हाईकोर्ट

ISI एजेंट को पनाह देने और सेना की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने के आरोपी को जमानत से इनकार, ट्रायल 6 माह में पूरा करने का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ISI एजेंट को पनाह देने और सेना की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने के आरोपी को जमानत से इनकार, ट्रायल 6 माह में पूरा करने का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के कथित एजेंट को पनाह देने और भारतीय सेना व वायुसेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने में मदद करने के आरोपी मोहम्मद अशफाक अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर रखा जाना चाहिए।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 437(6) के तहत 60 दिन में ट्रायल पूरा न होने पर जमानत देने का प्रावधान अनिवार्य (Mandatory)...

Roblox और अन्य गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बैन की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा- नाबालिगों को सेक्शुअल ग्रूमिंग के संपर्क में लाना
'Roblox' और अन्य गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बैन की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा- नाबालिगों को सेक्शुअल ग्रूमिंग के संपर्क में लाना

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म 'ROBLOX' और इसी तरह के दूसरे वर्चुअल प्लेटफॉर्म तक नाबालिगों की पहुंच पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने यह आदेश हाईकोर्ट की वकील रानी सिंह की याचिका पर दिया, जो खुद कोर्ट में पेश हुईं।PIL याचिका में 'मेंडेमस' (Mandamus) रिट की मांग की गई, ताकि संबंधित अधिकारियों (जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय - MeitY भी...

वोटर किसी सीट को डी-रिज़र्व की मांग करके सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार नहीं मांग सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
वोटर किसी सीट को 'डी-रिज़र्व' की मांग करके सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार नहीं मांग सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

डिलिमिटेशन एक्ट, 2002 की धारा 9(1)(c) की वैधता बरकरार रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई वोटर किसी निर्वाचन क्षेत्र (सीट) को 'डी-रिज़र्व' करने की मांग करके सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार नहीं मांग सकता।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कहा,"वोट देने के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि वोटर किसी सीट के आवंटन की शर्तें तय कर सकता है या इस बात पर ज़ोर दे सकता है कि कोई सीट किसी खास श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए ही आवंटित की जाए।"डिलिमिटेशन एक्ट, 2002 की...

संविधान के तहत क्रिमिनल रिट पिटीशन जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को इन्हें रिट पिटीशन के तौर पर रजिस्टर करने का निर्देश दिया
'संविधान के तहत क्रिमिनल रिट पिटीशन जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं': राजस्थान हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को इन्हें 'रिट पिटीशन' के तौर पर रजिस्टर करने का निर्देश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह किसी भी मामले को "क्रिमिनल रिट पिटीशन" के तौर पर रजिस्टर न करे, क्योंकि भारत के संविधान में ऐसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। [2026 LiveLaw (Raj) 273]एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि संबंधित रोस्टर के सामने रखने के मकसद से मामले की जांच करना कोर्ट का काम है।बता दें, कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसे "क्रिमिनल रिट पिटीशन" के तौर पर दायर किया गया था और रजिस्ट्री ने भी इसे इसी तरह...

यूपी गुंडा एक्ट का इस्तेमाल दमन के हथियार के तौर पर नहीं होना चाहिए: हाईकोर्ट ने 2 आपराधिक मामलों के आधार पर शुरू की गई कार्यवाही रद्द की
यूपी गुंडा एक्ट का इस्तेमाल 'दमन के हथियार' के तौर पर नहीं होना चाहिए: हाईकोर्ट ने 2 आपराधिक मामलों के आधार पर शुरू की गई कार्यवाही रद्द की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को जिला अधिकारियों के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें एक व्यक्ति को यूपी कंट्रोल ऑफ़ गुंडाज़ एक्ट, 1970 के तहत 'गुंडा' घोषित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इस एक्ट का इस्तेमाल बेगुनाह लोगों को 'दबाने के हथियार' के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने कहा कि यह एक्ट 'गुंडों' को नियंत्रित करने और दबाने का "शक्तिशाली हथियार" है। इसका इस्तेमाल "बहुत स्पष्ट मामलों में, जैसे 'सार्वजनिक अव्यवस्था' या 'सार्वजनिक व्यवस्था' बनाए रखने के लिए बहुत सोच-समझकर"...

UP Goondas Act | अपीलीय अथॉरिटी ज़िला मजिस्ट्रेट को नए फ़ैसले के लिए मामले वापस नहीं भेज सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
UP Goondas Act | अपीलीय अथॉरिटी ज़िला मजिस्ट्रेट को नए फ़ैसले के लिए मामले वापस नहीं भेज सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि यूपी कंट्रोल ऑफ़ गुंडाज़ एक्ट, 1970 की धारा 6 के तहत काम करने वाली अपीलीय अथॉरिटी के पास मामले को ज़िला मजिस्ट्रेट के पास मेरिट के आधार पर नए सिरे से फ़ैसला करने के लिए वापस भेजने का कानूनी अधिकार नहीं है।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने कहा कि कानून अपीलीय अथॉरिटी को या तो "आदेश की पुष्टि करने (बदलाव के साथ या बिना बदलाव के) या उसे रद्द करने" का अधिकार देता है।कोर्ट अनिल चौधरी की रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें अलीगढ़ डिवीज़न के कमिश्नर के दिसंबर 2025 के...

उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए मॉक ब्लास्ट की NIA से जांच की मांग, हाईकोर्ट ने मांगा राज्य सरकार से जवाब
उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए 'मॉक ब्लास्ट' की NIA से जांच की मांग, हाईकोर्ट ने मांगा राज्य सरकार से जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक हफ़्ते का समय दिया ताकि वह इस बात पर निर्देश ले सकें कि क्या 23 जून, 2026 को मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए धमाकों की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) करेगी।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा:"एडिशनल एडवोकेट जनरल (Addl. A.G.) ने इस मामले में निर्देश लेने के लिए एक हफ़्ते का समय मांगा और उन्हें यह समय दिया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उज्जैन (म.प्र.) ज़िले के बड़नगर में 23/06/2026 को हुई घटना नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एक्ट,...

पुराने मालिक के नाम बिजली बिल और हाउस टैक्स जमा करने वाला प्रतिकूल कब्जे से मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पुराने मालिक के नाम बिजली बिल और हाउस टैक्स जमा करने वाला प्रतिकूल कब्जे से मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति पर प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) के आधार पर मालिकाना हक का दावा करता है, लेकिन उसी संपत्ति के बिजली बिल और हाउस टैक्स पुराने मालिक के नाम से जमा करता रहता है, तो यह उसके द्वारा पुराने मालिक के स्वामित्व को स्वीकार करना माना जाएगा। ऐसे में प्रतिकूल कब्जे के आधार पर स्वामित्व का दावा टिक नहीं सकता।जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी गाजियाबाद स्थित एक मकान पर प्रतिकूल कब्जे के आधार पर मालिकाना हक और स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent...

मकसद बदला लेना था: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृत्यु पूर्व दिया बयान खारिज किया, हत्या के मामले में पति और ससुराल वालों को बरी किया
'मकसद बदला लेना था': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृत्यु पूर्व दिया बयान खारिज किया, हत्या के मामले में पति और ससुराल वालों को बरी किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते 2017 के हत्या और दहेज के कारण हुई मौत के मामले में पति और उसके परिवार के सदस्यों को बरी किया। कोर्ट ने मरने से पहले दिए गए बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) को खारिज करते हुए कहा कि यह बयान सच बताने के बजाय "बदला लेने" की नीयत से दिया गया था।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।कोर्ट ने पाया कि मरने से पहले दिए गए जिस बयान पर अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को फंसाने के लिए...

Election | SC/ST आबादी वाले इलाकों में सीटों का आरक्षण संवैधानिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Election | SC/ST आबादी वाले इलाकों में सीटों का आरक्षण संवैधानिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 9(1)(c) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। यह धारा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए उन इलाकों में निर्वाचन क्षेत्रों को आरक्षित करने का प्रावधान करती है, जहाँ कुल आबादी में उनकी आबादी का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक है।कोर्ट ने कहा कि कोई मतदाता यह दावा नहीं कर सकता कि उसके वोट देने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है, सिर्फ़ इसलिए कि उसका निर्वाचन क्षेत्र दशकों से अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित रहा है।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की...

बिना अधिकार के मुक़दमेबाज़ के मामले में पेश हुआ वकील: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जांच का आदेश, कहा- ज़मीर झकझोरने वाला मामला
बिना अधिकार के मुक़दमेबाज़ के मामले में पेश हुआ वकील: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जांच का आदेश, कहा- ज़मीर झकझोरने वाला मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मुक़दमेबाज़ के इस आरोप की जांच का आदेश दिया कि एक वकील ने बिना अधिकार के उसकी ओर से पेश होकर कार्यवाही में हिस्सा लिया था। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा याचिका (Review Application) में लगाए गए गंभीर आरोपों ने "कोर्ट के ज़मीर को झकझोर दिया।"जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने शिव शंकर सिंह द्वारा दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सिंह को पहले नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज, गाजीपुर के प्रबंधन से संबंधित एक रिट याचिका में प्रतिवादी संख्या 6 (Respondent No. 6) बनाया गया...

दिल्ली हाईकोर्ट ने SBI को अवैध रूप से नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को ₹1 लाख देने का आदेश दिया, रेगुलराइज़ेशन का आदेश रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने SBI को अवैध रूप से नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को ₹1 लाख देने का आदेश दिया, रेगुलराइज़ेशन का आदेश रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने लेबर कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) को एक कर्मचारी की नौकरी रेगुलर करने के लिए कहा गया था, जिसे अवैध रूप से नौकरी से निकाला गया था। [2026 LiveLaw (Del) 639]जस्टिस शैल जैन ने कहा कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 का उल्लंघन होने पर सरकारी नौकरी में रेगुलर होने का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता।हालांकि, बेंच ने SBI को निर्देश दिया कि वह कर्मचारी को अवैध रूप से नौकरी से निकाले जाने से जुड़े सभी दावों के पूर्ण और अंतिम निपटान के लिए ₹1 लाख का एकमुश्त...

