मुख्य सुर्खियां

दिल्ली हाईकोर्ट
सरकारी वकीलों द्वारा छह महीने पहले जमा किए गए बिलों को मंजूरी दी जानी चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से कहा

दिल्ली हाईकोर्ट मौखिक रूप से केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि उनके साथ काम कने वाले वकीलों के छह महीने पहले से जमा किए गए बिलों को जल्द से जल्द मंजूरी दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने कहा,"मान लीजिए कि सात महीने पहले एक बिल दायर किया गया था। इसे मंजूरी देनी होगी।"यह निर्देश अधिवक्ता पीयूष गुप्ता द्वारा दायर एक याचिका में आया है। याचिका में दिल्ली सरकार, भारत संघ और विभिन्न नगर निकायों से जुड़े विभिन्न सरकारी वकीलों के बिलों को मंजूरी देने की मांग...

स्वतंत्र भाषण पर कठोर प्रभाव पड़ेगा: आईएमए प्रमुख और अन्य ने हिंदू धर्म पर ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के आरोप का जवाब दिया
'स्वतंत्र भाषण पर कठोर प्रभाव पड़ेगा': आईएमए प्रमुख और अन्य ने हिंदू धर्म पर ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के आरोप का जवाब दिया

दिल्ली की एक अदालत में दायर दीवानी मुकदमे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, उसके अध्यक्ष और महासचिव ने कहा है कि मुकदमे का स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति के उनके मौल‌िक अधिकार पर कठोर प्रभाव पड़ेगा। मुकदमे में कथित तौर पर हिंदू धर्म पर ईसाई धर्म को बढ़ावा देने और आयुर्वेद पर एलोपैथी को श्रेष्ठ दिखाने का आरोप लगाया गया है। मामले में प्रतिवादियों ने एक सामान्य उत्तर दायर किया है। उन्होंने मुकदमे के सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाया है। उनकी ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है, "वादी इस बात से अवगत हैं कि उनके...

फोन टैपिंग: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मॉनिटरिंग एंड इंटरसेप्शन के लिए विस्तृत जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया के बारे में पूछा
फोन टैपिंग: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से "मॉनिटरिंग एंड इंटरसेप्शन" के लिए विस्तृत जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया के बारे में पूछा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह भारत के नागरिकों के फोन की मॉनिटरिंग और इंटरसेप्शन के लिए अपनाए गए कानून और प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताए।मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया है।इस याचिका में आरोप लगाया गया कि इसकी 'सामान्य निगरानी तंत्र' सरकार नागरिकों के बारे में पर्याप्त मात्रा में जानकारी एकत्र कर रही है, जो इंटरनेट के माध्यम से इक्टठी की जाती...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
ट्रांसजेंडर ने माता-पिता द्वारा कथित तौर पर कस्टडी में रखे गए उसके प्रेमी को पेश करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया

एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति ने प्रेमी (लड़की) को पेश करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसे उसके माता-पिता ने कथित तौर पर कस्टडी में रखा है।न्यायमूर्ति श्रीकांत डी. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति वी. के. जाधव की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ए.पी.पी. से मामले में विशेष निर्देश लेने को कहा।याचिकाकर्ता के मामले के अनुसार, ट्रांसजेंडर व्यक्ति यानी पूजा कुमारी @ बनी प्रजापति और एक लड़की, जिसे पूजा नाम से भी जाना जाता है, स्वेच्छा से एक-दूसरे के साथ रहते हैं और वे एक-दूसरे से प्यार...

दिल्ली कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित सांप्रदायिक टिप्पणी के मामले में सूरज पाल अमू और यति नरसिंहानंद के खिलाफ दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी
दिल्ली कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित सांप्रदायिक टिप्पणी के मामले में सूरज पाल अमू और यति नरसिंहानंद के खिलाफ दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी

दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में करणी सेना प्रमुख सूरज पाल अमू और डासना देवी मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज दो शिकायतों पर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित "सांप्रदायिक भड़काऊ और विभाजनकारी टिप्पणी" करने के आरोप में दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है।कानून के एक शिक्षक फैजल अहमद खान ने अधिवक्ता सरीम नावेद, कामरान जावेद और अंशु डावर के माध्यम से आपराध‌िक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से बयान देने के आरोप में...

COVID-19 की तीसरी लहर की आशंका: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेशों को 30 सितंबर तक बढ़ाया
COVID-19 की तीसरी लहर की आशंका: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेशों को 30 सितंबर तक बढ़ाया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को अदालतों के प्रतिबंधित कामकाज के कारण लोगों को विध्वंस और बेदखली से बचाने के लिए राज्य में अदालतों और न्यायाधिकरणों द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेशों की अवधि 30 सितंबर तक बढ़ा दी। (2021 का स्वत: संज्ञान जनहित याचिका संख्या 1)मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ ने इससे पहले COVID-19 की स्थिति में सुधार को देखते हुए सभी अंतरिम आदेशों को 30 अगस्त से आगे बिना शर्त विस्तार जारी रखने से इनकार कर दिया था।हालांकि, मंगलवार को अदालत ने नोट किया कि राष्ट्रीय कार्य बल...

God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
'कुटिल साजिश रची गई': मद्रास हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार के खिलाफ झूठा मामला दायर करने के लिए दो वकीलों को अदालत की अवमानना ​​का दोषी ठहराया

मद्रास हाईकोर्ट ने दो वकीलों को अदालत की अवमानना का दोषी पाया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वकीलों ने रजिस्ट्रार (सतर्कता) को पद से हटाने के लिए, उन पर एक 'चिढ़ाऊ मुकदमा' दायर किया। उन्होंने एक फर्जी हलफनामा दायर किया कि रजिस्ट्रार आवश्यक योग्यताओं के बिना पद पर बनी हुई हैं। जस्टिस पीएन प्रकाश और जस्टिस आरएन मंजुला की बेंच ने कहा, " रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्रियों की सावधानीपूर्वक जांच करने पर, हम पूरी तरह से संतुष्ट हैं कि कथित अवमाननाकर्ताओं ने मिलकर काम किया है और WPNo.14434 of 2020 के...

राष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति सीके अब्दुल रहीम को केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष नियुक्त किया
राष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति सीके अब्दुल रहीम को केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष नियुक्त किया

राष्ट्रपति ने केरल हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीके अब्दुल रहीम को केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (केएटी) में अध्यक्ष के रूप किया है।न्यायमूर्ति सीके अब्दुल रहीम की यह नियुक्ति चार साल (उनके 70 वर्ष की उम्र तक होने तक) की अवधि के लिए है।कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में यह भी कहा गया कि पद की सेवा की शर्तें ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों द्वारा शासित होंगी।केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल एडवोकेट्स एसोसिएशन ने...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
"अभियुक्त को अभियोक्‍ता की ओर से वकील को शामिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती": मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया, जिसके वकील के पास पीड़िता का वकालतनामा था

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में यह यह रेखांकित करते हुए कि अभियुक्त को अभियोक्ता (पीड़ित पक्षकार) की ओर से वकील को शामिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, एक बलात्कार आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अभियुक्त के वकील के पास पीड़िता का वकालतनामा था।जस्टिस जीएस अहलूवालिया की खंडपीठ ने IPC की धारा 376-डी, 366 और 506 के तहत दर्ज मामले में रामहेत की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके वकील ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि उसके पास अभियोक्ता का वकालतनामा है।संक्षेप में तथ्यआवेदक के...

सप्ताह में एक बार वर्चुअल सुनवाई आयोजित होगी, वादियों के लिए प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा: बॉम्बे हाईकोर्ट की समीक्षा समिति
सप्ताह में एक बार वर्चुअल सुनवाई आयोजित होगी, वादियों के लिए प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा: बॉम्बे हाईकोर्ट की समीक्षा समिति

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीसरी लहर की आशंका के बीच कोर्ट परिसर के अंदर वादियों के प्रवेश को प्रतिबंधित करना जारी रखने और सभी अदालतों में सुनवाई की एक पूरी हाइब्रिड प्रणाली को लागू करने का प्रयास करने का फैसला किया है।मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता में सोमवार को हुई अपनी प्रशासनिक समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वादियों को अदालत के अंदर तभी अनुमति दी जाएगी जब उनकी उपस्थिति की आवश्यकता होगी।वहीं वकीलों और क्लर्कों को अपना पहचान पत्र दिखाने के बाद परिसर में प्रवेश करने की अनुमति दी...

