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प्रति-परीक्षण का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हिस्सा: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने POCSO मामले में अभियोक्ता की पुन:परीक्षण की अनुमति दी
'प्रति-परीक्षण का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हिस्सा': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने POCSO मामले में अभियोक्ता की पुन:परीक्षण की अनुमति दी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने हाल ही में कहा कि प्रति-परीक्षण (Cross- Examination) का अधिकार निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का एक हिस्सा है जो प्रत्येक व्यक्ति के पास जीवन के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधीन है।न्यायमूर्ति रजनी दुबे ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और POCSO मामले में अभियोक्ता (Prosecutrix) की पुन: परीक्षण (Re-Examination) की अनुमति दी। आरोपी द्वारा एक अपील दायर की गई थी, जिसमें विशेष न्यायाधीश (पोक्सो अधिनियम) के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 19 के तहत साझा घर में निवास का अधिकार अपरिहार्य अधिकार नहीं, जब बहू को सास-ससुर के खिलाफ खड़ा किया गया होः दिल्‍ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 19 के तहत निवास का अधिकार साझा घर में निवास का अपरिहार्य अधिकार नहीं है, खासकर, जब बहू को वृद्ध ससुर और सास के खिलाफ खड़ा किया जाता हो।जस्टिस योगेश खन्ना ने कहा,"इस प्रकार, जहां निवास एक साझा घर है, यह मालिक पर अपनी बहू के खिलाफ बेदखली का दावा करने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता है। पार्टियों के बीच एक तनावपूर्ण संघर्षपूर्ण संबंध यह तय करने के लिए प्रासंगिक होगा कि बेदखली के आधार मौजूद हैं या नहीं।"अदालत एक सिविल सूट में 10.07.2018 को पारित...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिद्दीकी कप्पन की जमानत याचिका पर यूपी सरकार से 14 मार्च तक जवाबी हलफनामा मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिद्दीकी कप्पन की जमानत याचिका पर यूपी सरकार से 14 मार्च तक जवाबी हलफनामा मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित हाथरस साजिश मामले में केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के खिलाफ दर्ज राजद्रोह, यूएपीए मामले के संबंध में द्वारा दायर जमानत याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा। उक्त याचिका लखनऊ में एनआईए कोर्ट के समक्ष लंबित है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने मामले को 14 मार्च को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जवाबी हलफनामा दायर नहीं किया जाता है तो जमानत आवेदन पर सुनवाई की जाएगी और अंतिम रूप से निपटारा किया जाएगा।कोर्ट ने...

5 दिनों की अनधिकृत अनुपस्थिति के लिए सेवा से हटाने की सजा बहुत कठोर: तेलंगाना हाईकोर्ट
5 दिनों की अनधिकृत अनुपस्थिति के लिए सेवा से हटाने की सजा बहुत कठोर: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट (Telangana High Court) ने हाल ही में कहा कि अनधिकृत अनुपस्थिति (इस मामले में केवल 5 दिन) के आरोपों के लिए सेवा से हटाने की सजा बहुत कठोर है।सेवा से हटाने के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए रिट याचिका दायर की गई थी। इसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता को सेवा की निरंतरता, परिचर लाभ और न्याय और निष्पक्षता के हित में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का निर्देश दिया गया।याचिकाकर्ता वर्ष 1990 में एक चालक के रूप में प्रतिवादी निगम में शामिल हुआ। याचिकाकर्ता को विभागीय अधिकारियों से बिना...

पति या पत्नी द्वारा एक-दूसरे के साथ शारीरिक संबंध से इनकार करना क्रूरता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक को मंजूरी दी
पति या पत्नी द्वारा एक-दूसरे के साथ शारीरिक संबंध से इनकार करना क्रूरता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक को मंजूरी दी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने कहा कि वैवाहिक संबंधों में पति या पत्नी द्वारा एक-दूसरे के साथ शारीरिक संबंध से इनकार करना क्रूरता है।कोर्ट ने मामले में पति की तलाक की याचिका को स्वीकार कर लिया। न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी और पार्थ प्रतिम साहू की खंडपीठ ने कहा,"यह स्पष्ट है कि अगस्त, 2010 से पति-पत्नी के रूप में दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है, जो यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त है कि उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं है। पति और पत्नी के बीच शारीरिक संबंध विवाहित जीवन के स्वस्थ...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
किशोर की पहचान का खुलासा ना किया जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को याद दिलाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया है कि ऐसे किशोर/बच्चों, जिन्होंने कानून का उल्लंघन किया है, उनकी पहचान का खुलासा नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को मौजूदा मामले में किशोर आरोपी की पहचान को सभी रिकॉर्डों से हटाने का निर्देश दिया।जस्टिस संजय कुमार पचौरी ने कहा,"मौजूदा मामले में आक्षेपित फैसले और आदेश में किशोर की पहचान का खुलासा किया गया है। यह किशोर की निजता और गोपनीयता का उल्लंघन है। साथ ही शिल्पा मित्तल बनाम एनसीटी दिल्ली, (2020) 2 एससीसी 787 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय कानून के खिलाफ है,...

दिल्ली की जिला अदालतों को वर्चुअल हियरिंग लिंक को सिटिंग आवर्स के दौरान खुला रखने का निर्देश
दिल्ली की जिला अदालतों को वर्चुअल हियरिंग लिंक को सिटिंग आवर्स के दौरान खुला रखने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सभी शहर जिला न्यायालयों को निर्देश दिया गया कि वे अदालत के कामकाजी घंटों (सिटिंग आवर्स) के दौरान अपने वीडियोकांफ्रेंसिंग लिंक को खुला रखें।वर्चुअल मोड के माध्यम से अदालतों के सुचारू और परेशानी मुक्त कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) गिरीश कठपालिया द्वारा 28 फरवरी, 2022 को जारी एक सर्कुलर में निर्देश जारी किए गए।यह घटनाक्रम दिल्ली हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने 20 जनवरी, 2022 के आदेश के बाद कहा कि यह उम्मीद करता है कि जिला और...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
जेल में कैदी ने की आत्महत्या, जेल अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट निखिल नैयर को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने पिछले साल जेल में कैदी द्वारा की गई आत्महत्या की घटना पर सोमवार को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया, जिसने जेल की कोठरी में लगभग 19 मिनट तक संघर्ष किया, लेकिन जेल अधिकारियों द्वारा समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद एक याचिका पर विचार कर रहे थे, जो मृतक कैदी के पिता लाभ सिंह द्वारा दिए गए बयान पर आधारित है। उन्होंने एक पत्र लिख कर आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे सोहन सिंह को जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है। दुर्भाग्य से सोहन सिंह ने 11...

घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पत्नी को दिए गए भरण-पोषण में सीआरपीसी की धारा 127 के तहत वृद्धि नहीं की जा सकतीः कर्नाटक हाईकोर्ट
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पत्नी को दिए गए भरण-पोषण में सीआरपीसी की धारा 127 के तहत वृद्धि नहीं की जा सकतीः कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत अलग हो चुकी पत्नी को देय भरण-पोषण को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 127 के तहत दायर आवेदन पर बढ़ाया नहीं जा सकता।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा,"सीआरपीसी की धारा 125 के तहत दिया जाने वाले भरण-पोषण, सीआरपीसी की धारा 127 के तहत दायर आवेदन में भ‌िन्न-‌भिन्न हो सकता है। अनिवार्य यह है कि भरण-पोषण का आदेश सीआरपीसी की धारा 127 के तहत दायर याचिका से पहले होना चाहिए, जिसमें विफल होने पर,...

सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज गवाह का बयान केवल क्रॉस एक्ज़ामिनेशन के लिए है, साक्ष्य के दायरे में नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज गवाह का बयान केवल क्रॉस एक्ज़ामिनेशन के लिए है, साक्ष्य के दायरे में नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा, "यह निर्णय की श्रेणी में स्पष्ट है कि सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज गवाह का बयान साक्ष्य के दायरे में नहीं आता। इस तरह के सबूत केवल आमने सामने क्रॉस एक्ज़ामिनेशन के लिए हैं। सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज गवाह का बयान सबूत में पूरी तरह से अस्वीकार्य होने के कारण इस पर विचार नहीं किया जा सकता है।"जस्टिस ओम प्रकाश त्रिपाठी और जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता ने यह टिप्पणी विशेष न्यायाधीश, बुलंदशहर द्वारा पारित दोषसिद्धि के आदेश और अपीलकर्ताओं को भारतीय दंड...

सहायक सामग्री के बिना चार्जशीट में सुधार सीआरपीसी की धारा 482 के तहत कार्यवाही रद्द करने का आधार है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
सहायक सामग्री के बिना चार्जशीट में सुधार सीआरपीसी की धारा 482 के तहत कार्यवाही रद्द करने का आधार है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने हाल ही में फैसला सुनाया कि प्राथमिकी (FIR) या सीआरपीसी की धारा 161के तहत बयान में किसी भी सहायक सामग्री के बिना चार्जशीट में जोड़ा गया बयान अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और कार्यवाही को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत रद्द किया जा सकता है।क्या है पूरा मामला?शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर, आईपीसी की धारा 506 (आपराधिक धमकी), 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत घोषित आदेश की अवज्ञा), 149 (गैरकानूनी सभा), 341 (गलत संयम) के विभिन्न अपराधों के तहत...

न तो वकील और न ही जज तकनीकी परिवर्तनों को नहीं जानने का जोखिम उठा सकते हैं: उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मुरलीधर ने हर स्तर पर पेपरलेस कोर्ट की कल्पना पेश की
"न तो वकील और न ही जज तकनीकी परिवर्तनों को नहीं जानने का जोखिम उठा सकते हैं": उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मुरलीधर ने हर स्तर पर पेपरलेस कोर्ट की कल्पना पेश की

उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस एस मुरलीधर ने ओडिशा में हर स्तर पर पेपरलेस कोर्ट पर अपना विचार व्यक्त किया है। उन्होंने इस तथ्य पर भी संतोष व्यक्त किया है कि उनकी पहल के बाद हाईकोर्ट में पहले से ही तीन जजों की अदालतें पूरी तरह से पेपरलेस हो चुकी हैं, और दो और जजों की अदालतें जल्द ही पेपरलेस हो सकती हैं।जस्टिस मुरलीधर उड़ीसा हाईकोर्ट, 2021 की वार्षिक रिपोर्ट जारी करने और जिला जज सम्मेलन का उद्घाटन करने के लिए शुक्रवार को ओडिशा न्यायिक अकादमी में आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे ।उन्होंने...

दिल्ली दंगा: कथित हेट स्पीच के लिए राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले आवेदनों पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
दिल्ली दंगा: कथित 'हेट स्पीच' के लिए राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले आवेदनों पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को विभिन्न राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ मामले दायर करने की मांग करने वाले आवेदनों पर नोटिस जारी किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 2020 के दौरान कथित 'हेट स्पीच' के लिए राजनेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली याचिकाओं में उन्हें पक्षकार प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाना चाहिए या नहीं।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता शेख मुजतबा और वकीलों की आवाज द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।शेख मुजतबा द्वारा...

केरल हाईकोर्ट
[SC/ST Act] पीड़ित के मुकदमे की कार्यवाही रिकॉर्ड करने के अनुरोध को खारिज नहीं किया जा सकता, भले ही यौन अपराध शामिल हो: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने हाल ही में फैसला सुनाया कि जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराधों की शिकार मुकदमे की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्ड करने का अनुरोध करती है, तो अदालत इसे ठुकरा नहीं सकती, भले ही यौन अपराध शामिल हो।न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने उल्लेख किया कि अधिनियम की धारा 15 ए (10) जो सभी कार्यवाही की वीडियो-रिकॉर्डिंग की अनुमति देती है, सीआरपीसी की धारा 327 (2) जो यौन अपराधों से जुड़े मामलों के अनुरूप है जो इन-कैमरा ट्रायल का प्रावधान करती...

