दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली पुलिस को सुने बिना करणी सेना प्रमुख को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे सकते: हाईकोर्ट
नए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नियमों के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांग रहे क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत को दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस को सुने बिना प्रदर्शन की अनुमति देने का आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इस मामले में पुलिस जरूरी पक्ष है।मामले की सुनवाई गुरुवार को जस्टिस अमित महाजन ने की।यह याचिका जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी लेकिन पीठ के अवकाश पर होने के कारण मामले को जस्टिस अमित महाजन ने...

'द पायनियर' के खिलाफ कथित मानहानिकारक आरोप प्रकाशित करने पर रोक, के. कविता समेत 15 पक्षकारों को दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'द पायनियर' अखबार के खिलाफ कथित मानहानिकारक आरोपों और आपत्तिजनक सामग्री के प्रकाशन, पुनर्प्रकाशन और प्रसार पर तेलंगाना रक्षा सेना की नेता के. कविता समेत 15 पक्षकारों को रोक लगाई। रोक में पत्रकारों, यूट्यूब माध्यमों और डिजिटल मंचों को भी शामिल किया गया।जस्टिस सचिन दत्ता ने अखबार का प्रकाशन करने वाली कंपनी सीएमवाईके प्रिंटेक की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे पर प्रतिवादियों को समन जारी किए। कोर्ट ने अंतरिम रोक की मांग वाली अर्जी पर भी नोटिस जारी किया।मुकदमे में आरोप लगाया गया कि...

'सर्टिओरारी अधिकार क्षेत्र की सीमाएं': दिल्ली हाईकोर्ट ने परीक्षा टॉपर से कड़ी पूछताछ करने वाली पिछली बेंच के तरीके पर सवाल उठाए
दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछली बेंच के उस तरीके पर सवाल उठाए, जिसमें उसने इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) में असिस्टेंट के पद पर भर्ती के लिए परीक्षा का परिणाम रोके जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से कड़ी पूछताछ की थी।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि उसके सर्टिओरारी अधिकार क्षेत्र की सीमाएं ऐसी "पूछताछ वाली प्रक्रिया" की इजाज़त नहीं देती हैं।कोर्ट ने गौर किया कि पिछली बेंच ने दिसंबर 2021 में उम्मीदवार से कुछ सवाल पूछे थे, जैसे कि अमेरिका...

रेप साबित करने के लिए बच्चे को 'पेनिट्रेशन' शब्द कहने की ज़रूरत नहीं, गवाही को उम्र और ट्रॉमा के संदर्भ में समझा जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चे की गवाही को तकनीकी, कानूनी या मेडिकल शब्दों पर बहुत ज़्यादा ज़ोर देकर नहीं आंका जा सकता।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में मायने यह रखता है कि नाबालिग की गवाही का मुख्य सार क्या है, आस-पास की परिस्थितियाँ क्या थीं और कम उम्र का बच्चा किसी दर्दनाक घटना को किस स्वाभाविक तरीके से बताता है।कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब उसने साढ़े चार साल की बच्ची के साथ रेप के आरोपी व्यक्ति को बरी किए जाने के खिलाफ दिल्ली...

दिल्ली लक्ष्मी योजना में सांसद-विधायक की सिफारिश अनिवार्य करने को हाईकोर्ट में चुनौती, 2500 रुपये मासिक सहायता का मामला
दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता पाने के लिए सांसद या विधायक से अनुशंसा पत्र लेना अनिवार्य किए जाने को दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिये चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि किसी कल्याणकारी योजना का लाभ लेने के लिए राजनीतिक सिफारिश को अनिवार्य शर्त बनाना पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने इस याचिका को इसी मुद्दे से जुड़ी एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया। उस मामले...

दिल्ली हाईकोर्ट में 2 हजार सीवर कर्मचारियों को नियमित करने की मांग, मौत पर परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा
दिल्ली जल बोर्ड में ठेके पर काम कर रहे करीब 2 हजार सीवर कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें पिछली अवधि का वेतन व सभी वैधानिक लाभ देने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने बुधवार को दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड से जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।याचिका दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच की ओर से दायर की गई। इसमें सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जान गंवाने वाले...

ईसाई कब्रिस्तानों के लिए जमीन की ई-नीलामी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने DDA से पूछा- क्या यह कोई व्यावसायिक गतिविधि है?
दिल्ली में ईसाई समुदाय के लिए कब्रिस्तान या दफन स्थलों की व्यवस्था के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने मामले में संबंधित प्राधिकरणों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। सुनवाई के दौरान अदालत ने MCD को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अपने अधिकार क्षेत्र में मौजूद ईसाई कब्रिस्तानों या दफन स्थलों की संख्या और वहां...

