हाईकोर्ट

एक ही FIR से जुड़ी अगली ज़मानत अर्जियों की सुनवाई आम तौर पर उसी जज को करनी चाहिए, जिसने पिछली ज़मानत अर्जी खारिज की थी: दिल्ली हाईकोर्ट
एक ही FIR से जुड़ी अगली ज़मानत अर्जियों की सुनवाई आम तौर पर उसी जज को करनी चाहिए, जिसने पिछली ज़मानत अर्जी खारिज की थी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को यह टिप्पणी की कि एक ही FIR से जुड़ी अगली ज़मानत अर्जियों को आम तौर पर उसी जज के सामने लिस्ट किया जाना चाहिए, जिसने पिछली ज़मानत अर्जी खारिज की थी, ताकि आपस में टकराने वाले या असंगत आदेशों से बचा जा सके।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,"इस कोर्ट की रजिस्ट्री माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार काम करने के लिए बाध्य है। कानून की उपरोक्त स्थिति का पालन करते हुए ही, एक ही FIR से जुड़े मामले—खास तौर पर ज़मानत मांगने वाली अर्जियां, चाहे वे अग्रिम ज़मानत के...

Google और MeitY ने कर्नाटक हाईकोर्ट में श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट के जज की रिट याचिका की सुनवाई योग्यता पर उठाया सवाल
Google और MeitY ने कर्नाटक हाईकोर्ट में श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट के जज की रिट याचिका की सुनवाई योग्यता पर उठाया सवाल

Google और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कर्नाटक हाईकोर्ट में श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अहमद नवाज़ द्वारा दायर रिट याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया। इस याचिका में उन्होंने अपने खिलाफ प्रकाशित कुछ ऑनलाइन लेखों को हटाने की मांग की थी।उन्होंने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) के आधार पर याचिका पर सवाल उठाया।Google LLC की ओर से पेश वकील एडवोकेट मनु पी कुलकर्णी ने दलील दी:“यह याचिका यहां क्यों दायर की गई, योर लॉर्डशिप? यह स्वीकार्य नहीं है।...

जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाली मानहानिकारक कंटेंट हटाने की मांग: केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट
जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाली 'मानहानिकारक' कंटेंट हटाने की मांग: केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी देकर मांग की कि अमेरिकी फाइनेंसर और बच्चों के यौन शोषण के दोषी जेफरी एपस्टीन से उन्हें जोड़ने वाली कथित तौर पर मानहानिकारक सामग्री और पोस्ट को दुनिया भर से हटा दिया जाए।हिमायनी पुरी ने 10 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया, जिसमें उन्होंने 'जॉन डो' (अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ) आदेश की मांग की ताकि उस सामग्री को हटाया जा सके। उनके अनुसार, विभिन्न प्रतिवादियों ने कई डिजिटल, सोशल मीडिया और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म पर उनके बारे में...

क्या जांच कर रहे हैं हमें नहीं पता, लेकिन कानून की प्रक्रिया का पालन करें: कथित अवैध हिरासत मामले में दिल्ली हाइकोर्ट की पुलिस को नसीहत
क्या जांच कर रहे हैं हमें नहीं पता, लेकिन कानून की प्रक्रिया का पालन करें: कथित अवैध हिरासत मामले में दिल्ली हाइकोर्ट की पुलिस को नसीहत

दिल्ली हाइकोर्ट ने कथित अवैध हिरासत के आरोप लगाने वाले 10 एक्टिविस्ट से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस को कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की नसीहत दी। अदालत ने कहा कि पुलिस क्या जांच कर रही है, यह अदालत को भले न पता हो लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ कार्यकर्ता रुद्र विक्रम के परिजनों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट जसदीप ढिल्लों ने अदालत को बताया कि पुलिस ने पहले कहा कि...

अदालत में गर्भपात हुए भ्रूण को लाकर सहानुभूति लेने की कोशिश अत्यंत अनुचित: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अदालत में गर्भपात हुए भ्रूण को लाकर सहानुभूति लेने की कोशिश अत्यंत अनुचित: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत में गर्भपात हुए भ्रूण को लाकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करने वाले याचिकाकर्ता की याचिका खारिज करते हुए कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि इस प्रकार का आचरण आपत्तिजनक, अनुचित है और इससे अदालत की गरिमा और मर्यादा कम होती है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने कहा,“याचिकाकर्ता ने कार्यवाही के दौरान अदालत के मंच के सामने भ्रूण रख दिया, जिससे स्पष्ट है कि वह अदालत की सहानुभूति प्राप्त करना चाहता था। यह कृत्य अत्यंत आपत्तिजनक और अनुचित है। अदालत की कार्यवाही को भावनात्मक...

क्या हिंदुओं को भी घर में सामूहिक पूजा से रोका जा सकता है?: नमाज़ पर कथित रोक को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा
क्या हिंदुओं को भी घर में सामूहिक पूजा से रोका जा सकता है?: नमाज़ पर कथित रोक को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रमज़ान के दौरान नमाज़ पर कथित प्रतिबंध को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से कड़ा सवाल करते हुए पूछा कि यदि मुसलमानों को निजी संपत्ति पर नमाज़ पढ़ने से रोका जा सकता है तो क्या हिंदुओं को भी अपने घरों में सामूहिक पूजा करने से रोका जा सकता है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ संभल जिले में रमज़ान के दौरान नमाज़ पढ़ने पर लगाए गए कथित प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान जस्टिस श्रीधरन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,“मुसलमानों को...

प्रिया रमानी मानहानि मामला: एम.जे. अकबर की अपील पर 24 सितंबर को अंतिम सुनवाई करेगा दिल्ली हाइकोर्ट
प्रिया रमानी मानहानि मामला: एम.जे. अकबर की अपील पर 24 सितंबर को अंतिम सुनवाई करेगा दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एम.जे. अकबर द्वारा पत्रकार प्रिया रमानी की बरी होने के खिलाफ दायर अपील को अंतिम सुनवाई के लिए 24 सितंबर को सूचीबद्ध किया। यह मामला उन यौन उत्पीड़न आरोपों से जुड़ा है, जो प्रिया रमानी ने 'मीटू' अभियान के दौरान लगाए।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड प्राप्त हो चुका है और दोनों पक्षों की लिखित दलीलें भी दाखिल की गईं।अदालत ने कहा,“मामले को अंतिम सुनवाई के लिए अगली तारीख पर सूचीबद्ध किया जाए।” यह अपील...

बालिग महिला अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र, माता-पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज: आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट
बालिग महिला अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र, माता-पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज: आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट ने दोहराया कि यदि महिला बालिग है तो उसे अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का पूरा अधिकार है।अदालत ने माता-पिता द्वारा अपनी बेटी को वापस दिलाने के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज की।जस्टिस चीकाटी मानवेंद्रनाथ रॉय और जस्टिस तुहिन कुमार गेदेला की खंडपीठ ने कहा कि जब महिला ने अपनी इच्छा से विवाह किया है और पति के साथ रहने का निर्णय लिया है तो इसे अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता।अदालत ने कहा,“चूंकि वह बालिग है और अपनी इच्छा से प्रतिवादी नंबर 7 से विवाह कर चुकी है तथा उसके...

आंगनवाड़ी सहायिका को कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति में प्राथमिक अधिकार, ट्रांसफर से नहीं छीना जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
आंगनवाड़ी सहायिका को कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति में प्राथमिक अधिकार, ट्रांसफर से नहीं छीना जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि किसी आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता का पद खाली होने पर वहां कार्यरत आंगनवाड़ी सहायिका को पदोन्नति के लिए प्राथमिक अधिकार होता है। विवाह के आधार पर किए गए स्थानांतरण से इस अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि विवाह के आधार पर स्थानांतरण का प्रावधान केवल अनुशंसात्मक है अनिवार्य नहीं। इसलिए इससे सहायिका के पदोन्नति के अधिकार को प्रभावित नहीं किया...

फीस बकाया होने के आधार पर छात्रों के मूल प्रमाणपत्र रोकना अवैध: तेलंगाना हाईकोर्ट
फीस बकाया होने के आधार पर छात्रों के मूल प्रमाणपत्र रोकना अवैध: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि शैक्षणिक संस्थान केवल फीस बकाया होने के आधार पर छात्रों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र रोक नहीं सकते, क्योंकि ये प्रमाणपत्र छात्र की संपत्ति होते हैं और उन्हें बकाया वसूली के लिए दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।जस्टिस सुरेपल्ली नंदा की एकल पीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी भी बहाने से छात्र के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र (मार्कशीट और डिग्री प्रमाणपत्र सहित) अपने पास नहीं रख सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि फीस बकाया है तो संस्थान को उसकी वसूली के...

दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया को जवाब दाखिल करने के लिए दिया समय, CBI की याचिका पर दो हफ्ते बाद होगी सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया को जवाब दाखिल करने के लिए दिया समय, CBI की याचिका पर दो हफ्ते बाद होगी सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (16 मार्च) को आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें दिए गए डिस्चार्ज को चुनौती दी गई है।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या प्रतिवादी जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहते हैं। इस पर केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने बताया कि...

बीमार कर्मचारी के प्रति संवेदनशील रहें बैंक, ट्रांसफर नियमों को कठोरता से लागू न करें: हाइकोर्ट
बीमार कर्मचारी के प्रति संवेदनशील रहें बैंक, ट्रांसफर नियमों को कठोरता से लागू न करें: हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बैंकों को अपने कर्मचारियों की मेडिकल स्थिति को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील और व्यावहारिक रवैया अपनाना चाहिए। केवल प्रशासनिक सर्कुलर का कठोर पालन करते हुए कर्मचारियों का तबादला करना उचित नहीं है।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने भारतीय स्टेट बैंक के एक कर्मचारी का तबादला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।कर्मचारी का तबादला जयपुर से हैदराबाद कर दिया गया, जबकि वह गंभीर बीमारी से पीड़ित था।याचिकाकर्ता...

रिश्तेदार की वैवाहिक घर में महज़ मौजूदगी या निष्क्रिय पारिवारिक जुड़ाव IPC की धारा 498A के तहत कार्रवाई का आधार नहीं बन सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
रिश्तेदार की वैवाहिक घर में महज़ मौजूदगी या निष्क्रिय पारिवारिक जुड़ाव IPC की धारा 498A के तहत कार्रवाई का आधार नहीं बन सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

एक शादीशुदा व्यक्ति के परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ IPC की धारा 498-A के तहत जारी समन रद्द करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी रिश्तेदार की वैवाहिक घर में महज़ मौजूदगी के आधार पर आपराधिक दायित्व नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब क्रूरता के आरोपों में उन परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट आरोप न हो।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने राय दी कि अपराध का संबंध जानबूझकर किए गए आचरण से होता है, न कि निष्क्रिय पारिवारिक जुड़ाव से। IPC की धारा 498-A के तहत आने वाले अपराधों में पति...

क्रॉसफायर में बच्चे: सशस्त्र संघर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय कानून और बाल अधिकार
क्रॉसफायर में बच्चे: सशस्त्र संघर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय कानून और बाल अधिकार

28 फरवरी 2026 को, जैसे ही अमेरिका-इजरायल हमलों के प्रारंभिक साल्वो ने दक्षिणी ईरान पर हमला किया, मिनाब में शजारेह तैयबेह लड़कियों का प्राथमिक विद्यालय, निर्दोषता का कब्रिस्तान बन गया। एक सटीक-निर्देशित गोला-बारूद, जिसका फोरेंसिक साक्ष्य भारी रूप से एक अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल को इंगित करता है, ने गुलाबी फूलों वाले कंक्रीट भवन को नष्ट कर दिया, जब कक्षाएं सत्र में थीं, एक ऐसी जगह जो निर्दोष लड़कियों को ज्ञान प्रदान करने के लिए थी, कुछ ही सेकंड में पूरी तरह से तबाही का दृश्य बन गई। मलबे से भयभीत...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बाल पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार पैरवी की, कहा- POCSO मामलों में बार-बार बुलाने से उन्हें मानसिक आघात पहुंचता है
दिल्ली हाईकोर्ट ने बाल पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार पैरवी की, कहा- POCSO मामलों में बार-बार बुलाने से उन्हें मानसिक आघात पहुंचता है

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बाल पीड़ितों और अन्य कमज़ोर गवाहों को ट्रायल की कार्यवाही के दौरान बार-बार नहीं बुलाया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया खुद यौन अपराधों के पीड़ितों के लिए और ज़्यादा मानसिक आघात का कारण नहीं बननी चाहिए।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि जहां एक तरफ पीड़ित को ज़मानत दिए जाने पर अपनी आपत्तियां रखने का मौका दिया जाना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ, जब आरोपी की ज़मानत याचिका के संबंध में उसके विचार दर्ज कर लिए जाएं तो उसकी बार-बार मौजूदगी पर ज़ोर नहीं...

गैर-कानूनी हिरासत का दावा करने वाले एक्टिविस्ट को FIR की कॉपी नहीं दे सकते: दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट से कहा
गैर-कानूनी हिरासत का दावा करने वाले एक्टिविस्ट को FIR की कॉपी नहीं दे सकते: दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट से कहा

दिल्ली पुलिस ने रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वे उन अलग-अलग एक्टिविस्ट के खिलाफ दर्ज FIR की कॉपी नहीं दे सकते, जिन्होंने दावा किया कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने रविवार को एक स्पेशल सुनवाई की और एहसानुल हक, राजबीर और सागरिका राजोरा द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता एहसानुल हक की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि स्थिति "चिंताजनक" है।...