मुख्य सुर्खियां

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
वरिष्ठ नागरिक अधिनियम: बॉम्बे हाईकोर्ट ने किराएदार बनकर मां के घर में रह रहे बेटे को राहत देने से इनकार किया, जल्द से जल्द घर खाली करने को कहा

एक बेटे, जिसने अपनी मां को सामान्य जीवन जीना भी दूभर कर दिया था, बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने उसे जल्द से जल्द घर खाली करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मां ने पांच साल से ज्यादा समय अत्यधिक पीड़ा में गुजारा है।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी ने कहा कि यह "आश्चर्यजनक" है कि कैसे 48 वर्षीय बेटे ने बूढ़ी मां के घर में घुसने का एक अनोखा तरीका ईजाद किया। उसने अपनी मां के साथ एक रेंट एग्रीमेंट किया, जबकि उसका इरदा एग्रीमेंट का सम्‍मान करने का बिल्कुल भी नहीं था। उसने उन्हें किराये कि रूप में एक रुपया भी नहीं...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
'हम कानून नहीं बना सकते': दिल्ली हाईकोर्ट ने सतत विकास के लिए 'एक व्यक्ति एक पेड़' की नीति की मांग वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में सतत विकास के लिए 'एक व्यक्ति एक पेड़' की नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की।कोर्ट ने देखा कि मसौदा नीतियों का विषय विशेष रूप से विधायिका के क्षेत्र में है। इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।बेंच ने कहा, "यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इस अदालत की प्रमुख भूमिका कानून की व्याख्या करने की है और असाधारण मामलों को छोड़कर कानून को लागू करने की नहीं है। नीति का प्रारूपण प्रतिवादी...

सेवानिवृत्ति की आयु घटाने का बैंक का निर्णय अतार्किक; प्रभावित कर्मचारी सेवा से बाहर अवधि के लिए वेतन के हकदार: राजस्थान हाईकोर्ट
सेवानिवृत्ति की आयु घटाने का बैंक का निर्णय अतार्किक; प्रभावित कर्मचारी सेवा से बाहर अवधि के लिए वेतन के हकदार: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय सहकारी बैंक के आयु को कम करने के बाद के 'अतार्किक' निर्णय के कारण सेवा से बाहर रहने वाले सेवानिवृत्ति कर्मचारी उक्त अवधि के लिए वेतन के हकदार हैं।बैंक ने एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें सेवानिवृत्ति की आयु 60 से घटाकर 58 वर्ष कर दी गई।जस्टिस रेखा बोराना ने कहा,"याचिकाकर्ता उस अवधि के लिए वेतन के हकदार होंगे जिसके दौरान वे सेवा से बाहर रहे। उन्हें इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर भुगतान किया जाए।"याचिका को स्वीकार करते हुए...

दिल्ली हाईकोर्ट
क्या राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पास कर्मचारियों की बहाली का आदेश देने का अधिकार है? दिल्ली हाईकोर्ट विचार करेगा

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को उस आदेश को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें आयोग ने भारतीय लागत लेखा संस्थान (Institute of Cost Accounts of India) को एक संविदा कर्मचारी को बहाल करने का निर्देश दिया था।आयोग ने आदेश दिया था कि कर्मचारी को परमानेंट किया जाए और सेवा से हटाए जाने की तारीख से अब तक के बकाया का भुगतान किया जाए।मामला न्यायमूर्ति योगेश खन्ना के समक्ष रखा गया, जिन्होंने इस आदेश पर रोक लगा दी है।बेंच ने कहा,"प्रतिवादियों को...

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अनुकंपा नियुक्ति - यह धारणा कि विवाहित बेटी पिता के घर का हिस्सा नहीं बल्कि पति के घर का हिस्सा, पुरानी मानसिकता; राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मृतक कर्मचारी की विवाहित बेटी अनुकंपा नियुक्ति के लिए 'आश्रितों' की परिभाषा के अंतर्गत आती है। जस्टिस डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा, "यह धाराण कि के बाद बेटी अपने पिता के घर का हिस्सा नहीं है और अपने पति के घर का हिस्सा बन रही है, पुराना दृष्टिकोण और मानसिकता है।"अदालत ने कहा कि अविवाहित और विवाहित बेटी और विवाहित बेटे और विवाहित बेटी के बीच कोई भी भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 16 का स्पष्ट उल्लंघन होगा।अदालत ने कहा कि RBF Rig...

सबऑर्डिनेट कोर्ट को अवमानना नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
सबऑर्डिनेट कोर्ट को अवमानना नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना ​​के लिए नोटिस जारी करने की शक्ति केवल हाईकोर्ट के पास है, जो इस पर अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करता है।जस्टिस अमित बंसल ने कहा,"सबऑर्डिनेट कोर्ट क्षेत्राधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते। वे कारण बताओ नोटिस जारी नहीं कर सकते। अवमानना ​​​​कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जा सकती। एक सबऑर्डिनेट कोर्ट केवल अवमानना ​​​​कार्यवाही शुरू करने के लिए हाईकोर्ट को मामला भेज सकता है।"हाईकोर्ट वाणिज्यिक न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर...

विशेष/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विद्युत अधिनियम के तहत अपराधों का संज्ञान ले सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
विशेष/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विद्युत अधिनियम के तहत अपराधों का संज्ञान ले सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि एक विशेष न्यायाधीश (ईसी अधिनियम) / अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के पास विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत अपराधों का संज्ञान लेने का अधिकार क्षेत्र है।न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की खंडपीठ ने विद्युत अधिनियम [बिजली की चोरी] की धारा 135-1 (ए) और विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट)/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गाजियाबाद के संज्ञान लेने के आदेश के तहत उसके खिलाफ दायर आरोप पत्र को चुनौती देने वाले एक गुलफाम द्वारा दायर धारा 482 आवेदन पर सुनवाई करते हुए...

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया सह-आरोपियों, जो जमानत पर हैं, उनकी तुलना में कम गंभीर अपराध के आरोपी को जमानत दी
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया सह-आरोपियों, जो जमानत पर हैं, उनकी तुलना में कम गंभीर अपराध के आरोपी को जमानत दी

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा है कि यदि किसी अपराध में आरोपी की भूमिका प्रथम दृष्टया उस सह-अभियुक्त की भूमिका से कम गंभीर है, जिसे सीआरपीसी की धारा 438 और सीआरपीसी की धारा 439 के तहत जमानत का लाभ दिया गया है, और यदि आरोपी ने पहली बार अपराध किया है तो वह सुधार के अवसर का हकदार है और उसे जमानत के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता है।ज‌स्टिस अनूप चितकारा की पीठ ने कहा कि यदि आरोपी ने पहली बार बार अपराध किया है और यदि समान रूप से रखे गए उसके सह-अभियुक्त को को जमानत दे दी गई है, भले ही...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
"दस्तावेजों का पूरा फर्जीवाड़ा": दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध गिरफ्तारी के बाद रिकॉर्ड में हेरफेर करने पर उत्तर प्रदेश पुलिस को फटकार लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी की जगह के बारे में "दस्तावेजों का फर्जीवाड़ा " करने पर उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। मामले में एक युवक ने एक महिला से, उसके परिजनों की इच्छा के खिलाफ विवाह किया था। जिसके बाद पुलिस ने युवक के पिता और भाई को अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किया था।दंपति का दावा था कि उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस को बताए बिना उनके दिल्ली स्थित आवास से की गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि...

जातिवादी टिप्पणी: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिनेत्री मुनमुन दत्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
'जातिवादी' टिप्पणी: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिनेत्री मुनमुन दत्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिनेत्री मुनमुन दत्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मुनमुन दत्ता ने कथित तौर पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस वीडियो में वह जातिगत टिप्पणी करती हुई नज़र आ रही थीं।अभिनेत्री मुनमुन दत्ता लोकप्रिय हिंदी धारावाहिक 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में बबीता अय्यर की भूमिका के लिए जानी जाती हैं।जस्टिस अवनीश झिंगन की खंडपीठ सीआरपीसी की धारा 438 के तहत दायर उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अभिनेत्री ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण)...

झारखंड की अदालत ने एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला करने और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर करने के दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की
झारखंड की अदालत ने एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला करने और 'जय श्री राम' बोलने के लिए मजबूर करने के दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की

झारखंड की एक अदालत ने मंगलवार को धनबाद में मानसिक रूप से बीमार मुस्लिम व्यक्ति के साथ मारपीट करने और उसे 'जय श्री राम' का नारा लगाने के आरोप में दो लोगों को जमानत देने से इनकार कर दिया।मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजय कुमार सिंह के समक्ष रखा गया।कथित घटना के संबंध में एक लिखित शिकायत प्राप्त होने के बाद आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 143, 149, 323, 307, 153ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई।एफआईआर के अनुसार सात जनवरी, 2022 को पीड़ित के भाई को सूचना मिली कि कुछ गुंडों ने उसके मानसिक...

