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मुख्य सुर्खियां

हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

LiveLaw News Network
19 Oct 2020 5:32 AM GMT
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
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12 अक्टूबर 2020 से 16 अक्टूबर 2020 तक विभिन्न हाईकोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र.....

होमबायर रेरा और उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत एक साथ राहत मांग सकता है : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि एक घर खरीदार (होमबायर) एक साथ रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम (रेरा), 2016 और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत राहत पाने के लिए प्रयास कर सकता है। न्यायमूर्ति डॉ. एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति अवनीश झंगन की खंडपीठ ने कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि यदि किसी व्यक्ति की शिकायत उपभोक्ता फोरम के समक्ष लंबित है, तो उसे रेरा के तहत एडजुकेटिंग ऑफिसर (एओ) के समक्ष ट्रांसफर किया ही जाना चाहिए।

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू को राजीव लूथरा और मोहित सराफ के बीच के विवाद सुलझाने लिए मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एलएंडएल के दो इक्विटी पार्टनर्स राजीव लूथरा और मोहित सराफ के बीच विवाद के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू को मध्यस्थ नियुक्त किया है। जस्टिस वी कामेश्वर राव की एकल पीठ ने आगे दोनों पक्षों को 17 अक्टूबर तक मध्यस्थ के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। अदालत द्वारा यह भी नोट किया गया कि मध्यस्थ अपनी फीस तय करने के लिए स्वतंत्र होगा जिसे दोनों पक्षों द्वारा समान रूप से साझा किया जाएगा।

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बेटे द्वारा घर से निकालने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और उनकी पत्नी पहुंचे हाईकोर्ट, कोर्ट ने दिया जिला मजिस्ट्रेट के पास जाने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को जिला मजिस्ट्रेट, प्रयागराज को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और उनके बेटे के बीच संपत्ति के स्वामित्व/कब्ज़े को लेकर चल रहे विवाद का हल निकालें। न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने मजिस्ट्रेट को यह भी निर्देश दिया है कि एक ''सशब्द और तर्कपूर्ण आदेश'' पारित करें। साथ ही मामले के पक्षकारों को स्वतंत्रता प्रदान की है कि वह आगे के निर्देशों के लिए इस अदालत के समक्ष उस आदेश को रख सकते हैं।

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गुजरात हाईकोर्ट ने ऑड-ईवन आधार पर 20 अक्टूबर से चैंबर्स को फिर से खोलने के लिए कहा

गुजरात उच्च न्यायालय ने 20 अक्टूबर 2020 से उच्च न्यायालय के परिसर के भीतर स्थित अधिवक्ता चैंबर्स खोलने का निर्णय लिया है। चैंबर्स निर्धारित कार्य दिवस के फार्मूले के साथ कोर्ट वर्किंग डे (शनिवार और रविवार को छोड़कर) सुबह 10.30 से दोपहर 2.30 बजे तक खोले जाएंगे। सप्ताह 1 विषम संख्या वाले चैम्बर्स सोमवार, बुधवार, शुक्रवार को खुलेंगे। यहां तक ​​कि गिने हुए चैम्बर्स मंगलवार, गुरुवार को खुलेंगे। सप्ताह 2 यहां तक ​​कि गिने हुए चैम्बर्स सोमवार, बुधवार, शुक्रवार को भी खुलेंगे

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपील की अवधि की समाप्ति/ अपील के निपटान तक संपत्तियों में तोड़फोड़ नहीं करने का आदेश दिया

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पारित एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि विध्वंस (Demolish) के आदेश केे खिलाफ अपील दायर करने की अवधि समाप्त होने तक, या उस मामले में जहां अपील दायर की गई है, उसके निपटान तक की अवधि समाप्त होने तक विध्वंस (तोडफ़ोड़) की गतिविधियां न करें। जस्टिस शशि कांत गुप्ता और पंकज भाटिया की खंडपीठ ने आदेश दिया, "राज्य के अधिकारियों को जहां कभी भी दो अधिनियमों के तहत निजी संपत्तियों पर किए गए निर्माणों के संबंध में विध्वंस के आदेश पारित किए जाते हैं, उन्हें वास्तविक विध्वंस के लिए कोई कार्रवाई करने से पहले अपील की वैधानिक अवधि समाप्त होने तक इंतजार करना चाहिए। वैधानिक आदेशों में दायर अंतरिम आवेदन के निपटान तक अधिकारियों ने विध्वंस के आदेशों को निष्पादित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।"

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महिलाओं और बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराध का मामला-जांच में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिएःझारखंड हाईकोर्ट ने घटिया जांच के लिए पुलिस को फटकार लगाई

झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार (12 अक्टूबर) को राज्य पुलिस को एक मामले की घटिया जांच करने के मामले में कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले में एक महिला अपने तीन नाबालिग बच्चों के साथ जल गई थी और बाद में उनकी मौत हो गई थी। वहीं महिला व उसके बच्चों को जलाकर मारने का आरोप उसके ससुरालियों के खिलाफ लगाया गया है। न्यायालय के समक्ष यह प्रस्तुत किया गया कि पुलिस जांच से छेड़छाड़ करने के सभी प्रयास कर रही है और आरोपी व्यक्तियों की मदद करने के लिए भी प्रयास कर रही है ताकि वे कानून के शिकंजे से बच सकें।

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श्रीकृष्ण जन्म भूमि पर बनी मस्जिद को हटाने के मामले में दायर मुकदमे को खार‌िज करने के फैसले के खिलाफ दायर अपील को मथुरा जिला अदालत ने स्वीकार किया

कथ‌ित रूप से श्रीकृष्ण जन्म भूमि पर बनी मस्जिद ईदगाह को हटाने के मामले में दायर मुकदमे को खार‌िज करने के सिविल जज, मथुरा के फैसले के खिलाफ दायर अपील को मथुरा जिला अदालत ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को स्वीकार कर ‌लिया। जिला न्यायाधीश साधना रानी ठाकुर ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड, ट्रस्ट मस्जिद ईदगाह, श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ को नोटिस जारी किए। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार (19 नवंबर) को होगी।

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एडवोकेट कार के अंदर बैठकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की सुनवाई में भाग न लें, कोर्ट का डेकोरम बनाए रखें : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक वकील को फटकार लगाई, जो एक कार के अंदर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंस की कार्यवाही में भाग ले रहा था। मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति अशोक एस किन्गी की खंडपीठ ने कहा, "हालांकि असाधारण कारणों से हम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई के माध्यम से मामलों को सुनने के लिए मजबूर हैं। हम आशा करते हैं और बार के सदस्य कोर्ट का डेकोरम बनाए रखेंगे।" जब इस मामले को सुनवाई के लिए लिया गया तो याचिकाकर्ताओं के वकील एक कार के भीतर बैठकर कोर्ट के सामने पेश हुए। उन्होंने अनुरोध किया कि उनके मामले में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आपत्तियों पर उन्हें रिजॉइंडर दाखिल करने के लिए समय दिया जाए। इसके बाद नेटवर्क खराबी के कारण वे ऑफ़लाइन हो गए। बेंच ने मौखिक रूप से कहा, "वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई में कुछ मानदंड भी हैं। आप कार में बैठकर अदालत को संबोधित नहीं कर सकते।" अदालत ने फिर सुनवाई को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया।

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(दिल्ली दंगे) दिल्ली हाईकोर्ट ने 'जी न्यूज' से सोर्स पूछा, "बताएं कहां से अभियुक्त का कथित इकबालिया बयान प्राप्त हुआ"

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (15 अक्टूबर) को एक टीवी न्यूज चैनल 'जी न्यूज' को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई (यानी, 19 अक्टूबर) तक एक हलफनामा दायर करके स्पष्ट रूप से बताएं कि उनको कहां से याचिकाकर्ता (आसिफ इकबाल तन्हा) का कथित इकबालिया बयान प्राप्त हुआ था। न्यायमूर्ति विभु बाखरू की खंडपीठ ने यह निर्देश उस समय दिया है, जब प्रतिवादी नंबर 1 (डीसीपी स्पेशल सेल, नई दिल्ली) ने अदालत ने सूचित किया कि जांच में शामिल किसी भी पुलिसकर्मी ने जांच का कोई भी विवरण लीक नहीं किया है।

