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"मध्यस्थता के माध्यम से विवादों को सुलझाना संभव": बॉम्बे हाईकोर्ट ने कथित तौर पर एसएमएस के जरिए 'तीन तलाक' देने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कथित तौर पर एसएमएस के जरिए 'तीन तलाक' देने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी और कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से पति और पत्नी के बीच विवादों और मतभेदों को सुलझाना संभव है।न्यायमूर्ति संदीप के शिंदे की पीठ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और मुस्लिम महिला (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दर्ज अदनान इकबाल मौलवी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।पत्नी ने अपनी शिकायत में कहा कि उसने अप्रैल 2015 में मौलवी से शादी की और शादी के 1 महीने...
'उचित और वैध आलोचना स्वागतयोग्य, मगर यह द्वेषरहित हो': कलकत्ता हाईकोर्ट ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाने को लेकर लिखे पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के पत्र विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार किया
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के अध्यक्ष के खिलाफ दायर एक याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की ओर से हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना को लिखे गए पत्र में कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को हटाने की मांग की गई थी। जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस सुभाषिस दासगुप्ता की पीठ ने अधिवक्ता अक्षय सारंगी की जनहित याचिका पर फैसला सुनाया, जिसमें पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के अध्यक्ष अशोक कुमार देब के खिलाफ...
"भले ही जांच पीड़ा की उपेक्षा करते हुए अक्षम तरीके से की गई हो, लेकिन पीड़ितों के बयानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता": दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में एक के खिलाफ आरोप तय किए
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में रोहित नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने कहा कि भले ही इस मामले में जांच पीड़ा की उपेक्षा करते हुए अक्षम तरीके से की गई हो, लेकिन पीड़ितों के बयानों को अदालत द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा,"जो भी हो यह ध्यान देने योग्य है कि इस मामले में जांच अत्यधिक कठोर, अक्षम और अनुत्पादक प्रतीत होती है, लेकिन जैसा कि इस स्तर पर पहले इस न्यायालय ने उल्लेख किया है...
'लोगों को विश्वास करने, कल्पना करने और विचार करने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए': मद्रास हाईकोर्ट ने ज्योतिषीय अंधविश्वास के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने की मांग वाली याचिका खारिज की
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी, जिसमें ज्योतिषीय अंधविश्वासों के खिलाफ संबंधित अधिकारियों को व्यापक रूप से जन जागरूकता फैलाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।कोर्ट ने कहा कि लोगों को अपनी ज्योतिषीय मान्यताओं पर विश्वास करने, कल्पना करने और विचार करने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति पी डी औदिकेसवालु की पीठ ने उठाई गई चिंता को संबोधित करते हुए कहा,"नागरिकों को अधिक वैज्ञानिक व्यवस्था की ओर उन्मुख करने और अंधविश्वासों को...
फिजिकल या हाइब्रिड? तकनीक के उपयोग पर गुजरात हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में मतभेद
गुजरात हाईकोर्ट वर्चुअल हियरिंग शुरू करने वाले देश के पहले हाईकोर्ट में से एक है। COVID-19 की शुरुआत में हाईकोर्ट की केवल कुछ ही बेंच काम कर रही थीं, लेकिन समय बीतने और COVID-19 मामलों में वृद्धि के साथ लगभग सभी बेंच वर्चुअल काम करने लगीं।मुख्य न्यायाधीश की अदालत ने YouTube पर कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करके एक कदम और आगे बढ़ाया। लाइव स्ट्रीमिंग की स्वीकार्यता और सफलता से प्रसन्न होकर हाईकोर्ट की लगभग सभी अदालतों ने लाइव स्ट्रीमिंग को अपनाया लिया।मगर इसके साथ ही अदालत के फिजिकल और...
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व पति के खिलाफ पत्नी द्वारा दायर की गई शिकायतों के बारे में पति को जानकारी देने से इनकार करने वाले सीआईसी के आदेश को बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा पारित उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक पति को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत उसकी पत्नी द्वारा अपने दो पूर्व पतियों और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज की गई शिकायतों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया गया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि चूंकि मांगी गई जानकारी केवल पत्नी ही नहीं बल्कि उसके पूर्व पति और अन्य व्यक्तियों से संबंधित है, जिनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी, इसलिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत प्राप्त...
प्राइमरी टीचर सरकार के तहत सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में से एक होने चाहिए: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षक के पद से जुड़े वेतन, भत्ते और अनुलाभ आकर्षक होने चाहिए।न्यायमूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति दीपक कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने आगे कहा,"वास्तव में एक प्राथमिक शिक्षक सरकार के तहत सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में से एक होने चाहिए ताकि समाज में उपलब्ध सबसे मेधावी लोगों को आकर्षित किया जा सके और उनमें से सर्वश्रेष्ठ गुणों वालों को...
