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चूंकि न्यायालयों की केस डायरी तक पहुंच नहीं, इसलिए जमानत याचिकाओं पर वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुनवाई के दरमियान आरोपों को सही ढंग से पढ़ने की जिम्मेदारी लोक अभियोजक परः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने देखा है कि जमानत याचिकाओं पर वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुनवाई के दरमियान, चूंकि न्यायालयों की केस डायरी तक पहुंच नहीं है, इसलिए आरोपित/आवेदक के खिलाफ आरोपों को सही ढंग से पढ़ने की जिम्मेदारी लोक अभियोजक पर बहुत ज्यादा है।जस्टिस जीएस अहलूवालिया की खंडपीठ आईपीसी की धारा 420, 120-बी के तहत दंडनीय अपराध के संबंध में अपनी गिरफ्तारी की आशंका के संबंध में आवेदकों द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।मामलाअभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, एक संपत्ति के संबंध में 9,40,000/-...
पॉक्सो-चाइल्ड विटनेस की गवाही का अधिक सावधानी से मूल्यांकन किया जाना चाहिए, अगर यह विश्वासनीय है तो सजा के लिए पर्याप्त: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि पॉक्सो अधिनियम के तहत चाइल्ड विटनेस की भरोसेमंद गवाही दोषसिद्धि दर्ज करने के लिए पर्याप्त है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि गवाही का मूल्यांकन अधिक सावधानी से किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने पोक्सो अधिनियम की धारा 12 के तहत दोषसिद्धि के खिलाफ अपील की सुनवाई के दरमियान की, जो एक बच्चे पर यौन उत्पीड़न से संबंधित है।मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखने के बाद, अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों की अविश्वसनीय गवाही का हवाला देते हुए आरोपी की सजा को...
एफआईआर और चार्जशीट में धारा 307 आईपीसी शामिल रहने भर से पार्टियों के बीच समझौते के आधार पर केस को रद्द करने पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि केवल एफआईआर और आरोप पत्र में आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) को शामिल करना, पक्षकारों के बीच विवादों को समाप्त करने के लिए किए गए समझौते के लिए एक बाधा नहीं होगी।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने यह कहते हुए धारा 147, 148, 149, 323, 504, 506, 427, 307 आईपीसी के तहत दर्ज एक मामले में समन आदेश को रद्द करने की मांग वाली आवेदकों द्वारा दायर 482 सीआरपीसी आवेदन को अनुमति दी।न्यायालय को सूचित किया गया कि सम्मानित व्यक्तियों और रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से...
कंसेट डिक्री को तब तक संशोधित/बदला नहीं जा सकता जब तक कि गलती सर्वविदित या स्पष्ट न हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एक सहमति के निर्देश ( consent decree) को तब तक संशोधित/ परिवर्तित नहीं किया जा सकता है, जब तक कि गलती एक सर्वविदित या स्पष्ट गलती न हो या फिर, सहमति की डिक्री के लिए एक पक्ष द्वारा गलती/गलतफहमी के आधार पर हर सहमति की डिक्री को बदलने की मांग की जा रही है।जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ अपील के निस्तारण के दरमियान यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट के आदेश में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 152 और 153 सहपठित धारा 151 के तहत...
धारा 482 सीआरपीसी के तहत हाईकोर्ट के निहित क्षेत्राधिकार को पुनर्विचार पर लगी रोक को ओवरराइड करने के लिए लागू नहीं किया जा सकताः दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने ही निर्णय को रद्द करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 482 के तहत दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने ऐसा ना करने के लिए धारा 362 सीआरपीसी के तहत परिकल्पित पुनर्विचार पर रोक का हवाला दिया।धारा 362 यह निर्धारित करती है कि कोई भी न्यायालय, जब उसने अपने निर्णय या किसी मामले के निस्तारण के अंतिम आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, लिपिक या अंकगणितीय त्रुटि को ठीक करने के अलावा उसमें परिवर्तन या पुनर्विचार नहीं करेगा।यह समझाते हुए कि धारा 482 के तहत...
देश के नागरिक इस हद तक असहिष्णु नहीं हो सकते कि वे किसी प्रमाणपत्र पर प्रधानमंत्री की तस्वीर छापने का समर्थन न कर पाएं : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने नागरिकों को जारी किए गए COVID-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर चिपकाए जाने के खिलाफ एकल न्यायाधीश की बेंच के याचिका अस्वीकार करने को चुनौती देने वाली एक अपील को खारिज करते हुए कहा कि एक व्यक्तिगत मौलिक अधिकार बड़े सार्वजनिक हित के अधीन है।हालांकि बेंच ने अपीलकर्ता पर लगाई गई जुर्माने की राशि को एक लाख से घटाकर 25,000 रुपए कर दिया।चीफ जस्टिस एस. मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी . चाली की खंडपीठ ने कहा कि प्रधानमंत्री के शिलालेख (inscriptions) और फोटोग्राफ...
'स्थिति COVID-19 की दूसरी लहर की तुलना में गंभीर नहीं': राजस्थान हाईकोर्ट ने हेल्थकेयर प्रबंधन से संबंधित जनहित याचिका बंद की
राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य में COVID-19 की स्थिति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। देश के कई अन्य राज्यों की तरह राजस्थान राज्य भी COVID-19 की तीसरी लहर से लड़ रहा है, लेकिन किसी भी तरह से स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं है।चीफ जस्टिस अकील कुरैशी और जस्टिस मदन गोपाल व्यास की खंडपीठ ने COVID-19 मामलों में गिरावट की उम्मीद करते हुए राज्य में COVID-19 प्रबंधन से संबंधित एक जनहित याचिका को बंद कर दिया।पिछले साल सुरेंद्र जैन नामक व्यक्ति ने जनहित याचिका दायर की थी। इसमें राज्य के अधिकारियों को...
उड़ीसा हाईकोर्ट सात फरवरी से फुल स्टाफ के साथ हाइब्रिड मोड में कार्य करेगा
उड़ीसा हाईकोर्ट शुक्रवार को पूरी तरह से हाइब्रिड मोड में काम करने का फैसला किया। हाईकोर्ट ऑफिस सात फरवरी, 2022 को 10 जनवरी, 2022 से पहले की व्यवस्थाओं के साथ फुल स्टाफ के साथ कार्य करेगा।इस संबंध में जारी एक अधिसूचना में कहा गया कि प्रमाणित प्रतियां देने की सामान्य प्रथा सात फरवरी, 2022 से फिर से शुरू हो जाएगी। रजिस्ट्रार (न्यायिक) द्वारा सभी संबंधितों से अनुरोध किया गया कि वे COVID-19 के संक्रमण को रोकने के लिए की गई उक्त व्यवस्था में सहयोग करें।हाईकोर्ट ने सात जनवरी को राज्य में बढ़ते COVID-19...
इलाहाबाद हाईकोर्ट सात फरवरी से हाइब्रिड मोड में कार्य करेगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला किया कि इलाहाबाद और लखनऊ दोनों बेंच में सोमवार यानि 07.02.2022 से सुनवाई वर्चुअल मोड की जगह हाइब्रिड मोड में होगी। ।यह आदेश अन्य COVID-19 प्रोटोकॉल के अधीन होगा। इसमें अधिवक्ताओं और वादियों के क्लर्कों के प्रवेश पर प्रतिबंध शामिल है, जिनकी व्यक्तिगत उपस्थिति न्यायालय के एक आदेश द्वारा निर्देशित की गई है।हाईकोर्ट के आदेश में आगे कहा गया कि यह सुनिश्चित करना होगा कि एक बार में कोर्ट रूम के अंदर 10 से ज्यादा वकील न हों। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार...
वैवाहिक बलात्कार कैसे साबित होता है, इसका फैसला ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दें: कॉलिन गोंसाल्वेस ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई जारी रखी, जो एक व्यक्ति को अपनी पत्नी के साथ जबरन संभोग को बलात्कार के अपराध से मुक्त करता है।याचिकाकर्ताओं में से एक का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष दलील दी कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद 2 की संवैधानिकता का निर्धारण करते समय, यह विचार करना आवश्यक नहीं था कि वैवाहिक...
दहेज हत्या-''अपराध बेरहम पति की क्रूरता और लालच को दर्शाता है" : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी को जलाने के आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उस पति को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर दहेज की मांग करते हुए अपनी 22 वर्षीय पत्नी को जलाने और उसके बाद उसके शव को एक गुप्त स्थान पर दफनाने का आरोप लगाया गया है।जस्टिस विकास कुंवर श्रीवास्तव की खंडपीठ ने बबलू (मृतका के पति) को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि आरोपी पति का कथित कृत्य, एक बेरहम पति और नवजात बच्चे के आत्मकेंद्रित गैर जिम्मेदार पिता की क्रूरता और लालच को दर्शाता है।संक्षेप में मामला मृतक/पीड़िता का विवाह घटना की तिथि (दिसंबर 2013) से लगभग तीन...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने फ्रांसीसी मास्टिफ कुत्ते 'ब्रूनो' को उसके मालिकों को वापस करने का निर्देश दिया, एनजीओ की कस्टडी में था कुत्ता
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक गैर सरकारी संगठन को 'ब्रूनो' नामक एक फ्रांसीसी मास्टिफ कुत्ते को उसके असली मालिकों को वापस करने का निर्देश दिया। लापता होने के बाद कुत्ते को एनजीओ की कस्टडी में रखा गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में एनजीओ को महीने में कम से कम एक बार कुत्ते से मिलने और उसकी जांच करने की अनुमति दी।एनजीओ देबाश्री रॉय फाउंडेशन ने अदालत में बयान दिया था कि कुत्ते के साथ मालिकों का व्यवहार नहीं था और वह बहुत अच्छी स्थिति में नहीं था। मालिकों ने कुत्ते को वापस करने के लिए याचिका दायर की...
सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क किए बिना एफआईआर दर्ज करने के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकते: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने पाया कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत संबंधित मजिस्ट्रेट से संपर्क किए बिना एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाले विभिन्न आवेदन सीधे हाईकोर्ट के समक्ष दायर किए जा रहे हैं।जस्टिस विपुल पंचोली के अनुसार , यह धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का उल्लंघन है। इसलिए, बेंच ने अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका को खारिज कर दिया जिसमें एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी, जो उसके द्वारा प्रतिवादी-पुलिस प्राधिकरण के पास दायर लिखित शिकायत...
दिल्ली दंगा: हाईकोर्ट कथित अभद्र भाषा के लिए राजनेताओं के खिलाफ एसआईटी जांच और एफआईआर करने की मांग वाली याचिकाओं पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा
दिल्ली हाईकोर्ट अगले सप्ताह 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों की स्वतंत्र एसआईटी जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगा। याचिकाओं में कथित नफरत भरे भाषणों के लिए राजनेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और गलत पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गई।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भंभानी की पीठ ने मामले की सुनवाई आठ फरवरी को तय की।पीठ ने हालांकि याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों से कहा कि वे याचिकाओं में प्रार्थनाओं की पहचान करें और उनका मिलान करें ताकि अदालत...
संविदात्मक क्षेत्र में न्यायिक हस्तक्षेप सावधानी से किया जाना चाहिए, विशेष रूप से सरकारी अनुबंधों में: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि संविदात्मक क्षेत्र में (जैसे कि टेंडर में होता है) न्यायिक जांच का आयोजन सावधानी से किया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि संविदा के लेखक उसकी आवश्यकताओं और पात्रता शर्तों के सबसे अच्छा जज होत हैं और अदालतों को केवल तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब पात्रता मानदंड या शर्तें मनमानी, तर्कहीन, अनुचित या दुर्भावनापूर्ण हो।जस्टिसयू दुर्गा प्रसाद राव ने एक याचिका को खारिज करते हुए, जिसमें एक निविदा अधिसूचना को अवैध घोषित करने की मांग की गई थी कहा कि राज्य के साधनों में न्यायिक...
गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र की अधिसूचना के मद्देनजर डीआरटी अहमदाबाद में पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति की मांग वाली जनहित याचिका का निपटारा किया
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने जनहित याचिका (पीआईएल) का निपटारा किया, जिसमें डीआरटी -II के पीठासीन अधिकारी को 31 मार्च, 2022 तक या किसी सदस्य की स्थायी नियुक्ति होने तक डीआरटी-आई, अहमदाबाद का अतिरिक्त प्रभार देने वाली केंद्र की अधिसूचना के मद्देनजर ऋण वसूली न्यायाधिकरण- I, अहमदाबाद में पीठासीन अधिकारी के पदों को भरने का निर्देश देने की मांग की गई थी।याचिकाकर्ता के वकील के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति निराल आर मेहता की पीठ ने एएसजी देवयांग व्यास को भी...
[NEET-PG] ग्रामीण क्षेत्र सेवा में संलग्न उम्मीदवार अधिकार के रूप में एक विशेष उप-कोटा का दावा नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने हाल ही में कहा कि ग्रामीण क्षेत्र सेवा या दुर्गम ग्रामीण क्षेत्र सेवा में संलग्न एनईईटी-पीजी उम्मीदवार अधिकार के रूप में एक विशेष उप-कोटा का दावा नहीं कर सकते हैं।न्यायमूर्ति एन. नागरेश ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मेडिकल पोस्टग्रेजुएट डिग्री कोर्स 2021-2022 में प्रवेश के लिए प्रॉस्पेक्टस में ग्रामीण क्षेत्र की सेवा के लिए 2% और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्र की सेवा के लिए 5% वेटेज प्रदान किया गया है। कोर्ट ने कहा, "प्रॉस्पेक्टस ग्रामीण सेवा और कठिन ग्रामीण सेवा...
'पॉलिसी मैटर': दिल्ली हाईकोर्ट ने COVID-19 की बूस्टर डोज अंतराल को कम करने के लिए जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को फ्रंट लाइन वर्कर्स और वरिष्ठ नागरिकों को COVID-19 वैक्सीन की बूस्टर डोज लगाने के लिए समय अंतराल को कम करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।चीफ जस्टिस पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ ने कहा कि यह एक प्रशासनिक निर्णय है और अदालत याचिकाकर्ताओं की इच्छा के आधार पर नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की,"ये नीतियां डॉक्टरों द्वारा बनाई गई हैं जो विषय-विशेषज्ञ हैं और हाईकोर्ट ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने...
मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 245(2) के तहत आरोपी को इस आधार पर डिस्चार्ज नहीं कर सकता कि साक्ष्य के लिए निर्धारित तिथि पर शिकायतकर्ता अनुपस्थित था; सबूतों पर विचार करना आवश्यक: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी की धारा 245(2) के तहत एक आरोपी को आरोपमुक्त करते समय यह दर्शाने के लिए कारण दर्ज करने होंगे कि कोई मामला नहीं बनता है।बेंच ने आगे कहा कि मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 245(2) के तहत आरोपी को इस आधार पर डिस्चार्ज नहीं कर सकता कि साक्ष्य के लिए निर्धारित तिथि पर शिकायतकर्ता अनुपस्थित था। न्यायमूर्ति आनंद कुमार मुखर्जी ने कहा, "मेरे विचार में, सीआरपीसी की धारा 245 (2) के तहत मजिस्ट्रेट की ओर से यह कानूनी आवश्यकता होगी कि वह उन...
'रिपोर्ट बिल्कुल अस्पष्ट: कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के लापता होने के मामले में पुलिस जांच पर कहा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य के कलना जिले में एक नाबालिग लड़की के लापता होने के मामले में कलना थाना, पूरबा बर्धमान के पुलिस अधिकारियों द्वारा जिस तरह से जांच की जा रही है, उस पर नाराजगी व्यक्त की।अदालत लापता नाबालिग लड़की के माता-पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।जस्टिस टीएस शिवगनम और जस्टिस हिरणमय भट्टाचार्य की पीठ ने गुरुवार को राकेश सिंह, प्रभारी अधिकारी, कालना पुलिस स्टेशन, पुरबा बर्धमान द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया।पीठ ने कहा,"कहने के लिए कम से कम...

