मुद्दा संवैधानिक न्यायालय के समक्ष लंबित है, इसलिए विरोध का अधिकार खत्म नहीं जाताः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
मुद्दा संवैधानिक न्यायालय के समक्ष लंबित है, इसलिए विरोध का अधिकार खत्म नहीं जाताः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले में कहा कि एक याचिकाकर्ता को किसी मुद्दे पर विरोध करने के अधिकार से केवल इसलिए वंचित नहीं किया जाएगा क्योंकि उसने उसी विषय पर एक संवैधानिक अदालत का दरवाजा खटखटाया है।आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष हाल ही में एक रिट याचिका में, ज‌स्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस बीएस भानुमति ने कहा,"शिकायतों के निवारण के लिए एक संवैधानिक अदालत का दरवाजा खटखटाना वास्तव में एक नागरिक को उसी विषय-वस्तु के संबंध में विरोध करने से वंचित नहीं करेगा। हम ऐसा इसलिए कहते...

दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्षय कुमार अभिनीत पृथ्वीराज फिल्म के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्षय कुमार अभिनीत 'पृथ्वीराज' फिल्म के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने यशराज फिल्म्स द्वारा निर्मित फिल्म 'पृथ्वीराज' का टाइटल बदलने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया। मुख्य भूमिकाओं में अभिनेता अक्षय कुमार और मानुषी छिल्लर अभिनीत फिल्म 10 जून, 2022 को रिलीज़ होने वाली है।याचिकाकर्ता, राष्ट्रीय प्रवासी परिषद ने प्रस्तुत किया कि यह फिल्म भारतीय सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन पर आधारित है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता संजीव बेनीवाल ने दलील दी कि फिल्म एक 'महान योद्धा' पर आधारित है। हालांकि, इसका नाम उसी का...

पटना हाईकोर्ट ने बिहार माइनिंग कॉर्पोरेशन द्वारा केवल सीएनएलयू स्नातकों को लॉ ऑफिसर के रूप में भर्ती करने पर रोक लगाई
पटना हाईकोर्ट ने बिहार माइनिंग कॉर्पोरेशन द्वारा केवल सीएनएलयू स्नातकों को लॉ ऑफिसर के रूप में भर्ती करने पर रोक लगाई

पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड में विधि अधिकारी के पद पर चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।यह आदेश निगम की भर्ती अधिसूचना को इस आधार पर चुनौती देने वाली याचिका पर आया है कि उसने केवल चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना (सीएनएलयू) से कानून स्नातकों को ही उक्त पद के लिए आवेदन करने की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति पी बी बजंथरी की खंडपीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 8 मार्च की तारीख तय की है और याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई की तारीख से पहले विधि अधिकारी या...

रूढ़िवादी समाज के सिद्धांतों के दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा प्रदान की
'रूढ़िवादी समाज के सिद्धांतों के दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा प्रदान की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने लिव-इन रिलेशनशिप कपल को पुलिस सुरक्षा प्रदान करते हुए कहा कि रूढ़िवादी समाज के सिद्धांतों के दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है, जो धर्मों द्वारा समर्थित नैतिकता के मजबूत तारों से बंधे हैं जो कि मूल्यों को व्यक्ति के जीवन से ऊपर मानते हैं।न्यायमूर्ति अनूप चितकारा की खंडपीठ ने जय नरेन और उसके लिव-इन पार्टनर, एक विवाहित महिला द्वारा दायर एक सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।याचिकाकर्ता ने निजी प्रतिवादियों के...