दिल्ली हाईकोर्ट

कोर्ट को धोखा देने की कोशिश: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेशंस कोर्ट में समानांतर याचिका का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
कोर्ट को धोखा देने की कोशिश: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेशंस कोर्ट में समानांतर याचिका का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अग्रिम जमानत याचिका को यह पाते हुए खारिज की कि आरोपी ने दो अलग-अलग कोर्ट में समानांतर अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर की थीं, जिनकी सुनवाई उसी दिन हो रही थी। इस हरकत को "आज़ादी के नाम पर प्रक्रिया का साफ दुरुपयोग" बताया।जस्टिस गिरीश कथपालिया की बेंच ने पाया कि एक साथ दो अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर करने का कोई स्वीकार्य कारण नहीं था, एक सेशंस कोर्ट में और दूसरी हाई कोर्ट में, बिना सही जानकारी दिए।यह मामला तब सामने आया, जब एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि आरोपी...

गिरफ्तारी के लिखित कारणों पर सुप्रीम कोर्ट का मिहिर राजेश शाह फैसला भविष्य में लागू होगा: दिल्ली हाईकोर्ट
गिरफ्तारी के लिखित कारणों पर सुप्रीम कोर्ट का 'मिहिर राजेश शाह' फैसला भविष्य में लागू होगा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025) मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसमें सभी अपराधों में रिमांड से पहले आरोपी को गिरफ्तारी के लिखित कारण देना अनिवार्य है, भविष्य में लागू होगा और इसे फैसले की तारीख से पहले की गई गिरफ्तारियों पर लागू नहीं किया जा सकता।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की डिवीजन बेंच ने इस तरह एक याचिका खारिज की, जिसमें एक हत्या के मामले में याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई कि गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी के...

बिना बच्चों वाली विधवा को दोबारा शादी के बाद भी फैमिली पेंशन मिलते रहने वाला नियम उचित: दिल्ली हाईकोर्ट
बिना बच्चों वाली विधवा को दोबारा शादी के बाद भी फैमिली पेंशन मिलते रहने वाला नियम उचित: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 के नियम 54 की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया, जिसके तहत बिना बच्चों वाली विधवा को दोबारा शादी के बाद भी फैमिली पेंशन मिलती रहेगी।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने एक मृत CRPF जवान के माता-पिता द्वारा दायर एक रिट याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की विधवा की दोबारा शादी के बाद खुद को फैमिली पेंशन देने की मांग की थी।कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 के नियम 54 के तहत बिना...

आपराधिक मुकदमे में विभागीय निष्कर्ष प्राथमिक साक्ष्य का विकल्प नहीं हो सकते: जाली समन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रक्रिया सर्वर को आरोपमुक्त किया
आपराधिक मुकदमे में विभागीय निष्कर्ष प्राथमिक साक्ष्य का विकल्प नहीं हो सकते: जाली समन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रक्रिया सर्वर को आरोपमुक्त किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक प्रक्रिया सर्वर को आरोपमुक्त कर दिया है, जिस पर यह आरोप था कि उसने झूठी तामील रिपोर्ट (false service report) तैयार कर एक एकतरफा (ex parte) तलाक डिक्री दिलवाने में मदद की। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री आरोप तय करने के लिए आवश्यक “गंभीर संदेह” (grave suspicion) को पूरा नहीं करती।जस्टिस अमित महाजन ने नरेंद्र सिंह द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (MM) द्वारा पारित...

कैश फॉर क्वेरी विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने लोकपाल को महुआ मोइत्रा के खिलाफ मंजूरी पर फैसला लेने के लिए दो महीने का समय दिया
कैश फॉर क्वेरी विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने लोकपाल को महुआ मोइत्रा के खिलाफ मंजूरी पर फैसला लेने के लिए दो महीने का समय दिया

दिल्ली हाइकोर्ट ने कैश फॉर क्वेरी मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता महुआ मोइत्रा के खिलाफ CBI को आरोपपत्र दाखिल करने की मंजूरी पर निर्णय लेने के लिए लोकपाल को दो महीने का अतिरिक्त समय दिया। यह राहत लोकपाल की ओर से दाखिल आवेदन पर दी गई।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि यह अंतिम अवसर होगा और इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा।हाइकोर्ट ने कहा,“निपटारे की अवधि दो महीने के लिए बढ़ाई जाती है, यह स्पष्ट करते हुए कि आगे समय बढ़ाने का कोई अनुरोध...