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"संदेहजनक है कि क्या यह आईपीसी की धारा 354 के तहत आएगा": बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस महिला का शील भंग करने के आरोपी शख्स को अग्रिम जमानत दे दी, जो सहायक के रूप में उसके कार्यालय में काम करती थी। मामले के तथ्यों की जांच करने के बाद, अदालत ने कहा कि यद्यपि अपराध निश्चित रूप से यौन उत्पीड़न (धारा 354 ए) के अपराध के तहत आएगा, लेकिन यह थोड़ा संदेहजनक है कि क्या यह आईपीसी की धारा 354 के तहत आएगा। न्यायमूर्ति सारंग वी कोतवाल आरोपी रविराज गुप्ता द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। कोर्ट ने नोट किया कि मामला पूरी तरह से पीड़िता के बयानों पर निर्भर है। यदि अंततः यह साबित हो जाता है कि आरोप झूठे हैं, यदि उसे गिरफ्तार किया जाता है तो आवेदक को अपूरणीय क्षति होगी, पीठ ने कहा।

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वायुसेना को गलत तरह से दिखाती फिल्म 'गुंजन सक्सेना' को दिल्ली हाईकोर्ट ने देखने का फैसला किया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल' फिल्म में भारतीय वायु सेना के चित्रण के बारे में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विवादों पर निर्णय लेने से पहले फिल्म देखने का फैसला किया है। जस्टिस राजीव शकधर की सिंगल बेंच ने आगे कहा कि कलात्मक अभिव्यक्ति को सिर्फ एक बॉक्स में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि एक निश्चित वर्ग इससे सहमत नहीं है। अदालत ने कहा: 'बेंच में पर्याप्त महिला जजों के न होने को लेकर न्यायपालिका में लैंगिक पक्षपात पर बातचीत चल रही है। न्यायालय इस दृष्टिकोण से सहमत या असहमत हो सकते हैं, लेकिन इससे उस दृश्य पर अंकुश नहीं लगेगा।'

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'पूरी व्यवस्था प्रतीक्षा करो और घटना देखो पर आधारित': सरकारी स्कूलों में डिजिटल कमी को दूर करने के लिए पटना हाईकोर्ट में याचिका; नोटिस जारी

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सरकारी स्कूलों में डिजिटल कमी को दूर करने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है ताकि उसके छात्रों को किसी अन्य निजी स्कूल की तरह महामारी के दौरान फ़िज़िकल कक्षाएं बंद रहने के दौरान भी शिक्षा हासिल करने का अधिकार मिले । मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की पीठ ने बिहार सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर इस मामले में जवाब मांगा है। याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 21-ए के तहत मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का पूरी तरह से एहसास करने के लिए एडवोकेट जय वर्धन नारायण (व्यक्ति में) द्वारा दायर की गई है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक पर अस्थमा रोगी की मेडिकल रिपोर्ट नहीं भेजने के लिए 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार (08 अक्टूबर) को इस आदेश की प्राप्ति से एक सप्ताह के भीतर संबंधित 'भारत के वीर'के खाते में संबंधित जेल अधीक्षक के वेतन से 5000 / - रुपए वसूल करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की खंडपीठ ने जेल-अधीक्षक पर यह जुर्माना इसलिए लगाया, क्योंकि वह अदालत के आदेश दिनांक 17.09.2020 का पालन करने में विफल रहे, जिसके तहत उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए चिकित्सा रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया था कि क्या याचिकाकर्ता अस्थमा से पीड़ित है और इस संबंध में उसे जेल में किस तरह का उपचार दिया जा रहा है।

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उपस्थिति कम होना गम्भीर मामला : कर्नाटक हाईकोर्ट ने एनएलएसआईयू छात्र की याचिका खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) के एक छात्र की वह याचिका खारिज कर दी है जिसमें उसने कम उपस्थिति के बावजूद उसके प्रोजेक्ट वर्क का मूल्यांकन करने एवं उसे बी. ए. एलएलबी (ऑनर्स) पाठ्यक्रम के तीसरे वर्ष में प्रोन्नत करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति कृष्णा दीक्षित ने माधव मितृका की याचिका खारिज करते हुए कहा, "याचिकाकर्ता की इस प्रीमियर लॉ स्कूल में उपस्थिति बहुत ही कम है और यह निर्विवाद आंकड़ा रिट याचिका में समान राहत देने के लिए उसके दावे के विरुद्ध है।"

