हाईकोर्ट

प्रतिनिधित्व का पुनर्गठन या संघवाद को कमज़ोर करना? संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 पर एक आलोचनात्मक दृष्टि
प्रतिनिधित्व का पुनर्गठन या संघवाद को कमज़ोर करना? संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 पर एक आलोचनात्मक दृष्टि

भारत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की शुरुआत के साथ एक संवैधानिक चौराहे पर खड़ा है, एक ऐसा प्रस्ताव जो न केवल लोकसभा को 850 सीटों तक विस्तारित करने का बल्कि भारत में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के व्याकरण को फिर से कैलिब्रेट करने का प्रयास करता है। जबकि घोषित उद्देश्य जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं के साथ प्रतिनिधित्व को अधिक निकटता से संरेखित करना है, संशोधन एक मूलभूत सवाल उठाता है - क्या केवल संख्यात्मक समानता ही एक ऐसे संविधान में लोकतांत्रिक वैधता को परिभाषित कर सकती है जो संघीय संतुलन के लिए...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थारू समुदाय को दी राहत, कहा- वन अधिकार अधिनियम मौजूदा अधिकारों को मान्यता देता है, पिछले अदालती आदेशों को रद्द करता है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थारू समुदाय को दी राहत, कहा- वन अधिकार अधिनियम मौजूदा अधिकारों को मान्यता देता है, पिछले अदालती आदेशों को रद्द करता है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अधिकारी वन अधिकार अधिनियम, 2006 के लागू होने से पहले जारी किए गए अदालती आदेशों पर आँख मूंदकर भरोसा करके जंगल में रहने वालों के मौजूदा कानूनी अधिकारों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने इस तरह लखीमपुर की ज़िला स्तरीय समिति द्वारा 2021 में पारित आदेश रद्द किया। इस आदेश में समिति ने 'थारू' समुदाय के 107 सदस्यों के वन अधिकारों - विशेष रूप से अपनी आजीविका के लिए छोटे वन उत्पादों को इकट्ठा करने और उनका उपयोग...

गौवध जीवन की सामान्य गति को बाधित करता है, स्वतः ही हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत हिरासत को सही ठहराया
गौवध 'जीवन की सामान्य गति' को बाधित करता है, स्वतः ही हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत हिरासत को सही ठहराया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत व्यक्ति की हिरासत को सही ठहराया। इस व्यक्ति पर 2025 में होली के समय के आसपास जंगल में एक गाय और दो बछड़ों की हत्या करने का आरोप है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि गाय की हत्या स्वतः ही तीव्र भावनाएं और हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है, क्योंकि इससे समाज के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को स्पष्ट रूप से ठेस पहुंचती है।कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे कृत्य के समाज में तत्काल और व्यापक परिणाम...

BREAKING | अरविंद केजरीवाल के मामले की सुनवाई से नहीं हटेंगी जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, याचिका खारिज
BREAKING | अरविंद केजरीवाल के मामले की सुनवाई से नहीं हटेंगी जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, याचिका खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों द्वारा दायर उन अर्जियों को खारिज किया, जिनमें शराब नीति मामले की सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने की मांग की गई थी।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने टिप्पणी की कि सिर्फ इसलिए कि उनके बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं, यह नहीं माना जा सकता कि उनके मन में केजरीवाल के प्रति कोई पूर्वाग्रह है।जज ने आगे कहा कि किसी राजनेता को न्यायिक क्षमता का आकलन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।"किसी जज की क्षमता का...

व्यभिचार साबित करने के लिए DNA टेस्ट का आदेश आम तौर पर नहीं दिया जा सकता, बच्चे की वैधता की धारणा ही मान्य होनी चाहिए: उत्तराखंड हाईकोर्ट
व्यभिचार साबित करने के लिए DNA टेस्ट का आदेश आम तौर पर नहीं दिया जा सकता, बच्चे की वैधता की धारणा ही मान्य होनी चाहिए: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि व्यभिचार के आरोपों को साबित करने के लिए किसी बच्चे के DNA टेस्ट का आदेश आम तौर पर नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 के तहत बच्चे की वैधता की कानूनी धारणा को चुनौती देने के लिए कोई दलीलें या सबूत मौजूद न हों।कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना किसी ठोस आधार के ऐसे टेस्ट की अनुमति देना एक वैध विवाह से जन्मे बच्चे को प्राप्त कानूनी सुरक्षा को कमज़ोर करेगा और बच्चे की गरिमा और निजता में अनावश्यक दखल माना जाएगा। इसी आधार पर कोर्ट ने वैवाहिक...

अगर आप पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा सकते तो शादी ही न करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब आर्थिक हालत का हवाला देकर पति की अर्जी खारिज की
अगर आप पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा सकते तो शादी ही न करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब आर्थिक हालत का हवाला देकर पति की अर्जी खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि जो पुरुष यह महसूस करते हैं कि अगर शादीशुदा ज़िंदगी में खटास आ जाए तो वे पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा पाएंगे, उन्हें तो शुरू में शादी ही नहीं करनी चाहिए।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने आगे कहा कि कोई भी पुरुष अपनी पत्नी के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए अपनी खराब आर्थिक हालत का बहाना नहीं बना सकता।हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया,"एक बार जब कोई पुरुष किसी महिला से शादी कर लेता है तो कानून के तहत उसका भरण-पोषण करना उसकी...

राहुल गांधी नागरिकता विवाद: अदालत की छवि धूमिल- सोशल मीडिया पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, जज ने खुद को किया अलग
राहुल गांधी नागरिकता विवाद: 'अदालत की छवि धूमिल'- सोशल मीडिया पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, जज ने खुद को किया अलग

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने सोमवार को भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर द्वारा दायर उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग (recuse) कर लिया, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। यह निर्णय तब आया जब अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया और मीडिया में दिए गए बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिन्हें अदालत ने अपनी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया।सुनवाई के दौरान जस्टिस विद्यार्थी ने मौखिक रूप से...

नाबालिग बच्चे का भरण-पोषण टाल नहीं सकता पिता, मां की आय या कर्ज का बहाना स्वीकार नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
नाबालिग बच्चे का भरण-पोषण टाल नहीं सकता पिता, मां की आय या कर्ज का बहाना स्वीकार नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि पिता अपने नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से यह कहकर बच नहीं सकता कि मां भी कमाती है या उस पर कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे के भरण-पोषण का दायित्व सर्वोच्च है और स्वेच्छा से लिए गए वित्तीय बोझ इस जिम्मेदारी को कम नहीं कर सकते।जस्टिस आशीष नैथानी ने रुड़की फैमिली कोर्ट केा आदेश बरकरार रखा, जिसमें पिता को नाबालिग बच्चे के लिए प्रति माह 8,000 रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।मामला...

पासपोर्ट विवाद: पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
पासपोर्ट विवाद: पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज FIR के मामले में अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की वेबसाइट के अनुसार यह याचिका सोमवार 20 अप्रैल को दाखिल की गई।यह मामला कथित तौर पर कई पासपोर्ट रखने के आरोपों से जुड़ा है। इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी और उन्हें संबंधित न्यायालय में जाने की अनुमति दी थी। यह याचिका हैदराबाद में दायर की गई, जहां...

MCOCA मामले में पूर्व AAP MLA नरेश बाल्यान की जमानत याचिका से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग किया
MCOCA मामले में पूर्व AAP MLA नरेश बाल्यान की जमानत याचिका से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग किया

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग (recuse) कर लिया। यह याचिका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत दर्ज एक मामले में दायर की गई थी, जो कथित संगठित अपराध से जुड़ा है। न्यायमूर्ति शर्मा ने बिना कोई कारण बताए मामले से स्वयं को अलग किया और अब यह याचिका 23 अप्रैल को किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी।इससे पहले, जनवरी में एक समन्वय पीठ ने बाल्यान को कस्टडी...

मृतक की आय में HRA व अन्य भत्ते भी शामिल होंगे, मुआवजा गणना में कटौती गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
मृतक की आय में HRA व अन्य भत्ते भी शामिल होंगे, मुआवजा गणना में कटौती गलत: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा तय करने को लेकर अहम स्पष्टता देते हुए कहा कि मृतक की आय में मिलने वाले विभिन्न भत्तों को हटाकर गणना नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च दायित्व भत्ता, शहर प्रतिकर भत्ता, मकान किराया भत्ता (HRA), धुलाई भत्ता सहित अन्य भत्ते मृतक की आय का हिस्सा हैं और इन्हें घटाना कानूनन सही नहीं है।जस्टिस संदीप तनेजा की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला कोर्ट द्वारा इन भत्तों को हटाकर मुआवजा तय करना उचित नहीं है।कोर्ट ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट...

परिवार पेंशनभोगी को आश्रित बताकर मेडिकल प्रतिपूर्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
परिवार पेंशनभोगी को 'आश्रित' बताकर मेडिकल प्रतिपूर्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि परिवार पेंशन पाने वाले व्यक्ति को आश्रित मानकर मेडिकल प्रतिपूर्ति (मेडिकल रिइम्बर्समेंट) से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर जब वह अपने स्वतंत्र अधिकार के रूप में इस लाभ का दावा कर रहा हो। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने किसी परिवार पेंशनभोगी को स्वास्थ्य योजना का लाभ दिया और उससे नियमित अंशदान भी लिया जा रहा है, तो बाद में आयु सीमा का हवाला देकर दावा खारिज करना अनुचित है।जस्टिस पंकज पुरोहित ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह...

