अध-कचरी याचिका: दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, लगाया 25,000 का जुर्माना

Amir Ahmad

6 Feb 2026 3:16 PM IST

  • अध-कचरी याचिका: दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, लगाया 25,000 का जुर्माना

    दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने इसे अध-कचरी याचिका करार दिया।

    कोर्ट ने कहा कि यह याचिका तीन साल की अत्यधिक देरी से दाखिल की गई और इसमें पूरा रिकॉर्ड तक संलग्न नहीं किया गया। हाइकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए 25,000 का जुर्माना भी लगाया।

    जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि यह राशि नई दिल्ली स्थित एम्स के पुअर पेशेंट्स फंड में जमा कराई जाए।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह लागत उस अधिकारी से वसूली जाएगी, जिसने इस याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया था।

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

    “यह स्पष्ट है कि इस न्यायालय के समक्ष अधपकी याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं। ऐसी स्थिति में इस न्यायालय के पास 25,000 के जुर्माने के साथ इस याचिका को खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। यह राशि एम्स नई दिल्ली के पुअर पेशेंट्स फंड को देय होगी और इसे उस अधिकारी से वसूला जाएगा, जिसने इस तरह की अधपकी याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया।”

    यह याचिका केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के 20 अक्टूबर, 2022 के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की थी। CAT ने उस आदेश में इंदर पाल द्वारा दायर मूल आवेदन को स्वीकार किया। इसके बाद 7 दिसंबर, 2022 को विभाग की पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई।

    हाइकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि CAT की कार्यवाही वर्ष 2022 में ही समाप्त हो गई लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार ने रिट याचिका दिसंबर, 2025 में दाखिल की।

    कोर्ट ने टिप्पणी की,

    “गौरतलब है कि अधिकरण द्वारा पारित आदेशों को निरस्त करने के लिए वर्तमान याचिका दिसंबर, 2025 में लगभग तीन वर्षों की अत्यधिक देरी के बाद दाखिल की गई। देरी की विडंबना यह है कि जिन आदेशों को चुनौती दी गई, उनमें से 7 दिसंबर 2022 का आदेश याचिका के साथ संलग्न ही नहीं किया गया।”

    हालांकि कोर्ट ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए यह स्वतंत्रता भी दी कि वह पूरा और प्रासंगिक रिकॉर्ड संलग्न करते हुए नई याचिका दाखिल कर सकती है लेकिन इसके लिए पहले लगाया गया जुर्माने का भुगतान करना अनिवार्य होगा।

    Next Story