हाईकोर्ट

मुजफ्फरनगर के शिक्षक की करीब 37 साल के सर्विस केस में हाईकोर्ट ने कहा- जरूरी योग्यता के बिना नियुक्ति शुरू से ही शून्य, नियमितीकरण से नहीं हो सकती वैध
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग एवं चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 21 के तहत मिलने वाला संरक्षण एडहॉक शिक्षकों को उपलब्ध नहीं है। धारा 21 के तहत प्रबंध समिति को किसी शिक्षक को सेवा से हटाने या बर्खास्त करने से पहले बोर्ड की पूर्व मंजूरी लेना जरूरी है, लेकिन यह सुरक्षा बोर्ड की संस्तुति पर नियमित रूप से नियुक्त शिक्षकों के लिए है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम कठिनाई निवारण आदेश, 1981 के तहत...

चल रही भर्ती प्रक्रिया से कानूनी रूप से उपलब्ध न होने वाले पदों को हटाना "नियम बदलने" जैसा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चल रही भर्ती प्रक्रिया से खाली पदों को हटाना — क्योंकि उन पदों को विज्ञापन में बताए गए नियमों के तहत कानूनी रूप से नहीं भरा जा सकता — "खेल के नियम" बीच में बदलने जैसा नहीं है।कोर्ट ने माना कि खाली पदों की संख्या को सही करना, योग्यता या चयन के मानदंडों को बदलने से बिल्कुल अलग बात है। कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ के 'तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाई कोर्ट' मामले के फैसले के तहत केवल बाद वाली चीज़ (यानी योग्यता या चयन के मानदंड बदलना) पर रोक है।'तेज प्रकाश पाठक' मामले...

रेगुलर होने से पहले की सर्विस पेंशन के लिए ज़रूरी सर्विस में गिनी जाएगी, लेकिन पेंशन की रकम तय करने में नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी की रेगुलर होने से पहले की सर्विस - चाहे वह सीज़नल, एड-हॉक, वर्क-चार्ज्ड या टेम्पररी कर्मचारी के तौर पर हो - उसे यह तय करते समय गिना जाना चाहिए कि क्या उसके पास पेंशन के लिए ज़रूरी सर्विस है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि पेंशन की रकम सिर्फ़ उसकी रेगुलर सर्विस के आधार पर ही तय की जा सकती है।कोर्ट ने 'प्रेम सिंह बनाम यूपी राज्य' और 'उदय प्रताप ठाकुर बनाम बिहार राज्य' मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। इन फैसलों में यह साफ़ किया गया था कि पिछली...

हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि यह रिट याचिका समय से पहले दायर की गई थी क्योंकि मामला अभी ज़मीन की पहचान करने के चरण में है। कोर्ट ने कहा कि जब वन भूमि को डी-रिज़र्व करने या उसे गैर-वन उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने का चरण आएगा, तब वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा 2 के तहत केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी की आवश्यकता होगी।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की डिवीज़न बेंच उस...

तलाकशुदा पुरुष से शादी करने वाली महिला तलाक के आदेश की पुष्टि न करने तक मेंटेनेंस का दावा नहीं कर सकती: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ बेंच ने कहा कि जो महिला जानबूझकर किसी ऐसे पुरुष से शादी करती है, जिसे वह तलाकशुदा मानती है, वह CrPC की धारा 125 के तहत गुजारा-भत्ते का दावा नहीं कर सकती, अगर उसने यह पुष्टि नहीं की कि तलाक का आदेश अंतिम हो चुका था या अपील में उस पर रोक (स्टे) लगी हुई।जस्टिस गीता के.बी. ने एक महिला की उस रिवीजन याचिका खारिज की, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसे गुजारा-भत्ता देने से इनकार कर दिया गया।कोर्ट ने कहा,"जब याचिकाकर्ता को यह पता चल जाता है कि...

वकील-क्लाइंट के रिश्ते का मतलब यह नहीं कि क्लाइंट यौन उत्पीड़न का आरोप नहीं लगा सकता: हाईकोर्ट का FIR रद्द करने से इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रैक्टिसिंग वकील के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। वकील पर अपनी पूर्व क्लाइंट के साथ रेप का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि वकील-क्लाइंट का रिश्ता होने का मतलब यह नहीं है कि FIR दर्ज होने के शुरुआती चरण में ही इन आरोपों को पूरी तरह असंभव मान लिया जाए। [2026 LiveLaw (MP) 354]यह देखते हुए कि "FIR खुद इसी रिश्ते के आधार पर दर्ज की गई और आरोप है कि कथित आपराधिक घटनाएं बाद में हुईं", जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा:"...यह तथ्य कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी नंबर 4 के बीच...

'सर तन से जुदा' नारा भारत की संप्रभुता को चुनौती, इसकी तुलना 'अल्लाह-हू-अकबर', 'जय श्री राम' से नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सितंबर 2025 में बरेली में हुई हिंसा के मामले में मौलाना तौकीर रज़ा खान की ज़मानत अर्ज़ी खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि "गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा" नारे की तुलना "नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर", "जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल", "जय श्री राम" या "हर हर महादेव" जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की बेंच ने कहा कि जहां ये नारे संबंधित भगवान या गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, वहीं "सर तन से जुदा" नारा "कानून के अधिकार के...

कमियां दूर होने पर फ़ूड बिज़नेस लाइसेंस का सस्पेंशन खत्म होना चाहिए, कानूनी लड़ाई के लिए मजबूर न करें: महाराष्ट्र FDA से हाईकोर्ट
महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंशन के मामलों से निपटने के तरीके को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया कि जब कोई प्रतिष्ठान, जिसका लाइसेंस अथॉरिटी ने सस्पेंड किया है, कमियों को दूर कर लेता है और ऑटो-जेनरेटेड रिपोर्ट नियमों का पालन दिखाती है तो अथॉरिटी को सस्पेंशन रद्द कर देना चाहिए।एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की डिवीज़न बेंच ने कहा कि FDA को ऐसे प्रतिष्ठानों को लाइसेंस सस्पेंशन के खिलाफ कोर्ट जाने के लिए...

CBSE On-Screen Marking: पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी शिकायतों के लिए छात्रों को अलग-अलग आवेदन करना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट, PIL खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) की PIL (जनहित याचिका) खारिज कर दी। इस याचिका में सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के नए शुरू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में "बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और कमियों" का आरोप लगाया गया।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि आंसर शीट के री-इवैल्यूएशन की मांग एक व्यक्तिगत मामला है, जिसे संबंधित छात्र उठा सकते हैं, लेकिन ऐसी मांग PIL के ज़रिए नहीं की जा सकती।कोर्ट ने कहा कि छात्र अपनी...

सत्य निकेतन PG हादसा: दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD से हाई-लेवल जांच और बचाव कार्य दोगुना करने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को अधिकारियों से कहा कि वे शहर के सत्य निकेतन इलाके में कल गिरी पांच मंजिला PG या हॉस्टल बिल्डिंग में फंसे छात्रों की जान बचाने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करें।खबरों के मुताबिक, इस हादसे में कई छात्रों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) की ओर से पेश हुए SGI तुषार मेहता के इस आश्वासन पर ध्यान दिया कि सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं और बचाव अभियान...

NSA Detention: नोएडा डीएम को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- 'तानाशाह' अफ़सर राज्य को 'ऑर्वेलियन डिस्टोपिया' बना देंगे
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ स्टूडेंट और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी (24) की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत रद्द करते हुए नोएडा के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) द्वारा हिरासत का आदेश जारी करने के तरीके की कड़ी आलोचना की।बेंच ने साफ़ तौर पर चेतावनी दी कि अगर अफ़सरशाही का 'तानाशाही' रवैया जारी रहा तो उत्तर प्रदेश एक "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" (एक ऐसी जगह जहां सरकार का पूरा नियंत्रण हो और लोगों की आज़ादी न हो) में बदल सकता है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की...

'खुफिया सुराग बरारी' पुलिस की सामान्य कोशिश, न कि NDPS Act की धारा 42 लागू करने वाली पहले से मिली कोई खास जानकारी: एचपी हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस डायरी एंट्री में इस्तेमाल किया गया शब्द "खुफिया सुराग बरारी" NDPS अपराध की किसी खास पहले से मिली जानकारी को नहीं दिखाता है, जिससे नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की धारा 42 का अनिवार्य पालन करना पड़े।कोर्ट ने कहा कि यह शब्द किसी खास इलाके में अपराध होने की संभावना के बारे में गुप्त जानकारी पाने के लिए पुलिस की सामान्य खोज या कोशिश को बताता है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा:"आवेदक की यह दलील...

CJP प्रदर्शनकारी पर हमला: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की गिरफ्तारी के खिलाफ स्वतंत्र भारद्वाज की याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (7 सितंबर) को स्वतंत्र भारद्वाज की 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका खारिज की। यह याचिका जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के एक किशोर कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के मामले में उनकी गिरफ्तारी से जुड़ी थी।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया।भारद्वाज के वकील ने दलील दी कि एक दिन की कस्टडी भी गैर-कानूनी है। वहीं, दिल्ली पुलिस के वकील संजय लाओ ने कहा कि पुलिस रिमांड एक दिन के लिए...

गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए, मोबाइल भी बिना जब्ती पंचनामा रखा; बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक 26 वर्षीय युवक की गिरफ्तारी को कानून की तय प्रक्रिया के खिलाफ मानते हुए महाराष्ट्र सरकार को उसे 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। युवक को पुलिस ने गिरफ्तार करते समय न तो गिरफ्तारी के आधार बताए थे और न ही उसे कानून के अनुसार उचित नोटिस दिया गया था।जस्टिस उर्मिला जोशी-फल्के और जस्टिस राज डी. वाकोडे की डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य के अधिकारियों द्वारा किसी व्यक्ति के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किए जाने पर हाईकोर्ट...

पत्नी की सरकारी नौकरी की जानकारी RTI में नहीं मिलेगी, जब तक सार्वजनिक हित का ठोस आधार न हो: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की सरकारी नौकरी से जुड़ी जानकारी RTI के तहत मांगने वाले व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस material नहीं है, जिससे यह साबित हो कि जानकारी के खुलासे में सार्वजनिक हित इतना महत्वपूर्ण है कि वह पत्नी के निजता के अधिकार पर भारी पड़े।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा कि अपीलकर्ता अपनी पत्नी की सरकारी नियुक्ति में कथित हेरफेर के आरोप को प्रथम दृष्टया साबित...

एक वकील और परिवार को अलग-अलग मामलों में 23 लाख से ज्यादा की सहायता, SC/ST Act के लाभों के दुरुपयोग की यूपी में जांच के आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 (SC/ST Act ) और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत मिलने वाली राहत और आर्थिक सहायता के दावों तथा वितरण की व्यापक जांच के निर्देश दिए। अदालत ने खास तौर पर एक ही व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों द्वारा बार-बार राहत का दावा किए जाने वाले मामलों की जांच और प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने को कहा।जस्टिस संतोष राय की बेंच ने यह निर्देश उस समय दिया जब अदालत के सामने राज्य सरकार ने बताया कि पेशे से वकील संतोष कुमार दोहरे और...

मुआवजा याचिका पूरी सुनवाई के बाद सिर्फ क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण पूरी सुनवाई कराने के बाद केवल क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र न होने के आधार पर मुआवजा याचिका खारिज नहीं कर सकता, खासकर तब जब किसी भी प्रतिवादी ने यह साबित न किया हो कि मामले की सुनवाई उस स्थान पर होने से उसे कोई नुकसान या पूर्वाग्रह हुआ।जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166(2) दुर्घटना पीड़ित को दावा दायर करने के लिए मंच चुनने का अधिकार देती है। याचिका उस क्षेत्र के अधिकरण में दायर की जा सकती है जहां दुर्घटना हुई,...

CJP प्रोटेस्ट के दौरान कथित तौर पर मानहानि वाली खबर दिखाने पर सुधीर चौधरी पर हुआ दर्ज
20 साल के एक्टिविस्ट और UPSC की तैयारी कर रहे छात्र ने पत्रकार सुधीर चौधरी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का केस दायर किया।यह केस चौधरी के उस ब्रॉडकास्ट को लेकर है जो 27 जुलाई को डी डी न्यूज़ पर उनके डेली प्राइम-टाइम शो डिकोड में दिखाया गया था।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने विजय शेरावत की ओर से दायर अंतरिम रोक की अर्जी पर नोटिस जारी किया और चौधरी व न्यूज़ चैनल से जवाब मांगा।शेरावत के वकील ने कोर्ट को बताया कि यह केस गलत पहचान बताने और वादी की मानहानि के लिए दायर किया गया। इस केस में...

दो साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या में मौत की सजा उम्रकैद में बदली, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो साल की बच्ची से गंभीर यौन हमला और हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने उसे कम से कम 25 वर्ष की वास्तविक उम्रकैद की सजा दी है, जिसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि मानव जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है और किसी व्यक्ति का जीवन आसानी से नहीं छीना जाना चाहिए। अदालत ने आरोपी की उम्र, उसका कोई...

जाति साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज न होने भर से SC-ST को संवैधानिक लाभ से वंचित नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) का सदस्य अपनी जातीय पहचान साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाया केवल इस आधार पर उसे संविधान के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके लिए राज्य को उसके दावे के विपरीत ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य पेश करना होगा।डॉ. जस्टिस ए.के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए.के. की डिवीजन बेंच ने कहा कि केरल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सामुदायिक प्रमाणपत्र जारी करने के विनियमन अधिनियम 1996 के तहत जाति दावों की जांच...
