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हिंदी में दिए गए निर्णयों की संख्या का विवरण केंद्रीय रूप से नहीं रखा जाता है: गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने लोकसभा (Lok Sabha) में जानकारी दी कि हिंदी में दिए गए निर्णयों की संख्या का विवरण केंद्रीय रूप से नहीं रखा जाता है।यह प्रतिक्रिया सांसदों केशरी देवी पटेल और कनकमल कटारा द्वारा अदालतों में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने और हिंदी में दिए गए निर्णयों की संख्या के साथ हिंदी में निर्णय लिखने के लिए सरकार द्वारा जारी निर्देशों का विवरण मांगने पर आई।प्रश्न में हाईकोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विवरण भी...
पटना हाईकोर्ट में दो नए जजों ने शपथ ली
पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में दो नए न्यायाधीशों ने मंगलवार, 29 मार्च, 2022 को शपथ ली।चीफ जस्टिस संजय करोल ने नवनियुक्त न्यायाधीशों जस्टिस राजीव रॉय और जस्टिस हरीश कुमार को शपथ दिलाई।नई नियुक्तियों के साथ हाईकोर्ट की कार्य शक्ति अब बढ़कर 27 हो गई है।उल्लेखनीय है कि जस्टिस राजीव राय संवैधानिक, प्रशासनिक और आपराधिक मामलों के वकील थे। जस्टिस हरीश कुमार ने शिक्षा और संवैधानिक मामलों को देखा। दोनों न्यायाधीशों ने हाईकोर्ट में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व किया।केंद्र सरकार ने 24 मार्च, 2022 को...
यदि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पहले ही याचिका को अनुमति दी जा चुकी है तो दूरी/वित्तीय बोझ के आधार पर वैवाहिक मामले को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक बार हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 [भरण-पोषण और मुकदमेबाजी का खर्च] की धारा 24 के तहत एक आवेदन को अनुमति दी जा चुकी हो, और वैवाहिक विवाद में शामिल एक पक्ष को मुकदमेबाजी खर्च का निर्बाध भुगतान किया जा रहा हो, वह दूरी और वित्तीय बोझ के आधार पर स्थानांतरण आवेदन दायर नहीं कर सकता/सकती है।जस्टिस नीरज तिवारी की खंडपीठ ने अभिलाषा गुप्ता बनाम हरिमोहन गुप्ता 2021 9 एससीसी 730 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए उक्त टिप्पणी की। उक्त मामले में सुप्रीम...
जेलों में कानूनी सहायता प्रणाली अप्रभावी, कई लोग जेलों में इसी कारण सड़ रहेः एडवोकेट सुधा भारद्वाज
सिविल राइट्स लॉयर और एक्टिविस्ट सुधा भारद्वाज ने हाल ही में एक वेबिनार में जेलों में प्रभावी कानूनी सहायता प्रणाली की कमी के बारे में बात की। उल्लेखनीय है कि सुश्री भारद्वाज को भीमा कोरगांव मामले में तीन साल से अधिक समय तक जेल में बंद रही थीं। दिसंबर 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी। वेबिनार में उन्होंने अंडर ट्रायल के रूप में बिताये अपने अनुभवों को सुनाया।उन्होंने बताया कई कैदी, विशेष रूप से हाशिए के लोग कानूनी उपायों का लाभ उठाने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने ऐसे कैदियों को पेश...
मौखिक रूप से हुए पारिवारिक समझौत पर पंजीकरण या स्टांप ड्यूटी का भुगतान अनिवार्य नहीं, इसे केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि फैमिली सेटलमेंट को पंजीकृत करने और उसके लिए स्टांप शुल्क का भुगतान करने की जरूरत नहीं है, जब इस प्रकार के सेटलमेंट को शुरू में मौखिक बंटवारे के रूप में किया गया हो, हालांकि बाद में सूचना के मकसद से लिखित रूप दिया गया हो।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा, "पक्षकारों के बीच वकीलों के हस्तक्षेप से मौखिक समझौते के माध्यम से विभाजन पर सहमति हुई थी। समझौता ज्ञापन स्वयं संपत्तियों का विभाजन नहीं करता है, बल्कि केवल स्मृति की सहायता के रूप में रिकॉर्ड करता है।" .मौजूदा मामले...
सीपीसी द्वितीय अपील| केवल सहानुभूति के आधार पर आदेशों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते, कानून का महत्वपूण्र प्रश्न जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि एक हाईकोर्ट दूसरी अपील में कानून के किसी महत्वपूर्ण प्रश्न के अभाव में मात्र सहानुभूति के आधार पर सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के तहत एक आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।सीपीसी की धारा 100 के तहत किसी सिविल सूट के किसी भी पक्ष को, जिस पर दीवानी अदालत द्वारा पारित डिक्री का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, दूसरी अपील का प्रक्रियात्मक अधिकार प्रदान किया गया है। हाईकोर्ट में दूसरी अपील उसी स्थिति में की जाती है, जब न्यायालय संतुष्ट हो कि इसमें कानून का महत्वपूर्ण प्रश्न...
पटना हाईकोर्ट ने वीर कुंवर सिंह से संबंधित राष्ट्रीय धरोहर की खस्ताहालत को लेकर दायर जनहित याचिका पर केंद्र और बिहार राज्य सरकार से जवाब मांगा
पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने वीर कुंवर सिंह (Veer Kunwar Singh) से संबंधित राष्ट्रीय धरोहर की खस्ताहालत को लेकर दा जनहित याचिका पर केंद्र व राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल तथा न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आज से तीन सप्ताह की अवधि के भीतर जवाब सकारात्मक रूप से दाखिल किया जाए। उसका प्रत्युत्तर, यदि कोई हो, इसके बाद एक सप्ताह की...
निवारक निरोध के खिलाफ प्रतिनिधित्व करने का अवसर राज्य सरकार को नहीं, बल्कि हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी को दिया जाना चाहिए: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में इस आधार पर निवारक निरोध (Preventive Detention) के एक आदेश को रद्द कर दिया कि बंदी को हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी के समक्ष एक प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने का अवसर नहीं दिया गया, जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(5) के तहत उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।न्यायमूर्ति शील नागू (Justice Sheel Nagu) और न्यायमूर्ति एम.एस. भट्टी (Justice M.S. Bhatti) अनिवार्य रूप से याचिकाकर्ता द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें वह...
तांडव वेब-सीरीज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमेज़न प्राइम वीडियो की इंडिया हेड अपर्णा पुरोहित को अग्रिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने अमेज़न प्राइम वीडियो की इंडिया हेड अपर्णा पुरोहित को अंतिम अग्रिम जमानत दी, जो कथित तौर पर वेब सीरीज तांडव (Tandav) में हिंदू देवताओं का अपमान करने के खिलाफ लखनऊ में दर्ज एक प्राथमिकी का सामना कर रही है।न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की खंडपीठ ने मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया और परिणामस्वरूप इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आवेदक को अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए।अनिवार्य रूप से, पुरोहित अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के संबंध में अग्रिम जमानत की मांग कर...
एक्टर के यौन उत्पीड़न का मामला | केरल हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी पल्सर सुनी की जमानत याचिका खारिज की
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को सनसनीखेज 2017 यौन उत्पीड़न मामले में मुख्य आरोपी पल्सर सुनी को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया। इस मामले में प्रमुख एक्टर का अपहरण कर लिया गया और एक साजिश के तहत चलती गाड़ी में बलात्कार किया गया।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि इस स्तर पर जमानत नहीं दी जा सकती।मामले में सुनी मुख्य आरोपी है, वहीं मलयालम अभिनेता दिलीप मामले में सह-आरोपी हैं। माना जाता है कि साजिश के पीछे उनका दिमाग था। 2017 के मामले में 10 आरोपी हैं और पुलिस ने सात को...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार और लोक सेवा आयोग से सभी सरकारी-नियंत्रित प्रतिष्ठानों और संस्थानों ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के लिए रोजगार में आरक्षण की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर जवाब मांगा है।जनहित याचिका में कहा गया है,"महाराष्ट्र राज्य ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के प्रति अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा करने में विफल रहा है।" याचिकाकर्ता में एनजीओ संपदा ग्रामीण महिला संस्था और समुदाय आधारित संगठन मुस्कान संस्था के...
विदेश यात्रा के मौलिक अधिकार को शर्तें लागू करके नियंत्रित किया जा सकता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी को फैमिली रियूनियन के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका जाने की अनुमति दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने हाल ही में एक प्रवासी भारतीय नागरिक को, जिस पर रेवड़ी पुलिस द्वारा धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया है, पारिवारिक रियूनियन के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका जाने की अनुमति दी।न्यायमूर्ति विकास बहल (Justice Vikas Bahl) की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को विदेश यात्रा करने का मौलिक अधिकार है, जिसे उस पर कुछ शर्तें लगाकर नियंत्रित किया जा सकता है। यह देखा गया कि न्यायालय को एक तरफ याचिकाकर्ता के विदेश...
एक छोटे से भूखंड पर आवासीय भवन बनाने के लिए विकास परमिट की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह एक बड़े भूखंड से उप-विभाजित है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि एक पंचायत भूमि के एक छोटे से हिस्से, जो कि एक बड़े भूखंड से उप-विभाजित है, के मालिक से विकास परमिट पेश करने जोर नहीं दे सकती है, ताकि उसकी संपत्ति पर केरल पंचायत भवन नियम, 2019 के अनुसार, आवासीय भवन के निर्माण की अनुमति मिल सके।चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली की एक खंडपीठ ने कहा कि नियम एक व्यक्ति द्वारा एक बड़े क्षेत्र जमीन के एक छोटे से भूखंड की खरीद के संबंध में पूरी तरह से अलग स्थिति पर विचार करते हैं, चाहे संपत्ति के मालिक ने इसे विभिन्न...
एनसीबी ने आर्यन खान मामले में चार्जशीट दाखिल करने के लिए तीन महीने की मोहलत मांगी
कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में चार्जशीट दाखिल करने के लिए विशेष अदालत से 90 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा है। इस मामले में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान भी आरोपी हैं।नारकोटिक ड्रग एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की एसआईटी के पास आरोपी के हिरासत में होने पर अपनी जांच पूरी करने के लिए 180 दिन का समय है।हालांकि, अधिनियम की धारा 36 ए (4) के तहत विशेष अदालत विशेष लोक अभियोजक की रिपोर्ट पर...
"पहली बार अपराध किया है, लंबे समय तक जेल में रहना उसके समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक": दिल्ली कोर्ट ने 'सुली डील्स' ऐप मामले में आरोपी ओंकारेश्वर ठाकुर को जमानत दी
दिल्ली कोर्ट (Delhi Court) ने सोमवार को गिटहब (GitHub) पर 'सुली डील्स (Sulli Deals)' ऐप बनाने के आरोपी ओंकारेश्वर ठाकुर को यह कहते हुए जमानत दी कि उसने पहली बार अपराध किया है और लंबे समय तक जेल में रहना उसके समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा।पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने ठाकुर को यह देखते हुए जमानत दी कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। इस महीने की शुरुआत में आरोप पत्र दायर किया गया था।अदालत ने कहा,"सिर्फ इसलिए कि विभिन्न बिचौलियों और एफएसएल से जवाब का इंतजार...
किशोर न्याय अधिनियम | धारा 12 के तहत जमानत देने के लिए धारा 15 के तहत प्रारंभिक मूल्यांकन आवश्यक नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में कहा कि किशोर न्याय बोर्ड की किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 12 के तहत जमानत देने की शक्ति की जेजे एक्ट की धारा 15 के तहत प्रारंभिक मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस जीएस अहलूवालिया अधिनियम की धारा 102 के तहत एक आपराधिक संशोधन का निस्तारण कर रहे थे, जिसमें आवेदक ने जेजेबी द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसने कानून के उल्लंघन के आरोप में एक बच्चे को अधिनियम की धारा 12 के तहत जमानत दी थी।आवेदक ने...
अदालतें मकान-मालिकों से यह नहीं कह सकतीं कि उन्हें किस तरह से रहना चाहिए या उनके लिए आवासीय मानक निर्धारित नहीं कर सकतीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किराए के विवादों में अदालतों का यह सरोकार नहीं है कि वह मकान मालिक को यह निर्देश दे कि उसे कैसे और किस तरीके से रहना चाहिए या उसके लिए अपना खुद का आवासीय मानक निर्धारित करना चाहिए।प्रतिभा देवी (श्रीमती) बनाम टीवी कृष्णन 1996 (5) एससीसी 353 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने भी जोर देकर कहा कि मकान मालिक अपनी आवासीय जरूरतों का सबसे अच्छा जज है और ऐसा कोई कानून नहीं है, जो मकान मालिक को उसकी संपत्ति के लाभकारी...
"यह एक विरासत है, इसे संरक्षित किया जाना चाहिए": दिल्ली हाईकोर्ट ने कनॉट प्लेस में रीगल बिल्डिंग की मरम्मत और संरचनात्मक परिवर्धन का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के कनॉट प्लेस इलाके में रीगल बिल्डिंग की सुरक्षित करने के लिए मरम्मत और संरचनात्मक परिवर्धन का निर्देश दिया। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि वह एक ऐतिहासिक इमारत है और उसकी संरचना को संरक्षित किया जाना चाहिए।जस्टिस संजीव सचेवा ने सिविल इंजीनियर विभाग, भारतीय संस्थान प्रौद्योगिकी दिल्ली (आईआईटी, दिल्ली) द्वारा दायर की गई स्थिति रिपोर्ट का अवलोकन किया। इसमें सिफारिश की गई कि भवन संरचना का एक सर्वेक्षण किया जाना चाहिए और बिना किसी तदर्थ संशोधन या मरम्मत को अंजाम दिया जाना चाहिए।...
हाईकोर्ट के पास निजी प्रकृति के विवादों के नॉन-कंपाउंडेबल अपराधों के लिए समझौता करने की अनुमति देने की 'अंतर्निहित शक्ति': आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल के एक मामले में पार्टियों द्वारा किए गए समझौते की अनुमति दी और अपराधी के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी, हालांकि अपराध आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 320 के तहत नॉन-कंपाउंडेबल था।कथित अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी के तहत था, जो दहेज हत्या से संबंधित है। अदालत से अनुरोध करते हुए आवेदन दायर किए गए थे कि वास्तविक शिकायतकर्ता को अपराधों को कम करने और समझौता दर्ज करने की अनुमति दी जाए।संयुक्त ज्ञापन में दर्ज समझौते की शर्तों से यह कहा गया था कि...
मुवक्किल के लिए जूनियर एडवोकेट के साथ सीनियर एडवोकेट द्वारा संयुक्त वकालत दाखिल करने में कोई अवैधता नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने सोमवार को फैसला सुनाया कि एक बार जब कोई मुवक्किल किसी वकील को मामले का संचालन करने के लिए अधिकृत करता है, तो वकील को उनकी ओर से एक संयुक्त वकालत दायर करने का अधिकार होता है।न्यायमूर्ति एन. नागरेश ने कहा कि संयुक्त वकालत दायर करना किसी भी वकील को उसकी पेशेवर फीस से इनकार करने का आधार नहीं है।आगे कहा,"उक्त प्राधिकरण में वरिष्ठ वकील के कार्यालय में कनिष्ठ वकील के साथ संयुक्त वकालत दायर करने सहित मामले के संचालन और मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक सभी करने के लिए...



















