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क्या स्कूल फीस के भुगतान के लिए रिमाइंडर भेजना किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत 'बच्चों के प्रति क्रूरता' है? गुजरात हाईकोर्ट जांच करेगा
गुजरात हाईकोर्ट यह जांचने के लिए तैयार है कि क्या फीस का भुगतान न करने पर अभिभावकों को रिमाइंडर भेजने वाले स्कूलों की कार्रवाई किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत अपराध है।अधिनियम की धारा 75 में बच्चे के प्रति क्रूरता के लिए सजा का प्रावधान किया गया है, जिससे बच्चों को शारीरिक या "मानसिक पीड़ा" पहुंचाना कारण हो सकता है।जस्टिस भार्गव करिया ने सूरत के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक आदेश के खिलाफ सेल्फ फाइनेंस स्कूलों के फेडरेशन द्वारा दायर एक स्पेशल...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बम विस्फोटों की एनआईए जांच की मांग वाली जनहित याचिका में राज्य सरकार से जवाब मांगा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में पिछले महीने क्रूड बम विस्फोट की घटना की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच करवाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा।पिछले महीने भारत-बांग्लादेश सीमा के पास कालियाचक के गोपालनगर गांव में बम विस्फोट होने से पांच स्कूली बच्चे कथित तौर पर घायल हो गए थे।मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की पीठ को याचिकाकर्ता के वकील ने अवगत कराया कि घटना में पांच स्कूली बच्चे गंभीर...
पारिवारिक व्यवस्था का पंजीकरण केवल तभी आवश्यक है, जब शर्तों को लिखित रूप में कर दिया जाए, न कि जहां व्यवस्था मौखिक है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि जहां पारिवारिक व्यवस्था मौखिक हो, वहां पंजीकरण आवश्यक नहीं है और यह तभी आवश्यक है जब व्यवस्था की शर्तों को लिखित कर दिया जाए।जस्टिस नजमी वजीरी ने दोहराया,"यह बखूबी तय है कि पंजीकरण केवल तभी आवश्यक होगा जब परिवार व्यवस्था की शर्तों को लिखित रूप में दर्ज कर दिया जाए। यहां भी दस्तावेज के तहत किए गए पारिवारिक व्यवस्था की शर्तों और विवरणों वाले दस्तावेज के बीच एक अंतर किया जाना चाहिए और परिवार की व्यवस्था के बाद तैयार किया गया ज्ञापन या तो रिकॉर्ड के उद्देश्य से या अदालत...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपी-व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh high Court) के चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस गौतम चौड़िया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कथित रूप से धोखाधड़ी वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाने में शामिल एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है।अपीलकर्ताओं ने छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में कई फर्जी और भौतिक रूप से गैर-मौजूद ट्रेडिंग कंपनी फर्म बनाई, जाली पैन का उपयोग करने वाले कई व्यक्तियों की पहचान प्रमाण पत्र का उपयोग करके उन्हें जीएसटीएन पोर्टल में...
अगर पति अपनी वैवाहिक स्थिति पर विवाद करता है तो मजिस्ट्रेट घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पत्नी की याचिका में तलाक की वैधता तय कर सकते हैं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने फैसला सुनाया कि अगर पति अपनी वैवाहिक स्थिति पर विवाद करता है तो मजिस्ट्रेट घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पत्नी की याचिका में तलाक की वैधता तय कर सकते हैं।न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने इस तरह एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की अनुमति देते हुए कहा कि अपीलीय अदालत का यह निष्कर्ष कि मजिस्ट्रेट के पास तलाक की वैधता का फैसला करने की कोई शक्ति नहीं है, गलत है और अपीलीय अदालत के फैसले को पलटा जाता है।बेंच ने कहा, "डीवी अधिनियम के तहत पत्नी द्वारा दायर एक याचिका में, यदि पति...
COVID-19: हाईकोर्ट ने अस्पतालों / नर्सिंग होम में ड्यूटी पर होने वाली मौत के लिए मुआवजे की नीति पर दिल्ली सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में निजी या सरकारी अस्पताल, नर्सिंग होम में काम कर रहे डॉक्टरों, नर्सों, सुरक्षा कर्मचारियों, सफाई कर्मचारियों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी, जिनकी COVID 19 लहर के दौरान मृत्यु हो गई थी, उन्हें देय मुआवजे के संबंध में दिल्ली सरकार द्वारा बनाई गई पॉलिसी के बारे में उसका स्टैंड मांगा है।जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस पूनम ए. बंबा की खंडपीठ जून 2020 में कोविड -19 महामारी की पहली लहर के दौरान मरने वाले स्वर्गीय डॉ हरीश कुमार की विधवा द्वारा दायर एक याचिका पर विचार कर...
