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त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों/सड़कों पर मांस उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों/सड़कों पर मांस उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह राज्य सरकार को सार्वजनिक स्थानों और/या सड़कों पर मांस उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने और बूचड़खाने के चालू होने तक उन स्थानों को उपलब्ध कराने पर विचार करने का निर्देश दिया जहां वध किया जा सकता है।चीफ जस्टिस इंद्रजीत महंती और जस्टिस एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को एडवोकेट अंकन तिलक पॉल द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर कई निर्देश जारी किए। इसमें राजधानी शहर सहित पूरे त्रिपुरा में सार्वजनिक/सड़कों पर जानवरों की बिक्री और वध पर प्रतिबंध लगाने और बंद...

आरोपी के खिलाफ अस्पष्ट आरोप के आधार पर दी गई जमानत रद्द नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आरोपी के खिलाफ अस्पष्ट आरोप के आधार पर दी गई जमानत रद्द नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि अगर किसी ठोस सबूत के बिना आरोपी के खिलाफ अस्पष्ट आरोप हैं तो दी गई जमानत को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 439 (2) के तहत रद्द नहीं किया जा सकता है।पूरा मामलाआरोपी को मिली जमानत रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 439 (2) के तहत आपराधिक याचिका दायर की गई थी। यह डबल मर्डर का मामला है।एक मृतक की पत्नी ने उक्त अपराध में आरोपी को दी गई उक्त जमानत को इस आधार पर रद्द करने के लिए याचिका दायर की कि दो पूर्व जमानत आवेदनों के खारिज होने के बाद जमानत देने के...

पति पर पत्नी को पीटने का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को परिवार को फिर से मिलाने के लिए ससुराल में 1 महीने रहने का निर्देश दिया
पति पर पत्नी को पीटने का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को 'परिवार को फिर से मिलाने' के लिए ससुराल में 1 महीने रहने का निर्देश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति (पति) को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी के साथ ससुराल में एक महीने तक रहे ताकि परिवार आने वाले समय में फिर से मिल जाए। पति पर अपनी पत्नी की पिटाई करने का आरोप है।यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित आर्य की पीठ ने पत्नी (गीता रजक) द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया। दो साल की उम्र के अपने बच्चे (कॉर्पस) को पेश करने की मांग करते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट दायर की गई थी।पत्नी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि...

[मोटर दुर्घटना] बीमा कंपनी लाइसेंस की वैधता के मुद्दे को अपील में नहीं उठा सकती, अगर यह ट्रिब्यूनल के समक्ष दलील नहीं दी गई थी: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
[मोटर दुर्घटना] "बीमा कंपनी लाइसेंस की वैधता के मुद्दे को अपील में नहीं उठा सकती, अगर यह ट्रिब्यूनल के समक्ष दलील नहीं दी गई थी": जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बीमा कंपनी द्वारा दायर एक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए निर्णय को इस आधार पर चुनौती दी थी कि आपत्तिजनक वाहन चालक द्वारा चलाया जा रहा था, जिसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ता-बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी आपत्तियों में लाइसेंस की वैधता के संबंध में कुछ भी दलील नहीं दी थी और इसलिए, इसे अपील में उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।क्या...

शादी के झूठे वादे पर बलात्कार- विवाहित, शिक्षित महिला को शादी से पहले यौन संबंध बनाने के परिणामों के बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए : राजस्थान हाईकोर्ट
शादी के झूठे वादे पर बलात्कार- विवाहित, शिक्षित महिला को शादी से पहले यौन संबंध बनाने के परिणामों के बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने शादी के झूठे वादे के आधार पर बलात्कार करने से संबंधित एक मामले में कहा है कि शादीशुदा शिक्षित महिला को (प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर) शादी से पहले किसी पुरुष के साथ संभोग करने के परिणामों से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए। अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) की धारा 375 के तहत एक महिला की सहमति को केवल तभी तथ्यों की गलतफहमी के आधार पर गलत ठहराया जा सकता है, जहां इस तरह की गलतफहमी शारीरिक संबंध स्थापित करने के लिए उसके आत्मसमर्पण का आधार थी। अदालत...

आईपीआर उल्लंघन के खिलाफ मजबूत प्रवर्तन प्रावधानों की आवश्यकता: सीजेआई एनवी रमाना
आईपीआर उल्लंघन के खिलाफ मजबूत प्रवर्तन प्रावधानों की आवश्यकता: सीजेआई एनवी रमाना

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने भारत में आईपीआर विवादों के न्यायनिर्णयन पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते हुए शनिवार को कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन के कृत्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।सीजेआई रमाना ने कहा, "उल्लंघन के खिलाफ सख्त प्रवर्तन और कार्रवाई के प्रावधान समय की जरूरत है।" उन्होंने यह भी कहा कि आईपीएबी से उच्च न्यायालयों में आईपीआर क्षेत्राधिकार का अधिकार ऐसे समय में आया है जब सिस्टम बैकलॉग से अधिक बोझ है।इस संदर्भ में, सीजेआई ने न्यायिक बुनियादी ढांचे...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निवारक निरोध के आदेश को रद्द कर दिया क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट आदेश को सरकार को तत्काल भेजने में विफल रहे
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निवारक निरोध के आदेश को रद्द कर दिया क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट आदेश को सरकार को तत्काल भेजने में विफल रहे

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित निवारक निरोध के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वह अपने दायित्व का निर्वहन करने में विफल रहे, क्योंकि उन्होंने संबंधित आदेश पारित करने के लगभग 10 दिनों के बाद मामले को राज्य सरकार को अग्रेषित नहीं किया।जस्टिस शील नागू और जस्टिस डीडी बंसल की खंडपीठ याचिकाकर्ता द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें वह कालाबाजारी रोकथाम और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का रखरखाव अधिनियम, 1980 की धारा 3(1) को लागू करके जिला मजिस्ट्रेट,...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरबीआई को महाराष्ट्र निवासी एक व्यक्ति के नोटबंदी के बाद चलन से बाहर हुए पुराने नोट बदलने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरबीआई को महाराष्ट्र निवासी एक व्यक्ति के नोटबंदी के बाद चलन से बाहर हुए पुराने नोट बदलने का निर्देश दिया

बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को नोटबंदी (डिमोनेटाइज़ेशन) के बाद महाराष्ट्र निवासी एक व्यक्ति के एक लाख 60 हज़ार रुपए के पुराने नोटों को नए नोटों से बदलने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक को 1.6 लाख रुपये के पुराने नोटों को नए और वैध नोटों से बदलने का निर्देश दिया।जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस माधव जामदार की खंडपीठ ने किशोर सोहोनी द्वारा दायर याचिका में यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने डिमोनेटाइजेशन से पहले अदालत के आदेश के अनुसार उक्त राशि थाने में नकद में जमा की...

सेक्‍शन 306 आईपीसी | केवल सुसाइड नोट में नाम होने से अभियुक्त का दोष सिद्ध नहीं होता, कथित उकसावे और आत्महत्या के बीच नजदीकी संबंध होना चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
सेक्‍शन 306 आईपीसी | केवल सुसाइड नोट में नाम होने से अभियुक्त का दोष सिद्ध नहीं होता, कथित उकसावे और आत्महत्या के बीच नजदीकी संबंध होना चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने को स्थापित करने के लिए उकसाने की सामग्री को पूरा किया जाना चाहिए और आरोपी के नाम के साथ केवल एक सुसाइड नोट पर्याप्त नहीं होगा।जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने माना कि मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए आरोपी द्वारा उकसाने की ओर इशारा करते आशय (mens rea) के अलावा, इस तरह के उकसाने और परिणामी आत्महत्या के बीच एक निकट और जीवंत लिंक मौजूद होना चाहिए, यह स्थापित करने के लिए आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
लड़के की उम्र 21 वर्ष से अधिक नहीं होने से विवाह अमान्य नहीं होगा, वयस्क अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रह सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि यह बखूबी स्थापित है कि एक वयस्‍क को किसी के साथ अपनी मर्जी से रहने का अधिकार है, यह तथ्य कि विवाहित लड़के की आयु 21 वर्ष से अधिक नहीं है, विवाह को अमान्य नहीं करेगा।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस शमीम अहमद की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अधिक से अधिक, यह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 18 के तहत दंड के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को उत्तरदायी बना सकता है।मामलादरअसल, एक लड़की के पिता ने धारा 363 और 366 आईपीसी के तहत एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था...

