हाईकोर्ट

नगर निकाय चुनाव आरक्षण पर याचिका खारिज, राजस्थान हाईकोर्ट ने माना अनुच्छेद 243-Z का प्रतिबंध

राजस्थान हाईकोर्ट ने आगामी नगर निकाय चुनावों में सीटों के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं। हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 243-Z के तहत अदालत के चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप पर रोक है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के 19 अगस्त 2026 के आदेश से नगर निकाय चुनाव की तारीखें घोषित करने के साथ चुनाव कार्यक्रम भी अधिसूचित किया जा चुका था। इसलिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो...

Krishna Janmabhoomi Case | इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया गया: कार सेवा की चिंता के बीच मथुरा प्रशासन ने सुरक्षा के इंतज़ाम किए

इलाहाबाद हाईकोर्ट को जानकारी दी गई कि मथुरा प्रशासन ने विवादित कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह परिसर में सुरक्षा के इंतज़ाम किए हैं। यह कदम उस जगह पर 'कार सेवा' की संभावना को लेकर जताई गई चिंताओं के मद्देनजर उठाया गया।जस्टिस अवनीश सक्सेना की बेंच को इन इंतज़ामों के बारे में तब बताया गया, जब उन्होंने मथुरा के ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) और सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (SSP) द्वारा सीलबंद लिफ़ाफ़े में सौंपी गई रिपोर्ट को देखा।25 अगस्त को दिए अपने आदेश में कोर्ट ने दर्ज किया कि उसके पिछले आदेश के मुताबिक,...

SC/ST Act | जाति-आधारित दुर्व्यवहार के मामले में चश्मदीद गवाह का स्वतंत्र और निष्पक्ष होना ज़रूरी: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि SC/ST Act के तहत जाति-आधारित दुर्व्यवहार के आरोप की जांच करते समय "पब्लिक व्यू" (सार्वजनिक रूप से देखे जाने) की शर्त पर विचार करते समय यह भी देखना चाहिए कि क्या कथित चश्मदीद गवाह स्वतंत्र और निष्पक्ष थे।इसके अनुसार, कोर्ट ने एक सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। यह कार्यवाही एक हेड कॉन्स्टेबल की शिकायत पर शुरू हुई, जिसमें जाति-आधारित दुर्व्यवहार और आपराधिक धमकी का आरोप लगाया गया।कोर्ट ने कहा कि शिकायत की जांच अलग-थलग रहकर नहीं की जा...

पीएम आवास के पास की तीन झुग्गी बस्तियों को 6 हफ्ते में DUSIB कॉलोनी में शिफ्ट किया जाए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (25 अगस्त) को रेस कोर्स इलाके में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों के निवासियों को अपनी जगह खाली करने और सावदा घेवरा में DUSIB कॉलोनी में जाने के लिए छह हफ़्ते का समय दिया, जहाँ अधिकारियों ने वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि बेदखली की प्रक्रिया में 2015 की पुनर्वास नीति का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, लेकिन साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के निवासियों...

दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम और उमर खालिद की ज़मानत याचिकाओं का विरोध किया, कहा- हालात में कोई बदलाव नहीं

2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की नई ज़मानत याचिकाओं का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट से कहा कि ये याचिकाएं "गैर-कानूनी" हैं और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश हैं। वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला मौजूदा कार्यवाही के लिए हालात में बदलाव के बराबर है।बता दें, खालिद और शरजील ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में अपनी...

जेल मैनुअल के नियम अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए होते हैं, इनका इस्तेमाल आपराधिक आरोप साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जेल मैनुअल के तहत जेल अधिकारियों की तय जिम्मेदारियां अनुशासनात्मक कार्रवाई या कर्तव्य में लापरवाही के लिए तो अहम हो सकती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल आपराधिक आरोप साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता। आपराधिक आरोप तो दंड कानून के तहत अपराध के तत्वों के आधार पर ही तय किए जाने चाहिए।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल जज बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने लोहरदगा के डिविजनल जेल से विचाराधीन कैदी के भागने के मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 222 और धारा 120B के...

