दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने ससुराल वालों के शांतिपूर्ण रहने के अधिकार की रक्षा के लिए बहू को घर से निकालने का फैसला सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने ससुराल वालों के शांतिपूर्ण रहने के अधिकार की रक्षा के लिए बहू को घर से निकालने का फैसला सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत एक बहू और उसके बेटे को ससुराल वालों के घर से निकालने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के तथ्यों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों के शांतिपूर्ण ढंग से रहने के अधिकार को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने एक विधवा और उसके बेटे की तरफ से दायर रिट याचिका खारिज की। इस याचिका में उन्होंने डिविजनल कमिश्नर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें ससुराल वालों की संपत्ति खाली...

प्रक्रियात्मक कानून के दुरुपयोग का क्लासिक मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 से ट्रायल में देरी करने पर आरोपी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया
'प्रक्रियात्मक कानून के दुरुपयोग का क्लासिक मामला': दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 से ट्रायल में देरी करने पर आरोपी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आरोपी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया, क्योंकि वह 2016 से चल रहे एक आपराधिक ट्रायल को बार-बार रोकने की कोशिश कर रहा था। कोर्ट ने इस मामले को "प्रक्रियात्मक कानून के दुरुपयोग का एक क्लासिक मामला" बताया।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने आरोपी द्वारा दायर याचिका खारिज की। इस याचिका में आरोपी ने ट्रायल कोर्ट और सेशंस कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें जुलाई 2016 में शुरू हुए आपराधिक शिकायत मामले में शिकायतकर्ता से क्रॉस एग्जामिनेशन करने का उसका मौका खत्म कर दिया गया।कोर्ट ने पाया...

पुलिस का काम सिर्फ़ लोगों को गिरफ़्तार करके जेल में डाल देना नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने मुकदमों के दौरान सहयोग की अपील की
पुलिस का काम सिर्फ़ लोगों को 'गिरफ़्तार करके जेल में डाल देना' नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने मुकदमों के दौरान सहयोग की अपील की

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को NDPS Act के तहत बुक किए गए एक आरोपी को ज़मानत दी। साथ ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को संभालने के दिल्ली पुलिस के रवैये की कड़ी आलोचना की।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने टिप्पणी की कि बार-बार न्यायिक निर्देश दिए जाने के बावजूद, ज़मानत के मामलों में पुलिस के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ।कोर्ट ने कहा कि पुलिस की भूमिका "सिर्फ़ किसी व्यक्ति को गिरफ़्तार करके जेल में डाल देना नहीं है, बल्कि बिना किसी परवाह के मुकदमा चलाना भी है।"जस्टिस कथपालिया, भलस्वा डेयरी पुलिस...

गिरफ्तारी के सामान्य कारण बताना पर्याप्त नहीं, आरोपी को लिखित गिरफ्तारी के आधार देना जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
गिरफ्तारी के सामान्य कारण बताना पर्याप्त नहीं, आरोपी को लिखित गिरफ्तारी के आधार देना जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS Act के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि गिरफ्तारी मेमो में केवल गिरफ्तारी के कारण लिख देना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को उसके खिलाफ व्यक्तिगत और विशिष्ट गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लिखित आधार उपलब्ध न कराना गिरफ्तारी और बाद की रिमांड प्रक्रिया को अवैध बना देता है।अदालत ने कहा,“गिरफ्तारी के आधार बताना कोई तकनीकी औपचारिकता नहीं बल्कि व्यक्तिगत...

अश्लील कंटेंट फैलाने वाले ऐप्स पर सख्ती करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल और एप्पल को दिया निर्देश
अश्लील कंटेंट फैलाने वाले ऐप्स पर सख्ती करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल और एप्पल को दिया निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल LLC और एप्पल इंक को निर्देश दिया कि उनके प्ले-स्टोर पर उपलब्ध मोबाइल ऐप्स के जरिए अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को तुरंत रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि मध्यस्थ मंचों की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें ऐप्स को अपलोड की अनुमति देते समय भी पूरी सतर्कता बरतनी होगी।अदालत ने यह आदेश रुबिका थापा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में...

कृषि आय पर कर लगाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट बोला- पूरी तरह गलत धारणा पर आधारित
कृषि आय पर कर लगाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट बोला- पूरी तरह गलत धारणा पर आधारित

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में कृषि आय पर कर लगाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को पूरी तरह गलत धारणा पर आधारित बताया।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत दिल्ली सरकार को कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती।अदालत ने स्पष्ट कहा,“हम सरकार को कानून बनाने के लिए बाध्य करने वाला आदेश जारी नहीं कर सकते।” यह जनहित याचिका आकाश गोयल नामक व्यक्ति ने दायर की थी। याचिका में दावा किया गया कि दिल्ली में कृषि आय को...

स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में नैतिकता को अपराध से अलग रखना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को ज़मानत देते हुए कहा
'स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में नैतिकता को अपराध से अलग रखना होगा': दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को ज़मानत देते हुए कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप के मामले में आरोपी जिम ट्रेनर को ज़मानत दी। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए ज़मानत दी कि "व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर फ़ैसला करते समय नैतिकता को अपराध से अलग रखना होगा।"जस्टिस गिरीश कथपालिया ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 351(2), 64(2)(m) और 79 के तहत आने वाले अपराधों के संबंध में नियमित ज़मानत याचिका मंज़ूर करते हुए यह टिप्पणी की।अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी जिम ट्रेनर के तौर पर काम करता था, उसकी मुलाक़ात पीड़िता से तब हुई जब वह उसके जिम आने लगी।...

लेबर कोर्ट ID Act की धारा 33C(2) के तहत TA/DA जैसे विवादित सर्विस अधिकारों पर फैसला नहीं दे सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
लेबर कोर्ट ID Act की धारा 33C(2) के तहत TA/DA जैसे विवादित सर्विस अधिकारों पर फैसला नहीं दे सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 (ID Act) की धारा 33C(2) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली लेबर कोर्ट, विवादित सर्विस अधिकारों पर फैसला नहीं दे सकतीं; वे सिर्फ पहले से मौजूद अधिकारों की गणना या वसूली तक ही सीमित हैं।जस्टिस शैल जैन ने यह टिप्पणी इलाहाबाद बैंक की रिट याचिका को मंज़ूरी देते हुए की। इस याचिका में बैंक ने इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल-कम-लेबर कोर्ट-II के 2007 के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह एक रिटायर...

Industrial Dispute | दिल्ली में एम्प्लॉयर का ऑफिस होना ही अपने आपमें दिल्ली के लेबर अधिकारियों को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं देता: हाईकोर्ट
Industrial Dispute | दिल्ली में एम्प्लॉयर का ऑफिस होना ही अपने आपमें दिल्ली के लेबर अधिकारियों को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं देता: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि औद्योगिक विवादों में "उचित सरकार" (Appropriate Government) की पहचान करने के लिए नौकरी की जगह और वह जगह जहां नौकरी खत्म होने का फैसला लागू होता है, ये दो मुख्य कारक होते हैं।जस्टिस शैल जैन ने यह टिप्पणी की कि दिल्ली में एम्प्लॉयर का ऑफिस होना ही अपने आप में दिल्ली के लेबर अधिकारियों को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं दे देता।कोर्ट ने कहा,"दिल्ली में किसी पुराने समय में कोई बिज़नेस पता होना, यह साबित नहीं करता कि नवंबर 2009 में जो औद्योगिक विवाद पैदा हुआ था, उसका उस...