राष्ट्रीय झंडे को सूर्यास्त के बाद भी फहरता हुआ छोड़ना कदाचार हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहींः मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय
राष्ट्रीय झंडे को सूर्यास्त के बाद भी फहरता हुआ छोड़ना कदाचार हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहींः मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह कहा कि राष्ट्रीय ध्वज को सूर्यास्त के बाद भी फहराता हुआ छोड़ना, शायद जानबूझकर या अनजाने में किया गया भुलक्‍कड़पन, दुराचार हो, लेकिन यह इसे अवमाननापूर्ण कार्य नहीं कहा जा सकता है।जस्टिस एसए धर्माधिकारी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि ध्वज संहिता निर्देश मात्र हैं, जिनमें कानून का बल नहीं है, इसलिए सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच राष्ट्रीय ध्वज को फहराना कानून द्वारा निषिद्ध नहीं है।मामलान्यायालय 482 CrPC आवेदन पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ताओं के...

क्या अस्पतालों के प्रशासन, प्रबंधन और सुरक्षा के लिए एसओपी का पालन किया जा रहा है?: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा
क्या अस्पतालों के प्रशासन, प्रबंधन और सुरक्षा के लिए एसओपी का पालन किया जा रहा है?: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह अस्पतालों के सभी स्तरों अर्थात जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए एसओपी/योजना का विवरण मांगते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण को निर्देश दिया कि क्या यूपी के सभी अस्पतालों में इन एसओपी को सख्ती से लागू किया जा रहा है।न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में...

मैला ढोने वालों का रोजगार: कर्नाटक हाईकोर्ट ने जिलाधिकारियों को अवमानना ​​की चेतावनी देते हुए राज्यों को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा
मैला ढोने वालों का रोजगार: कर्नाटक हाईकोर्ट ने जिलाधिकारियों को अवमानना ​​की चेतावनी देते हुए राज्यों को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा

कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि "अब से कर्नाटक राज्य में अधिनियम और नियमों के वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए कोई मैनुअल स्कैवेंजिंग नहीं होगी," सोमवार को संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को मैला ढोने वाले और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के रूप में रोजगार निषेध का उचित अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की खंडपीठ ने कहा,"अधिनियम और नियमों के तहत वैधानिक प्रावधानों का पालन न करना और इस आदेश का उल्लंघन अदालत की...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
पत्नी ने मैट्रिमोनियल साइट पर प्रोफाइल अपलोड की: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 'मानसिक क्रूरता' के आधार पर पति को तलाक की मंजूरी दी

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने 'मानसिक क्रूरता' के आधार पर 36 वर्षीय पति को तलाक की मंजूरी दी।जस्टिस जीए सनप ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत साबित करते हैं कि प्रतिवादी-पत्नी ने अपीलकर्ता-पति को मानसिक पीड़ा दी जिससे उसके लिए उसके साथ रहना असंभव हो गया। उन्होंने कहा कि यह साबित हो गया है कि मानसिक क्रूरता ऐसी है कि इससे अपीलकर्ता के स्वास्थ्य को नुकसान होने की पूरी संभावना है। आगे कहा कि फैमिली कोर्ट पिछले साल पति की तलाक की याचिका को खारिज करते हुए दो मैट्रिमोनियल वेबसाइटों पर पत्नी के...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट अवमानना के ताज़ा मामलों को फाइल करने की स्क्रूटनी के संबंध में निर्देश जारी किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट की अवमानना ​​के मामलों की ताजा फाइलों की स्क्रूटनी (जांच) करने के लिए कार्यालय की आपत्तियां उठाने के संबंध में रजिस्ट्री को निर्देश जारी किए। यह निर्देश सीसीसी संख्या 586/2021 में 11 अगस्त, 2021 के एक आदेश का हिस्सा हैं।निर्देशों के संबंध में परिपत्र का प्रासंगिक पाठ नीचे दिया गया है:*जब भी अवमानना ​​याचिका में यह आरोप लगाया जाता है कि राज्य सरकार के एक अधिकारी ने अपनी आधिकारिक क्षमता में इस कोर्ट के किसी आदेश का उल्लंघन किया है, तो यह उचित होगा कि कर्नाटक राज्य...