पति द्वारा बिज़नेस की देनदारी चुकाने का वादा पत्नी को चेक बाउंस के मुक़दमे से बरी नहीं करता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत महिला के ख़िलाफ़ चल रही कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। उस महिला पर उसके पति के साथ आरोप लगाया गया। कोर्ट ने कहा कि 'स्पेशल पावर ऑफ़ अटॉर्नी' (जिसमें पति को उसकी ओर से काम करने और उसके कामों को अपनी मंज़ूरी देने का अधिकार दिया गया) को सिर्फ़ इसलिए नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, क्योंकि बाद में हुए एक समझौते में यह लिखा गया कि उसकी कंपनी बकाया रकम चुकाएगी। [2026 LiveLaw (PH) 296]जस्टिस आलोक जैन ने कहा...

आर्टिकल 25 के तहत धार्मिक जुलूस के लिए किसी खास रास्ते को चुनने का अधिकार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 25 के तहत अपने धर्म का पालन करने का अधिकार कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और आबादी के दूसरे वर्गों की ज़रूरतों के अधीन है, खासकर तब जब किसी खास तरीके से इस अधिकार का इस्तेमाल करने से उन पर बुरा असर पड़ता हो। कोर्ट ने कहा कि अपने धर्म का पालन करने का अधिकार एक बात है और उसे किसी खास तरीके से करना दूसरी बात।जस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस रजनीश आर. व्यास की डिवीज़न बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस के 1 अगस्त, 2026 के उस आदेश...

स्वयं अपना केस लड़ने वाले व्यक्ति ने जज के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना ​​का केस दर्ज किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​का केस दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश तब दिया गया जब पाया गया कि उसने खुद अपना केस लड़ने वाले व्यक्ति (party-in-person) के तौर पर एक रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दायर की थी, जिसमें हाईकोर्ट के मौजूदा जज के खिलाफ 'अपमानजनक' भाषा का इस्तेमाल किया गया।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने यह निर्देश तब दिया, जब वे बेंच के 9 जुलाई, 2026 के पिछले आदेश के खिलाफ दायर रिव्यू पिटीशन पर विचार कर रहे थे। उस पिछले आदेश...

पति-पत्नी का अलग-अलग कमरों में रहना अपने आप में क्रूरता नहीं, किंतु लंबे समय से चल रहे झगड़ों का कुल असर मायने रखता है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पति की अपील खारिज की। पति ने फैमिली कोर्ट द्वारा मानसिक क्रूरता के आधार पर दिए गए तलाक के आदेश और पत्नी को दिए गए स्थायी गुजारे-भत्ते (एलिमनी) को चुनौती दी थी। ऐसा करते हुए कोर्ट ने एक अहम बात कही कि एक ही घर में अलग-अलग कमरों में रहना, अपने आप में क्रूरता नहीं माना जा सकता। [2026 LiveLaw (Kar) 318]कोर्ट ने आदेश में कहा,"...अकेले इस आधार पर ऐसी व्यवस्था [अलग-अलग कमरे] को क्रूरता नहीं माना जा सकता। सिर्फ़ इस बात से कि पति-पत्नी अलग-अलग कमरों में रहते हैं, क्रूरता...

राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के गठन पर दो महीने में फैसला लें केंद्र: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के गठन की मांग वाली याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया।कोर्ट ने याचिका को केंद्र सरकार के समक्ष अभ्यावेदन के रूप में लेने का निर्देश देते हुए कहा कि इस पर तय समय के भीतर निर्णय लेकर याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी दी जाए। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह आदेश इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।याचिका में राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग अधिनियम, 2023 की धारा 3 के...

आपराधिक मामलों में मेडिकल और फोरेंसिक रिकॉर्ड तक अदालतों की सीधी पहुंच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

आपराधिक मामलों में जांच से जुड़े मेडिकल और फोरेंसिक रिकॉर्ड तक अदालतों की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए।कोर्ट ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र को ऐसी व्यवस्था तैयार करने को कहा, जिससे संबंधित अदालत या मजिस्ट्रेट मेडिकल और फोरेंसिक रिकॉर्ड को सीधे डिजिटल माध्यम से देख सकें। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने 19 अगस्त को यह निर्देश जारी किया। पीठ दहेज हत्या के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।कोर्ट ने आरोपी को जमानत तो दे दी लेकिन...

दिल्ली दंगे: IB कर्मचारी की हत्या में उम्रकैद के खिलाफ ताहिर हुसैन हाईकोर्ट पहुंचे

आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।बता दें कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह की अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 31 जुलाई को ताहिर हुसैन, जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों...

न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर संवैधानिक कर्तव्य, पैसों की कमी कोई बहाना नहीं: एमपी हाईकोर्ट ने राज्य से कोर्ट के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने को कहा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अनुच्छेद 21 के तहत पर्याप्त न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के उसके संवैधानिक कर्तव्य की याद दिलाई। कोर्ट ने कहा कि ज़िला और हाई कोर्ट में कई न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सरकारी मंज़ूरी के इंतज़ार में रुके हुए हैं।अनूपपुर ज़िला कोर्ट बिल्डिंग में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) का दायरा बढ़ाते हुए, एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कहा,"हमें सरकार को याद दिलाने की ज़रूरत है कि न्यायपालिका...

राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी की मौत के 21 साल बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का निर्देश दिया, कहा- आर्थिक संकट खत्म नहीं हुआ

राजस्थान हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एक व्यक्ति की अनुकंपा के आधार पर नौकरी (Compassionate Appointment) की अर्ज़ी पर विचार करें। यह अर्ज़ी उसके पिता की मौत के 21 साल बाद दी गई। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि परिवार इतने सालों से गुज़ारा कर रहा है, इसे इस बात का सबूत नहीं माना जा सकता कि उसका आर्थिक संकट खत्म हो गया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश कुमार और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की बेंच ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी के दावे पर विचार करते समय परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर आपत्ति जताने वाली अर्ज़ी पर फ़ैसला लेने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह चार हफ़्ते के अंदर 'दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन' की उस अर्ज़ी पर फ़ैसला करे, जिसमें पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस की ज़रूरत पर आपत्ति जताई गई।कोर्ट एसोसिएशन की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में मांग की गई थी कि पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अटेंडेंस से जुड़े दिल्ली सरकार के सर्कुलर को रद्द किया जाए, या फिर इन सर्कुलर को लागू करने पर रोक लगाई जाए और पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के लिए कोई...

नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों की अवैध तस्करी की PITNDPS Act के तहत महिला की निवारक हिरासत रद्द किया: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 'नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम अधिनियम, 1988' (PITNDPS एक्ट) के तहत एक महिला की निवारक हिरासत रद्द किया। कोर्ट ने माना कि अधिकारियों द्वारा उसे केंद्र सरकार के सामने अपनी बात रखने (रिप्रेजेंटेशन) के अधिकार के बारे में तुरंत न बताना, और उसके बाद उसकी अर्जी को आगे भेजने और उस पर फैसला लेने में बहुत ज़्यादा देरी करना, अनुच्छेद 22(5) के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन था। [2026 LiveLaw (PH) 295]जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि...

3 महीने में कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने हाथरस पीड़िता के परिवार को दूसरी जगह बसाने में बेवजह रुकावट डालने पर यूपी सरकार को फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह हाथरस गैंगरेप और हत्या की पीड़िता के परिवार को 3 महीने के भीतर गाजियाबाद या नोएडा में बसाए और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करे। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार उसके पहले के निर्देशों का पालन करने में "बेवजह रुकावट" डाल रही थी।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की बेंच ने कहा कि 22 फरवरी 2025 को राज्य सरकार का जो फैसला आया था, जिसमें परिवार को कासगंज, एटा या अलीगढ़ में बसाने की पेशकश की गई, उसमें गाजियाबाद या नोएडा में बसाने की...