दिल्ली हाइकोर्ट का आदेश: फिजिक्सवाला के खिलाफ अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट हटाए जाएं
दिल्ली हाइकोर्ट का आदेश: फिजिक्सवाला के खिलाफ अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट हटाए जाएं

दिल्ली हाइकोर्ट ने शुक्रवार को ऑनलाइन शिक्षा मंच फिजिक्सवाला के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया।यह आदेश फिजिक्सवाला के पूर्व कर्मचारी निखिल कुमार सिंह द्वारा किए गए पोस्ट और वीडियो के संबंध में दिया गया।जस्टिस ज्योति सिंह ने फिजिक्सवाला द्वारा दायर मानहानि वाद में यह अंतरिम निषेधाज्ञा पारित की।फिजिक्सवाला ने निखिल कुमार सिंह और सोशल मीडिया मंचों के खिलाफ यह याचिका दायर करते हुए मानहानि के लिए 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की।फिजिक्सवाला की ओर से...

मौखिक टिप्पणियों को सनसनीखेज बनाने पर हाईकोर्ट ने लगाई मीडिया को फटकार, कहा- ऐसा रहा तो बातचीत बंद कर देंगे
मौखिक टिप्पणियों को सनसनीखेज बनाने पर हाईकोर्ट ने लगाई मीडिया को फटकार, कहा- ऐसा रहा तो बातचीत बंद कर देंगे

दिल्ली हाइकोर्ट ने न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकार मनीषा पांडे से जुड़ी मौखिक टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सनसनीखेज सुर्खियां बनाने पर कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रति कड़ी नाराज़गी जताई। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों को संदर्भ से अलग कर पेश किया गया जिससे पत्रकार के खिलाफ नफरत भरे संदेश फैलाए गए।जस्टिस सी. हरि शंकर ने कहा कि अदालत का मनीषा पांडे के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन अदालत की टिप्पणी को अलग पोस्टर के रूप में सोशल मीडिया पर फैलाया...

सहमति से बने रिश्तों के टूटने को अपराध नहीं बनाया जा सकता: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, ब्रेकअप को बलात्कार कानून का हथियार न बनाएं
सहमति से बने रिश्तों के टूटने को अपराध नहीं बनाया जा सकता: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, ब्रेकअप को बलात्कार कानून का हथियार न बनाएं

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि वयस्कों के बीच सहमति से बने रिश्ते के टूटने को बलात्कार कानून का सहारा लेकर अपराध का रूप नहीं दिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि असफल या टूटे हुए रिश्तों को आपराधिक रंग देना कानून का दुरुपयोग है।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा कि एक शिक्षित और स्वतंत्र वयस्क व्यक्ति, जो अपनी स्वतंत्र और सचेत इच्छा से किसी सहमति-आधारित रिश्ते में प्रवेश करता है, उसे यह समझना चाहिए कि सिर्फ़ रिश्ता टूट जाने भर से आपराधिक जिम्मेदारी उत्पन्न नहीं...

अत्यधिक संवेदनशील रवैया: दिल्ली हाईकोर्ट ने टीवी टुडे से कहा- न्यूज़लॉन्ड्री की आलोचना हर हाल में अपमानजनक नहीं
अत्यधिक संवेदनशील रवैया: दिल्ली हाईकोर्ट ने टीवी टुडे से कहा- न्यूज़लॉन्ड्री की आलोचना हर हाल में अपमानजनक नहीं

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को टीवी टुडे नेटवर्क को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा बनाए गए वीडियो को लेकर “अत्यधिक संवेदनशील (over sensitive)” रवैया अपना रहा है और हर आलोचनात्मक टिप्पणी को अपमानजनक या मानहानिकारक बताने की कोशिश कर रहा है।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि न्यूज़लॉन्ड्री के 75 वीडियो में से केवल एक वीडियो संदिग्ध हो सकता है, लेकिन शेष वीडियो केवल आलोचनात्मक टिप्पणियाँ हैं, जिन्हें अपमानजनक नहीं कहा जा...

अवैध बर्खास्तगी पर सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये मुआवजा बरकरार, लेकिन पुनर्बहाली से इनकार: दिल्ली हाइकोर्ट
अवैध बर्खास्तगी पर सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये मुआवजा बरकरार, लेकिन पुनर्बहाली से इनकार: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने उत्तर दिल्ली नगर निगम (MCD) और एक सफाई कर्मी द्वारा दायर क्रॉस याचिकाओं को खारिज करते हुए औद्योगिक न्यायाधिकरण का आदेश बरकरार रखा है, जिसमें अवैध रूप से सेवा समाप्त करने के लिए सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।हालांकि, हाइकोर्ट ने कर्मचारी की पुनर्बहाली और पिछला वेतन देने की मांग को स्वीकार नहीं किया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने अपने फैसले में कहा कि सफाई कर्मी की सेवाएं औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25एफ के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना...