दिल्ली हाईकोर्ट ने निजामुद्दीन मरकज में मस्जिद को फिर से खोलने की इजाजत देने वाला अंतरिम आदेश 14 अक्टूबर तक बढ़ाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को निजामुद्दीन मरकज में मस्जिद परिसर के भूतल के साथ-साथ चार मंजिलों सहित पांच मंजिलों को 14 अक्टूबर तक खोलने की अनुमति दी।जस्टिस जसमीत सिंह ने एक अप्रैल, 2022 के अंतरिम आदेश के संचालन को बढ़ा दिया। इसमें रमजान महीने के दौरान नमाज अदा करने के लिए मस्जिद को फिर से खोलने की अनुमति दी गई थी।उक्त अंतरिम आदेश सुनवाई की अगली तिथि 14 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा।2020 में तब्लीगी जमात के सदस्यों के COVID-19 पॉजीटिव पाए जाने के बाद निजामुद्दीन मरकज में सार्वजनिक प्रवेश पर प्रतिबंध...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 में सीएम योगी आदित्यनाथ को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देने वाले पीस पार्टी अध्यक्ष को अग्रिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने पिछले हफ्ते पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) खिलाफ एक सार्वजनिक रैली में कथित बयान देने के लिए 2016 में दर्ज एक मामले में अग्रिम जमानत दी।डॉ.अयूब ने कथित तौर पर साल 2016 में गोरखपुर के तत्कालीन सांसद और वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी दी गई थी।डॉ. अयूब के खिलाफ हिंदू युवा वाहिनी संगठन के अध्यक्ष के कहने पर मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक...
मद्रास हाईकोर्ट ने 'प्रकृति मां' को एक जीवित प्राणी के रूप में घोषित किया, जिसके पास एक जीवित व्यक्ति के सभी अधिकार कर्तव्य और दायित्व हैं
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में "माता-पिता के अधिकार क्षेत्र" को लागू किया और "मातृ प्रकृति" को एक कानूनी इकाई / कानूनी व्यक्ति / न्यायिक व्यक्ति/ नैतिक व्यक्ति / कृत्रिम व्यक्ति के रूप में "जीवित प्राणी" के रूप में घोषित किया, जिसे सभी संबंधित अधिकारों, कर्तव्यों और देनदारियों के साथ कानूनी व्यक्ति का दर्जा प्राप्त हो, ताकि उसे संरक्षित किया जा सके।मदुरै पीठ की न्यायमूर्ति एस. श्रीमती ने यह भी कहा कि प्रकृति के पास अपनी स्थिति बनाए रखने और अपने स्वास्थ्य और भलाई को बढ़ावा देने के लिए अपने...
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 11 | कोर्ट को मध्यस्थ की नियुक्ति के दावे/प्रति-दावे के गुण-दोष में जाने की आवश्यकता नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट को मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 के तहत दायर एक याचिका में पक्षों के दावे या प्रति-दावे, यदि कोई हो, के गुण-दोषों का विश्लेषण नहीं करना है।जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि जब तक कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट न हो कि विवाद की कोई उपयोगिता नहीं है, हाईकोर्ट को इस बात की जांच करनी है कि क्या पक्षों के बीच कोई मध्यस्थता समझौता है और कोई विवाद है।मौजूदा मामले में कोर्ट ओयो होटल्स एंड होम्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर विचार कर...
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर टिप्पणी करने के मामले में डॉ कुमार विश्वास की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर उनके द्वारा दिए गए बयानों के संबंध में पंजाब पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।जस्टिस अनूप चितकारा की खंडपीठ ने कुमार विश्वास की उस याचिका पर आदेश जारी किया जिसमें एफआईआर को चुनौती दी गई थी। अपनी इस याचिका में कुमार विश्वास ने खुद के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने, जांच पर रोक लगाने और गिरफ्तारी/परिणामी कार्यवाही पर रोक लगाने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई, आईसीएसई और सभी राज्य बोर्ड स्कूलों में "समान पाठ्यक्रम" की मांग वाली याचिका में केंद्र सरकार से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने भाजपा नेता और एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय (Advocate Ashwini Kumar Upadhyay) द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्डों सहित सभी बोर्डों में 'समान पाठ्यक्रम' की मांग की गई है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को इस मामले में 6 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।दलील इस बात पर प्रकाश डालती है कि सभी प्रवेश परीक्षाएं जैसे JEE, BITSAT, NEET,...
घटना के साथ ही या उसके तुरंत बाद दिए गए ऐसे बयान, जो इधर-उधर से सुने गए थे, साक्ष्य अधिनियम की धारा 6 के तहत साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में कहा कि घटना के साथ ही या उसके तुरंत बाद मृतक की ओर से दिया गया बयान भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 32 के तहत मृत्युकालीन घोषणा (dying declaration) के रूप में स्वीकार्य होगा।इसके अलावा, मृतक द्वारा कहे गई बातों के संबंध में शिकायतकर्ताओं द्वारा दिए गए बयान, हालांकि इधर-उधर से सुने हुए, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 6 के तहत स्वीकार्य हैं। (रेस जेस्टे res gestae का नियम)मौजूदा मामले में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस एसके सिंह निचली अदालत द्वारा...
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद हस्तक्षेप करने के लिए रिट क्षेत्राधिकार का प्रयोग नहीं किया जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में आंध्र प्रदेश पारस्परिक रूप से सहायता प्राप्त सहकारी समिति अधिनियम, 1995 के तहत रजिस्टर्ड बैंक की चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। याचिका में चुनाव को अनियमित और कानून के विपरीत बताया गया था, लेकिन अदालत ने माना कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे रोक नहीं सकता।मामले के संक्षिप्त तथ्ययह याचिकाकर्ता का मामला है कि वह प्रतिवादी बैंक का सदस्य है, जो आंध्र प्रदेश पारस्परिक सहायता प्राप्त सहकारी समिति अधिनियम, 1995 के प्रावधानों के तहत...
अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवोकेट को समन जारी करना एडवोकेट के कद को प्रभावित करता है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) के न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने सीआरपीसी की धारा 91 और 160 के तहत एक पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील को समन भेजने वाले पुलिस अधिकारियों के रवैये और लापरवाही को गंभीरता से लिया है।अदालत ने कहा कि यह आदेश बिना सोचे-समझे दिया गया और इस तरह का समन जारी करना एक वकील के कद को प्रभावित करता है।अदालत ने इस तरह के रवैये और लापरवाही को गंभीरता से लिया जिस तरह से पुलिस ने याचिकाकर्ता के वकील को समन भेजा था।ए शंकर द्वारा इस आधार पर अवमानना याचिका दायर की गई थी कि...
हाईकोर्ट के रिट क्षेत्राधिकार के तहत पुलिस द्वारा अनुचित जांच के मुद्दे का निर्णय नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि रिट याचिका में पुलिस द्वारा दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में निष्क्रियता का फैसला नहीं किया जा सकता। बस, निजी शिकायत दर्ज करनी होगी।जस्टिस ललिता कन्नेगंती ने कहा:"दिन-प्रतिदिन कई रिट याचिकाएं दायर की जा रही हैं, जिसमें कहा गया है कि पुलिस उचित जांच नहीं कर रही है, आरोप पत्र दाखिल नहीं कर रही है और न ही वे आरोपियों को गिरफ्तार कर रहे हैं। इन मुद्दों पर इस न्यायालय द्वारा निर्णय नहीं किया जा सकता है, जबकि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अधिकारिता का...
"रक्षक कहे जाने वाले पुलिस कर्मी हमलावर हो गए": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतर जातीय विवाह करने वाली लड़की पर कथित रूप से हमला करने वाले पुलिस के खिलाफ जांच के आदेश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एस.एस.पी., वाराणसी को एक लड़की द्वारा लगाए गए आरोप की जांच करने का निर्देश दिया। आरोप है कि उसके साथ यूपी पुलिस कर्मियों द्वारा हमला किया गया है, जिसने अंतर्जातीय विवाह किया है।कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि आरोप सही पाए जाने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।अहम बात यह है कि अपनी नाराजगी जताते हुए जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की बेंच ने इसे अस्वीकार्य स्थिति बताया और टिप्पणी की कि रक्षक कहे जाने वाले पुलिस कर्मी इस मामले में...
वैश्यावृत्ति का सिर्फ ग्राहक होने से कोई व्यक्ति अभियोजन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिकाकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एक आपराधिक याचिका दायर करते हुए अपने खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की। याचिकर्ता ने प्रस्तुत किया कि प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध दर्ज किया और जांच करने के बाद आरोप पत्र दायर किया।याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप यह है कि जिस समय पुलिस ने वेश्यालय (brothel house) पर छापा मारा, उन्होंने वहां याचिकाकर्ता को ग्राहक के रूप में पाया।याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि वेश्यावृत्ति का ग्राहक किसी...
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर ने 2 वकीलों की सदस्यता रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर ने एडवोकेट गोवर्धन सिंह और एडवोकेट परमेश्वर लाल पिलानिया की सदस्यता रद्द कर दी है।बार एसोसिएशन ने राजस्थान बार काउंसिल से दो माह के भीतर उक्त दो अधिवक्ताओं के विरुद्ध जांच कराकर दोनों अधिवक्ताओं का पंजीयन निरस्त करने का अनुरोध किया है।गौरतलब है कि एडवोकेट गोवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें जस्टिस नरेंद्र सिंह धड्डा के अशर पर एक वकील से रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था।उक्त निर्णय न्यायालय की छवि को धूमिल करने, न्यायालय की अवमानना,...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (25 अप्रैल, 2022 से 29 अप्रैल, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।सीआरपीसी की धारा 102 के तहत आरोपी के किसी भी रिश्तेदार का बैंक खाता जब्त किया जा सकता है: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्टजम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी आरोपी (जिसके अपराध की जांच की जा रही) के किसी भी रिश्तेदार का बैंक अकाउंट सीआरपीसी की धारा 102 के तहत संपत्ति की...


