बिना सुनवाई ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट ने किया TTFI का आदेश रद्द
बिना सुनवाई ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट ने किया TTFI का आदेश रद्द

दिल्ली हाईकोर्ट ने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) द्वारा महासचिव और पूर्व ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करने का आदेश रद्द किया। अदालत ने कहा कि फेडरेशन ने उन्हें बिना सुनवाई का मौका दिए कार्रवाई कर प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस कृष्ण मुरारी को स्वतंत्र जांच प्राधिकारी नियुक्त किया। वह TTFI के कामकाज और उसके पदाधिकारियों के आचरण की जांच करेंगे।कमलेश मेहता ने 28 जनवरी 2026 को TTFI की...

दूरदर्शन पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण की मांग, हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस
दूरदर्शन पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण की मांग, हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 का दूरदर्शन और DD स्पोर्ट्स जैसे मुफ्त सार्वजनिक प्रसारण मंचों पर प्रसारण सुनिश्चित कराने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और प्रसार भारती को नोटिस जारी किया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती से जवाब मांगा।याचिकाकर्ता अवधेश बैरवा की ओर से सीनियर एडवोकेट वैभव गग्गर ने अदालत में दलील दी कि यदि लोगों को टूर्नामेंट देखने से वंचित किया गया तो यह नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन होगा और देश में फुटबॉल तथा खेल...

सिद्धार्थ वरदराजन को OCI कार्ड देने से इनकार करने का केंद्र का फैसला रद्द, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा कारणयुक्त आदेश
सिद्धार्थ वरदराजन को OCI कार्ड देने से इनकार करने का केंद्र का फैसला रद्द, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा कारणयुक्त आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को OCI कार्ड देने से इनकार करने संबंधी केंद्र सरकार का फैसला रद्द किया।अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से जारी संचार में कोई कारण नहीं बताया गया, इसलिए उसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने वरदराजन की OCI कार्ड संबंधी अर्जी को बहाल करते हुए केंद्र सरकार को नया और कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया।वरदराजन की ओर से सीनियर एडवोकेट नित्या रामकृष्णन और एडवोकेट अर्चित कृष्ण ने पक्ष रखा।उन्होंने अदालत को बताया कि...

छोटी कार और कम सोना लाने पर ताने देना क्रूरता की श्रेणी में आता है: दिल्ली हाईकोर्ट
छोटी कार और कम सोना लाने पर ताने देना क्रूरता की श्रेणी में आता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज में छोटी कार लाने और अपेक्षा से कम सोना देने को लेकर पत्नी को बार-बार ताने देना प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत क्रूरता माना जा सकता है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी मृत महिला के पिता और राज्य सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की।याचिकाओं में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें महिला के पति को दहेज मृत्यु और क्रूरता के आरोपों से मुक्त किया गया था।हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ धारा 498ए के तहत...

झुग्गी हटाकर वैकल्पिक आवास देना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन नहीं, यदि DUSIB नियमों का पालन हो : दिल्ली हाईकोर्ट
झुग्गी हटाकर वैकल्पिक आवास देना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन नहीं, यदि DUSIB नियमों का पालन हो : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि झुग्गी बस्तियों से लोगों को हटाकर उन्हें वैकल्पिक आवास देना अपने आप में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा, बशर्ते दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) की नीति और प्रोटोकॉल में तय सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव भाई राम कैंप, DID कैंप और मस्जिद कैंप के निवासियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इन याचिकाओं में निवासियों ने उन्हें हटाकर सवदा घेवर्रा में वैकल्पिक आवास दिए जाने को चुनौती दी थी।अदालत...

CrPC की धारा 125 के तहत पहली पत्नी के भरण-पोषण के मामले में दूसरी पत्नी आवश्यक पक्षकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
CrPC की धारा 125 के तहत पहली पत्नी के भरण-पोषण के मामले में दूसरी पत्नी आवश्यक पक्षकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि CrPC की धारा 125 के तहत पहली पत्नी और बच्चों द्वारा शुरू की गई भरण-पोषण की कार्यवाही में दूसरी पत्नी न तो ज़रूरी पक्षकार है और न ही उचित पक्षकार। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी कार्यवाही को बेवजह उन सभी लोगों को शामिल करके नहीं बढ़ाया जा सकता, जो पति पर निर्भर होने का दावा करते हैं।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने महिला द्वारा दायर अर्जी खारिज की, जिसमें उसने पहली पत्नी द्वारा अपने पति के खिलाफ दायर भरण-पोषण की पुनरीक्षण...

