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कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग: कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य को अधीनस्थ न्यायालयों में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को न्यायिक कार्यवाही के लाइव स्ट्रीमिंग नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कर्नाटक में जिला अदालतों में बुनियादी सुविधाएं (इंफ्रा) की आवश्यकताओं पर तेजी से विचार करने और उन्हें हल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने कहा,"जहां तक अधीनस्थ न्यायालयों में लाइव स्ट्रीमिंग के कार्यान्वयन का संबंध है, यह चरणबद्ध रूप से किया जाना है। इसके लिए राज्य को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश के अनुसार बुनियादी ढांचा...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 जनवरी से अपने अधीनस्थ जिला न्यायालयों, न्यायाधिकरणों के कामकाज के लिए दिशानिर्देश जारी किए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने COVID-19 मामलों में हाल ही में वृद्धि के कारण कुछ दिशानिर्देश जारी करने का निर्णय लिया। उक्त निर्णय 10 जनवरी से इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायिक अधीनस्थ सभी न्यायालयों (ट्रिब्यूनल सहित) पर लागू होंगे।हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं:1. परिसर के उद्घाटन के पूर्व जिला न्यायाधीश संबंधित जिले के जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से सहायता प्राप्त कर दैनिक आधार पर संपूर्ण न्यायालय परिसर की पूर्ण सेनिटाइजेशन (सख्ती से चिकित्सा दिशा-निर्देशों के अनुसार) एवं सफाई...
उत्तर प्रदेश राज्य में आईपीसी की धारा 506 के तहत अपराध एक संज्ञेय अपराध: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य में आईपीसी(IPC) की धारा 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) के तहत अपराध एक संज्ञेय अपराध है।न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने यह निष्कर्ष निकालने के लिए यू.पी. गजट दिनांक 31 जुलाई 1989 में प्रकाशित एक अधिसूचना का उल्लेख किया। इसमें यूपी के तत्कालीन माननीय राज्यपाल द्वारा की गई घोषणा को अधिसूचित किया गया था कि उत्तर प्रदेश में आईपीसी की धारा 506 के तहत कोई भी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा।कोर्ट ने यह भी...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 जजों के COVID-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद फिर से वर्चुअल सुनवाई की ओर रुख किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (दोनों बेंच) ने 8 न्यायाधीशों, कुछ न्यायिक कर्मचारियों और कुछ वकीलों के COVID-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद फिर से वर्चुअल मोड में कार्य करने का निर्णय लिया है।यह फैसला हाईकोर्ट द्वारा वर्चुअल मोड ऑफ हियरिंग से हाइब्रिड मोड ऑफ हियरिंग में जाने के 6 दिन बाद आया है।अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार चौधरी ने लाइव लॉ से बात करते हुए पुष्टि की कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति की बैठक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता में हुई, जिसमें सीजे ने वर्चुअल मोड में खुद वापस...
पिता अपनी अविवाहित बेटियों की देखभाल की जिम्मेदारी को छोड़ नहीं सकते, उनकी शिक्षा और शादी का खर्च उठाने के लिए बाध्य: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि एक पिता अपनी अविवाहित बेटियों की देखभाल करने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है और उनकी शिक्षा और शादी के खर्चों समेत उनकी देखभाल करना उसका कर्तव्य और दायित्व है। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने कहा कि 'कन्या दान' एक हिंदू पिता का एक गंभीर और पवित्र दायित्व है, जिससे वह पीछे नहीं हट सकता। अदालत ने इस प्रकार पिता को उसकी दो बेटियों की शादी के खर्च के लिए 35 लाख और 50 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पत्नी...
सरकार के ज्ञापन के अनुसार 23 जनवरी (देश प्रेम दिवस) को नेताजी बोस की प्रतिमा पर माला चढ़ाएं, 'कदम-कदम बढ़ाए जा' की धुन बजाएं: कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर पश्चिम बंगाल सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि सरकार के ज्ञापन के अनुसार 23 जनवरी (देश प्रेम दिवस) को जिला मुख्यालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माला चढ़ाएं और 'कदम कदम बढ़ाए जा' की धुन बजाई जाए।जनहित याचिका को एक फरीद मोला ने यह प्रार्थना करते हुए स्थानांतरित किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार को वर्ष 2011 में उसके द्वारा जारी किए गए ज्ञापन को लागू करने के लिए निर्देशित किया जाए, जिसमें यह घोषित किया गया था कि 23...
