हाईकोर्ट

भगवान बुद्ध की तस्वीर वाली साड़ी बेचने पर FIR, गुजरात हाईकोर्ट ने किया रद्द; कहा- हर धार्मिक चित्रण को 295A के तहत अपराध नहीं माना जा सकता

गुजरात हाईकोर्ट ने साड़ी और टेक्सटाइल सामग्री पर भगवान गौतम बुद्ध की तस्वीर वाले प्रिंट बेचने के आरोप में दर्ज FIR को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल किसी देवी-देवता या पूजनीय धार्मिक प्रतीक की तस्वीर को कपड़े पर प्रिंट करना या ऐसे कपड़े बेचना, अपने आप में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य नहीं माना जा सकता।जस्टिस पीएम रावल ने कहा कि IPC की धारा 295A हर प्रकार के कथित धार्मिक अपमान को दंडित नहीं करती। इस धारा के तहत अपराध तभी बनता है जब किसी धर्म या धार्मिक...

“थैलेसीमिया मरीज के केयरगिवर का 1,000 KM दूर ट्रांसफर अमानवीय”: राजस्थान हाईकोर्ट ने UCO Bank का आदेश रद्द किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने थैलेसीमिया से पीड़ित भाई के प्राथमिक केयरगिवर को करीब 1,000 किलोमीटर दूर ट्रांसफर करने के UCO Bank के आदेश को रद्द कर दिया।जस्टिस अनूप कुमार धंड ने कहा कि हर 15-20 दिन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत वाले थैलेसीमिया मरीज के केयरगिवर को ऐसी जगह भेजना, जहां आवश्यक चिकित्सा सुविधा और पारिवारिक सहयोग उपलब्ध न हो, मनमाना, अमानवीय और अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य एवं गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है।याचिकाकर्ता ने बताया कि उसका छोटा भाई थैलेसीमिया से पीड़ित है और 75% स्थायी दिव्यांगता...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व पुलिसकर्मी सचिन वाज़े के पास महंगी कारें होने पर हैरानी जताई, उगाही के आरोपों पर ध्यान दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (8 अक्टूबर) को कुख्यात एंटीलिया बम केस में बर्खास्त पुलिसकर्मी सचिन वाज़े को मिली ज़मानत के ख़िलाफ़ नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की अपील पर सुनवाई करते हुए, पूर्व असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) के पास कम से कम पाँच महंगी कारें होने और नियमित रूप से मर्सिडीज़ में घूमने पर हैरानी जताई।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की डिवीज़न बेंच ने गौर किया कि वाज़े के पास BMW, मर्सिडीज़, वोल्वो जैसे महंगे ब्रांड की कारें हैं।यह बात तब सामने आई जब बेंच ने एडिशनल...

यह कहां से आया? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा की NSA हिरासत में आंदोलनजीवी शब्द के इस्तेमाल पर उठाया सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) के तहत पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ पारित निवारक हिरासत आदेश का आधार बनाते हुए हिरासत के आधार पर 'आंदोलनजीवी' शब्द के उपयोग पर मौखिक रूप से सवाल उठाया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने एडिशनल एडवोकेट मनीष गोयल से सवाल किया कि इस तरह की शब्दावली आधिकारिक सरकारी हिरासत दस्तावेज़ में कैसे आ गई।जस्टिस श्रीधरन ने पूछा,"यह शब्द 'आंदोलनजीवी' कहां से आया? इसे आधिकारिक दस्तावेज़ में कैसे शामिल किया गया?" खंडपीठ ने...

सिर्फ़ जाली जाति प्रमाण-पत्र देने से वकील को स्टेट रोल से नहीं हटाया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ जाली जाति प्रमाण-पत्र जमा करने के आधार पर किसी वकील को स्टेट बार रोल से नहीं हटाया जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि कथित धोखाधड़ी या गलत जानकारी का एनरोलमेंट (पंजीकरण) हासिल करने से कोई संबंध है।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा,"...एनरोलमेंट रिकॉर्ड में धोखाधड़ी वाले दस्तावेज़ का होना ही अपने आप में धोखाधड़ी से एनरोलमेंट हासिल करने के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि उस एनरोलमेंट को हासिल करने में धोखाधड़ी की अहम भूमिका है।" कोर्ट...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने छात्र संघ चुनावों में महिला आरक्षण सही ठहराया, 50% कोटा को चुनौती खारिज कीं

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कुमाऊं यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों में छात्र संघ के पदों पर महिलाओं के लिए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार छात्राओं को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 15(3) के तहत निर्देश जारी कर सकती है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी का कोषाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय केवल इसलिए अमान्य नहीं था कि छात्र संघ के संविधान में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था, खासकर तब जब...

बिना गवाहों, दस्तावेज़ों और क्रॉस-एग्जामिनेशन के विभागीय जांच के आधार पर बड़ी सज़ा नहीं दी जा सकती: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी विभागीय जांच के आधार पर बड़ी सज़ा नहीं दी जा सकती, जिसमें न तो गवाहों से पूछताछ की गई, न ही दस्तावेज़ ठीक से पेश या दिखाए गए और आरोपी कर्मचारी को क्रॉस-एग्जामिनेशन (जिरह) का उचित मौका नहीं दिया गया।जस्टिस कुमार मनीष की सिंगल जज बेंच पवन कुमार की एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत उन्हें एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से बिहार इंजीनियरिंग सर्विस के बेसिक ग्रेड, यानी असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर वापस भेज दिया गया।याचिकाकर्ता...

सिर्फ लंबी हिरासत दूसरी जमानत का आधार नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नशीले पदार्थों के एक मामले में आरोपी की दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल लंबे समय तक हिरासत में रहना, बिना किसी नई या महत्वपूर्ण परिस्थिति के, पहले जमानत आवेदन को दोबारा विचार के लिए खोलने का पर्याप्त आधार नहीं है।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि जब तथ्यों या कानून की स्थिति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ हो, तब केवल लगातार हिरासत में रहने से आरोपी को नियमित जमानत का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता।मामला नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अमृतसर मामले से जुड़ा...

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रिटायरमेंट के वर्षों बाद वेतन निर्धारण के पुराने दावे को पेंशन की कमी बताकर पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी रिटायर कर्मचारी की असली शिकायत सेवाकाल के दौरान तय किए गए वेतन से जुड़ी है और पेंशन में कमी केवल उसका परिणाम है, तो यह गलती सेवानिवृत्ति के साथ ही पूरी हो जाती है। इसे वर्षों बाद "पेंशन में लगातार जारी कमी" बताकर दोबारा नहीं उठाया जा सकता।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा,"जो कर्मचारी अपनी नौकरी के दौरान अपने वेतन की सटीकता पर सवाल उठाने से बचता रहा, वह रिटायरमेंट के वर्षों बाद एक मृत दावे को यह...

स्पोर्ट्स से सेल्फ डिफेंस कैटेगरी में हथियार लाइसेंस बदलने का प्रावधान प्रथम दृष्टया नहीं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट और उससे जुड़े नियमों में प्रथम दृष्टया हथियार लाइसेंस की श्रेणी को स्पोर्ट्स से सेल्फ डिफेंस में बदलने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।कोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट की धारा 17 लाइसेंस की शर्तों में बदलाव की अनुमति देती है, लेकिन यह प्रावधान लाइसेंस की प्रकृति या श्रेणी को ही बदलने का अधिकार नहीं देता। जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी ने मामले की सुनवाई करते हुए भोपाल के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह स्पोर्ट्स श्रेणी के हथियार लाइसेंस को सेल्फ डिफेंस श्रेणी...

पत्रकार सत्यम वर्मा की NSA हिरासत के खिलाफ याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में अप्रैल 2026 के वर्कर्स प्रोटेस्ट में कथित भूमिका को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने 7 और 8 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। सत्यम वर्मा ने 12 मई 2026 को गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा 3(2) सहपठित धारा 3(3) के तहत जारी हिरासत...

यौन शोषण की शिकार 16 वर्षीय किशोरी को 26 हफ्ते की गर्भावस्था खत्म कराने की अनुमति, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- जीवन और गरिमा का अधिकार सर्वोपरि

दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन शोषण की शिकार 16 वर्षीय किशोरी को करीब 26 हफ्ते की गर्भावस्था को चिकित्सकीय तरीके से समाप्त कराने की अनुमति दी।किशोरी को उसके माता-पिता ने वर्ष 2022 में छोड़ दिया था और तब से वह अपने मामा और नानी की देखरेख में रह रही है। जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने किशोरी की ओर से उसके मामा द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) को निर्देश दिया कि वह आवश्यक सावधानियों, चिकित्सकीय प्रोटोकॉल और कानून में निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन करते...

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का मामला, यूथ कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट कल करेगा सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के मामले में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई। मामले का उल्लेख गुरुवार को सीनियर एडवोकेट संजय घोष ने एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के सामने किया।यह याचिका इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने दायर की। याचिका में दिल्ली पुलिस द्वारा प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने को चुनौती दी गई।कोर्ट ने...

1970 के दशक में सीमा पार करने वाले सभी लोगों को वापस भेज सकते हैं क्या? बंगाली नागरिक की 2 महीने की हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त

कोलकाता हाईकोर्ट ने बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में करीब दो महीने से हिरासत में रखे गए एक व्यक्ति के मामले में राज्य सरकार से सवाल किया कि आखिर बिना तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किए किसी व्यक्ति को इतने लंबे समय तक हिरासत में कैसे रखा जा सकता है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर 1970 के दशक में बड़ी संख्या में लोगों ने सीमा पार की थी तो क्या उन सभी को वापस भेजना संभव है?जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के सामने मामले की सुनवाई हुई। राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार पेश हुए।सुनवाई के...

अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी के कारण समझाने की बात लिखना पर्याप्त नहीं, लिखित में देना जरूरी: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अरेस्ट मेमो में केवल यह दर्ज कर देना कि गिरफ्तारी करने वाले अधिकारी ने आरोपी को गिरफ्तारी के कारण समझा दिए, संविधान के अनुच्छेद 22 की अनिवार्यता का पालन नहीं माना जा सकता। गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध कराना जरूरी है।कोर्ट ने कहा कि अरेस्ट मेमो के तयशुदा प्रारूप में की गई ऐसी औपचारिक प्रविष्टि, जिसमें गिरफ्तारी के कारण बताए जाने का उल्लेख हो, लिखित रूप में गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराने की संवैधानिक और वैधानिक...

नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है मस्जिद जाना जरूरी नहीं: कोलकाता एयरपोर्ट में नमाज फिर शुरू करने की मांग का AAI ने हाईकोर्ट में किया विरोध

कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित बांकरा मस्जिद में नमाज फिर शुरू करने की अंतरिम अनुमति देने का भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने कलकत्ता हाईकोर्ट में विरोध किया। AAI ने कहा कि मस्जिद सार्वजनिक भूमि पर स्थित है और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विमानन सुरक्षा से जुड़े गंभीर कारणों को देखते हुए वहां लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई।जस्टिस कृष्ण राव बांकरा मस्जिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। कमेटी ने मस्जिद में नमाज पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देते हुए लंबित याचिका के अंतिम निपटारे तक वहां फिर...