हाईकोर्ट
अगर तलाक पर कोई विवाद नहीं है तो मुस्लिम पति फैमिली कोर्ट से तलाक की घोषणा की मांग कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट, फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 की धारा 7 के तहत तलाक की घोषणा कर सकता है, भले ही तलाक मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत हुआ हो और पार्टियों या किसी और ने उस पर कोई आपत्ति न जताई हो।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी की बेंच ने कहा,“जब लखनऊ की फैमिली कोर्ट के एडिशनल प्रिंसिपल जज तलाक की वैधता या उसके बारे में संतुष्ट हैं और संबंधित पक्षों के बीच इस मामले पर कोई विवाद नहीं है - बल्कि प्रतिवादी/पत्नी ने खुद तलाक की डिक्री के लिए सहमति जताई है - तो फैमिली...
बुनकर की मौत उनकी विधवा को हाउसिंग कॉलोनी का क्वार्टर देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती, बुनाई एक पुश्तैनी कला: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने खुद बुनकर कॉलोनी में रह रहे बुनकरों को क्वार्टर ट्रांसफर करने का फैसला किया, तो बुनकर की मौत उनकी विधवा को वही अधिकार देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती।यह देखते हुए कि भारत में बुनाई एक पुश्तैनी कला है, जो अगली पीढ़ी को मिलती है, कोर्ट ने कहा कि परिवार के मुखिया की मौत के बाद बुनकर के परिवार को कॉलोनी से बेदखल नहीं किया जा सकता।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा,“जब सरकार ने खुद वहां रह रहे बुनकरों को क्वार्टर ट्रांसफर करने का...
S. 34 IPC | साझा इरादे के आधार पर दोषी ठहराने के लिए 'पहले से बनी योजना' का सबूत ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1987 के मर्डर केस में आरोपी को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 34 (कॉमन इंटेंशन/साझा इरादा) के तहत दोषी ठहराना तब तक कानूनी रूप से सही नहीं है, जब तक कोर्ट इस पक्के नतीजे पर न पहुँचे कि आरोपी ने "पहले से बनी योजना" के तहत और किसी तय प्लान के अनुसार काम किया था।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने 1987 के एक मर्डर केस में आरोपी-अपीलकर्ता (लड्डन) को बरी करते हुए ये बातें कहीं।इसके साथ ही कोर्ट ने इलाहाबाद के एडिशनल सेशन जज का 1990 का फैसला भी रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई...
सेल डीड के पंजीकरण के समय खरीदार और विक्रेता दोनों की मौजूदगी जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में बिक्री विलेख (Sale Deed) के पंजीकरण के समय खरीदार और विक्रेता दोनों की व्यक्तिगत मौजूदगी अनिवार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में लागू पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 32A, केंद्रीय कानून से अलग है और इसमें दोनों पक्षों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं की गई है।जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी कानपुर की एक संपत्ति से जुड़े विवाद में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए की। मामला शिवानी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड और संपत्ति मालिक धर्म...
बच्चे को सार्वजनिक रूप से 'चोर' कहना और जेल की धमकी देना प्रथमदृष्टया मानसिक पीड़ा पहुंचा सकता है: हिमाचल हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की रिपोर्ट में मानसिक आघात (Trauma) के संकेत न मिलने मात्र से किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे को वास्तव में मानसिक पीड़ा हुई या नहीं, यह मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाएगा।जस्टिस राकेश कैन्थला ने यह टिप्पणी एक स्कूल प्रिंसिपल द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और आरोपपत्र को...
प्राइवेसी का उल्लंघन: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस प्रीति जिंटा की AI से बनी तस्वीरें, डीपफेक और मॉर्फ्ड तस्वीरें हटाने का आदेश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (8 जुलाई) को एक अंतरिम आदेश में एक्ट्रेस प्रीति जिंटा की डीपफेक इमेज, AI और सुपरइम्पोज़्ड विज़ुअल्स और मॉर्फ्ड तस्वीरों समेत आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया।सिंगल-जज जस्टिस माधव जामदार ने जिंटा की याचिका पर यह आदेश पारित किया।जज ने कहा कि एक्ट्रेस द्वारा बताई गई सामग्री, जैसे डीपफेक इमेज, AI और सुपरइम्पोज़्ड विज़ुअल्स और मॉर्फ्ड तस्वीरें, उनके नैतिक, पब्लिसिटी और पर्सनैलिटी अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।जज ने माना कि उक्त कंटेंट उनकी प्राइवेसी के अधिकारों का भी...
