हाईकोर्ट
बिना गिरफ्तारी के कारण बताए किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा: यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को दिया आश्वासन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने आश्वासन दिया है कि राज्य में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण और आधार बताए बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि पुलिस गिरफ्तारी की प्रक्रिया को BNSS, 2023 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सख्ती से लागू करेगी।यह आश्वासन राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) विनोद कुमार शाही ने जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष दिया।AAG ने अदालत को बताया कि उन्होंने राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस...
परिवार के एक सदस्य को विदेशी घोषित करने से बाकी सदस्य स्वतः विदेशी नहीं हो जाते: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी परिवार के एक सदस्य को विदेशी घोषित कर देने मात्र से उसके अन्य परिजन स्वतः विदेशी नहीं माने जा सकते। अदालत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ अलग से कार्यवाही और संदर्भ आवश्यक है।जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस शमीमा जहां की खंडपीठ एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने विदेशी न्यायाधिकरण के 2019 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसे और उसके बेटों-बेटियों को विदेशी घोषित कर दिया गया।हाईकोर्ट ने महिला को विदेशी घोषित करने का...
“तारीख पर तारीख” सिर्फ जजों की गलती नहीं, सरकार और पुलिस भी जिम्मेदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में लंबित आपराधिक मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि “तारीख पर तारीख” वाली स्थिति के लिए केवल न्यायिक अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकार और पुलिस तंत्र की कमियां भी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की पीठ ने बॉलीवुड फिल्म दमिनी के मशहूर संवाद “तारीख पर तारीख… मिलती है तो सिर्फ तारीख” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आम लोगों की न्याय व्यवस्था के प्रति धारणा को दर्शाता है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त स्टाफ,...
एक ही शहर में अलग रहना घरेलू निकटता नहीं, ननद और उसके पति पर दर्ज क्रूरता का मामला रद्द: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में विवाहित ननद और उसके पति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए कहा कि एक ही शहर में अलग-अलग रहना घरेलू निकटता नहीं माना जा सकता।जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि वर्षों से अलग रह रहे रिश्तेदारों को सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर मामले में घसीटना आपराधिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत ने यह भी कहा कि वैवाहिक विवादों को उत्पीड़न का हथियार नहीं बनाया जा सकता।अदालत ने टिप्पणी की,“महानगर में भौगोलिक निकटता को घरेलू एकीकरण के बराबर नहीं माना जा...
गंभीर दुराचार न होने पर पति का पत्नी के साथ फिर से रहने से इनकार करना, HMA की धारा 23(1)(a) के तहत 'गलती' नहीं मानी जाएगी: एपी हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश (Decree) के बाद पति या पत्नी का साथ रहने से सिर्फ़ "इनकार" करना, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 23(1)(a) के अर्थ में "गलती" नहीं माना जाएगा, जिससे उस पति या पत्नी को तलाक़ मांगने के अधिकार से वंचित किया जा सके।कोर्ट ने कहा कि धारा 23(1)(a) के अर्थ में 'गलती' माने जाने के लिए, जिस आचरण का आरोप लगाया गया, वह फिर से साथ रहने के प्रस्ताव पर सहमत होने से सिर्फ़ इनकार करने से कहीं ज़्यादा होना चाहिए। यह इतना गंभीर दुराचार होना...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नेशनल गेम्स कैंप के दौरान नाबालिग खिलाड़ी से रेप के आरोपी हॉकी कोच को ज़मानत दी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक नेशनल हॉकी कोच को ज़मानत दी। इस कोच पर POCSO Act के तहत आरोप है कि उसने 2025 के नेशनल गेम्स के लिए चयन हेतु आयोजित हॉकी कैंप में शामिल एक नाबालिग खिलाड़ी के साथ रेप किया।जस्टिस आलोक मेहरा एक आरोपी द्वारा दायर ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस आरोपी को BNS की धारा 64(2)(f) (रेप), 127(2) (गलत तरीके से रोकना) और POCSO Act की धारा 5(N) (बच्चे के रिश्तेदार द्वारा, चाहे खून के रिश्ते, गोद लेने, शादी, अभिभावकत्व, या फोस्टर केयर के ज़रिए हो, या बच्चे के माता-पिता के साथ...
सिर्फ़ कई FIR होना ही BNS के तहत 'संगठित अपराध' का आरोप लगाने के लिए काफ़ी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ सिर्फ़ कई मामले होना ही BNS की धारा 111(4) के तहत संगठित अपराध का आरोप लगाने के लिए काफ़ी नहीं है, क्योंकि "कुछ बुनियादी मापदंड" हैं, जिन्हें यह आरोप लगाने से पहले पूरा करना ज़रूरी है।जस्टिस गजेंद्र सिंह ऐसे मामले पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें कोर्ट ने पहले राज्य से यह बताने को कहा था कि इस मामले में धारा 111 (संगठित अपराध) कैसे लागू होती है।कोर्ट ने पाया कि राज्य ने धारा 111 लगाने को इस आधार पर सही ठहराया कि याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ अलग-अलग...
कानून में कोई स्पष्ट रोक न होने पर लिमिटेशन एक्ट के तहत देरी को माफ़ किया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि जहां किसी कानून में देरी को माफ़ करने पर स्पष्ट रोक न हो, वहां अधिकारी आवेदन, अपील, पुनर्विचार या कानूनी उपाय का लाभ उठाने में हुई देरी को माफ़ करने के लिए लिमिटेशन एक्ट के प्रावधानों की मदद ले सकते हैं।कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि अधिकारी याचिकाकर्ता के ज़्यादा स्टांप ड्यूटी वापस पाने के दावे की खूबियों की जांच करने में नाकाम रहे और उन्होंने केवल देरी के आधार पर ही उसे खारिज किया।जस्टिस दीपक खोट की बेंच ने यह टिप्पणी की:"जिन मामलों में कानून या प्रक्रिया...
नियमों की कमी के कारण PwD कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
यह देखते हुए कि जिस राज्य को अपने कर्मचारियों के लिए अभिभावक की तरह काम करना चाहिए, वह एक "अनिच्छुक बाधा" बन जाता है, पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक PwD कर्मचारी के डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर के पद पर प्रमोशन के मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"यह एक दुखद बात है कि दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा और भविष्य की सुरक्षा के लिए बनाए गए लाभकारी कानूनों की ढाल होने के बावजूद, न्याय की राह अभी भी एक कठिन यात्रा बनी हुई है। करुणा से बना कानून एक आश्रय...
CrPC की धारा 125 के तहत पहली पत्नी के भरण-पोषण के मामले में दूसरी पत्नी आवश्यक पक्षकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि CrPC की धारा 125 के तहत पहली पत्नी और बच्चों द्वारा शुरू की गई भरण-पोषण की कार्यवाही में दूसरी पत्नी न तो ज़रूरी पक्षकार है और न ही उचित पक्षकार। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी कार्यवाही को बेवजह उन सभी लोगों को शामिल करके नहीं बढ़ाया जा सकता, जो पति पर निर्भर होने का दावा करते हैं।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने महिला द्वारा दायर अर्जी खारिज की, जिसमें उसने पहली पत्नी द्वारा अपने पति के खिलाफ दायर भरण-पोषण की पुनरीक्षण...
आरोपी यह शिकायत नहीं कर सकता कि उसकी गिरफ़्तारी की जानकारी परिवार को नहीं दी गई, जबकि उसने खुद वकील को जानकारी देने का विकल्प चुना: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में ज़मानत के आवेदक की इस दलील को खारिज किया कि उसकी गिरफ़्तारी गैर-कानूनी थी, क्योंकि उसके परिवार वालों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह आरोपी पर ही निर्भर करता है कि वह किसे अपनी गिरफ़्तारी के बारे में सूचित करवाना चाहता है।जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा ने कहा कि आवेदक ने अपने वकील को सूचित करने का विकल्प चुना था, जिसका पालन जाँच अधिकारी (I.O.) ने किया था; इसलिए अब वह नियमों का पालन न होने का आरोप नहीं लगा सकता।इस प्रकार, कोर्ट ने उस व्यक्ति की ज़मानत...
पटना हाईकोर्ट ने "अस्पष्ट" व्यभिचार के आरोपों पर तलाक़ देने से इनकार किया, कहा - दलीलों से परे के सबूतों पर विचार नहीं किया जा सकता
पटना हाईकोर्ट ने व्यभिचार के आरोपों पर आधारित पति की तलाक़ की अर्ज़ी खारिज करने का फ़ैसला सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि समय, जगह या पहचान के ब्योरे के बिना लगाए गए अस्पष्ट और बिना सबूतों वाले आरोप तलाक़ के आदेश का आधार नहीं बन सकते। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि राहत देने के लिए दलीलों से परे के सबूतों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।जस्टिस नानी टागिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडे की डिवीज़न बेंच सिवान के प्रिंसिपल जज, फ़ैमिली कोर्ट के 2019 के फ़ैसले को चुनौती देने वाली विविध अपील पर सुनवाई कर रही थी। उस...
गंभीर तथ्यात्मक विवादों का फैसला Article 226 की रिट याचिका में नहीं किया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग गंभीर तथ्यात्मक विवादों के निपटारे के लिए नहीं किया जा सकता, खासकर जब भूमि पर कब्जे को लेकर पक्षों के बीच विवाद हो और विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता हो।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ कटिहार जिले की एक भूमि विवाद से जुड़ी इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि विवादित जमीन उसके पिता की थी और वह उस पर कब्जे में है, जबकि DIET संस्थान उस जमीन में हस्तक्षेप कर रहा...
