मुख्य सुर्खियां
प्रक्रिया शुल्क का भुगतान न करने के कारण शिकायत को खारिज करना पुनरीक्षण योग्य: केरल उच्च न्यायालय
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि आपराधिक शिकायत प्रक्रिया शुल्क का भुगतान न करने या आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 204 (4) के तहत निस्तारित अन्य शुल्कों के लिए खारिज कर दी जाती है, तो यह अपील योग्य आदेश नहीं है, लेकिन पुनरीक्षण योग्य है।अदालत ने कहा कि यदि शिकायत को शिकायतकर्ता के हाजिर न होने या उसकी मृत्यु के कारण खारिज किया गय है, तो वह CrPC की धारा 256 के तहत आरोपी को बरी करने के समान है। जस्टिस ए बदरुद्दीन ने कहा, इसलिए, शिकायतकर्ता के लिए उपचार CrPC की धारा 378(4) के तहत अपील दायर करना...
जब तक कि उन्हें शादी का आश्वासन न दिया जाए, तब तक सिर्फ मनोरंजन के लिए भारत में अविवाहित लड़कियां कामुक गतिविधियों में लिप्त नहीं होतीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर खंडपीठ) ने हाल ही में कहा, "भारत एक रूढ़िवादी समाज है, यह अभी तक सभ्यता के उस स्तर (उन्नत या निम्न) तक नहीं पहुंचा है, जहां अविवाहित लड़कियां ... लड़कों के साथ केवल मनोरंजन के लिए कामुक गतिविधियों में शामिल हों, जब तक कि यह भविष्य में विवाह के किसी वादे/आश्वासन के साथ समर्थित न हो।"जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की खंडपीठ ने कहा कि एक लड़का, जो एक लड़की के साथ शारीरिक संबंध में प्रवेश करता है, उसे यह समझ होनी चाहिए कि उसके कार्यों के परिणाम हैं और वह इसका सामना करने के लिए...
'गिरजे का कानून सामान्य कानून की जगह नहीं ले सकता': केरल हाईकोर्ट ने चर्च की संपत्तियों से निपटने के लिए धर्मस्व कानून के अभाव पर दु:ख जताया
केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि गिरजे का कानून (Canon Law) को विशेष रूप से किसी ट्रस्ट या दान की संपत्ति या प्रबंधित संपत्ति से संबंधित मामलों में सामान्य कानून के रूप लागू नहीं किया जा सकता है।बेंच ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण पाया कि देश में चर्च के अधिकारियों और उनके द्वारा चलाए जा रहे चैरिटेबल संस्थानों की कानूनी स्थिति के इर्द-गिर्द घूमने वाली शिकायतों और कानूनी निहितार्थों को दूर करने के लिए एक धर्मस्व कानून का अभाव है।न्यायमूर्ति पी. सोमराजन ने सिरो मालाबार चर्च के प्रमुख आर्कबिशप, कार्डिनल मार...
COVID-19: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अपने, अधीनस्थ न्यायालयों और न्यायाधिकरणों द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेशों को 31अगस्त तक आगे बढ़ाने का आदेश रद्द किया
गुवाहाटी हाईकोर्ट की फुल बेंच ने शुक्रवार को असम में COVID-19 स्थिति में सुधार के कारण सभी अधीनस्थ न्यायालयों, न्यायाधिकरणों और अन्य के लिए लागू अंतरिम आदेशों को आगे बढ़ाने के आदेश को रद्द कर दिया।कोर्ट ने 10 मई के आदेश के तहत उसके, उसकी बाहरी बेंचों और अन्य अधीनस्थ न्यायालयों और ट्रिब्यूनलों द्वारा पारित अंतरिम आदेशों को 1 जून, 2021 तक बढ़ा दिया था। अब इस आदेश को रद्द कर दिया गया है।मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया, न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह और न्यायमूर्ति मनश रंजन पाठक की फुल बेंच ने COVID-19...
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला को गलत तरीके से छूने वाले ज्योतिषी को जमानत देने से इनकार किया, 'मानव बलि' के लिए चाकू मारा था
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ज्योतिषी को एक महिला को अनुचित तरीके से छूने और बाद में 'मानव बलि' के बहाने उस पर चाकू से वार करने के आरोप में जमानत देने से इनकार कर दिया है।अभियोजन पक्ष ने तांत्रिक पर आरोप लगाया था कि उसने उसकी मां के स्वास्थ्य में सुधार और उसकी व्यक्तिगत समस्याओं को हल करने के बहाने उसके साथ डेढ़ लाख रुपए की धोखाधड़ी की, जिसके बाद जस्टिस योगेश खन्ना ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।महिला के अनुसार, ज्योतिषी उसे पिछले डेढ़ साल से परेशान कर रहा था और 4 मई, 2018 को वह उसे दिल्ली के एक...
सरकारी आश्रय गृह में नाबालिग लड़की ने कथित तौर पर की आत्महत्या: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर विवरण मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार से 17 वर्षीय नाबालिग की मौत का विवरण मांगा, वह प्रयागराज जिले के नारी निकेतन में रहती थी, जो कि महिलाओं के लिए एक सरकारी आश्रय गृह (Government Shelter home) है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार-चतुर्थ की पीठ इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करने वाली एक पत्र याचिका पर विचार कर रही थी और इसे अब एक जनहित याचिक के रूप में दर्ज किया गया है।स्वदेश एंड प्रयाग लीगल एड क्लिनिक सोसाइटी एंड चार अन्य द्वारा एडवोकेट...
राजस्थान हाईकोर्ट ने नौकरी ज्वाइन करने से पहले बच्चे को जन्म देने वाली महिला को मातृत्व अवकाश देने के सिंगल जज के फैसले को बरकरार रखा
राजस्थान हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने सिंगल जज के फैसले को बरकरार रखा है कि एक सरकारी महिला कर्मचारी मातृत्व अवकाश का लाभ उठाने की हकदार है, यदि वह कन्फाइनमेंट की अवधि के भीतर यानि बच्चे के जन्म के 15 दिन से तीन महीने पहले ज्वाइन करती है, इस तथ्य के बावजूद कि बच्चे का जन्म ज्वाइन करने की तारीख से पहले या सेवा में नियुक्ति जारी होने से पहले हुआ था।जस्टिस विनित कुमार माथुर और जस्टिस इंद्रजीत महंती की खंडपीठ ने अतिरिक्त एडवोकेट जनरल पंकज शर्मा की दलील को खारिज कर दिया कि प्रतिवादी-मां बच्चे के प्रसव...
मंदिरों के 5 किलोमीटर के दायरे में गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध, असम विधानसभा में 'असम मवेशी संरक्षण विधेयक 2021' पारित
असम विधान सभा ने 'असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021' (जो मौजूदा असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 1950 की जगह लेता है) को हंगामे के बीच गुरुवार को पारित कर दिय। विपक्ष विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग मांग कर रहा था, और मांग न माने जाने के बाद उसने सदन से वाकआउट किया।इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार , जो "मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन को विनियमित करने" का प्रस्ताव करता है, गायों को केवल सरकार की पूर्व अनुमति से और वह भी केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही वध करने की अनुमति होगी।"विधेयक में...
यूपी एडहॉक शिक्षकों की याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने टीजीटी/पीजीटी परीक्षा के आवेदन के लिए वेतन विवरण दाखिल करने की आवश्यकता पर राज्य सरकार से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (11 अगस्त, 2021) को उत्तर प्रदेश राज्य को एडहॉक (तदर्थ) शिक्षकों के मुद्दे पर एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा 7/8 अगस्त और 17/18 अगस्त को आयोजित टीजीटी/पीजीटी परीक्षाओं के संबंध में एडहॉक शिक्षकों के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष है कि ऐसे शिक्षक कोषागार से वेतन भुगतान की तिथि का विवरण भरे बिना, अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसी पक्ष पर उत्तर प्रदेश राज्य को हलफनामा दायर करने के लिए कहा है।जस्टिस एसके कौल और जस्टिस...
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020 को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया
राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष यह दावा करते हुए कि राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020 के प्रावधान एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक राज्य की अवधारणा के खिलाफ हैं, राज्य विधान को चुनौती देने वाली एक याचिका दायर की गई है।मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर की पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए भारत संघ और राजस्थान राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया।राजस्थान राज्य ने 23 सितंबर, 2020 को आधिकारिक राजपत्र में राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020...
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कोर्ट जज के खिलाफ किए ट्वीट की जांच के करने का आदेश दिया
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस सप्ताह की शुरुआत में अदालत के खिलाफ कथित तौर पर किए गए ट्वीट्स की एक सीरीज की जांच का आदेश दिया।न्यायमूर्ति राज मोहन सिंह की खंडपीठ ने अपने रजिस्ट्रार-विजिलेंस के लिए किए गए ट्वीट्स की जांच के लिए तीन सप्ताह की समय सीमा निर्धारित की है।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता के पिता को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में आईपीसी की धारा 306 के तहत दर्ज एक मामले में याचिकाकर्ता विशाल कपूर को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी थी।इस तथ्य से दुखी होकर कि याचिकाकर्ता को...
'सार्वजनिक परिवहन में महिला हेल्पलाइन नंबर लगाए जाएं': कलकत्ता हाईकोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में सार्वजनिक परिवहन बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए।अदालत के समक्ष दायर याचिका में कहा गया कि ऐसी सार्वजनिक बसों में यात्रा करते समय महिलाओं को अक्सर परेशान किया जाता है और कभी-कभी यौन उत्पीड़न किया जाता है और इस संबंध में अदालत से निर्देश देने की मांग की गई थी। एक ट्रांसजेंडर वकील अंकानी बिस्वास ने भी हस्तक्षेप याचिका दायर की थी। उसने कहा कि सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हुए उसके...
झारखंड के एडवोकेट जनरल ने हाईकोर्ट जज को मामले से अलग करने की मांग की; कहा- याचिकाकर्ता के वकील को यह कहते हुए सुना कि मामले को 200% अनुमति दी जाएगी
झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामला (उनके द्वारा सुनवाई की जा रही) रखने का निर्देश दिया। दरअसल, झारखंड के एडवोकेट जनरल राजीव रंजन ने जज को मामले से अलग करने की मांग करते हुए कोर्ट को बताया कि उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील को यह कहते हुए सुना कि इस मामले को 200% अनुमति दी जाएगी।न्यायमूर्ति द्विवेदी ने कहा कि केवल महाधिवक्ता के इस तरह प्रस्तुत करने पर न्यायालय को मामले से अलग होने की आवश्यकता नहीं है।न्यायमूर्ति द्विवेदी ने आगे कहा कि,"न्याय प्रदान...
दिव्यांगों और बेड पर लेटे लोगों पर होम वैक्सीनेशन का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी की सराहना की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि यह देखना उत्साहजनक है कि मुंबई नागरिक निकाय (बीएमसी) द्वारा COVID-19 के लिए घरों में रहने वाले अपाहिज या स्थिर रोगी को वैक्सीनेशन (एईएफआई) के बाद कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) अपाहिज और स्थिर रोगी के वैक्सीनेशन के संबंध में सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य के अन्य सभी नागरिक निकायों और जिला परिषदों को इसका पालन करना चाहिए।एक हलफनामे में बीएमसी...
"ट्रायल कोर्ट रेप पीड़िता को दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना के लिए संदर्भित करने में विफल रहा": दिल्ली हाईकोर्ट ने डीएसएलएसए को मुआवजा देने के निर्देश दिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार और पीछा करने के अपराधों में शामिल व्यक्ति की सजा के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही ने न केवल आत्मविश्वास को प्रेरित किया बल्कि विश्वसनीय, सुसंगत और स्वीकार्य है।कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट पीड़िता को दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना, 2018 में संदर्भित करने के लिए अपने कर्तव्य में विफल रहा, जहां बलात्कार पीड़िता के लिए 4 लाख रूपये का न्यूनतम मुआवजा और अधिकतम मुआवजा 7 लाख रुपये निर्दिष्ट है।न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने निर्देश दिया कि,"यह न्यायालय दिल्ली...
लॉकडाउन का उल्लंघन: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 188 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि सीआरपीसी की धारा 195 केवल मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने पर रोक लगाती है न कि पुलिस जांच पर।न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल ने कहा,"सीआरपीसी की धारा 195 द्वारा निर्धारित प्रतिबंध केवल संज्ञान लेने के संबंध में है। यह एफआईआर दर्ज करने और उसकी जांच करने के लिए पुलिस की वैधानिक शक्ति को प्रतिबंधित नहीं करता है।"न्यायाधीश ने समझाया कि प्रतिबंध केवल मजिस्ट्रेट पर सीआरपीसी की धारा 195 में उल्लिखित अपराधों यानी सिवाय लोक सेवक द्वारा लिखित में की गई शिकायत के आईपीसी की धारा...
'दवाओं की कमी के कारण किसी मरीज को परेशानी न हो': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज के लिए एम्फोटेरिसिन बी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि राज्य में ब्लैक फंगस (Black Fungus) के रोगियों के लिए एम्फोटेरिसिन बी (Amphotericin B) इंजेक्शन और अन्य दवाएं सुनिश्चित करें और आगे कहा कि दवाओं की कमी के कारण किसी मरीज को परेशानी न हो।मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश सरकार के चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को ब्लैक और सफेद फंगस या राज्य में इसी तरह की अन्य बीमारी के रोगियों की संख्या के संबंध में सटीक स्टेटस रिपोर्ट...
'धर्मांतरण रैकेट' मामले में जिस महिला से हुई थी पूछताछ, उसने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा, स्वयंभू निगरानी समूह उस पर हिंदू धर्म में वापस लौटने का दबाव बना रहे
एक महिला, जिसने 2018 में इस्लाम धर्म अपना लिया था और हाल ही में उत्तर प्रदेश के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने कथित 'धर्मांतरण रैकेट' मामले के संबंध में उससे फोन पर पूछताछ की थी, उसने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर कर आरोप लगाया है कि स्वयंभू निगरानी समूह उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाल रहे हैं और उसे हिंदुत्व की ओर लौटने के लिए कह रहे हैं।मामले की सुनवाई करते हुए, जस्टिस मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने 6 अगस्त को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह महिला को जामिया नगर और शाहीन बाग पुलिस स्टेशनों के...
बाल भिक्षावृत्ति: दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रभावित बच्चों के पुनर्वास की मांग करने वाली याचिका पर डीसीपीसीआर और अन्य को नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में बाल भिक्षावृत्ति की समस्या और इससे संबंधित अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति अमित बंसल की खंडपीठ ने नोटिस जारी कर 27 सितंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा।याचिका अधिवक्ता अजय गौतम ने दायर की है।याचिका में बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 में निहित प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।याचिका में कहा गया है,"बच्चों...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने COVID-19 मौतों का आंकड़ा कम बताने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार की COVID-19 प्रतिक्रिया और प्रबंधन पर दायर जनहित याचिका (PIL) याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुनाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को कई निर्देश जारी किए।मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की पीठ ने राज्य को फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए राज्य की COVID-19 मुआवजा योजना से संबंधित एक सार्वजनिक अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया ताकि संबंधित हितधारकों को जागरूक किया जा सके और तदनुसार लाभ...


















