मुख्य सुर्खियां
दिल्ली दंगे: कोर्ट ने मामले में चार लोगों को बरी किया, कहा- लूट और आगजनी करने वाले दंगाइयों के रूप में उनकी पहचान 'बेहद संदिग्ध'
दिल्ली कोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों से संबंधित एक मामले में चार लोगों को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता के घर में लूट और आगजनी करने वाले दंगाइयों के रूप में उनकी पहचान बेहद संदिग्ध है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने आईपीसी की धारा 149, 143, 147, 148, 380, 436 के तहत मुकदमे का सामना कर रहे दिनेश, साहिल, संदीप और टिंकू को बरी कर दिया।शिकायतकर्ता अफजल सैफी से प्राप्त लिखित शिकायत के आधार पर गोकलपुरी पुलिस में प्राथमिकी 64/2020 दर्ज की गई थी। आरोप था कि दंगाइयों ने उनके घर को...
एयर इंडिया विनिवेश: मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को शेयर परचेज एग्रीमेंट प्रस्तुत करने के लिए कहा
मद्रास हाईकोर्ट ने विनिवेश के खिलाफ एयर इंडिया के ट्रेड यूनियनों में से एक द्वारा दायर एक याचिका में केंद्र सरकार को अदालत के समक्ष विवादास्पद शेयर परचेज एग्रीमेंट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।न्यायमूर्ति वी. पार्थिबन ने याचिकाकर्ता के इस तर्क पर ध्यान दिया कि शेयर परचेज एग्रीमेंट उस मामले को तय करने में महत्वपूर्ण है जिसमें सभी संबंधित पक्षों के लिए उच्च दांव शामिल हैं।पीठ ने कहा,"अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया जाता है कि वे सुनवाई की अगली तारीख को या उससे पहले शेयर परचेज एग्रीमेंट...
बक्सर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आदेशानुसार बिहार न्यायिक अधिकारी और कोर्ट स्टाफ ने मंदिर की सफाई की
[नोट: 10 जनवरी, 2022 को जारी एक आदेश के अनुसार, जिला न्यायाधीश के आदेश के तहत नोटिस (इस खबर का विषय) वापस ले लिया गया।]बिहार के बक्सर कोर्ट के न्यायिक अधिकारियों और कोर्ट स्टाफ ने रविवार को बिहार के बक्सर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा जारी एक प्रशासनिक आदेश के अनुसार मंदिरों की सफाई की।कोर्ट के सभी पीठासीन अधिकारियों को उनके संबंधित अदालत के कर्मचारियों के साथ सर्किट हाउस के बगल में स्थित मंदिरों की सफाई करने का निर्देश देते हुए नोटिस में इस संबंध में पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा जारी...
वित्तीय निहितार्थ या व्यापक प्रभाव वाले नीतिगत फैसलों में न्यायिक हस्तक्षेप अनुचित: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वित्तीय निहितार्थ और/या व्यापक प्रभाव (cascading effect) संबंधित नीतिगत फैसले में न्यायपालिका का हस्तक्षेप बिल्कुल भी आवश्यक और उचित नहीं है।मौजूदा मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कुछ कर्मचारियों की रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को जल और भूमि प्रबंधन संस्थान (WALMI) के कर्मचारियों को पेंशन लाभ देने का निर्देश दिया था। महाराष्ट्र राज्य और अन्य ने मामले में मौजूदा अपीलें दायर की थी। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य रूप से यह तर्क देते हुए अपील दायर की कि...
मद्रास हाईकोर्ट ने बांध सुरक्षा अधिनियम की शक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा
मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के उल्लंघन के रूप में हाल ही में अधिनियमित बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।एक्टिंग चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस पीडी औदिकेसवालु की पीठ ने मामले में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एएसजी आर. शंकरनारायणन द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए भारत संघ को तीन सप्ताह का समय दिया।मयिलादुथुराई से द्रमुक सांसद एस. रामलिंगम ने यह याचिका दायर करते हुए कहा कि केंद्र विवादित कानून के माध्यम से...
आदर्श क्रेडिट सहकारी समिति : राजस्थान हाईकोर्ट ने जमाकर्ता के दावे के आवेदन का शीघ्र निपटान करने का आदेश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के एक जमाकर्ता द्वारा दायर दावा आवेदन पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया।हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि उक्त निर्णय को कानून के अनुसार 90 दिन के भीतर लिया जाना चाहिए।जस्टिस दिनेश मेहता ने दिया आदेश,"प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से नब्बे दिनों की अवधि के भीतर सख्ती से क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार, याचिकाकर्ता द्वारा दायर आवेदन...
असम रेरा कानून के अनुसार काम नहीं कर रहा: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए कहा कि असम रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा), कानून के अनुसार काम नहीं कर रहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्राधिकरण और उसके अध्यक्ष को नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस सौमित्र सैकिया की खंडपीठ अनीता वर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर विचार कर रही थी। याचिका में कहा गया कि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के तहत बनाया गया एक वैधानिक प्राधिकरण कानून के अनुसार काम नहीं कर रहा है।याचिकाकर्ता ने यह भी...
