छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 'मूलवासी बचाओ मंच' को गैरकानूनी संगठन घोषित करने की चुनौती को खारिज किया, कहा मामला सलाहकार बोर्ड के समक्ष
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार (5 मई) को छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम (सीवीजेएसए) 2005 (विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम) के तहत राज्य सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आदिवासी संगठन-मूलवासी बचाओ मंच (एमबीएम) को गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि संगठन पंजीकृत नहीं है और किसी भी मामले में, मामला सीवीजेएसए की धारा 5 के तहत गठित सलाहकार बोर्ड के समक्ष समीक्षा के लिए लंबित है।पीठ ने...
'निजता से समझौता हो सकता है': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलात्कार पीड़िता के सोशल मीडिया अकाउंट तक बचाव पक्ष की पहुंच से इनकार करने का आदेश बरकरार रखा
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें अभियुक्त/बचाव पक्ष द्वारा एक कथित बलात्कार पीड़िता के सोशल मीडिया अकाउंट, यानी फेसबुक और इंस्टाग्राम प्रोफाइल तक पहुंच की मांग को उसकी निजता के संभावित उल्लंघन के आधार पर खारिज कर दिया गया था। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने बचाव पक्ष के ऐसे अनुरोध को खारिज कर दिया, जो अभियुक्त/याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोक्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की प्रामाणिकता को सत्यापित करने के लिए किया गया था। सिंगल बेंच ने कहा -“…इस न्यायालय की...
दया नियुक्ति एक बार मिलने वाला लाभ, आपत्ति के साथ स्वीकार करने पर भी पदोन्नति का दावा मान्य नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि दया (सहानुभूति) के आधार पर दी गई नियुक्ति एक बार मिलने वाला विशेष लाभ है। यदि आवेदक इसे आपत्ति दर्ज कराते हुए भी स्वीकार कर लेता है तो वह भविष्य में किसी उच्च पद या पदोन्नति की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ ने एक माली (Gardener) की याचिका को खारिज करते हुए कहा,"दया नियुक्ति की योजना पदों की उपलब्धता, प्रशासनिक विवेक और अन्य प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति पर निर्भर करती है। याचिकाकर्ता को भले ही ड्राइवर के पद के लिए अनुशंसा की गई हो लेकिन...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र में कार्यरत कर्मचारी को राहत दी
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र में दो दशकों से दैनिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारी को राहत देते हुए उसकी सेवाओं को नियमित करने की मांग वाली याचिका स्वीकार की।कर्मचारी के मामले और अभिलेखों का उचित मूल्यांकन करने का आदेश देते हुए जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,“मामले के तथ्यों और परिस्थितियों तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए याचिका स्वीकार की जाती है। प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि...
प्रश्नपत्र लीक करने में मदद करना हत्या से भी अधिक जघन्य: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व PSC अध्यक्ष को जमानत देने से किया इनकार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) के पूर्व अध्यक्ष को जमानत देने से इनकार किया, जिन पर राज्य सेवा परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने और अपने परिवार के सदस्यों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है।जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने जमानत याचिका खारिज करते हुए प्रश्नपत्र लीक की कड़ी निंदा की और टिप्पणी की,"जो व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नपत्र लीक करने में मदद करता है, वह लाखों युवा उम्मीदवारों के करियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए रात-रात...
पहले से नौकरी कर रहा परिवार का सदस्य आर्थिक रूप से मदद नहीं करता, ऐसे तर्क के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का दुरुपयोग नहीं किया जा सकताः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला की याचिका खारिज कर दी, जिसने अपने पति की मृत्यु के बाद इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी कि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी, जबकि उसका दावा था कि परिवार का कमाने वाला सदस्य उसका भरण-पोषण करने में असमर्थ था। अनुकंपा नियुक्ति योजना का हवाला देते हुए, जिस पर मृतक की पत्नी ने इस आधार पर भरोसा किया था कि यदि पहले से ही कमाने वाला सदस्य है तो आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति पर विचार करने पर कोई रोक नहीं है, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टेनोग्राफर टेस्ट में गलत गणना का आरोप लगाने वाली अभ्यर्थी की याचिका खारिज की
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी है, जिसने कौशल परीक्षण के दौरान अंकों की गलत गणना के कारण स्टेनोग्राफर के पद पर उसका चयन न किए जाने को चुनौती दी थी। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा, अपीलकर्ता की उत्तर पुस्तिका के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि अपीलकर्ता ने वह शब्द टाइप किया है, जो परीक्षक द्वारा नहीं लिखा गया था, इसलिए इसके लिए एक अंक काटा गया और अपीलकर्ता द्वारा की गई अन्य 13 गलतियों के लिए 13 अंक काटे गए, तदनुसार 14 अंक...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मल्हार महोत्सव के लिए स्वीकृत 20 लाख की राशि जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिनांक 2.04.2025 के आदेश द्वारा बिलासपुर लोकहित सांस्कृतिक सेवा समिति, मल्हार के अध्यक्ष द्वारा दायर जनहित याचिका खारिज की। इस याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया था कि राज्य प्राधिकारियों को मल्हार महोत्सव के सुचारू आयोजन के लिए स्वीकृत 20 लाख रुपये की राशि जारी करने का निर्देश दिया जाए जिसे वित्तीय बाधाओं के कारण पिछले छह वर्षों से आयोजित नहीं किया गया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने इस संबंध में कहा,"यह याचिकाकर्ताओं का निजी एजेंडा और...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अविवाहित महिला के साथ यौन संबंध बनाने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराने का आदेश रद्द किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक सत्र न्यायालय द्वारा भारतीय दंड संहिता ('IPC') की धारा 497 के तहत व्यभिचार का दोषी ठहराए जाने के आदेश को पलट दिया है , जिसमें शादी के झूठे आश्वासन पर एक अविवाहित महिला के साथ बार-बार यौन संबंध बनाने के लिए व्यभिचार का दोषी ठहराया गया था।आरोपी-अपीलकर्ता को बरी करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने कहा- “ट्रायल कोर्ट द्वारा अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के तहत दोषी ठहराया जाना कानून में गलत है, और इसलिए अपीलकर्ता IPC की धारा 497 के आरोप से...
स्टांप ड्यूटी में कमी के मामले में कलेक्टर द्वारा मूल मांगने से इनकार करने से दस्तावेज जब्त करने की अदालत की शक्ति कम नहीं होगी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना कि एक कलेक्टर (स्टाम्प) द्वारा भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 48B के तहत शक्ति का प्रयोग नहीं करने का निर्णय लिया गया है, जो उसे स्टाम्प ड्यूटी में कमी के मामले में मूल उपकरण के उत्पादन का आदेश देने का अधिकार देता है, धारा 33 के तहत दस्तावेज़ को जब्त करने की न्यायालय की शक्ति को कम नहीं करेगा।जस्टिस राकेश मोहन पांडे ने अपने आदेश में कहा, "वर्तमान मामले में, दस्तावेजों को ट्रायल कोर्ट द्वारा कलेक्टर (स्टाम्प) को भेजा गया था और उन्होंने स्टाम्प अधिनियम की धारा 48 बी के...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारी की पिछली मजदूरी की मांग खारिज की, कहा- अपील में बरी होना पिछली स्थिति को नहीं बदलता
एक कर्मचारी द्वारा दायर की गई याचिका खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में हुआ बरी होना पिछली स्थिति को पूर्व प्रभाव से समाप्त नहीं करता, इसलिए कर्मचारी को बकाया वेतन पाने का अधिकार नहीं है।इस कर्मचारी को एक अपराध में दोषी ठहराया गया था लेकिन बाद में दायर अपील में बरी कर दिया गया। बरी होने के बाद उसने अपने बकाया वेतन (Back Wages) की मांग को लेकर वर्तमान याचिका दायर की थी।जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने कहा,“यह याचिकाकर्ता का मामला नहीं है कि उसे निलंबित किया गया और बाद में...
अनुच्छेद 300 A के तहत संरक्षित पेंशन की कड़ी मेहनत से अर्जित 'संपत्ति' को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना नहीं छीना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना कि पेंशन एक कर्मचारी को अर्जित एक कठिन अर्जित लाभ है और 'संपत्ति' की प्रकृति में है, जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 300-ए का संरक्षण प्राप्त है और इसे कानून की उचित प्रक्रिया के बिना दूर नहीं किया जा सकता है।जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल जज बेंच ने आगे कहा, "किसी व्यक्ति को कानून के अधिकार के बिना इस पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता है, जो संविधान के अनुच्छेद 300-A में निहित संवैधानिक जनादेश है। यह इस प्रकार है कि अपीलकर्ता राज्य सरकार द्वारा पेंशन या ग्रेच्युटी...
लास्ट सीन थ्योरी पर आधारित दोषसिद्धि के लिए पुष्टिकारक साक्ष्य आवश्यक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलात्कार-हत्या की सजा पलटी
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोहराया है कि किसी आरोपी की दोषसिद्धि केवल इस आधार पर नहीं की जा सकती कि वह मृतक के साथ अंतिम बार देखा गया।कोर्ट ने यह भी कहा कि जब दोषसिद्धि लास्ट सीन थ्योरी पर आधारित हो तो अन्य परिस्थितियों और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों से समर्थन प्राप्त करना अधिक सुरक्षित होता है।जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की खंडपीठ ने आगे कहा,“केवल एक साथ आखिरी बार देखे जाने की परिस्थिति के आधार पर दोषसिद्धि नहीं दी जा सकती और सामान्यतः न्यायालय को अन्य पुष्टिकारक साक्ष्य की...
S. 138 NI Act | चेक रिटर्न मेमो में दोष होने से पूरी ट्रायल अमान्य नहीं होती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोहराया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोहराया कि अगर चेक रिटर्न मेमो में कोई त्रुटि (infirmity) होती भी है तो भी धारा 138 निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) के तहत चल रही पूरी ट्रायल को शून्य (nullity) नहीं माना जा सकता।जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने अपने आदेश में यह पाया कि ट्रायल कोर्ट ने यह माना कि चेक देयता (liability) चुकाने के लिए दिए गए, न कि सुरक्षा (security) के लिए, और आरोपी इस बात को खारिज नहीं कर सका।कोर्ट ने स्पष्ट किया,"NI Act की धारा 139 के तहत वादिनी (Complainant) के पक्ष में अनुमान...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) 2024 परीक्षा पर अगले आदेश तक रोक लगाई
हाईकोर्ट के समक्ष दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से उपस्थित एडवोकेट जनरल द्वारा पीठ को सूचित किया गया कि कर्नाटक और गुजरात हाईकोर्ट ने न्यूनतम अभ्यास शर्त पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया को पहले ही रोक दिया।इसकी जानकारी मिलने पर जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने 18 मई 2025 को होने वाली परीक्षा पर रोक लगाई।खंडपीठ ने दर्ज किया,"सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार किया, इसलिए प्रतिवादी...
आवश्यक और ठोस साक्ष्यों को अनुचित रूप से नज़रअंदाज करने पर अपीलीय न्यायालय के हस्तक्षेप का उचित कारण बनता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह माना कि जब किसी फैसले में स्पष्ट रूप से अनुचित निर्णय लिया गया हो और आवश्यक व ठोस साक्ष्यों को बिना किसी उचित कारण के नजरअंदाज कर दिया गया हो तो अपीलीय न्यायालय के हस्तक्षेप के लिए एक मजबूत और न्यायसंगत आधार उत्पन्न होता है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने गलत तरीके से बरी किए गए निर्णय को पलटते हुए यह टिप्पणी की,"जब हाईकोर्ट या अपीलीय कोर्ट आरोप-मुक्ति के निर्णय के खिलाफ अपीलीय अधिकार क्षेत्र का उपयोग करते हैं तो वे पक्षकारों द्वारा...
मोहम्मद जुबैर के खिलाफ POCSO मामले में ट्वीट को लेकर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को सूचित किया कि राज्य पुलिस ने ऑल्ट-न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ दर्ज POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश की, जो 2020 में उनके द्वारा किए गए एक ट्वीट से संबंधित है।राज्य के वकील ने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष यह दलील दी, जिसके बाद खंडपीठ ने जुबैर द्वारा दायर याचिका का निपटारा किया, जिसमें उन्होंने IT Act, IPC और POCSO Act के तहत दर्ज FIR रद्द...
महिला का वर्जिनिटी टेस्ट गरिमा के अधिकार का उल्लंघन, असंवैधानिक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी का वर्जिनिटी सुनिश्चित करने के लिए पति की याचिका खारिज की
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि किसी महिला का वर्जिनिटी टेस्ट (Virginity Test) करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और गरिमा के उसके अधिकार का अपमान है। इसलिए किसी भी महिला को इस तरह के टेस्ट/प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने पति द्वारा अपनी पत्नी का वर्जिनिटी सुनिश्चित करने के लिए उसका मेडिकल टेस्ट कराने की याचिका खारिज की और कहा -“भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 न केवल जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की...
बर्खास्तगी अंतिम उपाय है; अनुशासनात्मक अधिकारियों को कठोर सजा देने से पहले कम दंड पर विचार करना चाहिए: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने एक पुलिस कांस्टेबल की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को खारिज कर दिया, क्योंकि सजा अनुपातहीन थी। न्यायालय ने कहा कि अनुशासनात्मक अधिकारियों को कांस्टेबलों पर बड़ा दंड लगाने से पहले पुलिस विनियमन के विनियमन 226 के तहत दिए गए कम दंड पर विचार करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि बर्खास्तगी अंतिम उपाय होना चाहिए और तब तक नहीं की जानी चाहिए जब तक कि अन्य सभी उपाय विफल न हो जाएं।पृष्ठभूमिरामसागर सिन्हा बिलासपुर के संकरी में...
विधायिका को PMLA की धारा 45 के तहत कठोर शर्तों में ढील देनी चाहिए, जिससे केस-दर-केस आधार पर जमानत निर्धारण की गुंजाइश हो: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों को बनाए रखने के हित में विधायिका को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत कठोर दोहरी शर्तों में ढील देनी चाहिए, जिससे अदालतों को केस-दर-केस आधार पर जमानत निर्धारित करने के लिए 'ढील' मिल सके।जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की पीठ ने आगे कहा,"इससे छोटे जमानत के मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने से बचेंगे, क्योंकि निचली अदालतें कठोर प्रावधान का विरोध करने में हिचकिचाती हैं। फिर भी अदालत को धन शोधन के प्रति विधायिका...