घरेलू हिंसा अधिनियम- कानूनी प्रतिनिधि मृतक महिला की ओर से मौद्रिक राहत की मांग नहीं कर सकतेः बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक पीड़ित या व्यथित व्यक्ति, (जैसा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम (डीवी एक्ट) के तहत परिभाषित किया गया है) ''याचिका दायर करने के समय जीवित होना चाहिए'' और उसके निधन के बाद कोई भी व्यक्ति अधिनियम के तहत मौद्रिक राहत के लिए आवेदन दायर नहीं कर सकता है। जस्टिस संदीप शिंदे ने पिछले सप्ताह एक फैसले में, एक नाबालिग लड़की (उसकी नानी के माध्यम से) द्वारा ''अपनी माँ की ओर से'' दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें उसके पिता और दादा-दादी के खिलाफ मौद्रिक...
आदेश 41 नियम 17 (1), सीपीसी - अगर वकील बहस से इनकार करता है या कोर्ट को संबोधित करने में सक्षम न हो, अपील योग्यता के आधार पर खारिज नहीं हो सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि जब अपीलीय न्यायालय द्वारा अपील को इस तथ्य के आधार पर खारिज कर दिया जाता है कि अपीलकर्ता का वकील अदालत में शारीरिक तौर पर उपस्थित होने के बावजूद, किसी भी कारण से उस पर बहस करने से इनकार करता है तो सीपीसी के आदेश XLI नियम 17 के स्पष्टीकरण के मद्देनज़र योग्यता के आधार पर इसे खारिज नहीं किया जा सकता।यह ध्यान दिया जा सकता है कि आदेश XLI नियम 17 सीपीसी के स्पष्टीकरण में कहा गया है कि अपीलीय न्यायालय उन मामलों में गुण-दोष के आधार पर अपील को खारिज नहीं कर...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (तीन दिसंबर, 2022 से सात दिसंबर, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।भारत माता और भूमा देवी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द आईपीसी की धारा 295 ए के तहत अपराध : मद्रास हाईकोर्टकैथोलिक पादरी (Catholic Priest) जॉर्ज पोन्नैया के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि "भारत माता" और "भूमा देवी" के खिलाफ इस्तेमाल किए गए आपत्तिजनक शब्द भारतीय दंड...
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रूण संबंधी असामान्यताओं, मां की भावनात्मक परेशानी का हवाला देते हुए 28 सप्ताह से अधिक के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भ्रूण की असामान्यताओं के अलावा उसके मानसिक और भावनात्मक संकट को ध्यान में रखते हुए एक 28 वर्षीय महिला को गर्भपात की अनुमति दी, जिसकी गर्भावधि 28 सप्ताह से अधिक हो गई थी।जस्टिस रेखा पल्ली ने एक समन्वय पीठ के हालिया आदेश पर भरोसा किया, जिसमें न्यायालय ने एक 33 वर्षीय महिला के 28 सप्ताह के भ्रूण को समाप्त करने की अनुमति दी थी। पीठ ने कहा कि यह देखते हुए कि प्रजनन विकल्प एक महिला के प्रजनन अधिकारों का एक पहलू है और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक आयाम है। कोर्ट ने यह...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम को चुनाव ड्यूटी के दौरान एक शिक्षक की COVID-19 मौत के मामले में मुआवजे का फैसला करने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में जिला मजिस्ट्रेट, जौनपुर को पिछले साल उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों के दौरान COVID-19 के कारण एक शिक्षक की मौत के मामले में किए गए मुआवजे के दावे की जांच करने और एक तर्कपूर्ण आदेश पारित करने का निर्देश दिया।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस विक्रम डी. चौहान की पीठ आर्यन श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आर्यन की मां को यूपी पंचायत चुनावों में चुनाव ड्यूटी दी गई थी। ड्यूटी के दौरान COVID-19 से संक्रमित होने के कारण बाद उनकी मृत्यु हो गई।याचिकाकर्ता ने...
पोक्सोः 'पेनट्रेशन पर्याप्त, सीमन मौजूद हो यह जरूरी नहीं': दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी की सजा बरकरार रखी
दिल्ली हाईकोर्ट ने ने पॉक्सो मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धी और सजा को बरकरार रखा। उसे पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया गया था।कोर्ट ने पाया कि आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध का गठन करने के लिए पेनेट्रेशन पर्याप्त है और सीमन की उपस्थिति जरूरी नहीं है।जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने कहा, "निस्संदेह, एफएसएल और डीएनए फिंगरप्रिंटिंग रिपोर्ट के अनुसार सीमन का पता नहीं चला था....धारा 376 आईपीसी और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दंडनीय अपराध का गठन करने के...
सीआरपीसी की धारा 427 – आजीवन कारावास से फरार अपराधी की सजा एक साथ नहीं चलेगी: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि पैरोल की छुट्टी के बाद फरार होने को लेकर सजा सुनाए जाने पर आजीवन कारावास का दोषी, यह दावा नहीं कर सकता कि कम गंभीर प्रकृति वाली उसकी बाद की सजा उस जेल की अवधि के साथ-साथ चलेगी, जिसे वह पहले से काट रहा था।कोर्ट ने कहा कि भागा हुआ दोषी सीआरपीसी की धारा 427(2) का लाभ नहीं ले सकता है, जिसमें कहा गया है कि पहले से ही कारावास की सजा काट रहे व्यक्ति की अगली सजा साथ-साथ चलेगी।कोर्ट ने माना कि यह प्रावधान एक फरार अपराधी के लिए उपलब्ध नहीं है।जस्टिस एचपी संदेश ने कहा,"जब किसी...