आरोपी यह शिकायत नहीं कर सकता कि उसकी गिरफ़्तारी की जानकारी परिवार को नहीं दी गई, जबकि उसने खुद वकील को जानकारी देने का विकल्प चुना: दिल्ली हाईकोर्ट
आरोपी यह शिकायत नहीं कर सकता कि उसकी गिरफ़्तारी की जानकारी परिवार को नहीं दी गई, जबकि उसने खुद वकील को जानकारी देने का विकल्प चुना: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में ज़मानत के आवेदक की इस दलील को खारिज किया कि उसकी गिरफ़्तारी गैर-कानूनी थी, क्योंकि उसके परिवार वालों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह आरोपी पर ही निर्भर करता है कि वह किसे अपनी गिरफ़्तारी के बारे में सूचित करवाना चाहता है।जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा ने कहा कि आवेदक ने अपने वकील को सूचित करने का विकल्प चुना था, जिसका पालन जाँच अधिकारी (I.O.) ने किया था; इसलिए अब वह नियमों का पालन न होने का आरोप नहीं लगा सकता।इस प्रकार, कोर्ट ने उस व्यक्ति की ज़मानत...

पाठ्यक्रम से बाहर सवाल हटने पर अभ्यर्थियों को फ्री अंक नहीं मिल सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
पाठ्यक्रम से बाहर सवाल हटने पर अभ्यर्थियों को 'फ्री अंक' नहीं मिल सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और रिस्टोरर विभागीय परीक्षा से जुड़े मामले में कहा कि पाठ्यक्रम से बाहर पाए गए और बाद में हटाए गए प्रश्नों के लिए अभ्यर्थियों को स्वतः फ्री अंक देने का कोई अधिकार नहीं बनता।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने वह याचिका खारिज की, जिसमें परीक्षा मूल्यांकन पद्धति को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता दिल्ली हाईकोर्ट में चालक और कोर्ट अटेंडेंट जैसे ग्रुप-सी पदों पर कार्यरत कर्मचारी थे। उन्होंने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और...

एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी श्रम न्यायाधिकरण के फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी श्रम न्यायाधिकरण के फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी श्रम अदालत और औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसलों को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाइकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।जस्टिस शैल जैन पूर्व एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस कर्मचारियों तथा कर्मचारी संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इन याचिकाओं में केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण के उन आदेशों को चुनौती दी गई, जिनमें सेवा समाप्ति को अवैध मानने के बावजूद कर्मचारियों की बहाली के बजाय केवल आर्थिक मुआवजा दिया गया।मामला 1993 से...

सचमुच औरतों का दिल बहुत बड़ा होता है: पत्नी के पति और ससुराल वालों को माफ़ करने पर हाईकोर्ट ने कम की सज़ा
'सचमुच औरतों का दिल बहुत बड़ा होता है': पत्नी के पति और ससुराल वालों को माफ़ करने पर हाईकोर्ट ने कम की सज़ा

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पति, उसकी माँ और भाई की सज़ा बरक़रार रखी। इन पर दहेज की मांग को लेकर एक गर्भवती महिला को आग लगाने की कोशिश करने का आरोप था। हालांकि, कोर्ट ने उनकी सज़ा को उस समय तक सीमित किया, जितना समय वे पहले ही जेल में बिता चुके थे। कोर्ट ने यह फ़ैसला इसलिए लिया, क्योंकि पीड़ित महिला ने अपने पति से सुलह की थी और उसके साथ फिर से अपना पारिवारिक जीवन शुरू किया था।जस्टिस विमल कुमार यादव ने टिप्पणी करते हुए कहा,“सचमुच औरतों का दिल बहुत बड़ा होता है।” कोर्ट भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा...