Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

वर्चुअल सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट 'वर्ल्ड लीडर', दो लाख से अधिक मामलो को ऑनलाइन सुनवाई की: कानून मंत्रालय

LiveLaw News Network
4 April 2022 8:22 AM GMT
वर्चुअल सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट वर्ल्ड लीडर, दो लाख से अधिक मामलो को ऑनलाइन सुनवाई की: कानून मंत्रालय
x

कानून एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law & Justice) ने लोकसभा (Lok Sabha) में बताया कि जब से COVID-19 लॉकडाउन शुरू हुआ है, तब से जिला न्यायालयों ने 1,23,19,917 मामलों की सुनवाई की और हाईकोर्ट्स ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करके 28.02.2022 तक 61,02,859 मामलों (कुल 1.84 करोड़) की सुनवाई की।

आगे कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 14.03.2022 तक 2,18,891 सुनवाई की। इसके साथ ही लॉकडाउन अवधि में हुई वर्चुअल सुनवाई ने सुप्रीम कोर्ट को 'वर्ल्ड लीडर' बना दिया।

यह भी बताया गया कि अदालती सुनवाई के वर्चुअल मोड का पालन करने का निर्णय एक ऐसा मामला है जो सख्ती से न्यायपालिका के दायरे में आता है और इस मामले में केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

इसके अलावा, कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा,

"24 उच्च न्यायालयों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों को लागू किया है। तालुका स्तर की अदालतों सहित सभी न्यायालय परिसरों में प्रत्येक को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस उपकरण प्रदान किया गया है और इसके अतिरिक्त 14,443 अदालत कक्षों के लिए अतिरिक्त वीसी उपकरण के लिए फंड स्वीकृत की गई है। 2506 वीसी केबिन स्थापित करने के लिए फंड दिया गया है। अतिरिक्त 1500 वीसी लाइसेंस प्राप्त किए गए हैं। 3240 अदालत परिसरों और संबंधित 1272 जेलों के बीच वीसी सुविधाएं पहले से ही सक्षम हैं। 1732 दस्तावेज़ विज़ुअलाइज़र की खरीद के लिए 7.60 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। कंप्यूटर, लैपटॉप तक पहुंच की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में वकीलों के बीच डिजिटल हार्डवेयर और परिणामी डिजिटल विभाजन एक वास्तविक समस्या है।"

उक्त जानकारी सांसद गणेश सिंह द्वारा उठाए गए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर में प्रदान की गई:

(क) क्या सरकार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मोड के माध्यम से वर्चुअल अदालतों की प्रैक्टिस जारी रखने के लिए कोई सुझाव प्राप्त हुआ है जो लॉकडाउन के समय के दौरान शुरू किया गया था?

(ख) यदि हां, तो क्या वर्चुअल मोड के माध्यम से न्यायालयों के कामकाज के लिए वर्तमान बुनियादी ढांचा पर्याप्त है, यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?

(ग) क्या लगभग 50 प्रतिशत वकीलों में विशेष रूप से जिला अदालतों में लैपटॉप और कंप्यूटर सुविधाओं की कमी है, यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?

कानून मंत्री द्वारा बताया गया कि डिजिटल डिवाइड की इस समस्या को दूर करने के लिए देश भर के उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में 493 ई-सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो वकीलों को ई-कोर्ट और इंटरनेट की सुविधा प्रदान करते हैं।

इसके अलावा, सांसद गणेश सिंह ने यह भी पूछा कि क्या सरकार ने सिस्टम में बार-बार क्रैश होने और सिस्टम में लॉग इन करते समय तकनीकी त्रुटियों की घटना के बारे में लोगों द्वारा की गई शिकायतों पर ध्यान दिया है या नहीं, जिससे कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके।

इस संबंध में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया,

"वीसी की सुनवाई के दौरान उत्पन्न होने वाली तकनीकी गड़बड़ियों को हल करने के लिए, एनआईसी शिकायतों की बारीकी से निगरानी कर रहा है। एनआईसी ने एक वीसी सॉफ्टवेयर विकसित किया है जो ट्रायल चरण में है। एमईआईटीवाई (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) ने स्वदेशी वीसी सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए एक अभ्यास भी किया है। कनेक्टिविटी संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए बीएसएनएल के साथ नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की जाती हैं। साथ ही, ऐसी शिकायतों की निगरानी और तेजी से समाधान के लिए कनेक्टिविटी और बैंडविड्थ से संबंधित मुद्दों के बारे में शिकायतें दर्ज करने के लिए एक पोर्टल विकसित किया गया है।"

अतारांकित प्रश्न और उत्तर पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें:



Next Story