मुख्य सुर्खियां
"मां पहले से ही सरकारी सर्विस में है": हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की नीति के मद्देनजर अनुकंपा नियुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में बेटे (अपने पिता के स्थान पर नौकरी) द्वारा दायर अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) की मांग वाली याचिका को खारिज किया।कोर्ट ने कहा कि उसकी मां पहले से ही सरकारी सेवा में है, और इसलिए अनुकंपा के आधार पर राज्य की नीति के अनुसार उसे नौकरी नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति सबीना और न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने यह भी कहा कि मृतक कर्मचारी के परिवार का एक आश्रित सदस्य इस संबंध में राज्य द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार ही अनुकंपा नियुक्ति...
"न्याय मांगने पर मिली तारीख पर तारीख, लिखना अदालत की अवमानना के दायरे में नहीं" : राजस्थान हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ न्यायिक अधिकारी की याचिका खारिज की
एडवोकेट रजाक के. हैदरराजस्थान हाईकोर्ट ने जज द्वारा एक अधिवक्ता के खिलाफ पेश अवमानना याचिका खारिज कर दी। याचिका में वकील पर अदालत के खिलाफ फेसबुक पर टिप्पणी करने का आरोप था।उक्त वकील ने फेसबुक पर लिखा था कि न्याय मांगने पर अदालत से मिली तारीख पर तारीख।कोर्ट ने कहा,"न्याय मांगने पर मिली तारीख पर तारीख" लिखना अदालत की अवमानना के दायरे में नही।"एक आपराधिक मामले में लगातार तारीख पर तारीख मिलने पर अधिवक्ता गोवर्धन सिंह द्वारा फेसबुक पर लिखी गई पोस्ट को आपत्तिजनक बताते हुए न्यायिक अधिकारी द्वारा दर्ज...
योगदान जमा करने में नियोक्ता के विफल रहने पर ईएसआई कोटा के तहत एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन से वंचित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने नीट उम्मीदवार को राहत दी
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर बेंच ने नीट उम्मीदवार को एमबीबीएस/बीडीएस कोर्स में एडमिशन के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया में ईएसआईसी कोटा (बीमाकृत व्यक्ति का कोटा वार्ड) का लाभ उठाने की अनुमति दी है।इस तथ्य के बावजूद कि संबंधित नियोक्ता द्वारा कर्मचारी राज्य बीमा निगम में अपेक्षित योगदान का भुगतान नहीं किया गया है, अदालत ने कहा कि उम्मीदवार को कोटा के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है, बशर्ते उसके पिता, बीमित व्यक्ति ने कट-ऑफ तिथि से पहले अपने योगदान का भुगतान किया हो।न्यायमूर्ति अशोक कुमार गौर ने...
'हमारे अधिकार धीरे-धीरे मर रहे हैं': यूएपीए आरोपी अतीक और अन्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, चार्जशीट की प्रति की मांग की
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के आरोपी अतीक उर रहमान, मो. मसूद और आलम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। इन्होंने हाईकोर्ट में आवेदन दायर कर 2020 में यूपी पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद उनके खिलाफ दर्ज मामले में आरोप पत्र की प्रतियां और अन्य दस्तावेज की मांग की।इन लोगों को यूपी पुलिस ने 2020 में उस वक्त गिरफ्तार किया था जब ये हाथरस में सामूहिक बलात्कार और हत्या की शिकार के पीड़िता के परिवार के सदस्यों से मिलने उनके घर जा रहे थे।यह ध्यान दिया जा सकता है कि उन्हें केरल के एक...
