मुख्य सुर्खियां

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
'मुसलमानों को भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की इजाजत न दें' : मप्र हाईकोर्ट ने हिंदू मोर्चा की याचिका पर नोटिस जारी किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने बुधवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक द्वारा पारित सात अप्रैल, 2003 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। इस आदेश में मुसलमानों को भोजशाला परिसर के भीतर नमाज़ अदा करने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस विवेक रूस और जस्टिस अमर नाथ केश्वरवानी की बेंच ने अपने आदेश में कहा,"पक्षों के वकील संयुक्त रूप से प्रस्तुत करते हैं कि समान मुद्दा पहले से ही इस अदालत के समक्ष लंबित डब्ल्यू.पी.नंबर (एस) 6514/2013, 1089/2016 और 28334/2019 में चुनौती के तहत...

स्कूल के दौरान नाली में गिरने से मौत: उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य को मृतक लड़के के माता-पिता को 10 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया
स्कूल के दौरान नाली में गिरने से मौत: उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य को मृतक लड़के के माता-पिता को 10 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने स्कूल के घंटों के दौरान नाले में गिरने से मरने वाले लड़के के माता-पिता को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा,"ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र खुले में शौच करते थे। स्कूल परिसर में शौचालय उपलब्ध होने के बावजूद, शिक्षक ने छात्रों को स्कूल परिसर से बाहर जाने की अनुमति दी। लापरवाही के कारण मृत्यु होने का अनुमान है।"याचिकाकर्ताओं की प्रस्तुतियांयाचिकाकर्ताओं यानी मृतक लड़के के माता-पिता की ओर से...

गुवाहाटी हाईकोर्ट
पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार मौलिक, जबकि पदोन्नति का अधिकार नहींः असम हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया‌ कि पदोन्नति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इस टिप्‍पणी के साथ ही एक स्नातक शिक्षक की याचिका को खारिज कर दिया है, ‌जिसने असम माध्यमिक शिक्षा (प्रांतीयकरण) सेवा नियम, 2003 के नियम 14 (2) के आधार पर दलील दी थी कि उसे प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नत नहीं किया गया।चीफ जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने कृपा सिंधु दास बनाम असम राज्य और अन्य में समन्वय पीठ के एक फैसले पर भरोसा किया और कहा,"पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल के वास्तविक इतिहास का अध्ययन करने के लिए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के गठन की मांग वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल के "वास्तविक इतिहास" का अध्ययन करने के लिए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के गठन की मांग वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को ताजमहल के पीछे "वास्तविक इतिहास" पर शोध करने के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने विवाद उठाया था कि क्या वास्तव में ताजमहल एक मुगल स्ट्रक्चर है। याचिकाकर्ता ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ताजमहल परिसर के अंदर 20 से अधिक कमरों के सीलबंद दरवाजों को खोलने का निर्देश देने की भी मांग की ताकि "ताजमहल के इतिहास" से संबंधित कथित विवाद को समाप्त किया जा सके।जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ...

गुजरात हाईकोर्ट
पुलिस बर्बरता| गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को थानो में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को लागू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पुलिस अत्याचार से निपटने के लिए नाइट विजन के साथ थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और 6 महीने तक उनके रिकॉर्ड बनाए रखने का भी निर्देश दिया।जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस मौना भट्ट की खंडपीठ अंतर-धार्मिक जोड़े से जुड़ी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) पर सुनवाई कर रही थी, जब उसने गुजरात पुलिस को फटकार लगाई और...

केरल हाईकोर्ट
सिलसिलेवार अनुबंधों के बीच मामूली कृत्रिम ब्रेक का इस्तेमाल मातृत्व अधिकारों से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकताः केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सिलसिलेवार अनुबंधों के बीच सर्विस में मामूली कृत्रिम ब्रेक का इस्तेमाल कर्मचारियों को मातृत्व अधिकारों से वंचित करने के लिए एक उपकरण के रूप में नहीं किया जा सकता है।जस्टिस राजा विजयराघवन ने कहा कि जनवरी 2021 के सरकारी आदेश के अनुसार, कर्मचारी को मातृत्व लाभ के लिए पात्र होने के लिए उसकी प्रसव की अपेक्षित तिथि या गर्भपात की तारीख से तुरंत पहले कम से कम 80 दिनों की अवधि के लिए "वास्तव में" काम करना चाहिए और इससे इनकार करने के लिए कृत्रिम ब्रेक एक वैध आधार नहीं...

वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे जारी रखने का आदेश दिया, कोर्ट कमिश्नर को नहीं हटाया जाएगा
वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे जारी रखने का आदेश दिया, कोर्ट कमिश्नर को नहीं हटाया जाएगा

वाराणसी की एक स्थानीय अदालत ने गुरुवार को आदेश दिया कि ज्ञानवापी मस्जिद-काशिविश्वनाथ मंदिर परिसर में सर्वेक्षण कार्य जारी रहेगा और न्यायालय द्वारा पूर्व में नियुक्त कमिश्नर को हटाया नहीं जाएगा। कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा के साथ सर्वे के लिए दो और वकीलों को कमिश्नर नियुक्त किया है और आगे आयोग को 17 मई तक कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि मस्जिद के पूरे परिसर का सर्वेक्षण किया जाए और आगे निर्देश दिया कि जब तक सर्वेक्षण पूरा नहीं हो जाता है, यह जारी...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ईडी जब्ती आदेश पर रोक की अवधि बढ़ाई, शाओमी इंडिया को रॉयल्टी छोड़कर भुगतान के लिए ओवरड्राफ्ट सुविधा प्राप्त करने की अनुमति दी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 29 अप्रैल को जारी आदेश पर रोक लगाते हुए अपने पहले के अंतरिम आदेश को बढ़ा दिया। इस आदेश के द्वारा उसने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के प्रावधानों के तहत मेसर्स शाओमी इंडिया (Xiaomi India) प्राइवेट लिमिटेड से 5551.27 करोड़ रुपये जब्त किए थे। ।जस्टिस एस सुनील दत्त यादव की एकल न्यायाधीश पीठ ने स्पष्ट किया कि इस बीच शाओमी इंडिया को बैंक ओवरड्राफ्ट के माध्यम से रॉयल्टी छोड़कर स्मार्टफोन के निर्माण और बिक्री के लिए आवश्यक...

गुवाहाटी हाईकोर्ट
विभागीय कार्यवाही के अभाव में पेंशन लाभ नहीं रोक सकते, भले ही कर्मचारी नियुक्ति के समय योग्य न हो: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में माध्यमिक शिक्षा विभाग को ऐसे व्यक्ति के पेंशन लाभों को संसाधित करने का निर्देश दिया, जिसे इस आधार पर वंचित कर दिया गया कि उसके पास नियुक्ति के समय आवश्यक योग्यता नहीं थी।जस्टिस अचिंत्य मल्ल बुजोर बरुआ ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान इसकी कोई विभागीय जांच नहीं हुई थी और कदाचार की कार्रवाई 1988 में हुई थी।जस्टिस अचिंत्य मल्ल बुजोर बरुआ ने कहा,"मौजूदा मामले में रिकॉर्ड से पता चलता है कि न तो कोई विभागीय कार्यवाही हुई थी और न ही कदाचार की कार्रवाई का कारण चार साल की...

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों को उनके पदों से हटाने का निर्देश दिया
पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों को उनके पदों से हटाने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने बिहार फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार के सेवानिवृत्त होने के बाद भी काम करना जारी रखने के मामले में बिहार फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों को उनके पद से हटाने का राज्य सरकार को निर्देश दिया है.चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता उमा शंकर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 24 घंटे के भीतर किसी भी पदेन सदस्य को रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त करने का आदेश दिया।पीठ ने कहा,"जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, हम निर्देश...

पटना हाईकोर्ट
बिहार और उड़ीसा पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट और एनआई एक्ट के तहत अंतरिम मुआवजे के आदेश को 'सार्वजनिक मांग' के रूप में लागू किया जा सकता है: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (एनआई एक्ट) के तहत अंतरिम मुआवजे के भुगतान का आदेश बिहार और उड़ीसा पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट, 1914 (रिकवरी एक्ट) तहत 'पब्लिक डिमांड' के रूप में लागू किया जा सकता है।चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने कहा,"एनआई अधिनियम की धारा 143ए के तहत आदेशित अंतरिम मुआवजा सीआरपीसी की धारा 421 के तहत जुर्माना के रूप में वसूली योग्य है, जो कि स्पष्ट रूप से 'सार्वजनिक मांग' की परिभाषा के अंतर्गत आता है।...

दिल्ली हाईकोर्ट
भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी मध्यस्थ कार्यवाही पर लागू नहीं होती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 65-बी मध्यस्थ कार्यवाही पर लागू नहीं होती है।जस्टिस विभु बाखरू की एकल पीठ ने कहा कि हालांकि साक्ष्य अधिनियम के सिद्धांत आमतौर पर लागू होते हैं, सच पूछिये तो, अधिनियम के विशिष्ट प्रावधान लागू नहीं होते हैं।कोर्ट ने आगे कहा कि धारा 65-बी की आवश्यकता का पालन न करने पर आपत्ति जल्द से जल्द उठाई जाएगी। महत्वपूर्ण समय पर इस तरह की आपत्ति लेने में विफलता दूसरे पक्ष को बाद के चरण में ऐसी आपत्ति लेने से वंचित करती है।तथ्यपार्टियों ने...

कलकत्ता हाईकोर्ट
मध्यस्थ कार्यवाही से किसी पक्ष का नाम हटाने से इनकार करना रिट क्षेत्राधिकार को लागू करने के लिए दुर्लभ मामला नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि मध्यस्थ न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ रिट याचिका को बनाए रखने योग्य नहीं है, जो मध्यस्थता से पक्षकार का नाम हटाने से इनकार करती है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा की एकल पीठ ने माना कि मध्यस्थता मामले में रिट क्षेत्राधिकार का आह्वान करने के लिए पीड़ित पक्ष को यह दिखाना होगा कि यह 'दुर्लभतम मामलों में से दुर्लभ' है और न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है। ट्रिब्यूनल आदेश में, जिसमें उसने किसी पक्ष का नाम हटाने से इनकार कर दिया, दुर्लभतम मामलों में से दुर्लभ मामलों के रूब्रिक के साथ...

मद्रास हाईकोर्ट
किसी दोषी कैदी को समय से पहले रिहा होने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने दोहराया है कि एक दोषी कैदी को समय से पहले रिहा होने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं है।अदालत आजीवन दोषी हरिहरन की मां द्वारा दायर एक याचिका पर विचार कर रही थी। इसमें सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें उसकी समय से पहले रिहाई को खारिज कर दिया गया था।जस्टिस पी.एन. प्रकाश और जस्टिस ए.ए. नक्किरन की पीठ ने कहा कि एक बार सामग्री मौजूद होने के बाद, राज्यपाल तथ्यों की पर्याप्तता का एकमात्र न्यायाधीश होता है और तथ्यों की इतनी पर्याप्तता अनुच्छेद 226 के...

गुजरात हाईकोर्ट
ई-वे बिल बनाते समय ओडीसी वाहन प्रकार के चयन में वास्तविक गलती: गुजरात हाईकोर्ट ने डिटेंशन आदेश रद्द किया

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने डिटेंशन आदेश को रद्द कर दिया है क्योंकि ई-वे बिल बनाते समय ओडीसी वाहन प्रकार के चयन में एक वास्तविक गलती थी।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस निशा एम ठाकोर की खंडपीठ ने कहा कि माल जीएसटी पोर्टल से उत्पन्न ई-वे बिल सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ ट्रांजिट में था। माल को एक ट्रक से ले जाया गया जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर भी सही था। इस मामले में एकमात्र गलती ई-वे बिल बनाते समय गलत ओडीसी वाहन प्रकार का चयन था।रिट आवेदक/निर्धारिती ने राज्य कर अधिकारी - 2, मोबाइल...

न्याय का मज़ाक़: साढ़े नौ साल जेल में रहने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने महिला को ज़मानत दी
"न्याय का मज़ाक़": साढ़े नौ साल जेल में रहने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने महिला को ज़मानत दी

दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में नौ साल से अधिक समय से जेल में बंद एक महिला को इस आधार पर जमानत दी कि मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट केवल सात साल की सजा का आदेश दे सकता है, जिसे वह पहले ही जेल में बिता चुकी है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमानी मल्होत्रा ​​ने यह टिप्पणी की,"निश्चित रूप से आवेदक ने सात साल से अधिक जेल में बिताया है जो कि अधिकतम सजा है जो उसे मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) द्वारा दी जा सकती है। कहने की जरूरत नहीं है कि कैद की अवधि ने न केवल न्याय का मजाक उड़ाया है बल्कि हमारी...

[औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7B] सरकार राष्ट्रीय महत्व के मामलों को नेशनल ट्रिब्यूनल को सौंपने के लिए बाध्य नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
[औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7B] सरकार राष्ट्रीय महत्व के मामलों को नेशनल ट्रिब्यूनल को सौंपने के लिए बाध्य नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने कहा कि केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वह राष्ट्रीय महत्व के मामले को निर्णय के लिए राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण के पास भेजे, भले ही वह औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 7-बी के तहत उल्लिखित जुड़वां शर्तों को पूरा करता हो।चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ ने कहा,"केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि विवादों को निर्णय के लिए राष्ट्रीय न्यायाधिकरण के पास भेजे।"क्या है पूरा मामला?वर्तमान विवाद की उत्पत्ति 14...

डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा एडवांस सब्सक्रिप्शन मनी टैक्स दायरे में नहीं आती: चेन्नई आईटीएटी
डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा एडवांस सब्सक्रिप्शन मनी टैक्स दायरे में नहीं आती: चेन्नई आईटीएटी

आईटीएटी की चेन्नई बेंच ने फैसला सुनाया कि डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा एडवांस सब्सक्रिप्शन मनी कर (Tax) योग्य नहीं है।वी दुर्गा राव (न्यायिक सदस्य) और मनोज कुमार अग्रवाल (लेखाकार सदस्य) की खंडपीठ ने माना कि डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा एडवांस सब्सक्रिप्शन मनी केवल तभी कर योग्य होती है जब उक्त मनी उनके द्वारा अर्जित की जाती है। डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा क्लाइंट्स को प्रदान किया जाता है।निर्धारिती (Assessee) मेसर्स सन डायरेक्ट टीवी प्राइवेट लिमिटेड एक 'डायरेक्ट टू होम' (डीटीएच) सैटेलाइट प्लेटफॉर्म ऑपरेटर है और...