यह देखना पीड़ादायी है कि दंगों के अधिकांश मामलों में जांच का स्तर बहुत ही खराब हैः दिल्ली की कोर्ट ने पुलिस की खिंचाई की, उपचारात्मक उपायों का आह्वान किया
दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों से संबंधित मामलों की जांच के तरीके पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है। अदालत ने आरोपपत्र दाखिल करने और अदालत के समक्ष जांच अधिकारियों की गैर-उपस्थिति पर सवाल उठाया है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने मामले में तत्काल उपचारात्मक कार्रवाई का आह्वान किया है और पूर्वोत्तर जिले के डीसीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति का संज्ञान लेने को कहा है।कोर्ट ने कहा है, "यह और भी दुखद है कि बड़ी संख्या में दंगों के मामलों में जांच का स्तर बहुत खराब है।...
कानूनी सहायता पैनल के माध्यम से केवल 1% गिरफ्तार लोगों का प्रतिनिधित्व : जस्टिस ललित ने जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया
न्यायमूर्ति यू.यू. ललित ने कहा कि कानूनी सहायता वंचितों तक पहुंचनी चाहिए, जिससे वे जल्द से जल्द अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें।न्यायमूर्ति यू.यू. ललित राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (यूपीएसएलएसए) द्वारा आयोजित "कानूनी सहायता में सक्रिय दृष्टिकोण की क्षमता रखने हेतु कार्यक्रम: प्रारंभिक चरणों में हस्तक्षेप" ("Capacity Building Programme on Pro-active Approach in Legal Assistance: Intervention at early stages') के उद्घाटन...
पीड़ित को आरोपी को अपर्याप्त सजा के आधार पर सीआरपीसी के तहत अपील दाखिल करने का कोई अधिकार नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो पीड़ित को आरोपी को दी गई सजा को बढ़ाने की मांग करते हुए अपील दाखिल करने का अधिकार प्रदान करता है, इस आधार पर कि आदेश में अपर्याप्त सजा सुनाई गई है।न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार सिंह और न्यायमूर्ति अरविंद श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि अपर्याप्त सजा के खिलाफ अध्याय XXIX के तहत निर्धारित एकमात्र प्रावधान धारा 377 है जो राज्य सरकार द्वारा सजा को बढ़ाने के लिए अपील दाखिल करने का प्रावधान करता है।अदालत सीआरपीसी की धारा 372 के...
COVID-19: बॉम्बे हाईकोर्ट में केवल पूरी तरह से वैक्सीनेटेड व्यक्तियों को लोकल ट्रेनों में यात्रा करने की अनुमति देने के राज्य के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर
बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की गई है। याचिका में केवल पूरी तरह से वैक्सीनेटेड व्यक्तियों' को लोकल ट्रेनों में यात्रा करने, मॉल और कार्यस्थलों पर जाने की अनुमति दी देने वाले महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है।याचिका में मुंबई महानगर क्षेत्र के सभी लोगों को उनके वैक्सीनेशन की स्थिति के बावजूद ट्रेनों में यात्रा करने की अनुमति देने की मांग की गई है।अवर सचिव और मुख्य सचिव द्वारा 10 और 11 अगस्त को एसओपी जारी कर कोरोना वैक्सीन नहीं लेने वाले लोगों को लोकल ट्रेन में यात्रा करने से...
अतिरिक्त साक्ष्य लेने की शक्ति- "सीआरपीसी की धारा 391 सीपीसी के ऑर्डर XLI नियम 27 के समान; अपीलीय कोर्ट को शक्ति का संयम से उपयोग करना चाहिए": इलाहाबाद हाईकोर्ट
यह रेखांकित करते हुए कि आपराधिक संहिता की धारा 391 के तहत प्रदत्त शक्तियां नागरिक प्रक्रिया संहिता के आदेश XLI नियम 27 के समान है, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अपीलीय अदालत द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य लेने की ऐसी शक्तियों का इस्तेमाल संयम से किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने जोर देकर कहा कि इस्तेमाल की जाने वाली इस प्रकार की शक्तियां एक विवेकाधीन प्रकृति की होती हैं और इसका उपयोग साक्ष्य की खामियों को पूरा करने और कमियों को पाटने के लिए नहीं किया जा सकता...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह के फैसले के मद्देनजर जांच करने के तरीके पर अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में पुलिस महानिदेशक, यू.पी. को सभी जांच अधिकारियों को संबंधित पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से जांच करने के तरीके पर एक सर्कुलर/आदेश जारी करने के लिए कहा है।न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने उन्हें यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि सभी जांच अधिकारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाए और उक्त प्रशिक्षण के लिए समय-सारणी / रोस्टर बनाकर एक वर्ष के भीतर आवधिक प्रशिक्षण का पहला चरण पूरा किया जाए।फोरेंसिक और वैज्ञानिक जांच के लिए प्रशिक्षण सहित राज्य की विभिन्न पुलिस...
बलात्कार पीड़िता की जांच - "मेडिकल ऑफिसरों को सीआरपीसी की धारा 164 ए (2) और (3) के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दें" : इलाहाबाद एचसी ने राज्य सरकार से कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते यूपी सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (Chief Medical Officers) को एक सर्कुलर जारी करके चिकित्सा अधिकारियों को सीआरपीसी के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दे। न्यायालय ने विशेष रूप से कहा कि सीआरपीसी की धारा 164 ए (2) और (3) के तहत मेडिकल रिपोर्ट और उनकी अस्थायी/ प्राथमिक राय (provisional/primary opinion) जमा करते समय सीआरपीसी के प्रावधानों का सख्ती से पालन हो।न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि...
बिना कामुक आशय के सिर्फ गालों को छुना POCSO के तहत यौन उत्पीड़न के अपराध को आकर्षित नहीं करेगा : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को POCSO एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम) (Protection of Children from Sexual Offences Act– POCSO) के तहत विभिन्न अपराधों के आरोप में गिरफ्तार गए एक आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि कामुक आशय (sexual intent) के बिना सिर्फ गालों को छूना 'यौन उत्पीड़न' के अपराध को आकर्षित नहीं करेगा, जैसा कि POCSO अधिनियम की धारा 7 के तहत परिभाषित किया गया है।न्यायमूर्ति संदीप के शिंदे की पीठ ने 46 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर सामग्री का...
दिल्ली कोर्ट ने पत्नी को मौखिक रूप से तलाक देने और गैंगरेप करने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत दी
दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को तलाक का उच्चारण करने [मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 के उल्लंघन में] और अपनी पत्नी पर सामूहिक बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत दे दी।हालांकि, सामूहिक बलात्कार के तथ्य का अभी पता नहीं चल पाया है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार ने यह देखते हुए आदेश दिया कि मामले के सभी तथ्य जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। हालांकि, इस अवधि के दौरान आरोपी का बचाव मजबूत था, इसलिए, वह जमानत का हकदार है।संक्षेप में मामलायह...
'पुलिस को खुद नहीं पता था कि वे मामले की जांच कर रहे हैं': दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में दिल्ली कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया
दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस के आचरण पर आश्चर्य व्यक्त किया कि दिल्ली दंगों के दौरान अपने प्रतिवादी द्वारा उसके घर पर हमले का आरोप लगाने वाली शिकायत को उसी घटना की एक और एफआईआर के साथ जोड़ने के बारे में दिल्ली पुलिस को जानकारी ही नहीं।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ ने कहा,"हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन पुलिस को खुद नहीं पता था कि वह मामले की जांच कर रही है। फिर जब बताया गया तो पता चला कि वह मामले की जांच कर रही है, जिसका विवरण उन्हें नहीं पता।"यह नोट किया गया कि शिकायत मार्च...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय पर एक नज़र
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय पर एक नज़रकर्ज चुकाने से इनकार करना आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्टजम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि हालांकि अलग-अलग व्यक्ति किसी विशेष स्थिति पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लेकिन केवल ऋण चुकाने से इनकार करने को किसी भी तरह से आत्महत्या करने के लिए उकसाने का कार्य नहीं माना जा सकता है।न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल ने इस संबंध में कहा, "दुष्प्रेरण का अपराध गठित करने के लिए अभियुक्त द्वारा किया गया कार्य इस प्रकार का होना...
एमसी छागला ने साहस के साथ सत्ता से सच बोला : जस्टिस रियाज छागला ने अपने दादा को याद किया
बॉम्बे हाईकोर्ट के पहले भारतीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महोम्मदेली करीम छागला ने अपने कार्यों और भाषणों के माध्यम से 1975 में आपातकाल की "अंधेरे ताकतों" के खिलाफ साहसपूर्वक आवाज़ उठाई और हिरासत से डरने वालों को अपने घर में आश्रय दिया।यह बात न्यायमूर्ति रियाज छागला ने शनिवार को अपने दादा न्यायमूर्ति महोम्मदेली करीम छागला के कार्यों को याद करते हुए कही।न्यायमूर्ति छागला ने कहा,"सत्ता के सामने सच बोलना एक ऐसे अधिकार का साहसपूर्वक सामना करने की अभिव्यक्ति है, जो अन्याय को रोकता है और बदलाव की...
कर्ज चुकाने से इनकार करना आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि हालांकि अलग-अलग व्यक्ति किसी विशेष स्थिति पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लेकिन केवल ऋण चुकाने से इनकार करने को किसी भी तरह से आत्महत्या करने के लिए उकसाने का कार्य नहीं माना जा सकता है।इस संबंध में न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल ने कहा,"दुष्प्रेरण का अपराध गठित करने के लिए अभियुक्त द्वारा किया गया कार्य इस प्रकार का होना चाहिए ताकि मृतक के पास अपने जीवन को समाप्त करने का चरम कदम उठाने के अलावा कोई अन्य विकल्प न बचे।"यह टिप्पणी हाईकोर्ट द्वारा सीआरपीसी की धारा...
















