हाईकोर्ट
'अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किया': झारखंड हाईकोर्ट ने ज़मीन घोटाले के मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की
झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार (6 जनवरी) को हज़ारीबाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DC) और निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की। चौबे पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने कथित ज़मीन घोटाले के मामले में केस दर्ज किया था।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी याचिकाकर्ता की रेगुलर ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 467, 468, 471, 420, और 120B के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(c) और (d) के तहत दर्ज FIR में आरोपी बनाया...
CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की 'प्रथम दृष्टया अवमानना': हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी उस परिपत्र पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें राज्य के सभी थानों में CCTV फुटेज केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने इसे अत्यंत अजीब बताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले Paramvir Singh Saini बनाम बलजीत सिंह (2020) के प्रथमदृष्टया अवमानना जैसा प्रतीत होता है, जिसमें कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस...
तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी की गई तबादला नीति केवल मार्गदर्शन के लिए होती है। इसे अदालत के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण और पदस्थापना पूरी तरह से राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय राज्य को किसी विशेष कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को एक रिट याचिका खारिज करते हुए...
समझौते की शर्तों के उल्लंघन मात्र से जमानत रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि एक बार जमानत दिए जाने के बाद केवल समझौते की शर्तों का पालन न करना या भुगतान करने के वादे को पूरा न कर पाना, अपने आप में जमानत रद्द करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत रद्द करने के लिए इससे कहीं अधिक ठोस और कानूनी आधार आवश्यक होता है।यह टिप्पणी जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने उस मामले में की, जिसमें याचिकाकर्ता ने न्यायिक आयुक्त, रांची द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। उक्त आदेश के जरिए याचिकाकर्ता को पहले से मिली अग्रिम...
ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने का आधार केवल वही साक्ष्य हो सकता है, जो मुकदमे के दौरान न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड किया गया हो। चार्जशीट या केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इनके आधार पर किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने दहेज मृत्यु के एक मामले में दाखिल आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की। याचिका के माध्यम से...
अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील किसी ऐसे मामले में निजी पक्ष की ओर से पैरवी कर सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो। इस संबंध में अदालत ने प्रमुख सचिव (विधि) एवं विधिक स्मरणकर्ता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की एकल पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब वर्ष 2018 से लंबित एक आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो रही थी। यह याचिका पत्नी द्वारा फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए...
CrPC | समन मामले में संज्ञान लेने के बाद धारा 251 के स्तर पर आरोपी को बरी नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन वाद में एक बार जब मजिस्ट्रेट संज्ञान ले लेता है और आरोपी को समन जारी कर देता है तो उसके बाद दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 251 के चरण पर आरोपी को कार्यवाही से मुक्त करने अथवा बरी करने का अधिकार मजिस्ट्रेट को नहीं है।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि CrPC की धारा 251 का उद्देश्य केवल इतना है कि आरोपी को उस अपराध का विवरण बताया जाए, जिसका उस पर आरोप है। उससे यह पूछा जाए कि वह दोष स्वीकार करता है या अपना बचाव प्रस्तुत करना चाहता है। यह प्रावधान मजिस्ट्रेट को न...
मद्रास हाईकोर्ट ने विजय की फिल्म 'जना नायकन' को CBFC को U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश देने वाले आदेश पर लगाई रोक
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को पहले दिए गए सिंगल जज के आदेश पर अस्थायी रोक लगाई, जिसमें CBFC को विजय अभिनीत तमिल फिल्म 'जना नायकन' को तुरंत U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था।चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा:"प्रतिवादी यूनियन ऑफ इंडिया को पर्याप्त समय नहीं दिया गया... UoI की एक मुख्य शिकायत यह थी कि उन्हें जवाब देने का समय नहीं दिया गया। दूसरी शिकायत यह है कि 6 जनवरी के पत्र को चुनौती नहीं दी गई, लेकिन कोर्ट (सिंगल...
रेलवे की 'नो-रिफंड' पॉलिसी को चुनौती: बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
भारतीय रेलवे की तत्काल टिकट रिफंड नीति के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें रेलवे की 'नो-रिफंड' नीति को 'मनमाना' और 'असंवैधानिक' करार दिया। याचिका विशेष रूप से कंफर्म तत्काल टिकटों के रद्दीकरण (Cancellation) पर एक भी रुपया वापस न देने के रेलवे के नियमों को चुनौती दी।प्रमुख आरोप: जनता की जेब पर डाका और 'अन्यायपूर्ण लाभ' (Unjust Enrichment)याचिकाकर्ता और वकील सचिन तिवारी ने तर्क दिया कि जब कोई यात्री अपना कंफर्म तत्काल टिकट रद्द करता है तो रेलवे उस सीट को तुरंत वेटिंग लिस्ट...
धारा 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर लागू, वैवाहिक असंगति या अपूर्ण विवाह पर नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा पति और ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज धारा 498-A आईपीसी का मामला रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि“कानून असंगति (incompatibility) या अपूर्ण विवाह को अपराध नहीं बनाता। धारा 498-A वैवाहिक समस्याओं का सार्वभौमिक इलाज नहीं है।”जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि धारा 498-A एक विशिष्ट और सीमित प्रावधान है, जो केवल गंभीर और जानलेवा स्तर की क्रूरता या दहेज से जुड़ी प्रताड़ना को दंडित करने के लिए बनाया गया है।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता अबुज़र अहमद और उनकी पत्नी की शादी...
पिता द्वारा बलात्कार 'साधारण अपराध से परे', पीड़िता बेटी की गवाही ही पर्याप्त: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले में बलात्कार की सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता स्वयं, जो कि अभियुक्त की बेटी है, घटना की सबसे विश्वसनीय और सर्वोत्तम साक्षी है, क्योंकि अपने ही पिता को झूठा फँसाने का उसके पास कोई कारण नहीं हो सकता।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को सामाजिक बदनामी, पारिवारिक परिस्थितियों और आरोपों की गंभीरता के मद्देनज़र संतोषजनक रूप से समझाया गया है और केवल देरी के आधार पर अभियोजन की...
POSH कानून के तहत सुलह के बाद भी नियोक्ता को विभागीय कार्रवाई का अधिकार बना रहता है: गौहाटी हाईकोर्ट
गौहाटी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ़ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी शामिल थे, ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि POSH अधिनियम, 2013 की धारा 10(4) के तहत सुलह (conciliation) हो जाने के बाद केवल आंतरिक शिकायत समिति (ICC) द्वारा आगे की जांच पर रोक लगती है, लेकिन इससे नियोक्ता को सेवा नियमों के तहत स्वतंत्र विभागीय कार्यवाही शुरू करने से नहीं रोका जा सकता, खासकर जब बाद में नया साक्ष्य सामने आए और कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक हो।मामले की पृष्ठभूमिमामले में...
I-PAC रेड के दौरान CM ममता बनर्जी द्वारा कथित दखलअंदाजी के खिलाफ ED की याचिका पर 14 जनवरी को होगी सुनवाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को 2020 के कोयला घोटाले में चल रही जांच में रुकावट और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दखलअंदाजी के आरोप वाली ED की याचिका पर सुनवाई टाल दी, जिसके बाद कोर्टरूम में हंगामा हुआ।यह मामला जस्टिस सुव्रा घोष के सामने लिस्टेड है, अब इस पर अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी।हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में केंद्रीय एजेंसी ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट...
Leave In The Time Of Red: बायोलॉजी बदल रही है, कानून को भी इसके साथ तालमेल बिठाना होगा
वह नीतिगत क्षण जिसने बहस को ट्रिगर कियामासिक धर्म अवकाश पर भारत के सार्वजनिक प्रवचन ने सतह को तोड़ दिया जब कर्नाटक ने अपना 2025 का सरकारी आदेश जारी किया जिसमें 18 से 52 वर्ष की आयु की महिला कर्मचारियों को प्रति माह एक भुगतान अवकाश दिवस प्रदान किया गया था। राज्य के भीतर सार्वजनिक और निजी दोनों प्रतिष्ठानों में स्थायी कर्मचारियों, अनुबंध श्रमिकों, आउटसोर्स कर्मियों और दैनिक मजदूरी कमाने वालों की पहुंच - भारत में किसी भी पूर्व क्षेत्रीय कार्यकारी हस्तक्षेप से बेजोड़ है।आदेश की सबसे विशिष्ट विशेषता...