कपल अधिकार के रूप में पुलिस सुरक्षा नहीं मांग सकते, उन्हें अपने परिवारों को मनाने का प्रयास करना चाहिए : राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने परिवार से धमकी मिलने की आशंका में घर से भागे प्रेमी जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।अदालत ने कहा कि उसके पास यह निष्कर्ष निकालने के लिए कोई सामग्री या कारण नहीं है कि याचिकाकर्ताओं का जीवन और स्वतंत्रता खतरे में है।न्यायमूर्ति दिनेश मेहता ने आगे कहा,"यदि याचिकाकर्ताओं ने शादी करने का फैसला किया है तो उन्हें समाज का सामना करने के लिए दृढ़ता दिखानी चाहिए और उनके परिवार को उनके द्वारा उठाए गए कदम को स्वीकार करने के लिए राजी करना चाहिए।"वर्तमान मामले...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को पुनर्वास केंद्रों, अनाथालयों आदि में रहने वाले मानसिक रूप से बीमार लोगों को उचित चिकित्सा उपचार प्रदान करने के निर्देश दिए
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने कर्नाटक राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को पुनर्वास केंद्रों, वृद्ध घरों, निराश्रित केंद्रों, पागलखाना, अनाथालयों आदि में मानसिक रूप से बीमार लोगों को उचित चिकित्सा उपचार प्रदान करने के लिए उचित और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी और न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने सदस्य सचिव, हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति द्वारा दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए कहा, "हम 9 वें प्रतिवादी को निर्देश देना उचित समझते हैं। कर्नाटक...
हाईकोर्ट मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 तहत अपील में दावे के गुण-दोष की जांच नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत एक अपील में दावे के गुणदोष की जांच नहीं कर सकता है। इस मामले में, मध्यस्थ ने एक पक्ष को 9.5 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। दूसरे पक्ष ने मध्यस्थ द्वारा पारित निर्णय के खिलाफ मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, चंडीगढ़ के समक्ष आपत्ति याचिका दायर की। उक्त याचिका खारिज कर दी गई।इसके बाद, मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 के तहत हाईकोर्ट के समक्ष एक और अपील दायर की गई। उक्त अपील को...
COVID-19 के बीच कांग्रेस को पदयात्रा की अनुमति कैसे दी जा सकती है? कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी को यह बताने का निर्देश दिया कि क्या उसने कावेरी नदी पर मेकेदातु परियोजना शुरू करने की मांग करते हुए 10 दिवसीय पदयात्रा आयोजित करने के लिए कोई उचित अनुमति ली है।मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी और न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने नागेंद्र प्रसाद एवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राजनीतिक दल को यह भी सूचित करने का निर्देश दिया है कि क्या उक्त रैली में वे अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित कदम उठा रहे हैं। राज्य सरकार...
विकलांग व्यक्ति स्वयं एक समरूप वर्ग बनाते हैं, वे एससी/एसटी समुदाय के समान नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को नीट-2021 में एससी/एसटी कम्यूनिटी पर विकलांगों के लिए उच्च आरक्षण का मार्ग प्रशस्त करने वाले एक खंड को बरकरार रखते हुए एक फैसले में कहा कि राज्य सरकार को विशिष्ट विशेषता-युक्त व्यक्तियों के वर्गों को मान्यता देने के लिए अधिकृत किया गया है और कानून के तहत उन्हें अलग मानें।एक याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस एन नागरेश ने कहा कि विकलांग व्यक्ति अपने आप में एक अलग समरूप वर्ग का गठन करते हैं और उनकी विकलांगता सामाजिक पिछड़ेपन से संबंधित होने के बजाय शारीरिक है। "राज्य...
दिल्ली हाईकोर्ट ने दंपत्ति को प्रताड़ित करने वाले आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए यूपी सरकार को अंतिम अवसर दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को भगोड़े दंपत्ति के उत्पीड़न के मामले में आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई जांच में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का एक आखिरी मौका दिया।परिवार की मर्जी के खिलाफ एक महिला से शादी करने वाले दिल्ली के शख्स के पिता और भाई को यूपी पुलिस ने अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किया। वहीं दंपति ने दावा किया कि उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस को बताए बिना उनके दिल्ली स्थित आवास से की गई।उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले...
भरण-पोषण का दावा फैसले की तारीख से नहीं आवेदन दाखिल करने की तिथि से प्रभावी होगा: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि भरण-पोषण का दावा आवेदन दाखिल करने की तारीख से प्रभावी होगा न कि फैसले की तारीख से।जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने इस मामले में रजनीश बनाम नेहा और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। साथ ही आवेदन की तिथि से मासिक भत्ते के भुगतान का निर्देश देते हुए आक्षेपित आदेश में संशोधन किया।अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक पुनर्विचार आवेदन से यह मामला शुरू हुआ। इसमें न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के आवेदन को स्वीकार कर...
कर्मचारियों के निहित अधिकारों को पूर्वव्यापी रूप से छीन रहे नियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के खिलाफ: बैंक पेंशनभोगियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एक संशोधन, जिसकी पूर्वव्यापी प्रयोज्यता है और मौजूदा नियमों के तहत एक कर्मचारी को पहले से उपलब्ध लाभ को छीन लेता है, कर्मचारी को उसके निहित/ अर्जित अधिकारों से वंचित कर देगा और इस प्रकार, अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत अधिकारों का उल्लंघन करेगा।कोर्ट ने कहा, "... यदि कर्मचारी जो पहले से ही पदोन्नत या किसी विशेष वेतनमान में नियत किया गया था, यदि उसे पूर्वव्यापी रूप से लागू नियमों की योजना द्वारा छीन लिया जा रहा है तो निश्चित रूप से पदधारी के...
"गिरफ्तारी के बाद दिए गए बयानों का कानून की नजर में कोई महत्व नहीं": कोर्ट ने दिल्ली दंगों के एक मामले में छह लोगों को डिस्चार्ज किया
दिल्ली कोर्ट ने 2020 में राष्ट्रीय राजधानी में हुए उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में छह लोगों को डिस्चार्ज किया।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने देखा कि आरोपियों के खिलाफ एकमात्र आपत्तिजनक सामग्री उनकी गिरफ्तारी के परिणामस्वरूप उनके द्वारा दिए गए बयान हैं। कोर्ट ने कि इस तरह के बयानों का कानून की नजर में कोई महत्व नहीं है।कोर्ट ने आमिर, सद्दाम, मो. सेक के तहत रहीस, आमिर, अकरम और वसीम को आईपीसी की धारा 149147, 148, 427, 436 के तहत दर्ज मामले में डिस्चार्ज किया।डीडी एंट्री...
"सीएए का लाभ उपलब्ध है": गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पूर्वी-पाकिस्तान के अप्रवासी को नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए कहा, 'विदेशी' घोषित करने के आदेश को रद्द किया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में एक विदेशी ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द किया। ट्रिब्यूनल ने एक हिंदू व्यक्ति को विदेशी घोषित किया था। वह व्यक्ति पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आया था।कोर्ट ने उसे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 का लाभ उठाकर नागरिकता के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह और न्यायमूर्ति मालाश्री नंदी की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया, जो बबलू पॉल की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिन्होंने विदेशी ट्रिब्यूनल- II के विदेशी घोषित करने के 2017 के आदेश को...
मुंबई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में अनिल देशमुख के वकील और तीन अन्य को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
मुंबई की एक सत्र अदालत ने मुंबई के वकील इंदर पाल सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जो हाईकोर्ट के साथ-साथ सत्र न्यायालय के समक्ष महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की ओर से पेश हो रहे हैं।सिंह पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की एक महिला सदस्य का शील भंग करने का आरोप है। महिला पार्टी के उत्तर मुंबई की पूर्व जिला अध्यक्ष है।सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की शील भंग करने के लिए हमला), 509 (शील भंग करने के लिए शब्द) और 34 (सामान्य इरादा) और सूचना...
