दिल्ली हाईकोर्ट ने SSC से प्रश्न पत्र और आंसर-की को फाइनल करने में सिस्टमैटिक तरीका अपनाने को कहा, गंभीर कमियों पर ध्यान दिलाया

Shahadat

6 Feb 2026 9:48 AM IST

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने SSC से प्रश्न पत्र और आंसर-की को फाइनल करने में सिस्टमैटिक तरीका अपनाने को कहा, गंभीर कमियों पर ध्यान दिलाया

    दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) से भर्ती परीक्षाओं में प्रश्न पत्र और आंसर-की बनाने, जांचने और फाइनल करने में ज़्यादा सिस्टमैटिक और सख्त तरीका अपनाने को कहा।

    जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने कहा कि अस्पष्टताओं और आपत्तियों को दूर करने के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाने से न केवल परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि बेवजह के मुकदमों में भी काफी कमी आएगी।

    बेंच ने कहा कि SSC को भविष्य की सभी परीक्षाओं में ज़्यादा अकादमिक सख्ती और प्रशासनिक सावधानी बरतनी चाहिए ताकि मौजूदा प्रक्रिया में सामने आई कमियों को दोबारा होने से रोका जा सके।

    कोर्ट ने यह आदेश SSC द्वारा कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल एग्जामिनेशन (CGLE) 2024 के लिए अपनाई गई फाइनल आंसर-की और मूल्यांकन प्रक्रिया में दखल देने से इनकार करते हुए दिया।

    बेंच ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के आदेशों को बरकरार रखा, जिसने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले असफल उम्मीदवारों की चुनौतियों को खारिज किया।

    उम्मीदवारों ने टियर-II परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप लगाया, जिसमें 22 सवालों के लिए बोनस अंक देना और नतीजे घोषित होने के बाद जारी की गई फाइनल आंसर-की में जवाबों में बदलाव शामिल था।

    याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस तरह के मॉडरेशन से मेरिट कम हुई और उन उम्मीदवारों को अनुचित फायदा हुआ, जिन्होंने या तो सवालों को हल नहीं किया था या गलत जवाब दिए।

    याचिकाओं को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि न्यायिक पुनर्विचार का दायरा स्वाभाविक रूप से सीमित है। कोर्ट विशेषज्ञों की सोची-समझी राय का फिर से मूल्यांकन करने के लिए अपीलीय निकाय के रूप में काम नहीं कर सकता है।

    इसने कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप केवल तभी ज़रूरी है, जब कानून में कोई स्पष्ट गलती हो, साफ मनमानी हो, या प्रक्रिया में कोई स्पष्ट गड़बड़ी हो, जो इस मामले में साबित नहीं हुई।

    हालांकि, कोर्ट ने प्रश्न पत्रों और आंसर-की में गलतियों के पैमाने पर यह देखते हुए गंभीर चिंता जताई कि 22 सवालों के लिए समान रूप से अंक देना प्रश्न-पत्र बनाने और जांचने में सिस्टमैटिक कमियों को दर्शाता है।

    बेंच ने कहा कि SSC यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि अस्पष्टताओं को कम से कम किया जाए और मॉडरेशन तंत्र अनजाने में उन उम्मीदवारों को दंडित न करे, जिन्होंने वास्तविक प्रयास किया, न ही बिना प्रयास करने वालों को पुरस्कृत करे, जिससे प्रतिस्पर्धी मेरिट के मूल में मौजूद समान अवसर के मैदान की रक्षा हो सके।

    जजों ने कहा,

    "कुल मिलाकर देखें तो इस परीक्षा में SSC का बर्ताव अकादमिक सख्ती और प्रशासनिक मुस्तैदी में गंभीर कमियां दिखाता है, जो कड़ी न्यायिक आलोचना के लायक हैं, लेकिन आखिर में जो सुधार के कदम उठाए गए, वे एक्सपर्ट की राय पर आधारित थे और उन्हें साफ तौर पर गैर-कानूनी, मनमाना या प्रक्रिया में गड़बड़ी वाला नहीं कहा जा सकता, जिसके लिए रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करके दखल देने की ज़रूरत हो।"

    Title: DEVYANSHU SURYAVANSHI & ORS v. STAFF SELECTION COMMISSION & ANR & Other Connected Matters

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