दिल्ली हाईकोर्ट ने धर्मशाला में जन्मी तिब्बती मूल की महिला को भारतीय नागरिक घोषित किया, पासपोर्ट जारी करने का निर्देश
Amir Ahmad
4 Feb 2026 12:27 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में 1966 में जन्मी तिब्बती मूल की महिला को जन्म से भारतीय नागरिक घोषित करते हुए उसे भारतीय पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया।
जस्टिस सचिन दत्ता ने यांगचेन ड्राकमारग्यापोन द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि वह नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3(1)(a) के तहत जन्म से भारतीय नागरिक हैं।
याचिकाकर्ता तिब्बती शरणार्थी वंश की हैं और 1997 में अपने पति से मिलने स्विट्ज़रलैंड गई थीं। वहां उन्हें और उनके परिवार को फॉरेनर्स पासपोर्ट जारी किए गए, जिनकी वैधता 2014 में समाप्त हो गई। बाद में स्विस अधिकारियों ने पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार करते हुए उन्हें भारतीय प्राधिकरणों से राष्ट्रीय पासपोर्ट लेने को कहा, क्योंकि उनका जन्म भारत में हुआ था।
याचिकाकर्ता ने जिनेवा स्थित भारतीय दूतावास से कई बार भारतीय पासपोर्ट या पहचान प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध किया, लेकिन केवल मौखिक इनकार मिला कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया।
दूसरी ओर, स्विस अधिकारियों ने भी यात्रा दस्तावेज जारी करने से मना कर दिया, जिसके चलते याचिकाकर्ता और उनके बच्चे व्यावहारिक रूप से स्टेटलेस हो गए और भारत यात्रा भी नहीं कर सके। यहां तक कि पति के अंतिम संस्कार के लिए भी।
कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का जन्म 15.05.1966 को धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में हुआ था जो कि 26 जनवरी 1950 और 1 जुलाई 1987 के बीच की अवधि में भारत के क्षेत्र में आता है। इसलिए वह धारा 3(1)(a) के तहत जन्म से भारतीय नागरिक हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्विट्ज़रलैंड द्वारा जारी पासपोर्ट फ़ॉर एलियंस गैर-नागरिकों के लिए मात्र यात्रा दस्तावेज होता है और इसे विदेशी नागरिकता का स्वैच्छिक अधिग्रहण नहीं माना जा सकता। अतः नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 (विदेशी नागरिकता ग्रहण करने पर भारतीय नागरिकता समाप्त होना) यहां लागू नहीं होती।
अदालत ने कहा कि ऐसे यात्रा दस्तावेज जारी होने से याचिकाकर्ता की भारतीय नागरिकता प्रभावित नहीं होती और वह भारतीय नागरिक बनी रहती हैं।
अंततः दिल्ली हाईकोर्ट ने घोषित किया कि याचिकाकर्ता भारतीय नागरिक हैं। उन्हें कानून के अनुसार भारतीय पासपोर्ट जारी किया जाना चाहिए।