कलकत्ता हाईकोर्ट
COVID-19: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने और अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेशों की अवधि को 28 फरवरी तक बढ़ाया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पिछले साल दर्ज एक स्वत: संज्ञान मामले को बहाल करते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट और उसके अधीनस्थ अदालतों द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेशों की अवधि को 28 फरवरी, 2022 तक बढ़ा दिया।हाईकोर्ट ने यह फैसला पश्चिम बंगाल में COVID-19 की स्थिति को देखते हुए लिया।हाईकोर्ट की पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश पर भरोसा किया। इसमें COVID-19 के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए देश भर में सभी सामान्य और विशेष कानूनों के तहत 28 फरवरी, 2022 तक मामले दर्ज करने के...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंग रेप के आरोपी सगे भाइयों को जमानत दी; पीड़िता ने मेडिकल जांच कराने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो सगे भाइयों को जमानत दी, जिन पर पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्कार करने का आरोप लगाया गया है।कोर्ट ने देखा कि पीड़िता ने मेडिकल जांच कराने से इनकार किया है। न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की पीठ ने दो सगे भाइयों / आरोपियों को जमानत देते हुए कहा,"यह एक गंभीर मामला है जिसमें उपस्थित परिस्थितियों में आरोपों की प्रामाणिकता स्थापित करना आवश्यक है। बलात्कार के आरोप को प्रमाणित करने के लिए पीड़िता की ओर से खुद को चिकित्सकीय जांच करवाना अनिवार्य है। मेडिकल जांच कराना या न करना उसकी...

पीएमओ ने बॉम्बे हाईकोर्ट में पीएम केयर्स फंड से प्रधानमंत्री का नाम और तस्वीर हटाने की जनहित याचिका का विरोध किया
पीएमओ ने बॉम्बे हाईकोर्ट में पीएम केयर्स फंड से प्रधानमंत्री का नाम और तस्वीर हटाने की जनहित याचिका का विरोध किया

बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर पीएम केयर्स फंड ने प्रधानमंत्री के माध्यम से विरोध जताया है। इस याचिका में ट्रस्ट डीड और आधिकारिक वेबसाइट से 'प्रधानमंत्री' के नाम और तस्वीर हटाने की मांग करते हुए कहा गया है कि ऐसा करना प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950 का उल्लंघन है। ट्रस्ट के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव प्रदीप श्रीवास्तव ने एक हलफनामे में कहा कि पीएम केयर्स फंड और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) दोनों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते...

पक्षकार शिक्षित और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक: राजस्थान हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक के लिए छह महीने का कूलिंग पीरिडय माफ किया
'पक्षकार शिक्षित और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक': राजस्थान हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक के लिए छह महीने का कूलिंग पीरिडय माफ किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता-पत्नी और प्रतिवादी-पति द्वारा दायर एक संयुक्त आवेदन को आपसी सहमति से तलाक के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी (2) के तहत निर्धारित छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड (वैधानिक अवधि) की छूट के लिए अनुमति दी।जस्टिस दिनेश मेहता ने कहा,"मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आलोक में विशेष रूप से तथ्य यह है कि पक्षकार पर्याप्त रूप से शिक्षित हैं और अपने अधिकारों के बारे में जानते हैं। उन्होंने पारस्परिक रूप से अपने विवाह को समाप्त करने का फैसला किया है, सुलह की कोई...

आवाज का नमूना लेने के लिए आरोपी की सहमति जरूरी नहीं, यह संविधान के अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन नहींः केरल हाईकोर्ट
आवाज का नमूना लेने के लिए आरोपी की सहमति जरूरी नहीं, यह संविधान के अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन नहींः केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि आवाज के नमूने लेने के लिए (तुलना/मिलान के उद्देश्य से) किसी आरोपी की सहमति आवश्यक नहीं है, क्योंकि यह पहले ही स्थापित हो चुका है कि अभियुक्त की आवाज के नमूने प्राप्त करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 20 (3) का उल्लंघन नहीं करता।हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है,जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी को उसकी आवाज का नमूना पेश करने का निर्देश देने से पहले सुनवाई का मौका नहीं दिया गया था। जस्टिस आर नारायण पिशारदी ने कहा कि इस मामले में आरोपी के पास विकल्प...

Install Smart Television Screens & Make Available Recorded Education Courses In Shelter Homes For Ladies/Children
सार्वजनिक पार्क के लिए आरक्षित भूमि का उपयोग विवाह/कार्यक्रम जैसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सार्वजनिक पार्क के लिए आरक्षित भूमि का उपयोग विवाह /कार्यक्रम आदि जैसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है।कोर्ट ने यह फैसला सुरेश थानवी द्वारा दायर एक जनहित याचिका में दिया। न्यायमूर्ति विनोद कुमार भरवानी और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा,"यह निर्देश दिया जाता है कि प्रतिवादी संख्या 2 नगर निगम, जोधपुर यह सुनिश्चित करेगा कि आरक्षित भूमि का सार्वजनिक पार्क के रूप में सख्ती से उपयोग किया जाएगा और कोई विचलन नहीं होगा। इसके साथ ही किसी भी...