अवैध बर्खास्तगी पर सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये मुआवजा बरकरार, लेकिन पुनर्बहाली से इनकार: दिल्ली हाइकोर्ट
अवैध बर्खास्तगी पर सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये मुआवजा बरकरार, लेकिन पुनर्बहाली से इनकार: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने उत्तर दिल्ली नगर निगम (MCD) और एक सफाई कर्मी द्वारा दायर क्रॉस याचिकाओं को खारिज करते हुए औद्योगिक न्यायाधिकरण का आदेश बरकरार रखा है, जिसमें अवैध रूप से सेवा समाप्त करने के लिए सफाई कर्मी को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।हालांकि, हाइकोर्ट ने कर्मचारी की पुनर्बहाली और पिछला वेतन देने की मांग को स्वीकार नहीं किया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने अपने फैसले में कहा कि सफाई कर्मी की सेवाएं औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25एफ के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना...

भर्ती विज्ञापन में हुई गलती से नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता, जब पद ही उपलब्ध न हो: दिल्ली हाइकोर्ट
भर्ती विज्ञापन में हुई गलती से नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता, जब पद ही उपलब्ध न हो: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक अभ्यर्थी को गलत भर्ती विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था, जबकि संबंधित आरक्षित श्रेणी में कोई वास्तविक रिक्ति ही मौजूद नहीं थी।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने कहा कि भर्ती अधिसूचना में हुई अनजानी गलती से किसी उम्मीदवार को नियुक्ति का स्थायी या वैधानिक अधिकार नहीं मिल सकता, जब वास्तव में कोई स्वीकृत पद उपलब्ध ही न हो।हाइकोर्ट राष्ट्रीय क्षयरोग एवं श्वसन रोग...

POCSO Case : बेटी से रेप करने वाले पिता को कोई नरमी नहीं, दिल्ली हाइकोर्ट ने सजा बरकरार रखी
POCSO Case : बेटी से रेप करने वाले पिता को कोई नरमी नहीं, दिल्ली हाइकोर्ट ने सजा बरकरार रखी

दिल्ली हाइकोर्ट ने अत्यंत गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अपनी ही बेटी का यौन शोषण करने वाले पिता को POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार की रियायत या नरमी नहीं दी जा सकती।हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा पिता को सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज की।मामलायह फैसला जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने सुनाया। मामला जुलाई 2021 का है, जब छठी कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग बच्ची ने अपने पिता पर सोते समय जबरन शारीरिक...

सिर्फ़ हाइपरटेंशन को लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर कहना एयर फ़ोर्स कर्मियों को डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करने के लिए काफ़ी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
सिर्फ़ हाइपरटेंशन को 'लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर' कहना एयर फ़ोर्स कर्मियों को डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करने के लिए काफ़ी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हाइपरटेंशन जैसी बीमारी को सिर्फ़ "लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर" बताकर एयर फ़ोर्स कर्मी को डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करना काफ़ी नहीं है, खासकर तब जब क्लेम को खारिज करने वाली मेडिकल राय के पीछे कोई ठोस कारण न हो।जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने कहा,"लाइफ़स्टाइल हर व्यक्ति की अलग-अलग होती है। इसलिए सिर्फ़ यह कहना कि बीमारी एक लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर है, डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता, जब तक कि मेडिकल...

मुकदमा चलाने या बचाव के लिए दलीलों में कही गई बातें मानहानि नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
मुकदमा चलाने या बचाव के लिए दलीलों में कही गई बातें मानहानि नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि दलीलों में कही गई बातें, चाहे खुद पर मुकदमा चलाने के लिए हों या बचाव के लिए, मानहानि का अपराध नहीं मानी जाएंगी।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि अगर कोई बयान न्यायिक कार्यवाही में दिया जाता है और उसे झूठा बताया जाता है तो इसका सही उपाय झूठी गवाही के अपराध के लिए है, न कि मानहानि के लिए अलग से शिकायत करके।कोर्ट ने कहा,"एक न्यायिक कार्यवाही में किसी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप, असल में एक ऐसा मामला साबित करने के लिए होते हैं, जिसे वह पक्ष सही और सच्चा मानता है। भले...

