मुख्य सुर्खियां

केरल हाईकोर्ट
एक छोटे से भूखंड पर आवासीय भवन बनाने के लिए विकास परमिट की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह एक बड़े भूखंड से उप-विभाजित है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि एक पंचायत भूमि के एक छोटे से हिस्से, जो कि एक बड़े भूखंड से उप-विभाजित है, के मालिक से विकास परमिट पेश करने जोर नहीं दे सकती है, ताकि उसकी संपत्ति पर केरल पंचायत भवन नियम, 2019 के अनुसार, आवासीय भवन के निर्माण की अनुमति मिल सके।चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली की एक खंडपीठ ने कहा कि नियम एक व्यक्ति द्वारा एक बड़े क्षेत्र जमीन के एक छोटे से भूखंड की खरीद के संबंध में पूरी तरह से अलग स्थिति पर विचार करते हैं, चाहे संपत्ति के मालिक ने इसे विभिन्न...

एनसीबी ने आर्यन खान मामले में चार्जशीट दाखिल करने के लिए तीन महीने की मोहलत मांगी
एनसीबी ने आर्यन खान मामले में चार्जशीट दाखिल करने के लिए तीन महीने की मोहलत मांगी

कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में चार्जशीट दाखिल करने के लिए विशेष अदालत से 90 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा है। इस मामले में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान भी आरोपी हैं।नारकोटिक ड्रग एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की एसआईटी के पास आरोपी के हिरासत में होने पर अपनी जांच पूरी करने के लिए 180 दिन का समय है।हालांकि, अधिनियम की धारा 36 ए (4) के तहत विशेष अदालत विशेष लोक अभियोजक की रिपोर्ट पर...

पहली बार अपराध किया है, लंबे समय तक जेल में रहना उसके समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक: दिल्ली कोर्ट ने सुली डील्स ऐप मामले में आरोपी ओंकारेश्वर ठाकुर को जमानत दी
"पहली बार अपराध किया है, लंबे समय तक जेल में रहना उसके समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक": दिल्ली कोर्ट ने 'सुली डील्स' ऐप मामले में आरोपी ओंकारेश्वर ठाकुर को जमानत दी

दिल्ली कोर्ट (Delhi Court) ने सोमवार को गिटहब (GitHub) पर 'सुली डील्स (Sulli Deals)' ऐप बनाने के आरोपी ओंकारेश्वर ठाकुर को यह कहते हुए जमानत दी कि उसने पहली बार अपराध किया है और लंबे समय तक जेल में रहना उसके समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा।पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने ठाकुर को यह देखते हुए जमानत दी कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। इस महीने की शुरुआत में आरोप पत्र दायर किया गया था।अदालत ने कहा,"सिर्फ इसलिए कि विभिन्न बिचौलियों और एफएसएल से जवाब का इंतजार...

किशोर न्याय अधिनियम | धारा 12 के तहत जमानत देने के लिए धारा 15 के तहत प्रारंभिक मूल्यांकन आवश्यक नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
किशोर न्याय अधिनियम | धारा 12 के तहत जमानत देने के लिए धारा 15 के तहत प्रारंभिक मूल्यांकन आवश्यक नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में कहा कि किशोर न्याय बोर्ड की किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 12 के तहत जमानत देने की शक्ति की जेजे एक्ट की धारा 15 के तहत प्रारंभिक मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस जीएस अहलूवालिया अधिनियम की धारा 102 के तहत एक आपराधिक संशोधन का निस्तारण कर रहे थे, जिसमें आवेदक ने जेजेबी द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसने कानून के उल्लंघन के आरोप में एक बच्चे को अधिनियम की धारा 12 के तहत जमानत दी थी।आवेदक ने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
अदालतें मकान-मालिकों से यह नहीं कह सकतीं कि उन्हें किस तरह से रहना चाहिए या उनके लिए आवासीय मानक निर्धारित नहीं कर सकतीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किराए के विवादों में अदालतों का यह सरोकार नहीं है कि वह मकान मालिक को यह निर्देश दे कि उसे कैसे और किस तरीके से रहना चाहिए या उसके लिए अपना खुद का आवासीय मानक निर्धारित करना चाहिए।प्रतिभा देवी (श्रीमती) बनाम टीवी कृष्णन 1996 (5) एससीसी 353 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने भी जोर देकर कहा कि मकान मालिक अपनी आवासीय जरूरतों का सबसे अच्छा जज है और ऐसा कोई कानून नहीं है, जो मकान मालिक को उसकी संपत्ति के लाभकारी...

यह एक विरासत है, इसे संरक्षित किया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट ने कनॉट प्लेस में रीगल बिल्डिंग की मरम्मत और संरचनात्मक परिवर्धन का निर्देश दिया
"यह एक विरासत है, इसे संरक्षित किया जाना चाहिए": दिल्ली हाईकोर्ट ने कनॉट प्लेस में रीगल बिल्डिंग की मरम्मत और संरचनात्मक परिवर्धन का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के कनॉट प्लेस इलाके में रीगल बिल्डिंग की सुरक्षित करने के लिए मरम्मत और संरचनात्मक परिवर्धन का निर्देश दिया। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि वह एक ऐतिहासिक इमारत है और उसकी संरचना को संरक्षित किया जाना चाहिए।जस्टिस संजीव सचेवा ने सिविल इंजीनियर विभाग, भारतीय संस्थान प्रौद्योगिकी दिल्ली (आईआईटी, दिल्ली) द्वारा दायर की गई स्थिति रिपोर्ट का अवलोकन किया। इसमें सिफारिश की गई कि भवन संरचना का एक सर्वेक्षण किया जाना चाहिए और बिना किसी तदर्थ संशोधन या मरम्मत को अंजाम दिया जाना चाहिए।...

हाईकोर्ट के पास न‌िजी प्रकृति के विवादों के नॉन-कंपाउंडेबल अपराधों के लिए समझौता करने की अनुमति देने की अंतर्निहित शक्ति: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
हाईकोर्ट के पास न‌िजी प्रकृति के विवादों के नॉन-कंपाउंडेबल अपराधों के लिए समझौता करने की अनुमति देने की 'अंतर्निहित शक्ति': आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल के एक मामले में पार्टियों द्वारा किए गए समझौते की अनुमति दी और अपराधी के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी, हालांकि अपराध आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 320 के तहत नॉन-कंपाउंडेबल था।कथित अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी के तहत था, जो दहेज हत्या से संबंधित है। अदालत से अनुरोध करते हुए आवेदन दायर किए गए थे कि वास्तविक शिकायतकर्ता को अपराधों को कम करने और समझौता दर्ज करने की अनुमति दी जाए।संयुक्त ज्ञापन में दर्ज समझौते की शर्तों से यह कहा गया था कि...

मुवक्किल के लिए जूनियर एडवोकेट के साथ सीनियर एडवोकेट द्वारा संयुक्त वकालत दाखिल करने में कोई अवैधता नहीं: केरल हाईकोर्ट
मुवक्किल के लिए जूनियर एडवोकेट के साथ सीनियर एडवोकेट द्वारा संयुक्त वकालत दाखिल करने में कोई अवैधता नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने सोमवार को फैसला सुनाया कि एक बार जब कोई मुवक्किल किसी वकील को मामले का संचालन करने के लिए अधिकृत करता है, तो वकील को उनकी ओर से एक संयुक्त वकालत दायर करने का अधिकार होता है।न्यायमूर्ति एन. नागरेश ने कहा कि संयुक्त वकालत दायर करना किसी भी वकील को उसकी पेशेवर फीस से इनकार करने का आधार नहीं है।आगे कहा,"उक्त प्राधिकरण में वरिष्ठ वकील के कार्यालय में कनिष्ठ वकील के साथ संयुक्त वकालत दायर करने सहित मामले के संचालन और मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक सभी करने के लिए...

केरल हाईकोर्ट
सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय हड़ताल में शामिल नहीं हो सकते : केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ चल रही दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल में भाग लेने से रोक दिया। साथ ही राज्य सरकार को विरोध को कानूनी प्रक्रिया के रूप में न मानने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी शैली की एक खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों की चल रही हड़ताल अवैध है और राज्य को निर्देश दिया कि वह इसे प्रतिबंधित करने के निर्देश जारी करे। कोई भी सरकारी कर्मचारी हड़ताल में भाग नहीं लेगा।यह घटनाक्रम...

एसोसिएशन की ओर से दायर रिट याचिका तभी सुनवाई योग्य, जब कोर्ट संतुष्ट हो कि सभी सदस्य मुकदमे से बंधे हुए: एमपी हाईकोर्ट
एसोसिएशन की ओर से दायर रिट याचिका तभी सुनवाई योग्य, जब कोर्ट संतुष्ट हो कि सभी सदस्य मुकदमे से बंधे हुए: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक एसोसिएशन की रिट याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उसके सदस्यों द्वारा पारित प्रस्ताव में न तो यह निर्दिष्ट किया गया था कि एसोसिएशन को उनकी ओर से याचिका दायर करने के लिए अधिकृत किया जा रहा था और न ही स्पष्ट किया गया था कि क्या सदस्य याचिका में दिए गए निर्णय का पालन करेंगे। हाईकोर्ट ने उक्त निर्णय के साथ एकल न्यायाधीश के निर्णय की पुष्टि की।चीफ जस्टिस रवि मलीमठ और जस्टिस पीके कौरव अपीलकर्ता/एसोसिएशन द्वारा दायर एक रिट अपील से निपट रहे थे, जो न्यायालय की...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
'याचिकाकर्ता की उम्र सीमा तक पहुंच गई है': बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को प्रतिवादी के स्थानांतरण याचिका के बावजूद बुजूर्ग की जिरह को पूरा करने का निर्देश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक वादी की परिपक्व उम्र को महत्व देते हुए स्मॉल कॉज़ कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह 92 वर्षीय व्यक्ति की जिरह पूरी करे, भले ही उस अदालत के प्रधान न्यायाधीश के समक्ष दूसरे पक्ष द्वारा दायर स्थानांतरण आवेदन लंबित हो।जस्टिस एएस गडकरी ने इस महीने की शुरुआत में याचिकाकर्ता त्रिलोक सिंह गांधी की उम्र को ध्यान में रखते हुए आदेश प्राप्त होने के दो महीने के भीतर जिरह पूरी करने का निर्देश दिया और प्रतिवादी को मुकदमे में सहयोग करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने आदेश में कहा, "यह स्पष्ट किया...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
अनुच्छेद 226 - हाईकोर्ट को रिट याचिका में उठाए गए आधारों/मुद्दों पर विचार करना होता है और तर्कयुक्त आदेश पारित करना होता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिट याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों/आधारों का ‌निस्तारण करना और उसके बाद एक तर्कपूर्ण आदेश पारित करना अदालत का कर्तव्य है।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की टीम ने कहा, "जब संविधान हाईकोर्ट को राहत देने की शक्ति प्रदान करता है तो उचित मामलों में ऐसी राहत देना कोर्ट का कर्तव्य बन जाता है और यदि पर्याप्त कारणों के बिना राहत से इनकार कर दिया जाता है तो अदालतें अपना कर्तव्य निभाने में विफल हो जाएंगी।"अदालत बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर विचार कर रही...

पत्नी द्वारा केवल आपराधिक मामला दर्ज करवाना और अलग घर की मांग क्रूरता नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट ने तलाक की डिक्री खारिज की
पत्नी द्वारा केवल आपराधिक मामला दर्ज करवाना और अलग घर की मांग 'क्रूरता' नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट ने तलाक की डिक्री खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इसलिए कि पत्नी एक अलग घर की मांग कर रही थी और उसे वैवाहिक घर छोड़कर अपनी बहन और माता-पिता के घर जाने की आदत थी, इसे पति द्वारा तलाक की डिक्री मांगने के उद्देश्य से 'क्रूरता' नहीं कहा जा सकता है। जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने यह भी कहा कि, ''विवाह की असाध्य विफलता के आधार पर तलाक का डिक्री केवल भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट न्यायालय द्वारा दी जा सकती है। ऐसी राहत अन्य...

स्पष्ट अवमानना: पटना हाईकोर्ट ने कानून विभाग के दो अधिकारियों को एक लोक अभियोजक की पुनर्नियुक्ति के लिए दिए आदेश की अवहेलना करने पर कड़ी फटकार लगाई
"स्पष्ट अवमानना": पटना हाईकोर्ट ने कानून विभाग के दो अधिकारियों को एक लोक अभियोजक की पुनर्नियुक्ति के लिए दिए आदेश की अवहेलना करने पर कड़ी फटकार लगाई

पटना हाईकोर्ट ने लोक अभियोजक की पुनर्नियुक्ति संबंधित मामले में बिहार लॉ सेक्रेटरी-इन-चार्ज ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और ज्वाइंट सेक्रेटरी उमेश कुमार शर्मा के खिलाफ आदेश की अवहेलना करने पर सोमवार को अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की।जस्टिस पीबी बजथरी की एकल पीठ ने सेक्रेटरी ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और ज्वाइंट सेक्रेटरी उमेश कुमार शर्मा, लॉ ‌डिपार्टमेंट, बिहार सरकार को अवमानना ​​कार्यवाही का सामना करने के लिए अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।यह मामला 12 दिसंबर, 2021 को पार‌ित कोर्ट के आदेश की...

