हाईकोर्ट

राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर
राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में रिट याचिका दायर की गई, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की गई।यह याचिका वकील अशोक पांडे और डेंटिस्ट रजनीश कुमार सिंह ने दायर की। याचिका में राहुल गांधी के लोकसभा चुनाव को भी चुनौती दी गई और उनके खिलाफ 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट जारी करने की मांग की गई। इसके ज़रिए रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद के तौर पर काम करने के उनके अधिकार पर सवाल उठाया गया।इस मामले की सुनवाई मंगलवार को जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश...

OCI कार्ड मामले में सिद्धार्थ वरदराजन को दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार, जमानत शर्तें छिपाने पर केंद्र को जवाब दाखिल करने का समय
OCI कार्ड मामले में सिद्धार्थ वरदराजन को दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार, जमानत शर्तें छिपाने पर केंद्र को जवाब दाखिल करने का समय

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन की ओसीआई कार्ड से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया। यह मामला उस हलफनामे से जुड़ा है, जिसमें वरदराजन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उन पर लगाई गई जमानत शर्तों का खुलासा नहीं करने को लेकर अपना पक्ष रखा है।सिद्धार्थ वरदराजन ने केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनके पीआईओ (भारतीय मूल व्यक्ति) कार्ड को ओसीआई (भारत का विदेशी नागरिक) कार्ड में बदलने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया...

फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में नागरिकता साबित करने की पूरी जिम्मेदारी व्यक्ति की, सिर्फ मौखिक दावे पर्याप्त नहीं : गुवाहाटी हाईकोर्ट
फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में नागरिकता साबित करने की पूरी जिम्मेदारी व्यक्ति की, सिर्फ मौखिक दावे पर्याप्त नहीं : गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा है कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के समक्ष नागरिकता साबित करने का पूरा भार संबंधित व्यक्ति (प्रोसीडी) पर होता है और इसे केवल अस्पष्ट दलीलों, विरोधाभासी वोटर लिस्ट या बिना प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर पूरा नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस प्रांजल दास की खंडपीठ डाबिर रहमान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में वर्ष 2018 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसे 25 मार्च 1971 के बाद भारत आया विदेशी घोषित किया गया...

Twisha Sharma Dowry Death Case: सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा हाईकोर्ट
Twisha Sharma Dowry Death Case: सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (25 मई) को त्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह से कथित दहेज हत्या मामले में उन्हें दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा।जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल जज बेंच ने पीड़ित के माता-पिता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा (जिनके साथ एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव भी हैं) की दलीलें सुनीं। लूथरा ने याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की मांग की।लूथरा ने कोर्ट को बताया कि दो संबंधित मामले सूचीबद्ध हैं- एक राज्य सरकार द्वारा दायर और दूसरा पीड़ित के...

किशोरावस्था के आपराधिक मामले नौकरी में बाधा नहीं बन सकते : इलाहाबाद हाईकोर्ट
किशोरावस्था के आपराधिक मामले नौकरी में बाधा नहीं बन सकते : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किशोरावस्था में किए गए अपराध में दोषसिद्धि या ऐसे मामले की लंबित सुनवाई किसी व्यक्ति को वयस्क होने पर नौकरी पाने से अयोग्य नहीं ठहरा सकती। कोर्ट ने कहा कि लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को रोजगार से वंचित करना उसके जीवन और आजीविका पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य यह...

जजों को निशाना बनाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, बंगाल पुलिस से मांगी SOP की जानकारी
जजों को निशाना बनाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, बंगाल पुलिस से मांगी SOP की जानकारी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों और न्यायिक कार्यवाही को निशाना बनाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स पर गंभीर चिंता जताते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या राज्य पुलिस के पास ऐसे आपत्तिजनक और मानहानिकारक सोशल मीडिया कंटेंट से निपटने के लिए कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) मौजूद है।जस्टिस जय सेनगुप्ता ने 21 मई 2026 को स्वामी प्रदीप्तानंद उर्फ कार्तिक महाराज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में कुछ यूट्यूब वीडियो...