S.413 BNSS| बरी होने या कम गंभीर अपराध में दोषसिद्धि के खिलाफ पीड़ित को अपील के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी अपराध का पीड़ित व्यक्ति आरोपी के बरी होने या कम गंभीर अपराध में दोषसिद्ध किए जाने के आदेश के खिलाफ अपील दायर कर सकता है और इसके लिए उसे अपील की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ित को मिला यह अपील का अधिकार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 413 के प्रावधान के तहत स्वतंत्र अधिकार है। राज्य या ऐसे शिकायतकर्ता के लिए स्थिति अलग है जो स्वयं पीड़ित नहीं है और बरी किए जाने के आदेश को चुनौती देना चाहता है। ...

विदेश जाने के लिए LOC हटाने की मांग पहले ट्रायल कोर्ट में करें, हाईकोर्ट ने कहा- यात्रा की शर्तें तय करने में वही सक्षम
लुक आउट सर्कुलर (LOC) के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले व्यक्ति यदि अस्थायी तौर पर विदेश जाना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले उस विशेष अदालत का रुख करना होगा, जहां संबंधित अभियोजन शिकायत पर सुनवाई चल रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि विदेश यात्रा के लिए LOC को अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग पर पहली सुनवाई संबंधित मामले की विशेष अदालत में होनी चाहिए।जस्टिस मधु जैन ने स्पष्ट किया कि इसका LOC जारी किए जाने या उसके जारी रहने को चुनौती देने वाली याचिका के गुण-दोष पर कोई...

अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन की सजा को चुनौती, हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने मामले में नॉमिनल रोल तलब करते हुए पुलिस से जवाब मांगा।ताहिर हुसैन की ओर से पेश एडवोकेट राजीव मोहन ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को केवल एक मुख्य अपराध के लिए दोषी ठहराया गया, जबकि अन्य सभी अपराधों में...

देशव्यापी इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम के लिए एकमात्र एजेंसी के तौर पर C-DOT की नियुक्ति सही: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसके तहत 'सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स' (C-DOT) को देशव्यापी 'सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम' लागू करने के लिए एकमात्र एजेंसी नियुक्त किया गया। इस सिस्टम का मकसद आपदाओं और अन्य सार्वजनिक आपात स्थितियों के दौरान लोगों के मोबाइल फ़ोन पर सीधे इमरजेंसी अलर्ट भेजना है।जस्टिस सचिन दत्ता ने 'उटिमाको टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' की याचिका खारिज की। सेल ब्रॉडकास्ट-आधारित प्रोडक्ट्स और सर्विसेज़ देने वाली इस कंपनी ने अक्टूबर 2024 के उस 'ऑफिस...

मैटरनिटी लीव की वजह से महिलाओं की नौकरी या प्रमोशन नहीं जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को सुरक्षा उपाय बनाने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मैटरनिटी लीव के दौरान महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा सिर्फ़ नौकरी या वेतन जारी रहने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनका प्रोफेशनल स्टेटस, ज़िम्मेदारियाँ, मैनेजर के तौर पर अधिकार और करियर में आगे बढ़ने के मौके भी शामिल हैं।जस्टिस सचिन दत्ता ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से जुड़ी रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं। वह 'मैनेजर-अकाउंटिंग' के तौर पर मैटरनिटी लीव पर गई थीं और लौटने पर उन्हें ट्रेज़री डिपार्टमेंट में काम सौंप दिया गया, जबकि उनकी पुरानी भूमिका पर...

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया मध्य प्रदेश सरकार को सीनियर एडवोकेट को ₹78 लाख से ज़्यादा फीस देने का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि वह सीनियर एडवोकेट अनूप जॉर्ज चौधरी को सुप्रीम कोर्ट में मामले में पेश होने के लिए ₹78,65,000 और उस पर 9% सालाना ब्याज का भुगतान करे। कोर्ट ने राज्य के इस दावा खारिज किया कि सीनियर वकील असल में सिर्फ़ दो बार पेश हुए।जस्टिस सचिन दत्ता ने 'इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहरलाल और अन्य (2020)' मामले में सुप्रीम कोर्ट की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच (संविधान पीठ) की ऑर्डर शीट का हवाला दिया और सीनियर वकील की मौजूदगी को नोट किया।बेंच ने कहा: "इसलिए कार्यवाही...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सॉफ्ट लॉन्च के लिए एक दिन का परमिट न लेने की अनजाने में हुई गलती पर शराब कंपनी के खिलाफ दर्ज एक्साइज़ FIR रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली एक्साइज़ एक्ट, 2009 की धारा 33 के तहत शराब और बेवरेज कंपनी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। कोर्ट ने पाया कि सॉफ्ट लॉन्च पार्टी के लिए एक दिन का शराब परमिट न लेना अनजाने में हुई गलती थी।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने बताया कि 11-12 सितंबर, 2019 की रात को चाणक्यपुरी के होटल अशोका स्थित सोल क्लब में छापेमारी के दौरान बिना वैध लाइसेंस के शराब परोसी जा रही थी। इसके बाद एक्साइज़ एक्ट की धारा 33 के तहत FIR दर्ज की गई।याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे 11, 13 और 14 सितंबर, 2019 के लिए रोज़ाना शराब...