नियमों के पालन किया जाएगा: भरोसा मिलने पर हाईकोर्ट ने गुरुग्राम ज़िला कोर्ट को टावर ऑफ़ जस्टिस में शिफ्ट करने की मंज़ूरी दी
नियमों के पालन किया जाएगा: भरोसा मिलने पर हाईकोर्ट ने गुरुग्राम ज़िला कोर्ट को 'टावर ऑफ़ जस्टिस' में शिफ्ट करने की मंज़ूरी दी

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को हरियाणा राज्य के अधिकारियों को गुरुग्राम ज़िला अदालतों को तुरंत नए बने ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स ('टावर ऑफ़ जस्टिस') में शिफ्ट करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि और देरी करने से जनहित को नुकसान होगा, क्योंकि मौजूदा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में हाल ही में लगी आग के बाद से न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ।कोर्ट ने हरियाणा PWD (B&R) के इंजीनियर-इन-चीफ़ (बिल्डिंग्स) और HOD का बयान दर्ज किया कि इमारत हर तरह से पूरी हो चुकी है और सभी कानूनी नियमों का पालन...

वेतन संरक्षण मिलने से पूर्व सेवा को एसीपी में जोड़ने का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
वेतन संरक्षण मिलने से पूर्व सेवा को एसीपी में जोड़ने का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व सेवा के आधार पर वेतन संरक्षण दिए जाने मात्र से कर्मचारी को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि उसी सेवा अवधि को सुनिश्चित सेवाकाल प्रगति का लाभ देने के लिए भी जोड़ा जाए। अदालत ने कहा कि वेतन संरक्षण और एसीपी के तहत मिलने वाली वित्तीय उन्नति अलग-अलग क्षेत्र हैं और दोनों अलग-अलग सरकारी आदेशों से संचालित होते हैं।जस्टिस पंकज पुरोहित एक कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें 6 नवंबर 2013 के सरकारी आदेश तथा उसके आधार पर तीसरे एसीपी का लाभ वापस लेने संबंधी...

केवल नियंत्रण से तय नहीं होगा मालिक-कर्मचारी संबंध, सभी परिस्थितियों पर होगा विचार: झारखंड हाईकोर्ट
केवल नियंत्रण से तय नहीं होगा मालिक-कर्मचारी संबंध, सभी परिस्थितियों पर होगा विचार: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के तहत मालिक और कर्मचारी के संबंध का निर्धारण केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि काम पर किसका नियंत्रण था। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'नियंत्रण परीक्षण' कई मानकों में से केवल एक है और अंतिम निर्णय सभी तथ्यों, परिस्थितियों तथा अनुबंध की शर्तों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल बेंच वर्ष 2016 में रांची स्थित झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) स्टेडियम में फ्लडलाइट की मरम्मत के दौरान तीन...

पति का माता-पिता का ध्यान रखना पत्नी के अलग रहने और भरण-पोषण मांगने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
पति का माता-पिता का ध्यान रखना पत्नी के अलग रहने और भरण-पोषण मांगने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पति का अपने माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों का ध्यान रखना मात्र इस आधार पर पत्नी को अलग रहने और भरण-पोषण पाने का अधिकार नहीं देता। अदालत ने कहा कि ससुराल वालों के साथ सामान्य मतभेद या पति का अपने माता-पिता के प्रति दायित्व निभाना, वैवाहिक घर छोड़ने का पर्याप्त कानूनी कारण नहीं माना जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की सिंगल बेंच ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पत्नी को भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। हालांकि अदालत ने...

सीवर मौत मामले में जूनियर इंजीनियर को बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने विभागीय जांच में दोषमुक्ति के बाद FIR की रद्द
सीवर मौत मामले में जूनियर इंजीनियर को बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने विभागीय जांच में दोषमुक्ति के बाद FIR की रद्द

दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 के लाजपत नगर सीवर मौत मामले में दिल्ली जल बोर्ड के एक जूनियर इंजीनियर के खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाही रद्द की। अदालत ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को समान आरोपों पर विभागीय जांच में गुण-दोष के आधार पर दोषमुक्त कर दिया गया हो, तब उन्हीं आरोपों पर आपराधिक मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।जस्टिस विकास महाजन ने दिल्ली जल बोर्ड में जूनियर इंजीनियर रहे सतेंद्र कुमार श्रीवास्तव की याचिका स्वीकार करते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा...

धारा 161 के बयान में चूक से गवाह को तभी किया जा सकता है अविश्वसनीय, जब जांच अधिकारी उसे साबित करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट
धारा 161 के बयान में चूक से गवाह को तभी किया जा सकता है अविश्वसनीय, जब जांच अधिकारी उसे साबित करे: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी गवाह के पुलिस के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 161 के तहत दिए गए बयान में हुई चूक के आधार पर उसे तभी अविश्वसनीय ठहराया जा सकता है, जब उस चूक को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच अधिकारी साबित करे। केवल अदालत में गवाह का पुलिस बयान से सामान्य रूप से सामना करा देने से साक्ष्य अधिनियम की धारा 145 और CrPC की धारा 162 की कानूनी आवश्यकता पूरी नहीं होती।जस्टिस जे. जे. मुनिर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी...