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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपील की अवधि की समाप्ति/ अपील के निपटान तक संपत्तियों में तोड़फोड़ नहीं करने का आदेश दिया

LiveLaw News Network
17 Oct 2020 6:51 AM GMT
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपील की अवधि  की समाप्ति/ अपील के निपटान तक संपत्तियों में तोड़फोड़ नहीं करने का आदेश दिया
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पारित एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि विध्वंस (Demolish) के आदेश केे खिलाफ अपील दायर करने की अवधि समाप्त होने तक, या उस मामले में जहां अपील दायर की गई है, उसके निपटान तक की अवधि समाप्त होने तक विध्वंस (तोडफ़ोड़) की गतिविधियां न करें।

जस्टिस शशि कांत गुप्ता और पंकज भाटिया की खंडपीठ ने आदेश दिया,

"राज्य के अधिकारियों को जहां कभी भी दो अधिनियमों के तहत निजी संपत्तियों पर किए गए निर्माणों के संबंध में विध्वंस के आदेश पारित किए जाते हैं, उन्हें वास्तविक विध्वंस के लिए कोई कार्रवाई करने से पहले अपील की वैधानिक अवधि समाप्त होने तक इंतजार करना चाहिए। वैधानिक आदेशों में दायर अंतरिम आवेदन के निपटान तक अधिकारियों ने विध्वंस के आदेशों को निष्पादित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।"

खंडपीठ का यह निर्देश यह नोट करने के बाद आया कि,

बड़ी संख्या में मामलों को दायर करने के कारण न्यायालय पर "बोझ" बढ़ रहा है, जो अपील दायर करने के लिए निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले ही विध्वंस भवन संचालन का विनियमन अधिनियम, 1958 और यू.पी. शहरी नियोजन और विकास अधिनियम, 1973 के तहत आ रहे हैं।

न्यायालय ने कहा कि क़ानून व्यथित पक्ष के लिए 30 दिनों की राहत प्रदान करता है, जिसके खिलाफ अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर करने के लिए विध्वंस का एक आदेश पारित किया जाता है।

हालांकि, इस अवधि की समाप्ति से पहले, विध्वंस को अंजाम देने के लिए अधिकारियों द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं।

न्यायालय ने आगे उल्लेख किया कि विध्वंस की गतिविधियों को शुरू किए जाने के समय को लेकर यह क़ानून अपने आप में चुप है, इसलिए निम्नलिखित दिशा निर्देश पारित किए गए।

1. राज्य अधिकारियों, जहां कभी भी दो अधिनियमों के तहत निजी संपत्तियों पर किए गए निर्माणों के संबंध में विध्वंस के आदेश पारित किए जाते हैं, उन्हें वास्तविक विध्वंस के लिए किसी भी कार्रवाई करने से इंतजार करना चाहिए जब तक कि अपील की वैधानिक अवधि समाप्त नहीं हो जाती।

2. अपीलीय प्राधिकारी ने दोनों अधिनियमों को सशक्त बनाया, अपील के साथ दायर अंतरिम आवेदनों पर निर्णय लेने का प्रयास करना चाहिए।

3. दायर अंतरिम आवेदन के निपटान तक वैधानिक अपील अधिकारियों को विध्वंस आदेशों को निष्पादित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।

4. विध्वंस के आदेशों की प्रतियां अधिनियमों के तहत उन व्यक्तियों को दी जानी चाहिए जिनके खिलाफ आदेश पारित किए गए हैं।

प्रस्तावित विध्वंस के आदेशों को उन व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देने के बाद पारित किया जाना चाहिए जिनके खिलाफ आदेश पारित किए जाने का प्रस्ताव है।

केस का शीर्षक: अब्बास अंसारी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश और अन्य।

एपीरियन्स: वरिष्ठ अधिवक्ता उदय करण सक्सेना और अधिवक्ता रवींद्र कुमार त्रिपाठी और प्रियव्रत त्रिपाठी।

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