हाईकोर्ट

पुलिस स्टेशन बुलाकर पूछताछ से पहले भी बताना होगा वकील रखने का अधिकार, गिरफ्तारी टालकर सुरक्षा से नहीं बच सकती पुलिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 38 के तहत पुलिस को किसी संदिग्ध को पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील की मौजूदगी के अधिकार के बारे में औपचारिक गिरफ्तारी से पहले भी बताना होगा। पुलिस किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किए बिना थाने बुलाकर कई घंटे पूछताछ करके इस कानूनी सुरक्षा से बच नहीं सकती।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने कहा कि पुलिस यदि किसी संदिग्ध को पूछताछ के लिए थाने लाती है तो उस समय भी उसे...

दिल्ली हाईकोर्ट में PIL: कंस्ट्रक्शन के कड़े नियम और बिल्डिंग नियमों में प्रशासनिक जवाबदेही की मांग
दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में कंस्ट्रक्शन (निर्माण कार्य) के लिए कड़े मानकों और बिल्डिंग नियमों में प्रशासनिक जवाबदेही की मांग की गई।इंद्रप्रस्थ रेनेसां ट्रस्ट की ओर से दायर इस याचिका को एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस अरुण भारद्वाज की डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए रखा गया।याचिकाकर्ता-ट्रस्ट की वकील ने कहा कि याचिका में अधिकारियों की जवाबदेही और डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ एक ऐसे सिस्टम की मांग की गई, जो बचावकारी ...

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने “₹600 करोड़ घोषित किए, ₹30 करोड़ छूट गए तो क्या चुनाव रद्द होगा?” मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार (7 अक्टूबर) को सवाल किया कि यदि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने चुनावी हलफनामे में करीब ₹600 करोड़ की संपत्ति घोषित की है, लेकिन कथित तौर पर करीब ₹30 करोड़ की संपत्तियों का खुलासा नहीं किया, तो क्या इसे भ्रष्ट आचरण (Corrupt Practice) माना जा सकता है और क्या इसके आधार पर उनका चुनाव रद्द किया जा सकता है?जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने यह सवाल मुख्यमंत्री द्वारा दायर उस आवेदन पर सुनवाई के दौरान उठाया, जिसमें उन्होंने पेरम्बूर विधानसभा क्षेत्र से अपने चुनाव को चुनौती...

COVID वैक्सीनेशन की कवरेज के दौरान महिला की तस्वीर गलती से कैमरे में आना 'अश्लील चित्रण' नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी सार्वजनिक COVID-19 वैक्सीनेशन कार्यक्रम की रिपोर्टिंग के दौरान किसी व्यक्ति या महिला का कैमरे में अनजाने में आ जाना अपने आप में अश्लील तरीके से तस्वीर लेने के बराबर नहीं है।कोर्ट ने यह भी कहा कि SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के प्रावधान किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ नहीं लगाए जा सकते, जिसका कथित अपराध से संबंधित कोई विशिष्ट आपराधिक इरादा प्रथम दृष्टया सामने नहीं आता।जस्टिस वी. श्रीशानंद ने एक मीडिया एजेंसी में काम करने वाले कैमरामैन के खिलाफ दर्ज...

दूसरी महिला से संबंध और बच्चे की बात छिपाकर बनाए यौन संबंध 'छलपूर्ण साधनों' के तहत आ सकते हैं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति विवाह तय होने से पहले दूसरी महिला के साथ वैवाहिक प्रकृति के संबंध और उससे हुए बच्चे की बात अपनी होने वाली पत्नी से छिपाता है और इसके बाद शादी के आधार पर उसके साथ यौन संबंध बनाता है, तो प्रथम दृष्टया यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत 'छलपूर्ण साधनों' (Deceitful Means) के दायरे में आ सकता है।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने यह टिप्पणी एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की। मामला SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत अग्रिम जमानत...

IRCTC घोटाला मामला: सुजाता होटल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुजाता होटल के खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई।जस्टिस सचिन दत्ता ने 10 सितंबर को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित आदेश पर होटल के संबंध में अगली सुनवाई तक रोक लगाई है। मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी। हाईकोर्ट ने सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस भी जारी किया। कंपनी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम,...

प्रदर्शन नियंत्रण में पुलिस के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य करने की मांग: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को 6 महीने में फैसला लेने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा अनिवार्य और लगातार चालू रखने संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिका को केंद्र के समक्ष प्रतिनिधित्व के रूप में लेने और इस पर निर्णय याचिकाकर्ता को बताने को कहा।चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे की कार्यवाहक अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच और जस्टिस अरुण भारद्वाज ने यह निर्देश जारी किया। याचिका...

बागेश्वर धाम दुष्कर्म मामले में DNA रिपोर्ट से नया मोड़, आरोपी का मिलान नहीं हुआ तो मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विशेष जांच के दिए निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम से जुड़े नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी के DNA का भ्रूण के DNA से मिलान नहीं होने के बाद विशेष टीम गठित कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह पता लगाने को कहा है कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म किस व्यक्ति ने किया और उसके गर्भस्थ शिशु का जैविक पिता कौन है।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए छतरपुर एसपी को विशेष टीम गठित कर दो महीने के भीतर विस्तृत जांच पूरी करने और उसके आधार पर उचित कार्रवाई करने...

पैन-इंडिया भर्ती पर राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, राज्य में भर्ती के महत्वपूर्ण चरण हुए तो यहीं होगी सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने पैन-इंडिया स्तर पर होने वाली भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया के महत्वपूर्ण और ठोस चरण किसी राज्य में आयोजित हुए हैं तो उस राज्य के हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त होगा। भर्ती पूरे देश में होने या संबंधित प्राधिकरण के दूसरे राज्य में स्थित होने मात्र से स्थानीय हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार समाप्त नहीं हो जाता।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि जब याचिकाकर्ता उसी राज्य के निवासी...

स्पेशल TET से इन-सर्विस शिक्षकों को भविष्य की भर्ती में वरीयता नहीं मिलेगी, अनुच्छेद 14-16 का उल्लंघन भी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी स्पेशल TET आयोजित करने का फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं करता।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह विशेष परीक्षा केवल इन-सर्विस शिक्षकों को वह अनिवार्य योग्यता हासिल करने का अवसर देती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने उनके लिए जरूरी माना है। इससे नियमित TET पहले ही पास कर चुके उम्मीदवारों की तुलना में इन शिक्षकों को भविष्य की भर्ती में कोई अतिरिक्त वरीयता नहीं...

PITNDPS Act: हिरासत में लिए गए व्यक्ति को डिटेनिंग अथॉरिटी के पास प्रतिनिधित्व का अधिकार बताना जरूरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिरासत आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नशीली दवाओं और मन:प्रभावी पदार्थों की अवैध तस्करी रोकथाम अधिनियम (PITNDPS Act) के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना जरूरी है कि वह हिरासत का आदेश जारी करने वाले डिटेनिंग अथॉरिटी के समक्ष भी अपना प्रतिनिधित्व कर सकता है। केवल राज्य सरकार के सामने प्रतिनिधित्व करने के अधिकार की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, भले ही हिरासत का आदेश जारी करने वाला अधिकारी किसी दूसरी हैसियत से राज्य सरकार की ओर से उस आदेश को रद्द करने की शक्ति रखता हो।जस्टिस अतुल...

प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा दायर करने के लिए कोर्ट की अनुमति न लेने पर केस खारिज नहीं होगा, फैसला सिर्फ पक्षकारों पर लागू होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 1 नियम 8 के तहत प्रतिनिधि क्षमता में दायर मुकदमा केवल इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि वादी ने कोर्ट से प्रतिनिधि मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं मांगी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में मुकदमा वादियों का व्यक्तिगत मुकदमा माना जाएगा और उसका फैसला केवल उस मुकदमे के पक्षकारों पर बाध्यकारी होगा, पूरे समुदाय पर नहीं।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि आदेश 1 नियम 8 का उद्देश्य यह है कि यदि कोर्ट से अनुमति...

दादा-दादी/नाना-नानी से अचानक अलग होने पर बच्चा परेशान हो सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट ने पिता के लिए चरणबद्ध कस्टडी की व्यवस्था तय की
राजस्थान हाईकोर्ट ने 7 साल के बच्चे की कस्टडी उसके पिता को देने से इनकार किया। कोर्ट ने पाया कि बच्चा जन्म से ही अपने नाना-नानी के साथ रह रहा है, इसलिए अचानक उसे कहीं और भेजने से उसे मानसिक परेशानी हो सकती है, जो बच्चे के हित में नहीं होगा।जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने पिता को चरणबद्ध तरीके से मुलाक़ात और कुछ समय के लिए कस्टडी के अधिकार दिए। कोर्ट ने माना कि पिता को ऐसा माहौल बनाने का पूरा अधिकार है जिससे बाद में बच्चा उनके साथ रहने के लिए तैयार हो सके।बेंच ने...

'ज़हरीले पेड़ का फल': इलाहाबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला - बाद में हुई गिरफ़्तारी या रिमांड से गैर-कानूनी हिरासत सही नहीं हो सकती, ₹30,000 का मुआवज़ा देने का आदेश
अनुच्छेद 21 और 22 के तहत संवैधानिक सुरक्षा के संदर्भ में 'ज़हरीले पेड़ का फल' (Fruit of the Poisonous Tree) सिद्धांत को लागू करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में की गई औपचारिक गिरफ़्तारी और रिमांड, पहले की गैर-कानूनी हिरासत को वैध नहीं बना सकती।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की शुरुआती हिरासत गैर-कानूनी होती है तो बाद में की गई गिरफ़्तारी (भले ही उसके लिए वैध आधार हों) और उससे जुड़ी रिमांड की कार्यवाही भी अमान्य हो जाती है।बेंच ने यह टिप्पणी रवि...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाउन प्लानिंग में कमियों को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए PIL शुरू की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाउन प्लानिंग में कमियों, खासकर शहरों, कस्बों और कॉलोनियों के लिए लेआउट प्लान बनाते समय कचरा डंपिंग/कलेक्शन के लिए जगह तय न करने और ट्रांसफॉर्मर लगाने की व्यवस्था न करने को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) शुरू की।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार करने की ज़रूरत है, क्योंकि यह टाउन प्लानिंग से जुड़ा है और डेवलपमेंट अथॉरिटी (जिसमें उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद भी शामिल है) द्वारा विकसित कॉलोनियों में रहने वाले...

MTP नियमों के तहत सिर्फ़ वैवाहिक अलगाव गर्भपात का आधार नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी रूल्स, 2003' (2021 में संशोधित) के तहत सिर्फ़ वैवाहिक अलगाव को गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने (गर्भपात) का आधार नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने कहा कि सामान्य वैवाहिक मतभेदों की तुलना वैवाहिक स्थिति में बदलाव, जैसे 'तलाक' या 'विधवापन' से नहीं की जा सकती; नियम 3B(c) में गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव के संदर्भ में विशेष रूप से इनका उल्लेख किया गया।बता दें, नियम 3B(c) गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव...

CEC की नियुक्ति के मामले पर फ़ैसला लेने में सुप्रीम कोर्ट की 2 साल से ज़्यादा की देरी की कीमत
29 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया।जहाँ जस्टिस दत्ता का मानना था कि बड़ी बेंच को मामला भेजने की केंद्र सरकार की मांग ज़रूरी नहीं थी, वहीं जस्टिस शर्मा की राय अलग थी। बाद में इस मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठे, क्योंकि पता चला कि उनके बेटे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में...

दिल्ली हाईकोर्ट में PIL: विरोध-प्रदर्शन को संभालने के दौरान पुलिस और RAF के लिए बॉडी-वर्न कैमरे अनिवार्य हों
दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। इसमें केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को निर्देश देने की मांग की गई कि वे भीड़ को नियंत्रित करने और विरोध-प्रदर्शन को संभालने की ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के लिए बॉडी-वर्न कैमरों (BWCs) को अनिवार्य और "हमेशा चालू" (Always-on) रखने के लिए एक बाध्यकारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाएं।वकील चाहत राघव द्वारा दायर इस याचिका में ऐसे कैमरों से रिकॉर्ड किए गए फुटेज के स्टोरेज, अखंडता, उसे सुरक्षित रखने और सबूत के तौर पर...

कृषि उपज को बाहर से लाकर सिर्फ प्रोसेसिंग करने पर विकास उपकर नहीं लगा सकता राज्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि राज्य के बाहर से कृषि उपज को किसी मार्केट एरिया में केवल विनिर्माण (Manufacturing) या आगे की प्रोसेसिंग के लिए लाने पर, यदि उस मार्केट एरिया में उसकी कोई बिक्री या खरीद नहीं होती है, तो उस पर डेवलपमेंट सेस (विकास उपकर) नहीं लगाया जा सकता।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने कहा कि उत्तराखंड कृषि उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2011 की धारा 27(c)(v) के पहले प्रावधान में इस तरह के कृषि उत्पाद पर...

'सड़क किनारे सामान बेचने वालों को हटाना समाधान नहीं, सही योजना की ज़रूरत': जबलपुर कोर्ट में ट्रैफिक की समस्या पर हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन और अन्य संबंधित पक्षों से जनहित याचिका (PIL) में शामिल होने को कहा। यह याचिका जबलपुर ज़िला कोर्ट के गेट नंबर 3 और 4 के पास सड़क किनारे सामान बेचने वालों और हाथगाड़ियों (Handcarts) की वजह से होने वाली ट्रैफिक समस्याओं से जुड़ी है।चीफ़ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीज़न बेंच ने कहा कि इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए संबंधित पक्षों, खासकर वकीलों के संगठन की भागीदारी ज़रूरी होगी।बेंच ने कहा,"याचिका में कोर्ट के कामकाज से जुड़ी...
