लभतम में दुर्लभ' मानते समय केवल अपराध की गंभीरता और क्रूरता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। अदालत को आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना पर भी विचार करना जरूरी है।जस्टिस शंपा सरकार और जस्टिस स्मिता दास डे की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा देने के लिए जिन विशेष कारणों पर भरोसा किया, वे काफी हद तक हिंदू विवाह की रस्मों और वैवाहिक संबंधों से...

जनता में डर पैदा करने की मंशा न हो तो मंत्री के खिलाफ झूठी सोशल मीडिया पोस्ट अपराध नहीं, लेकिन मानहानि का मामला बन सकता है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से झूठी जानकारी फैलाने के मामले में विनोद सूर्या कुमार के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि किसी मंत्री के खिलाफ झूठी जानकारी या अफवाह फैलाना तभी संबंधित आपराधिक प्रावधानों के तहत अपराध बनेगा, जब उसे फैलाने का इरादा या संभावित प्रभाव जनता में डर या घबराहट पैदा करना हो।क्या था मामला?कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में मंत्री को पलानी स्थित अरुल्मिगु दंडायुधपाणि स्वामी...

फ्लिपकार्ट को दी गई थी शिपमेंट की जिम्मेदारी, कर्मचारियों पर नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द की

झारखंड हाईकोर्ट ने ई-कार्ट लॉजिस्टिक्स के एक अधिकारी और फ्लिपकार्ट की सुरक्षा टीम के सदस्य के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शिपमेंट की कथित गैर-वापसी के मामले में संपत्ति की सुपुर्दगी व्यक्तिगत कर्मचारियों को नहीं, बल्कि फ्लिपकार्ट कंपनी को की गई थी। इसलिए कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात का अपराध नहीं बनता।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने धारा 482 CrPC के तहत दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए FIR, चार्जशीट और दोनों आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने के...

35 साल पुराने दहेज मृत्यु मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, पति और ससुराल वाले बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 35 साल पुराने दहेज मृत्यु मामले में पति और दो ससुराल वालों को बरी कर दिया। जस्टिस मनोज बाजाज की पीठ ने कहा कि धारा 304-B IPC के तहत दोषसिद्धि के लिए यह साबित करना जरूरी है कि महिला की मौत से 'जल्द पहले' उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था।कोर्ट ने शिव नारायण उर्फ सूर्य नारायण, जय नारायण और पटेश्वर की दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया।क्या था मामला?मृतका की शादी 12 मई 1987 को शिव नारायण से हुई थी। अभियोजन ने आरोप लगाया था कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता...

Drugs & Cosmetics Act | 28 दिन में दोबारा जांच की मांग नहीं की तो सरकारी रिपोर्ट अंतिम मानी जाएगी: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी दवा के निर्माता या संबंधित व्यक्ति ने सरकारी विश्लेषक की जांच रिपोर्ट को चुनौती देने और नमूने की दोबारा जांच कराने का अधिकार तय 28 दिन के भीतर नहीं इस्तेमाल किया तो उस रिपोर्ट को अंतिम और निर्णायक साक्ष्य माना जाएगा। कोर्ट ने दवा निर्माता, स्टॉकिस्ट, वितरक और थोक विक्रेताओं की ओर से दायर तीन याचिकाएं खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।जस्टिस संजय परिहार की पीठ मैकनिम प्लस टैबलेट से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दवा के एक नमूने को जांच में 'मानक...

पुलिस स्टेशन में गैर-कानूनी हिरासत और ₹14 लाख की ज्वेलरी लूट का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SP से जांच और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्नाव के पुलिस अधीक्षक (SP) को आदेश दिया कि वह उन्नाव जिले के हसनगंज पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में रखने और उससे ₹14 लाख की ज्वेलरी, कैश और अन्य सामान लूटने के आरोपों की जांच करें।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने पिछले हफ्ते क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे 27 जुलाई से 30 जुलाई, 2026 तक बिना किसी कानूनी कार्रवाई के पुलिस स्टेशन में गैर-कानूनी रूप से हिरासत में रखा...

S. 396 IPC | अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि डकैती ही मुख्य इरादा था और हत्या उसी दौरान की गई: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 396 (हत्या के साथ डकैती) के तहत दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि डकैती ही मुख्य इरादा था और हत्या डकैती करने के दौरान ही की गई।जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने 1981 के मामले में आपराधिक अपील को मंज़ूरी देते हुए और जीवित बचे आरोपी को बरी करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष कथित डकैती और हत्या के बीच ज़रूरी संबंध साबित करने में नाकाम रहा।मामले का संक्षिप्त विवरणयह मामला 30 दिसंबर 1981 की एक घटना से...

S. 313 CrPC | आरोपी से जिस परिस्थिति के बारे में सवाल नहीं पूछा गया, उसे न समझा पाने पर उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोपी से ट्रायल कोर्ट ने CrPC की धारा 313 के तहत किसी परिस्थिति या सबूत के बारे में सवाल नहीं पूछा था तो उस परिस्थिति या सबूत को न समझा पाने के कारण आरोपी के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने 2 जुड़ी हुई आपराधिक अपीलों को स्वीकार करते हुए और 2006 के हत्या के प्रयास के मामले में IPC की धारा 307 के तहत दोषी ठहराए गए 3 आरोपियों को बरी करते हुए यह टिप्पणी की।मामले के मुख्य तथ्यअभियोजन पक्ष का मामला यह था कि...