'शामिल करने का तरीका पहले से मौजूद': दिल्ली हाईकोर्ट ने SIR में बेघर और विस्थापित लोगों के छूटने की आशंका वाली PIL खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने वह जनहित याचिका (PIL) खारिज की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) में बेघर लोगों और तोड़-फोड़ की कार्रवाई के कारण बेघर या विस्थापित हुए लोगों को शामिल करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मैनुअल में बेघर लोगों का पता तय करने का तरीका पहले से ही मौजूद है।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा:"हमारी राय है कि (वोटर लिस्ट पर) मैनुअल में...

13 साल से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर रोक की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से विचार करने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और 13 से 16 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया सामग्री को नियंत्रित करने संबंधी दिशा-निर्देशों की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को विचार करने का निर्देश दिया।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने कहा कि याचिका में मांगी गई राहत नीतिगत विषय से जुड़ी है। सरकार ने कहा कि यदि इस संबंध में अभ्यावेदन दिया जाता है तो उस पर कानून के अनुसार विचार कर फैसला किया...

मैटरनिटी लीव के बाद खेल में लौटने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए नीति की मांग: विनेश फोगाट की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला खिलाड़ियों को गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी पर संरक्षण देने वाली नीति बनाने की मांग को लेकर पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर मंगलवार को नोटिस जारी किया।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने कुश्ती महासंघ सहित संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। विनेश फोगाट ने जुलाई 2025 में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था। उनकी ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव ने अदालत के समक्ष कहा कि याचिका केवल व्यक्तिगत राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि...

बड़ी सज़ा के लिए छात्र का नकल का सामान 'असल में इस्तेमाल' करते हुए पकड़ा जाना ज़रूरी: दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक लॉ स्टूडेंट की सज़ा में बदलाव किया, जिस पर यूरिनल के अंदर नकल करने का आरोप है। कोर्ट ने माना कि उसे 'संदेह का लाभ' (benefit of doubt) मिलना चाहिए, क्योंकि ऐसा कुछ भी साबित नहीं हुआ कि वह नकल के लिए सामान का 'असल में इस्तेमाल' कर रहा था, इसलिए सेमेस्टर के सभी पेपर रद्द करने की सज़ा बहुत ज़्यादा थी।आरोप था कि याचिकाकर्ता भारतीय न्याय संहिता (BNS) की परीक्षा के दौरान वॉशरूम गया, जहां एक प्रोफेसर ने उसे यूरिनल का इस्तेमाल करते हुए एक पर्ची से नकल करते हुए पकड़ा। सज़ा के तौर पर...

पति गुज़ारा-भत्ता देने की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए पहले से सुलझे हुए शादी के विवाद को फिर से नहीं उठा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पति CrPC की धारा 125 के तहत अपनी पत्नी का गुज़ारा-भत्ता देने की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए शादी से जुड़े उस विवाद को फिर से नहीं खोल सकता, जिसका फ़ैसला पहले ही हो चुका है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह बात एक पति की रिविज़न याचिका खारिज करते हुए कही। पति ने फ़ैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी पत्नी को गुज़ारा-भत्ता देने का निर्देश दिया गया।दोनों की शादी 2002 में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। 2003 में पति ने यह घोषणा करवाने के लिए मुक़दमा दायर किया कि वह...

सुकेश चंद्रशेखर ने ट्रायल कोर्ट की टिप्पणी हटाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, 3 नवंबर को होगी सुनवाई
कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर ने अपने खिलाफ ट्रायल कोर्ट के फैसले में की गई कुछ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।बता दें, ट्रायल कोर्ट ने उसे सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर न्यायिक अधिकारी पर दबाव डालने और अपने मामले में अनुकूल आदेश हासिल करने की कोशिश के मामले में दोषी ठहराया था।दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका की मेरिट पर सुनवाई नहीं की। कोर्ट पहले यह तय करेगा कि दोषसिद्धि और सजा के बाद संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसी याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं।जस्टिस...