BREAKING| CBFC को विजय स्टारर 'जना नायकन' फिल्म को तुरंत सर्टिफिकेट देने का निर्देश
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को विजय अभिनीत आने वाली तमिल फिल्म "जना नायकन" को तुरंत U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया।खबरों के अनुसार, फिल्म की रिलीज़, जो पहले आज के लिए तय थी, टाल दी गई।जस्टिस पीटी आशा ने आदेश सुनाते हुए कहा:"सामग्री की जांच करने के बाद यह बिल्कुल साफ है कि शिकायतकर्ता की शिकायत बाद में सोची-समझी लगती है।"कोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायतों पर विचार करने से "खतरनाक चलन" शुरू होगा।कोर्ट ने आगे कहा कि 6 जनवरी को अपलोड किया गया...
पति का पत्नी को उसके वर्कप्लेस पर बदनाम करना, सहकर्मियों के सामने उसकी पवित्रता पर सवाल उठाना मानसिक क्रूरता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई पति अपनी पत्नी को उसके वर्कप्लेस पर बदनाम करता है, उसकी पवित्रता पर सवाल उठाता है और सहकर्मियों के सामने उसे गाली देता है, तो यह मानसिक क्रूरता है जिसके आधार पर शादी खत्म की जा सकती है।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी जीवनसाथी द्वारा सार्वजनिक अपमान, चरित्र हनन और पेशेवर बदनामी किसी व्यक्ति की गरिमा और मानसिक शांति पर सीधा हमला है। इसे मामूली वैवाहिक कलह कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।कोर्ट एक महिला...
लगातार जेल में रहने के दौरान दर्ज दोषसिद्धि कैदी को 'आदतन अपराधी' नहीं बना सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई कैदी लगातार जेल में हो तो उस दौरान दर्ज दोषसिद्धि दिल्ली जेल नियम, 2018 के तहत फरलो देने से इनकार करने के मकसद से कैदी को "आदतन अपराधी" नहीं बना सकती।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी एक उम्रकैद की सज़ा पाए कैदी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका में दिल्ली जेल नियमों के नियम 1223(ii) के तहत आदतन अपराधी होने के आधार पर उसकी फरलो याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता अक्टूबर, 2007 से लगातार न्यायिक हिरासत में है। उसने...
जिस जज ने फैसला सुरक्षित रखा, उसे ट्रांसफर के बावजूद फैसला सुनाना होगा, उत्तराधिकारी जज दोबारा सुनवाई का आदेश नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब किसी क्रिमिनल ट्रायल में फाइनल बहस पूरी हो जाती है और मामला फैसले के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है तो जिस जज ने केस सुना है, उसे फैसला सुनाना ही होगा, भले ही बाद में उसका ट्रांसफर हो जाए।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी 18.11.2025 और 26.11.2025 के आदेशों पर भरोसा किया, जिसमें कहा गया कि सभी ट्रांसफर किए गए ज्यूडिशियल अधिकारियों को उन मामलों के बारे में सूचित करना होगा, जिनमें चार्ज छोड़ने से पहले फैसले या आदेश सुरक्षित रखे गए और उन्हें...
धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से बरी होने पर धारा 409 आईपीसी में दोषसिद्धि का आधार खत्म: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की
दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा 409 आईपीसी (आपराधिक विश्वासघात) के तहत दोषसिद्ध कंपनी निदेशक की सजा निलंबित कर दी है। अदालत ने कहा कि जब निदेशक को धोखाधड़ी (धारा 420) और जालसाजी (धाराएं 468 व 471 आईपीसी) के आरोपों से बरी कर दिया गया है, तो धारा 409 के तहत दोषसिद्धि का मूल आधार (substratum) कमजोर हो जाता है।जस्टिस विकास महाजन ने यह आदेश उस अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें संयुक्त उद्यम कंपनी से लगभग ₹3 करोड़ की धनराशि के गबन का आरोप था। अदालत ने कहा कि धारा 409 का आरोप जालसाजी और धोखाधड़ी के...
एयर प्यूरीफायर पर GST रेट तय करना संवैधानिक ढांचे को बिगाड़ देगा: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) का विरोध किया, जिसमें एयर प्यूरीफायर को "मेडिकल डिवाइस" घोषित करने और उन पर 18% GST हटाने की मांग की गई।अपने हलफनामे में सरकार ने कहा कि GST काउंसिल ही एकमात्र संवैधानिक रूप से नामित संस्था है, जो GST से जुड़े मामलों पर सिफारिशें करती है। ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रक्रिया को दरकिनार कर देगा।हलफनामे में कहा गया कि ऐसा हस्तक्षेप भारत के संविधान के अनुच्छेद 279A द्वारा संरक्षित संघीय संतुलन को भी...




