POCSO मामलों में उम्र साबित करने के लिए हर बार दस्तावेज जरूरी नहीं, यदि मौखिक गवाही को चुनौती न दी जाए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि POCSO Act के तहत मामलों में यदि पीड़िता और उसकी मां द्वारा बताई गई उम्र को ट्रायल के दौरान चुनौती नहीं दी जाती, तो केवल दस्तावेजी प्रमाण के अभाव में दोषसिद्धि को खारिज नहीं किया जा सकता।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने यह फैसला एक आपराधिक अपील पर सुनाते हुए दिया, जिसमें आरोपी ने POCSO Act की धाराओं 7 और 8 तथा IPC की धारा 354 के तहत हुई अपनी सजा को चुनौती दी थी।अभियोजन के अनुसार आरोपी एक अपार्टमेंट परिसर में सुरक्षा गार्ड था। उसने आठ वर्षीय बच्ची को कैमरा दिखाने के बहाने सुरक्षा...
झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग में अवैध खनन पर जताई सख्त चिंता, कहा- कार्रवाई से बचने के लिए 'संस्थागत तैयारी की कमी' बहाना नहीं
झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के इचक क्षेत्र में अवैध पत्थर खनन और गैरकानूनी स्टोन क्रशर यूनिट्स के संचालन को स्थापित मानते हुए राज्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रशासन अब “संस्थागत तैयारी की कमी” का हवाला देकर पर्यावरणीय नुकसान पर कार्रवाई से बच नहीं सकता।चीफ़ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ सिवाने नदी क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बिना पर्यावरणीय मंजूरी और आवश्यक...
पाठ्यक्रम से बाहर सवाल हटने पर अभ्यर्थियों को 'फ्री अंक' नहीं मिल सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और रिस्टोरर विभागीय परीक्षा से जुड़े मामले में कहा कि पाठ्यक्रम से बाहर पाए गए और बाद में हटाए गए प्रश्नों के लिए अभ्यर्थियों को स्वतः फ्री अंक देने का कोई अधिकार नहीं बनता।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने वह याचिका खारिज की, जिसमें परीक्षा मूल्यांकन पद्धति को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता दिल्ली हाईकोर्ट में चालक और कोर्ट अटेंडेंट जैसे ग्रुप-सी पदों पर कार्यरत कर्मचारी थे। उन्होंने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और...
एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी श्रम न्यायाधिकरण के फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी श्रम अदालत और औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसलों को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाइकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।जस्टिस शैल जैन पूर्व एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस कर्मचारियों तथा कर्मचारी संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इन याचिकाओं में केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण के उन आदेशों को चुनौती दी गई, जिनमें सेवा समाप्ति को अवैध मानने के बावजूद कर्मचारियों की बहाली के बजाय केवल आर्थिक मुआवजा दिया गया।मामला 1993 से...
गलत राजस्व प्रविष्टियों के आधार पर संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत मिले संपत्ति के अधिकार को गलत राजस्व प्रविष्टियों के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भू-धारकों को कानून के अनुसार नोटिस ही जारी नहीं किया गया, तो रिकॉर्ड सुधारने में हुई देरी को आधार बनाकर उन्हें उनकी जमीन से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस सिद्धेश्वर एस. थोम्बरे रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें मंत्री द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके जरिए उप निदेशक, भू-अभिलेख का आदेश रद्द कर दिया गया था। उप...
पटना हाईकोर्ट में कुछ जजों के व्यवहार पर गंभीर आरोप: वकीलों ने किया कार्य बहिष्कार का ऐलान
पटना हाईकोर्ट की तीन बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने 15 मई 2026 को सुबह 10:30 बजे के बाद न्यायिक कार्य से दूर रहने का आह्वान किया। समिति ने बार और बेंच के बीच बढ़ते तनाव तथा कुछ जजों के कथित व्यवहार को लेकर गहरी नाराजगी जताई।समन्वय समिति ने असाधारण स्थिति में आयोजित बैठक के बाद जारी प्रस्ताव में कहा कि 7 मई 2026 को रजिस्ट्रार जनरल (प्रभार) के हस्ताक्षर से जारी नोटिस के खिलाफ बार के सदस्यों ने एकमत होकर चिंता और आक्रोश व्यक्त किया।प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि हाल के दिनों में बार और बेंच के...
केवल प्रोत्साहन राशि लेने पर आशा कार्यकर्ताओं को पंचायत चुनाव से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस स्पष्टीकरण अधिसूचना पर रोक लगाई, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं को अंशकालिक कर्मचारी मानते हुए पंचायत पदों के लिए अयोग्य ठहराया गया।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं के पक्ष में मामला बनता है और उन्हें अंतरिम राहत दिए जाने का आधार मौजूद है।मामला 2 मई 2026 को जारी राज्य सरकार की एक स्पष्टीकरण अधिसूचना से जुड़ा है। इसमें कहा गया कि आशा कार्यकर्ता निश्चित मासिक मानदेय और कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि पर...


















