मुख्य सुर्खियां
[आदेश VI नियम 18 सीपीसी] तय समय में अगर वाद में संशोधन नहीं किया गया तो बाद में उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हाल ही में कहा कि एक बार वाद में संशोधन के लिए एक आवेदन की अनुमति मिलने के बाद, उसे दी गई समय सीमा के भीतर संशोधित किया जाना चाहिए।भारत संघ बनाम प्रमोद गुप्ता, (2005) 12 एससीसी 1 में सर्वोच्च न्यायालय का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि यदि संशोधित याचिका निर्धारित समय के भीतर दायर नहीं की जाती है, तो उसके बाद इसमें संशोधन नहीं किया जा सकता है।पीठ ने कहा, "यह कानून में तय स्थिति है कि एक बार संशोधन के लिए एक आवेदन की अनुमति दी जाती है,...
चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन में नाबालिग को कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया, मां ने जेजे एक्ट के प्रावधानों को चुनौती दी, 5 करोड़ मुआवजा मांगा, दिल्ली हाईकोर्ट नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 बाल कल्याण समितियों की संरचना, कार्य और शक्ति से संबंधित, के विभिन्न प्रावधानों के खिलाफ दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया।यह याचिका एक नाबालिग लड़की की मां ने दायर की है, जिस पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया है और उसे चाइल्ड केयर इस्टीट्यूट में धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया है, जहां उसे जेजे एक्ट के तहत बाल कल्याण समिति द्वारा रिमांड पर लिया गया...
प्रेम संबंध और सहमति से शारीरिक संबंध का मामला, अगर विवाह का झूठा वादा न हो तो बलात्कार नहींः जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि विवाह का वादा, जिसमें दो वयस्कों के बीच शारीरिक संबंध में शामिल हैं, प्रेम संबंध का मामला है और यह किसी भी रूप में आईपीसी की धारा 375 [बलात्कार] की परिभाषा के दायरे में नहीं आएगा।जस्टिस मोहन लाल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा जब झूठे वादे के मामला होता है, जिसे यौन संबंध के लिए एक महिला की सहमति पाने के लिए किया जाता है, तो गलत बयानी के बराबर होता है, और इस प्रकार से पाई गई सहमति किसी व्यक्ति को बलात्कार के अपराध से मुक्त नहीं कर सकती...
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बेटी द्वारा स्थापित विभाजन मुकदमे में दहेज के रूप में दी गई संपत्तियों को भी शामिल किया जाएगा: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि बेटी की शादी के समय जो संपत्ति दहेज या किसी अन्य रूप में दी गई है, वह विभाजन के लिए उत्तरदायी होगी और बेटी की ओर से विभाजन के स्थापित मुकदमे में उसे शामिल करना होगा। जस्टिस सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने विभाजन के लिए दायर एक मुकदमे में यह टिप्पणी की।मामलायाचिकाकर्ता हेमलता ने 8 अगस्त, 2018 को सिटी सिविल जज बेंगलुरु की ओर से पारित आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने अपने आदेश में याचिकाकर्ता द्वारा दायर विभाजन के मुकदमे में उसके भाई के ओर से दायर आवेदन को अनुमति दी थी,...
दिल्ली हाईकोर्ट ने यूएपीए मामले में कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट की न्यायिक रिमांड के विस्तार के खिलाफ दायर याचिका पर एनआईए से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मोहम्मद मनन डार की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। 24 वर्षीय कश्मीरी फोटो जर्नालिस्ट मोहम्मद मनन डार के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत दर्ज एक मामले में मामला दर्ज किया।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भंभानी की खंडपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जवाब मांगा और मामले को आगे की सुनवाई के लिए आठ अप्रैल को पोस्ट किया। यूएपीए की धारा 43डी (2)(बी) के प्रावधान के तहत...
मोटर दुर्घटना दावा | परिवहन वाहन चलाने के लिए अनुमोदन का अभाव वैध ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव के बराबर नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि कानून का यह सुस्थापित सिद्धांत है कि "लाइसेंस में ट्रांसपोर्ट वीहिकल चलाने के लिए अनुमोदन के अभाव की यह व्याख्या नहीं होगी कि चालक के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है।"जस्टिस संदीप भट्ट ने मोटर वाहन अधिनियम ('एमवी एक्ट') की धारा 173 के तहत पहली अपील के संबंध में यह टिप्पणी की, जिसमें अपीलकर्ता-बीमा कंपनी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश से व्यथित थी। ट्रिब्यूनल ने दावेदारों (चालक) और मालिक को संयुक्त रूप से और अलग-अलग 9% ब्याज दर...
आरोपियों को लाभ देने के लिए उचित धाराओं के तहत केस दर्ज नहीं किया गया: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में पुलिस अधीक्षक, जिला शहडोल को आरोपी को कथित रूप से लाभ देने के लिए उचित धाराओं के तहत केस दर्ज नहीं करने पर 'अपराधी' पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा अनिवार्य रूप से आईपीसी धारा 409, 420 और 34 के तहत आवेदक आरोपी द्वारा दायर दूसरी जमानत याचिका पर विचार कर रहे थे।अभियोजन पक्ष के अनुसार, आवेदक ने गलत बयानी द्वारा शिकायतकर्ता को धोखा दिया था। कुछ निवेश शिकायतकर्ता द्वारा और अन्य आवेदक...
राष्ट्रपति ने चार न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया
भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए चार नए न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किया।राष्ट्रपति ने निम्नलिखित नियुक्तियां की हैं:1. नीना बंसल कृष्णा2. दिनेश कुमार शर्मा3. अनूप कुमार मेंदीरत्ता4. सुधीर कुमार जैन25 फरवरी, 2022 को जारी अधिसूचना में कहा गया:"भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) में प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने न्यायिक अधिकारी (1) नीना बंसल कृष्णा (2) दिनेश कुमार...
"निवास के आधार पर सरकारी अस्पताल इलाज से इनकार नहीं कर सकते": पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि एक सरकारी अस्पताल किसी को इस आधार पर इलाज से इनकार नहीं कर सकता कि वह उस क्षेत्र का निवासी नहीं है जहां अस्पताल है।जस्टिस राजबीर सहरावत की खंडपीठ ने उक्त टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कही जिसमें गर्भवती महिला को चंडीगढ़ के एख सरकारी अस्पताल द्वारा इस आधार पर मेडिकल ट्रीटमेंट से वंचित कर दिया कि वह यूटी चंडीगढ़ की नहीं पंजाब की निवासी है।याचिकाकर्ता (पांच महीने की गर्भवती) ने चंडीगढ़ के एक सरकारी अस्पताल से संपर्क किया। वह इलाज के लिए...
आरोपियों को लाभ देने के लिए उचित धाराओं में मामला दर्ज नहीं किया गया, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में शहडोल जिले के पुलिस अधीक्षक को एक आरोपी के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज नहीं करने के मामले में 'अपराधी' पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को कथित रूप से फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कृत्य किया।जस्टिस विशाल मिश्रा दरअसल आईपीसी धारा 409, 420 और 34 के तहत दायर आरोपी की दूसरी जमानत याचिका पर विचार कर रहे थे।अभियोजन पक्ष के अनुसार, आवेदक ने गलत बयानी कर शिकायतकर्ता को धोखा दिया था। शिकायतकर्ता...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 'केजीएफ-2' फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर बेंच ने केजीएफ-2 फिल्म और उसके टीज़र के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।फिल्म 14 अप्रैल, 2022 को रिलीज होने वाली है।याचिकाकर्ता तसलीम अहमद खान ने एकल न्यायाधीश द्वारा पारित एक आदेश दिनांक 31.01.2021 के खिलाफ अपील दायर की थी। इसमें फिल्म के खिलाफ रिट याचिका में नोटिस जारी करते हुए अंतरिम रोक से इनकार कर दिया था।अपीलकर्ता मुख्य रूप से कुछ दृश्यों से व्यथित है। इसमें अभिनेताओं को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है। तर्क...
सेंसर सर्टिफिकेट को चुनौती दिए बिना यह तय नहीं किया जा सकता कि फिल्म के कॉन्टेंट समुदाय को बदनाम करते हैं या नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) के खिलाफ याचिकाओं के एक समूह में किसी भी राहत से इनकार कर दिया है।कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा जारी सेंसर प्रमाण पत्र को चुनौती के अभाव में किसी फिल्म की रिलीज पर कोई रोक नहीं हो सकती है। बता दें, आज यानी शुक्रवार को यह फिल्म रिलीज हो गई। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की खंडपीठ ने दो जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा,"एक प्रभावी वैकल्पिक उपाय...
अनीस खान मर्डर केस: कलकत्ता हाईकोर्ट ने मृतक की लाश का दोबारा पोस्टमार्टम का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को आलिया यूनिवर्सिटी के छात्र अनीस खान की हत्या के मामले में दूसरे पोस्टमार्टम का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि दूसरे पोस्टमॉर्टम और राज्य द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही जांच की निगरानी एक जिला न्यायाधीश द्वारा की जाएगी।अदालत ने इससे पहले घटना को 'गंभीर और चौंकाने वाला' करार देते हुए मामले का स्वत: संज्ञान लिया था।जस्टिस राजशेखर मंथा ने यह कहते हुए जांच को एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी को हस्तांतरित करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा...
'वन टाइम सेटलमेंट स्कीम' के तहत देय राशि को बैंक द्वारा एकतरफा बदल देना, वैध अपेक्षा के सिद्धांत के खिलाफ: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा था कि एक बैंक एकमुश्त निस्तारण राशि (वन टाइम सेटलमेंट, ओटीएस) को एकतरफा होकर नहीं बदल सकता। ऐसा करना प्राकृतिक न्याय और वैध अपेक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस डीडी बंसल की खंडपीठ दरअसल एक रिट याचिका का निस्तारण कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता प्रतिवादी बैंक के आदेश से व्यथित था, जिसने एकतरफा होकर ओटीएस राशि को 36,50,000 रुपये से बढ़ाकार 50,50,000 रुपये कर दिया था।पक्षकारों के बीच स्वीकृत तथ्य यह थे कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी से ऋण...
"हत्या सोच-समझकर या पूर्व नियोजित नहीं थी": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 27 साल पुराने मामले में चार लोगों की मौत की सजा को बदला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को 27 साल पुराने हत्या के एक मामले में यह देखते हुए कि मामला 'दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में नहीं आता है, चार लोगों को दी गई मौत की सजा को बदल दिया।जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विवेक वर्मा की खंडपीठ निचली अदालत की इस राय से सहमत नहीं थी कि हत्या सोच-समझकर और पूर्व नियोजित थी। ट्रायल कोर्ट का निष्कर्ष था कि मौत की सजा से कम पर्याप्त और उचित नहीं होगी।पृष्ठभूमि10-11 नवंबर, 1994 की दरमियानी रात को चार अपीलार्थियों कृष्णा मुरारी, राघव राम वर्मा, काशीराम वर्मा...
हिजाब केस- सबरीमाला जजमेंट प्रो-चॉइस, संवैधानिक नैतिकता राज्य की शक्ति पर एक प्रतिबंध : वरिष्ठ अधिवक्ता कामत ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा
कर्नाटक हाईकोर्ट में गुरुवार को हिजाब पर प्रतिबंध लगाने के मामले वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने याचिकाकर्ता मुस्लिम छात्राओं की ओर से जवाबी तर्क पेश किए। कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनकर एक सरकारी पीयू कॉलेज के प्रवेश से इनकार करने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली मुस्लिम छात्राओं की याचिका पर सुनवाई कर रही है। फुल बेंच के समक्ष सुनवाई का आज 10वां दिन था।मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित और न्यायमूर्ति जेएम खाजी की खंडपीठ ने कहा कि वह शुक्रवार...
बिना यह पता लगाए कि हथियार का दुरुपयोग हुआ है, उसका लाइसेंस रद्द करना तर्कसंगत नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना यह पता लगाए कि हथियार का दुरुपयोग हुआ है, उसका लाइसेंस रद्द करना तर्कसंगत नहीं है।जस्टिस गौतम चौधरी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सुधाकर मिश्रा के बन्दूक लाइसेंस को रद्द करने के कलेक्टर द्वारा पारित मई 1989 के एक आदेश के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त टिप्पणी की। अक्टूबर 1995 में आयुक्त, वाराणसी मंडल, वाराणसी द्वारा पारित उनकी अपील को भी खारिज कर दिया गया था।याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि अधिकारियों ने इस आधार पर आक्षेपित आदेश पारित किए कि...
'गृहणी की भूमिका कुशल कर्मचारी से बढ़कर': गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मोटर एक्सिडेंट मुआवजा बढ़ाया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक गृहिणी की भूमिका बहुआयामी है और उसे एक कुशल श्रमिक के रूप में चिन्हित करना घर को मैनेज करने में उसकी भूमिका के साथ पूर्ण न्याय नहीं है। इसलिए, एक मोटर दुर्घटना में उसकी मृत्यु के संबंध में मुआवजे की गणना निर्भरता की हानि को शामिल कर की जानी चाहिए।कोर्ट ने कहा, " मेरी सुविचारित राय में एक गृहिणी को 'कुशल कर्मचारी' के रूप में चिन्हित करना गृह प्रबंधक के रूप में उसकी बहुआयामी भूमिका के साथ पूर्ण न्याय नहीं है। लता वाधवा (इन्फ्रा) मामले में दुर्घटना और...
कर्मचारी को रियायत के रूप में 'वर्क फ्रॉम होम' की अनुमति से क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार में परिवर्तन का दावा नहीं किया जा सकता : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि केवल घर से काम करने की अनुमति (वर्क फ्रॉम होम) उस न्यायालय को अधिकार क्षेत्र प्रदान करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसके अधिकार क्षेत्र में कर्मचारी काम कर रहा है।जस्टिस सुनील थॉमस ने दूरस्थ कर्मचारियों के कानूनी दावों के क्षेत्राधिकार को स्पष्ट किया दिया और फैसला सुनाया कि केवल इसलिए कि उन्हें घर से काम करने की अनुमति है और नियोक्ता को पता था कि कर्मचारी एक अलग अधिकार क्षेत्र में है, अधिकार क्षेत्र प्रदान करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।बेंच ने कहा,"कानूनी...
"10 मई तक इंट्रोगेशन रूम्स सहित सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाएं": हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ को निर्देश दिया
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को 10 मई, 2022 तक 18 महीने की स्टोरेज वाले सीसीटीवी कैमरे इंट्रोगेशन रूम्स सभी पुलिस स्टेशनों में लगाने का निर्देश दिया।जस्टिस अमोल रतन सिंह की खंडपीठ ने परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह और अन्य (2021) 1 एससीसी 184 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश द्वारा जारी निर्देशों के मद्देनजर यह आदेश जारी किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें यह सुनिश्चित करना का निर्देश दिया कि उनके अधीन...
