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कॉलेजों को फिर से खोलने के बाद अनिवार्य रूप से सेमेस्टर परीक्षाएं करवाने के बीसीआई के दिशानिर्देशों के खिलाफ लॉ स्टूडेंट्स पहुंचे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

एमिटी यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ के चार लॉ के छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के निर्देशों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। बीसीआई ने सभी लाॅ यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया था कि वह संस्थानों को फिर से खोलने के एक महीने के अंदर इंटरमीडिएट सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करवाए,जबकि यूजीसी ने कहा था कि सभी छात्रों को पिछले प्रदर्शन के आधार पर प्रमोट कर दिया जाए। इन छात्रों का प्रतिनिधित्व वकील अभिषेक सिन्हा व विवेक वर्मा ने किया है।

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मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी को नोटिस जारी कर 'अच्छे व्यवहार के लिए बॉन्ड भरने' की मांग की

पालघर लिंचिंग मामले और बांद्रा प्रवासियों की घटना की कवरेज के दौरान सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 108 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग करते हुए सहायक पुलिस आयुक्त (वर्ली डिवीजन) सुधीर जाम्बावडेकर ने जारी किया है। धारा 108 सीआरपीसी के तहत एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति से "अच्छे व्यवहार के लिए सिक्योरिटी" की मांग कर सकता है, जिस पर सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने वाली सामग्रियों के प्रकाशन जैसे कृत्यों का संदेह है।

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समलैंगिक जोड़ों के लिए वैवाहिक समानताः दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा यह एक विरोधात्मक याचिका नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति आशा मेनन की खंडपीठ ने बुधवार को दो समलैंगिक जोड़ों की तरफ से विवाह समानता की मांग करते हुए दायर याचिका पर सुनवाई की। श्री वैभव जैन और उनके साथी श्री पराग मेहता को भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सिर्फ लैंगिग-रूझान या सैक्सुअल ओरिएंटेशन के आधार पर उनकी शादी के पंजीकरण का प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया था, जबकि डॉ कविता अरोड़ा और उनकी साथी सुश्री अंकिता खन्ना को पूर्वी दिल्ली स्थित एसडीएम के भवन में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया था। वह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत अपनी शादी का पंजीकरण करवाने गई थी। 8 अक्टूबर, 2020 को न्यायमूर्ति नवीन चावला की एकल पीठ ने निर्देश दिया था कि इस याचिका को दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। Also Read - [दिल्ली दंगा] 'याचिकाकर्ता दंगे का शिकार है, उसका घर क्षतिग्रस्त हो गया', दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगा मामले में 65 साल के वृद्ध को जमानत दी उस निर्देश के बाद बुधवार को इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने की और हाईकोर्ट ने पक्षकारों को काउंटर एफिडेविट्स और रिजाॅइंडर दायर करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले को अगली सुनवाई के लिए 8 जनवरी, 2021 को सूचीबद्ध किया गया है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि दोनों मामलों में अधिकारियों ने पुट्टस्वामी और नवतेज सिंह जौहर मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की उपेक्षा की है। जिनके तहत समलैंगिक जोड़ों को मानव गरिमा और निजता का अधिकार दिया गया है। Also Read - साम्प्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के आरोप में बांद्रा कोर्ट ने कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल के खिलाफ एफआई दर्ज करने का आदेश दिया यह कार्य ''समलैंगिक जोड़ों को मिली गरिमा को खत्म करने के समान या उनसे छीनने के समान है।'' उन्होंने पीठ को बताया कि पुट्टस्वामी के फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि निजता और सैक्सुअल ओरिएंटेशन के आधार पर भेदभाव निषिद्ध है और नवतेज सिंह जौहर में एलजीबीटीक्यूआई लोगों को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14,15,19 व 21 के तहत संरक्षण का हकदार ठहराया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान मामले में अधिकारियों ने ऐसे तरीके से काम किया था, जिसके परिणामस्वरूप याचिकाकार्तओं से उनके अधिकारों को अलग कर दिया गया है। जबकि भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट की कई संविधान पीठों ने ऐसे जोड़ों को '' अंतर्निहित गरिमा व संवैधानिक नैतिकता की उम्मीद प्रदान की है।''