आय से अधिक संपत्ति मामले में FIR से पहले स्पष्टीकरण मांगना जरूरी नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
आय से अधिक संपत्ति मामले में FIR से पहले स्पष्टीकरण मांगना जरूरी नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी लोक सेवक को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पहले कथित आय से अधिक संपत्ति का स्पष्टीकरण देने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले आरोपी से जवाब मांगना कानूनन आवश्यक नहीं है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत एफआईआर...

केंद्र सरकार के जगह खाली करने के निर्देश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा जिमखाना क्लब, कल होगी सुनवाई
केंद्र सरकार के 'जगह खाली करने' के निर्देश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा जिमखाना क्लब, कल होगी सुनवाई

प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में उन्होंने केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें क्लब को लुटियंस दिल्ली में स्थित अपनी 27.3 एकड़ की जगह 5 जून तक खाली करने का निर्देश दिया गया।सोमवार (25 मई) को सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस अवनीश झिंगन की बेंच के सामने इस मामले का ज़िक्र किया और इसकी तत्काल सुनवाई की मांग की। इस मामले की सुनवाई कल (26 मई) होगी।केंद्र सरकार ने दावा किया है कि ज़मीन का यह टुकड़ा दिल्ली के एक बेहद...

स्थायी रूप से दिव्यांग कर्मचारियों के परिजनों के लिए अनुकंपा नियुक्ति लागू, भले ही दुर्घटना नियमों के लागू होने से पहले हुई हो: राजस्थान हाईकोर्ट
स्थायी रूप से दिव्यांग कर्मचारियों के परिजनों के लिए अनुकंपा नियुक्ति लागू, भले ही दुर्घटना नियमों के लागू होने से पहले हुई हो: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि 'राजस्थान स्थायी पूर्ण विकलांग सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति नियम, 2023' के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन पर विचार करते समय दुर्घटना की तारीख का कोई महत्व नहीं है, बशर्ते नियमों के लागू होने की तारीख पर स्थायी पूर्ण विकलांगता की स्थिति मौजूद हो।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने टिप्पणी की कि यह नियम ऐसे मामलों पर विचार करने से मना नहीं करता, जिनमें स्थायी पूर्ण विकलांगता का कारण बनी दुर्घटना, नियमों के लागू होने की तारीख से पहले हुई...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किए कानपुर बम ब्लास्ट और राज नारायण-इंदिरा गांधी केस के हिंदी अनुवादित ऐतिहासिक फैसले
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किए कानपुर बम ब्लास्ट और राज नारायण-इंदिरा गांधी केस के हिंदी अनुवादित ऐतिहासिक फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी ऐतिहासिक निर्णय श्रृंखला के चौथे और पांचवें संस्करण के तहत दो महत्वपूर्ण मामलों के हिंदी अनुवाद ई-पुस्तिका स्वरूप में जारी किए हैं। इनमें स्वतंत्रता पूर्व कानपुर बम विस्फोट प्रकरण और ऐतिहासिक राज नारायण बनाम इंदिरा नेहरू गांधी मामले में पारित फैसले शामिल हैं। इन ई-पुस्तिकाओं का लोकार्पण 20 मई 2026 को ए-आई असिस्टेड लीगल एडवाइजरी, ई-एएचसीआर और आईएलआर समिति द्वारा किया गया।चौथे संस्करण में 15 मार्च 1946 को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कानपुर बम विस्फोट मामले में दिए गए फैसले...

पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट की शर्तें पूरी न होने तक कर्मचारी को नौकरी से निकालने पर ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं की जा सकती: एमपी हाईकोर्ट
'पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट' की शर्तें पूरी न होने तक कर्मचारी को नौकरी से निकालने पर ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं की जा सकती: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ नौकरी से निकाल देने भर से ग्रेच्युटी अपने-आप ज़ब्त नहीं हो जाती, जब तक कि एक्ट के तहत तय कानूनी शर्तें पूरी न हो जाएं।कोर्ट ने सेंट्रल एमपी ग्रामीण बैंक की तरफ़ से दायर अपील भी खारिज की। इस अपील में बैंक ने सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बैंक को निर्देश दिया गया कि वह एक मृत कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी का भुगतान करे। उस कर्मचारी को पैसों के गबन के आरोपों के चलते नौकरी से निकाल दिया गया।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की...

राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व विधायकों की पेंशन की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया, 1956 के कानून को चुनौती देने वाली PIL खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व विधायकों की पेंशन की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया, 1956 के कानून को चुनौती देने वाली PIL खारिज की

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान विधानसभा (अधिकारियों और सदस्यों का वेतन, भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1956 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। यह याचिका इस आधार पर दी गई थी कि यह अधिनियम पूर्व विधायकों ("MLAs") को पेंशन लाभ प्रदान करता है।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की कि संविधान में पूर्व विधायकों को पेंशन देने के खिलाफ किसी 'निहित रोक' को समझने की याचिकाकर्ता की व्याख्या सही नहीं थी। किसी भी स्पष्ट संवैधानिक सीमा के अभाव...

कैसे भारत के श्रम कानून AI कंटेंट मॉडरेशन के पीछे काम करने वाले श्रमिकों की रक्षा करने में विफल रहे?
कैसे भारत के श्रम कानून AI कंटेंट मॉडरेशन के पीछे काम करने वाले श्रमिकों की रक्षा करने में विफल रहे?

भारत के मध्यस्थ वैश्विक एआई दिग्गजों को शक्ति प्रदान करते हैं और अपने मानसिक स्वास्थ्य के साथ इसके लिए भुगतान करते हैं, जिसे कानून ने अभी तक नहीं पकड़ा है।हर बार जब कोई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रणाली हिंसक सामग्री उत्पन्न करने से इनकार करती है या एक ग्राफिक छवि की सही ढंग से पहचान करती है, तो यह ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि एक इंसान ने इसे सिखाया है। वह इंसान अक्सर झारखंड या उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में एक युवा महिला होती है, जो एक शयनकक्ष या बरामदे से काम करती है, एक ठेकेदार के लिए एक...

सिविल लगने वाले आपराधिक मामलों में भी समन जारी होने से पहले सबूत पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
'सिविल' लगने वाले आपराधिक मामलों में भी समन जारी होने से पहले सबूत पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि भले ही कोई मजिस्ट्रेट CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का आदेश देने से मना कर दे, फिर भी शिकायतकर्ता को आम तौर पर शिकायत को "पूरी तरह से सिविल" प्रकृति का बताकर खारिज करने से पहले समन जारी होने से पहले सबूत पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए।जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट के सिविल उल्लंघन और अपराध के बीच की "विभाजन रेखा" अक्सर "बहुत पतली" होती है> इसलिए शिकायतकर्ता को सबूतों के ज़रिए कथित आपराधिक अपराध को साबित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।कोर्ट...

UAPA के ट्रायल अनिश्चित काल तक नहीं चल सकते, NIA Act की धारा 19 के तहत रोज़ाना सुनवाई ज़रूरी: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
UAPA के ट्रायल अनिश्चित काल तक नहीं चल सकते, NIA Act की धारा 19 के तहत रोज़ाना सुनवाई ज़रूरी: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत अपराधों से जुड़े ट्रायल को प्राथमिकता दे। कोर्ट ने कहा कि संसद ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की धारा 19 के ज़रिए ऐसे मामलों में रोज़ाना ट्रायल करने का खास तौर पर आदेश दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गंभीर अपराधों से जुड़े मुकदमे अनिश्चित काल तक न चलें।जस्टिस वसीम सादिक नरगल ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा,“धारा 19 के पीछे संसद का मकसद साफ और स्पष्ट है। संसद ने...

न्यायिक समीक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालतें टेंडर की शर्तों में नदारद काल्पनिक प्रावधान को अपनी तरफ से नहीं जोड़ सकतीं: दिल्ली हाईकोर्ट
न्यायिक समीक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालतें टेंडर की शर्तों में नदारद 'काल्पनिक प्रावधान' को अपनी तरफ से नहीं जोड़ सकतीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सार्वजनिक ठेकों में पात्रता से जुड़े विवादों की जांच करते समय अदालतें टेंडर की शर्तों में नदारद किसी "काल्पनिक प्रावधान" को अपनी तरफ से नहीं जोड़ सकतीं।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने यह स्पष्ट किया कि जब टेंडर में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होता, जिसके तहत किसी निलंबित या बीच में छोड़े गए काम को पूरा हुआ मान लिया जाए—सिर्फ इसलिए कि काम छोड़ने की वजह सरकार थी—तो अदालतें टेंडर की शर्तों को फिर से लिखकर ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकाल...