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सीआरपीसी की धारा 482- एफआईआर/आरोप पत्र रद्द की मांग वाली याचिका में साक्ष्य की सराहना नहीं की जा सकती : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एफआईआर/आरोप पत्र रद्द करने के लिए याचिका की सुनवाई करने वाली अदालत साक्ष्य की सराहना नहीं कर सकती, क्योंकि यह ट्रायल कोर्ट के क्षेत्र में है।जस्टिस श्रीनिवास हरीश कुमार ने कहा,"यह एक स्थापित सिद्धांत है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका पर फैसला करते समय सबूतों की सराहना नहीं की जा सकती, क्योंकि यह ट्रायल कोर्ट के क्षेत्र में है।"याचिकाकर्ता प्रदीप मोपार्थी और अन्य भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323, 504, 506 और 498-ए और...
बलात्कार का अपराध माफ नहीं किया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता के साथ समझौता और शादी करने वाले सरकारी कर्मचारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बलात्कार के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा है कि इस तरह की एफआईआर को पक्षकारों के बीच हुए समझौते और उसके बाद विवाह करने के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह कथित अपराध माफ/समाप्त नहीं करता।यह दोहराते हुए कि बलात्कार का कृत्य किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है बल्कि समाज के खिलाफ एक अपराध है, जस्टिस रजनीश भटनागर ने कहा कि''वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता एक सरकारी कर्मचारी है, जो सीमा शुल्क और सीजीएसटी विभाग, भारत सरकार...
प्राइवेट डिटेक्टिव की गतिविधियां अनियंत्रित और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
दिल्ली हाईकोर्ट में प्राइवेट डिटेक्टिव और उनकी एजेंसियों की गतिविधियों के नियमन की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया कि प्राइवेट डिटेक्टिव, जांचकर्ताओं और उनकी एजेंसियों का काम किसी भी मौजूदा वैधानिक ढांचे के दायरे से बाहर रहता है।चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला सूचीबद्ध किया गया।एडवोकेट प्रीति सिंह के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि 2007 का प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसीज (रेगुलेशन) बिल पिछले 13 साल से संसद में लंबित है...
'वकील होने के नाते तुच्छ जनहित याचिका दायर नहीं करनी चाहिए': उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यूजीसी फंड कुप्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज की
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एक वकील होने के नाते, याचिकाकर्ता को यूजीसी फंड के कुप्रबंधन पर कोई विशेष उदाहरण बताए बिना एक तुच्छ जनहित याचिका दायर नहीं करनी चाहिए।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने याचिकाकर्ता को आगे कोई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के बिना जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति दी।अधिवक्ता एम.सी. पंत, याचिकाकर्ता ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग [यूजीसी] को निजी प्रतिवादियों और प्रायोजक समितियों के खिलाफ उचित कदम उठाने,...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विधानसभा चुनाव के लिए मंडी स्थल के उपयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका का निपटारा किया; डीएम को 10 दिन में फैसला लेने के आदेश दिए
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका का निपटारा किया, जिसमें राज्य को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए नवीन मंडी स्थल (बाजार) का उपयोग नहीं करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।याचिका में यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई है कि मंडी क्षेत्र में कृषि उत्पादों की बिक्री और खरीद में कोई हस्तक्षेप न हो।एडवोकेट प्रभा नैथानी के माध्यम से दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि हर साल की तरह, इस साल भी नवीन मंडी स्थल का उपयोग कृषि उपज की बिक्री और खरीद के लिए किया जा रहा...
अस्थायी निवास किसी केस को स्थानांतरित करने का वैध आधार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा दायर स्थानांतरण याचिकाओं के एक समूह पर आदेश दिया कि किसी याचिका को इस आधार पर किसी अन्य जगह पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, जहां पक्षकार अस्थायी रूप से रहने चले गए हैं।इस प्रकार अदालत ने देखा कि पक्षकारों के अस्थायी निवास के क्षेत्र अधिकार में लंबित मामलों को इस आधार पर स्थानांतरित करना विधिसम्मत नहीं होगा कि अब पक्षकार अस्थायी रूप से उस स्थान में रह रहा है। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने स्थानांतरण याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस तरह की याचिकाओं को...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सिगरेट ब्रांड 'टोटल' के जैसा 'ट्रेड ड्रेस' इस्तेमाल करने कारण टोपाज़ के खिलाफ जारी अंतरिम निषेधाज्ञा को बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सिगरेट ब्रांड 'टोपाज़ के खिलाफ जारी एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को बरकरार रखा है। उक्त कंपनी कथित रूप से भ्रामक पैकेजिंग/ट्रेड ड्रेस के जरिए अपने सामान को एक अन्य सिगरेट ब्रांड 'टोटल' के रूप में प्रसारित कर रहा था।जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने यह कहते हुए आक्षेपित आदेश में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्णय लिया, "पैकेजिंग/सिगरेट बॉक्स की मूल पृष्ठभूमि का रंग गहरा मेटलिक ब्लैक और डार्क ब्लू का शेड है, जो एक जैसा है। दोनों बक्सों पर रिब्ड लाइनें भी हैं....। पैकेजिंग के अगले...
स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज करने में जांच एजेंसी की विफलता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि अभियोजन, नियमित रूप से, मुकदमे के दरमियान स्वतंत्र गवाहों को पेश करने पर जोर नहीं देता है, हाल ही में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा जांच के दरमियान ऐसे गवाहों के बयान दर्ज करने में विफलता को अदालतों द्वारा गंभीरता से देखा जाना चाहिए।जस्टिस अताउरहमान मसूदी और जस्टिस मनीष कुमार ने हत्या के मामले में सजा के खिलाफ दायर एक आपराधिक अपील का निस्तारण करते हुए आगे राय दी कि वह समय दूर नहीं जब अदालतों को ऐसे गवाहों को स्वतः संज्ञान लेकर खुद सम्मन करना होगा, जिसके लिए गवाह...
पुलिस को विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों के खिलाफ हरियाणा के मुख्यमंत्री के कथित भड़काऊ भाषण के प्रभाव की जांच करनी चाहिए: शिकायतकर्ता ने दिल्ली कोर्ट में कहा
विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका में शिकायतकर्ता ने दिल्ली कोर्ट (Delhi Court) में कहा है कि उक्त भाषण के प्रभाव का पता लगाने के लिए मामले में पुलिस जांच की आवश्यकता है।एडवोकेट अमित साहनी द्वारा दायर शिकायत मामले में खट्टर को तलब करने और संबंधित पुलिस अधिकारियों को मामले में प्राथमिकी दर्ज करके उनके खिलाफ जांच करने का निर्देश देने...
कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग: कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य को अधीनस्थ न्यायालयों में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को न्यायिक कार्यवाही के लाइव स्ट्रीमिंग नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कर्नाटक में जिला अदालतों में बुनियादी सुविधाएं (इंफ्रा) की आवश्यकताओं पर तेजी से विचार करने और उन्हें हल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने कहा,"जहां तक अधीनस्थ न्यायालयों में लाइव स्ट्रीमिंग के कार्यान्वयन का संबंध है, यह चरणबद्ध रूप से किया जाना है। इसके लिए राज्य को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश के अनुसार बुनियादी ढांचा...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 जनवरी से अपने अधीनस्थ जिला न्यायालयों, न्यायाधिकरणों के कामकाज के लिए दिशानिर्देश जारी किए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने COVID-19 मामलों में हाल ही में वृद्धि के कारण कुछ दिशानिर्देश जारी करने का निर्णय लिया। उक्त निर्णय 10 जनवरी से इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायिक अधीनस्थ सभी न्यायालयों (ट्रिब्यूनल सहित) पर लागू होंगे।हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं:1. परिसर के उद्घाटन के पूर्व जिला न्यायाधीश संबंधित जिले के जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से सहायता प्राप्त कर दैनिक आधार पर संपूर्ण न्यायालय परिसर की पूर्ण सेनिटाइजेशन (सख्ती से चिकित्सा दिशा-निर्देशों के अनुसार) एवं सफाई...
उत्तर प्रदेश राज्य में आईपीसी की धारा 506 के तहत अपराध एक संज्ञेय अपराध: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य में आईपीसी(IPC) की धारा 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) के तहत अपराध एक संज्ञेय अपराध है।न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने यह निष्कर्ष निकालने के लिए यू.पी. गजट दिनांक 31 जुलाई 1989 में प्रकाशित एक अधिसूचना का उल्लेख किया। इसमें यूपी के तत्कालीन माननीय राज्यपाल द्वारा की गई घोषणा को अधिसूचित किया गया था कि उत्तर प्रदेश में आईपीसी की धारा 506 के तहत कोई भी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा।कोर्ट ने यह भी...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 जजों के COVID-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद फिर से वर्चुअल सुनवाई की ओर रुख किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (दोनों बेंच) ने 8 न्यायाधीशों, कुछ न्यायिक कर्मचारियों और कुछ वकीलों के COVID-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद फिर से वर्चुअल मोड में कार्य करने का निर्णय लिया है।यह फैसला हाईकोर्ट द्वारा वर्चुअल मोड ऑफ हियरिंग से हाइब्रिड मोड ऑफ हियरिंग में जाने के 6 दिन बाद आया है।अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार चौधरी ने लाइव लॉ से बात करते हुए पुष्टि की कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति की बैठक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता में हुई, जिसमें सीजे ने वर्चुअल मोड में खुद वापस...
पिता अपनी अविवाहित बेटियों की देखभाल की जिम्मेदारी को छोड़ नहीं सकते, उनकी शिक्षा और शादी का खर्च उठाने के लिए बाध्य: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि एक पिता अपनी अविवाहित बेटियों की देखभाल करने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है और उनकी शिक्षा और शादी के खर्चों समेत उनकी देखभाल करना उसका कर्तव्य और दायित्व है। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने कहा कि 'कन्या दान' एक हिंदू पिता का एक गंभीर और पवित्र दायित्व है, जिससे वह पीछे नहीं हट सकता। अदालत ने इस प्रकार पिता को उसकी दो बेटियों की शादी के खर्च के लिए 35 लाख और 50 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पत्नी...
सरकार के ज्ञापन के अनुसार 23 जनवरी (देश प्रेम दिवस) को नेताजी बोस की प्रतिमा पर माला चढ़ाएं, 'कदम-कदम बढ़ाए जा' की धुन बजाएं: कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर पश्चिम बंगाल सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि सरकार के ज्ञापन के अनुसार 23 जनवरी (देश प्रेम दिवस) को जिला मुख्यालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माला चढ़ाएं और 'कदम कदम बढ़ाए जा' की धुन बजाई जाए।जनहित याचिका को एक फरीद मोला ने यह प्रार्थना करते हुए स्थानांतरित किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार को वर्ष 2011 में उसके द्वारा जारी किए गए ज्ञापन को लागू करने के लिए निर्देशित किया जाए, जिसमें यह घोषित किया गया था कि 23...
घरेलू हिंसा अधिनियम- कानूनी प्रतिनिधि मृतक महिला की ओर से मौद्रिक राहत की मांग नहीं कर सकतेः बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक पीड़ित या व्यथित व्यक्ति, (जैसा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम (डीवी एक्ट) के तहत परिभाषित किया गया है) ''याचिका दायर करने के समय जीवित होना चाहिए'' और उसके निधन के बाद कोई भी व्यक्ति अधिनियम के तहत मौद्रिक राहत के लिए आवेदन दायर नहीं कर सकता है। जस्टिस संदीप शिंदे ने पिछले सप्ताह एक फैसले में, एक नाबालिग लड़की (उसकी नानी के माध्यम से) द्वारा ''अपनी माँ की ओर से'' दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें उसके पिता और दादा-दादी के खिलाफ मौद्रिक...
आदेश 41 नियम 17 (1), सीपीसी - अगर वकील बहस से इनकार करता है या कोर्ट को संबोधित करने में सक्षम न हो, अपील योग्यता के आधार पर खारिज नहीं हो सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि जब अपीलीय न्यायालय द्वारा अपील को इस तथ्य के आधार पर खारिज कर दिया जाता है कि अपीलकर्ता का वकील अदालत में शारीरिक तौर पर उपस्थित होने के बावजूद, किसी भी कारण से उस पर बहस करने से इनकार करता है तो सीपीसी के आदेश XLI नियम 17 के स्पष्टीकरण के मद्देनज़र योग्यता के आधार पर इसे खारिज नहीं किया जा सकता।यह ध्यान दिया जा सकता है कि आदेश XLI नियम 17 सीपीसी के स्पष्टीकरण में कहा गया है कि अपीलीय न्यायालय उन मामलों में गुण-दोष के आधार पर अपील को खारिज नहीं कर...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (तीन दिसंबर, 2022 से सात दिसंबर, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।भारत माता और भूमा देवी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द आईपीसी की धारा 295 ए के तहत अपराध : मद्रास हाईकोर्टकैथोलिक पादरी (Catholic Priest) जॉर्ज पोन्नैया के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि "भारत माता" और "भूमा देवी" के खिलाफ इस्तेमाल किए गए आपत्तिजनक शब्द भारतीय दंड...
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रूण संबंधी असामान्यताओं, मां की भावनात्मक परेशानी का हवाला देते हुए 28 सप्ताह से अधिक के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भ्रूण की असामान्यताओं के अलावा उसके मानसिक और भावनात्मक संकट को ध्यान में रखते हुए एक 28 वर्षीय महिला को गर्भपात की अनुमति दी, जिसकी गर्भावधि 28 सप्ताह से अधिक हो गई थी।जस्टिस रेखा पल्ली ने एक समन्वय पीठ के हालिया आदेश पर भरोसा किया, जिसमें न्यायालय ने एक 33 वर्षीय महिला के 28 सप्ताह के भ्रूण को समाप्त करने की अनुमति दी थी। पीठ ने कहा कि यह देखते हुए कि प्रजनन विकल्प एक महिला के प्रजनन अधिकारों का एक पहलू है और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक आयाम है। कोर्ट ने यह...

