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अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई मनमाने और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने की हद तक जा सकता है: पंजाब और हर‌ियाणा हाईकोर्ट ने यूट्यूबर की अग्र‌िम जमानत याचिका खारिज की

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार (09 अक्टूबर) एक यूट्यूबर को, जिस पर एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी के खिलाफ अपने चैनल पर अपमानजनक सामग्री अपलोड करने का आरोप है, अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि "हालांकि भारत के प्रत्येक नागरिक के पास अपने विचार ‌को व्यक्त करने का अधिकार है लेकिन फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि कोई मनमाना और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने की हद तक जा सकता है।"

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"कोर्ट मजबूर हालात में काम कर रहा है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी को जख्मी करने के मामले में दर्ज एफआईआर निरस्त करने की पति की याचिका ठुकराई, जुर्माना भी लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पति की वह याचिका जुर्माने के साथ खारिज कर दी जिसमें उसने गला घोंटकर पत्नी को घायल करने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 के तहत दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) निरस्त करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति संजय कुमार पचोरी की खंडपीठ ने यह याचिका दायर करने के लिए याचिकाकर्ता से गहरी नाराजगी भी जतायी और कहा कि कोर्ट मजबूर हालात में काम कर रहे हैं जहां बार और बेंच दोनों अपनी जान को जोखिम में डाल रहे हैं।

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मद्रास हाईकोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार के खिलाफ लगाए गलत आरोपों के मामले में अधिवक्ता के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही शुरू की; 5 लाख रुपए की लागत लगाई

मद्रास हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि अधिवक्ता "गलत हलफनामा दायर करके नैतिक व्यवहार की सभी सीमाओं को लांघ गया है", वह भी संस्था (रजिस्ट्रार (सतर्कता) के एक महत्वपूर्ण कार्य के खिलाफ, ने सोमवार को उसके प्रैक्टिस के लाइसेंस को अगले आदेश तक के लिए निलंबित कर दिया। चीफ जस्टिस एपी साही और जस्टिस सेंथ‌िलकुमार रामामूर्ति ने आदेश दिया, "कानून की प्रैक्टिस का लाइसेंस एक गंभीर उद्यम है और इसे न्यायिक अधिकारी को गाली देने के लिए झूठ के इंजन के बदलने का प्रयास संभवत: एक सुनियोजित और षड्यंत्रकारी कदम हो सकता है, इस पृष्ठभूमि में कि संयोग से छठा प्रतिवादी हाईकोर्ट का रजिस्ट्रार सतर्कता है, जो अधीनस्थ न्यायपालिका, या अन्य मामलों में, जिनमें सतर्कता पूछताछ स्थापित की गई है, के व्यवहार की रिपोर्टिंग के लिए भी जिम्मेदार है।

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आवेदक के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले के आधार पर पासपोर्ट का नवीनीकरण करने से इनकार नहीं किया जा सकता : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि पासपोर्ट एक्ट की धारा 6 (2) (एफ), जिसके तहत पासपोर्ट प्राधिकरण उस व्यक्ति को नया पासपोर्ट जारी करने से इनकार कर सकता है, जिसके खिलाफ भारत में आपराधिक मामला लंबित है, उन मामलों में लागू नहीं होगा ,जहां आवेदक अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण की मांग कर रहा हो। न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदर की पीठ ने कहा कि,' 'पासपोर्ट एक्ट की धारा 6 (2) (एफ) को पढ़ने के बाद यह पता चलता है कि पासपोर्ट प्राधिकरण विदेशी देश में जाने के लिए पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी करने से इंकार कर सकता है, यदि भारत में आवेदक के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा लंबित है तो। हालांकि, उक्त प्रावधान उस व्यक्ति के लिए पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने के लिए नहीं कहता है जो भारत वापस आने का इरादा रखता है। इसलिए, इस प्रावधान को पढ़ने से स्पष्ट रूप से इंगित होता है कि यह केवल नए पासपोर्ट जारी करने के मामले में लागू होता है, पासपोर्ट के नवीनीकरण के मामले में नहीं।''

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"जिला न्यायाधीश ने वादी का अनुचित रूप से पक्ष लिया" : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने न्यायाधीश से मांगा स्पष्टीकरण, केस ट्रांसफर किया

एक विशेष आदेश देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक जिला न्यायाधीश से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने पाया है कि न्यायाधीश ने एक सूट के वादी के पक्ष में उसे अनुचित लाभ पहुंचाया है और अनुचित रूप से उसका पक्ष लिया है। हाईकोर्ट ने यह आदेश भारतीय स्टेट बैंक की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। बैंक ने जिला न्यायाधीश नवांशहर (शहीद भगत सिंह नगर) द्वारा पारित अंतरिम निषेधाज्ञा के एक आदेश को चुनौती दी थी। जिला न्यायाधीश ने बैंक को एक कंपनी के खिलाफ लगभग 100 करोड़ रुपये के डिफाॅल्ट के मामले में कड़ी कार्रवाई करने से रोक दिया था।

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"क्या आपने इसी तरह शव का अंतिम संस्कार किया होता यदि पीड़िता किसी समृद्ध परिवार से होती ?" : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस डीएम से पूछा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सोमवार को हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले में 19 वर्षीय दलित महिला के शव का आधी रात को दाह संस्कार करने की घटना पर कड़ी नाराज़गी जताई। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की पीठ ने पुलिस अधिकारियों और जिला मजिस्ट्रेट को दोषी ठहराया, जिन्होंने कथित तौर पर पीड़िता के माता-पिता की सहमति के बिना, शव का जल्द से जल्द अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया। द वायर के अनुसार पीठ ने जिला मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार लक्सर से पूछा, क्या आपने इसी तरह शव का अंतिम संस्कार किया होता यदि पीड़िता एक समृद्ध परिवार से होती ?" इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने यूपी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर), प्रशांत कुमार से पूछा कि क्या उनकी बेटी होती तो उसी तरह अंतिम संस्कार करने दिया होता। पीड़ित के परिवार और राज्य के दोनों अधिकारी मामले में अपने बयान देने के लिए अदालत में मौजूद थे। पीड़िता के माता-पिता ने आरोप लगाया कि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस ने उनकी बेटी के शव के अंतिम दर्शन की न तो अनुमति दी और न ही जल्दबाजी में दाह संस्कार करने के दौरान उपस्थित रहने की अनुमति दी।

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विदेशी नागरिक, भारतीय नागरिक से शादी करके स्वतः भारतीय नागरिक नहीं बनते; मतदाता पहचान पत्र, आधार, पैन आदि नागरिकता के प्रमाण नहीं: पटना ‌हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने माना है कि एक विदेशी नागरिक, भारतीय नागरिक के साथ विवाह करने के बाद स्वत: भारतीय नागरिक नहीं बन जाता है। चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस कुमार की पीठ ने मात्र पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र; या आधार कार्ड भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि नेपाल की नागरिकता का त्याग भारतीय नागरिकता का अधिकार प्रदान नहीं करता है। पृष्ठभूमि मामले के तहत, किरण गुप्ता नेपाल में पैदा हुईं और पली-बढ़ीं। उन्होंने अशोक प्रसाद गुप्ता से 2003 में शादी की और स्थायी रूप से भारत में उनकी पत्नी के रूप में उनके साथ रहने लगीं। शादी के बाद, उन्होंने (ए) बिहार विधानसभा के चुनाव के लिए वर्ष 2008 में तैयार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराया; (बी) उनके नाम पर (i) भारत में एक बैंक खाता है, (ii) आयकर विभाग द्वारा जारी पैन कार्ड, और (iii) आधार कार्ड है।