''वैवाहिक बलात्कार वैवाहिक घर में महिलाओं के खिलाफ होने वाली यौन हिंसा का सबसे बड़ा रूप, जिसकी कोई रिपोर्ट नहीं होती'': वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने दिल्ली हाईकोर्ट में तर्क दिया
भारत में वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को एक याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वैवाहिक बलात्कार महिलाओं के खिलाफ होने वाली यौन हिंसा का सबसे बड़ा रूप है, जिसको न तो कभी रिपोर्ट किया जाता है और न ही इसका कोई विश्लेषण या अध्ययन किया गया है। याचिकाकर्ता खुशबू सैफी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष कहा कि, ''यह शायद वैवाहिक घर में महिलाओं के खिलाफ होने वाली यौन...
'समान नागरिक संहिता सरकारी नीति का मामला, संसद को कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता': दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा
दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन संविधान के तहत एक निर्देशक सिद्धांत और सार्वजनिक नीति का मामला है। इस संबंध में न्यायालय द्वारा कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग को लेकर भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका में केंद्र की ओर से दायर जवाबी हलफनामे में यह दलील दी गई।केंद्र ने आगे कहा कि संसद कानून बनाने के लिए संप्रभु शक्ति का प्रयोग करती है और कोई भी बाहरी शक्ति या प्राधिकरण किसी विशेष...
COVID-19: गुजरात हाईकोर्ट 10 जनवरी से अगले आदेश तक केवल वर्चुअल मोड से सुनवाई करेगा
गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में बढ़ते COVID-19 मामलों और सामूहिक समारोहों से बचने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के मद्देनजर, 10 जनवरी से अगले आदेश तक केवल वर्चुअल मोड के माध्यम से कार्य करने का निर्णय लिया।इस संबंध में हाईकोर्ट मैनेजमेंट द्वारा चीफ जस्टिस के आदेश के तहत स्थायी समिति के माननीय न्यायाधीशों और मानक संचालन समिति के माननीय न्यायाधीशों के साथ विचार-विमर्श के बाद एक एसओपी जारी किया गया। साथ ही गुजरात हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ द्वारा किए गए अनुरोध और कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा...
COVID-19 की तीसरी लहर: उत्तराखंड हाईकोर्ट 10 जनवरी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मोड से केवल विशेष मामलों की सुनवाई करेगा
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने COVID-19 वायरस के प्रसार से मानव जीवन के लिए आसन्न खतरे और इससे प्रभावित व्यक्तियों की संख्या में खतरनाक वृद्धि को देखते हुए 10 जनवरी से केवल वर्चुअल मोड के माध्यम से मामलों को लेने का फैसला किया।कोर्ट के वादियों, अधिवक्ताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा जारी स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों को देखते हुए यह फैसला लिया गया।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश के तहत माननीय हाईकोर्ट में दिनांक 10.01.2022 (सोमवार) से व्यापार के लेनदेन के...
"भगवान को समन जारी नहीं कर सकते" : मद्रास हाईकोर्ट ने मूर्ति पेश करने के निचली अदालत का आदेश रद्द किया
मद्रास हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए कहा कि भक्तों द्वारा किसी मूर्ति को भगवान माना जाता है, जिसे अदालत द्वारा समन नहीं किया जा सकता। मूर्ति चोरी के एक मामले में निचली अदालत ने मूर्ति को अदालत में पेश करने के आदेश जारी किए थे, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।न्यायमूर्ति आर सुरेश कुमार ने देखा कि,"अदालत में भगवान को केवल निरीक्षण या सत्यापन उद्देश्यों के लिए पेश होने के लिए नहीं बुलाया जा सकता, जैसे कि यह एक आपराधिक मामले का एक भौतिक उद्देश्य है।"बड़ी संख्या में भक्तों की...
किसी के पास सरकारी छुट्टी घोषित करवाने का मौलिक अधिकार नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना है कि सरकारी छुट्टी (public holiday) घोषित करना सरकारी नीति का मामला है और कोई व्यक्ति सार्वजनिक अवकाश के मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता।न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने कहा,"सार्वजनिक अवकाश कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार नहीं है, जिसे उल्लंघन कहा जा सके। किसी को भी सार्वजनिक अवकाश का मौलिक अधिकार नहीं है।"2 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश (सरकारी छुट्टी) घोषित करने की मांग वाली एक याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की। याचिका...


