सीआईडी चार्जशीट दाखिल करने के लिए अधिकृत नहीं, कार्यवाही प्रभावित: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुजारी को बरी करने का आदेश बरकरार रखा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने निचली अदालत के 2016 के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसके तहत उसने बलात्कार के एक मामले में आरोपी श्री रामचंद्रपुरा मठ के पुजारी राघवेश्वर भारती श्री स्वामीजी को आरोप मुक्त/बरी कर दिया था।जस्टिस वी श्रीशानंद ने कहा कि इस मामले में आरोप पत्र अधिकृत व्यक्ति द्वारा दायर नहीं किया गया था।कोर्ट ने कहा,"यदि आरोप पत्र किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर किया जाता है, जो अंतिम रिपोर्ट दर्ज करने के लिए अधिकृत व्यक्ति नहीं है, जैसा कि सीआरपीसी की धारा 173 के तहत विचार किया गया है तो पूरी...
फैमिली कोर्ट अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के कारण किसी बच्चे को गोद देने के लिए सक्षम प्राधिकारी: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में यह निर्धारित किया कि संबंधित क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र वाले फैमिली कोर्ट को बच्चे को गोद देने का अधिकार है।जस्टिस एम.आर. अनीता ने किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत बनाए गए 2014 के नियमों और दत्तक ग्रहण विनियम, 2017 के प्रावधानों को देखने के बाद कहा:"उक्त परिस्थिति में जिला न्यायाधीश का यह निष्कर्ष कि अदालत इसके लिए उचित मंच नहीं है। उन्हें बाल कल्याण समिति से संपर्क करना पड़ेगा है, जो अवैध और विकृत है।"वर्षों से बांझपन का इलाज करवाने के बावजूद अपीलकर्ता...
सेशन कोर्ट ने गुड़गांव घरेलू कामगार दुर्व्यवहार मामले में तस्करी का अतिरिक्त आरोप तय किए
सेशन कोर्ट ने हरियाणा के गुड़गांव में एक घरेलू कामगार के साथ दुर्व्यवहार के एक मामले में पीड़िता द्वारा दायर एक आवेदन को स्वीकार कर लिया। इसमें आरोपी के खिलाफ तस्करी का अतिरिक्त आरोप तय करने की मांग की गई थी।मामला तब सुर्खियों में आया जब 2015 में एक युवा महिला घरेलू कामगार को गुड़गांव पुलिस ने अपने नियोक्ताओं के घर में बेहोशी की हालत में पाया था।आरोपी दंपति पर शुरू में गलत तरीके से बंधक बनाने, गैरकानूनी अनिवार्य श्रम, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, आपराधिक धमकी, एक किशोर के साथ क्रूरता, किशोर के शोषण...
दिल्ली दंगों के दौरान राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करने का मामला: हाईकोर्ट ने जांच में देरी पर दिल्ली पुलिस से सवाल किया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने मंगलवार को उस घटना की जांच में देरी पर सवाल उठाया, जिसमें 23 वर्षीय फैजान को साल 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर किया गया था।यह घटना एक वीडियो से संबंधित है जो वायरल हुआ था। वीडियो में फैजान को कथित तौर पर पुलिस द्वारा पीटा जा रहा था और राष्ट्रगान और 'वंदे मातरम' गाने के लिए मजबूर किया गया था।न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने संबंधित पुलिस उपायुक्त के हस्ताक्षर सहित जांच में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी।कोर्ट को दिल्ली पुलिस द्वारा...
COVID-19 में बढ़ोतरी के बावजूद न्यायिक कार्य बंद नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि एक गंभीर COVID-19 में बढ़ोतरी के बावजूद न्यायिक कार्य को कई अन्य गंभीर मामलों की तरह बंद नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक दीवानी मुकदमे की प्रगति पर मथुरा कोर्ट के संबंधित न्यायाधीश के मामले में तारीखें तय करने पर निराशा व्यक्त करते हुए की।जस्टिस जे जे मुनीर की खंडपीठ ने आगे टिप्पणी की कि कुछ समय के लिए COVID-19 महामारी बार-बार होने वाली बीमारी है। इसका मतलब यह नहीं कि न्यायालयों का कामकाज रुक जाना चाहिए।अदालत ने कहा,"न्यायालय को न्याय प्रदान करने...



