डोरस्टेप राशन वितरण योजना सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार को कैसे रोकेगी? दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार की राशन की डोर स्टेप डिलीवरी की योजना का विरोध करने वाली दिल्ली सरकार राशन डीलर्स संघ की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह की खंडपीठ ने सोमवार को दिल्ली सरकार से सवाल किया कि उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) से जुड़ी मौजूदा योजना की तुलना में खाद्यान्न वितरण में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रस्तावित योजना बेहतर कैसे है।दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ एएम सिंघवी ने दावा किया कि डोरस्टेप डिलीवरी योजना का उद्देश्य...
सीआरपीसी की धारा 482: 'ऐसी याचिका सुनवाई योग्य होगी जिसमें दुष्प्रभाव के कारण कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई हो': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत ऐसी याचिका सुनवाई योग्य होगी जिसमें सीआरपीसी (न्यायाधीशों और लोक सेवकों के अभियोजन) की धारा 197 के तहत आवश्यक मंजूरी के अभाव में दुष्प्रभाव के कारण कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई हो।न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय की खंडपीठ ने न्यायिक मजिस्ट्रेट फर्रुखाबाद द्वारा एक लेखपाल (आवेदक संख्या 1) और एक कानूनगो (आवेदक संख्या 2), चकबंदी विभाग (दोनों लोक सेवकों) के खिलाफ आवश्यक मंजूरी प्राप्त किए बिना पारित एक समन आदेश को रद्द कर दिया जैसा कि...
वैवाहिक बलात्कार को अपवाद की श्रेणी में रखना महिला की गरिमा, व्यक्तिगत और यौन स्वायत्तता और अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन: याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
भारत में वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) के अपराधीकरण की मांग करने वाली याचिकाओं के समूह के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट में दो याचिकाकर्ताओं ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत वैवाहिक बलात्कार को अपवाद की श्रेणी में रखना एक महिला की गरिमा, व्यक्तिगत और यौन स्वायत्तता के अधिकार और भारत के संविधान के तहत निहित आत्म अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन है।यह याचिकाकर्ता आरआईटी फाउंडेशन और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमेन्स एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) द्वारा न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी हरि...
विभिन्न बैंकों में कुल 6208.03 करोड़ रुपये पड़े हैंः डीएमआरसी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DMRC) ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष खुलासा किया है कि विभिन्न बैंकों में उसके कुल 6208.03 करोड़ रुपये पड़े हैं।डीएमआरसी ने दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) द्वारा दायर याचिका में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करते हुए उक्त जानकारी दी है, जिसमें 11 मई, 2017 को मध्यस्थता अवार्ड को लागू करने की मांग की गई थी।हाईकोर्ट ने पिछले महीने डीएमआरसी को निर्देश दिया था कि वह बैंक खातों में पड़ी अपने पैसों का विवरण प्रस्तुत करे। अदालत ने...
सीआरपीसी की धारा 482- एफआईआर/आरोप पत्र रद्द की मांग वाली याचिका में साक्ष्य की सराहना नहीं की जा सकती : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एफआईआर/आरोप पत्र रद्द करने के लिए याचिका की सुनवाई करने वाली अदालत साक्ष्य की सराहना नहीं कर सकती, क्योंकि यह ट्रायल कोर्ट के क्षेत्र में है।जस्टिस श्रीनिवास हरीश कुमार ने कहा,"यह एक स्थापित सिद्धांत है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका पर फैसला करते समय सबूतों की सराहना नहीं की जा सकती, क्योंकि यह ट्रायल कोर्ट के क्षेत्र में है।"याचिकाकर्ता प्रदीप मोपार्थी और अन्य भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323, 504, 506 और 498-ए और...
बलात्कार का अपराध माफ नहीं किया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता के साथ समझौता और शादी करने वाले सरकारी कर्मचारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बलात्कार के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा है कि इस तरह की एफआईआर को पक्षकारों के बीच हुए समझौते और उसके बाद विवाह करने के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह कथित अपराध माफ/समाप्त नहीं करता।यह दोहराते हुए कि बलात्कार का कृत्य किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है बल्कि समाज के खिलाफ एक अपराध है, जस्टिस रजनीश भटनागर ने कहा कि''वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता एक सरकारी कर्मचारी है, जो सीमा शुल्क और सीजीएसटी विभाग, भारत सरकार...
प्राइवेट डिटेक्टिव की गतिविधियां अनियंत्रित और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
दिल्ली हाईकोर्ट में प्राइवेट डिटेक्टिव और उनकी एजेंसियों की गतिविधियों के नियमन की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया कि प्राइवेट डिटेक्टिव, जांचकर्ताओं और उनकी एजेंसियों का काम किसी भी मौजूदा वैधानिक ढांचे के दायरे से बाहर रहता है।चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला सूचीबद्ध किया गया।एडवोकेट प्रीति सिंह के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि 2007 का प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसीज (रेगुलेशन) बिल पिछले 13 साल से संसद में लंबित है...
'वकील होने के नाते तुच्छ जनहित याचिका दायर नहीं करनी चाहिए': उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यूजीसी फंड कुप्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज की
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एक वकील होने के नाते, याचिकाकर्ता को यूजीसी फंड के कुप्रबंधन पर कोई विशेष उदाहरण बताए बिना एक तुच्छ जनहित याचिका दायर नहीं करनी चाहिए।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने याचिकाकर्ता को आगे कोई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के बिना जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति दी।अधिवक्ता एम.सी. पंत, याचिकाकर्ता ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग [यूजीसी] को निजी प्रतिवादियों और प्रायोजक समितियों के खिलाफ उचित कदम उठाने,...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विधानसभा चुनाव के लिए मंडी स्थल के उपयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका का निपटारा किया; डीएम को 10 दिन में फैसला लेने के आदेश दिए
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका का निपटारा किया, जिसमें राज्य को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए नवीन मंडी स्थल (बाजार) का उपयोग नहीं करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।याचिका में यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई है कि मंडी क्षेत्र में कृषि उत्पादों की बिक्री और खरीद में कोई हस्तक्षेप न हो।एडवोकेट प्रभा नैथानी के माध्यम से दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि हर साल की तरह, इस साल भी नवीन मंडी स्थल का उपयोग कृषि उपज की बिक्री और खरीद के लिए किया जा रहा...
अस्थायी निवास किसी केस को स्थानांतरित करने का वैध आधार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा दायर स्थानांतरण याचिकाओं के एक समूह पर आदेश दिया कि किसी याचिका को इस आधार पर किसी अन्य जगह पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, जहां पक्षकार अस्थायी रूप से रहने चले गए हैं।इस प्रकार अदालत ने देखा कि पक्षकारों के अस्थायी निवास के क्षेत्र अधिकार में लंबित मामलों को इस आधार पर स्थानांतरित करना विधिसम्मत नहीं होगा कि अब पक्षकार अस्थायी रूप से उस स्थान में रह रहा है। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने स्थानांतरण याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस तरह की याचिकाओं को...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सिगरेट ब्रांड 'टोटल' के जैसा 'ट्रेड ड्रेस' इस्तेमाल करने कारण टोपाज़ के खिलाफ जारी अंतरिम निषेधाज्ञा को बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सिगरेट ब्रांड 'टोपाज़ के खिलाफ जारी एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को बरकरार रखा है। उक्त कंपनी कथित रूप से भ्रामक पैकेजिंग/ट्रेड ड्रेस के जरिए अपने सामान को एक अन्य सिगरेट ब्रांड 'टोटल' के रूप में प्रसारित कर रहा था।जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने यह कहते हुए आक्षेपित आदेश में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्णय लिया, "पैकेजिंग/सिगरेट बॉक्स की मूल पृष्ठभूमि का रंग गहरा मेटलिक ब्लैक और डार्क ब्लू का शेड है, जो एक जैसा है। दोनों बक्सों पर रिब्ड लाइनें भी हैं....। पैकेजिंग के अगले...
स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज करने में जांच एजेंसी की विफलता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि अभियोजन, नियमित रूप से, मुकदमे के दरमियान स्वतंत्र गवाहों को पेश करने पर जोर नहीं देता है, हाल ही में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा जांच के दरमियान ऐसे गवाहों के बयान दर्ज करने में विफलता को अदालतों द्वारा गंभीरता से देखा जाना चाहिए।जस्टिस अताउरहमान मसूदी और जस्टिस मनीष कुमार ने हत्या के मामले में सजा के खिलाफ दायर एक आपराधिक अपील का निस्तारण करते हुए आगे राय दी कि वह समय दूर नहीं जब अदालतों को ऐसे गवाहों को स्वतः संज्ञान लेकर खुद सम्मन करना होगा, जिसके लिए गवाह...
पुलिस को विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों के खिलाफ हरियाणा के मुख्यमंत्री के कथित भड़काऊ भाषण के प्रभाव की जांच करनी चाहिए: शिकायतकर्ता ने दिल्ली कोर्ट में कहा
विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका में शिकायतकर्ता ने दिल्ली कोर्ट (Delhi Court) में कहा है कि उक्त भाषण के प्रभाव का पता लगाने के लिए मामले में पुलिस जांच की आवश्यकता है।एडवोकेट अमित साहनी द्वारा दायर शिकायत मामले में खट्टर को तलब करने और संबंधित पुलिस अधिकारियों को मामले में प्राथमिकी दर्ज करके उनके खिलाफ जांच करने का निर्देश देने...

















