हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दृष्टि IAS के फाउंडर के खिलाफ डीपफेक कंटेंट हटाने का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर दृष्टि IAS कोचिंग इंस्टीट्यूट के फाउंडर और पूर्व सिविल सर्वेंट विकास दिव्यकीर्ति के खिलाफ पोस्ट किए गए डीपफेक और उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया।जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि इस मामले में विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा। साथ ही उन्होंने दिव्यकीर्ति की ओर से अपने पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) की सुरक्षा के लिए दायर मुकदमे में समन भी जारी किया।कोर्ट ने उनके अंतरिम निषेधाज्ञा (Interim Injunction) आवेदन पर...

स्त्रीधन की बरामदगी के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने 80 वर्षीय व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल स्त्रीधन की बरामदगी के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्त्रीधन की बरामदगी का मुद्दा जमानत देने वाली अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और इसके लिए शिकायतकर्ता को कानून के तहत उचित कार्यवाही करनी होगी।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में 80 वर्षीय आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 354, 354ए, 376, 498ए और 406 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की...

विधवा बहू और पोते-पोतियों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सास पर नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा- धारा 125 में ऐसी वैधानिक बाध्यता नहीं

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत सास पर अपनी विधवा बहू या मृत बेटे के बच्चों का भरण-पोषण करने की कानूनी जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। अदालत ने सास के खिलाफ चल रही भरण-पोषण की कार्यवाही रद्द की।जस्टिस एन. तुकारामजी ने कहा कि धारा 125(1) में उन व्यक्तियों की स्पष्ट श्रेणियां दी गईं, जो भरण-पोषण का दावा कर सकते हैं और जिन पर उन्हें भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी है। इस प्रावधान में सास को अपनी विधवा बहू या मृत बेटे के बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए उत्तरदायी...

सिर्फ़ कर्मचारी का जवाब रिकॉर्ड करना कि उस पर विचार किया गया, दिखावा मात्र: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर डिस्कॉम के ज़ोनल चीफ इंजीनियर पर सज़ा लगाने वाले आदेश और उस सज़ा को सही ठहराने वाला अपीलीय आदेश रद्द किया, क्योंकि उनके बचाव में दिए गए जवाब की बातों पर कोई विचार नहीं किया गया।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि आदेश में सिर्फ़ यह लिख देना कि सामग्री पर विचार किया गया, एक खोखली औपचारिकता और दिखावा मात्र है। विचार करने का मतलब है दिमाग का सक्रिय इस्तेमाल करना और संबंधित सामग्री पर सोचना, विचार-विमर्श करना और उसे परखना।बता दें, कोर्ट जयपुर डिस्कॉम के ज़ोनल चीफ इंजीनियर...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 साल की पड़ोसी बच्ची के साथ यौन शोषण के आरोपी व्यक्ति की ज़मानत याचिका खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने पड़ोस की एक नाबालिग बच्ची के साथ यौन शोषण के आरोपी व्यक्ति की ज़मानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि उसे ज़मानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उसने 'पड़ोस के अंकल' और नाबालिग बच्ची के बीच के पवित्र रिश्ते (जो पिता-पुत्री जैसा होता है) की गरिमा को खत्म किया।सिंगल-जज जस्टिस मिलिंद जाधव ने कहा कि हालांकि उन्होंने कई अन्य आपराधिक मामलों में लंबे समय तक जेल में रहने के आधार पर ज़मानत दी, लेकिन यह मामला एक अपवाद है।जस्टिस जाधव ने कहा,"हालांकि इस कोर्ट...

बिजली जीने के लिए आवश्यक ज़रूरत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दशक से ज़्यादा समय से कनेक्शन मिलने का इंतज़ार कर रहे व्यक्ति की मदद की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि आज के समय में बिजली "एक ज़रूरी ज़रूरत" है। कोर्ट ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे को आदेश दिया कि वह उस व्यक्ति को बिजली कनेक्शन दे, जिसे एक दशक से ज़्यादा समय से बिना बिजली के रहना पड़ रहा है।जस्टिस प्रकाश पाडिया और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने कहा कि आर्टिकल 21 के तहत जीने का अधिकार सिर्फ़ किसी व्यक्ति की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बिजली, साफ़-सफ़ाई, सड़कें, साफ़-सुथरा माहौल, पर्याप्त रोशनी और शुद्ध हवा और पानी जैसी ज़रूरी नागरिक...

रेप केस में ज़मानत देने से पहले पीड़ित की बात सुनना ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़ित, जो आपराधिक कानूनी प्रक्रिया शुरू करता है, उसे आपराधिक कार्यवाही के हर चरण में शामिल होने का अधिकार है, जिसमें आरोपी की रेगुलर ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई भी शामिल है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि रेप केस में पीड़ित महिला को आरोपी को ज़मानत देने से पहले मौजूद रहने और अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए।कोर्ट ने यह बात तब कही जब उसने ट्रायल कोर्ट का ज़मानत आदेश रद्द किया, क्योंकि ट्रायल कोर्ट ने पीड़ित महिला को नोटिस नहीं भेजा। कोर्ट ने पीड़ित की बात सुनने के बाद...

पत्नी को बार-बार 100 किमी की यात्रा से राहत, गुजरात हाईकोर्ट ने वैवाहिक मुकदमा कच्छ ट्रांसफर किया

गुजरात हाईकोर्ट ने पत्नी को होने वाली यात्रा की परेशानी और छोटे बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए वैवाहिक मुकदमे को मोरबी की फैमिली कोर्ट से कच्छ के भचाऊ स्थित न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।जस्टिस मौलिक जे. शेलट ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि पत्नी को होने वाली असुविधा पति की तुलना में कहीं अधिक है। पत्नी कच्छ जिले के रापर में रह रही थी, जबकि मुकदमे की सुनवाई मोरबी में चल रही थी। दोनों स्थानों के बीच एक तरफ की दूरी करीब 100 किलोमीटर बताई गई।पत्नी...

उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: समझौते के बाद विध्वंस नोटिस के खिलाफ अपील का निपटारा, निगम के आश्वासन बाध्यकारी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उज्जैन नगर निगम की ओर से शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने के लिए जारी किए गए नोटिस के खिलाफ दायर अपील का निपटारा किया। अदालत ने यह आदेश मस्जिद की अधिकृत प्रशासनिक समिति और नगर निगम के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए दिया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मामला पहले ही समझौते से सुलझ चुका है। हालांकि समझौते की विस्तृत शर्तें अदालत के सामने उपलब्ध नहीं थीं।मामला शाही मस्जिद वक्फ पांच मोचियान से जुड़ा था। नगर निगम ने...

NEET-UG की खोई स्कोरकार्ड पर दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश, NTA को डुप्लीकेट जारी करने के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को उन मेडिकल ग्रेजुएट के लिए डुप्लीकेट NEET-UG स्कोरकार्ड जारी करने का निर्देश दिया, जिनके मूल स्कोरकार्ड खो गए या गुम हो गए। अदालत ने कहा कि ये अभ्यर्थी विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (FMGE) की तैयारी कर रहे हैं, जो डॉक्टर के रूप में उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण है।जस्टिस जस्मीत सिंह ने कहा कि अभ्यर्थियों से अंतिम समय में सभी औपचारिकताएं पूरी करने की अपेक्षा करना उचित नहीं होगा, क्योंकि उनकी परीक्षा उनके चिकित्सकीय करियर के लिए महत्वपूर्ण...

कानून के तहत कई मुकदमे दर्ज कराने से आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत लगातार कई शिकायतें या मुकदमे दर्ज कराना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बन जाता। केवल इसलिए शिकायतकर्ता पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती कि बाद में उस व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली, जिसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।औरंगाबाद पीठ में जस्टिस राजेश जोशी ने कांग्रेस कार्यकर्ता और वकील सदाशिव गायके के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। गायके पर पूर्व कांग्रेस सांसद सुरेश पाटिल को...