केवल यह अस्पष्ट विश्वास कि आरोपी जांच प्रभावित कर सकता है, उसे लंबे समय तक जेल में रखने का आधार नहीं हो सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
केवल यह अस्पष्ट विश्वास कि आरोपी जांच प्रभावित कर सकता है, उसे लंबे समय तक जेल में रखने का आधार नहीं हो सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यह अस्पष्ट विश्वास कि आरोपी जांच को विफल कर सकता है, उसे लंबा समय तक जेल में रखने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त द्वारा आपराधिक मुकदमे में न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप की कोई आशंका नहीं है तो न्यायालय को अभियुक्तों को उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने पर विचार करते हुए चौकस होना चाहिए।उन्होंने कहा,"अपराध की भयावहता जमानत से इनकार करने का एकमात्र मानदंड नहीं हो सकता। जमानत का उद्देश्य मुकदमे के समय अभियुक्त की...

सिर्फ इसलिए कि लिव-इन रिलेशनशिप अस्वीकार्य है, महिला को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकताः लिएंडर पेस घरेलू हिंसा के लिए जिम्मेदार
सिर्फ इसलिए कि लिव-इन रिलेशनशिप अस्वीकार्य है, महिला को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकताः लिएंडर पेस घरेलू हिंसा के लिए जिम्मेदार

मुंबई स्थित एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने टेनिस स्टार लिएंडर पेस और मॉडल व आर्ट ऑफ लिविंग की प्रशिक्षक रिया पिल्लई के रिश्ते को 'विवाह की प्रकृति' में मानते हुए पेस को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आर्थिक और मानसिक हिंसा के लिए उत्तरदायी ठहराया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब टेनिस स्टार लिएंडर ने रिया पिल्लई के साथ वर्ष 2003-2005 में रहना शुरू किया था तो वह यह बात जानते थे कि रिया पिल्लई की शादी अभिनेता संजय दत्त से हुई थी।अदालत ने पेस को आदेश दिया है कि वह पिल्लई को प्रतिमाह...

राजस्व दस्तावेज में संपत्ति का म्यूटेशन स्वामित्व का निर्माण या समापन नहीं करता है: तेलंगाना हाईकोर्ट
राजस्व दस्तावेज में संपत्ति का म्यूटेशन स्वामित्व का निर्माण या समापन नहीं करता है: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि जब दोनों न्यायालयों के एक सुविचारित आदेश में समवर्ती निष्कर्ष हों तो दूसरी अपील कानून के किसी भी महत्वपूर्ण प्रश्न के बिना सुनवाई योग्य नहीं होगी।तथ्यवादी ने वाद दायर किया था, जिसमें वाद अनुसूची संपत्ति के कब्जे की घोषणा और रिकवरी की मांग की गई थी। वादी ने तर्क दिया कि वह वाद भूमि की मालिक और कब्जाधारी थी। वह अपनी मां की एकमात्र कानूनी उत्तराधिकारी है, और सपंत्त‌ि उन्हीं से प्राप्त की ‌थी। प्रतिवादी उसके पिता भाई यान‌ि चाचा था और वह उसकी मां...

क्या मंदिरों को सरकार के नियंत्रण में होना चाहिए? क्या मस्जिदों और चर्चों पर सरकार को समान नियंत्रण रखने का तर्क उचित नहीं है? मद्रास हाईकोर्ट ने पूछा
क्या मंदिरों को सरकार के नियंत्रण में होना चाहिए? क्या मस्जिदों और चर्चों पर सरकार को समान नियंत्रण रखने का तर्क उचित नहीं है? मद्रास हाईकोर्ट ने पूछा

मद्रास हाईकोर्ट ने श्रीरंगम मंदिर प्रशासन (श्रीरंगम भगवान रंगनाथस्वामी मंदिर) के बारे में कथित रूप से सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में मंदिर एक्टिविस्ट रंगराजन नरसिम्हन के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर रद्द कर दी।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन एफआईआर रद्द करते हुए ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 199 मानहानि के लिए एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाती है। अदालत ने रेखांकित किया कि सीआरपीसी की धारा 199 अदालत के बारे में आईपीसी [मानहानि] के अध्याय XXI में अपराधों का संज्ञान नहीं लेने के बारे में बताती है, जब तक...

हिजाब प्रतिबंध : कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच ने 11 दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा
हिजाब प्रतिबंध : कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच ने 11 दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा

कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच ने शुक्रवार को मुस्लिम छात्राओं द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इन याचिकाओं में एक सरकारी पीयू कॉलेज द्वारा हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनकर मुस्लिम छात्राओं को प्रवेश करने से इनकार करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई 11 दिनों तक चली। उल्लेखनीय है कि कोर्ट का वह अंतरिम आदेश अब भी लागू है, जिसमें स्टूडेंट को कक्षाओं में किसी भी तरह के धार्मिक...