लेक्चरर को ज़्यादा सैलरी के लिए PhD की ज़रूरत आर्टिकल 14, 16 का उल्लंघन नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने AICTE के नियमों को सही ठहराया
लेक्चरर को ज़्यादा सैलरी के लिए PhD की ज़रूरत आर्टिकल 14, 16 का उल्लंघन नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने AICTE के नियमों को सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों में लेक्चरर को ₹10,000 का ज़्यादा एकेडमिक ग्रेड पे (AGP) देने के लिए एलिजिबिलिटी शर्त के तौर पर PhD डिग्री को ज़रूरी बनाने के ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) के नियम को सही ठहराया।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने कहा,“जिन लेक्चरर के पास PhD क्वालिफिकेशन है और जिनके पास नहीं है, उनके बीच अंतर को मनमाना, भेदभावपूर्ण या भारत के संविधान के आर्टिकल 14 और 16 का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। सैलरी और करियर में आगे बढ़ने के...

अर्जुन पुरस्कार से बाहर किए जाने पर पहलवान नवीन मलिक की याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस
अर्जुन पुरस्कार से बाहर किए जाने पर पहलवान नवीन मलिक की याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस

दिल्ली हाइकोर्ट ने पिछले सप्ताह भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान और स्वर्ण पदक विजेता नवीन मलिक की याचिका पर नोटिस जारी किया। नवीन मलिक ने वर्ष 2025 के अर्जुन पुरस्कार से खुद को बाहर किए जाने को चुनौती दी।यह मामला जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव के समक्ष आया, जिन्होंने प्रारंभिक सुनवाई के बाद केंद्र सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय, खेल पुरस्कार चयन समिति 2025 और भारतीय खेल प्राधिकरण से जवाब मांगा। साथ ही इस मामले में पहलवान सोनम मलिक को भी नोटिस जारी किया गया।अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।अर्जुन...

बांग्लादेश पर क्रिकेट प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- कुछ रचनात्मक काम कीजिए
बांग्लादेश पर क्रिकेट प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- कुछ रचनात्मक काम कीजिए

दिल्ली हाइकोर्ट ने बुधवार को बांग्लादेश को सभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट और प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की। यह याचिका बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का हवाला देते हुए दायर की गई थी।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायालय का कीमती समय बर्बाद करती हैं। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि इस प्रकार की याचिका दाखिल करने पर भारी लागत भी लगाई जा सकती...

बहू प्रिया कपूर और करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ संजय कपूर की मां पहुंची हाइकोर्ट, फर्जी फैमिली ट्रस्ट का लगाया आरोप
बहू प्रिया कपूर और करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ संजय कपूर की मां पहुंची हाइकोर्ट, 'फर्जी फैमिली ट्रस्ट' का लगाया आरोप

दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर ने दिल्ली हाइकोर्ट का रुख करते हुए अपनी बहू प्रिया कपूर और एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ एक दीवानी वाद दायर किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि एक फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण फैमिली ट्रस्ट बनाकर उन्हें उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत से अवैध रूप से वंचित कर दिया गया।करीब 80 वर्षीय विधवा रानी कपूर ने कहा कि तथाकथित आरके फैमिली ट्रस्ट/रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट पूरी तरह अवैध, शून्य और अमान्य है। उनका दावा है कि उनकी जानकारी या सहमति के बिना उनकी...

ट्रिब्यूनल पेंडिंग क्रिमिनल मामलों पर विचार किए बिना बहाली का निर्देश नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
ट्रिब्यूनल पेंडिंग क्रिमिनल मामलों पर विचार किए बिना बहाली का निर्देश नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की एक डिवीजन बेंच ने कहा कि अगर डिपार्टमेंटल कार्यवाही में बर्खास्तगी रद्द भी कर दी जाती है तो भी कर्मचारी पर लगे दूसरे आरोप में बाद में हुई आपराधिक सज़ा पर विचार करने के बाद ही सक्षम अथॉरिटी द्वारा बहाली और सर्विस बेनिफिट्स पर फैसला किया जाना चाहिए।मामले के तथ्यप्रतिवादी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल था। उसके खिलाफ तीन FIR दर्ज की गईं। पहली अपने सर्विस हथियार से गलती से गोली चलने से एक सहकर्मी की मौत के लिए। दूसरी घर में घुसने और मामूली चोट...