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा की याचिका पर हाईकोर्ट ने ED से जवाब मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आज पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा। अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था और रिमांड पर भेजा गया था।एक्टिंग चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस रोहित कपूर ने नोटिस जारी किया और ED को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।AAP नेता पर 100 करोड़ रुपये के GST धोखाधड़ी मामले में केस दर्ज किया गया, जो उस कंपनी से जुड़ा है, जिसके वह पहले प्रमुख थे। उन्होंने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002...
पीड़ित का रिश्तेदार होने मात्र से प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मृतक का करीबी रिश्तेदार है, उसकी गवाही को अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि निकट संबंधी स्वाभाविक गवाह होते हैं और सामान्यतः वे असली अपराधी को छोड़कर किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठा नहीं फंसाते।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी रणजीत पटेल की हत्या के मामले में दायर अपील खारिज करते हुए की। अदालत ने चचेरे भाई की लोहे की रॉड से हत्या के मामले में आरोपी की उम्रकैद की सजा बरकरार...
1996 में उत्तराखंड राज्य था ही नहीं, फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर ग्राम प्रधान की अयोग्यता बरकरार : उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर निर्वाचित ग्राम प्रधान को अयोग्य ठहराने और पद से हटाने का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि वर्ष 1996 में उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में ही नहीं था। ऐसे में उस वर्ष जारी बताए गए स्थानांतरण प्रमाणपत्र में "उत्तराखंड राज्य" का उल्लेख होना उसके अविश्वसनीय होने का स्पष्ट संकेत है।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी ने ग्राम प्रधान की वह याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनके जरिए उन्हें...
गवाह को धमकी मिलना मात्र मुकदमे के स्थानांतरण का आधार नहीं, गवाह संरक्षण कानून का किया जाए उपयोग : उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि केवल गवाहों को धमकी मिलने के आरोप के आधार पर किसी आपराधिक मुकदमे को एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। यदि गवाहों की सुरक्षा के लिए कानून में व्यवस्था उपलब्ध है तो पहले उसी का सहारा लिया जाना चाहिए।जस्टिस सिद्धार्थ साह ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 407 के तहत दायर एक स्थानांतरण याचिका पर यह फैसला सुनाया।मामला हत्या और शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज एक आपराधिक मुकदमे से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया था कि देहरादून की जिला एवं सत्र...
ससुराल में पत्नी की अस्वाभाविक मौत पर पति और परिजनों को देना होगा जवाब, चुप्पी भी बन सकती है दोष साबित करने की कड़ी : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी महिला की ससुराल में घर के भीतर अस्वाभाविक परिस्थितियों में मृत्यु होती है और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला आरोपियों की ओर संकेत करती है तो भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत घर में मौजूद लोगों की जिम्मेदारी है कि वे उसकी मौत की परिस्थितियों का संतोषजनक स्पष्टीकरण दें। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते तो यह उनके खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन जाती है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए...
लोक सेवाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता तय करने से राज्य सरकार को नहीं रोक सकता UGC : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और उसके विनियम राज्य सरकार को लोक सेवाओं में नियुक्ति के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने से नहीं रोक सकते।अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी पद के लिए योग्यता तय करना पूरी तरह भर्ती नीति का विषय है और राज्य, नियोक्ता होने के नाते, अपनी आवश्यकता के अनुरूप पात्रता की शर्तें निर्धारित करने का अधिकार रखता है। जस्टिस जय कुमार पिल्लै की पीठ ने यह टिप्पणी सहायक प्राध्यापक (प्राणी विज्ञान) के पद पर नियुक्ति...
अंडे फेंकने और आरोपियों की सार्वजनिक परेड की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए : कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास को अलीपुर अदालत परिसर में कथित अंडे फेंके जाने की घटना से जुड़े मामले में अंतरिम राहत देते हुए कहा कि आरोपियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और उन पर अंडे फेंकने जैसी प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य अरूप विश्वास की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी।यह FIR उस घटना के बाद दर्ज की गई थी जब एक अन्य मामले में अदालत में पेशी के दौरान उन पर कथित रूप से अंडे फेंके गए।अरूप...
DOE की 15 दिन में मंजूरी नहीं मिली तो निजी स्कूल कर्मचारी का निलंबन स्वतः खत्म, बाद की मंजूरी से नहीं होगा बहाल : दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ
दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूल के किसी कर्मचारी का निलंबन, यदि 15 दिनों के भीतर शिक्षा निदेशक (DOE) की मंजूरी प्राप्त नहीं करता है, तो वह समाप्त हो जाएगा।इसके बाद यदि DOE मंजूरी भी दे देता है तब भी समाप्त हो चुके निलंबन को दोबारा प्रभावी नहीं किया जा सकता।पूर्ण पीठ में जस्टिस सी. हरि शंकर, जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला और जस्टिस रेणु भटनागर शामिल थे। पीठ ने कहा कि यदि स्कूल प्रबंधन को इसके बाद भी कर्मचारी को निलंबित रखना...
भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जाने या समय बीत जाने मात्र से याचिका खारिज नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उसके लंबित रहने के दौरान छह महीने से अधिक समय बीत गया या बाद की भर्ती प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि अदालत में लंबित रहने के कारण किसी भी वादकारी को नुकसान नहीं उठाना चाहिए। न्यायालय की देरी का खामियाजा किसी पक्षकार को नहीं भुगतना पड़ सकता।अदालत ने यह भी कहा कि किसी...
बड़ी संख्या में प्रभावित निवेशकों का होना क्रिप्टो विवाद को पब्लिक लॉ का मामला नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि बड़ी संख्या में निवेशक प्रभावित हुए, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज से जुड़े निजी विवाद को पब्लिक लॉ (सार्वजनिक कानून) का मामला नहीं माना जा सकता, जिसके लिए रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया जाए।क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफ़ॉर्म BitBNS के यूज़र्स की अपील खारिज करते हुए कोर्ट ने एक्सचेंज में कथित साइबर घटना और फंड के गलत प्रबंधन की CBI या स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से जांच कराने का आदेश देने से इनकार कर दिया।चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस...
पुराने आदेश का 'घोर अनादर': 2024 से 'यूपी अल्पसंख्यक आयोग' में खाली पद न भरने पर हाईकोर्ट ने टॉप सेक्रेटरी को तलब किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को तलब किया। उनसे उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न कर पाने की राज्य की लगातार विफलता के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि उनका पिछला कार्यकाल 2024 में ही खत्म हो गया।राज्य के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने सरकार के इस तरीके को दूसरी बेंच (जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने की थी) द्वारा पहले दिए गए आदेश का "घोर...
दिल्ली हाईकोर्ट ने जबरन वसूली के मामले में सुकेश चंद्रशेखर के कथित साथियों को ज़मानत दी, लंबी जेल और लंबे समय से चल रहे ट्रायल का हवाला दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 217 करोड़ रुपये के जबरन वसूली मामले में आरोपी अरुण मुथु, बी. मोहनराज, सुधीर और कमलेश कोठारी को ज़मानत दी। [2026 LiveLaw (Del) 633]जस्टिस प्रतीक जालान ने मुख्य रूप से लंबी जेल और ट्रायल के जल्द खत्म होने की संभावना न होने के आधार पर यह राहत दी।अभियोजन पक्ष का आरोप था कि मुथु, सुकेश चंद्रशेखर और लीना पॉलोस का करीबी सहयोगी था और उसने अपराध से मिली रकम को मैनेज करने में उनकी मदद की थी।चार्जशीट के अनुसार, मुथु ने लग्ज़री कारें और प्रॉपर्टी खरीदने...
भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी को अग्रिम ज़मानत नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच में जोखिम की ओर इशारा किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अवैध रिश्वत मांगने के आरोपी पूर्व पुलिस अधिकारी को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार "जनता का भरोसा कम करते हैं" और गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा देते समय अदालतों को सावधानी बरतनी चाहिए। [2025 LiveLaw (PH) 222]याचिका खारिज करते हुए जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए इस चरण में अग्रिम ज़मानत देने से चल रही जांच में बाधा आएगी।कोर्ट ने कहा,"आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराध जनता का भरोसा कम करते...
यूपी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट के तहत अवार्ड के आधार पर बेची गई गिरवी रखी प्रॉपर्टी को वापस पाने का केस धारा 111(d) के तहत वर्जित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गिरवी रखी प्रॉपर्टी को वापस पाने (रिडेम्पशन) के लिए किया गया सिविल केस, जिसे यूपी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1965 के तहत पास हुए अवार्ड के आधार पर पहले ही बेचा जा चुका है, एक्ट की धारा 111(d) के तहत वर्जित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अवार्ड में दखल दिए बिना यह राहत नहीं दी जा सकती।यूपी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1965 की धारा 111 इस एक्ट के तहत आने वाले मामलों में सिविल और रेवेन्यू कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को रोकता है। क्लॉज़ (d) इस रोक को एक्ट के तहत दिए गए किसी भी अन्य...




