जस्टिस एसके के बच्चों के सरकारी संबंधों पर टकराव का सवाल: केजरीवाल की दलील पर हाईकोर्ट ने जवाब किया रिकॉर्ड
जस्टिस एसके के बच्चों के सरकारी संबंधों पर टकराव का सवाल: केजरीवाल की दलील पर हाईकोर्ट ने जवाब किया रिकॉर्ड

दिल्ली हाईकोर्ट में आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ पक्षपात की आशंका को लेकर अपनी दलील दोहराई। उन्होंने कहा कि जस्टिस के बच्चों के केंद्र सरकार से सक्रिय पेशेवर संबंध हैं जिससे हितों के टकराव का प्रश्न उठता है।मामला शराब नीति प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसी की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस शर्मा के अलग होने की मांग की गई। केजरीवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर अपनी जवाबी दलील को रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध किया।सॉलिसिटर...

आउटसोर्स कर्मचारी को विभाग सीधे नहीं कर सकता बर्खास्त: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला
आउटसोर्स कर्मचारी को विभाग सीधे नहीं कर सकता बर्खास्त: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी विभाग में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी को विभाग स्वयं सीधे बर्खास्त नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में विभाग केवल संबंधित एजेंसी को कार्रवाई के लिए अनुशंसा कर सकता है।जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण की पीठ यह मामला सुन रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता पंचायत राज विभाग के राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत ई-गवर्नेंस में राज्य समन्वयक के रूप में कार्यरत था। उसकी नियुक्ति एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से हुई थी लेकिन विभाग ने सीधे उसके सेवाएं...

FIR दर्ज किए बिना भी मजिस्ट्रेट ले सकते हैं पुलिस की मदद: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार क्षेत्र
FIR दर्ज किए बिना भी मजिस्ट्रेट ले सकते हैं पुलिस की मदद: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार क्षेत्र

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट किसी शिकायत पर सीधे FIR दर्ज कराने का आदेश दिए बिना भी पुलिस या अन्य सक्षम अधिकारी से जांच करा सकते हैं। अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 225 के तहत यह जांच केवल मजिस्ट्रेट की सहायता के लिए होती है, न कि पूर्ण पुलिस जांच का विकल्प।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि धारा 225 के अंतर्गत की जाने वाली जांच सीमित और प्रारंभिक प्रकृति की होती है, जिसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि आरोपी के खिलाफ आगे कार्यवाही के लिए पर्याप्त...

गिरफ्तारी वही मानी जाएगी जब स्वतंत्रता छीनी जाए, न कि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज समय से: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
गिरफ्तारी वही मानी जाएगी जब स्वतंत्रता छीनी जाए, न कि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज समय से: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी उस समय से मानी जाएगी, जब उसकी स्वतंत्रता वास्तव में सीमित हो जाती है न कि जब पुलिस अपने रिकॉर्ड में गिरफ्तारी का समय दर्ज करती है। अदालत ने कहा कि पुलिस दस्तावेजों में दर्ज समय अंतिम प्रमाण नहीं है बल्कि असली कसौटी यह है कि व्यक्ति की आवाजाही की स्वतंत्रता कब रोकी गई।जस्टिस सुमीत गोयल इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता अनुज कुमार सिंह ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए रिहाई की मांग की। उनका...

बिहार में RTI लंबित मामलों पर सुनवाई टली, हाईकोर्ट ने कहा- मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन
बिहार में RTI लंबित मामलों पर सुनवाई टली, हाईकोर्ट ने कहा- मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन

पटना हाईकोर्ट ने बिहार में RTI आवेदनों और अपीलों के भारी लंबित मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर फिलहाल सुनवाई टाल दी। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई कि सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए अदालत लगातार निगरानी का आदेश दे।याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि दिसंबर, 2024 तक बिहार राज्य सूचना आयोग में 28 हजार...

बीमारी की पर्ची विवाद में वकील को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹20K का जुर्माना माफ किया, माफी के बाद प्रतिकूल टिप्पणियां हटाईं
'बीमारी की पर्ची' विवाद में वकील को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹20K का जुर्माना माफ किया, माफी के बाद प्रतिकूल टिप्पणियां हटाईं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक वकील के ख़िलाफ़ पहले की गई अपनी प्रतिकूल टिप्पणियां हटा दीं। इस वकील ने उसी दिन किसी दूसरी कोर्ट में अन्य मामले में पेश होते हुए इस कोर्ट में 'बीमारी की पर्ची' भेजकर कोर्ट को धोखा देने की कोशिश की थी।वकील द्वारा दी गई बिना शर्त मौखिक माफी स्वीकार करते हुए जस्टिस गौतम चौधरी की बेंच ने 24 मार्च, 2026 को पारित आदेश में वकील पर लगाए गए ₹20,000/- के जुर्माने को भी माफ किया।हाईकोर्ट के 17 अप्रैल के आदेश में कहा गया,"वर्तमान संशोधन आवेदन के समर्थन में दायर हलफनामे...