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डीयू परीक्षा: दिल्ली हाईकोर्ट ने पीजी और कुछ यूजी पाठ्यक्रमों के लिए परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय को अक्टूबर के अंत तक सभी स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के लिए परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति हेमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि परिणाम और मार्कशीट विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड की जाए और कोई भी छात्र शारीरिक रूप से आने और इकट्ठा होने के लिए मजबूर न हो।

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वैवाहिक मामले में लगाए गए आरोपों के आधार पर बन सकता है आपराधिक मानहानि का मामला : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महिला को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने पाया कि महिला द्वारा उसके पति के खिलाफ फैमिली कोर्ट के समक्ष दिया गया बयान 'आपराधिक मानहानि' के दायरे में आताा है। हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत में दायर याचिकाएं और दिए गए बयान धारा 499 के अर्थ में 'प्रकाशन' के समान होते हैं, इसलिए अगर ऐसे बयान मानहानि करने वाले होते हैं तो सजा हो सकती है। न्यायमूर्ति डॉ एच.बी प्रभाकर शास्त्री ने सुषमा रानी की तरफ से दायर अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। सुषमा रानी ने वर्ष 2012 में रिवीजन कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में उसे दी गई एक माह के साधारण कारावास की सजा को रद्द कर दिया, परंतु उस पर लगाए गए जुर्माने की राशि को 5000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया है, जो उसे 1 अक्टूबर से 60 दिनों की अवधि के भीतर अदा करना होगा, अन्यथा महिला को एक महीने के लिए साधारण कारावास की डिफॉल्ट सजा काटनी होगी।

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पत्नी का दिल की बीमारी का खुलासा किए बिना शादी के लिए पति की सहमति प्राप्त करना धोखाधड़ी से कम नहीं है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में, जिसमें पत्नी ने अपनी हृदय संबंधी बीमारियों का खुलासा किए बिना, शादी के लिए पति की सहमति प्राप्त की थी, कहा कि यह भौतिक तथ्यों को छुपाने का मामला था और निस्संदेह बेईमानी थी और धोखा से कम नहीं था। जस्टिस एएम शफीक़ और जस्टिस मैरी जोसेफ की खंडपीठ, फैमिली कोर्ट, इरिंजालाकुडा, के ‌खिलाफ पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। परिवार न्यायालय ने अपने आदेश में विवाह को निरस्त घोष‌ित कर दिया था और पत्नी को, पति की याचिका की तारीख से 12% की दर से ब्याज के साथ 10 हजार रुपए के सामान्य नुकसान का भुगतान करने का निर्देश दिया था। ( दोनों का विवाह 28.03.2008 को हुआ था।)

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याचिकाकर्ता सैन्य जीवन शैली के लिए उपुयक्त नहीं और संभवतः पिता की इच्छाओं ने उसे पेशे में धकेला, दिल्ली हाईकोर्ट ने पिता को सलाह दी कि वह बेटे को अपने जीवन का रास्ता चुनने की आजादी दें

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि याचिकाकर्ता सैन्य जीवन शैली के लिए उपुयक्त नहीं है और संभवतः पिता की इच्छाओं ने उसे पेशे में धकेला है, हाल ही में याचिकाकर्ता के पिता (लेफ्टिनेंट कर्नल) को सलाह दी कि वह अपने बेटे को जीवन का रास्ता चुनने की स्वतंत्रता दें, ओर जो रास्ता भी वह चुनता है, उसमें उसे खिलने की अनुमति दें, जो निश्चित रूप से भारतीय सेना नहीं है। जस्टिस आशा मेनन और राजीव सहाय एंडलॉ की बेंच ने भारतीय सेना के एक युवा अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।

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[तब्ली‍गी जमात] उन्होंने ऐसी कोई लापरवाही नहीं की, जिससे COVID फैलता, सरकार के आदेश का पालन भी कियाः बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 विदेशी नागरिकों को रिहा किया

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट (12 वीं कोर्ट, बांद्रा, मुंबई) ने बुधवार (29 सितंबर) को 12 इंडोनेशियाई नागरिकों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। ये विदेशी नगारिक भी तब्लीगी जमात का हिस्‍सा थे। उल्लेखनीय है कि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट जयदेव वाई घुले का यह आदेश बां�

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