हाईकोर्ट
व्यक्तिगत स्वतंत्रता दिखावे की चीज नहीं, वास्तविक अधिकार है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी को दी जमानत
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐसे आरोपी को जमानत दी, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसकी सजा रद्द किए जाने के बावजूद 15 वर्षों से अधिक समय तक जेल में बंद रहा।जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए कहा,“स्वतंत्रता कोई दिखावटी चीज नहीं है, यह वास्तविक अधिकार है।” अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ प्रभावी सजा मौजूद नहीं है, तब उसे लगातार जेल में रखना उचित नहीं ठहराया जा सकता।मामला वर्ष 2006 में दर्ज एक हत्या के मुकदमे से जुड़ा है,...
भोजशाला विवाद: 1935 में नमाज की अनुमति देने का अधिकार धार रियासत को था: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हस्तक्षेपकर्ता की दलील; फैसला सुरक्षित
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता ने दलील दी कि वर्ष 1935 में धार रियासत सक्षम प्राधिकारी थी, इसलिए मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति देने वाली व्यवस्था वैध मानी जानी चाहिए।यह दलील केंद्र सरकार के उस तर्क के जवाब में दी गई, जिसमें कहा गया कि धार रियासत द्वारा 1935 में जारी अधिसूचना, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय...
अश्लील कंटेंट फैलाने वाले ऐप्स पर सख्ती करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल और एप्पल को दिया निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल LLC और एप्पल इंक को निर्देश दिया कि उनके प्ले-स्टोर पर उपलब्ध मोबाइल ऐप्स के जरिए अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को तुरंत रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि मध्यस्थ मंचों की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें ऐप्स को अपलोड की अनुमति देते समय भी पूरी सतर्कता बरतनी होगी।अदालत ने यह आदेश रुबिका थापा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में...
कृषि आय पर कर लगाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट बोला- पूरी तरह गलत धारणा पर आधारित
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में कृषि आय पर कर लगाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को पूरी तरह गलत धारणा पर आधारित बताया।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत दिल्ली सरकार को कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती।अदालत ने स्पष्ट कहा,“हम सरकार को कानून बनाने के लिए बाध्य करने वाला आदेश जारी नहीं कर सकते।” यह जनहित याचिका आकाश गोयल नामक व्यक्ति ने दायर की थी। याचिका में दावा किया गया कि दिल्ली में कृषि आय को...
अपनी ACR मांगने का कर्मचारी को अधिकार, निजता का हवाला देकर जानकारी नहीं रोक सकता राज्य: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी सरकारी कर्मचारी सूचना का अधिकार कानून के तहत अपनी वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) की प्रतियां मांग सकता है और राज्य सरकार निजता का हवाला देकर ऐसी जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकती।जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने कहा कि जब किसी कर्मचारी के पास जानकारी प्राप्त करने का कोई अन्य प्रभावी उपाय नहीं बचता, तब वह RTI कानून के तहत आवेदन करने के लिए बाध्य होता है। ऐसे मामलों में केवल इस आधार पर आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता कि सार्वजनिक हित और निजता के बीच संतुलन को लेकर अलग...
बच्चे कहां खेलेंगे: राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के इकलौते मैदान में पानी की टंकी निर्माण पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने गायक कैट स्टीवंस के मशहूर गीत की पंक्ति “वेयर डू द चिल्ड्रेन प्ले?” का उल्लेख करते हुए हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा कस्बे के इकलौते खेल मैदान में ओवरहेड पानी की टंकी के निर्माण पर रोक लगाई।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने टंकी निर्माण के लिए किसी वैकल्पिक स्थान की तलाश करने का गंभीर प्रयास नहीं किया।अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि सक्षम अधिकारी शपथपत्र दाखिल कर बताए कि क्या वास्तव में खेल मैदान ही इस परियोजना...
'स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में नैतिकता को अपराध से अलग रखना होगा': दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को ज़मानत देते हुए कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप के मामले में आरोपी जिम ट्रेनर को ज़मानत दी। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए ज़मानत दी कि "व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर फ़ैसला करते समय नैतिकता को अपराध से अलग रखना होगा।"जस्टिस गिरीश कथपालिया ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 351(2), 64(2)(m) और 79 के तहत आने वाले अपराधों के संबंध में नियमित ज़मानत याचिका मंज़ूर करते हुए यह टिप्पणी की।अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी जिम ट्रेनर के तौर पर काम करता था, उसकी मुलाक़ात पीड़िता से तब हुई जब वह उसके जिम आने लगी।...
अगर CrPC की धारा 313 के तहत पूछताछ के दौरान आरोपी को DNA रिपोर्ट नहीं दिखाई गई तो उसे दोषी ठहराने के लिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अगर FSL/DNA रिपोर्ट के निष्कर्षों को CrPC की धारा 313 के तहत आरोपी से पूछताछ के दौरान उसके सामने नहीं रखा गया तो किसी को दोषी ठहराने के लिए उस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को सफाई देने के लिए जो भी सबूत नहीं दिखाए गए, उन्हें उसके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।जस्टिस रविंद्र मैठानी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की डिवीज़न बेंच देहरादून के स्पेशल जज (POCSO) के फैसले के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस फैसले में अपीलकर्ता...
लेबर कोर्ट ID Act की धारा 33C(2) के तहत TA/DA जैसे विवादित सर्विस अधिकारों पर फैसला नहीं दे सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 (ID Act) की धारा 33C(2) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली लेबर कोर्ट, विवादित सर्विस अधिकारों पर फैसला नहीं दे सकतीं; वे सिर्फ पहले से मौजूद अधिकारों की गणना या वसूली तक ही सीमित हैं।जस्टिस शैल जैन ने यह टिप्पणी इलाहाबाद बैंक की रिट याचिका को मंज़ूरी देते हुए की। इस याचिका में बैंक ने इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल-कम-लेबर कोर्ट-II के 2007 के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह एक रिटायर...
आरोपियों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: पुलिस द्वारा कथित 'जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण' परेड की जांच के आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के पुलिस अधीक्षक को उन आरोपों की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया कि पुलिस कर्मियों ने 'जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से' याचिकाकर्ता और अन्य सह-आरोपियों को सार्वजनिक परेड के लिए मजबूर किया।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने टिप्पणी की कि अनुच्छेद 21 के तहत उल्लंघन साबित करने के लिए याचिकाकर्ता को यह साबित करना होगा कि पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई 'जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण थी। उसका मकसद याचिकाकर्ता को अपमानित करना या नीचा दिखाना था।'हालांकि, बेंच ने यह भी कहा...
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी पाए गए बच्चे को दी गई 10 साल की सज़ा रद्द की, कहा- IPC की धारा 302 के तहत ऐसी सज़ा गैर-कानूनी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी पाए गए कानून के साथ संघर्षरत बच्चे को दी गई 10 साल की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 302 के तहत ऐसी सज़ा साफ़ तौर पर गैर-कानूनी है।कोर्ट ने साफ़ किया कि भले ही किसी किशोर पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाए, लेकिन हत्या के लिए सज़ा सिर्फ़ आजीवन कारावास (रिहाई की संभावना के साथ) ही हो सकती है, न कि कोई तय समय की सज़ा।बता दें, IPC की धारा 302 हत्या के लिए मौत या आजीवन कारावास की सज़ा का प्रावधान करती है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता...
Industrial Dispute | दिल्ली में एम्प्लॉयर का ऑफिस होना ही अपने आपमें दिल्ली के लेबर अधिकारियों को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं देता: हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि औद्योगिक विवादों में "उचित सरकार" (Appropriate Government) की पहचान करने के लिए नौकरी की जगह और वह जगह जहां नौकरी खत्म होने का फैसला लागू होता है, ये दो मुख्य कारक होते हैं।जस्टिस शैल जैन ने यह टिप्पणी की कि दिल्ली में एम्प्लॉयर का ऑफिस होना ही अपने आप में दिल्ली के लेबर अधिकारियों को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं दे देता।कोर्ट ने कहा,"दिल्ली में किसी पुराने समय में कोई बिज़नेस पता होना, यह साबित नहीं करता कि नवंबर 2009 में जो औद्योगिक विवाद पैदा हुआ था, उसका उस...
न्यायिक दुर्व्यवहार
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक जज अपना आपा खोने और केवल दो साल के अभ्यास वाले एक युवा वकील को कारावास का आदेश देने के बाद इस सप्ताह न्यायिक समाचार निर्माता बन गए हैं । सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने अभ्यावेदन और प्रस्तावों के माध्यम से भारत के मुख्य न्यायाधीश का ध्यान आकर्षित किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः इस मुद्दे को जब्त कर लिया, और दो रिट याचिकाएं दर्ज करने के बाद, यह कहकर न्यायिक पक्ष में मामले को शालीनता से बंद कर दियाःसभी स्तरों पर न्यायपालिका के...
मुस्लिम लड़कियों पर कथित भड़काऊ बयान मामले में लेखक चक्रवर्ती सुलीबेले के खिलाफ FIR पर कर्नाटक हाईकोर्ट की रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लेखक और राजनीतिक कार्यकर्ता चक्रवर्ती सुलीबेले के खिलाफ दर्ज FIR की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। उन पर धारवाड़ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम लड़कियों को लेकर कथित भड़काऊ और मुस्लिम विरोधी बयान देने का आरोप है।जस्टिस हंचाटे संजीवकुमार की एकलपीठ ने 7 मई के आदेश में कहा कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है, लेकिन प्रथमदृष्टया अंतरिम राहत देने का मामला बनता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि धारवाड़ टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज Crime No.0063/2026 से संबंधित आगे की...
राजनीतिक प्रतिशोध का मामला, BJP सांसदों जैसी राहत दी जाए: ED गिरफ्तारी के खिलाफ पंजाब मंत्री संजीव अरोड़ा की हाईकोर्ट से मांग
पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हुई गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और रिमांड आदेश रद्द करने की मांग करते हुए इसे कानून और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और अगली सुनवाई 14 मई के लिए तय की।संजीव अरोड़ा की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने अदालत में कहा,“पंजाब में राजनीतिक प्रतिशोध की...
बिना सुनवाई ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट ने किया TTFI का आदेश रद्द
दिल्ली हाईकोर्ट ने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) द्वारा महासचिव और पूर्व ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करने का आदेश रद्द किया। अदालत ने कहा कि फेडरेशन ने उन्हें बिना सुनवाई का मौका दिए कार्रवाई कर प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस कृष्ण मुरारी को स्वतंत्र जांच प्राधिकारी नियुक्त किया। वह TTFI के कामकाज और उसके पदाधिकारियों के आचरण की जांच करेंगे।कमलेश मेहता ने 28 जनवरी 2026 को TTFI की...
दूरदर्शन पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण की मांग, हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 का दूरदर्शन और DD स्पोर्ट्स जैसे मुफ्त सार्वजनिक प्रसारण मंचों पर प्रसारण सुनिश्चित कराने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और प्रसार भारती को नोटिस जारी किया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती से जवाब मांगा।याचिकाकर्ता अवधेश बैरवा की ओर से सीनियर एडवोकेट वैभव गग्गर ने अदालत में दलील दी कि यदि लोगों को टूर्नामेंट देखने से वंचित किया गया तो यह नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन होगा और देश में फुटबॉल तथा खेल...
पत्नी की शिक्षा या अकेले कमाने की क्षमता CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने में बाधा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ इस बात से कि पत्नी पढ़ी-लिखी है या उसमें कमाने की क्षमता है, उसे CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने आगे कहा कि जिस बात पर विचार किया जाना चाहिए, वह यह है कि क्या उसमें खुद का भरण-पोषण करने की वास्तविक और मौजूदा क्षमता है। वह भी उसी जीवन-स्तर के अनुसार, जिसका वह अपने वैवाहिक घर में आनंद लेती थी।कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि वह किसी लाभकारी रोज़गार में है और खुद का...
ड्यूटी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में मारे गए पुलिस के सपोर्ट स्टाफ को पेंशन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के 'फॉलोअर' (सपोर्ट स्टाफ) के परिवार को पेंशन देने से इनकार किया, जिसकी ड्यूटी पर जाते समय एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं 'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' के नियम 3 के दायरे में नहीं आतीं; यह नियम उन विशेष परिस्थितियों को बताता है जिनमें पेंशन दी जा सकती है।'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' का नियम 3 कहता है कि ये नियम उत्तर प्रदेश के सभी राजपत्रित/अराजपत्रित पुलिस, PAC या अग्निशमन सेवा...
आत्मा पर पहरा: धर्मांतरण-विरोधी कानून और संवैधानिक स्वतंत्रता का मौन क्षरण
जब राज्य को विश्वास या स्नेह के लिए अनुमति की आवश्यकता होने लगती है, तो यह अब अकेले आचरण को नियंत्रित नहीं करता है। यह व्यक्ति के आंतरिक जीवन में घुसपैठ करना शुरू कर देता है।कुछ स्वतंत्रताएं एक संवैधानिक स्थान पर इतनी अंतरंग होती हैं कि कोई भी नियामक निरीक्षण स्वाभाविक रूप से परेशान करने वाला प्रतीत होता है। सोचने, विश्वास करने और प्रेम करने की स्वतंत्रता मानव गरिमा का मूल है। समकालीन भारत में, इन स्वतंत्रताओं को धर्मांतरण विरोधी कानूनों के तहत तेजी से विधायी संदेह के अधीन किया जाता है।वर्तमान...




















