MV Act और वर्कमैन मुआवजा एक्ट के तहत दोहरा दावा नहीं चलेगा: राजस्थान हाइकोर्ट, बीमा कंपनी को राशि लौटाने का आदेश

Amir Ahmad

4 Feb 2026 12:24 PM IST

  • MV Act और वर्कमैन मुआवजा एक्ट के तहत दोहरा दावा नहीं चलेगा: राजस्थान हाइकोर्ट, बीमा कंपनी को राशि लौटाने का आदेश

    राजस्थान हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही दुर्घटना के लिए मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MV Act) और वर्कमैन मुआवजा अधिनियम, 1923 (Workman Act) — दोनों के तहत मुआवजा दावा करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। हाइकोर्ट ने कहा कि एक अधिनियम के तहत मुआवजा प्राप्त करने के बाद दूसरे अधिनियम के तहत दावा करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

    जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि एक मंच पर मिले मुआवजे को दूसरे मंच द्वारा समायोजित करने का तर्क भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अदालतों को सौदेबाजी का मंच नहीं बनाया जा सकता।

    हाइकोर्ट ने टिप्पणी की,

    “दावेदारों के वकील का यह तर्क निराधार है, क्योंकि अदालतों को सौदेबाजी का मंच नहीं माना जा सकता। दावेदारों को यह अनुमति नहीं दी जा सकती कि वे दो अलग-अलग मंचों पर जाएं और यदि उन्हें लगे कि पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है तो अधिक मुआवजे के लिए दूसरा मंच चुन लें।”

    यह फैसला नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर अपीलों पर सुनाया गया। बीमा कंपनी ने वर्कमैन मुआवजा आयुक्त द्वारा पारित उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें दावेदारों को मुआवजा दिया गया, जबकि वे पहले ही मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से एमवी एक्ट के तहत मुआवजा प्राप्त कर चुके थे।

    दोनों मामलों में मृतक के आश्रितों ने पहले मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के समक्ष याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें उन्हें मुआवजा प्रदान किया गया। इसके बाद उन्होंने वर्कमैन एक्ट के तहत भी अलग से दावे दाखिल किए, जिन्हें स्वीकार कर लिया गया। इसी के खिलाफ बीमा कंपनी ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    बीमा कंपनी की ओर से दलील दी गई कि MV Act की धारा 167 के अनुसार दावेदार केवल एक ही उपाय चुन सकते हैं या तो MV Act के तहत या वर्कमैन एक्ट के तहत। एक ही दुर्घटना के लिए दो समानांतर और अलग-अलग उपाय अपनाने की अनुमति कानून नहीं देता।

    वहीं दावेदारों की ओर से तर्क दिया गया कि दोनों दावे अलग-अलग पक्षों के खिलाफ थे MV Act के तहत दावा वाहन के खिलाफ था, जबकि वर्कमैन एक्ट के तहत दावा नियोक्ता के खिलाफ किया गया। इसलिए दोनों दावे बनाए जा सकते हैं। यह भी कहा गया कि पहले मंच पर मिले मुआवजे को दूसरे मंच द्वारा समायोजित किया जा सकता है।

    इन दलीलों को खारिज करते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि MV Act की धारा 167 के तहत चयन का सिद्धांत लागू होता है। जब एक ही राहत के लिए दो उपाय उपलब्ध हों तो पीड़ित पक्ष को उनमें से किसी एक का ही चयन करना होगा, दोनों का नहीं।

    कोर्ट ने कहा,

    “चयन का सिद्धांत, प्रत्यास्थापन (एस्टॉपेल) के नियम की एक शाखा है, जिसके तहत व्यक्ति अपने आचरण या कार्यों के कारण उस अधिकार को बाद में नहीं जता सकता जिसे वह पहले छोड़ चुका है।”

    हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि दावेदारों को मुआवजा अपर्याप्त लगता है तो वे दो अलग-अलग कानूनों के तहत दो मंचों पर जाकर दोहरा लाभ नहीं ले सकते।

    अंततः हाइकोर्ट ने वर्कमैन एक्ट के तहत दायर बाद की याचिकाओं को निरस्त किया और दावेदारों को निर्देश दिया कि वे वर्कमैन मुआवजा आयुक्त से प्राप्त की गई राशि, ब्याज सहित, बीमा कंपनी को वापस करें।

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