कार्यस्थल पर मेल सुपीरियर के साथ गलतफहमी से यौन उत्पीड़न के अपराध का गठन नहीं होता : मद्रास हाईकोर्ट
कार्यस्थल पर मेल सुपीरियर के साथ गलतफहमी से यौन उत्पीड़न के अपराध का गठन नहीं होता : मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने लोयोला कॉलेज सोसाइटी द्वारा एक पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली एक बर्खास्त महिला कर्मचारी को 64.3 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश देने वाले तमिलनाडु महिला आयोग के आदेश को रद्द कर दिया।हाईकोर्ट द्वारा बुधवार को सुनाए गए फैसले में कहा गया कि व्यक्तिगत झगड़े, गलतफहमी और पुरुष सहकर्मी के साथ नहीं मिलने से यौन उत्पीड़न नहीं होगा।न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार ने पाया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 की धारा 3...

God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
ईपीएफ पेंशन : कर्मचारी पेंशन योजना के तहत गुमशुदा व्यक्ति के बाद आश्रित को लाभ का दावा करने के लिए पुलिस प्रमाण पत्र जरूरी

मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक महिला को परित्यक्त पति की ईपीएफ पेंशन योजना के लाभों का दावा करने के लिए एक FIR दर्ज कराना और यह पुलिस प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक है कि वह जीवित है या नहीं।जस्टिस एस वैद्यनाथन की एकल पीठ ने एक महिला द्वारा दायर रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की, जो अपने बेटे की मृत्यु के बाद कर्मचारी पेंशन योजना के तहत पेंशन लाभ की मांग कर रही थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसके पति ने 2005 में परिवार छोड़ दिया था। इसलिए, उसने ईपीएफ अधिकारियों को अपने बेटे द्वारा...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
"मध्यस्थता के माध्यम से विवादों को सुलझाना संभव": बॉम्बे हाईकोर्ट ने कथित तौर पर एसएमएस के जरिए 'तीन तलाक' देने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कथित तौर पर एसएमएस के जरिए 'तीन तलाक' देने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी और कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से पति और पत्नी के बीच विवादों और मतभेदों को सुलझाना संभव है।न्यायमूर्ति संदीप के शिंदे की पीठ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और मुस्लिम महिला (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दर्ज अदनान इकबाल मौलवी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।पत्नी ने अपनी शिकायत में कहा कि उसने अप्रैल 2015 में मौलवी से शादी की और शादी के 1 महीने...

उचित और वैध आलोचना स्वागतयोग्य, मगर यह द्वेषरहित हो: कलकत्ता हाईकोर्ट ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाने को लेकर लिखे पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के पत्र विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार किया
'उचित और वैध आलोचना स्वागतयोग्य, मगर यह द्वेषरहित हो': कलकत्ता हाईकोर्ट ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाने को लेकर लिखे पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के पत्र विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार किया

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के अध्यक्ष के खिलाफ दायर एक याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की ओर से हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना को लिखे गए पत्र में कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को हटाने की मांग की गई थी। जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस सुभाषिस दासगुप्ता की पीठ ने अधिवक्ता अक्षय सारंगी की जनहित याचिका पर फैसला सुनाया, जिसमें पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के अध्यक्ष अशोक कुमार देब के खिलाफ...

भले ही जांच पीड़ा की उपेक्षा करते हुए अक्षम तरीके से की गई हो, लेकिन पीड़ितों के बयानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में एक के खिलाफ आरोप तय किए
"भले ही जांच पीड़ा की उपेक्षा करते हुए अक्षम तरीके से की गई हो, लेकिन पीड़ितों के बयानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता": दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में एक के खिलाफ आरोप तय किए

दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में रोहित नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने कहा कि भले ही इस मामले में जांच पीड़ा की उपेक्षा करते हुए अक्षम तरीके से की गई हो, लेकिन पीड़ितों के बयानों को अदालत द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा,"जो भी हो यह ध्यान देने योग्य है कि इस मामले में जांच अत्यधिक कठोर, अक्षम और अनुत्पादक प्रतीत होती है, लेकिन जैसा कि इस स्तर पर पहले इस न्यायालय ने उल्लेख किया है...