सुल्तानपुर बार एसोसिएशन चुनाव: हाईकोर्ट ने महिलाओं के लिए 30% आरक्षण का आदेश दिया, अहम पदों के लिए रोटेशन तय किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में सुल्तानपुर बार एसोसिएशन को निर्देश दिया कि वह अपनी एग्जीक्यूटिव कमेटी और गवर्निंग काउंसिल में महिला वकीलों के लिए 30% आरक्षण लागू करे। कोर्ट ने आदेश दिया कि आने वाले चुनावों में अहम पद रोटेशन के आधार पर महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए जाएंगे।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिए। यह याचिका बार एसोसिएशन में महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों...

मुस्लिम कानून में संयुक्त परिवार मान्य नहीं होते, भाई नाबालिग भाई-बहनों की ज़मीन नहीं बेच सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फिर से कहा कि मुस्लिम कानून के तहत हर वारिस का हिस्सा अलग और स्वतंत्र होता है। इसलिए चार नाबालिग भाई-बहनों का भाई उनका अभिभावक (गार्जियन) बनकर उनकी ज़मीन नहीं बेच सकता, क्योंकि इस कानून में 'प्रतिनिधित्व के सिद्धांत' (थ्योरी ऑफ़ रिप्रेजेंटेशन) या 'संयुक्त परिवार' की अवधारणा को मान्यता नहीं दी गई।ऐसा करते हुए कोर्ट ने ज़मीन के एक टुकड़े पर वादी (Plaintiff) के 30-33 साल के कब्ज़े और प्रतिवादियों (Defendants) द्वारा समय-सीमा के भीतर अपना दावा पेश न कर पाने को आधार मानते हुए...

क्या आपको लगता है कि आप कोई लॉर्ड हैं? बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के ईटरीज़ के सस्पेंशन को लेकर FDA अधिकारी को फटकार लगाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शनिवार को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को कड़ी फटकार लगाई। FDA ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के परिसर में चल रही पांच ईटरीज़ के लाइसेंस सस्पेंशन को बनाए रखने के लिए "बिना सोचे-समझे आदेश" (Mechanical Orders) जारी किए, जबकि कोर्ट ने पहले ही इस मामले पर दोबारा विचार करने और ठोस वजहों के साथ आदेश जारी करने का निर्देश दिया।गौरतलब है कि पिछले हफ्ते हाईकोर्ट ने FDA को परिसर का दोबारा निरीक्षण करने और पांच ईटरीज़ - परमिट रूम, ओरिएंटल स्विंग, क्लबवे एंड पेस्ट्री...

रोमांटिक रिश्ता या शादी का प्रस्ताव POCSO Act के असर को कम नहीं कर सकता: नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि "रोमांटिक रिश्ते और उसके बाद शादी के प्रस्ताव की दलील POCSO Act के तहत नाबालिग बच्चे को मिली कानूनी सुरक्षा को कम नहीं कर सकती," और यह दोहराया कि कानून की नज़र में नाबालिग की सहमति "पूरी तरह से अप्रासंगिक" है।मौजूदा मामले में इसे लागू करते हुए कोर्ट ने इस आरोप पर भी ध्यान दिया कि आरोपी ने नाबालिग का भरोसा जीतने के लिए अपनी धार्मिक पहचान छिपाई थी। उसकी उम्र, गर्भावस्था की मेडिकल स्थिति और POCSO Act के तहत सहमति पर कानूनी रोक को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को ज़मानत देने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑर्डर-शीट और पुलिस रिकॉर्ड के बीच समन और वारंट से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच का आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर के आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट की ऑर्डर-शीट और पुलिस को असल में मिले दस्तावेजों के बीच अंतर पाए जाने के बाद समन, जमानती वारंट और गैर-जमानती वारंट जारी करने, भेजने और तामील करने से जुड़ी गड़बड़ियों की शुरुआती जांच का आदेश दिया।कोर्ट ने कहा कि ऐसी गड़बड़ियां न केवल आरोपी व्यक्तियों के अधिकारों को प्रभावित करती हैं, बल्कि "न्यायिक रिकॉर्ड के रखरखाव और उसकी पवित्रता" पर भी गंभीर सवाल उठाती हैं।जस्टिस जय प्रकाश तिवारी की बेंच ने महेंद्र कुमार दुबे को ज़मानत देते हुए यह...

मराठी भाषा विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- सभी रिक्शा और कैब ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा

महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि राज्य भर के ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों को मराठी सीखने और उसमें महारत हासिल करने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा। सरकार ने पहले नियम बनाया था कि ऐसे ड्राइवरों को भाषा का "काम-चलाऊ ज्ञान" होना चाहिए, जिसे चुनौती दी गई।यह जानकारी एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच के सामने दी गई। यह बेंच चार उबर ड्राइवरों द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें टैक्सी परमिट पाने के लिए अनिवार्य मराठी भाषा...

एक भी छात्र की जान नहीं जानी चाहिए: हाईकोर्ट ने पुणे में 15 दिन से भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों के लिए मेडिकल सुविधा का निर्देश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शनिवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पुणे में पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों के लिए तुरंत मेडिकल सुविधा सुनिश्चित करे। यह निर्देश तब दिया गया, जब कोर्ट को बताया गया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों में से एक की तबीयत बिगड़ गई।एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे ने कहा,"हम नहीं चाहते कि किसी भी छात्र की जान जाए।" जस्टिस गौतम अंखाड के साथ मिलकर बनी डिवीजन बेंच ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई की। बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रदर्शन कर रहे...

Fertilizer (Control) Order 1985 | डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास खाद के वितरण की निगरानी करने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985' के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) को खाद के वितरण के लिए सुपरवाइजिंग अथॉरिटी (निगरानी करने वाला अधिकारी) के तौर पर काम करने का अधिकार नहीं दिया गया।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने मिर्जापुर में याचिकाकर्ता 'मरिहान एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' को डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP) की सप्लाई से जुड़ी एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।याचिकाकर्ता ने खाद की सप्लाई के संबंध में निर्देश देने की मांग की,...