सिर्फ आपराधिक मामला दर्ज होने या लंबित रहने से हथियार लाइसेंस निलंबित नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक मामला दर्ज होने या उसके लंबित रहने के आधार पर हथियार का लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। लाइसेंस निलंबित करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को शस्त्र अधिनियम की धारा 17 के तहत स्वतंत्र और तर्कसंगत संतुष्टि दर्ज करनी होगी।जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने कहा कि लाइसेंस निलंबन का आदेश केवल किसी आपराधिक मामले के दर्ज होने, उसके लंबित रहने या हथियार के संभावित दुरुपयोग की सामान्य आशंका के आधार पर नहीं दिया जा सकता।अदालत एक सुरक्षा गार्ड की याचिका पर सुनवाई कर...

लिखित समझौते में दर्ज नहीं रकम का दावा केवल बाद के बयान से नहीं जोड़ा जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत के सामने दर्ज किए गए अंतिम समझौते में शामिल नहीं की गई किसी अतिरिक्त रकम के भुगतान का दावा केवल बाद में किए गए मौखिक दावे के आधार पर समझौते का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए धोखाधड़ी, बहकावे या सहमति को प्रभावित करने वाली किसी अन्य परिस्थिति का स्पष्ट और ठोस प्रमाण जरूरी है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने संपत्ति विवाद में तीन प्रतिवादियों की ओर से दायर अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अपीलकर्ताओं ने निचली अदालत की ओर से पारित सहमति डिक्री को रद्द करने की मांग...

गिरफ्तारी के आधार नहीं बताने पर पहली गिरफ्तारी गलत ठहरी तो मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना दोबारा गिरफ्तारी अवैध: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी आरोपी को संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के आधार बताए बिना हिरासत में रखने के कारण रिहा किया गया तो जांच एजेंसी अपनी मर्जी से उसे दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती। दोबारा गिरफ्तारी के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना जरूरी है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई दोबारा गिरफ्तारी अवैध होगी और आरोपी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानी जाएगी।अदालत यह आदेश मनोज चौधरी की बंदी...

शरजील इमाम को Ph.D पूरी करने के लिए रिसर्च कंटेंट देखने की अनुमति मांगने पर तिहाड़ जेल से जवाब तलब

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को शरजील इमाम की उस याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा, जिसमें उसने जेल के भीतर बिना इंटरनेट वाले कंप्यूटर पर पेन ड्राइव में मौजूद शोध सामग्री देखने की अनुमति मांगी। इमाम वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आरोपी है।जस्टिस संजीव नरूला ने जेल प्रशासन को मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।इमाम की ओर से पेश वकील अहमद इब्राहिम ने अदालत को बताया कि वह जनवरी 2020 से हिरासत में है और...

स्थिति काबू में आने के बाद कैदियों की अनावश्यक पिटाई नहीं कर सकता जेल वार्डन: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में कैदियों के साथ अनावश्यक हिंसा और मारपीट को लेकर जेल वार्डन को कड़ी चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि एक बार स्थिति काबू में आने और कैदियों के अपनी-अपनी कोठरियों में लौट जाने के बाद उन्हें डंडे से पीटना पूरी तरह अनावश्यक और अस्वीकार्य है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने जेल परिसर की घटना का सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद यह टिप्पणी की। 26 जून को जेल के खुले हिस्से में करीब 10-12 कैदियों के बीच झगड़ा हुआ था।अदालत ने देखा कि वार्डन ने शुरुआत में डंडे से...

महाराष्ट्र में SIR के दौरान मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाने के खिलाफ याचिका, 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगा हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की। याचिका में पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित खामियों को दूर करने और पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई।चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को दो कारोबारियों की ओर से दायर याचिका का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि मामला नागरिकों के...

ECI के 14 आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार, 22 अक्टूबर को सुनवाई की संभावना

बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने सोमवार, 28 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर जारी 14 आदेशों और कार्रवाइयों को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि इन फैसलों पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति दर्ज कराई थी।जस्टिस शर्मिला देशमुख और जस्टिस नीरज धोटे की खंडपीठ के समक्ष एडवोकेट असीम सरोदे ने याचिका का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। हालांकि, पीठ ने अपने रोस्टर में लंबित...