हाईकोर्ट
क्या राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या
संविधान का अनुच्छेद 143(1) तब चर्चा में आया जब भारत के राष्ट्रपति ने विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति की शक्तियों से संबंधित 14 प्रश्नों को सुप्रीम कोर्ट को संदर्भित करने के लिए इस प्रावधान को लागू करने का एक असाधारण कदम उठाया।चूंकि संदर्भ के तहत मुद्दों को तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय द्वारा सुलझाया गया था, जो केंद्र सरकार को पसंद नहीं आया, इसलिए राष्ट्रपति के संदर्भ ने कुछ लोगों को चौंका दिया है और एक राजनीतिक विवाद भी...
मेडिकल नियम तय करना सुरक्षा बलों का अधिकार, उम्मीदवार दूसरी सेनाओं जैसी छूट नहीं मांग सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी सशस्त्र बल में नियुक्ति के लिए जरूरी चिकित्सा मानक संबंधित बल तय करते हैं और विभिन्न बलों के बीच समानता का कोई सवाल नहीं हो सकता।जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस अजय दिगपॉल की खंडपीठ ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) के लिए चिकित्सकीय रूप से अनुपयुक्त समझे जाने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार करते हुए कहा,"अन्य अर्धसैनिक बलों/सेना के साथ समानता के संबंध में याचिकाकर्ता की दलील से भी कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि चिकित्सा मानकों का फैसला संबंधित बलों...
बेल बांड रद्द करने और जुर्माना लगाने के लिए अलग-अलग आदेश पारित किए जाएं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों को जमानत बांड को रद्द करने और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 446 के तहत जुर्माना लगाने के लिए अलग-अलग आदेश पारित करना चाहिए, यह सुनिश्चित करना कि प्रभावित व्यक्ति को कोई जुर्माना लगाने से पहले अपना मामला पेश करने का उचित अवसर दिया जाए।जस्टिस वीरेंद्र सिंह, "इस न्यायालय की सुविचारित राय में, विद्वान ट्रायल कोर्ट द्वारा अलग-अलग आदेश पारित करने की आवश्यकता थी, पहला, जमानत बांड रद्द करने के समय और दूसरा, जुर्माना लगाने के समय। विधायिका ने अपने विवेक से...
POCSO FIR को केवल इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि बालिग होने के बाद पीड़िता ने आरोपी के साथ समझौता किया: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत दर्ज प्राथमिकी को केवल इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि वयस्क होने पर पीड़िता आरोपी के साथ समझौता करने का विकल्प चुनती है।जस्टिस नमित कुमार ने कहा, 'बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों से जुड़ी प्राथमिकी, विशेष रूप से पॉक्सो अधिनियम के तहत, को इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता है कि पीड़ित ने वयस्कता की आयु प्राप्त करने के बाद बिना किसी कारण के आरोपी के साथ समझौता करने का विकल्प चुना है और धारा पॉक्सो...
जमानत याचिका के साथ केस डायरी जोड़ना अब सामान्य प्रक्रिया, इसी आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि न तो किसी व्यक्ति को जमानत से इनकार किया जा सकता है और न ही उसकी जमानत याचिका का विरोध मुख्य रूप से इस आधार पर किया जा सकता है कि केस डायरी के अंश उसकी जमानत याचिका के साथ संलग्न किए गए थे।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने हत्या के आरोपी को समानता के आधार पर जमानत देते हुए कहा, 'नैसर्गिक न्याय का यह बुनियादी सिद्धांत है कि किसी भी व्यक्ति को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए बिना उसकी निंदा नहीं की जानी चाहिए, जिसमें उसके खिलाफ सामग्री की प्रतियां उपलब्ध...
2012 सीएम कल्याण योजना: नए वकीलों को आर्थिक मदद न देने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कल्याण योजना के तहत नए नामांकित वकीलों को वित्तीय सहायता देने में विफल रहने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।चीफ़ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, "नोटिस जारी किया गया है। श्रीमती जान्हवी पंडित, अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रतिवादी संख्या 1 से 4 की ओर से नोटिस स्वीकार करती हैं और वर्तमान याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा जाता है। प्रत्युत्तर, यदि कोई हो, उसके बाद दो...
[Sec.173 BNSS] क्षेत्राधिकार के आधार पर FIR दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती पुलिस: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा में दिल्ली के 20 वर्षीय निवासी की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत के संबंध में प्राथमिकी दर्ज नहीं कर पाने पर दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस दोनों के आचरण पर 'गंभीर चिंता' और 'खेद' व्यक्त किया।लड़का दिसंबर 2024 में मृत पाया गया था, और उसकी बहन ने आरोप लगाया कि आज तक, इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि उन्हें 'गुमशुदगी' की रिपोर्ट मिली है, जिसके लिए कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी है क्योंकि इसमें अपराध होने का खुलासा...
दिल्ली हाईकोर्ट ने फीस वृद्धि के बीच LG से DPS द्वारका को अपने नियंत्रण में लेने की मांग करने वाली अभिभावकों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 100 से अधिक अभिभावकों द्वारा दायर याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें फीस वृद्धि के मुद्दे के बीच उपराज्यपाल (एलजी) द्वारा दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारका को अपने अधीन लेने की मांग की गई थी। जस्टिस विकास महाजन ने पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं और कहा कि मामले में उचित आदेश पारित किया जाएगा। आज, न्यायालय को सूचित किया गया कि शिक्षा विभाग द्वारा कल स्कूल के खिलाफ एक आदेश पारित किया गया था, जिसमें उसे छात्रों को वापस लेने का निर्देश दिया गया था।न्यायालय को...
झारखंड हाईकोर्ट ने पंजीकरण अधिनियम में राज्य संशोधन को खारिज कर दिया, जिसके तहत सरकार को सार्वजनिक नीति के आधार पर किसी भी पंजीकरण को रद्द करने की अनुमति दी गई थी
20 साल पुराने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए, जिसने राजस्थान सरकार द्वारा पंजीकरण अधिनियम में किए गए संशोधन को खारिज कर दिया था, जिसमें राज्य को सार्वजनिक नीति के आधार पर किसी भी पंजीकरण को रद्द करने का अधिकार दिया गया था, झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती बिहार सरकार द्वारा पेश किए गए एक समान प्रावधान को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट बिहार सरकार द्वारा 'बिहार संशोधन 6, 1991' के माध्यम से पेश किए गए पंजीकरण अधिनियम की धारा 22-ए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रहा था, जिसे बाद...
IPC के तहत अपराधों के लिए FEMA प्रतिरक्षा प्रदान नहीं करता, दोनों कानून अलग-अलग उल्लंघनों से संबंधित: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999, भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत किए गए अपराधों के लिए किसी व्यक्ति को उन्मुक्ति प्रदान नहीं करता है। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि दोनों क़ानून अलग-अलग और विशिष्ट उल्लंघनों को संबोधित करते हैं, जिसमें FEMA विदेशी मुद्रा लेनदेन से संबंधित उल्लंघनों को संबोधित करता है और IPC पारंपरिक अपराधों से निपटता है।कोर्ट ने कहा,“बिल्कुल स्पष्ट रूप से, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और संबंधित अपराध जिनके लिए याचिकाकर्ताओं पर IPC के तहत...
कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार पक्ष द्वारा लगाए गए निश्चित हर्जाने की वापसी में मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 के तहत हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि कार्य के पूरा होने में देरी के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार पक्ष द्वारा परिसमाप्त क्षतिपूर्ति लगाना अनुचित है। जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस भुवन गोयल की पीठ ने कहा, इसलिए, मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत अपीलीय हस्तक्षेप के सीमित दायरे को देखते हुए, इस तरह की क्षतिपूर्ति वापस करने के मध्यस्थ के निर्देश में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। तथ्यराजस्थान शहरी अवसंरचना विकास परियोजना ने 03.02.2003 के अनुबंध के तहत ब्यावर रोड, अजमेर को चौड़ा और मजबूत...
जस्टिस रवींद्र घुगे की अगुवाई में बॉम्बे हाईकोर्ट की नई पूर्ण पीठ मराठा आरक्षण मामले की सुनवाई करेगी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम, 2024 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के लिए एक नई पूर्ण पीठ (तीन न्यायाधीशों की पीठ) का गठन किया है, जो राज्य में शिक्षा और सार्वजनिक सेवा में मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है। नई पूर्ण पीठ की अध्यक्षता अब जस्टिस रवींद्र घुगे करेंगे, जबकि जस्टिस निजामुदीन जमादार और जस्टिस संदीप मार्ने पीठ के अन्य सदस्य होंगे। इस आशय की अधिसूचना 15 मई को उच्च न्यायालय के...
NEET-UG परीक्षा में बिजली गुल होने के आरोप पर एमपी हाईकोर्ट ने रिजल्ट घोषित करने पर लगाई रोक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2025 की NEET-UG परीक्षा में इंदौर के एक परीक्षा केंद्र पर बिजली गुल होने के आरोप पर गंभीर रुख अपनाते हुए अस्थायी रूप से रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगा दी।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने यह आदेश दिया, जब याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कोई पेश नहीं हुआ।कोर्ट ने कहा,“यह देखते हुए कि 4 मई 2025 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के दौरान याचिकाकर्ता को उचित परिस्थितियाँ उपलब्ध नहीं कराई गईं और बिजली गुल हो जाने के कारण वह परीक्षा ठीक से नहीं दे सका, इसलिए अगली सुनवाई...
PCPNDT Act | जेंडर टेस्ट मामले में FIR पर रोक नहीं, पुलिस जांच भी संभव: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व-गर्भाधान और पूर्व-प्रसव नैदानिक तकनीक (PCPNDT) अधिनियम 1994 के तहत अपराध संज्ञेय (cognizable) हैं। इसके तहत FIR दर्ज करने या पुलिस जांच पर कोई कानूनी रोक नहीं है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि भले ही अधिनियम की धारा 28 में कहा गया कि अदालत केवल शिकायत के आधार पर संज्ञान ले सकती है। फिर भी यह धारा FIR के रजिस्ट्रेशन या पुलिस जांच व चार्जशीट दायर करने पर रोक नहीं लगाती।कोर्ट ने कहा,“PCPNDT Act की धाराओं और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के सामंजस्यपूर्ण विश्लेषण से...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 गैर-कार्य शनिवारों को हाईकोर्ट कार्य दिवस घोषित करने पर बार से राय मांगी
14 मई 2025 को जारी अपने आधिकारिक पत्र में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन एडवोकेट एसोसिएशन और अवध बार एसोसिएशन (लखनऊ पीठ) के अध्यक्ष और सचिव से राय मांगी।इन दिनों इसका उपयोग 5 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की सुनवाई के लिए किया जा सकता है।यह पत्र राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (NCMS)-2024 की नीति एवं कार्य योजना के पैरा 49 (ii) में उल्लिखित अनुशंसा के अनुसरण में लिखा गया।इसमें कहा गया,"प्रत्येक माह का एक शनिवार 5 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की सुनवाई...
दिल्ली हाईकोर्ट ने PFI नेता को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 (UAPA) के तहत आरोपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के नेता ए.एस. इस्माइल को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि इस्माइल की स्वास्थ्य स्थिति में अब काफी सुधार हो चुका है।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने 13 दिसंबर 2023 को ट्रायल कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत याचिका खारिज करने के फैसले के खिलाफ इस्माइल की अपील खारिज कर दी।कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि डॉक्टरों द्वारा सुझाया...
Police Act | एसपी की अनुमति या दो महीने के नोटिस के बिना पुलिसकर्मी इस्तीफा नहीं दे सकते: J&K हाईकोर्ट ने कांस्टेबल की याचिका खारिज की
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक कांस्टेबल के इस्तीफे को उसी दिन स्वीकार करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, "पुलिस अधिकारी को पुलिस अधीक्षक की अनुमति के बिना इस्तीफा देने की अनुमति नहीं है, जब तक कि उसने इस्तीफा देने के अपने इरादे के बारे में कम से कम दो महीने पहले सूचना न दी हो।" जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व कांस्टेबल बिलाल अहमद याटू की ओर से दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए उपरोक्त टिप्पणी की।...
JJ Act: बच्चे समाज का भविष्य, उनके साथ दंडात्मक रवैया आत्मघाती- पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने शस्त्र अधिनियम के तहत एक नाबालिग को हुई सजा और दोषसिद्धि रद्द की। अदालत ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2000 (JJ Act) इस विश्वास पर आधारित है कि बच्चे समाज का भविष्य हैं और यदि वे कुछ परिस्थितियों में कानून के खिलाफ जाते हैं तो उन्हें सजा नहीं बल्कि सुधार और पुनर्वास मिलना चाहिए।जस्टिस जितेन्द्र कुमार ने कहा,"JJ Act 2000 इस सोच पर आधारित है कि बच्चे समाज का भविष्य हैं। अगर वे किसी कारणवश कानून के साथ संघर्ष में आ जाते हैं तो उनका सुधार होना चाहिए न कि...
दिनदहाड़े हिंसा: रोड रेज मामले में वकील को अग्रिम जमानत से इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने रोड रेज मामले में एक वकील को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, वकील पर एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि कानून की नजर में सभी समान हैं कोई भी ज्यादा बड़ा नहीं हो सकता।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि अगर आरोपी वकील को इस तरह की राहत दी जाती है तो यह वकालत जैसे महान पेशे की गरिमा को धूमिल करेगा। साथ ही यह संदेश जाएगा कि दिनदहाड़े सार्वजनिक स्थान पर हिंसा करने वाला व्यक्ति केवल इसलिए बच निकला, क्योंकि वह वकील है।कोर्ट ने कहा,“रोड रेज...
JEE-Main: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कोर कार्ड में हेराफेरी का आरोप लगाने के मामले में दिए जांच के आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने दो अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका में केंद्रीय फोरेंसिक साइंस लैब (CFSL), CBI को जांच के आदेश दिए, जिसमें JEE (Main)-2025 में उनके स्कोर कार्ड में हेराफेरी का आरोप लगाया गया।जस्टिस विकास महाजन ने अभ्यर्थियों को निर्देश दिया कि वे CFSL द्वारा सत्यापन के लिए रजिस्ट्री को अपने-अपने रजिस्टर्ड ई-मेल आईडी प्रस्तुत करें।न्यायालय ने CFSL के निदेशक से अनुरोध किया कि वे जांच में तेजी लाएं और 22 मई या उससे पहले सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट प्रस्तुत करें, क्योंकि JEE (Advanced)-2025 का...







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