Gujarat High Court
पत्नी के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का आरोप संदेहास्पद और इससे बच्चों को कोई नुकसान नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने पिता को बच्चों की कस्टडी देने से इनकार किया

"हाईकोर्ट अधीक्षण की अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए कानून या तथ्य की त्रुटियों को ठीक करने के लिए हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, केवल इसलिए कि ट्रिब्यूनल या उसके अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा लिया गया एक अलग दृष्टिकोण एक संभावित दृष्टिकोण है।"गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने यह टिप्पीण अनुच्छेद 226 और 227 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने बच्चों की अंतरिम कस्टडी सौंपने की प्रार्थना की, जिसे फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता ने मुख्य रूप से तर्क...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
विभाजन वाद दायर करने भर से, जबकि उसे डिफॉल्ट रूप से खारिज कर दिया गया था, अविभाजित हिंदू परिवार से नाबालिग का विच्छेद हो जाता है? बॉम्बे हाईकोर्ट विचार करेगा

बॉम्बे हाईकोर्ट कानून की एक जटिल स्थिति पर विचार करेगा कि क्या नाबलिग की ओर से विभाजन वाद दायर करना हिंदू अविभाजित परिवार से संबंध विच्छेद करना होगा, भले ही मुकदमा अंततः गैर-अभियोजन के कारण खारिज कर दिया गया हो, या उस नाबालिग को हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) का हिस्सा माना जाए।बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष यह सवाल एक ऐसे मामले में जहां नाबालिग ने मार्च 2020 में वयस्क होने के बाद अपने माता-पिता द्वारा एचयूएफ के एक हिस्से के रूप में निष्पादित गिफ्ट डीड को चुनौती दी। यह गिफ्ट डीड तब निष्पादित की गई थी,...

दिल्ली हाईकोर्ट ने एससी कॉलेजियम की दिसंबर, 2018 की बैठक के विवरण से इनकार करते हुए सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने एससी कॉलेजियम की दिसंबर, 2018 की बैठक के विवरण से इनकार करते हुए सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को 12 दिसंबर, 2018 को हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा लिए गए निर्णयों के संबंध में मांगी गई जानकारी से इनकार करने वाले केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया।याचिकाकर्ता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण की सुनवाई के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा ने आदेश सुरक्षित रख लिया।भारद्वाज ने 12 दिसंबर, 2018 को एससी की कॉलेजियम बैठक के बारे में जानकारी मांगने के लिए एक आरटीआई आवेदन दायर किया। इसमें...

सीजेआई यूयू ललित
मुफ्त कानूनी सहायता का मतलब खराब कानूनी सहायता नहीं है, इसका मतलब गुणवत्तापूर्ण सेवा होना चाहिएः जस्टिस यूयू ललित

सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस उदय उमेश ललित ने मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करते हुए गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया है।जस्टिस ललित ने कानूनी सेवा प्राधिकरण के पास आने वाले मामलों के बेहद कम प्रतिशत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "मुफ्त कानूनी सहायता का मतलब खराब कानूनी सहायता नहीं है, मुफ्त कानूनी सहायता का मतलब गुणवत्तापूर्ण सेवा होना चाहिए"।आंकड़ों का हवाला देते हुए जस्टिस ललित ने कहा कि कानूनी सेवा प्राधिकरण मुकदमेबाजी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में 6800 अतिरिक्त सहायक शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाने के कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (डिवीजन बेंच) ने हाल ही में 27 जनवरी, 2022 के एकल न्यायाधीश के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य में प्राथमिक सहायक शिक्षक के रूप में 6800 अतिरिक्त उम्मीदवारों को नियुक्त करने के निर्णय पर रोक लगा दी है।इसके साथ, न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव- I की पीठ ने 27 जनवरी, 2022 के एकल पीठ के आदेश का समर्थन किया, जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया था कि यूपी सरकार उसी के संबंध में विज्ञापन जारी किए बिना...